Soil Pollution Essay in Hindi – मृदा प्रदूषण पर निबंध

soil pollution essay in hindi

 

मृदा प्रदूषण पर निबंध हिंदी में – Essay on Soil Pollution in Hindi

Essay on Soil Pollution in Hindi – इस लेख में हम  भूमि प्रदूषण के प्रमुख कारण, प्रभाव, रोकने के उपाय पर विस्तार पूर्वक चर्चा करेंगे

 

Soil Pollution Essay in Hindi – प्रदूषण सम्पूर्ण प्राणी जगत के लिए जानलेवा है यह आज का मानव अच्छे से समझ चूका है। प्रदूषण के कई प्रकार हैं – वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और भूमि प्रदूषण। इस लेख में हम भूमि प्रदूषण के बारे में जानकारी ले कर आए हैं। आशा है यह लेख आपके लिए कई मायनों में सहायक सिद्ध होगा।

 

संकेत बिंदु – (Content)

 

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प्रस्तावना – Preface

जल और वायु की तरह मिट्टी भी हमारी मूल आवश्यकता है। वनस्पति, अनाज और पेड़ पौधों की जननी मिट्टी ही है। साफ मिट्टी पेड़ पौधों, पशुओं और मनुष्यों के विकास के लिए बहुत ही जरूरी है। भूमि में पाए जाने वाले तत्वों में से किसी का भी असंतुलित होना ही भूमि प्रदुषण है।

दूषित भूमि फसलों और जीवों पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। ठोस कचरे के कारण भूमि प्रदूषण होता है। अपशिष्ट उत्पादों की बढ़ती मात्रा और उचित अपशिष्ट निपटान विकल्पों की कमी के कारण समस्या दिन पर दिन बढ़ रही है। कारखानों और घरों से अपशिष्ट उत्पादों को खुले स्थानों में निपटाया जाता है जिससे भूमि प्रदूषण होता है।

भूमि प्रदूषण विभिन्न मानवीय गतिविधियों के कारण और प्राकृतिक कारकों के कारण भी होता है। भूमि प्रदूषण के कुछ कारणों में कीटनाशकों का उपयोग, औद्योगिक और कृषि अपशिष्टों के निपटान के लिए विकल्पों की कमी, वनों की कटाई, बढ़ते शहरीकरण, अम्लीय वर्षा और खनन शामिल हैं। ये सभी कारक कृषि गतिविधियों में बाधा डालते हैं और जानवरों और मनुष्यों में विभिन्न बीमारियों का कारण भी हैं।

 

भूमि प्रदूषण का अर्थ

भूमि-प्रदूषण को परिभाषित करते हुए हम कह सकते हैं कि – “भूमि के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में ऐसा कोई अवांछित परिवर्तन जिसका प्रभाव मनुष्य एवं अन्य जीवों पर पड़े या भूमि की प्राकृतिक गुणवत्ता तथा उपयोगिता नष्ट हो भूमि-प्रदूषण कहलाता है।”

पृथ्वी के धरातल के एक-चौथाई भाग पर भूमि है, किंतु उसमें मानव उपयोग की भूमि केवल 280 लाख वर्ग मील है। इस भूमि का समुचित एवं सही उपयोग आज संपूर्ण विश्व का उत्तरदायित्व है, किंतु विश्व में हो रही जनसंख्या वृद्धि से भूमि उपयोग में विविधता एवं सघनता आई है।

फलस्वरूप उसका अनुपयुक्त तरीके से उपयोग किया जा रहा है। परिणामस्वरूप ‘भूमि-प्रदूषण’ की समस्या का जन्म हुआ है जो आज विश्व के अनेक भागों में एक प्रमुख समस्या बन गई है।
‘भूमि’अथवा ‘भू’एक व्यापक शब्द है, जिसमें पृथ्वी का संपूर्ण धरातल समाहित है, किंतु मूल रूप से भूमि की ऊपरी परत, जिस पर कृषि की जाती है एवं मानव जीविका-उपार्जन की विविध क्रियाएँ करता है, वह विशेष महत्व की है।
इस परत अथवा भूमि का निर्माण विभिन्न प्रकार की शैलों से होता है जिनका क्षरण मृदा को जन्म देता है। जिसमें विभिन्न कार्बनिक एवं अकार्बनिक यौगिकों का सम्मिश्रण होता है। वहीं से भूमि-प्रदूषण का प्रारंभ होता है।

