Hindi Essay Writing – आधुनिक संचार क्रांति (Modern Communication Revolution)

 
आधुनिक संचार क्रांति के बारे में जानने से पहले हमको ये जानना आवश्यक है कि हम आधुनिक संचार क्रांति से क्या समझते हैं। “आधुनिक संचार क्रांति” से तात्पर्य संचार के क्षेत्र में ऐसे नवजागरण से है, जिसने मानव के संचार के साधनों और टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूकता में क्रांतिकारी रूप से वृद्धि की है। 
 
संचार औपचारिक भी हो सकता है और अनौपचारिक भी।  
 
औपचारिक संचार व्यवसाय क्षेत्र में पर्याप्त कार्य स्थापित करने और व्यावसायिक संबंधों या कार्य संबंधों को स्थापित करने के लिए होता है।  
 
अनौपचारिक संचार में विभिन्न भावनाएं और व्यक्तिगत भावनाएं हो सकती हैं।  विभिन्न लोगों द्वारा किया गया संचार व्यक्ति की बोलने और लिखने की क्षमता पर अत्यधिक निर्भर करता है। बेहतर संचार कौशल सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।
 
आधुनिक संचार क्रांति के इस लेख में भी हम आधुनिक संचार क्रांति के आवश्यकता, लाभ एवं हानि के बारे में बात करेगे। 
 
आशा करते हैं कि आपको यह लेख आधुनिक संचार क्रांति के विभिन्न दृष्टिकोणों के बारे अवगत कराने में सक्षम होगा और आधुनिक संचार क्रांति के विषय में आपकी जानकारी को और अधिक विस्तृत करेगा।
 


संकेत बिंदु (Content)

 

 

 

प्रस्तावना (Introduction)

आज के तेजी से बढ़ती दुनिया में संचार के साधनों में भी वृद्धि आवश्यक है। दुनिया में किसी भी मौलिक आवश्यकता में संचार बहुत आवश्यक है। 

हर जीवित प्राणी के लिए संचार एक मूलभूत आवश्यकता है। 

चीटियां जो सुन नहीं सकती हैं वो भी एक विशेष प्रकार की गैस के द्वारा संचार करती हुई एकजुट रहती हैं। 

 

एक प्रसिद्ध महानुभाव “थॉमस जेफर्सन” के अनुसार, सूचना ही लोकतंत्र की मुद्रा है

 

वास्तव में इनका कथन हर एक दृष्टिकोण से सही है। एक बेहतर लोकतंत्र के लिए संचार के माध्यमों का आधुनिकीकरण आवश्यक है। चाहे युद्ध का मैदान हो या रिश्तेदारों और अपने संबंधियों से वार्तालाप करनी हो, जीवन के हर एक पड़ाव में संचार आवश्यक है। 

 

एक प्रसिद्ध ग्रीक दार्शनिक अरस्तू के कथन, “मानव एक सामाजिक प्राणी है” का एक बेहतर संचार के बिना कोई औचित्य ही नहीं है। 

बिना संचार के किसी भी जीव का समाजिकीकरण नही हो सकता। 

 

संचार मनुष्य या किसी भी सजीव का एक स्वाभाविक गुण है। एक गूंगा भी होता है तो वह किसी न किसी माध्यम से संचार करता ही है। 
 

 
Essay on Modern Communication Revolution in Hindi
 

संचार का इतिहास

 
प्राचीन काल में लोग एक दूसरे को संदेश पहुंचाने के लिए कबूतर का प्रयोग करते थे। ऐसी स्थिति में संदेश पहुंचने में महीनों लग जाते थे। 

अगर कोई आपातकालीन स्थिति हुई तो संदेश पहुंचते पहुंचते ही घटना घट जाती थी। 

धीरे धीरे स्थिति में बदलाव आया और भारत में डाक विभाग की स्थापना से लोग चिट्ठी लिखकर भेजने लगे लेकिन चिट्ठी में भी एक समस्या थी वह यह थी कि चिट्ठी को भी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचने में महीनों लग जाते थे, अगर देखा जाए तो स्थिति वैसे की वैसे ही थी बस संचार माध्यम बदल गया था। 
 

 

15वी शताब्दी

 
प्राचीन काल और 15वीं शताब्दी के बीच संचार के क्षेत्र में नए विकास देखे गए। 15वीं शताब्दी से पहले मौखिक संचार और सीमित लिखित संचार शामिल थे।  

