स्टार्टअप इंडिया पर निबंध

 

Hindi Essay Writing – स्टार्टअप इंडिया (Start-Up India)

 

स्टार्टअप इंडिया पर निबंध – इस लेख हम स्टार्टअप इंडिया क्या है? स्टार्टअप इंडिया की विशेषताएं, अर्थव्यवस्था में स्टार्टअप की भूमिका, चुनौतियां ईत्यादि के बारे में जानेगे |


 

स्टार्टअप इंडिया

 

भारत युवाओं का देश है। यहां की 70% आबादी युवा है। युवा में जोश होता है, उत्साह होता है। किसी काम को करने का जुनून होता है। इसीलिए स्टार्टअप इंडिया भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी से विकास करने में महत्वपूर्ण साबित होगी । इसी उद्देश्य के साथ साल 16 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत में स्टार्टअप इंडिया योजना का शुभारंभ किया , जिसका उद्देश्य युवाओं को सफल उद्यमी बनने के लिए प्रेरित करना था।

 

 

स्टार्टअप इंडिया

स्टार्टअप इंडिया भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य देश में स्टार्टअप्स और नये विचारों के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है । जिससे देश का आर्थिक विकास हो एवं बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न हों। स्टार्टअप एक इकाई है जो प्रौद्योगिकी या बौद्धिक सम्पदा से प्रेरित नये उत्पादों या सेवाओं के नवाचार, विकास, विस्तारण या व्यवसायीकरण की दिशा में काम करती है।
 

 

स्टार्टअप इंडिया की विशेषताएं

  • स्टार्टअप – स्टार्टअप का शाब्दिक अर्थ है किसी व्यवसाय व शुरुआती चरण। भारत में कंपनी अधिनियम 2013 के तहत पंजीकृत कंपनियां जो 10 साल से भी कम समय से अस्तित्व में है और जिनका वार्षिक टर्नओवर 10 करोड़ से भी कम है, उन्हें स्टार्टअप की श्रेणी में रखा जाता है । फिलहाल दुनिया भर में 150 मिलियन स्टार्टअप मौजूद है और इतनी ही संख्या में हर वर्ष नए स्टार्टअप उभर कर सामने आ रहे हैं । 
  • साल 2021-22 में तकरीबन 14000 से अधिक स्टार्टर रजिस्टर्ड किए गए हैं । जबकि यूनिकार्न्स की संख्या 83 हैं। यूनिकार्न्स से तात्पर्य उन स्टार्टअप से है जिनका वार्षिक टर्नओवर 140 करोड़ के आसपास होता है। इन यूनिकार्न्स के आधार पर भारत यूनिकॉर्न हब में पूरी दुनिया में, अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर आता है। भारत का बेंगलुरु, पूरी दुनिया में स्टार्टअप के नए आयाम स्थापित कर रहा है। भारत में अधिकांश यूनिकॉर्न सेवा क्षेत्र में कार्यरत है । दिल्ली-एनसीआर और मुंबई ऐसे क्षेत्र हैं जहां बड़ी संख्या में स्टार्टअप संचालित है।
  • स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत रजिस्टर्ड कंपनियों को शुरुआती 3 साल तक उनके मुनाफे पर इनकम टैक्स से छूट दी जाएगी।
  • पेटेंट पंजीकरण में इन उद्यमों को पंजीकरण शुल्क में 80% छूट दी जाएगी।
  • शुरू के 3 साल का स्टार्टअप में लेबर, पर्यावरण नियमों के पालन आदि की जांच नहीं होगी।

 

 

