Hindi Essay Writing – मेक इन इंडिया (Make in India)

Make in India Essay in Hindi

इस लेख में हम मेक इन इंडिया पर निबंध लिखेंगे | इस लेख हम मेक इन इंडिया योजना का प्रारंभ, मेक इन इंडिया के मुख्य बिंदु, मेक इन इंडिया योजना उपलब्धियाँ, मेक इन इंडिया योजना भविष्य की रुपरेखा, मेक इन इंडिया योजना का महत्त्व और लाभ के बारे में जानेगे


 

 

 

परिचय

 
जैसा कि हम जानते हैं कि भारत एक विकासशील देश है और यहाँ की 70% से अधिक जनसँख्या गांवों में निवास करती है और जीविकोपार्जन के लिए खेती पर ही निर्भर हैं | किन्तु मात्र खेती से ही हमारा विकास नहीं हो सकता, जिस तेजी के साथ भारत में जनसँख्या बढ़ रही हैं, जिस तेजी के साथ हम संसाधनों का उपभोग कर रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि हमें शीघ्र ही नए रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे तभी हम विश्वगुरु बनने के सपने को पूरा कर पाएंगे |  अतः इसी सोच के साथ देशव्यापी स्तर पर विनिर्माण क्षेत्र में विकास करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली के विज्ञान भवन से  25 सितंबर, 2014 को  ‘मेक इन इंडिया’ पहल की शुरुआत की गई थी।
 
‘मेक इन इंडिया’ पहल का एक मुख्य उद्देश्य भारत में रोज़गार के अवसरों को बढ़ाना था । उस योजना के तहत मुख्य रूप से देश के युवाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया और यह रुपरेखा भी निर्धारित की गई की कैसे देश में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना है। इसका दृष्टिकोण निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाना, आधुनिक और कुशल बुनियादी संरचना, विदेशी निवेश के लिए नये क्षेत्रों को खोलना और सरकार एवं उद्योग के बीच एक साझेदारी का निर्माण करना है।
 

 

 

 योजना का प्रारंभ 

 
प्रधानमंत्री बनने से पहले ही माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने एक सपना देखा था – एक ऐसे भारत का सपना जहाँ कोई बेरोजगार ना हो, जहाँ भुखमरी ना हो, जहाँ गरीबी ना हो, जहाँ हर बच्चे को बेह्तर शिक्षा मिले, कोई बेघर ना हो, हर क्षेत्र में तरक्की हो और भारत फिर से सोने की चिड़िया कहलाये, और अपने इसी सपने को साकार करने के लिए मोदी जी ने मेक इन इंडिया’ पहल की शुरुआत की | ताकि देश में बने उत्पादों को बढ़ावा मिले | इसके पूर्व मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए जो कायापलट की वो हम सबके सामने प्रत्यक्ष हैं | मोदी जी इस बात को भली भांति समझते हैं कि किसी भी देश की तरक्की में वहाँ के प्रत्येक नागरिक का महत्वपूर्ण योगदान होता है, और उन्होंने देश के कई राज्यों में भम्रण कर यह पाया कि यहाँ अनेक ऐसे उत्पाद हैं जो पूरी दुनिया में और कही निर्मित नहीं हुए और ऐसे स्वदेशी उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलनी चाहिए | बस यही से उन्होंने मेक इन इंडिया योजना शुरू करने की ठानी और 25 सितंबर 2014 को ‘मेक इन इंडिया’  की घोषणा की | जिसके तहत कई विदेशी कम्पनियों को भारत में निर्मित विभिन्न उत्पादों को क्रय करने के लिए अवसर उपलब्ध कराया गया | जिससे भारत को विदेशी आय भी प्राप्त हो साथ में यहाँ के उत्पादों को वैश्विक पहचान भी मिले और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो |
 
मेक इन इंडिया के अंतर्गत न केवल विदेशी पूंजी बल्कि विदेशी तकनीक और डिजाइन भी उपयोग में लिए जा रहे हैं | इस प्रकार कोई भी विदेशी कंपनी भारत में निवेश कर, भारतीय श्रम शक्ति के सहारे अपनी तकनीक और डिज़ाइन का उपयोग कर भारत में उत्पादित करने के लिए निवेश करती हैं तो इसे मेक इन इंडिया की श्रेणी में रखा जा सकता हैं | 
 

 

 