लोग एक-दूसरे से बात करते थे और किसी व्यक्ति या समूह के लिए चिट्ठी  लिखते थे।

प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार के बाद यह सब बदल गया।  

 

चीन में बी शेंग और वांग चेन राजवंशों ने 1300 के दशक में पहली प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार किया, जिससे सभी पेपर संदेशों को हाथ से लिखने की आवश्यकता को हटा दिया गया।  

 

लगभग 150 साल बाद, जर्मनी के जोहान्स गुटेनबर्ग ने प्रिंटिंग प्रेस का एक आधुनिक संस्करण तैयार किया जो बड़े पैमाने पर मुद्रित सामग्री का उत्पादन करने में सक्षम था। 

 

17वी शताब्दी

1690 में लोगों को समायोजित करने के लिए अखबार का आविष्कार किया गया।  

अखबार के आविष्कार से दुनिया भर के शहरों में लोगों को अपने आस पास यहां तक कि देश विदेश की घटनाओं के बारे में जानकारी होने लगी।

 

18वी शताब्दी

 
18वीं शताब्दी में सार्वजनिक डाक व्यवस्था की स्थापना हुई। लेकिन प्रणाली त्रुटिपूर्ण और अक्षम थी क्योंकि डिलीवरी में महीनों लग सकते थे, और यहां तक कि जब मेल अपने गंतव्य यानी डाक घर तक पहुंच गया, तब भी इसे एक  सार्वजनिक स्थान पर छोड़ दिया जाता था। 

 

19वी शताब्दी

 
1831 में जोसेफ हेनरी नाम के एक व्यक्ति द्वारा इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ का आविष्कार किया गया।  

इस प्रकार के टेलीग्राफ से संदेशों को लंबी दूरी पर भेजने और प्राप्त करने में आसानी होने लगी।

 

अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने 1876 में टेलीफोन का आविष्कार किया। 

 

20वी शताब्दी

 
1900 की शुरुआत में रेडियो और टेलीविजन सूचना का एक बड़ा स्रोत बन गए। रेडियो और टेलीविजन से न केवल संगीतमय मनोरंजन होता था, बल्कि श्रोता इनके माध्यम से समाचार, खेल और मौसम के बारे में भी जान पाते थे।

 

1981 में टेलीफोन की ही तरह एक नए संचार यंत्र का आविष्कार हुआ जिसको मोबाइल के नाम से जानते हैं लेकिन उस समय के मोबाइल आज के मोबाइल जैसे बिल्कुल भी नही थे। 

 

1981 में बने मोबाइल को जेब में नही रख सकते थे अपितु वह इतने बड़े थे कि उनको कार या फिर किसी अन्य वाहन में रखके चलना पड़ता था। 1990 के दशक में ऐसे मोबाइल बने जिनको हम जेब में रखकर चल सकते थे। 

 

कंप्यूटर का आविष्कार 20वीं सदी की शुरुआत में हुआ था। 
 

 

 

आधुनिक संचार का अर्थ

संचार शब्द अंग्रेजी के Communication शब्द का हिंदी रूपांतरण है और communication शब्द “कम्युनिस (Communis)” से लिया गया है, जो एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है सामान्य।  

 

वास्तव में सभी प्रकार की बातचीत, संचार का एक महत्वपूर्ण घटक है।  यदि समझ सामान्य नहीं है, तो संचार अधिक गलतफहमी पैदा करता है।  यह लोगों को दिशाहीन बना देता है।  

यह उन आवश्यक उपकरणों में से एक है जो लोगों को जुड़ने में मदद करता है।

 

संचार में सूचना के हस्तांतरण की अवधारणा शामिल है।  यह केवल उन व्यक्तियों के बीच सामान्य विचारों को साझा करने का कार्य है जो बातचीत का हिस्सा हैं।  यह प्रेषक से रिसीवर तक और इसके विपरीत एक समझ बनाता है।  संचार के साथ एक आदर्श बातचीत विकसित करने के लिए प्रक्रिया को ठोस और अर्थपूर्ण ढंग से पूरा करना आवश्यक है।  संचार के कार्य को मौखिक या लिखित रूप में सूचना पारित करने की प्रक्रिया के रूप में भी जाना जाता है।

