NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Bhag 3 पानी की कहानी Important Question Answers Lesson 16

 

Class 8 Hindi Pani Ki Kahani Question Answers- Looking for Pani Ki Kahani question answers for CBSE Class 8 Hindi Vasant Bhag 3 Book Chapter 16? Look no further! Our comprehensive compilation of important questions will help you brush up on your subject knowledge.

 

सीबीएसई कक्षा 8 हिंदी वसंत भाग 3 पुस्तक पाठ 16 के लिए पानी की कहानी प्रश्न उत्तर खोज रहे हैं? आगे कोई तलाश नहीं करें! महत्वपूर्ण प्रश्नों का हमारा व्यापक संकलन आपको अपने विषय ज्ञान को बढ़ाने में मदद करेगा। कक्षा 8 के हिंदी प्रश्न उत्तर का अभ्यास करने से परीक्षा में आपके प्रदर्शन में काफी सुधार हो सकता है। हमारे समाधान इस बारे में एक स्पष्ट विचार प्रदान करते हैं कि उत्तरों को प्रभावी ढंग से कैसे लिखा जाए। हमारे पानी की कहानी प्रश्न उत्तरों को अभी एक्सप्लोर करें उच्च अंक प्राप्त करने के अवसरों में सुधार करें।

 

The questions listed below are based on the latest CBSE exam pattern, wherein we have given NCERT solutions to the chapter’s extract based questions, multiple choice questions, short answer questions, and long answer questions

 

Also, practicing with different kinds of questions can help students learn new ways to solve problems that they may not have seen before. This can ultimately lead to a deeper understanding of the subject matter and better performance on exams. 

 

  • Pani Ki Kahani Extract Based Questions
  • Pani Ki Kahani Multiple Choice Questions
  • Pani Ki Kahani Questions Answers
  • Pani Ki Kahani Extra Question Answers
  • Class 8 Hindi पानी की कहानी Question Answers Lesson 16 – सार-आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)

    सारआधारित प्रश्न बहुविकल्पीय किस्म के होते हैं, और छात्रों को पैसेज को ध्यान से पढ़कर प्रत्येक प्रश्न के लिए सही विकल्प का चयन करना चाहिए। (Extract-based questions are of the multiple-choice variety, and students must select the correct option for each question by carefully reading the passage.)

     

    1) मैं आगे बढ़ा ही था कि बेर की झाड़ी पर से मोती-सी एक बूँद मेरे हाथ पर आ पड़ी। मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब मैंने देखा कि ओस की बूँद मेरी कलाई पर से सरक कर हथेली पर आ गई। मेरी दृष्टि पड़ते ही वह ठहर गई। थोड़ी देर में मुझे सितार के तारों की-सी झंकार सुनाई देने लगी। मैंने सोचा कि कोई बजा रहा होगा। चारों ओर देखा। कोई नहीं। फिर अनुभव हुआ कि यह स्वर मेरी हथेली से निकल रहा है। ध्यान से देखने पर मालूम हुआ कि बूँद के दो कण हो गए हैं और वे दोनों हिल-हिलकर यह स्वर उत्पन्न कर रहे हैं मानो बोल रहे हों।

    प्रश्न 1. उपर्युक्त गद्यांश के लेखक का नाम बताएं।
    (क) कामतानाथ
    (ख) रामचंद्र तिवारी
    (ग) सूरदास
    (घ) सूर्यकांत त्रिपाठी
    उत्तर – (ख) रामचंद्र तिवारी

    प्रश्न 2. बूँद को किसके समान बताया गया है?
    (क) चाद के
    (ख) मोती के
    (ग) हीरा के
    (घ) पानी के
    उत्तर – (ख) मोती के

    प्रश्न 3. ओस की बूँद कलाई पर से सरक कर कहाँ पर आ गई।
    (क) हथेली पर
    (ख) जमीन पर
    (ग) पत्ते पर
    (घ) हाथ पर
    उत्तर – (क) हथेली पर

    प्रश्न 4. किसकी झंकार सुनाई देने लगी ?
    (क) वायलिन की झंकार
    (ख) हवा की झंकार
    (ग) पत्तों के हिलने की
    (घ) सितार के तारों की
    उत्तर – (घ) सितार के तारों की

