PSEB Class 10 Hindi Book difficult word meanings
Here, the difficult words and their meanings of all the Chapters of PSEB Class 10 Hindi Book have been compiled for the convenience of the students. This is an exhaustive list of the difficult words with their meanings of all the Chapters from the PSEB Class 10 Hindi Book. The difficult words’ meanings have been explained in an easy language so that every student can understand them easily.
- Chapter 1 – दोहावली
- Chapter 2 – पदावली
- Chapter 3 – नीति के दोहे
- Chapter 4- हम राज्य लिए मरते हैं
- Chapter 5 – गाता खग
- Chapter 6 – जड़ की मुसकान
- Chapter 7 – ममता
- Chapter 8 – अशिक्षित का हृदय
- Chapter 9 – दो कलाकार
- Chapter 10 – नर्स
- Chapter 11 (Part 1) – माँ का कमरा
- Chapter 11 (Part 2) – अहसास
- Chapter 12- मित्रता
- Chapter 13- मैं और मेरा देश
- Chapter 14- राजेंद्र बाबू
- Chapter 15- सदाचार का तावीज़
- Chapter 16- ठेले पर हिमालय
- Chapter 17- श्री गुरु नानक देव जी
- Chapter 18- सूखी डाली
- Chapter 19- देश के दुश्मन
Chapter 1 – दोहावली
- चरन– चरण
- सरोज– कमल
- रज- धूल
- निज– अपना
- मुकुरु– दर्पण
- सुधारि- सुधारकर, साफ करके
- बरनऊँ- वर्णन करूँ
- रघुबर- श्रीराम
- बिमल– निर्मल
- जसु- यश
- दायकु– देने वाला
- फल चारि- चार फल अर्थात् धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष
- मनी दीप- मणि से बना दीपक
- धरु- धरो, रखो
- जीह- जीभ
- देहरी- दहलीज़
- भीतर– अंदर
- बाहरु- बाहर
- चाहसि- चाहते हो
- उजियार- प्रकाश, रोशनी
- जड़- निर्जीव
- चेतन- सजीव
- गुन– अच्छाई, सद्गुण
- दोष- बुराई, अवगुण
- धय– धारण करता है, अपने में समेटता है
- बिस्व– संसार
- कौन्ह करतार– किसे सृष्टिकर्ता कहा जाए
- संत- साधु, ज्ञानी व्यक्ति
- गुन गहहिं- गुणों को ग्रहण करते हैं
- पय- दूध
- परिहरि- दूर करना
- बारि- पानी
- विकार- दोष, बुराई
- तरु- वृक्ष
- तर- नीचे
- कपि– बन्दर
- साहिब- स्वामी, मालिक
- शील निधान– शील (विनम्रता और सद्गुण) का भंडार
- समता- समान भाव, समदृष्टि
- राग– प्रेम
- रोष– क्रोध
- दोष– अवगुण, बुराई
- भए भन- बनकर
- गिरिजा- पार्वती जी (पर्वतराज हिमालय की पुत्री)
- समागम- संगति, मिलन
- सम- समान
- आन- अन्य, और
- बिनु– बिना
- हरि कृपा– भगवान की कृपा
- न होइ- नहीं होता
- गावहिं– गाते हैं, कहते हैं
- वेद पुरान– वेद और पुराण (धार्मिक ग्रंथ)
- संपति– संपत्ति, वैभव
- देखि- देखकर
- सुनि– सुनकर
- जरहिं- जलते हैं, ईर्ष्या करते हैं
- जे– जो
- जड़– मूर्ख
- बिनु- बिना
- आगि– आग के
- तिन के– उन लोगों के
- भाग- भाग्य, किस्मत
- ते- से
- चलै- चल देती है, दूर हो जाती है
- भागि– भाग जाती है
- साहब– स्वामी, मालिक (यहाँ भगवान राम)
- सेवक- दास, भक्त (यहाँ हनुमान)
- बड़ो- बड़ा, श्रेष्ठ
- निज धरम– अपना धर्म, कर्तव्य
- सुजान– जानने वाला, समझदार
- बाँध– पुल (रामसेतु)
- उत्तरे– पार किए, समुद्र पार गए
- उद्धि– समुद्र
- लांधि– छलांग लगाकर पार करना
- हनुमान– भगवान राम के भक्त व सेवक
- सचिव– मंत्री
- वैद– चिकित्सक (डॉक्टर)
- तीनि– तीनों
- प्रिय– मनभावन, अच्छा लगने वाला
- बोलहिं- बोलते हैं, कहते हैं
- भयु- यदि (अगर)
- आस– अपेक्षा, भय अथवा लोभ से
- राज- राज्य, शासन
- धर्म– आचरण, धर्मपालन
- तन– शरीर
- कर- का
- होइ- होता है
- बेगिही– शीघ्र, बहुत जल्दी
- नास– नाश, विनाश
- बिनु– बिना
- बिस्वास– विश्वास
- भगति– भक्ति
- नहिं– नहीं
- तेहि– उस (भगवान को)
- वितु- धन
- द्रवहिं- पसीजना, द्रवित होना
- सपनेहूँ- स्वप्न में भी, कभी नहीं|
- लह– प्राप्त करता है
- विश्राम- शांति, सुकून
Related:
Chapter 2 – पदावली
- बसौ– निवास करो, रहो
- मेरे नैनन में– मेरी आँखों में
- नन्द लाल– नन्द के बेटे श्री कृष्ण
- मोहनि मूरति- मन को मोह लेने वाली मूर्ति, छवि
- साँवरी सूरति– श्यामवर्ण रूप
- नैना- आँखें
- विसाल- विशाल, बड़े
- मोर मुकुट- मोर पंखों से बना मुकुट
- मकराकृत कुंडल– मकर या मछली के आकार के कुण्डल
- अरुण- लाल
- भाला- मस्तक, माथा
- अधर सुधारस- होंठ अमृत समान रस से भरे हुए
- मुरली राजति– बांसुरी सुशोभित है
- उर– हृदय
- वैजन्ती माल– वैजयंती माला
- छुद्र घंटिका– छोटी-छोटी घण्टिकाएँ
- कटि- कमर
- सोभित– शोभा पा रही
- नुपूर- घुँघरू
- रसाल- मीठा, मोहक
- संतन सुखदाई- संतों को सुख देने वाले
- बछल– वत्सल, रक्षक
- गिरिधर– गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाला
- जाके सिर- जिनके सिर पर
- मोर मुकुट– मोर पंखों का मुकुट
- मेरो पति सोई– वही मेरे पति हैं
- तात- पिता
- भ्रात- भाई
- बंधु– सगे संबंधी
- आपनो न कोई– अब मेरा कोई नहीं है
- छांड़ि दई- छोड़ दिया
- कानि– मर्यादा
- कहा करै कोई– अब कौन क्या कर सकता है
- संतन ढिग- संतों के पास
- बैठि बैठि- बैठकर
- लोक लाज– लोगों की शर्म, सामाजिक संकोच
- असुअन जल- आँसुओं का जल
- सींचि सींचि- सींचते हुए बार-बार
- प्रेम बेलि– प्रेम की लता (बेल)
- बोई- रोपी
- अब तो बेलि फैल गई- अब वह लता फैल गई है
- आनंद फल होई– अब आनंद रूपी फल आ गया है
- भगत देखि– भक्त को देखकर
- राजी- प्रसन्न
- जगत देखि– संसार को देखकर
- रोई– रोना
- दासी मीरा– सेविका मीरा
- लाल गिरधर– प्रियतम गिरधर (कृष्ण)
- तारौ– उद्धार करना, तारना
Related:
Chapter 3 – नीति के दोहे
- कहि – कहते हैं
- सम्पति – धन-दौलत
- सगे – सगे-संबंधी
- बनत – बनते हैं
- बहु – अनेक
- रीत – प्रकार
- विपत – मुसीबत
- जे – जो
- कसौटी – गुणवत्ता को परखना, मापदण्ड
- कसे – खरा उतरना
- सोई – वही
- साँचे – सच्चा
- मीत – मित्र
- साधे – साथ
- मूल – जड़
- फूलै – फूल आना
- फलै – फल आना
- अधाय – तृप्त होना
- तरूवर – वृक्ष, पेड़
- खात – खाना
- सरवर – तालाब
- पियहिं – नहीं पीता
- पान – पानी
- परकाज – परोपकार, दूसरे की भलाई
- हित – के लिए
- संचहिं – एकत्र करना
- सुजान – अच्छे लोग, सज्जन
- बड़ेन – बड़ा
- लघु – छोटा, तुच्छ
- डारि – छोड़ना, तिरस्कार करना
- आवे – आना
- तरवारि – तलवार
- कनक – धतूरा
- कनक – सोना
- मादकता – नशा
- अधिकाय – अत्यधिक
- बौरात – बौरा जाना, नशे में होना
- बौराय – पागल हो जाता है
- इहि – इस
- अटक्यों – अटक कर रहना
- अलि – भँवरा
- मूल – जड़
- हो है – आ जाएगी
- बहुरि – फिर से
- सोहतु – शोभामान होता है
- संग – साथ
- समानु – एक सामान
- यहै – यही
- पीक – चबाए हुए पान, तंबाकू या गिलौरी की थूक
- नैननु – आँखें
- काजर – काजल
- गुनी – गुणवान
- कहैं – कहने से
- निगुनी – गुणहीन
- सुन्यों कहूँ – कहीं सुना है
- तरू – वृक्ष
- अरक – आक या मदार का पौधा
- अरक-समान – सूर्य के समान
- उदोतु – प्रकाशवान
- करत करत – बार-बार करना
- जड़मति – मूर्ख
- होत – होना
- सुजान – विद्वान्, बुद्धिमान
- रसरी – रस्सी
- आवत – आना
- जात – जाना
- सिल – पत्थर, चट्टान
- परत – पढ़ना
- निसान – निशान
- फेर – दुबारा
- ह्वै – फिर से होना
- कपट – छल
- काठ – लकड़ी
- दूजी – दूसरी
- मधुर – मीठे
- वचन – शब्द, वाणी
- अभिमान – घमंड, अहंकार
- तनिक – थोड़े से
- सीत – ठंडा
- उफान – उबाल
- अरि – शत्रु, दुश्मन
- गनिये – मानना, गिनना
- बिगार – बिगड़ना
- तृण – तिनका
- तनिक – क्षण भर में
- जारत – जलाना
- तनिक – छोटा-सा
- अंगार – आग का अंगारा
Related:
Chapter 4 – हम राज्य लिए मरते हैं
- मरते हैं- दुःखी होते हैं
- राज्य– शासन, राजपाट
- कर्षक– किसान, खेती करने वाले लोग
- सम्पन्न– धनी, समृद्ध
- पत्नी सहित- अपनी पत्नी के साथ
- विचरते हैं– रहते हैं, घूमते हैं
- भव वैभव– संसार के ऐश्वर्य
- गोधन- गाय-रूपी धन
- उदार- दानी, बड़े दिल वाले
- सुलभ– आसानी से उपलब्ध
- सुधा की धार– गाय काअमृत जैसा दूध
- सहनशीलता– सहने की शक्ति
- आगर- भंडार, खज़ाना
- श्रम– मेहनत
- तरते हैं– पार करते हैं, सहते हैं
- उचित– सही
