
CBSE Class 10 Hindi Chapter 2 “Meera ke Pad”, Line by Line Explanation along with Difficult Word Meanings from Sparsh Bhag 2 Book
कक्षा 12 की कविता 2 पद में, कवयित्री मीरा की रचना में, उन्होंने अपने ईश्वर, भगवान कृष्ण को ‘निर्गुण, निराकार, ब्रह्मा’ कहकर संबोधित किया है, जिसका अर्थ है वह जिसका कोई रूप या आकार नहीं है। वह उन्हें ‘सगुण साकार गोपाल वल्लभ श्री कृष्ण’ और ‘निर्मोही परदेसी जोगी’ भी कहती हैं, जिसका अर्थ है संसार से विमुख। दिए गए पाठ में, दोनों पद भगवान कृष्ण को समर्पित हैं। मीरा अपने भगवान की झूठी प्रशंसा भी करती हैं, उनसे प्रेम करती हैं और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें डांटने से भी नहीं डरतीं। वह भगवान कृष्ण की शक्ति की प्रशंसा करती हैं और उन्हें उनके कर्तव्यों की याद दिलाती हैं।
मीरा के पद का संक्षिप्त अवलोकन (Meera ke Pad Quick Overview)
| विवरण | जानकारी |
| कविता शीर्षक | पद |
| लेखक | मीरा |
| किताब | स्पर्श (सीबीएसई कक्षा 10 हिंदी) |
| कविता नं. | 2 |
| कथावाचक | कवयित्री |
| सेटिंग | मीरा का घर |
| विषय | भक्ति, प्रेम, प्रशंसा, वैराग्य, फटकार |
- मीरा के पद पाठ सार (Meera ke Pad Summary)
- Meera ke Pad Previous Year Questions with Model Answers PDF
- मीरा के पद पाठ की व्याख्या (Meera ke Pad Explanation)
- See Video Explanation of Lesson 2 Meera ke Pad
- मीरा के पद Quiz Infographic
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प्रश्न- कक्षा 10, हिंदी स्पर्श, भाग-2, पाठ-2 “मीरा के पद” में मीरा के पदों का सारांश क्या है?
उत्तर-
- पाठ का परिचय- प्रस्तुत पद हिंदी पाठ्यपुस्तक स्पर्श से लिए गए हैं। इन पदों की कवयित्री मीराबाई हैं। इन पदों में उन्होंने अपने आराध्य श्री कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति, प्रेम और समर्पण की भावना व्यक्त की है।
- भगवान से दुःख दूर करने की प्रार्थना- पहले पद में मीरा भगवान कृष्ण से प्रार्थना करती हैं कि वे अपने भक्तों के दुखों को दूर करें। मीरा कहती हैं कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा करने वाले हैं और हर संकट में उनकी सहायता करते हैं।
- भक्तों की रक्षा के उदाहरण- मीरा भगवान के भक्त-प्रेम को दर्शाने के लिए कई उदाहरण देती हैं। उन्होंने द्रौपदी की लाज बचाई, भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार लिया और गजराज को मगरमच्छ से बचाया। इन उदाहरणों के माध्यम से मीरा भगवान की करुणा और शक्ति का वर्णन करती हैं।
- स्वयं की रक्षा की प्रार्थना- मीरा अंत में भगवान से विनती करती हैं कि जैसे उन्होंने अन्य भक्तों की रक्षा की, वैसे ही वे उनकी भी रक्षा करें और उनके सभी दुखों को दूर कर दें।
- कृष्ण की चाकरी करने की इच्छा- दूसरे पद में मीरा भगवान कृष्ण की चाकरी करने की इच्छा व्यक्त करती हैं। वे चाहती हैं कि किसी भी रूप में वे कृष्ण के पास रह सकें और उनकी सेवा कर सकें।
- सेवा करने से मिलने वाले लाभ- मीरा के अनुसार कृष्ण की सेवा करने से उन्हें तीन लाभ मिलेंगे, उन्हें प्रतिदिन भगवान के दर्शन होंगे, वे हर समय उनका स्मरण कर सकेंगी और उनकी भक्ति और भी अधिक बढ़ेगी।