    प्रश्न 5. बूँद के कितने कण हो गए ?
    (क) तीन
    (ख) चार
    (ग) दो
    (घ) तीन
    उत्तर – (ग) दो

    2) “मैं लगभग तीन दिन तक यह साँसत भोगती रही। मैं पत्तों के नन्हें-नन्हें छेदों से होकर जैसे-तैसे जान बचाकर भागी। मैंने सोचा था कि पत्ते पर पहुँचते ही उड़ जाऊँगी। परंतु, बाहर निकलने पर ज्ञात हुआ कि रात होने वाली थी और सूर्य जो हमें उड़ने की शक्ति देते हैं, जा चुके हैं, और वायुमंडल में इतने जल कण उड़ रहे हैं कि मेरे लिए वहाँ स्थान नहीं है तो मैं अपने भाग्य पर भरोसा कर पत्तों पर ही सिकुड़ी पड़ी रही। अभी जब तुम्हें देखा तो जान में जान आई और रक्षा पाने के लिए तुम्हारे हाथ पर कूद पड़ी।’’ इस दुख तथा भावपूर्ण कहानी का मुझ पर बडा़ प्रभाव पडा़। मैंने कहा- “जब तक तुम मेरे पास हो कोई पत्ता तुम्हें न छू सकेगा।’’

    प्रश्न 1. बूँद तीन दिन तक कहाँ साँसत भोगती रही ?
    उत्तर – पेड़ की पत्तियों पर

    प्रश्न 2. पत्तों के नन्हें-नन्हें छेदों से होकर जैसे-तैसे जान बचाकर कौन भागी।
    उत्तर – बूँद

    प्रश्न 3. बूँद लेखक हाथ पर क्यों कूद पड़ी?
    उत्तर – क्योंकि सुबह होने तक सहारा पाना चाहती थी।

    प्रश्न 4. साँसत शब्द का सही अर्थ _____ है।
    उत्तर – कष्ट

    3) समुद्र का भाग बनकर मैंने जो दृश्य देखा वह वर्णनातीत है। मैं अभी तक समझती थी कि समुद्र में केवल मेरे बंधु-बांधवों का ही राज्य है, परंतु अब ज्ञात हुआ कि समुद्र में चहल-पहल वास्तव में दूसरे ही जीवों की है और उसमें निरा नमक भरा है। पहले-पहले समुद्र का खारापन मुझे बिल्कुल नहीं भाया, जी मचलाने लगा। पर धीरे-धीरे सब सहन हो चला। एक दिन मेरे जी में आया कि मैं समुद्र के ऊपर तो बहुत घूम चुकी हूँ, भीतर चलकर भी देखना चाहिए कि क्या है? इस कार्य के लिए मैंने गहरे जाना प्रारंभ कर दिया। मार्ग में मैंने विचित्र-विचित्र जीव देखें। मैंने अत्यंत धीरे-धीरे रेंगने वाले घोंघे, जालीदार मछलियाँ, कई-कई मन भारी कछुवे और हाथों वाली मछलियाँ देखीं। एक मछली ऐसी देखी जो मनुष्य से कई गुना लंबीं थी। उसके आठ हाथ थे। वह इन हाथों से अपने शिकार को जकड़़ लेती थी।

    प्रश्न 1. उपर्युक्त गद्यांश के पाठ का नाम बताएं।
    उत्तर – पानी की कहानी

    प्रश्न 2. बूँद समुद्र का भाग बनकर कौन-सा दृश्य देखा ?
    उत्तर – अनोखा नजारा देखा, जिसका वर्णन करना बूँद के लिए बहुत कठिन है।

    प्रश्न 3. निरा नमक कहाँ भरा है?
    उत्तर – समुद्र में

    प्रश्न 4. मछलियाँ अपने शिकार को कैसे पकड़ लेती थी?
    उत्तर – हाथों से

    4) मैं अपने दूसरे भाइयों के पीछे-पीछे चट्टान में घुस गई। कई वर्षों में कई मील मोटी चट्टान में घुसकर हम पृथ्वी के भीतर एक खोखले स्थान में निकले और एक स्थान पर इकट्ठा होकर हम लोगों ने सोचा कि क्या करना चाहिए। कुछ की सम्मति में वहीं पड़ा रहना ठीक था। परंतु हममें कुछ उत्साही युवा भी थे। वे एक स्वर में बोले-हम खोज करेंगे, पृथ्वी के हृदय में घूम-घूम कर देखेंगे कि भीतर क्या छिपा हुआ है।’’
    ’’अब हम शोर मचाते हुए आगे बढ़े तो एक ऐसे स्थान पर पहुँचे जहाँ ठोस वस्तु का नाम भी न था। बड़ी-बड़ी चट्टानें लाल-पीली पड़ी थीं। और नाना प्रकार की धातुएँ इधर-उधर बहने को उतावली हो रही थीं।