- गर्व- अभिमान, आत्मसम्मान
- उत्सव– समारोह
- पर्व- त्योहार
- प्रहरी– पहरेदार
- रक्षक– सुरक्षा करने वाला
- मीन मेख– निकालना, तर्क वितर्क करना
- बुध- बुद्धिमान, विद्वान
- वाद- वाद विवाद, तर्क, बहस
- शाखामयी बुद्धि- फैलाव वाली बुद्धि, व्यर्थ की उलझी हुई चतुराई
- तजकर- छोड़कर
- मूल धर्म– मूल कर्तव्य, वास्तविक धर्म
- धरते हैं- अपनाते हैं, निभाते हैं
- भोग– सुख
- अन्नदाताओं- अन्न देने वाले किसानों
- हरते है- दूर करते हैं
Related:
Chapter 5 – गाता खग
- खग – पक्षी
- प्रातः – सुबह
- तट – किनारा
- संध्या – शाम
- मंगल – कल्याण
- मधुमय – आनंदपूर्ण
- अपलक – एकटक
- तारावलि – तारों की पंक्ति
- अनुभव – तजुरबा, समझ
- अवलोक – देखकर
- नीरव – मौन, खामोश, चुपचाप।
- हँसमुख – प्रसन्न, खिले हुए
- प्रसून – पुष्प, फूल
- उर – हृदय
- सौरभ – सुगंध
- जग – संसार
- कूल – किनारा
- विलोक – निर्जन, एकांत, शून्य
- उमंग – आनंद, उल्लास
- नित – हमेशा
- कैंप कैंप – काँपती
- हिलोर – जल में उठने वाली तरंग या लहर
- बुद्बुद् – बुलबुला
- विलीन – लुप्त, जो घुल गय़ा या मिल गया हो
- आशय – उद्देश्य
Related:
Chapter 6 – जड़ की मुसकान
- जड़- पेड़ का वह भाग जो जमीन के भीतर होता है और वृक्ष को आधार व पोषण देता है।
- सदा- हमेशा
- इतिहास- बीती हुई कहानी
- गड़ाए- दबाए
- तना हूँ- दृढ़ता पूर्वक खड़ा हूँ
- जहाँ बिठाल दिया गया था– जहाँ रोप दिया गया था।
- प्रगतिशील जगती- प्रगति करता हुआ संसार।
- डोला- गतिशील
- तिल भर– तिल के दाने के बराबर
- सहलाया चोला- सुविधा भोगी शरीर
- तने से फूटीं- तने से उत्पन्न हुई हैं।
- दोल- हिलना
- कमाल– विशेषता, गुण
- ध्वनि-प्रधान दुनिया– शब्दों की दुनिया;
- हर-हर स्वर- सुरीली आवाज
- मर्मर स्वर- हल्की, मधुर सरसराहट की ध्वनि
- मर्मभरा- भावपूर्ण, हृदयस्पर्शी
- नूतन- नया
- पतझर में झर– पतझड़ में पत्तियाँ गिरना
- बहार फूट फिर छहरती हैं- वसंत ऋतु में फिर से नए पत्ते निकलना
- विथकित- थका हुआ
- चित्त– मन
- पंथी- पथिक, यात्री
- शाप-ताप हरतीं हैं- थके पथिक की पीड़ा और दुख दूर करती हैं
- प्रसंग- इस पद्यांश में पत्तियाँ डालियों को महत्त्वहीन बता रहीं हैं।
- डालों को छाप लिया– शाखाओं पर छा जाना, शाखाओं को ढक लेना
- चल-चपल- चंचल, इधर-उधर हिलने-डुलने वाली
- मचल रही हैं- चंचलता से लहराना
- पराग- परागकण
- यश-गंध– ख्याति और सुगंध
- भ्रमर– भौंरे
- बौराए हैं- मतवाले होकर मंडराए हैं
Related:
Chapter 7 – ममता
- प्रकोष्ठ- महल के सदर फाटक के पास का कमरा इमारत के भीतर का आँगन
- युवती- स्त्री
- शोण- एक नदी
- तीक्ष्ण– तेज
- प्रवाह- बहाव
- विधवा- पति-रहित स्त्री
- वेदना– पीड़ा
- मस्तक में आँधी- मन में उथल-पुथल, बेचैनी
- कंटक शयन- कांटों की सेज
- विकल– बेचैन
- दुहिता– पुत्री, बेटी
- अभाव- कमी
- तुछ– महत्वहीन
- निराश्रय– आश्रय हीन
- विडम्बना- हालात की मार, इच्छा के विरुद्ध हालात होना
- व्यथित– दुखी, पीड़ित
- स्नेहपालिता– स्नेह से पाली हुई
- दुश्चिन्ता– परेशानी
- अनुचर– सेवक, पीछे चलने वाला
- थाल– बड़ी प्लेट या परात
- पद-शब्द– पाँवों की आहट
- उपहार- तोहफ़ा, भेंट
- आवरण– ढकने वाली चीज़, पर्दा
- सुवर्ण- सोना
- पीलापन– पीला रंग
- विकीर्ण– फैलना
- म्लेच्छ– विदेशी या विधर्मी (उस समय के दृष्टिकोण से अपवित्र माने जाने वाले लोग)
- उत्कोच- रिश्वत, घूसखोरी
- अनर्थ- बुरा काम
- पतनोन्मुख- पतन की ओर जाती हुई
- सामंत वंश– राजवंश, रियासत का शासक परिवार
- अधिकार करना– कब्जा करना
- मंत्रीत्व- मंत्री का पद, मंत्री होना
- विपद्- मुश्किल
- परम पिता– ईश्वर
- भू-पृष्ठ– धरती, भूमि-भाग
- मूर्ख- बुद्धिहीन, नासमझ
- डोली- पालकी, जिसमें महिलाएँ बैठकर यात्रा करती थीं
- तांता- लम्बी कतार
- धक्-धक् करना- घबराहट या चिंता से दिल का तेज़ धड़कना
- रोहतास-दुर्ग– रोहतास का किला
- तोरण- मुख्य द्वार या प्रवेश-द्वार
- पठान– अफगान मूल के सैनिक
- अपमान- बेइज़्ज़ती
- कोष– खजाना
- छली– धोखेबाज़, कपटी
- धर्मचक्र बिहार– प्रसिद्ध बौद्ध धर्मस्थल (सारनाथ के पास)
- मौर्य और गुप्त सम्राट– भारत के प्राचीन शक्तिशाली राजवंश
- कीर्ति का खंडहर- गौरव और वैभव का टूटा हुआ अवशेष
- भग्नचूड़ा- टूटा हुआ शिखर या मीनार
- तृणागुल्म- घास-फूस और झाड़ियाँ
- प्राचीर- दुर्ग या इमारत की दीवार
- विभूति- वैभव, महानत
- ग्रीष्म रजनी- गर्मी की रात
- चन्द्रिका- चाँदनी
- स्तूप– बौद्ध शिक्षा के स्तंभ (खंभे
- भग्नावशेष- खंडित टुकड़े
- मलिन- धुंधला
- दीपालोक– दीपक प्रकाश
- पाठ– धार्मिक ग्रंथ का पढ़ना
- भीषण- डरावना
- हताश- निराश
- कपाट– दरवाज़ा
- आश्रय- शरण, सहारा
- विपन्न– विफल, हारकर
- असमर्थ- अक्षम, थका हुआ
- क्रूर- आततायी, निर्दयी
- भीषण- भयानक, डरावना
- निष्ठुर– दयाहीन
- प्रतिबिंब- परछाईं या छवि
- कुटी- छोटी झोपड़ी
- आश्रय– शरण, सहारा
- अश्व- घोड़ा
- धम से बैठ जाना- अचानक गिर जाना या ज़ोर से बैठ जाना
- ब्रह्मांड- तीनों लोक (अंतरिक्ष, पृथ्वी और पाताल)
- विपत्ति- कठिनाई, मुश्किल, मुसीबत
- विधर्मी- दूसरे धर्म वाले, धर्म से विपरीत
- आततायी- अत्याचारी, आक्रमणकारी
- विरक्त- (दुःखी होकर) उदासीन हो जाना
- अतिथि- मेहमान
- कर्त्तव्य– जिम्मेदारी
- छल- धोखा, कपट
- तैमूर का वंशधर– तैमूर (मुगल वंश के पूर्वज) का वंशज
- दुर्ग- किला
- पथिक– यात्री, राहगीर
- ब्राह्मण कुमारी– ब्राह्मण जाति की कन्या
- महिमामय– तेजस्वी, महानता से युक्त
- मुखमंडल– चेहरा
- विश्राम- आराम करना
- खंडहर- टूटी-फूटी इमारत।
- संधि– जोड़
- अश्वारोही– घुड़सवार
- प्रांत– क्षेत्र, इलाका
- चित्कार– जोर से निकली हुई आवाज़, पुकार
- सचेष्ट- सजग, प्रयत्नपूर्वक
- मृगदाव– हिरण वाला जंगल
- उपक्रम- तैयारी, आरंभ
- आश्रय पाया- शरण मिली
- चौसा- बिहार का एक स्थान जहाँ हुमायूँ और शेरशाह का युद्ध हुआ था
- मुगल-पठान युद्ध– मुगल शासक हुमायूँ और पठान शासक शेरशाह सूरी के बीच लड़ा गया युद्ध
- जीर्ण कंकाल– कमज़ोर ढांचा
- सहभागिनी- साथी, साथ देने वाली
- सीपी– खोल या छोटा पात्र जिससे पानी पिलाया गया
- धुन- ध्यान या विचार में मग्न अवस्था
- चित्र- नक्शा या रेखाचित्र
- छप्पर– घास-फूस या लकड़ी से बनी हुई छत
- विकल कान– कमजोर कान
- शाहंशाह– सम्राट या बादशाह
- आज्ञा– आदेश या हुक्म
- भयभीत– डर से ग्रस्त
- चिर विश्राम गृह- स्थायी विश्राम स्थान
- अवाक्– आश्चर्य से भरकर चुप हो जाना
- प्राण पक्षी- जीवन या आत्मा का प्रतीक
- अनंत– जिसका अंत न हो
- अष्टकोण मंदिर– आठ कोणों वाला मंदिर
- शिलालेख- पत्थर पर खुदा हुआ लेख या अभिलेख
- स्मृति– यादगार या स्मरण
- गगनचुम्बी– बहुत ऊँचा, आकाश को छूने वाला
Related:
Chapter 8 – अशिक्षित का हृदय
- विनीत – नम्र
- ऋण – उधार, कर्ज
- जोखिम – ख़तरा
- गिरवी – बंधक, रखा हुआ, किसी से ऋण लेने के लिए किसी वस्तु को रेहन रखना
- धरा हुआ – रखा हुआ
- अंधेर – अनीति, अन्याय, ज़्यादती
- सठिया – सोचने-समझने के योग्य न रह जाना, ऐसी अवस्था में पहुँचना जबकि बुद्धि ठीक से काम करना छोड़ देती है
- ऊल- जलूल बातें – बेकार की बातें
- अन्नदाता – अन्न देकर पालने-पोसने वाला, भरण-पोषण करने वाला व्यक्ति
- व्यतीत – बिताना
- सनक – किसी बात की धुन, मन की झोंक
- लगान – कृषि भूमि पर लगने वाला कर, शुल्क, राजस्व
- दुर्भाग्य – ख़राब भाग्य, खोटी क़िस्मत, बदक़िस्मती
- अनावृष्टि – वर्षा का अभाव, सूखा
- दौड़धूप करना – बहुत मेहनत करना
- क़र्ज – उधार
- दुलक जाना – मर जाना
- वसूल – रकम या वस्तु की वापसी
- हताश – निराश, जिसे आशा न रह गई हो, निराश, नाउम्मीद शक्तिहीन
- शीतल – ठंडी
- निःस्वार्थ – बिना स्वार्थ के
- कीर्ति – प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा, खुशी
- स्मरण – याद
- सहित – साथ
- बड़बड़ाना – अपने आप में धीरे-धीरे बात करना
- मजाल – सामर्थ्य, शक्ति, ताकत
- चल-चलाव – कहीं से चलने अथवा चल पड़ने की क्रिया, तैयारी या भाव