- कृष्ण के रूप और लीलाओं का वर्णन- मीरा श्री कृष्ण के सुंदर रूप का वर्णन करती हैं। वे पीताम्बर धारण करते हैं, सिर पर मोर-मुकुट और गले में वैजयंती माला पहनते हैं। वृंदावन में गाय चराते हुए वे मधुर मुरली बजाते हैं।
- कृष्ण-दर्शन के लिए मीरा की व्याकुलता- मीरा कहती हैं कि उनका हृदय कृष्ण के दर्शन के लिए अत्यंत व्याकुल है। वे चाहती हैं कि श्री कृष्ण उन्हें यमुना नदी के किनारे आधी रात को ही दर्शन दें, क्योंकि उनका मन उनके बिना अधीर हो जाता है।
Meera ke Pad Previous Year Questions with Model Answers PDF
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मीरा के पद पाठ की व्याख्या Meera Ke Pad Explanation
( 1 )
हरि आप हरो जन री भीर।
द्रोपदी री लाज राखी , आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रूप नरहरि , धरयो आप सरीर।
बूढ़तो गजराज राख्यो , काटी कुञ्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर , हरो म्हारी भीर।।
शब्दार्थ
हरि – श्री कृष्ण
जन – भक्त
भीर – दुख- दर्द
लाज – इज्जत
चीर – साड़ी , कपडा
नरहरि – नरसिंह अवतार
सरीर – शरीर
गजराज – हाथियों का राजा ऐरावत
कुञ्जर – हाथीकाटी – मारना
लाल गिरधर – श्री कृष्ण
म्हारी – हमारी
प्रसंग :- प्रस्तुत पाठ हमारी हिंदी पाठ्य पुस्तक ‘स्पर्श ‘ से लिया गया है। इस पद की कवयित्री मीरा है। इसमें कवयित्री भगवान श्री कृष्ण के भक्त – प्रेम को दर्शा रही हैं और स्वयं की रक्षा की गुहार लगा रही है ।
व्याख्या -: इस पद में कवयित्री मीरा भगवान श्री कृष्ण के भक्त – प्रेम का वर्णन करते हुए कहती हैं कि आप अपने भक्तों के सभी प्रकार के दुखों को हरने वाले हैं अर्थात दुखों का नाश करने वाले हैं। मीरा उदाहरण देते हुए कहती हैं कि जिस तरह आपने द्रोपदी की इज्जत को बचाया और साडी के कपडे को बढ़ाते चले गए ,जिस तरह आपने अपने भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए नरसिंह का शरीर धारण कर लिया और जिस तरह आपने हाथियों के राजा भगवान इंद्र के वाहन ऐरावत हाथी को मगरमच्छ के चंगुल से बचाया था ,हे ! श्री कृष्ण उसी तरह अपनी इस दासी अर्थात भक्त के भी सारे दुःख हर लो अर्थात सभी दुखों का नाश कर दो।
पद पर आधारित प्रश्न –
प्रश्न- कक्षा 10, हिंदी स्पर्श, भाग-2, पाठ-2 “मीरा के पद” में मीराबाई के पदों की शैली क्या थी?
उत्तर- मीराबाई के पदों की भाषा सरल, सहज और बोलचाल के निकट है। उनकी भाषा में राजस्थानी, ब्रजभाषा और गुजराती का मिश्रण मिलता है। उनके पद भावपूर्ण, कोमल और प्रवाहमयी हैं। इनमें मुख्य रूप से भक्तिरस की प्रधानता दिखाई देती है। साथ ही उनके पदों में अनुप्रास, पुनरुक्ति-प्रकाश और रूपक जैसे अलंकारों का भी सुंदर प्रयोग किया गया है।
( 2 )
स्याम म्हाने चाकर राखो जी,
गिरधारी लाला म्हाँने चाकर राखोजी।
चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।
बिन्दरावन री कुंज गली में , गोविन्द लीला गास्यूँ।
चाकरी में दरसन पास्यूँ, सुमरन पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ , तीनूं बाताँ सरसी।
मोर मुगट पीताम्बर सौहे , गल वैजन्ती माला।
बिन्दरावन में धेनु चरावे , मोहन मुरली वाला।
ऊँचा ऊँचा महल बनावँ बिच बिच राखूँ बारी।
साँवरिया रा दरसण पास्यूँ ,पहर कुसुम्बी साड़ी।
आधी रात प्रभु दरसण ,दीज्यो जमनाजी रे तीरा।
मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर , हिवड़ो घणो अधीरा।
शब्दार्थ
स्याम – श्री कृष्ण
चाकर – नौकर
रहस्यूँ – रह कर
नित – हमेशा
दरसण – दर्शन
जागीरी -जागीर , साम्राज्य
कुंज – संकरी
पीताम्बर – पीले वस्त्र
धेनु – गाय
बारी – बगीचा
पहर – पहन कर
तीरा – किनारा
अधीरा – व्याकुल होना
प्रसंग -: प्रस्तुत पद हमारी हिंदी पाठ्य पुस्तक ‘स्पर्श ‘ से लिया गया है। इस पद की कवयित्री मीरा है। इस पद में कवयित्री मीरा श्री कृष्ण के प्रति अपने प्रेम का वर्णन कर रही है और श्री कृष्ण के दर्शन के लिए वह कितनी व्याकुल है यह दर्शा रही है।
व्याख्या -: इस पद में कवयित्री मीरा श्री कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति भावना को उजागर करते हुए कहती हैं कि हे !श्री कृष्ण मुझे अपना नौकर बना कर रखो अर्थात मीरा किसी भी तरह श्री कृष्ण के नजदीक रहना चाहती है फिर चाहे नौकर बन कर ही क्यों न रहना पड़े। मीरा कहती हैं कि नौकर बनकर मैं बागीचा लगाउंगी ताकि सुबह उठ कर रोज आपके दर्शन पा सकूँ। मीरा कहती हैं कि वृन्दावन की संकरी गलियों में मैं अपने स्वामी की लीलाओं का बखान करुँगी। मीरा का मानना है कि नौकर बनकर उन्हें तीन फायदे होंगे पहला – उन्हें हमेशा कृष्ण के दर्शन प्राप्त होंगे , दूसरा- उन्हें अपने प्रिय की याद नहीं सताएगी और तीसरा- उनकी भाव भक्ति का साम्राज्य बढ़ता ही जायेगा।
मीरा श्री कृष्ण के रूप का बखान करते हुए कहती हैं कि उन्होंने पीले वस्त्र धारण किये हुए हैं ,सर पर मोर के पंखों का मुकुट विराजमान है और गले में वैजन्ती फूल की माला को धारण किया हुआ है।
वृन्दावन में गाय चराते हुए जब वह मोहन मुरली बजाता है तो सबका मन मोह लेता है।
मीरा कहती है कि मैं बगीचों के बिच ही ऊँचे ऊँचे महल बनाउंगी और कुसुम्बी साड़ी पहन कर अपने प्रिय के दर्शन करुँगी अर्थात श्री कृष्ण के दर्शन के लिए साज श्रृंगार करुँगी। मीरा कहती हैं कि हे !मेरे प्रभु गिरधर स्वामी मेरा मन आपके दर्शन के लिए इतना बेचैन है कि वह सुबह का इन्तजार नहीं कर सकता। मीरा चाहती है की श्री कृष्ण आधी रात को ही जमुना नदी के किनारे उसे दर्शन दे दें।
पद पर आधारित प्रश्न –
प्रश्न- कक्षा 10, हिंदी स्पर्श, भाग-2, पाठ-2 “मीरा के पद” में दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं?
उत्तर- दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी इसलिए करना चाहती हैं ताकि वे सदा अपने आराध्य श्री कृष्ण के पास रह सकें और उनके दर्शन कर सकें। मीराबाई का मानना है कि चाकरी करने से उन्हें तीन लाभ होंगे, पहला, उन्हें प्रतिदिन श्री कृष्ण के दर्शन मिलेंगे; दूसरा, वे हर समय उनका स्मरण कर सकेंगी; और तीसरा, उनकी भाव-भक्ति और भी अधिक बढ़ेगी। इसलिए वे श्याम के पास रहने के लिए उनकी चाकरी करना चाहती हैं।
प्रश्न- कक्षा 10, हिंदी स्पर्श, भाग-2, पाठ-2 “मीरा के पद” में मीराबाई के दूसरे पद का भावार्थ क्या है?