    प्रश्न 1. पृथ्वी के भीतर एक खोखले स्थान तक पहुँचने में बूँद को कितना दूर चलना पड़ा?
    उत्तर – कई मील दूर

    प्रश्न 2. उत्साही युवकों से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
    उत्तर – निरंतर आगे बढ़ने की

    प्रश्न 3. बड़ी-बड़ी चट्टानें ___ पड़ी थीं?
    उत्तर – लाल-पीली

     

    Class 8 Hindi Vasant Lesson 16 पानी की कहानी बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

    बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) एक प्रकार का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन है जिसमें एक व्यक्ति को उपलब्ध विकल्पों की सूची में से एक या अधिक सही उत्तर चुनने के लिए कहा जाता है। एक एमसीक्यू कई संभावित उत्तरों के साथ एक प्रश्न प्रस्तुत करता है।

    प्रश्न 1. ‘पानी की कहानी’ पाठ के लेखक ____ हैं?
    (क) सूरदास
    (ख) नरोत्तम दास
    (ग) प्रेमचंद
    (घ) रामचंद्र तिवारी
    उत्तर – (घ) रामचंद्र तिवारी

    प्रश्न 2. बूँद प्रारंभिक अवस्था में किस रूप में थी?
    (क) बर्फ के रूप में
    (ख) सागर के रूप में
    (ग) वाष्प के रूप में
    (घ) पानी रूप में
    उत्तर – (ग) वाष्प के रूप में

    प्रश्न 3. लेखक के हाथ पर बेर की झाड़ी से क्या गिरा?
    (क) मोती-सी एक बूँद
    (ख) बेर का पत्ता
    (ग) बर्फ के टुकड़ा
    (घ) पत्ता
    उत्तर – (क) मोती-सी एक बूँद

    प्रश्न 4. बूँद के हथेली पर पड़ते ही लेखक को किस तरह की ध्वनि सुनाई पड़ी?
    (क) वीणा के तारों-सी
    (ख) गिटार के तारों-सी
    (ग) सितार के तारों-सी
    (घ) वायलिन के तारों-सी
    उत्तर – (ग) सितार के तारों-सी

    प्रश्न 5. लेखक की कलाई से हथेली पर आकर बूँद के कितने कण हो गए थे?
    (क) तीन
    (ख) दो
    (ग) चार
    (घ) पाँच
    उत्तर – (ख) दो

    प्रश्न 6. ‘असह्य’ शब्द का क्या अर्थ है?
    (क) जो सहा न जा सके
    (ख) जो सहा जा सके
    (ग) जो कहने योग्य हो
    (घ) इनमें से कोई नही
    उत्तर – (क) जो सहा न जा सके

    प्रश्न 7. लेखक की कलाई पर बूँद कहाँ से आ गिरी?
    (क) नीम के पेड़ से
    (ख) बेर के पेड़ से
    (ग) फूल के पेड़ से
    (घ) जामुन के पेड़ से
    उत्तर – (ख) बेर के पेड़ से

    प्रश्न 8. निरा नमक कहाँ भरा हुआ है?
    (क) पानी में
    (ख) कुंए में
    (ग) तालाब में
    (घ) समुद्र में
    उत्तर – (घ) समुद्र में

    प्रश्न 9. पेड़ से गिरने वाली बूँद लेखक को निम्नलिखित में से कैसी लगी?
    (क) सोने-सी
    (ख) हीरे-सी
    (ग) चाँदी-सी
    (घ) मोती-सी
    उत्तर – (घ) मोती-सी

    प्रश्न 10. ‘उन्मत्त’ शब्द का क्या अर्थ है?
    (क) उमंग
    (ख) अनंत
    (ग) मतवाला
    (घ) इनमें से कोई नही
    उत्तर – (ग) मतवाला