 

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भूमि प्रदूषण के कारण – Due to land pollution

भूमि प्रदूषण सम्पूर्ण प्राणी जगत के विकास में बाधा पहुँचता है क्योंकि भूमि ही प्राणी जगत के जीवन यापन के लिए भोजन व् अन्य आवश्यक वस्तुओं को उत्पन्न करने में सक्षम है। परन्तु मानव अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए अपने भविष्य से भी खिलवाड़ करता हुआ भूमि को प्रदूषित करता जा रहा है। भूमि प्रदूषण विभिन्न कारणों से होता है –
(i) घर, अस्पताल, स्कूल और बाजार में उपयोग की जाने वाली सामग्री में प्लास्टिक कंटेनर, डिब्बे, प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि पर उत्पन्न ठोस अपशिष्ट की श्रेणी में आते हैं। इनमें से कुछ बायोडिग्रेडेबल हैं और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल हैं और निपटान के लिए कठिन हैं। यह गैर-बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट है जो बड़े भूमि प्रदूषण का कारण बनता है।
(ii) मानव की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने के लिए जंगलों को तीव्र गति से काटा जा रहा है। मिट्टी के लिए पेड़ आवश्यक हैं क्योंकि वे विभिन्न आवश्यक पोषक तत्वों को बनाए रखने में मदद करते हैं। खनन, शहरीकरण और अन्य कारणों से पेड़ों को काटना भूमि प्रदूषण को बढ़ावा देने वाले कारक हैं।
(iii) रासायनिक अपशिष्ट का निपटान मुश्किल है। कीटनाशकों, कीटनाशकों और उर्वरकों से प्राप्त तरल और ठोस अपशिष्ट दोनों को या तो लैंडफिल या अन्य स्थानों पर फेंक दिया जाता है। यह मिट्टी को खराब करता है और भूमि प्रदूषण का एक और प्रकार बनाता है।
(iv) फसलों की अधिक उपज सुनिश्चित करने के लिए किसानों द्वारा इन दिनों कई उच्च अंत कृषि तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन तकनीकों के अधिक उपयोग जैसे कि कीटनाशकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी का क्षरण करता है। ऐसी जमीन में उगाए गए फल और सब्जियाँ भी स्वस्थ नहीं मानी जाती हैं। इसे एक प्रकार का भूमि प्रदूषण माना जाता है।
(v) घरों से फेंके जाने वाले टूटे काँच, प्लास्टिक, फर्नीचर और पॉलिथीन आदि से भी भूमि प्रदूषण होता है।
(vi) उघोगो से निकलने वाले रसायनों से भी भूमि प्रदूषण होती है क्योंकि भारी धातु मिट्टी पर जमा हो जाती है और भूमि को दूषित करती है।
(vii) भूमि से खनिज तेलों को निकालने के लिए खुदाई के दौरान तेल कई बार जमीन पर गिर जाता है और मिट्टी को दूषित करता है।
(viii) बारिश के दौरान हवा में मौजुद दुषित पदार्थ जमीन पर आ जाते है और भूमि को दुषित करते है।

 