मेक इन इंडिया के मुख्य बिंदु

 
वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने देश में विनिर्माण को प्रोत्साहित करने और विनिर्माण में निवेश के माध्यम से अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने के उद्देश्य से ‘मेक इन इंडिया’ पहल की शुरुआत की थी। भारत सरकार ने मेक इन इंडिया के तरह 25 क्षेत्रों को सुनिश्चित किया हैं जिनमें घरेलू श्रम, संसाधनों और विदेशी निवेश के जरिए उत्पाद निर्मित किये जाए और विदेशी कम्पनियों पर प्रत्यक्ष निर्भरता को कम किया जा सके |
 
ये 25 क्षेत्र इस प्रकार हैं –

  1. ऑटो मोबाइल
  2. ऑटो पार्ट्स 
  3. विमानन 
  4. जैव प्रोधोगिकी
  5. रसायन 
  6. निर्माण 
  7. रक्षा उत्पाद
  8. विद्युत मशीनरी 
  9. खदान 
  10. खाघ प्रसंस्करण 
  11. आई टी एवं बीपीएम 
  12. चमड़ा 
  13. मीडिया एवं मनोरंजन
  14. तेल एवं गैस 
  15. फार्मास्युटिकल
  16. बंदरगाह एवं नौवहन 
  17. रेलवे निर्माण 
  18. सड़क एवं राजमार्ग
  19. नवीकरणीय ऊर्जा 
  20. अन्तरिक्ष
  21. वस्त्र एवं परिधान 
  22. थर्मल पॉवर 
  23. पर्यटन और आतिथ्य 
  24. कल्याण
  25. इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाईन और निर्माण   

 

 

 

विकास की राह

‘मेक इन इंडिया’ पहल की शुरुआत देशव्यापी स्तर पर विनिर्माण क्षेत्र के विकास के उद्देश्य से की गई थी। इस पहल के माध्यम से भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
 
इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये सरकार ने मुख्यतः 3 उद्देश्य निर्धारित किये हैं :

  • अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिये इसकी विकास दर को 12-14 प्रतिशत प्रतिवर्ष तक बढ़ाना।
  • वर्ष 2022 तक अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र से संबंधित 100 मिलियन रोज़गारों का सृजन करना।
  • यह सुनिश्चित करना कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान वर्ष 2025 (जो कि संशोधन से पूर्व वर्ष 2022 था) तक बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाए।

इस पहल के तहत केंद्र और राज्य सरकारें भारत के विनिर्माण क्षेत्र को मज़बूत करने के लिये दुनिया भर से निवेश आकर्षित करने का प्रयास कर रही हैं।
 
निवेशकों पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिये सरकार काफी प्रयास कर रही है। इन्हीं प्रयासों के तहत व्यावसायिक संस्थाओं की सभी समस्याओं को हल करने के लिये एक समर्पित वेब पोर्टल की व्यवस्था भी की गई है। 
 

 

 

उपलब्धियाँ

 
‘मेक इन इंडिया’ पहल में विनिर्माण क्षेत्र के विकास पर काफी ध्यान दिया जा रहा है, जो न केवल व्यापार क्षेत्र को बढ़ावा देगा, बल्कि नए उद्योगों की स्थापना के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को भी बढ़ाएगा।
 
विदित हो कि योजना की शुरुआत के कुछ समय बाद ही वर्ष 2015 में भारत ने अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ते हुए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में शीर्ष स्थान प्राप्त कर लिया था।

  • ऑटो मोबाइल – इस योजना के क्रियान्वयन से भारत में आयात-निर्यात पर प्रतिबन्ध को न्यूनतम किया गया जिससे विदेशी निर्यातक जैसे यूरोप, अमेरिका, जापान जैसे प्रमुख ऑटोमोटिव बाजार और विशाल घरेलु बाजार भौगोलिक रूप से भारत के करीब आये हैं |  हाल ही में भारी उघोग और सार्वजानिक उघम मंत्री ने इंदौर में NATRAX (हाई स्पीड ट्रैक ) का उद्घाटन किया है जो एशिया का सबसे लंबा ट्रैक हैं | इससे अब दुपहिया से लेकर भारी ट्रेक्टर वाहनों का परीक्षण भारत में ही किया जा सकेगा, इससे हमारी विदेशो पर निर्भरता कम होगी |

 

  • मीडिया एवं मनोरंजन – गत वर्षो में बढ़ती ऑनलाइन आबादी के साथ, ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल मीडिया में 43 प्रतिशत वृध्दि के आसार हैं | ओटीटी के आने से लोगो में मनोरंजन का अनुपात बढ़ा हैं |और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 150 प्रतिशत की वृध्दि हुई हैं | कई विदेशी कंपनियों ने निवेश किया हैं जैसे वाल्ट डिज्नी, ब्लैकस्टोन, ब्लूमबर्ग, सोनी, बीबीसी आदि |  