- टुकुर-टुकुर – बिना पलक झपकाए या स्थिर दृष्टि से
- नित्य – हमेशा
- निबोली – नीम का छोटा सा फल
- लाचार – विवश, मजबूर
- घोर – अत्यधिक
- प्रतिष्ठित – सम्मान प्राप्त
- जमाना – समय
- सीधे मुँह बात न करना – घमंड से, अकड़ से अथवा अहंकार दिखाकर बात करना
- चिरंजीव – दीर्घजीवी, बहुत समय तक जीवित रहने वाला
- खैर – कुछ चिंता नहीं, कुछ परवा नहीं
- पावेगा – पाएगा
- प्रबंध – इंतजाम
- अकड़ता हुआ – रौब दिखाता हुआ
- नीयत – इरादा, भावना
- बेईमानी – झूठ, कपट
- शामत – मुसीबत, वबाल अर्थात बहुत बड़ी विपत्ति या संकट
- लठबंद – लाठी लिए हुए
- हाजिर – मौजूद
- मियाद – तय समय
- प्रतिष्ठित – सम्मानित
- तीन-तेरह बकना – इधर-उधर की बाते करना
- व्यर्थ – बेकार
- उदारता – दानशीलता, शीलता
Related:
- Ashikshit Ka Hriday Summary and Explanation
- Ashikshit Ka Hriday Question Answers
- Ashikshit Ka Hriday Character Sketch
Chapter 9 – दो कलाकार
- झकझोरकर– जोर से हिलाकर या झटका देकर
- खिझलाहट- खीझ से भरी हुई
- बदतमीज़- असभ्य
- गलतफहमी- किसी बात को गलत समझ लेना
- चौरासी– 84 संख्या
- योनियाँ– जीवन रूप
- जीव- कोई प्राणी या इंसान
- ट्रॉम- सड़क पर चलने वाला रेल जैसा वाहन
- घनचक्कर- जंजाल
- पाठशाला- स्कूल
- प्रतीक- प्रतिरूप, चित्र
- दाइयाँ- बच्चे की देखभाल करने वाली महिला
- चपरासी- स्कूल या कार्यालय में सहायक कर्मचारी
- पण्डिता- विदुषी
- ढिंडोरा पीटना- जोर-जोर से प्रचार करना
- छात्रावास- वह स्थान जहाँ छात्र/छात्राएँ अपने अध्ययन के दौरान रहते हैं, हॉस्टल
- तल्ला- किसी इमारत की एक मंज़िल
- खुसर-फुसर- धीरे-धीरे और गुपचुप बात करना
- फाटक- प्रवेश द्वार या गेट
- ठाठ- आदर, मान-सम्मान या खास पहचान
- बर्दाश्त- सहन
- वार्डन- छात्रावास या हॉस्टल की प्रधान|
- रोब- अधिकार, दबदबा या प्रभाव
- हाड़ तोड़कर मेहनत करना- अत्यधिक मेहनत करना।
- मेस- हॉस्टल का भोजन कक्ष
- लालटेन- प्रकाश देने वाला का दीपक
- स्टोव- खाना बनाने या गरम करने का उपकरण
- छलछला आना- आँखों में आँसू भर आना
- स्नेह से- प्यार और ममता के भाव से
- पीठ थपथपाना– हौसला देना, सांत्वना देना
- ज्यों-का-त्यों- वैसे ही, किसी बदलाव के बिना
- अटक जाना- रुक जाना
- खत- पत्र
- लगन- मेहनत
- शोहरत- प्रसिद्धि
- अमृता शेरगिल- मशहूर चित्रकार
- गूँज- परावर्तित होकर सुनाई पड़नेवाली आवाज़
- तमन्ना- इच्छा, आकांक्षा
- ब्याह- विवाह, शादी
- कल्याण- भलाई
- अनोखी– विशेष या अलग प्रकार की
- निरक्षरता- अनपढ़ता
- हुनर- कौशल
- समाज का ढाँचा– समाज की व्यवस्था, प्रणाली या संरचना
- स्वयंसेवकों का दल– सेवा कार्य करने वाले लोगों का समूह
- अनुमति- आज्ञा
- खस्ता हालत- बहुत थकावट या कमजोर शरीर की स्थिति
- गुरुदेव- आदरणीय शिक्षक या गुरु
- बाढ़ पीड़ितों- बाढ़ से प्रभावित रहने वाले लोग
- उल्लास- हर्ष या खुशी
- छलका- व्यक्त हुआ
- कमबख्त- बदकिस्मत, हतभाग्य
- लालसा- इच्छा, आकांक्षा
- राह- रास्ता
- हड़बड़ाती सी- जल्दी-जल्दी में
- भिखारिन- गरीब महिला जो भीख मांगती है।
- चर्चा- वाद-विवाद
- तन-मन से- पूरी शक्ति, पूरी लगन और समर्पण के साथ
- धूम मच गयी– बहुत प्रसिद्धि या चर्चा हो गई
- भिखमंगी- गरीब महिला जो भीख मांगती है
- बखान- प्रशंसा
- शोहरत– प्रसिद्धि
- कल्पनाएँ– रचनात्मक विचार
- प्रदर्शनियाँ– कला या चित्रों की सार्वजनिक प्रदर्शनी
- अनाथ- बिना माता-पिता के बच्चा, बेसहारा बच्चा
- इनाम– पुरस्कार
- स्वागत हुआ- आदर-सम्मान
- भूरि-भूरि प्रशंसा– अत्यधिक सराहना
- भीड़-भाड़- बहुत सारे लोगों का एक जगह पर होना
- भेंट- मिलना, किसी से सामना होना
- शौक- रुचि, किसी चीज़ को करने की इच्छा
- अदा- विशेष ढंग, नज़ाकत या आकर्षक रूप
- आश्चर्य– हैरानी
- हैरान होना- आश्चर्यचकित या चकित होना
- टोका- रोका
- सहारा- मदद
- प्रतियोगिता- मुकाबला
- फरमाइश- इच्छा
- बड़प्पन की छाप- श्रेष्ठता या बड़े होने का भाव होना
- परिचय- किसी से मिलवाना, जान-पहचान कराना
- एकटक देखना– देखना
- बेवकूफ बनाना– मूर्ख
- हैरानी से आँखें फैलना– चकित या आश्चर्यचकित होना
- शब्द खो जाना- भाव या विचारों को व्यक्त न कर पाना
Related:
Chapter 10 – नर्स
- नन्हे – छोटे
- क़ायदे – कानून
- बेख़बर – अनजान
- रट – किसी शब्द का बार बार उच्चारण करने की क्रिया
- तन – शरीर
- कसमसाता – अकड़ाते हुए
- दाखिल – प्रवेश
- दिलासा – तसल्ली
- ख़याल – याद
- खिसक – छिपकर चल देना
- तुर्शी – रुष्टता, व्यवहार आदि में दिखाई जाने वाली कटुता
- पौने – किसी संख्या में से चौथा भाग (¼) कम, किसी संख्या के तीन चौथाई भाग
- ख़ामोश – मौन, चुप्पी, शांति
- हिचकी – बहुत रोने से साँस रुकने लगना
- अक्सर – आम तैर पर
- मेहतरानी – सफ़ाई करने वाली
- नैपकिन – रूमाल
- विचलित – अस्थिर, चंचल
- फुर्सत – खाली समय
- कबर्ड – अलमारी
- पायताने – पाँयता, वह दिशा जिधर पैर फैला कर सोया जाए
- ब्राउन – भूरा
- टेंपरेचर – तापमान
- रिकॉर्ड – किसी व्यक्ति, वस्तु आदि के बारे में जानकारी या सूचना दर्ज़ करना
- डोज़ – खुराक
- क्राइस्ट – ईश्वर (ईसा मसीह)
- आया – बच्चे की देख-रेख करने वाली
- कल्पना – अनुमान
- ऑपरेशन – शल्य-क्रिया
- संतोष – तृप्ति, सब्र, संतुष्टि
- सोचों – विचार करने का भाव, चिंतन, चिंता
- इजाज़त – आज्ञा, अनुमति
- यूँ – इस तरह
- गुलदस्ता – फूलों का गुच्छा
- शुक्रगुजार – आभारी, कृतज्ञ
- व्यक्त – प्रकट
- मेहरबानी – अच्छा व्यवहार करना, दया-भाव से पेश आना अर्थात तरस खाना
- बहारों – एक ऐसी जगह जहां हर जगह फूल खिलते हैं, फूलों से हर तरफ़ सजा हुआ स्थान
- रुत – ऋतु, मौसम
- ईर्ष्या – जलन
- ईर्ष्यालु – ईर्ष्या करने वाला, जलने वाला
- मैट्रेन – अधीक्षिका, किसी व्यवहार, बात, काम आदि को ध्यान से देखनेवाली महिला
- वार्निंग – चेतावनी
Related:
Chapter 11 (Part 1) – माँ का कमरा
- पुस्तैनी- जो कई पीढ़ियों से चला आ रहा हो
- बुजुर्ग- वृद्ध
- तरक्की- पदोन्नति
- कोठी- बड़ा घर
- तकलीफ– कष्ट, परेशानी
- पड़ोसन– पड़ोस में रहने वाली महिला
- दुर्गति– दुर्दशा
- जून- दशा
- सफर- यात्रा
- बहू- बेटे की पत्नी
- सोफा-सैट– बैठने का आरामदायक फर्नीचर
- पिछवाड़ा- मकान का पिछला हिस्सा
- गुज़र हो जाएगी- जीवन कट जाएगा
- वक्त- समय
- बरामदा – मकान का खुला या छतदार हिस्सा, आँगन से लगा हुआ भाग
- टिका देना- रख देना, जमा करना
- गुस्लखाना- स्नानघर
- टेपरिकार्डर- गाने सुनने की मशीन
- काश– अगर ऐसा हो पाता, इच्छा व्यक्त करने का शब्द
- नर्म- मुलायम
- लोककथा- लोक में प्रचलित पुरानी कहानियाँ
- हैरान- आश्चर्यचकित होना
- आश्चर्यचकित– हैरान
- डबल-बैड- बड़ा बिस्तर जिस पर दो व्यक्ति आराम से लेट सकें
- बेझिझक– बिना झिझक
- आलिंगन– गले लगाना
Related:
Chapter 11 (Part 2) – अहसास
- एक दिवसीय– केवल एक दिन का
- शैक्षिक भ्रमण- शिक्षा संबंधी भ्रमण के लिए विद्यार्थियों का जाना
- रवाना– प्रस्थान करना, निकल पड़ना
- फौरन– तुरंत
- राहत- आराम
- अंताक्षरी– एक प्रकार का मनोरंजक खेल जिसमें दो दल बन जाते हैं। पहले दल के द्वारा गाए गीत या कविता के अन्तिम अक्षर पर दूसरे दल के द्वारा गीत या कविता गाई जाती है।
- हौसला– मनोबल
- खामोश– चुप
- आसमां- आकाश
- दाखिला- प्रवेश
- ट्रांसफर- तबदीली, बदली, स्थान परिवर्तन
- वैशाखी- सहारा देने वाली लकड़ी, जिस पर अपंग या घायल व्यक्ति चलता है
- दिक्कत- परेशानी
- कक्षा अध्यापक- क्लास टीचर
- स्नेहपूर्ण- प्यार से भरा हुआ
- व्यवहार- चाल-चलन, बर्ताव
- हिम्मत– साहस, शक्ति
- पार्क– बगीचा
- रिफ्रेशमेंट– खाने के लिए कुछ देना
- बेंच- बैठने की लंबी कुर्सी/पट्टी|
- आनंद– मज़ा, खुशी
- फन सिटी- मनोरंजन का स्थान (झूले, खेल और मस्ती की जगह)
- दुर्घटना- हादसा
- बाकी- शेष, अन्य
- समान– बराबर, एक जैसा
- सांस्कृतिक कार्यक्रम- कला, गीत, नृत्य या अन्य गतिविधि
- समूह- झुंड, टोली