 

यह किसी व्यक्ति के विचारों को दूसरे व्यक्ति से बात करने या लिखने के तरीके से स्थानांतरित करना है।  

 

संचार में चार क्रियाएं होती हैं, जो हैं, एन्कोडिंग, भेजना, प्राप्त करना और डिकोडिंग।  

प्रेषक जानकारी को एन्कोड करता है और इसे रिसीवर को स्थानांतरित करता है।  

प्राप्तकर्ता प्रेषक से जानकारी प्राप्त करता है, उसे डीकोड करता है, और प्राप्त संदेश या जानकारी को समझता है।  संदेश संचार की एक प्रकार की सामग्री है।

 

लेकिन आधुनिक संचार का अर्थ इससे कही ज्यादा व्यापक है। आधुनिक संचार में केवल संदेश भेजना या वार्तालाप करना ही नहीं है अपितु दूर बैठे दो लोग साथ में गेम खेल सकते हैं, गाने सुन सकते हैं और कोई मूवी भी देख सकते हैं। 
 

 

 

आधुनिक संचार के प्रकार

आधुनिक संचार बहुत प्रकार के होते हैं। 

संचार के तरीके का चुनाव संदेश के प्राप्तकर्ता की भौतिक उपस्थिति, संदेश की प्रकृति और संदेश के प्रसारण में शामिल लागत जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।

 

संचार के विभिन्न साधन चार श्रेणियों में आते हैं: 

(1) मौखिक,

(2) लिखित, 

(3) अशाब्दिक या नॉन वर्बल संचार

(4) सूचना प्रौद्योगिकी।  

 

मौखिक साधन

 
यह संगठनात्मक संचार का सबसे प्रचलित रूप मौखिक है।  

यह आमने-सामने का संचार हो सकता है जो स्पीकर और श्रोता के बीच सीधी बातचीत और जब वे दोनों एक ही स्थान पर शारीरिक रूप से मौजूद होते हैं। यह टेलीफोन या मोबाइल पर बातचीत भी हो सकती है। 

 

सभी राजनीतिक नेताओं को बोलने की बेहतर शैली विकसित करने की आवश्यकता होती है क्योंकि वे अक्सर अपने अनुयायियों को एक सार्वजनिक संबोधन प्रणाली के माध्यम से संबोधित करते हैं।

 

समूहों और समितियों, ग्राहक या किसी सम्मेलन में प्रस्तुतीकरण करते समय प्रत्येक व्यक्ति को मौखिक संचार की आवश्यकता होती है। 

 

लिखित साधन

 
एक लिखित संचार का अर्थ है संदेश को लिखित रूप में रखना और आम तौर पर निर्देश, पत्र, मेमो, औपचारिक रिपोर्ट, नियमों और विनियमों के बारे में जानकारी, नीति नियमावली, सूचना बुलेटिन आदि के रूप में होता है। 

 

लिखित संचार की आवश्यकता तब होती है जब घटनाओं और कार्यवाही के साक्ष्य को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक हो, जब एक ही समय में कई व्यक्तियों से संपर्क किया जाना चाहिए और जब लंबा सांख्यिकीय डेटा प्रेषित किया जा रहा हो। 

 

लिखित संचार में कुछ हानियां भी हो सकती हैं क्योंकि इसमें बहुत समय लगता है, विशेष रूप से लंबी रिपोर्टों के लिए और गोपनीय लिखित सामग्री समय से पहले लीक हो सकती है, जिससे इसकी प्रभावशीलता में भी असर पड़ता है। 

 

अशाब्दिक या नॉन वर्बल संचार

 
अशाब्दिक संचार के अंतर्गत ऐसे संचार आते हैं जिनमे न मौखिक संचार होता है न ही लिखित। 

इसमें कुछ संकेत या इशारे होते हैं, जो हम सामने वाले को अपने भाव प्रकट करने के लिए करते हैं। 

जब हम अजनबियों के साथ बातचीत कर रहे होते हैं तो अशाब्दिक संचार ज्यादातर बॉडी लैंग्वेज या हमारे चेहरे की अभिव्यक्ति होती है। 

अशाब्दिक संचार में हमारे शरीर की मुद्रा बहुत महत्वपूर्ण है।

 