 

  •  निर्माण – निर्माण अन्य उघोगों को आगे बढ़ाने और भारत के समग्र विकास में बहुत बड़ी भूमिका निभाता हैं | इसलिए सरकार खुले एफडीआई, बुनियादी ढाचा क्षेत्र के लिए बड़े बजट आवंटन, स्मार्ट सिटी मिशन, जैसी केंद्रीय नीतियों के माध्यम से बुनियादी ढांचे और निर्माण सेवाओ के विकास पर ध्यान केन्द्रित कर रही हैं |

 

  • कल्याण –  हाल ही में सरकार ने आयुष क्षेत्र में 100% विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति दी हैं जिससे बड़ी संख्या में विदेशी कंपनिया भारत की तरफ आकर्षित होंगी | जिससे आयुष अस्पतालों और दवा केन्द्रों को उन्नत किया जा सकेगा और गुणवत्ता वाले कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी |

 

 

 

 वर्तमान में प्रासंगिकता 

 
‘मेक इन इंडिया’ मुख्य रूप से विनिर्माण उद्योगों पर आधारित है, इसलिये यह विभिन्न कारखानों की स्थापना की मांग करता है। इस पहल के तहत विदेशी कंपनियों को भारत में उत्पादन करने के लिये प्रेरित किया गया है, जिसके कारण भारत के छोटे उद्यमियों पर असर देखने को मिला हैं। चूँकि इस पहल का उद्देश्य विनिर्माण क्षेत्र के तीन प्रमुख कारकों- निवेश, उत्पादन और रोज़गार में वृद्धि करना था। अतः इसका मूल्यांकन भी इन्हीं तीनों के आधार पर किया जा सकता है।
 
निवेश – पिछले पाँच वर्षों में अर्थव्यवस्था में निवेश की वृद्धि दर काफी धीमी रही है। यह स्थिति तब और खराब हो जाती है, जब हम विनिर्माण क्षेत्र में पूंजी निवेश पर विचार करते हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार, अर्थव्यवस्था में कुल निवेश को प्रदर्शित करने वाला सकल स्थायी पूंजी निर्माण (GFCF) जो कि वर्ष 2013-14 में GDP का 31.3 प्रतिशत था, वर्ष 2017-18 में घटकर 28.6 प्रतिशत हो गया। महत्त्वपूर्ण यह है कि इस अवधि के दौरान कुल निवेश में सार्वजनिक क्षेत्र की हिस्सेदारी कमोबेश समान ही रही, जबकि निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 24.2 प्रतिशत से घटकर 21.5 प्रतिशत हो गई।
 
उत्पादन – औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में होने वाले परिवर्तन का सबसे बड़ा सूचक है। यदि अप्रैल 2012 से नवंबर 2019 के मध्य औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आँकड़ों पर गौर करें तो ज्ञात होता है कि इस दौरान मात्र 2 ही बार डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई, जबकि अधिकांश महीनों में यह या तो 3 प्रतिशत से कम थी या नकारात्मक थी। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि विनिर्माण क्षेत्र में अभी भी उत्पादन वृद्धि नहीं हो पाई है।
 
विकास दर – इस पहल के तहत विनिर्माण क्षेत्र के लिये काफी महत्त्वाकांक्षी विकास दर निर्धारित की गई थी। विश्लेषकों का मानना है कि 12-14 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर औद्योगिक क्षेत्र की क्षमता से बाहर है। ऐतिहासिक रूप से भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने कभी भी इतनी विकास दर प्राप्त नहीं की है।
 
उक्त तीनों कारकों के आधार पर ‘मेक इन इंडिया’ पहल का मूल्यांकन करने पर ज्ञात होता है कि यह पहल इच्छा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई है।
 
विश्लेषकों के अनुसार, इस पहल के संतोषजनक प्रदर्शन न कर पाने का मुख्य कारण यह था कि यह विदेशी निवेश पर काफी अधिक निर्भर थी, इसके परिणामस्वरूप एक अंतर्निहित अनिश्चितता पैदा हुई क्योंकि भारत में उत्पादन की योजना किसी और देश में मांग और पूर्ति के आधार पर निर्धारित की जा रही थी।
 

 

 

भविष्य की रुपरेखा 

भारत सरकार को उद्योगों, विशेष रूप से विनिर्माण उद्योगों के विकास के लिये अनुकूल वातावरण बनाने हेतु और अधिक प्रयास करने होंगे।
 