- रेंगता हुआ- धीरे-धीरे पेट के बल चलता हुआ
- चेहरे का रंग उड़ना– डर जाना
- फन– साँप का ऊपर उठा हुआ सिर और फैलाया हुआ हिस्सा
- फुंकारना- साँप का तेज़ आवाज़ निकालना, फुफकारना
- फुर्ती– तेज़ी
- निगाहें– नज़र, ध्यान
- पीठ थपथपाना- प्रशंसा करना, शाबाशी देना
- कमाल कर दिया– अद्भुत काम कर दिखाया
- बहादुर– साहसी, वीर
- असली हीरो- सच्चा नायक, सच्चा वीर
- प्रातःकालीन सभा– सुबह की प्रार्थना सभा
- सूझ-बूझ– समझदारी, सही निर्णय लेने की क्षमता
- प्राचार्य महोदय- प्रधानाचार्य
- सम्मानित- आदर से पुरस्कृत करना
- तालियों की गड़गड़ाहट– तालियों की आवाज़
- पूर्णता– पूरा
- अहसास– महसूस करना
Related:
Chapter 12 – मित्रता
- युवा – जवान
- जमाता – आजमाना
- एकांत – अकेला, निर्जन स्थान
- धड़ाधड़ – लगातार
- हेल-मेल – मेल जोल, घनिष्ठता
- परिणत – बदल
- उपयुक्तता – सही होना
- गुप्त – अदृश्य
- आचरण – स्वभाव, व्यवहार
- चित्त – मन
- अपरिमार्जित – जो साफ सुथरा न हो
- प्रवृत्ति – स्वभाव, आदत
- अपरिपक्व – जो पका न हो, अविकसित
- दृढ़ संकल्प – पक्का इरादा
- अवस्था – परिस्थिति
- विवेक – अच्छे-बुरे को पहचानने की क्षमता
- आश्चर्य – हैरानी
- परख – जाँच, परीक्षा
- अनुसंधान – खोज, पड़ताल।
- चटपट – जल्दी-जल्दी, फटाफट
- मैत्री – मित्रता
- आत्मशिक्षा – जीवन-ज्ञान
- सुगम – सरल
- औषध – दवा
- उत्तम – अच्छा
- संकल्प – निश्चय
- त्रुटियों – गलतियों
- कुमार्ग – गलत मार्ग
- सचेत – सावधान
- हतोत्साहित – जिसमें उत्साह न हो
- उत्साहित – उत्साह, हौंसला
- निपुण – कुशल, प्रवीण
- परख – पहचानने की शक्ति
- छात्रावस्था – विद्यार्थी जीवन, छात्र अवस्था
- धुन सवार रहना – किसी काम को निरंतर करते रहने की अनिवार्य प्रवृत्ति, कोई काम करते रहने की इच्छा , लगन
- उमंग – मन में होने वाला आनंद और उत्साह, उल्लास
- खिन्नता – खिन्न होने का भाव, उदासी, चिंता
- बाल मैत्री – बचपन की मित्रता
- मग्न – लीन, लिप्त, प्रसन्न, खुश
- ईर्ष्या – जलन
- अनुरक्ति – आसक्ति, अति अनुराग, प्रेम
- अपार – अत्यधिक
- उद्गार – भले विचार या भाव
- सहपाठी – साथ में पढ़ाई करने वाला
- उक्ति – वचन, वाक्य
- भिन्न – अलग
- कल्पित – बनावटी, नकली
- झंझटों – मुसीबतों
- प्रतिभा – आकृति
- मनभावनी – मन के अनुसार
- चाल – स्वभाव
- स्वच्छंद – स्वतंत्र
- प्रकृति – व्यवहार
- जीवन-संग्राम – जीवन की कठिनाइयाँ
- घृणा – नफ़रत
- पथ-प्रदर्शक – सही रास्ता दिखाने वाले
- प्रीति – प्रेम, प्यार, अनुराग, तृप्ति
- सहानुभूति – हमदर्दी, संवेदना, दया, करुणा
- वांछनीय – इच्छित, अपेक्षित, ज़रूरी
- उग्र – निष्ठुर, क्रूर, क्रोधी
- उद्धत – उग्र, प्रचंड, अक्खड़, अविनीत
- प्रगाढ़ – गहरा
- चिंताशील – जो किसी बात की प्रायः या बहुत चिंता करता रहता हो
- प्रफुल्लित – बहुत अधिक प्रसन्न
- निर्बल – कमजोर
- बली – बलवान
- धीर – गंभीर, विनीत
- उत्साही – आनंद तथा तत्परता के साथ काम में लगने वाला
- आकांक्षा – अभिलाषा, इच्छा, चाह
- युक्ति – उचित विचार, तरकीब, दलील, तर्क
- नीति – राष्ट्र या समाज की उन्नति या हित के लिए निश्चित आचार-व्यवहार
- विशारद – दक्ष, कुशल, निपुण, चतुर
- मन बढ़ाना – हौंसला बढ़ाना
- सामर्थ्य – योग्यता, क्षमता
- दृढ़ – मज़बूत, पक्का
- संकल्प – विचार, इरादा
- आत्मबल – आत्मविश्वास
- प्रतिष्ठित – सम्मानित
- पुरुषार्थी – परिश्रमी, मेहनतकश, कर्मठ
- शिष्ट – अच्छे आचरण या स्वभाव वाला, सज्जन
- विनोद – ख़ुशी, सुख
- ढाढ़स बँधाना – हिम्मत देना
- मनचले – चंचल मनवाला, मनमौजी
- बनाव – बनावटी
- निस्सार – सारहीन, व्यर्थ
- शोचनीय – चिंताजनक
- सात्विकता – सात्विक होने का भाव
- अनंत – जिसका अंत नहीं होता
- गंभीर – गहन
- रहस्य – छिपा हुआ
- इंद्रिय-विषय – इंद्रियों से संबंधित
- नीचाशय – घटिया इरादे
- कुत्सित विचार – बुरे विचार
- कलुषित – दूषित
- कुसंग – बुरी संगत
- सद्वृत्ति – अच्छी बुद्धि
- क्षय – हानि, कम होना
- अवनति – पतन
- चेष्टा – प्रयत्न
- बेधना – घाव करना
- चौकसी – सावधानी
- अभ्यस्त – निपुण
- कुंठित – अप्रखर, अक्षम, कमजोर, मद्धम
- निष्कलंक – बिना कलंक के, पवित्र
Related:
Chapter 13 – मैं और मेरा देश
- पला- बढ़ा, विकसित हुआ
- दुलार- स्नेह
- नगर- शहर
- समाज- लोगों का बड़ा समूह जो साथ रहते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं
- संपर्क- जुड़ाव, संबंध
- संचित- एकत्रित किया हुआ
- ज्ञान- बोध, विद्या
- भंडार- कोष, खजाना
- सहारा- मदद
- मनुष्य- इंसान
- मनुष्यता- मनुष्य होने की अवस्था
- अपूर्णता- अधूरापन, कमी
- स्थिति- हालात या अवस्था
- संगठित- एकत्रित जोड़ा हुआ
- आनंद – खुशी, सुख
- दरार- टूटना, फटना, खांचा
- सीमा- हद
- ममता- प्रेम, स्नेह
- हीन- नीचा, तुच्छ, नगण्य
- अपमान- बेइज्जती, तिरस्कार
- अपराधी- दोषी व्यक्ति
- अधिकार- हक
- अतृप्ति- असंतुष्टि
- अपूर्व– अनोखा, असाधारण
- भूकंप– भूचाल
- आनंद- खुशी
- अधिकारी- किसी कार्य, लोगों का नेतृत्व या नियंत्रण रखने वाला
- भूकंप- प्राकृतिक आपदा जिसमें धरती हिलती है, यहाँ मानसिक झटका या बड़ा बदलाव।
- दीवार- किसी स्थान या व्यक्ति के विचारों और विश्वासों की सीमा या हिस्सा।
- मानस- मन
- तेजस्वी– प्रकाशमान, तेज़,
- स्वर्गीय– दिवंगत, जो अब नहीं है
- राष्ट्र– देश
- पराधीनता– किसी दूसरे के नियंत्रण में होना
- रक्त– खून
- बवंडर- आँधी-तूफान
- झकझोरना- कुछ ऐसा प्रभाव जो गहरा असर डालता है
- कलम- पैन, लेखन का औज़ार
- वाणी- भाषण या बोलने की क्षमता
- भौचक- हक्का-बक्का, हैरान
- संसार- दुनिया, पूरी पृथ्वी
- व्यक्तित्व – इंसान की पहचान, स्वभाव और गुणों का समूह
- गठन- निर्माण, बनावट
- सर्वोत्तम रत्न- सबसे श्रेष्ठ गुण और प्रेरणा
- जोत- रोशनी, प्रकाश
- भेंट- उपहार, देना
- कलंक– धब्बा, शर्मनाक दाग
- गुलामी- पराधीनता, स्वतंत्रता का अभाव
- लज्जा- शर्म, लाज
- अनुभव- तजुर्बा
- पूर्णता- पूरा होना
- कसक- रुक-रुक कर होने वाली पीड़ा, टीस
- गौरव- सम्मान, प्रतिष्ठा
- साधन- संसाधन, उपलब्ध वस्तुएँ
- कर्तव्य- वह काम जो करना जरूरी हो, जिम्मेदारी
- निजी रूप में- व्यक्तिगत तरीके से, अपने लिए
- राज्य- शासन
- स्वतंत्रता- आज़ादी, बंधनों से मुक्त होना
- सम्मान- आदर, मान-सम्मान
- धक्का पहुँचना- चोट लगना, नुकसान होना
- शक्ति- ताकत, क्षमता
- अधिकार- हक
- वैज्ञानिक- वह व्यक्ति जो विज्ञान का अध्ययन करता है
- आविष्कार- नई खोज
- धनपति- बहुत धनवान व्यक्ति
- भामाशाह- धन का दान करने वाला
- त्याग- बलिदान या छोड़ देना
- धनिक- धनवान व्यक्ति
- विचारों की उत्तेजना- मन में भावनाओं और सोच को जगाना
- संशय- संदेह, शंका
- जीवन-शास्त्र – जीवन का अध्ययन या दर्शन
- घोर- गहरा, अत्यंत
- अज्ञान- अनजानी, ज्ञान की कमी
- मुन्ने- छोटा बच्चा
- गुड़िया- खिलौना गुड़िया
- विशाल- बड़ा, व्यापक
- समुद्र- सागर
- तट- किनारा
- स्थान- जगह
- धाराएँ- लगातार बहनेवाली धारा
- दर्शन शास्त्री- दर्शन के विचारक
- युद्ध- लड़ाई
- रसद- आवश्यक सामग्री, सहायता
- किसान- जो खेती करता है
- महत्त्व- अहमियत, अहम चीज
- जय बोलना- उत्साह बढ़ाने वाली आवाज़ लगाना
- अवसर- मौका
- दर्शक- देखने वाले, ऑडियंस
- उभरना- दोबारा साहस पाना, हिम्मत वापस आना
- कवि-सम्मेलन- कविता पढ़ने का कार्यक्रम
- मुशायरों– उर्दू फारसी का कवि सम्मेलन
- दाद देना- प्रशंसा करना, तालियाँ बजाना
- निर्भर- आधारित
- साधारण- सामान्य, आम
- नागरिक- देश का निवासी
- सम्मान- इज्ज़त, आदर
- अकेला चना क्या भाड़ फोड़े– हिंदी में प्रसिद्ध कहावत-इसका अर्थ है अकेला व्यक्ति बड़ा काम नहीं कर सकता, सामूहिक प्रयास और सहयोग जरूरी है
- सौ फीसदी- सौ प्रतिशत, पूरी तरह
- इतिहास- भूतकाल की सच्ची घटनाएँ
- साक्षी- गवाही देने वाला
- नागरिक– देश का निवासी
- स्पष्ट- साफ़, अलग
- महान संत- बहुत बड़े तपस्वी या धार्मिक गुरु
- स्टेशन- ट्रेनों के रुकने का स्थान