    प्रश्न 11. सरिता के दिन किस के लिए मज़े के थे?
    (क) पेड़-पौधों के लिए
    (ख) अन्य जल-जीवों के लिए
    (ग) पानी की बूँद के लिए
    (घ) मछलियों के लिए
    उत्तर – (ग) पानी की बूँद के लिए

    प्रश्न 12. प्राकृतिक सौंदर्य कब निखर उठता था?
    (क) सूर्य की किरणें पड़ने पर
    (ख) अंधेरा होने पर
    (ग) शाम हो जाने पर
    (घ) चाँदनी रात हो जाने पर
    उत्तर – (क) सूर्य की किरणें पड़ने पर

    प्रश्न 13. ‘स्वच्छंद’ शब्द का क्या अर्थ है?
    (क) दूसरों की इच्छा
    (ख) अपनी इच्छा
    (ग) स्वतंत्र इच्छा
    (घ) इनमें से कोई नही
    उत्तर – (ख) अपनी इच्छा

    प्रश्न 14. हद्रजन – ओषजन शब्द का सही अर्थ ____है?
    (क) हाइड्रोजन – ऑक्सीजन
    (ख) हरिजन – अरजन
    (ग) द्रव – ओष
    (घ) हाइड्रोजन – ओजोन
    उत्तर – (क) हाइड्रोजन – ऑक्सीजन

    प्रश्न 15. आभामंडल या उल्का किसे कहा गया है?
    (क) ग्रहराज को
    (ख) पृथ्वी को
    (ग) प्रकाश पिंड को
    (घ) चंद्रमा को
    उत्तर – (ग) प्रकाश पिंड को

    प्रश्न 16. बूँद कितने दिन तक कष्ट भोगती रही ?
    (क) तीन दिन तक
    (ख) दो दिन तक
    (ग) एक दिन तक
    (घ) चार दिन तक
    उत्तर – (क) तीन दिन तक

    प्रश्न 17. कौन-सी दो गैसें सूर्य के घेरे में लपटों के रूप में मौजूद रही?
    (क) नाइट्रोजन और ऑक्सीजन
    (ख) मीथेन और एथेन
    (ग) कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड
    (घ) हाइड्रोजन और ऑक्सीजन
    उत्तर – (घ) हाइड्रोजन और ऑक्सीजन

    प्रश्न 18. बूँद ने निम्नलिखित से कौन-सा जीव नहीं देखा था?
    (क) भारी कछुवे
    (ख) जालीदार मछलियाँ
    (ग) मगरमच्छ
    (घ) कछुवे
    उत्तर – (ग) मगरमच्छ

    प्रश्न 19. बूँद तीन दिन तक कहाँ दु;ख भोगती रही?
    (क) जाल में फंसकर
    (ख) पत्तियों पर
    (ग) वायुमंडल में फंसकर
    (घ) तने और पत्तियों के बीच फंसकर
    उत्तर – (घ) तने और पत्तियों के बीच फंसकर

    प्रश्न 20. बूँद को बाहर निकलने का रास्ता कहाँ से मिला?
    (क) पत्तियों के छिद्र से
    (ख) जड़ के रोयें से
    (ग) तने के छिद्र से
    (घ) फूलों की पंखुड़ियों से
    उत्तर – (क) पत्तियों के छिद्र से

     

    Class 8 Hindi पानी की कहानी प्रश्न और उत्तर Questions Answers

    पाठ से

    प्रश्न 1. लेखक को ओस की बूँद कहाँ मिली?
    उत्तर – सुबह काम पर जाते समय बेर के पेड़ पर से लेखक की हथेली पर एक बून्द गिरी। वही ओस की बून्द थी।

    प्रश्न 2. ओस की बूँद क्रोध और घृणा से क्यों काँप उठी?
    उत्तर – ओस की बूँद के अनुसार पेड़ की जड़ों के रोएँ बहुत निर्दयी होते हैं। वे बलपूर्वक जल-कणों को पृथ्वी में से खींच लेते हैं। कुछ को तो पेड़ एकदम खा जाते हैं और ज्यादातर पानी के जो कण हैं वो अपने असस्तिव को खो देते है और उनका सब कुछ छीन जाता है और पेड़ के द्वारा उन्हें बाहर निकाल दिया जाता है, यानी के वह अपना रूप खो देते हैं। यह सब बताते हुए ओस की बून्द का शरीर क्रोध और घृणा से काँप रहा था।

    प्रश्न 3. हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को पानी ने अपना पूर्वज/पुरखा क्यों कहा?
    उत्तर – ओस की बून्द लेखक को बताती है कि अरबों वर्ष पहले ‘हाइड्रोजन’ और ’ऑक्सीजन’ के मिलने से वह पैदा हुई है। उन्होंने आपस में मिलकर अपना प्रत्यक्ष अस्तित्व गँवा दिया है और उसे उत्पन्न किया है। इसी कारण वह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अपना पूर्वज/पुरखा कहती है।

    प्रश्न 4. “पानी की कहानी” के आधार पर पानी के जन्म और जीवन-यात्रा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए?
    उत्तर – “पानी की कहानी” के आधार पर पानी का जन्म अरबों वर्ष पहले ‘हाइड्रोजन’ और ‘ऑक्सीजन’ के मिलने से पानी का जन्म हुआ और तब से लेकर पानी की जीवन यात्रा बहुत ही विचित्र रही है। जन्म के बाद पानी ने ठोस रूप बर्फ का रूप लिया और गर्म धारा के द्वारा तरल रूप ले लिया। वहां से समुद्र के तल तक यात्रा कर के जमीन के द्वारा ज्वालामुखी तक पहुँच गया और वहां पर गर्मी के कारण वाष्प रूप ले लिया और आकाश में आंधी के साथ मिल गया। अधिक वाष्प कण हो जाने पर बारिश के रूप में वापिस पृथ्वी पर आ गया। वहाँ से नदियों के सहारे दोबारा जमीन द्वारा सोख लिया गया और पेड़ों द्वारा वाष्पीकरण से दोबारा भाप की स्थिति में आ कर वायुमंडल में घूमने लगा।

    प्रश्न 5. कहानी के अंत और आरम्भ के हिस्से को स्वयं पढ़ कर देखिए और बताइए कि ओस की बूँद लेखक को आपबीती सुनाते हुए किसकी प्रतीक्षा कर रही थी?
    उत्तर – ओस की बूँद लेखक को आपबीती सुनाते हुए सूर्य के निकलने की किसकी प्रतीक्षा कर रही थी, ताकि वह सूर्य की ऊष्मा से भाप बन कर उड़ सके।

    पाठ से आगे

    प्रश्न 1. जलचक्र के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए और पानी की कहानी से तुलना करके देखिये की लेखक ने पानी की कहानी में कौन – कौन सी बातें विस्तार से बताई हैं ।
    उत्तर – पृथ्वी पर मौजूद जल के एक रूप से दूसरे में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को जल चक्र कहते हैं। जल का
    स्वरूप स्थिति एवं जलवायु के अनुसार परिवर्तित होता रहता है । गैसीय अवस्था में वायुमंडल में जलवाष्प के रूप
    में, ठोस अवस्था में सूक्ष्म हिम कणों के रूप में एवं द्रव अवस्था में जल बूंदों के रूप में पाया जाता है ।
    लेखक ने पानी की कहानी में सब बातें विस्तार से बताई हैं –
    हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से पानी बनने की प्रक्रिया
    पानी का पहाड़ों पर बर्फ रूप में जमा होना, हिमखंड का टूटना तथा ऊष्मा पाकर पिघलकर पानी बनना
    पानी की बूंद का सागर की गहराई में जाना तथा विभिन्न समुद्री जीवों को देखना
    ज्वालामुखी के विस्फोट के रूप में बाहर आना आदि

    प्रश्न 2. समुद्र के तट पर बसे नगरों में अधिक ठंड और अधिक गर्मी क्यों नहीं पड़ती?
    उत्तर – समुद्र के तट पर बसे नगरों में अधिक ठंड और अधिक गर्मी इसलिए नहीं पड़ती क्योंकि समुद्र के तट पर सदा नमी बनी रहती है। जिसके वजह से वहाँ का वातावरण एक समान रहता है।