उत्तर- दूसरा पद-
स्याम म्हाने चाकर ……………………………………… घणो अधीरा।
भावार्थ- इस पद में कवयित्री मीरा श्री कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति भावना को उजागर करते हुए कहती हैं कि हे !श्री कृष्ण मुझे अपना नौकर बना कर रखो अर्थात मीरा किसी भी तरह श्री कृष्ण के नजदीक रहना चाहती है फिर चाहे नौकर बन कर ही क्यों न रहना पड़े। मीरा कहती हैं कि नौकर बनकर मैं बागीचा लगाउंगी ताकि सुबह उठ कर रोज आपके दर्शन पा सकूँ। मीरा कहती हैं कि वृन्दावन की संकरी गलियों में मैं अपने स्वामी की लीलाओं का बखान करुँगी। मीरा का मानना है कि नौकर बनकर उन्हें तीन फायदे होंगे पहला – उन्हें हमेशा कृष्ण के दर्शन प्राप्त होंगे , दूसरा- उन्हें अपने प्रिय की याद नहीं सताएगी और तीसरा- उनकी भाव भक्ति का साम्राज्य बढ़ता ही जायेगा।
मीरा श्री कृष्ण के रूप का बखान करते हुए कहती हैं कि उन्होंने पीले वस्त्र धारण किये हुए हैं ,सर पर मोर के पंखों का मुकुट विराजमान है और गले में वैजन्ती फूल की माला को धारण किया हुआ है। वृन्दावन में गाय चराते हुए जब वह मोहन मुरली बजाता है तो सबका मन मोह लेता है। मीरा कहती है कि मैं बगीचों के बिच ही ऊँचे ऊँचे महल बनाउंगी और कुसुम्बी साड़ी पहन कर अपने प्रिय के दर्शन करुँगी अर्थात श्री कृष्ण के दर्शन के लिए साज श्रृंगार करुँगी। मीरा कहती हैं कि हे !मेरे प्रभु गिरधर स्वामी मेरा मन आपके दर्शन के लिए इतना बेचैन है कि वह सुबह का इन्तजार नहीं कर सकता। मीरा चाहती है की श्री कृष्ण आधी रात को ही जमुना नदी के किनारे उसे दर्शन दे दें।
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Pad FAQs
प्रश्न: ‘पद’ कविता की रचना किसने की है?
उत्तर: कक्षा 10 की कविता ‘पद’ मीरा द्वारा रचित है।
प्रश्न: कक्षा 10 की कविता ‘पद’ का विषय क्या है?
उत्तर: कविता ‘पद’ भक्ति, प्रेम, त्याग, वैराग्य और प्रियतम के प्रति कठोर व्यवहार के बारे में है।
प्रश्न: कविता ‘पद’ किस विषय पर आधारित है?
उत्तर: कविता ‘पद’ कवयित्री मीरा के भगवान कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति को दर्शाती है।
प्रश्न- कक्षा 10, हिंदी स्पर्श, भाग-2, पाठ-2 “मीरा के पद” में मीरा का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: मीराबाई के पदों का मुख्य संदेश सच्ची भक्ति, प्रेम और समर्पण है। वे अपने आराध्य श्री कृष्ण के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास व्यक्त करती हैं। मीरा का मानना है कि भगवान के प्रति सच्चा प्रेम और भक्ति मनुष्य को सभी दुखों और कष्टों से मुक्त कर सकती है।
उनके पद यह संदेश देते हैं कि जीवन में कठिनाइयाँ आने पर भी मनुष्य को ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना चाहिए और प्रेम, समर्पण तथा भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। मीरा का जीवन और काव्य हमें आध्यात्मिक आनंद और ईश्वर से सच्चे संबंध की ओर प्रेरित करता है।
प्रश्न- कक्षा 10, हिंदी स्पर्श, भाग-2, पाठ-2 “मीरा के पद” में मीरा के पद का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: मीराबाई के पदों का मुख्य विषय श्री कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और प्रेम है। मीरा अपने पदों में कृष्ण के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और समर्पण को व्यक्त करती हैं। वे अपने आराध्य से मिलने की तीव्र इच्छा प्रकट करती हैं और उनके दर्शन के लिए अत्यंत व्याकुल दिखाई देती हैं। उनके पदों में भक्त और भगवान के बीच प्रेम, समर्पण और आध्यात्मिक लगाव का सुंदर चित्रण मिलता है।
प्रश्न- कक्षा 10, हिंदी स्पर्श, भाग-2, पाठ-2 “मीरा के पद” में मीरा के पद का भाव क्या है?
उत्तर: मीराबाई के पदों में भगवान श्री कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति, प्रेम और समर्पण का भाव प्रकट होता है। उनके पदों में भक्त की अपने आराध्य से मिलने की तीव्र तड़प और विरह की भावना दिखाई देती है।
मीरा के पद हमें यह शिक्षा देते हैं कि सच्ची भक्ति केवल पूजा करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसमें भगवान के प्रति अटूट प्रेम, विश्वास और पूर्ण समर्पण भी आवश्यक होता है। उनके पदों में प्रेम, विरह और भक्ति की गहन भावनाओं का सुंदर चित्रण मिलता है।
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