भारतीय अर्थव्यवस्था देश में मजबूत विकास और व्यापार के समग्र दृष्टिकोण में सुधार और निवेश के संकेत के साथ आशावादी रुप से बढ़ रही है । सरकार के नये प्रयासों एवं पहलों की मदद से निर्माण क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है । निर्माण को बढ़ावा देने एवं संवर्धन के लिए शुरु की गई इस योजना से, भारत को महत्वपूर्ण निवेश एवं निर्माण, संरचना तथा अभिनव प्रयोगों के वैश्विक केंद्र के रुप में बदला जा सकता हैं ।
 
‘मेक इन इंडिया’ पहल के संबंध में देश एवं विदेशों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। जापान, चीन, फ्रांस और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने भारत की विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं में निवेश करने हेतु अपनी दिलचस्पी दिखायी है। 
 
निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लक्ष्य

  • मध्यम अवधि में निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर में प्रति वर्ष 12-14% वृद्धि करने का उद्देश्य |
  • 2022 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी में 16% से 25% की वृद्धि |
  • विनिर्माण क्षेत्र में वर्ष 2022 तक 100 मिलियन अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करना |
  • समावेशी विकास के लिए ग्रामीण प्रवासियों और शहरी गरीबों के बीच उचित कौशल का निर्माण |
  • घरेलू मूल्य संवर्धन और निर्माण में तकनीकी गहराई में वृद्धि |
  • भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना |
  • विशेष रूप से पर्यावरण के संबंध में विकास की स्थिरता सुनिश्चित करना |

 

 

 

महत्त्व और लाभ

 
‘मेक इन इंडिया’ इंडिया’ एक क्रांतिकारी विचार है जिसने निवेश एवं नवाचार को बढ़ावा देने, बौद्धिक संपदा की रक्षा करने और देश में विश्व स्तरीय विनिर्माण बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के लिए प्रमुख नई पहलों की शुरूआत की है। इस पहल नें भारत में कारोबार करने की पूरी प्रक्रिया को आसान बना दिया है। नई प्रक्रिया में गति और पारदर्शिता को काफी बढ़ाया हैं। अब जब व्यापार करने की बात आती है तो भारत कई विदेशी कंपनियों को आकर्षित करता है। अब भारत ऐसे सभी निवेशकों के लिए आसान और पारदर्शी प्रणाली उपलब्ध  करवा रहा है जो स्थिर अर्थव्यवस्था और आकर्षक व्यवसाय के अवसरों की तलाश कर रहे हैं। भारत में निवेश करने के लिए यह सही समय है जब यह देश सभी को विकास और समृद्धि के मामले में बहुत कुछ प्रदान कर रहा है।
 

 

 

उपसंहार

 
इस योजना की शुरुआत हुए आज पाँच वर्ष से भी अधिक बीत चुका है और इस दौरान देश का विनिर्माण क्षेत्र एवं अर्थव्यवस्था दोनों काफी परिवर्तित हुए हैं। प्रशासनिक मशीनरी के कुशल और शीघ्र स्वस्थ होने पर ही कारोबारी माहौल बनाना संभव हो पाएगा। देखा जाए तो प्रक्रिया और नियामक मंजूरी के लिये भारत में बहुत कठिनाइयाँ हैं। यह विदेशी निवेश में बाधा उत्पन्न करता है इसलिये विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिये एक संतुलित पर्यावरण की आवश्यकता है, जिसमें पारदर्शी कानून, नियमों में स्थिरता होना ज़रूरी है। इस पर ठोस दिशा-निर्देशों के साथ उचित निर्णय लेने की ज़रूरत है। भूमि अधिग्रहण भारत में एक बड़ा मुद्दा है। यह निवेशकों के लिये निवेश से विमुख होने का एक बड़ा कारण है।
 
भूमि अधिग्रहण कानून, सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक मुद्दा बन गया है। हाल ही के भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन पर, अवसरवादी राजनीति, संवेदनशील मुद्दे हावी हो गए। निवेश बढ़ाने के लिये भूमि अधिग्रहण की बाधाओं को दूर करने के लिये उचित परामर्श प्रक्रिया की ज़रूरत है।
 
श्रमिकों का भी विनिर्माण में अपना महत्त्व है। भारत में निवेश करने के लिये निवेशक पुरातन श्रम कानूनों को एक बाधा रूप में देखते हैं। श्रम के विषय पर अक्सर विविध हितधारकों में राजनीतिक आधार के साथ एक संकीर्ण कदम उठाने की प्रवृत्ति है। इसलिये विनिर्माण क्षेत्र के विकास के लिये उद्योग और श्रमिकों के अनुकूल कानून बनाने की ज़रूरत है।