    प्रश्न 3. पेड़ के भीतर फव्वारा नहीं होता, तब पेड़ की जड़ों से पत्ते तक पानी कैसे पहुँचता है? इस क्रिया को वनस्पति शास्त्र में क्या कहते हैं? क्या इस क्रिया को जानने के लिए कोई आसान प्रयोग है? जानकारी प्राप्त कीजिए।
    उत्तर – पेड़ की जड़ों व तनों में जाइलम और फ्लोएम नामक कोशिकाएँ होती हैं जो पानी को जड़ों से पत्तियों तक पहुँचाती है। इस तरह पेड़ के भीतर फव्वारा नहीं होने पर भी पानी पत्ते तक पहुँच जाता है इस क्रिया को वनस्पति शास्त्र में ‘संवहन’ (ट्रांसपिरेशन) कहते हैं।
    इस क्रिया को जानने के लिए एक आसान प्रयोग है जैसे – दीपक की बाती में तेल का ऊपर चढ़ना

    अनुमान और कल्पना

    प्रश्न 1. अन्य पदार्थों के समान जल की भी तीन अवस्थाएँ होती हैं । अन्य पदार्थों से जल की इन अवस्थाओं में एक विशेष अंतर यह होता है कि जल की तरल अवस्था की तुलना में ठोस अवस्था (बर्फ) हलकी होती है । इसका कारण ज्ञात कीजिए।
    उत्तर – जल की तीन अवस्थाएँ निम्नलिखित है।
    ठोस
    द्रव
    गैस
    जल की द्रव अवस्था की तुलना में उसकी ठोस अवस्था (बर्फ) हल्की होने का कारण यह है कि पानी के घनत्व की अपेक्षा उसका घनत्व कम होता है। कम घनत्व के कारण ही बर्फ हल्की होती है।

    प्रश्न 2. पाठ के साथ केवल पढ़ने के लिए दी गई पठन-सामग्री ‘हम पृथ्वी की संतान!’ का सहयोग लेकर पर्यावरण संकट पर एक लेख लिखें।
    उत्तर – पठन – सामग्री हम पृथ्वी की संतान’ की मदद से पर्यावरण पर लेख।

    पर्यावरण संकट
    जिस स्थान पर मनुष्य रहता है उसके आसपास दो प्रकार के आवरण मौजूद होते हैं पहला हवा का अदृश्य आवरण तथा दूसरा दृश्य आवरण हमारे चारों ओर विद्यमान इसी आवरण को पर्यावरण कहते हैं पर्यावरण शब्द ‘परि’ और ‘आवरण’ इन दो शब्दों के योग से बना है । ‘परि’ और ‘आवरण’ का सम्यक अर्थ है- वह आवरण जो हमें चारों ओर से ढके हुए है, आवृत किए हुए है। हमारे आसपास मौजूद पेड़- पौधे, पहाड़, धरती, नदियाँ, जल, हवा, खनिज पदार्थ तथा अनेक जीव-जंतु इस पर्यावरण के अंग हैं ये सभी मिलकर पर्यावरण को प्रभावित करते हैं किंतु मनुष्य की बुरी आदतें जैसे पानी दूषित करना, बर्बाद करना, वृक्षों की अत्यधिक मात्रा में कटाई तथा अन्य तरीकों से पर्यावरण को बहुत क्षति पहुँचाता है। लेकिन पर्यावरण की सुरक्षा, सुंदरता तथा स्वस्थ बनाए रखने के लिए अपने कर्तव्यों को नहीं निभाता है।
    पेड़-पौधों के अंधाधुंध कटाई से हमारे पर्यावरण को सर्वाधिक प्रभावित किया है मनुष्य खेती और इमारतों के लिए जगह बनाने के लिए जंगल और पेड़-पौधों को काट रहे हैं, लेकिन इससे उन जीव-जंतुओं को नुकसान हो रहा है जिन्हें घरों की नहीं वनों की जरूरत है। विश्व में बढ़ती कार्बन-डाई-आक्साइड की मात्रा तथा तापमान में लगातार हो रही वृद्धि वनों के विनाश का ही परिणाम है। पृथ्वी पर बढ़ते तापमान के कारण विश्व सभ्यता को अमृत और पोषक जल प्रदान करने वाले ग्लेशियर या तो लुप्त हो गए है या लुप्त होने के ओर बढ़ रहे है। आज विश्व भर की सभी प्रसिद्ध नदियाँ जैसे – गंगा, यमुना, नर्मदा, राइन, सीन, मास, टेम्स आदि भयानक रूप से प्रदूषित हो चुकी है। इनमें रहने वाले जीवों की जान पर बन आई है तथा इन नदियों के किनारे बसे लोगों का जीवन भी दूभर हो गया है। पृथ्वी
    के ऊपर जोन गैस की मोटी परत जो हमारा रक्षा कवच है वह भी खतरे में पड़ी है। इसलिए सूर्य का ताप धरती की
    आर बढ़ता जा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग (पृथ्वी का तापमान) बढ़ने से छोटे-बड़े द्वीप व महाद्वीप के तटीय क्षेत्रों के डूब
    जाने का खतरा बढ़ता जा रहा है। प्राकृतिक आपदाएँ जैसे भूचाल, तूफान आदि बढ़ते जा रहे हैं। बेवक्त बरसातें व
    गर्मियों में अधिक गर्मी, सर्दियों में अधिक सर्दी भी पर्यावरण प्रदूषण के कारण हैं।
    आज सभी मनुष्यों का कर्तव्य बनता है कि पर्यावरण से हम जितना कुछ ले रहे हैं उसके बदले में कुछ देना भी सीखें।’ पृथ्वी बचाओ’, ‘पर्यावरण बचाओ’, ‘वन-महोत्सव’ जैसे कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाकर उसे सफल बनाएँ तथा देश की सीमा से ऊपर उठकर अपने पर्यावरण को स्वच्छ तथा सुंदर बनाने का प्रयास करें।