भारत की अर्थव्यवस्था में स्टार्टअप की भूमिका

  • नई नौकरियों का सृजन –नए स्टार्टअप्स के आने से कई उद्योग स्थापित होंगे जिनसे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा और देश में बेरोजगारी की समस्या में कमी आएगी।
  • ग्रामीण क्षेत्र में लघु उद्योगों को बढ़ावा–  सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र के उन युवाओं को लाभ मिलेगा, जो घरों से ही लघु कुटीर उद्योग संचालित करना चाहते हैं। उन्हें  अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए बिना गारंटी के लोन मिल पाएगा और अपने उत्पादों को उचित मूल्य पर बाजार में बेच पाएंगे।
  • बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों का उत्पादन – जब बाजार में कई सारी कंपनियां अनेक उत्पाद लेकर आएंगे तो इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी । जिससे उपभोक्ताओं को उत्तम गुणवत्ता के उत्पाद कम मूल्य पर उपलब्ध हो पाएंगे। फलस्वरुप लोगों का जीवन स्तर बढ़ेगा, बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों के सेवन से उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा । 
  • विदेशी आय की प्राप्ति – जब भारत में उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और हस्त निर्मित वस्तुओं को ऑनलाइन बाजार में भेजा जाएगा तो इससे भारत को विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होगी और सरकार की आय बढ़ेगी । इससे ना केवल आर्थिक पक्ष मजबूत होगा, अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्टार्टअप की दुनिया में एक अलग पहचान बनेगी, जो हमारी अर्थव्यवस्था को सुधारने में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
  • रचनात्मकता का विकास –  स्टार्टअप इंडिया के तहत आने वाली कई कंपनियां तकनीक के सहारे नए-नए आविष्कार कर रही है, जिससे रचनात्मकता का विकास होगा। कम कीमत पर अच्छे उत्पाद बनाने और उन्हें बेचने में यह योजना लाभकारी साबित होगी। 

 

 

भारत में स्टार्टअप के समक्ष चुनौतियां

  • सफलता की दर बहुत कम होना – आकड़ों के अनुसार भारत में स्टार्टअप्स की सफलता की दर 0.10% है। दस में से एक स्टार्टअप ही सफल हो पाता है बाकी सभी स्टार्टअप बंद हो जाते हैं। 
  • युवाओं में उद्यमशीलता की कमी – भारत में अधिकांश युवा सरकारी नौकरी प्राप्त करना चाहते हैं । इस वजह से उनमें उद्यमशीलता की कमी है। स्टार्टअप्स को शुरू करने के लिए एक कुशल नेतृत्व की आवश्यकता होती है और साथ ही कुशल कामगारों की। लेकिन भारत के युवाओं में इन दोनों चीजों की कमी है इस वजह से स्टार्टअप्स सफल नहीं हो पा रहे हैं।
  • वित्त की उपलब्धता ना होना – किसी भी स्टार्टअप के लिए आधार होता है आर्थिक रूप से मजबूत होना।  स्टार्टअप्स को ऋण उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू तो की हैं किंतु सरकारी दांवपेंच ने इस प्रक्रिया को बहुत जटिल बना दिया है। 
  • साइबर सुरक्षा का मुद्दा – सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े कई स्टार्टअप्स के सामने सबसे बड़ी समस्या है साइबर अटैक से बचना। जिस तेजी के साथ हम तकनीक के साथ हाथ मिला रहे हैं, व्यवसाय को बढ़ा रहे हैं उतनी ही तेजी के साथ इस क्षेत्र में भी असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही है। जिसका खामियाजा नए स्टार्टअप्स को भुगतना पड़ रहा है।
  • कोविड की चुनौतियां – कोविड  ऐसा दौर था जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।  इसने भारत की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया। कई स्टार्टअप्स जो  कोविड आने के पहले शुरू हुए थे, उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा और कई को लाखों करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ। 

 

 

उपसंहार –

 स्टार्टअप इंडिया सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं में से एक है जिसने स्वर्णिम भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस योजना के माध्यम से सरकार की यह कोशिश है कि कोविड-19 के दौरान अर्थव्यवस्था को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई की जा सके। किसी योजना के माध्यम से सरकार का लक्ष्य है युवाओं को इतना कुशल बनाना कि वह नौकरी पाने वाले नहीं देने वाले बने। जिससे देश में बेरोजगारों की संख्या में कमी हो। साथ ही साथ नए स्टार्टअप्स में निवेश करने विदेशी कंपनियां भी आगे आए। सरकार की यह योजना बहुमुखी है। स्टार्टअप इंडिया हर क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने की दिशा में प्रतिदिन नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

 आज जरूरत है स्टार्टअप को विभिन्न प्रयासों के माध्यम से प्रोत्साहित करने की। आज व्यवसायिक शिक्षा को व्यवहार में उतारने की जरूरत है । जिससे युवाओं में उद्यमशीलता का विकास हो। वे इसकी अहमियत को समझें और अवसरों का लाभ उठाएं। सरकार को आवश्यकता है कि स्टार्टअप से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का जमीनी स्तर पर प्रसार हो । सरकारी निजी बैंकों का सशक्तीकरण हो। जिससे ऋण प्राप्त करने में आसानी हो। हर ग्रामीण शहरी क्षेत्र के युवा, अशिक्षित महिला, पुरुष को इस योजना की बारीकियों के बारे में जानकारी दी जाए ताकि वे भविष्य में रोजगार का निर्माण कर सकें।