- प्लेटफार्म- स्टेशन का वह हिस्सा जहाँ यात्री खड़े होते हैं
- भेंट- उपहार
- मूल्य- कीमत, दाम
- इंकार- मना करना
- आग्रह- हठ, हठपूर्वक प्रार्थना
- गौरव- आदर, सम्मान
- अनुमान- अंदाज़ा लगाना
- निवासी- रहने वाला व्यक्ति
- शिक्षा- पढ़ाई, ज्ञान प्राप्ति
- पुस्तकालय- पुस्तकें रखने और पढ़ने की जगह
- दुर्लभ- कठिनता से प्राप्त होने वाला
- बरामद करना- जब्त करना
- मामला– विषय, घटना
- दंड- सजा
- बोर्ड- सूचना पट्ट
- प्रवेश- किसी स्थान में जाना
- सिर ऊँचा होना– सम्मानित होना
- मस्तक- सिर, सम्मानित स्थान
- लांछित– बदनाम, कलंकित
- साधन- सुविधाएँ, संसाधन
- अध्ययन- पढ़ाई, अध्ययन
- विशालता- बड़ाई, बड़ा रूप
- भावना- मन की कल्पना
- महान- बड़ा, श्रेष्ठ
- राष्ट्रपति- देश का सर्वाेच्च संवैधानिक पदाधिकारी
- राजधानी- देश का मुख्य शहर
- वर्षगाँठ- किसी घटना की सालगिरह
- धूमधाम- बहुत जोश और उत्साह के साथ
- उपहार– तोहफा
- भवन- इमारत, घर
- देहाती- गाँव का रहने वाला
- सेक्रेटरी– सचिव, प्रमुख सहायक अधिकारी
- पैदल- अपने पैरों से चलना
- विश्राम- आराम
- आदर- सम्मान
- हँडिया- एक तरह की मिट्टी का बर्तन
- पाव-भर- 250 ग्राम
- शहद- मधुमक्खी द्वारा बनाया गया मीठा पदार्थ
- निहाल- प्रसन्न एवं संतुष्ट
- हृदय- मन, दिल
- आदेश- हुक्म, निर्देश
- शाही कार– राष्ट्रपति के उपयोग की विशेष गाड़ी
- शाही-सम्मान– विशेष सम्मान
- सौ लालों का एक लाल– सबसे विशेष, श्रेष्ठ
- रंगीन सुतली- रंग-बिरंगी डोरी
- खाट- चारपाई
- कोठी– बंगला, बड़ा घर
- भाव-मुग्ध- भावनाओं से अभिभूत
- स्वीकार करना- मान लेना, ग्रहण करना
- दस्तखत- हस्ताक्षर
- विद्वान- ज्ञानी व्यक्ति
- धनी- अमीर व्यक्ति
- मामूली- साधारण
- देश के अनुकूल– देशहित में
- विवरण- विस्तार
- कसौटी- परख, जाँच
- शक्ति-बोध- अपनी सामर्थ्य, आत्मविश्वास और देश के प्रति गर्व की भावना
- सौंदर्य-बोध- साफ-सफाई, संस्कृति, सुंदरता और अच्छे व्यवहार की समझ
- कुरुचि – बुरी लगन
- राय- सलाह, मत
- चर्चा- बातचीत
- मुसाफिरखाना- यात्री ठहरने का स्थान
- चौपाल- गाँव का बैठक स्थल
- श्रेष्ठ- उत्तम, सबसे अच्छा
- भयंकर- बहुत गहरा, गंभीर
- सामूहिक- समूह से संबंधित
- मानसिक बल– मन की ताकत
- ह्रास- कमी, अभाव
- महाबली- महान शक्तिशाली
- सारथी- रथ हांकने वाला
- पक्ष- दल, टीम
- विजय- जीत
- घोषणा- घोषणा करना, बताना
- हुंकार- गर्जना, नारा
- अजेयता- जिसे हराया न जा सके
- उल्लेख- चर्चा, वर्णन
- सघन- घना, मजबूत
- आत्मविश्वास- खुद पर विश्वास
- संदेह– शक
- तरेड़- दरार
- भावी- आगे का, भविष्य
- पराजय- हार
- नींव- आधार
- भाव- भावना, सोच
- दफ़्तर- कार्यालय
- गली- छोटा रास्ता
- होटल- भोजनालय, विश्राम गृह
- धर्मशाला- यात्रियों के लिए ठहरने का स्थान
- जीनों में- सीढ़ियों में
- पीक- सुपारी/गुटखा आदि का थूकना
- उत्सव- त्योहार
- ठेलमठेल- धक्कम धक्का
- निमंत्रण– बुलावा
- कीमती- महँगा
- ठेस- चोट, नुकसान
- सौंदर्य-बोध – सुंदरता की पहचान
- संस्कृति– सभ्यता, परंपरा
- आघात– गहरी चोट
- कसौटी- परीक्षा, परखने का मापदंड
- मतदान– वोट देना
- मान्यता- विश्वास
- उत्तेजक- भड़काने वाला
- सर्वश्रेष्ठ- सबसे अच्छा
- महापुरुष– बड़ा या महान व्यक्ति
Related:
Chapter 14 – राजेंद्र बाबू
- सर्वथा – सब प्रकार से, सरासर, पूरा
- गद्यात्मक – सादा, सामान्य
- भावात्मक – भावपूर्ण, भावयुक्त
- शीतावकाश – सर्दियों की छुट्टियाँ
- देहाती – गाँव में होने वाला
- वेशभूषा – पहनावा
- घिरे – चारों तरफ़ से घेर लेना
- विराजमान – विद्यमान, मौजूद बैठा हुआ, आसीन
- विहंगम – पक्षी, सूर्य
- उक्त – पहले कही गई, कथित, उल्लिखित
- अभिवादन – आदरपूर्वक किसी को किया जाने वाला प्रणाम या नमस्कार
- स्मृति – स्मरणशक्ति, याददाश्त, अनुस्मरण, (मेमोरी)
- अंकित – चिह्नित, लिखित
- भृकुटी – भौंह
- ठुड्डी – होठों के नीचे का भाग, ठोड़ी
- सुडौल – सुंदर डील-डौल या आकारवाला
- श्यामल – साँवला, श्याम रंग वाला
- झाँई – काली छाया, परछाईं, झलक, आभा
- गेहुआ – गेहूँ के रंग जैसा, गोरे और साँवले के बीच का (शरीर का रंग)
- रोमिल – रोएँदार, त्वचा पर बालोंवाला
- आवरण – परदा, घेरा
- अनायास – आसानी से, स्वतः
- फेंटा – कमर का घेरा, धोती का वह भाग जो कमर के चारों ओर लपेटकर बाँधा जाता है
- पिंडली – टाँग का ऊपरी पिछला भाग जो मांसल होता है
- हड़बड़ी – जल्दी, शीघ्रता
- उपरांत – बाद, अनंतर
- अनुभूति – अहसास, अनुभव
- संपूर्ण – पूरा
- गठन – रचना, बनावट
- प्रतिभा – विलक्षण बौद्धिक शक्ति, समझ
- विशिष्टता – विशेषता
- गरिमा – महत्व, गौरव
- संकुचित – संकीर्ण, तंग
- अनमिल – बेमेल, जो घुला-मिला न हो
- गवाक्ष – छोटी खिड़की, झरोखा
- परिधान – शरीर पर पहना जाने वाला आवरण या पोशाक
- प्रसाधित – सँवारा हुआ, सजाया हुआ
- कृतार्थता – जिसका कार्य सिद्ध हो गया हो, जो उद्देश्य सिद्धि के कारण संतुष्ट या प्रसन्न हो, सफल, कृतज्ञ
- शिलान्यास – भवन, इमारत आदि बनाने से पहले उसकी नींव में पहला पत्थर, ईंट इत्यादि रखे जाने की क्रिया, आरंभ, संस्थापना
- पौत्रियाँ – पोतियाँ
- संरक्षण – पूरी देख-रेख, अधिकार, अपने आश्रय में रखकर पालन-पोषण करने की क्रिया
- पदार्पण – किसी स्थान या क्षेत्र में होने वाला प्रवेश या आगमन
- संभ्रांत – प्रतिष्ठित, सम्मानित
- स्वातंत्र्य – स्वतंत्रता, स्वाधीनता
- अपराजेय – जिसकी पराजय न हो, अजेय
- मिष्ठान्न – मिठाई, मीठा अन्न
- कोलाहल – शोर
- पंडों – नपुंसक, हिंजड़ा, किन्नर
- पलटन – समुदाय, झुंड
- प्राप्य – प्राप्त करने के योग्य
- गंतव्य – ठिकाना, घर
- अपवाद – असामान्यता, छूट
- विलास – आनंद, प्रसन्नता
- कर्मनिष्ठा – कर्तव्य का पालन करने वाला
- अंक – गोद
- आतिथेय – वह व्यक्ति जिसके यहाँ अतिथि ठहरा हो, मेज़बान
- निरन्न – बिना अन्न का, अन्न-रहित
- व्ययसाध्य – जिसका मूल्य अधिक हो, महँगा, कीमती|
- पारायण – किए जाने वाले किसी कार्य की समाप्ति
- अजातशत्रु – जिसका कोई शत्रु या दुश्मन पैदा न हुआ हो
Related:
Chapter 15 – सदाचार का तावीज़
- हल्ला मचना- बहुत शोर होना, अफरा-तफरी मचना
- भ्रष्टाचार- बुरा आचार-विचार
- दरबार- राजा का सभा स्थल जहाँ मंत्री और दरबारी उपस्थित रहते हैं।
- प्रजा- राज्य के लोग, जनता
- हुजूर- सम्मान सूचक शब्द, राजा या उच्च अधिकारी के लिए
- नमूना- उदाहरण, छोटा हिस्सा
- दरबारी- राजा के दरबार में काम करने वाला सेवक या अधिकारी; जो मंत्रियों के साथ बैठता है
- हुजूर- राजा या उच्च अधिकारी को सम्मान से बुलाने का शब्द (जैसे ‘साहब’)
- बारीक- बहुत सूक्ष्म, छोटा
- विराटता- बहुत बड़ा, विशालता
- आदी होना– किसी चीज़ की आदत लग जाना
- छवि– किसी के मन में बना हुआ रूप या चित्र
- सूरत बसी होना– किसी की आकृति या प्रभाव का मन में ठहर जाना
- जाति- यहाँ विशेष रूप से एक समूह या पेशे का उल्लेख है, जैसे ‘विशेषज्ञ’ नामक लोग
- विशेषज्ञ- किसी विषय-विशेष का ज्ञान रखने वाला
- अंजन- काजल
- आँजकर- आँखों में काजल लगाकर
- निवेदन- विनम्र अनुरोध, सौम्य तरीके से कहना
- सौंपे- किसी को कोई काम दे देना, जिम्मेदारी देना
- छानबीन- जाँच-पड़ताल करना
- हाज़िर होना- उपस्थित होना
- स्थूल- मोटा
- सूक्ष्म- बारीक
- अगोचर- अप्रत्यक्ष, अदृश्य
- व्याप्त– समाया हुआ
- अनुभव करना– देखना या महसूस करना; प्रत्यक्ष रूप से जानना
- गुण- विशेषता या प्रकार
- सिंहासन– राजा का आधिकारिक राजसी स्थान
- भुगतान- किसी वस्तु या सेवा के बदले पैसा देना
- दुगुने दाम- असली कीमत से दो गुना मूल्य
- घूस- रिश्वत
- चिंतित– परेशान
- कान खड़े होना– सुनने में रुचि दिखाना, हैरानी
- व्यवस्था में परिवर्तन– प्रशासन, नियम या प्रक्रिया में बदलाव करना
- ठेका- किसी काम को करने के लिए अनुबंध या जिम्मेदारी देना
- ठेकेदार- वह व्यक्ति या संस्था जो ठेका लेकर काम करता है
- विचारणीय- विचार करने योग्य, जिस पर गंभीरता से सोचना चाहिए
- योजना- कार्य करने की रूपरेखा