    भाषा की बात

    प्रश्न 1. किसी भी क्रिया को पूरी करने में जो भी संज्ञा आदि शब्द संलग्न होते हैं, वे अपनी अलग-अलग भूमिकाओं के अनुसार अलग-अलग कारकों में वाक्य में दिखाई पड़ते हैं; जैसे-“ वह हाथों से शिकार को जकड़ लेती थी।”
    जकड़ना क्रिया तभी संपन्न हो पाएगी जब कोई व्यक्ति (वह) जकड़नेवाला हो, कोई वस्तु (शिकार) हो जिसे जकड़ा जाए। इन भूमिकाओं की प्रकृति अलग-अलग है। व्याकरण में ये भूमिकाएँ कारकों के अलग-अलग भेदों; जैसे- कर्ता, कर्म, करण आदि से स्पष्ट होती हैं।
    अपनी पाठ्यपुस्तक से इस प्रकार के पाँच और उदाहरण खोजकर लिखिए और उन्हें भलीभाँति परिभाषित कीजिए।

    उत्तर – पाँच उदाहरण निम्नलिखित है-

    1) मैं प्रति क्षण उसमें से निकल भागने की चेष्टा में लगी रहती थी।
    मैं – कर्त्ता कारक

    2) आगे एक और बूँद मेरा हाथ पकड़कर ऊपर खींच रही थी।
    पकड़कर – संबंध कारक

    3) कुछ नौजवानों ने ड्राइवर को पकड़कर मारने-पीटने का मन बनाया।
    नौजवानों ने – कर्ताकारक
    ड्राइवर को – कर्म कारक

    4) मैं आगे बढ़ा ही था कि बेर की झाड़ी पर से मोती-सी बूंद मेरे हाथ पर आ गिरी।
    मैं – कर्ता कारक
    बेर की – संबंध कारक
    झाड़ी पर से – अपादान कारक
    मेरे हाथ पर – अधिकरण कारक

    5) यदि संसार में बदलू को किसी बात से चिढ़ थी तो वह थी काँच की चूड़ियों से।
    संसार में – अधिकरण कारक
    बदलू को – कर्मकरण
    किसी बात से – करण कारक
    काँच की चूड़ियों – संबंध कारक

     

    Class 8 Hindi पानी की कहानी अतिरिक्त प्रश्न उत्तर (Extra Question Answers)

    प्रश्न 1. ‘पानी की कहानी’ पाठ किस शैली में लिखी गई है? इसमें बूँद किससे अपनी कहानी सुना रही है?
    उत्तर – ‘पानी की कहानी’ एक आत्मकथात्मक लेख है। इसमें बूँद लेखक से अपनी कहानी सुना रही है।

    प्रश्न 2. ‘पानी की कहानी’ पाठ में बून्द अपनी रक्षा के लिए किस पेड़ से और किसके हथेली पर कूद जाती है?
    उत्तर – ‘पानी की कहानी’ पाठ में एक ओस की बून्द अपनी रक्षा के लिए बेर के पेड़ पर से लेखक की हथेली पर कूद जाती है ।

    प्रश्न 3. बूँद के पूर्वज कौन थे और वे कहाँ थे?
    उत्तर – बूँद के पूर्वज हद्रजन (हाइड्रोजन) और ओषन ऑक्सीजन नामक दो गैसें थी। जो सूर्यमंडल में लपटों के रूप में विद्यमान (मौजूद) थीं।’’

    प्रश्न 4. बूँद के लिए कौन से दिन बड़े मज़े के थे?
    बूँद के लिए सरिता के दिन बड़े मज़े के थे। जब वह नदी में बह कर जाती थी, वो दिन उसके लिए बहुत ही खुशी के दिन थे। नदी कभी भूमि को काटते, कभी पेड़ों को खोखला कर उन्हें गिरा देते। बहते-बहते उत्सुक होकर सब कुछ देखती थी।

    प्रश्न 5. सूर्य के काँपने का कारण क्या था?
    उत्तर – एक दिन एक प्रचंड प्रकाश-पिंड बड़ी तेज़ी से सूर्य की ओर बढ़ रहा था। ज्यों-ज्यों पास आता जाता था, उसका आकार बढ़ता जाता था। यह सूर्य से लाखों गुना बड़ा था। उसकी महान आकर्षण-शक्ति से सूर्य काँप उठा।

    प्रश्न 6. भाग्य ने बूँद का साथ किस तरह दिया?
    उत्तर – बूँद कई दिनों तक नल से इधर से उधर घूमती रही। प्रति क्षण उसमें से निकल भागने की चेष्टा में लगी रहती थी। एक दिन भाग्य ने बूँद का साथ दिया और रात के समय एक ऐसे स्थान पर पहुँची जहाँ नल टूटा हुआ था। बूँद नल से टपक कर बाहर भागी और पृथ्वी में समा गई। और वह स्वतंत्र हो गई।

    प्रश्न 7. समुद्र की तह में बूँद ने क्या-क्या देखा?
    उत्तर – समुद्र की तह में बूँद ने धीरे-धीरे रेंगने वाले घोंघे, जालीदार मछलियाँ, बड़े-बड़े कछुए, प्रकाश देने वाली मछलियाँ, हाथों वाली मछलियाँ और एक मछली ऐसी देखी जो मनुष्य से कई गुना लंबीं तथा आकार से बहुत बड़ी थी। जब मैं और नीचे समुद्र की गहरी तह में पहुँची तो देखा कि वहाँ भी जगंल है। छोटे ठिंगने, मोटे पत्ते वाले पेड़ बहुतायत से उगे हुए हैं। वहाँ पर पहाडिय़ाँ हैं, घाटियाँ हैं। इन पहाड़ियों की गुफाओं में नाना प्रकार के जीव रहते हैं जो निपट अँधे तथा महा आलसी हैं।

    प्रश्न 8. बूँद के लिए कौन सा दृश्य बहुत ही अनोखा नजारा था?
    बूँद समुद्र का भाग बनकर जो दृश्य देखा वह बहुत ही अनोखा नजारा था, जिसका वर्णन करना बूँद के लिए बहुत कठिन था। बूँद अभी तक यह समझती थी कि समुद्र में केवल बूँद और उसके बंधु-बांधवों का ही राज्य है। परंतु अब जब बूँद समुद्र में टहलने लगी तो उसे पता चला कि यह जो समुद्र में हलचल हो रही है, सिर्फ उनकी वजह से नहीं बल्कि समुद्र में और भी जीव हैं, और भी प्राणियों का वास है। बूँद ने यह भी बताया कि समुद्र में केवल नमक भरा है। पहले समुद्र का खारा पानी उसे जरा सा भी अच्छा नहीं लगा। परंतु बूँद को धीरे-धीरे इन सबकी आदत हो गई।

     

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