हमारे साथ बातचीत करते समय, कुछ व्यक्तियों को आपने गौर किया होगा कि उनके चेहरे के रंग में परिवर्तन होता है, जैसे; गुस्से से लाल हो जाना, साथ में उनके बॉडी लैंग्वेज में परिवर्तन हो जाता है। 

जब हमको कोई पसंद होता है तो हम उससे बात करते समय अपने बाल सवारते हैं यह भी अशाब्दिक या नॉन वर्बल संचार का हिस्सा है। 

 

अशाब्दिक संचार से हम दूसरों को अपने एक्सप्रेशन और शैली से प्रभावित करता है।  

हैंडशेक शायद अशाब्दिक संचार का सबसे सामान्य रूप है और यह औपचारिक भी हो सकता है, अनौपचारिक भी। 

 

हमारे चेहरे के भाव क्रोध, हताशा, अहंकार, शर्म, भय और अन्य भावो को दिखा सकते हैं जिन्हें लिखित शब्द या मौखिक संचार के माध्यम से कभी भी पर्याप्त रूप से संचारित नहीं किया जा सकता है।  

 

 निम्न सामान्य अशाब्दिक संचार के रूप हैं, जिनको हम रोज की जिंदगी में प्रयोग करते हैं।

  • अगर किसी को यह एक्सप्रेस करना है कि आप वह बात नही जानते तो अपने कंधों को सिकोड़ना।
  • शरारत या अंतरंगता के लिए आँख मारना।
  • अगर किसी चीज के लिए काफी उतावले हैं तो अपनी उंगलियों को मेज पर थपथपाना और अगर कुछ भूल जाए तो हम अपने माथा में उंगली से टैप करने लगते हैं। 

 

सूचना प्रौद्योगिकी

 
सूचना प्रौद्योगिकी संचार तकनीकों की एक व्यापक श्रेणी है और इसमें वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग, टेलीकम्यूटिंग, इलेक्ट्रॉनिक मेल आदि शामिल हैं। 

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग

आज कल ऑनलाइन मीटिंग्स के लिए या कोरोना महामारी के समय में यह संचार का बहुत ही महत्वपूर्ण माध्यम था।

वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग संचार का एक ऐसा माध्यम है जो विभिन्न स्थानों पर विभिन्न कर्मचारियों के साथ एक साथ संवाद करने के लिए लाइव वीडियो का उपयोग करता है।  

 

यह विभिन्न संगठनों के लोगों को कैमरा, ध्वनि और केबल ट्रांसमिशन के माध्यम से एक ही समय में संवादात्मक बैठकें आयोजित करने में सक्षम बनाता है। 

यह तकनीक निर्णय लेने और नियंत्रण के उद्देश्य से दुनिया भर के सभी कार्यों से तेजी से जानकारी प्राप्त करना आसान बनाती है। 

 

वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए इंटरनेट पर काफी ज्यादा मात्रा में भिन्न भिन्न एप्लीकेशन मौजूद हैं, जो प्राइवेसी के साथ आसानी से किसी भी देश के व्यक्ति के साथ संचार करने में मदद करती हैं। 

 

टेलीकम्प्यूटिंग

टेलीकम्यूटिंग काम के क्षेत्र में उच्च तकनीक का परिणाम है, जहां लोग अपने घर से कंप्यूटर का उपयोग करके उन्हें ऑफिस से जोड़कर काम कर सकते हैं। टेलीकम्यूटिंग काम करने में लचीलापन लाता है और साथ ही साथ कार्यकर्ता के लिए आराम प्रदान करता है, भले ही यह एक टीम में एक साथ काम करने वाले कर्मचारियों को अलग करता है।

 

यह संचार तकनीक उन लोगों के लिए मददगार है जो वर्क फ्रॉम होम करते हैं ताकि वे लैपटॉप कंप्यूटर लिंक-अप के माध्यम से अपने कार्यालय के लोगों से संवाद कर सकें।   

 

ईमेल (इलेक्ट्रॉनिक मेल)

ई-मेल एक ऐसी प्रणाली है जिसके द्वारा लोग एक दूसरे के बीच संदेश भेजने और प्राप्त करने के लिए पर्सनल कंप्यूटर टर्मिनलों का उपयोग करते हैं, जिससे सूचनाओं का बहुत तेजी से प्रसारण होता है।  

ईमेल के द्वारा संदेश दुनिया में कहीं भी, किसी के द्वारा भी भेजे और प्राप्त किए जा सकते हैं। 

 

डिजिटल मीडिया

आज कल की व्यस्त जिंदगी में अखबार पढ़ने वाले लोगों की संख्या कम होती जा रही है। 

 

डिजिटल मीडिया कोई अलग प्रणाली नही है, बल्कि यह आपके रोज के अखबारों का डिजिटल रूप है, जिसमे आप अपने मोबाइल फोन से देश दुनिया की पल पल की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन इसको आप अखबार की तरह पन्ने पलटा के नही पढ़ सकते। 

 

आज कल लगभग सारे ही अखबार या न्यूज की वेबसाइट डिजिटल रूप से उपलब्ध हैं, बस आपको इंटरनेट से अपने मनपसंद न्यूज या अखबार की वेबसाइट में जाना है और चाय की चुस्कियों के साथ पल पल की जानकारी प्राप्त कीजिए। 
 

 

 

आधुनिक संचार क्रांति का लाभ

15वी से 20वी शताब्दी के बीच संचार में जिस तरह से प्रगति हुई वह आश्चर्यजनक है। 

आज संचार दुनिया की एक मौलिक आवश्यकता बन चुकी है। आधुनिक संचार क्रांति का लाभ दुनिया के हर क्षेत्र को मिला है, चाहे वह छात्र हो या व्यवसायी, कोई सरकारी कामगार हो या प्राइवेट कर्मचारी, बूढ़े हो या बेरोजगार। 

चलिए देखते हैं कि आधुनिक संचार क्रांति के हमारे जीवन में क्या क्या लाभ हुए। 

  • आधुनिक संचार क्रांति से देश विदेश के लोगों से संपर्क करना आसान हो गया।
  • आधुनिक संचार क्रांति से कमाई के लाखों रास्ते निकले। जैसे; कोई एक विद्यालय है तो वह अपनी ऑनलाइन वेबसाइट बनाकर उसमें पढ़ाई के सामाग्री अपलोड करके पैसे कमा सकता है। 
  • आधुनिक संचार क्रांति से नए नए तरह की नौकरी का जन्म हुआ, जैसे; डिजिटल मार्केटिंग, सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन एक्सपर्ट, कंटेंट राइटर, कंटेंट मार्केटिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग इत्यादि। 
  • आधुनिक संचार क्रांति से घंटो का काम मिनटों में हो जाता है, जहां पहले ट्रेन का टिकट पाने के लिए घंटो लाइन में लगते थे वहीं अब बस अपने मोबाइल के माध्यम से बस कुछ मिनटों में ही ट्रेन का टिकट बुक हो जाता है वो भी सस्ते दर में।
  • आधुनिक संचार क्रांति से छात्रों को बहुत फायदा हुआ है, जहां पहले रिजल्ट जारी होने पर अखबार में रिजल्ट देखने के लिए लाइन लगती थी वहीं आज मोबाइल से मिनटों में ही रिजल्ट देख सकते हैं। इसके अलावा दुनिया की कोई भी किताब या किसी भी परीक्षा की सामग्री इंटरनेट में उपलब्ध है। 
  • आधुनिक संचार क्रांति से आप छोटी सी सुई से लेकर कार तक आसानी से खरीद व बेच सकते हैं। 
  • आधुनिक संचार क्रांति के साधन सस्ते और प्रयोग करने में आसान हैं। 
  • अगर खाना बनाने का मन न हो तो आपको इंटरनेट पर खाना भी उपलब्ध है बस मोबाइल पर क्लिक करें और आपका मनपसंद लजीज व्यंजन आपके घर में हाजिर। 
  • आधुनिक संचार क्रांति से आप कोई भी नई और डिमांडिंग स्किल बड़ी आसानी से सीख सकते हैं और उसी से संबंधित नौकरी भी पा सकते हैं। 
  • आधुनिक संचार क्रांति से आप घर बैठे अपनी मनपसंद सरकारी या प्राइवेट नौकरी के लिए अप्लाई कर सकते हैं और इंटरव्यू भी दे सकते हैं। 
  • आधुनिक संचार क्रांति के माध्यम से राज्य व केंद्र सरकार अपनी सारी योजनाएं और कार्यक्रम ऑनलाइन कर दिए हैं जिससे आप आसानी से ऐसी सभी योजनाओं का लाभ घर बैठे ले सकते हैं वह भी बिना किसी तीसरे इंसान के हस्तक्षेप के। 
  • आधुनिक संचार क्रांति के माध्यम से आप कोई सरकारी डॉक्यूमेंट घर बैठे बनवा सकते हैं तो अब बार बार सरकारी कार्यालय के चक्कर काटना और लंबी लाइन में लगना बंद। 
  • आधुनिक संचार क्रांति से पैसे का लेन देन आसान हो गया। अब घर बैठे 10 रुपए से लेकर करोड़ों रुपए का लेन देन आसानी से मिनटों में करे।