- स्वास्थ्य बिगड़ना- शरीर की स्थिति खराब होना, बीमार या थकावट महसूस होना
- झंझट में डालना– मुश्किल, परेशानी या उलझन में डालना
- रिपोर्ट को आग के हवाले करना– किसी दस्तावेज़ या रिपोर्ट को नष्ट करना
- मत- राय, सुझाव या विचार
- मुसीबत- कठिनाई या समस्या
- उलट-फेर- बदलाव, परिवर्तन
- परेशानी- कठिनाई
- तरकीब- उपाय, युक्ति
- प्रपितामह- परदादा
- साधु- तपस्या और धर्म के मार्ग पर रहने वाला धार्मिक व्यक्ति
- कंदरा- गुफ़ा
- तपस्या– मन, वचन और शरीर को संयम में रखकर कठिन साधना करना
- महान साधक- अनुभवी और धर्मात्मा व्यक्ति
- सदाचार- अच्छा आचरण
- तावीज़- रक्षा-कवच, मंत्र लिखा कागज़ या धातु का टुकड़ा जिसे हाथ पर या गले में धारण किया जाता है
- मंत्रों से सिद्ध- मंत्रों द्वारा शक्तिशाली या असरदार बनाना
- झोला- थैला जिसमें वे वस्तुएँ रखते हैं
- आत्मा- मनुष्य का भीतर का, अदृश्य और अमर हिस्सा
- विधाता- भगवान
- कल- यंत्र, मशीन
- बेईमानी- चोरी, झूठ या भ्रष्ट व्यवहार
- स्वर– आवाज़
- चिन्तन- सोचना
- भुजा- हाथ
- प्रयोग– किसी चीज़ का अनुभव करने या परखने का तरीका
- सत्ता- शक्ति या प्रभाव
- प्रेरित होना- किसी दिशा में काम करने के लिए उत्साहित होना
- हलचल– शोरगुल, हड़कंप
- महात्मन्– सम्मानपूर्वक साधु या धर्मात्मा व्यक्ति को संबोधित करने का शब्द
- आभारी– किसी का धन्यवाद करने वाला, कृतज्ञ
- सर्वव्यापी– हर तरफ फैला हुआ
- कारखाना– उत्पादन करने की जगह, यहाँ तावीज़ बनाने की फैक्ट्री
- जनरल मैनेजर- कारखाने या किसी कार्य का मुख्य प्रबंधक
- देख-रेख- निगरानी
- मंडली- साधु के सहयोगी या समूह
- सप्लाई करना- उत्पादन करके उपलब्ध कराना
- पेशगी- किसी वस्तु के मूल का वह अंश जो काम करने वाले को पहले ही दे दिया जाता है, अग्रिम
- हल- समाधान
- उत्सुकता– अधीरता, बेचैनी
- वेश बदलकर- अपने सामान्य रूप को बदलकर, पहचान छुपाकर
- कार्यालय- कामकाजी स्थान, जहाँ कर्मचारी अपने कार्य करते हैं
- तनख्वाह- कर्मचारी को महीने में मिलने वाला वेतन
- घूस- रिश्वत
- ईमानदार- जो बेईमानी न करता हो
- आस्तीन- पहनने के कपड़े का वह भाग जो बाँह को ढकता है, बाँह
- असमंजस- दुविधा
Related:
- Sadachar Ka Taviz Summary, Explanation
- Sadachar Ka Taviz Question Answers
- Sadachar Ka Taviz Character Sketch
Chapter 16 – ठेले पर हिमालय
- खासा – बहुत अधिक
- दिलचस्प – दिल को अच्छा लगने वाला
- शीर्षक – वह शब्द जो विषय का परिचय कराने के लिए लेख के ऊपर उसके नाम के रूप में रहता है (हैडिंग)
- यकीन – विश्वास
- सिल – छोटा चोकौर टुकड़ा
- तत्काल – तुरंत, अचानक
- कौंधना – चमकना
- कष्टप्रद – दुख देने वाला
- कुरूप – बेकार, जो दिखने में अच्छा न हो
- सुडौल – सुंदर बनावट वाला
- निर्जन – जहां कोई न हो, एकांत
- उजड़ा-सा – बर्बाद, वीरान, बदहाल, बुरे हाल में
- खिन्न – दुःखी, उदास
- स्तब्ध – दृढ़, स्थिर
- अपार – अथाह, बहुत अधिक
- बेसाख्ता – अपने आप, सहसा, एकाएक
- अकस्मात – अचानक
- लोक – दुनिया
- आभास – संकेत
- विस्मय – आश्चर्य, ताज़्ज़ुब, अचंभा
- रुपहला – चाँदी के रंग का, चाँदी-सा
- नगाधिराज – हिमालय
- सम्राट – राजा
- ढाँप – छिपा
- हर्षातिरेक – अत्यधिक प्रसन्नता
- लुप्त – छिपा हुआ, गायब
- छूमंतर – गायब
- व्याकुल – बेचैन, उत्सुक, आतुर
- निरावृत – बिना ढका हुआ
- आसार – लक्षण चिह्न
- अपलक – लगातार, एकटक
- अनावृत – खुला हुआ
- रोमांचक – आश्चर्यजनक
- श्रृंखला – वस्तुओं की क्रमानुसार माला
- संवेदन – अनुभूति
- उज्ज्वल – साफ़, स्वच्छ, निर्मल
- पिराना – पीड़ा होना, दुख अनुभव करना
Related:
Chapter 17 – श्री गुरु नानक देव जी
- कुसंस्कार – बुरी आदत
- ग्रस्त – पीड़ित, प्रभावित
- तत्कालीन – उस समय या उसी समय का
- शोचनीय – चिंताजनक
- शोषक – शोषण करने वाला व्यक्ति
- छुआछूत – अस्पृश्यता
- नस-नस – प्रत्येक हिस्से में
- कराह – पीड़ा में निकलने वाली तीखी आह
- विभूति – महत्ता, बड़प्पन, दिव्यशक्ति
- प्रवर्त्तक – संचालक, आविष्कार करने वाला
- पतनोन्मुखी – विनाश, पतन, गिरावट की ओर
- चतुर्दिक – चारों ओर
- उदात्त भावना – उच्च भावना
- अविचलित – अटल
- पथिक – बटोही, राहगीर, मुसाफ़िर
- पिपासा – तृष्णा, प्यास, किसी चीज़ को पाने की प्रबल इच्छा
- जीविकोपार्जन – जीवन-व्यापन हेतु किया जाने वाला व्यवसाय
- यत्न – प्रयास
- प्रवृत्त – लगना, तत्पर, उन्मुख
- विरक्ति – उदासीनता, खिन्नता
- हुकूमत – शासन, सत्ता
- ज्यादती – अत्याचार
- विचलित – डांवाडोल
- अलोप – एक पेड़ जो सदा हरा रहता है तथा जिसकी लकड़ी चिकनी और मज़बूत होती है
- उद्धार – कल्याण
- सुरुचिपूर्ण मार्ग – मनभावना (मन को अच्छा लगने वाला) उचित सदमार्ग
- ‘सांझे’ धर्म – मानव धर्म
- कुतकों – नीचा दिखाने के लिए की गई अतार्किक बात
- सहज धर्म – सरल, आडम्बर, विधि निषेधों से रहित (मुक्त) धर्म
- पांडित्य – विद्वता, ज्ञानी
- संकीर्ण – छोटी सोच
- करामात – सिद्धि, चमत्कार
- शैली – बात कहने का ढंग, तरीका, पद्धति- विशेष
- अनूठी – अलग, अनोखा, विचित्र, विलक्षण, अदभुत
- नवीन – नया
- विख्यात – प्रसिद्ध, मशहूर
Related:
- Shri Guru Nanak Dev Ji Summary, Explanation
- Shri Guru Nanak Dev Ji Question Answers
- Shri Guru Nanak Dev Ji Character Sketch
Chapter 18 – सूखी डाली
- मानव प्रगति– मनुष्य का विकास या उन्नति
- युग- समय या काल
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता– व्यक्ति की अपनी इच्छा से सोचने और कार्य करने की आज़ादी
- अराजकता– अव्यवस्था
- तानाशाही– निरंकुश शासन
- सभ्य– शिष्ट
- निंदनीय- निंदा के योग्य
- कुटुंब- परिवार
- यूनिट (unit)- एक इकाई, एक समूह
- प्रभुत्व- स्वामित्व, दबदवा
- वट- बरगद का पेड़
- अटल- अडिग, जो हिलता न हो
- आच्छादित- ढका हुआ
- अगणित- असंख्य, बहुत अधिक
- महान- ऊँचा, श्रेष्ठ, बड़ा
- सदियाँ- सौ-सौ वर्षों का समूह
- नाभि- पेट का मध्य भाग
- प्रण- व्रत, दृढ़ निश्चय
- महायुद्ध- बहुत बड़ा युद्ध (यहाँ प्रथम विश्व युद्ध 1914 का संदर्भ)
- मुरब्बा- पच्चीस एकड़ भूमि का वर्ग टुकड़ा;
- कृपा- दया
- संतुष्ट- संतोष मानना
- साहस- हिम्मत
- परिश्रम- मेहनत
- निष्ठा- श्रद्धापूर्ण विश्वास
- दूरदर्शिता- आगे की सोचने की समझ, सूझबूझ
- फ़ार्म- खेत या कृषि
- डेयरी- दूध और उससे बनने वाले पदार्थों का कारखाना
- कस्बा- छोटा शहर
- तहसीलदार- तहसील का प्रधान अधिकारी
- प्रतिष्ठित- सम्मानित
- संपन्न- धनवान
- कुल- वंश, परिवार
- सुशिक्षित- अच्छे से शिक्षित
- पतोहू- पोते की बहू
- प्रतिष्ठा- मान-सम्मान, आदर
- संभावना- उम्मीद
- आदर- सम्मान, सत्कार
- संकट- परेशानी, कठिनाई
- उपस्थित– सामने आना
- ग्रेजुएट– स्नातक
- स्थिर- बिना हिले हुए
- इमारत- भवन, मकान
- बरामदा– घर का खुला भाग
- रांदेवू (Rendezvous)– मिलने-जुलने का स्थान, सम्मिलन-स्थल
- सम्मिलन-स्थल- एक साथ मिलने का स्थान
- कोलाहल- शोर
- चरखा करना– सूत कातना या कपड़ा बनाने का कार्य करना
- गप्पें उड़ाना– बातें करना, हँसी-मजाक करना
- स्नानागार- स्नान करने का स्थान, बाथरूम
- अहाता– आँगन
- रसोई- खाना बनाने की जगह
- निबटना- काम समाप्त करना
- ध्वनि- आवाज़, स्वर
- गैलरी- संकरा गलियारा, जिसमें कमरे होते हैं
- मंझली बहू- बीच की बहू
- निस्तब्धता– चुप्पी
- भृकुटी- भौंहें
- बिफरी हुई– गुस्से से भरी हुई, तमतमाई हुई
- मायका- स्त्री का जन्मस्थान, जहाँ उसके माता-पिता रहते हैं
- असभ्य- जिसे शालीनता का ज्ञान न हो, अनादरपूर्ण व्यवहार करने वाला
- आश्चर्य से– हैरानी या चकित होकर
- बैठक- घर का वह कमरा जहाँ मेहमानों को बैठाया जाता है
- दोष– गलती, कमी
- मिश्रानी- मिश्र (विशिष्ट वर्गीय ब्राह्मण) की स्त्री
- स्तंभित– अचंभित
- झाड़न- सफाई करने का कपड़ा या झाड़ू जैसी चीज़
- सलीका- ढंग, तरीका
- तुनक कर– गुस्से में आकर, चिड़चिड़ेपन से
- काम की परख- काम को समझने और जाँचने की योग्यता
- फूहड़- गँवार