भूमि प्रदूषण के स्त्रोत –
भूमि प्रदूषण विभिन्न प्रकार के अनुपयोगी अपशिष्ट पदार्थों के भूमि में जमा होने का परिणाम है। यह अपशिष्ट पदार्थ, घरेलू, सार्वजनिक, औद्योगिक, खनिज खनन एवं कृषि अपशिष्ट के रूप में होता है। इसी के आधार पर भूमि प्रदूषण के स्त्रोतों की निम्न श्रेणियाँ की जा सकती हैं –
(i) घरेलू अपशिष्ट
(ii) औद्योगिक एवं खनन अपशिष्ट
(iii) नगरपालिका अपशिष्ट
(iv) कृषि अपशिष्ट
(i) घरेलू अपशिष्ट –
भूमि प्रदूषण का एक बड़ा भाग घरेलू अपशिष्ट की देन है। घरों में प्रतिदिन सफाई करने के पश्चात् गंदगी निकलती है। इसमें जहाँ एक ओर धूल-मिट्टी होती है, वहीं दूसरी ओर कागज, कपड़ा, प्लास्टिक, लकड़ी, धातु के टुकड़े आदि भी होते हैं।
इसके साथ ही सब्जियों के बचे भाग, फलों के छिलके, चाय की पत्तियाँ, अन्य सड़े-गले पदार्थ, सूखे फूल-पत्तियाँ, खराब हुए खाद्य पदार्थ आदि भी सम्मिलित होते हैं। ये सभी पदार्थ घरों से सफाई के समय एकत्र कर किसी स्थान पर डाल दिया जाता है। विकसित देशों में इस कूड़ा-करकट को ढकने एवं निस्तारण की व्यवस्था होती है।
परंतु भारत या अन्य विकासशील देशों में अधिकांशत: इस प्रकार की व्यवस्था का अभाव होने से, यह अपशिष्ट पदार्थ सड़ता रहता है, इसमें विभिन्न जीवाणु उत्पन्न होते रहते हैं जो प्रदूषण और अंत में रोग का कारण बनते हैं।

(ii) औद्योगिक एवं खनन अपशिष्ट –
औद्योगिक संस्थानों से बहुत अधिक मात्रा में कूड़ा-करकट एवं अपशिष्ट पदार्थ निकलता है। यह कचरा प्रत्येक उद्योग में चाहे वह धातु उद्योग हो या रासायनिक उद्योग हो सभी से निकाला जाता है और उद्योग के निकट खुले में छोड़ दिया जाता है। इसमें अनेक गैसें एवं रासायनिक तत्व न केवल वायु मण्डल अपितु भूमि को भी प्रदूषित करते हैं।
अनेक उद्योगों से बहुत अधिक मात्रा में राख भी निकलती है। अनेक विषैले, अम्लीय एवं क्षारीय पदार्थ भूमि को अनुपयोगी कर देते हैं। कभी-कभी ये पदार्थ उद्योगों के निकट ही दबा दिए जाते हैं, जो भूमि प्रदूषण के रूप में भूमि को अनुपयोगी बना देते हैं।
(iii) नगरपालिका अपशिष्ट –
नगरपालिका अपशिष्ट से तात्पर्य सार्वजनिक रूप से एकत्र होने वाली गंदगी से है। इसमें घरेलू अपशिष्ट तो सम्मिलित हैं ही जिन्हें सार्वजनिक रूप से एकत्र किया जाता है, साथ में मल-मूत्र का एकत्र हो जाना प्रमुख है। इसके अतिरिक्त विभिन्न संस्थानों, बाजारों, सड़कों से एकत्रित गंदगी, मृत जानवरों के अवशेष, मकानों आदि के तोड़ने से निकले पदार्थ आदि भी इसमें शामिल हैं।
वास्तव में शहर या कस्बे की संपूर्ण गंदगी नगरपालिका अपशिष्ट की श्रेणी में ही आती है। यह नगरपालिका अपशिष्ट भूमि प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।
(iv) कृषि अपशिष्ट –
कृषि अपशिष्ट में कृषि के उपरांत उसका बचा भूसा, डंठल, घास-फूस, पत्तियाँ आदि एक स्थान से एकत्र कर दिया जाता है या फैला रहता है। इस पर पानी गिरने से यह सड़ने लगता है तथा जैविक क्रिया होने से यह प्रदूषण का कारण बन जाता है। वैसे अन्य स्त्रोतों की तुलना में यह अधिक गंभीर समस्या नहीं है क्योंकि अब अधिकांश कृषि अपशिष्टों को किसी न किसी रूप में उपयोग में ले लिया जाता है।

हमारे देश में नगरों में मिश्रित पदार्थ, राख एवं अग्नि मिट्टी तथा कार्बन के रूप में लगभग 90 प्रतिशत कूड़ा-करकट होता है। जबकि विकसित देशों में इसकी मात्रा भिन्न है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 42 प्रतिशत कागज एवं उससे संबंधित वस्तुएँ, 24 प्रतिशत धातु, ग्लास-चीनी मिट्टी के टुकड़े एवं राख, 12 प्रतिशत अपशिष्ट खाद्य एवं शेष अन्य वस्तुएँ होती हैं। वास्तविकता यह है कि अपशिष्ट की मात्रा नगरों के आकार एवं विकास तथा विस्तार के साथ अधिक होती जाती है।

 

भूमि प्रदूषण के परिणाम –Land pollution results
वर्तमान में सबसे बड़ी चिंता का कारण बढ़ता हुआ प्रदूषण है। यह पर्यावरण के साथ-साथ जीवित प्राणियों को भी अपूरणीय क्षति पहुँचा रहा है। सभी प्रकार के प्रदूषण प्राणी जगत के लिए बहुत अधिक घातक हैं। इन प्रदूषणों के परिणाम बहुत अधिक नुकसानदायक होते हैं। भूमि प्रदूषण के विभिन्न हानिकारक परिणाम निम्नानुसार हैं –
(i) कुछ दिनों के लिए एक क्षेत्र में जमा अपशिष्ट उत्पाद दूषित हो जाते हैं और दुर्गंध पैदा करते हैं। ऐसे क्षेत्रों से गुजरना इस वजह से बेहद मुश्किल हो सकता है।  भूमि प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों से लोगों को डर लगता है। आस-पास के डंपिंग ग्राउंड वाले क्षेत्रों में रहना असंभव होता है। इसके अलावा, इन क्षेत्रों से जो दुर्गंध-युक्त गंध आती है वह लगातार एक बड़ा नुक्सान है।
(ii) कचरा डंपिंग ग्राउंड के पास स्थित इलाकों में जमीन की कीमत तुलनात्मक रूप से कम है, क्योंकि इस क्षेत्र को रहने लायक नहीं माना जाता है। कम दरों के बावजूद, लोग यहां संपत्ति किराए पर लेना या खरीदना पसंद नहीं करते हैं।
(iii) विषाक्त पदार्थ जो भूमि को दूषित करते हैं, वे मनुष्यों के श्वसन तंत्र के साथ-साथ जानवरों को भी बाधित कर सकते हैं। यह विभिन्न श्वसन रोगों का कारण भी है जो मानव जाति के लिए घातक साबित हो रहे हैं।
(iv) लैंडफिल को अक्सर अपशिष्ट उत्पादों से छुटकारा पाने और भूमि प्रदूषण को कम करने के लिए जलाया जाता है। हालाँकि, इससे वायु प्रदूषण होता है जो पर्यावरण और जीवन के लिए उतना ही बुरा है।
(v) भूमि प्रदूषण के कारण लोग अपशिष्ट पदार्थों के सीधे संपर्क में आते हैं, जिसके कारण त्वचा की एलर्जी और अन्य त्वचा की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
(vi) भूमि प्रदूषण भी विभिन्न प्रकार के कैंसर का एक कारण है। विषाक्त पदार्थों से भरी हुई भूमि मच्छरों, मक्खियों, चूहों, कृन्तकों और ऐसे अन्य प्राणियों के लिए एक प्रजनन भूमि है। इन छोटे जीवों के कारण संचरित रोग सभी को ज्ञात हैं। विभिन्न प्रकार के बुखार और बीमारियाँ इनकी वजह से बढ़ रही हैं।
(vii) कीटनाशकों और अन्य रसायनों के अधिक उपयोग के कारण होने वाला भूमि प्रदूषण कृषि भूमि को दूषित करता है।
(viii) मिट्टी पर उगाई गई सब्जियाँ और फल जो दूषित हैं, विभिन्न प्रकार के रोगों का कारण बनते हैं।
(ix) भूमि प्रदूषण के कारण भूमि की उपजाऊ शक्ति खत्म होती जा रही है, जिसकी वजह से फसले भी अच्छी नहीं होती। जिसके चलते हमें अच्छा भोजन नहीं मिलता।
(x) लोगों ने फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए उनमें टीके लगाने शुरू कर दिए हैं, जो कि मानव शरीर को बहुत नुकसान पहुँचाते हैं।
(xi) भूमि यह हमारे खान एक मुख्य साधन होता हैं। मनुष्य ज्यादातर तो खेती पर ही निर्भर करता हैं। भूमि दूषित होने के कारण मानवी स्वास्थ्य, फसलों और पेड़-पौधों पर बहुत बुरा असर पड़ता हैं।

भूमि प्रदूषण को रोकने के उपाय –
भूमि प्रदूषण दिन-पर-दिन भयंकर रूप धारण करता जा रहा है। यदि समय पर भूमि प्रदूषण पर रोक नहीं लगाई गई तो यह विकराल रूप धारण कर लेगा और फिर इससे छुटकारा पाना असंभव हो जाएगा। भूमि प्रदूषण हर समय बढ़ रहा है और इसलिए इसके हानिकारक परिणाम हैं। जबकि सरकार और अन्य संगठन इस पर नियंत्रण करने के लिए अपने स्तर पर काम कर रहे हैं, परन्तु जब तक सभी अपना सम्पूर्ण योगदान नहीं देते तब तक किसी भी प्रकार के प्रदूषण पर नियंत्रण कर पाना केवल एक स्वप्न मात्र रह जाएगा। हम अपने दैनिक जीवन में कुछ छोटे बदलाव करके भी इसे कम करने की दिशा में योगदान कर सकते हैं। भूमि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए हम निम्नलिखित तरीकों को अपना सकते हैं –
(i) जहां भी संभव हो, गैर-बायोडिग्रेडेबल उत्पादों के बजाय बायोडिग्रेडेबल उत्पादों का उपयोग करें। ऐसा इसलिए है क्योंकि बायोडिग्रेडेबल कचरे का निपटान करना आसान है।
(ii) भोजन है जो कीटनाशकों के उपयोग के बिना उगाया जाता है। इस तरह के खाद्य उत्पादों को कीटनाशक या उर्वरक मुक्त चिह्नित किया जाता है ताकि आप दूसरों से आसानी से अलग कर सकें। यह किसानों को कीटनाशकों के उपयोग से बचने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

(iii) यदि आपके पास जगह है तो घर पर जैविक सब्जियां और फल उगाने के लिए यह एक अच्छा विचार है।
(iv) इन दिनों पैकेजिंग पर बहुत सारे कागज, रिबन और अन्य सामग्री बर्बाद हो जाती है। यह उन उत्पादों के लिए जाने का सुझाव दिया गया है जिनकी पैकेजिंग बहुत कम है।
(v) पॉली बैग के उपयोग से बचें। सरकार ने कई राज्यों में इन बैगों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है, हालांकि लोग अभी भी इनका उपयोग करते हैं। पॉली बैग का निपटान करना मुश्किल है और भूमि प्रदूषण में बहुत योगदान देता है।
(vi) यह भी सुझाव दिया जाता है कि प्लास्टिक के बर्तनों और अन्य प्लास्टिक वस्तुओं का उपयोग न करें। ऐसा इसलिए है क्योंकि किसी भी रूप में प्लास्टिक का निपटान करना मुश्किल है।
(vii) जब आप खरीदारी के लिए जाएँ तो कागज या कपड़े की थैलियों का उपयोग करें क्योंकि ये पुन: प्रयोज्य होते हैं।
(viii) दो अलग-अलग डस्टबिन में गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग निपटाने से कचरा अलग हो जाता है।
(ix) भारत सरकार ने पहले ही इस अभियान को शुरू कर दिया है और अपशिष्ट उत्पादों के अलगाव के लिए हरे और नीले डस्टबिन वितरित किए हैं। देश भर के विभिन्न शहरों में विभिन्न क्षेत्रों में कई हरे और नीले डस्टबिन लगाए गए हैं।
(x) कागज बर्बाद मत करो, इसके उपयोग को सीमित करें। जहाँ भी संभव हो इसका उपयोग करने से बचें। कागज बनाने के लिए प्रत्येक वर्ष कई पेड़ काटे जाते हैं। पेड़ों का कटना भी भूमि प्रदूषण का एक कारण है। डिजिटल जाना एक अच्छा विचार है।
(xi) पेपर वाइप्स या टिश्यू के बजाय कपड़े या पुन: उपयोग योग्य डस्टर और झाड़ू का उपयोग करें।
(xii) भूमि प्रदूषण बहुत सी हानियाँ पहुँचाता है, अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ साझा करके इन विचारों के बारे में जागरूकता फैलाएँ।
(xiii) घरों का कचरा बाहर खुले में नहीं फेंकना चाहिए, उसके लिए सरकार द्वारा कूड़ा के लिए गाड़ी भेजी जानी चाहिए।
(xiv) खनिजों को भी सावधानी से निकालना चाहिए और भविष्य के लिए भी बचाकर रखना होगा।
(xv) हमें वायु को भी कम दुषित करना चाहिए ताकि अमलीय वर्षा न हो।
(xvi) हमें ऐसी चीजों का इस्तमाल करना चाहिए जिन्हें हम दोबारा से प्रयोग में ला सके। हमें रिसयकल की आदत अपनानी चाहिए।

 

उपसंहार –

हमारी मिट्टी हमारी मूल जरूरत है। अगर भूमि ऐसे ही प्रदूषित होती रहेगी तो हम सब का जीवन असंतुलित हो जाएगा और एक दिन ऐसा भी आएगा जब हमारे पास खाने के लिए कुछ भी नहीं होगा। इसलिए हम सभी लोगों को भूमि प्रदूषण को बचाने के लिए मिल जुलकर प्रयास करना चाहिए।

इस तथ्य पर कोई संदेह नहीं है कि हमारे जीवन को और अधिक आरामदायक बनाने के प्रयास में हम पर्यावरण को बर्बाद कर रहे हैं। स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने के लिए हमें मिट्टी प्रदूषण को कम करने की दिशा में काम करना चाहिए।
भूमि प्रदूषण कई बीमारियों को जन्म दे रहा है और स्वस्थ जीवन जीना मुश्किल बना रहा है। भूमि प्रदूषण, प्रदूषण के अन्य विभिन्न रूपों की तरह, पर्यावरण के लिए खतरा है। हम अक्सर शिकायत करते हैं कि सरकार भूमि प्रदूषण को कम करने के लिए उचित उपाय नहीं कर रही है।

लेकिन सरकार गली मुहल्लों में घूम-घूम कर भूमि प्रदूषण को नियंत्रित नहीं कर सकती। हम सभी को चाहिए कि हम सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों का ईमानदारी से पालन करें। यह उच्च समय है जब हमें व्यक्तिगत स्तर पर जो भी प्रयास किया जा सकता है,
उन्हें करने से पीछे नहीं हटाना चाहिए। प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए हमें अपने कर्तव्य को समझना चाहिए।

 

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