 

 

 

आधुनिक संचार क्रांति से हानि

हर एक चीज के लाभ होते हैं तो कुछ हानि भी होती है। चलिए देखते हैं कि आधुनिक संचार क्रांति से आपको क्या क्या हानियां उठानी पड़ सकती हैं। 

  • आधुनिक संचार क्रांति बिलकुल भी सुरक्षित नहीं है, हालांकि एक्सपर्ट इसको सुरक्षित बनाने का प्रयास कर रहे लेकिन अभी भी वह पूरी तरह सफल नहीं हो पाए।
  • आधुनिक संचार क्रांति ने देश विदेश के लोगों से संपर्क तो आसान बना दिया लेकिन कभी कभी लोग अपनी पहचान छुपाकर या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से अकाउंट बनाकर आपको फिजिकली या मानसिक रूप से प्रताड़ित कर सकते हैं। 
  • आधुनिक संचार क्रांति से बहुत बार आपको गलत जानकारी मिल जाती है जो बहुत हानिकारक साबित हो सकता है। 
  • आधुनिक संचार क्रांति से भोजन तो ऑनलाइन मंगा सकते हैं लेकिन शुद्धता की गारंटी नहीं होती।
  • आधुनिक संचार क्रांति से नौकरी पाना तो आसान हो गया लेकिन बहुत बार आप किसी गलत इंसान की कंपनी में काम करने लगते हैं जो काम करवाने के बाद आपको सैलरी भी नही देता। 
  • आधुनिक संचार क्रांति से धोखाधड़ी के मामलों में तीव्र वृद्धि हुई है। 
  • आधुनिक संचार क्रांति से स्त्रियों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों में तीव्र वृद्धि हुई है। 
  • आधुनिक संचार क्रांति से कोई भी आपकी फोटो और मोबाइल नंबर चुराके उसको कहीं भी किसी को भेज सकता है। जो कभी कभी बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। 
  • आधुनिक संचार क्रांति से कई बार आपको किसी चीज की फर्जी जानकारी प्राप्त हो जाती है, जिसके लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं होता। 

 

 

 

उपसंहार

आधुनिक संचार क्रांति ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन इसके अपने ही कुछ खतरनाक प्रभाव भी है। 

भारत और अमेरिका में हर महीने ऑनलाइन फर्जीवाड़ा और स्त्रियों के साथ दुर्व्यवहार के लाखों मामले आते हैं लेकिन बहुत ही कम मामलों में न्याय मिल पाता है। 

आज कल टेक्नोलॉजी के प्रति बढ़ती निर्भरता ने कठिन संचार के नियमों की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। 

कई देश की सरकारें संचार के नियमो में कड़ाई लाई है तो वहीं अब भारत भी इससे पीछे नहीं रहा है। 

अभी हाल ही में, भारत सरकार ने IT Act में कुछ परिवर्तन करके ट्विटर और फेसबुक जैसी उच्च सोशल मीडिया वेबसाइट को जिम्मेदार बनाने की कोशिश की है। लेकिन अभी और इससे अधिक कठोर नियमो और कानूनों की आवश्यकता है जिससे फर्जीवाड़ा को रोका जा सके और आम आदमी बिना किसी चिंता के संचार के आधुनिक माध्यमों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर सके। 

 

भारत सहित दुनिया के अन्य देशों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें लोग ऑनलाइन फर्जीवाड़ा से तंग आकर खुदकुशी कर लिए हैं। कुछ लोग तो दिवालिया तक हो गए हैं। यह स्थिति सच में काफी गंभीर है और इस पर तुरंत ही रोक लगाया जाना आवश्यक है।