- गुज़ारा कर लेना– किसी तरह काम चला लेना
- विस्मित- आश्चर्यचकित, हैरान
- नाक-भौं चढ़ाना– नापसंदगी दिखाना
- नमूना– उदाहरण, मिसाल
- भाभी- भाई की पत्नी, यहाँ
- विस्मित- चकित होकर सोच में पड़ जाना।
- परख- समझ या पहचान की क्षमता
- प्रवेश करती हैं- भीतर आती हैं
- जली-कटी बातें- व्यंग्यपूर्ण या ताने मारने वाले शब्द
- बरबस- ज़बरदस्ती, बिना कारण या इच्छा के
- अनादर– अपमान
- मुँह विचका कर- तिरस्कार या नाखुशी दिखाते हुए मुँह बनाना
- गज भर की जवान- बहुत बातूनी, ज्यादा बोलने वाली
- घृणा- नफरत, तिरस्कार की भावना
- रूखी-सूखी- सादा भोजन
- चुपड़ी- घी लगी हुई
- अपना-सा मुँह लेकर रह जाना– शर्मिंदा होना, कुछ न कह पाना
- गत बनाना- किसी को असहज स्थिति में डालना
- बुजुर्ग- वृद्ध, पूर्वज
- नंगे-बुच्चे जंगलों में घूमना- बिना सभ्यता के रहना
- अनुकरण करना– नकल करना, किसी की तरह आचरण करना
- पारा चढ़ना- गुस्से में होना, क्रोध में आना
- गिटपिट करना– अंग्रेजी या किसी दूसरी भाषा में जल्दी-जल्दी बोलना
- आपत्ति करना- विरोध या असहमति जताना
- तहसीलदार- सरकारी राजस्व अधिकारी का पद
- सिर फिर गया- घमंडी या अपने आप को ऊँचा समझने लगना
- बेडौल- जिसका आकार सुंदर न हो
- चटाई- बांस या पत्तों से बनी बिछाने की वस्तु
- चौबीसों घड़ी– हर समय
- बखान किया– प्रशंसा या बड़ाई करना
- बहुमूल्य- कीमती
- भीगी बिल्ली बने- डर के मारे या शर्म से चुप हो जाना
- महाशय- आदरपूर्वक संबोधन (यहाँ परेश के लिए प्रयोग हुआ है)
- मुँह बिचका कर– नाराज़गी या नापसंदगी दिखाना
- कतरनी- चीज़ काटने का औज़ार; यहाँ व्यंग्य में तीखी ज़बान के लिए कहा गया है
- अपना-सा मुँह लेकर रह जाना– निराश या शर्मिंदा हो जाना।
- फटकना- कपड़ों को झाड़ना या झटकना
- मलमल– बारीक कपड़ा
- अबरा- लिहाफ़ के ऊपर का कपड़ा
- गुड़गुड़ाना– हुक्के से निकलने वाली आवाज़
- अहाता- घर का बड़ा खुला आंगन या चबूतरा
- बिस्तर- सोने या बैठने के लिए बिछाई जाने वाली चादर, गद्दा आदि
- हुक्का- तंबाकू पीने का पारंपरिक साधन
- भृकुटी तनना– माथे पर बल पड़ना, गुस्सा या चिंता प्रकट करना
- आदरपूर्वक- सम्मान और विनम्रता से
- दिनचर्या- रोज़मर्रा के काम-काज का क्रम
- जीवंत- जिसमें जीवन या सजीवता महसूस हो
- पारंपरिक- पुराने रीति-रिवाज़ों या परंपराओं से जुड़ा हुआ
- माहौल– माहौल
- केंद्र बिंदु- मुख्य व्यक्ति या ध्यान का विषय
- पनपना- बढ़ना, विकसित होना
- सरसता– मधुरता
- महान- बड़ा, सम्माननीय, ऊँचा
- कष्ट- दुख, तकलीफ़
- शिकायत- नाराज़गी या असंतोष की बात
- खरोंच- हल्की चोट या घाव
- नासूर- नाड़ी व्रण, ऐसा घाव जिसमें से बराबर मवाद निकलता हो
- मरहम– दवा जो घाव या सूजन पर लगाई जाती है
- दर्प- घमंड
- मात्रा- सीमा, परिमाण
- थान- कपड़े का रोल या गट्ठर
- रज़ाई- ओढ़ने का गद्देदार बिस्तर
- अबरे- रज़ाई के लिए इस्तेमाल होने वाला मुलायम कपड़ा
- विचार– सोच, मत, राय
- बड़प्पन– श्रेष्ठता, महानता, ऊँचा चरित्र या स्वभाव
- पृथक होना– अलग होना, दूरी बना लेना
- शाखा- टहनी
- स्नेह– प्रेम, ममता, सच्ची भावना
- धुँधली पड़ना– कमज़ोर या अस्पष्ट हो जाना
- लुप्त हो जाना- समाप्त हो जाना, खो जाना
- महानता- ऊँचाई, श्रेष्ठता, बड़प्पन
- व्यवहार– चाल-चलन, आचरण
- अनुभव कराना- महसूस कराना
- ठूँठ वृक्ष- सूखा या बिना पत्तों-शाखाओं वाला पेड़
- सिक्का बैठना- प्रभाव जमना, मान्यता पाना
- शीतल-सुखद छाया– ठंडी और सुख देने वाली छाया
- मन का ताप- मन की बेचैनी या दुःख
- हर लेना– दूर कर देना, समाप्त कर देना
- भीनी-भीनी सुगंध– हल्की और मनमोहक खुशबू
- पुलक भरना– हर्ष या आनंद से भर जाना, रोमांचित होना
- तनिक– ज़रा, थोड़ा
- लज्जित– शर्मिंदा, संकोच में
- दहेज- विवाह के समय लड़की के साथ दिया जाने वाला सामान या उपहार
- जी में आया- मन में विचार आया, सोचा
- झिझकते क्यों हो– संकोच क्यों कर रहे हो
- कै दिन हुए हैं- कितने ही दिन हुए हैं
- इकलौती बेटी– अकेली संतान, जिसका कोई भाई या बहन न हो
- नाते-रिश्तेदारों- सम्बन्धी
- भीड़-भाड़- अधिक लोगों का समूह, घर में हलचल वाला वातावरण
- कोलाहल- शोरगुल, चहल-पहल
- ऊब जाती होगी- थकान या अरुचि महसूस करती होगी
- निंदा करना- बुराई करना, आलोचना करना
- ताने देना- व्यंग्य या चुभती हुई बात कहना
- हाथ बिक जाना– किसी के प्रभाव या वश में हो जाना
- अपमान- तिरस्कार
- परायों में आ जाना- अपने लोगों से दूर होना
- आज़ादी- स्वतन्त्रता
- हस्तक्षेप- दखल
- आलोचना- निंदा या बुराई
- गृहस्थी बसाना– घर बसाना
- स्वेच्छापूर्वक- अपनी इच्छा के
- तबदीली- नौकरी या पद से दूसरे स्थान पर जाना
- प्रबंध– इंतज़ाम
- उद्विग्नता- परेशानी
- अन्यमनस्कता- अनमनापन, उचाटता
- तिलमिलाहट- बेचैनी
- असंभव- मुमकिन नहीं
- ठूँठ- वृक्ष का बचा हुआ धड़।
- सिहर- काँप
- सुशिक्षित– पढ़ी-लिखी
- सुसंस्कृत- अच्छे संस्कारों वाली
- तिरस्कार– अपमान, उपेक्षा
- अपार कृपा- बड़ी या असीम कृपा
- आदर-सत्कार– सम्मान और प्रेमपूर्वक व्यवहार
- उचित- ठीक
- शेष- बाकी
- कश- खींचना, फूँक
- साक्षी- प्रमाण
- अतिरिक्त- छोटी बहू को छोड़कर
- कुछ क्षण- कुछ समय
- कुटुंब के प्राणी– परिवार के सदस्य
- सहसा- अचानक
- विशेष अभिप्राय– खास उद्देश्य
- दोष- गलती
- अत्यधिक- ज्यादा
- आदेश- आज्ञा, हुक्म।
- व्यक्तित्व– व्यक्ति की विशेषता या गुण
- वास्तव- यथार्थ, सत्य
- दर्जे से- पद से
- परामर्श- सलाह
- वातावरण- आस-पास
- क्षण- पल, समय
- पृथक- अलग
- नाता- संबंध, जुड़ाव
- निरादर- अपमान, अनादर
- समय नष्ट करना- वक्त खराब करना।
- सीमित रखना- नियंत्रित रखना, मर्यादा में रखना
- पूर्णतया- पूरी तरह से
- अंग- हिस्सा, भाग
- बुद्धिमती- समझदार, विवेकी
- ज्ञानार्जन- ज्ञान प्राप्त करना, सीखना
- आकांक्षा- इच्छा
- फलें-फूलें- उन्नति करें, सुखी रहें
- शीतल वायु के परस से झूमें– ठंडी हवा के स्पर्श से झूम उठना
- सिहरा देना– डर या दुःख से कांप उठना
- गला भर आता है– भावुक हो जाना, आँसू आने लगना
- क्षमा- माफ
- अदृश्य हो जाते हैं- दिखना बंद हो जाना
- समाज- समुदाय
- राष्ट्र- देश
- सुदृढ़- मजबूत
- विशाल– विस्तृत
- तीसरा दृश्य– नाटक का तीसरा भाग
- तख्त- लकड़ी से बनी बड़ी चौकी
- आकुलता– बेचैनी, उदासी या व्याकुल भाव
- विचार– सोच
- रद्दी सामान– बेकार या पुराने और घटिया सामान
- कबाड़ी का गोदाम– कबाड़ बेचने वाले के घर जैसा गंदा-भरा स्थान
- रुठ जाना- नाराज़ हो जाना
- निगोड़ी- अकेली, निराश्रित
- फूट-फूटकर रोना- बहुत ज़ोर से और लगातार रोना
- विश्वसनीय– भरोसेमंद, जिस पर भरोसा किया जा सके
- आज्ञाकारी- आज्ञा मानने वाली, जो कहे वही करे
- सिफ़ारिश करना– किसी के लिए अनुशंसा करना, समर्थन देना
- भावुक स्त्री- जिसमें भावना हो
- तनिक- थोड़ा सा, ज़रा सा
- उद्यत– तैयार, चलने की मुद्रा में
- नष्ट- बर्बाद करना
- अनुभवी- अनुभव वाली, जानकार
- दयानतदार– ईमानदार, नेक और भरोसेमंद व्यक्ति
- पीढ़ी-दर-पीढ़ी- एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक लगातार
- अन्यमनस्क- ध्यान कहीं और होना, मन न लगना
- चिढ़ कर– झुंझलाहट या खीझ के साथ
- हर्ज- नुकसान, हानि
- रुआँसी आवाज़– रोने जैसी धीमी और भर्राई हुई आवाज़
- काँटों में घसीटना– कठिन या दुखद स्थिति में डालना
- परायों का-सा व्यवहार- अपनापन न दिखाना, दूर का या अजनबी जैसा व्यवहार करना
- रुलाई को रोक कर– रोना बंद करना, आंसू थाम लेना
- कहकहे- जोर-जोर से हँसी, ठहाका
- फावड़े- मिट्टी हटाने का औज़ार
- ताका किये मुटर-मुटर– ताका लगाकर मुँह बनाये रहना, हैरान होकर बुदबुदाना
- खम ठोंक रहा है- जोश/गर्व से कदम पटकना या ढिंढोरा पीटना, दिखावा करना
- नीरवता- शान्ति
- क्लांत- थका हुआ, ऊब-सा हुआ
- खिन्न– उदास
- मुई आदत- (लोक-भाषा) बुरी या अजीब आदत; यहाँ ‘हँसने की आदत’ के लिए कहा गया है
- खलल- बाधा
- सतर्क- सावधान
- कहकहा लगाना– ज़ोर से हँसना, ठहाका लगाना
- गोदाम- भंडारघर, जहाँ अनाज या अन्य सामान रखा जाता है
- गेहूँ छँटवाना- गेहूँ साफ़ करवाना
- अस्त- डूबना
- महरियाँ- नौकरानियाँ, कामकाज करने वाली महिलाएँ
- उकाब- गरुड़, एक बड़ी जाति का गिद्ध
- उकाब-सी- बाज़ जैसी; तेज़, चौकन्नी और डराने वाली
- मारोमार करती– गुस्से में प्रहार करने जैसी हरकत करना या हंगामा मचाना
- आर्द्र- नम, द्रवित
- अपरिचितों में आना– अनजान या अजनबी लोगों के बीच आ जाना
- सन्न रह जाना- एकदम चुप या स्तब्ध हो जाना
- तनिक सा- थोड़ा सा, ज़रा सा
- निढाल होकर– बहुत थकी या कमजोर अवस्था में, बिना शक्ति के
- सिसकना- रोते समय धीरे-धीरे आवाज़ निकलना
- परमात्मा के लिए– भगवान के नाम पर, ईश्वर की कसम से
- सहसा- अचानक
- ठिठक जाना– अचानक रुक जाना, हैरानी से ठहर जाना
- आश्चर्य से– हैरानी की भावना में
- मैंने तो बहुतेरा कहा– मैंने बहुत बार/काफी समझाने की कोशिश की
- स्वर का अनादर- बोलने के तरीके में असम्मान या अनादर दिखना
- भावावेश- गहरे भाव से बोलना
- रुँधा हुआ कंठ- भावुक होने पर आवाज़ रुक जाना
- सिसक उठना– अचानक रो पड़ना
- सहसा- अचानक
Related:
Chapter 19 – देश के दुश्मन
- आनन- मुख
- कुंकुम– सिंदूर
- नेत्र- आँख
- सभ्य- शालीन, सुशील
- पतलून- पैंट
- मस्तक- माथा
- गौगल्ज़- धूप में लगाया जाने वाला चश्मा
- सम्भ्रांत– रईस, धनी
- डाइनिंग रूम- भोजन करने का कमरा
- ड्राइंग रूम- अतिथियों से मिलने का कमरा, बैठक
- दर्शक– देखने वाले व्यक्ति, श्रोता या सभा में बैठे लोग
- स्वर्गीय- जो अब जीवित नहीं है, दिवंगत
- दरी- मोटा कपड़ा जिसे फर्श पर बिछाया जाता है
- गलीचा- कालीन
- कौच– आराम के लिए लंबा गद्देदार सोफ़ा
- चंपई- चंपा के फूल के रंग का, पीला
- झीने- पतले, महीन, पारदर्शी
- बुकशेल्फ– किताबें रखने की अलमारी या रैक
- कलम– लिखने का यंत्र, पेन
- दवात- स्याही रखने का बरतन
- बसन्त ऋतु- ऋतुओं में एक ऋतु जिसमें फूल खिलते हैं, मौसम सुहावना होता है
- एकत्र करना– इकट्ठा करना, जमा करना
- व्यस्त- काम में लगा हुआ
- रसोई- खाना बनाने का स्थान
- सिर खपा कर- कठिन परिश्रम करके, बहुत सोचकर
- आफत– मुसीबत, परेशानी
- यूनिवर्सिटी– विश्विद्यालय
- प्रोफेसर– प्राध्यापक
- शान– गौरव, गर्व की बात
- शिथिलता से– कमजोरी या थकान से
- रुआंसे स्वर में– रोने जैसे स्वर में, भावुक होकर
- अनर्थ- बड़ा संकट, दुर्भाग्य
- कष्ट– दुख, पीड़ा या तकलीफ़
- नाड़ी पकड़ते हुए– नब्ज देखकर स्वास्थ्य की स्थिति जानना
- व्यथित-सी होकर– दुखी और बेचैन होकर
- वज्र-पात- भारी आघात, अचानक दुखद घटना का घटित होना
- उन्मुख- किसी चीज़ की ओर निर्देशित
- बाघा बॉर्डर- भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित एक प्रसिद्ध सीमा चौकी
- बाल बांका नहीं हो सकता- किसी को जरा भी हानि नहीं पहुँचना
- निष्ठुर- कठोर हृदय, दया या संवेदना रहित
- कलेजा धक-धक करना– भय या चिन्ता से हृदय की गति तेज हो जाना
- दिव्य बलिदान– श्रेष्ठ और पवित्र त्याग
- अर्घ्य चढ़ाते हैं- सम्मानपूर्वक पूजन करना या श्रद्धा व्यक्त करना
- निछावर- न्योछावर, बलिहारी
- गौरव– सम्मान
- गर्व- अभिमान
- दुर्बल- कमजोर
- आशंका– शंका का भाव
- बलिदान- त्याग
- हृदय पर पत्थर रख लिया था– अत्यधिक दुख को सहन करते हुए मन को कठोर बना लिया था
- हिम्मत टूट चुकी है- साहस या आत्मबल समाप्त हो जाना
- देह- शरीर
- जर्जर- कमजोर
- बाल बाँका होना– तनिक भी हानि या चोट पहुँचना
- रुआँसी– रोने को होने वाली
- साश्चर्य– आश्चर्य से, हैरानी के भाव से
- तकलीफ़– पीड़ा
- कुशल क्षेम– राजी खुशी
- चिट्ठी-विट्ठी– पत्र या संदेश
- खैर-खबर– हालचाल या समाचार
- लापरवाही– असावधानी या ध्यान न देना
- दिल पर क्या गुजरती है– मन में कितना दर्द या चिंता होती है
- दम मारने को टाइम नहीं- अत्यधिक व्यस्त होना, विश्राम का समय न मिलना
- निरे बहाने- केवल झूठे कारण या बहाने बनाना
- तस्करों से निपटना– अपराधियों से मुकाबला करना
- भिड़ंत– टकराव, संघर्ष या मुठभेड़
- स्मगलर– तस्कर; जो चोरी-छिपे सीमा पार माल लाते या ले जाते हैं
- दिल का दौरा- हृदयाघात जैसा अनुभव होना, हृदय की गति असामान्य हो जाना
- वीरांगना- वीर स्त्री
- पौने नौ- समय. 8:45 बजे
- बाल भी बाँका नहीं हुआ– तनिक भी नुकसान न पहुँचना, पूरी तरह सुरक्षित रहना
- हैड कांस्टेबल- पुलिस विभाग में एक पद
- सब इंस्पेक्टर- थाने का निरीक्षक या अधिकारी, एक पुलिस पद
- हत्यारे – कसाई- निर्दयी व्यक्ति, यहाँ स्मगलरों के लिए प्रयोग किया गया
- वीरता- साहस
- सूझ-बूझ- समझदारी
- मोर्चा लिया– दुश्मन का सामना किया
- बहादुर बेटा– साहसी पुत्र
- प्रस्थान- किसी का स्थान छोड़कर चले जाना
- सौगंध- कसम या शपथ
- एब- दोष या कमी, नकारात्मक आदत
- पेट तना है- अधिक भोजन करने से भरा हुआ पेट
- एकाध- गिनती में बहुत कम, एक आध
- तस्करों का गिरोह- अवैध सामान लाने-ले जाने वाले अपराधियों का समूह
- अमावस– वह रात्रि जब चाँद नहीं निकलता, पूर्ण अंधकार वाली रात
- संतरी- चौकीदार या प्रहरी, सीमा या कैंप की सुरक्षा करने वाले सैनिक
- गश्त- पुलिस कर्मचारियों का पहरे के लिए घूमना
- चौकन्ने– सतर्क
- सन्नाटा– गहरी शांति, जब कोई आवाज न हो
- क्षण भर में- बहुत थोड़े समय में, पलभर में
- जवानों को तैनात कर दिया– सैनिकों को अपनी-अपनी जगह पर खड़ा कर दिया
- निडर- जिसे डर न लगे
- राक्षस- क्रूर व्यक्ति
- स्वार्थ– केवल अपने हित की चिंता करना
- हित– भलाई
- हैंड्ज़ अप– हाथ ऊपर करो
- भयंकर– अत्यंत डरावना या भयावह
- सहसा- अचानक, एकाएक
- गप्पें- व्यर्थ या मनोरंजक बातें
- रिसर्च– शोध कार्य
- फुर्ती से- जल्दी, तत्परता से
- आलिंगन– गले लगाना
- बांहें– हाथ
- शर्मीली- संकोची, लज्जाशील
- अभिवादन– नमस्कार करना
- जनाब- सम्मानपूर्वक सम्बोधन
- चिट्ठी-पत्री- पत्र या संदेश
- बे-बात- बिना कारण, व्यर्थ
- मुठभेड़– टकराव
- प्रस्थान– चले जाना
- बहादुरी– साहस, वीरता
- अटैंड- उपस्थित होना, भाग लेना
- मान भरी मुद्रा– हल्का रूठाना, नाराज़गी का भाव
- राह देखते-देखते– प्रतीक्षा करते-करते
- आँखे पथरा गई– बहुत देर इंतज़ार करते-करते थक जाना
- परवाह- चिंता, ध्यान
- प्राणों की आशंका- जीवन को खतरा होने की संभावना
- प्राणों की बाजी- जान जोखिम में डालना
- उलाहने भरे स्वर– शिकायत भरे शब्द
- लबालब- पूरी तरह भरा हुआ
- प्रतिमा- मूर्ति, प्रतीक रूप
- बाकायदा– ढंग से
- कैफियत- हाल समाचार, विवरण
- हाज़िर-नाज़िर- साक्षी, उपस्थित और गवाह
- दरबार- अदालत, न्यायालय
- गुप्तचर– जासूस
- पुलिस पिकिट– पुलिस का घेरा
- सतर्क- चौकन्ना
- बार्डर– सीमा रेखा
- कैंसिल– रद्द
- इरादा- निश्चय, संकल्प
- अंदाज़ा– अनुमान
- घना- सघन, बहुत अधिक पेड़ों वाला
- ऊबड़-खाबड़- असमतल, कठिन रास्ता
- चैलेंज किया– ललकारा
- चुनौती- ललकार
- खड्डे में- गड्ढे में
- मोर्चाबन्दी- किसी शत्रु के आक्रमण को रोकने या बचाव के लिए तैयारी करना
- उपयुक्त- उचित, ठीक
- प्राण प्रिया– अत्यंत प्रिय पत्नी
- डिसक्वालिफिकेशन– अयोग्यता
- सकपकाकर– घबरा कर, हड़बड़ी में
- प्रवेश- अंदर आना
- बधाई– शुभकामना, अभिनंदन
- थैंक्यू- धन्यवाद
- खबरदार- चेतावनी या मना करने का भाव
- क्लास मेट– सहपाठी
- हाथापाई– झगड़ा, हाथ से लड़ाई
- रोटी हजम नहीं होती थी- बिना झगड़े चैन नहीं पड़ता था
- ट्रांसफर- स्थानांतरण, पद बदलना
- लंगोटिये यार– बहुत घनिष्ठ, बचपन का मित्र
- सम्मान- आदर
- टोककर- बीच में बोलकर, रोकते हुए
- गवर्नर साहब- राज्यपाल, प्रदेश के सर्वोच्च पदाधिकारी
- विचार मग्न- सोच में डूबा हुआ
- विधवा पत्नियाँ– जिनके पति की मृत्यु हो चुकी है
- रकम- धनराशि, पैसा
- ठोकर मारना– अस्वीकार करना, त्याग देना
- मर्यादा- कुल या परिवार की प्रतिष्ठा और गरिमा
- करुणा- दया
- गर्व से छाती फुलाना– अत्यंत गर्व महसूस करना
- अनुकरणीय- जिसे देखकर अन्य लोग प्रेरणा लें
- पूज्य– आदरणीय, सम्माननीय
- अभिवादन- नमस्कार या प्रणाम
Related: