PSEB Class 9 Meaning of Difficult Words from all Chapters of Hindi Book
PSEB Class 9 Hindi Word Meanings – Here, the difficult words and their meanings of all the chapters of PSEB Class 9 Hindi Book have been compiled for the convenience of the students. This is an exhaustive list of the words and meanings of all the Prose and Poetry from the Hindi Book of PSEB Class 9 Hindi. The difficult words’ meanings have been explained lucidly so that every student can understand them.
यहाँ, छात्रों की सुविधा के लिए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड कक्षा 9 हिंदी पुस्तक के सभी अध्यायों के कठिन शब्दों और उनके अर्थों को संकलित किया गया है। यह पीएसईबी कक्षा 9 हिंदी की पुस्तक के सभी गद्य और काव्य के शब्दों और अर्थों की एक विस्तृत सूची है। कठिन शब्दों के अर्थों को स्पष्ट रूप से समझाया गया है ताकि प्रत्येक छात्र उन्हें समझ सके।
- Chapter 1 – कबीर दोहावली
- Chapter 2 – सूरदास के पद
- Chapter 3 – कर्मवीर
- Chapter 4- झासी की रानी की समाधि पर
- Chapter 5 – मैंने कहा, पेड़
- Chapter 6 – पाँच मरजीवे
- Chapter 7 – पंच परमेश्वर
- Chapter 8 – पाजेब
- Chapter 9 – दो हाथ
- Chapter 10 – साए
- Chapter 11 – वह चिड़िया एक अलार्म घड़ी थी
- Chapter 12 – नींव की ईंट
- Chapter 13 – हिम्मत और जिंदगी
- Chapter 14 – महान राष्ट्रभक्त : मदन लाल ढींगरा
- Chapter 15 – एक अंतहीन चक्रव्यूह
- Chapter 16 – बचेंद्री पाल
- Chapter 17 – कैसे बचें उपभोक्ता धोखाधड़ी से
- Chapter 18 – शिवाजी का सच्चा स्वरूप
- Chapter 19 – प्रकृति का अभिशाप
Chapter 1 – कबीर दोहावली
- साच– सच
- तप- तपस्या
- पाप– गलत काम
- जाके– जिसके
- हिरदे– हृदय
- साधू- संत, भक्ति-भाव वाला व्यक्ति
- जी– व्यक्ति, इंसान
- फिरै– घूमता है, भटकता है
- नाहिं– नहीं
- तैसा- वैसा
- होय– होता है, बनता है
- बाणी- वाणी, बोलने का तरीका
- छाड़– छोड़ देना
- संतई– संतत्व, अच्छा स्वभाव
- कोटक– करोड़
- असंत– बुरा व्यक्ति
- भुवंगा- साँप
- बैठिया– बैठा है, लिपटा है
- तऊ– तब भी, फिर भी
- सीतलता- शीतलता, अच्छाई
- तजंत– छोड़ना
- पोथी- धार्मिक या विद्या से संबंधित पुस्तक
- पढ़ि पढ़ि- बार-बार पढ़कर
- जग- दुनिया
- मुवा– मर गये
- पंडित- विद्वान, ज्ञानी
- आखर– अक्षर
- पढ़ें सु- जो पढ़ ले, समझ ले
- मिलिया– मिला
- कोय– कोई
- खोजा- ढूँढा
- मना– मन
- सींचे– पानी दे
- ऋतु- मौसम
- फल होय– परिणाम मिलता है
- मोल– मूल्य
- तरवार– तलवार
- म्यान– तलवार रखने का खोल (कवर)
- तन– शरीर
- पंछी– पक्षी
- भया- हो गया है
- तहां- वहाँ
- उड़ी जाइ– उड़कर चला जाता है
- संगती– संगति, साथ
- तैसा ही– वैसा ही
- फल पाइ– फल पाता है
- अति- बहुत ज़्यादा
- भल– अच्छा
- चूप- चुप्पी, मौन
- बरसना- बारिश होना
- कर– हाथ
- मनुवा– मन
- चहुँ दिशि– चारों दिशाओं में, चारों ओर
- सुमिरन– स्मरण
- काल्ह– कल (आने वाला)
- अब्ब– अब
- परलै- विनाश, मृत्यु
- बहुरि– फिर
- कब्ब– कब
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Chapter 2 – सूरदास के पद
- जसोदा – यशोदा
- हरि – श्रीकृष्ण
- पालना – झूला
- झुलावै – झुलाना
- हलरावै – हल्का सा हिलाना
- दुलराइ मल्हावे – प्यार करना
- निंदरिया – नींद
- बेगहिं – शीघ्रता से
- तोकों – तुझे
- मूँदि – बंद करना
- अधर – होंठ
- फरकावै – फड़काना
- मौन है – मौन होकर
- सैन – संकेत, इशारे
- अंतर – अंतराल, इसी बीच
- अकुलाई – व्याकुल होकर, परेशान होकर
- नंद भामिनि – नन्द की पत्नी, यशोदा
- मोहन – श्रीकृष्ण
- महर – मुखिया
- हलधर – बलराम (श्री कृष्ण के बड़े भाई)
- जनि – मत, न
- जाहु – जाना
- लला रे – हे पुत्र, हे लाल
- कौतूहल – आश्चर्य, हैरानी
- बधैया – बधाइयाँ
- दरस – दर्शन
- बलि जैया – निछावर हूँ
- कबहुँ – कब
- पियत – पी लिया है
- अजहूँ – अब भी
- बल – बलराम
- बेनी – चोटी
- काढ़त (बालों को कंघी से) – संवारना
- गुहत – चोटी बनाते हुए, गूंथना
- न्हवावत – नहलाकर
- नागिन-सी – नागिन जैसी
- भुईं – धरती
- काचो दूध – कच्चा दूध
- पचि-पचि – बार-बार
- हरि-हलधर – कृष्ण-बलराम
- चरावन – चरवाने के लिए
- जैहौं – जाऊँगा
- कर – हाथ
- खेहौं – खाऊँगा
- जनि – मत
- बारे – बालक
- चलिहौ – चलकर
- कुम्हिलैहे – मुरझाना
- घामहिं – धूप
- सौं – कसम
- टेक – ज़िद्द, हठ
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Chapter 3 – कर्मवीर
- बाधा- रुकावट, संकट
- विविध– विभिन्न प्रकार की
- बहु– बहुत
- विघ्न– संकट, अड़चन
- भरोसे– आश्रित, निर्भर
- भाग- भाग्य
- भोग- झेलना
- उबताते- उकताते, तंग आना
- चंचल- अस्थिर
- वीर- बहादुर
- आन- क्षण, पल
- काल– समय
- फूले- उन्नति किए
- फले– सफल हुए
- सदा– हमेशा
- जगत- दुनिया
- तकते– देखते, निहारते
- यों- इस प्रकार
- गँवाते– व्यर्थ खोते
- यत्न- प्रयास
- चुराते- बचते, कतरा जाते
- नमूना- उदाहरण, आदर्श
- औरों- दूसरों
- व्योम- आकाश
- दुर्गम- कठिन, जहाँ जाना मुश्किल हो
- शिखर- चोटी
- तम- अंधकार
- आठों पहर- हर वक़्त
- गर्जते जल-राशि– गरजती हुई समुद्र की लहरें
- लहर- तरंग
- भयदायिनी- डर पैदा करने वाली
- कँपा सकती- डरा सकती, भय उत्पन्न कर सकती
- कलेजा- हृदय, मन
- नाकाम- असफल
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Chapter 4- झासी की रानी की समाधि पर
- समाधि – चिता पर बनाया जाने वाला एक स्मारक
- दिव्य – अलौकिक
- लघु – छोटी-सी
- अंतिम – आखिरी
- लीला-स्थली – कार्य करने का स्थान
- मरदानी – वह स्त्री जो वीरतापूर्ण कार्य करे
- भग्न – टूटी हुई
- विजय-माला – जीत की माला
- फूल – अस्थियाँ
- संचित – एकत्र किए हुए, जमा
- स्मृति – याद
- बाला – युवती
- आहुति – बलि, बलिदान करना
- ज्वाला – आग की लपट
- मान – सम्मान, आदर
- रण – युद्ध
- मूल्यवती – कीमती
- यथा – जैसे
- निहित – छिपी हुई
- जग – संसार
- गाथा – कथा, कहानी
- निशीथ – आधी रात
- क्षुद्र – तुच्छ, छोटे
- गिरा – बाणी
- अमिट – कभी न मिटने वाली
- बुंदेले – बुंदेलखंड के
- हर बोलों – बुंदेलखंड की एक जाति जो राजा-महाराजाओं का यशोगान करती थी
- चिर – सदा रहने वाली, स्थाई
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Chapter 5 – मैंने कहा, पेड़
- कड़ा- सख्त, कठोर
- अड़ा– रुका हुआ
- बरसों– वर्षों सालों
- छीजता- नष्ट होता
- ऋतु- मौसम
- मेघ- बादल
- उमड़ता- जमना, घना होना
- पसीजना- दया भाव उमड़ना
- संतुलित- समान भाव वाला
- धीर- शांत स्वभाव वाला
- विनम्र- विनीत
- भीतर- अंदर
- ठोठ- ठेठ, निरा, अविकृत
- कठैठ– सख्त, मजबूत
- काँपा- हिला
- मर्मरित- मर्मर ध्वनि करता हुआ
- श्रेय- यश
- ठूंठ- पेड़ का बचा हुआ धड़
- तले- नीचे वाले भाग में
- आश- उम्मीद
- समाना- भरना
- नामहीन– नाम रहित
- छीजना– नष्ट होना
- शतियों– सदियों, सौ का समूह
- सीख- शिक्षा
- मरण– मृत्यु
- मरण-धर्मा- मरने वाला
- जीवनदायी- जीवन देने वाला
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Chapter 6 – पाँच मरजीवे
- कायरता- डरपोकपन, भय
- सप्तसिन्धु- सिन्धु, रावी, सतलुज, झेलम, गंगा, यमुना और सरस्वती – इन सात नदियों के यहाँ बहने के कारण भारत को सप्तसिन्धु वाला देश कहा जाता है।
- धर्म- न्याय, सदाचार, सत्य का मार्ग
- अधर्म- अन्याय, अत्याचार, गलत कार्य
- संघर्ष- टकराव, लड़ाई
- खालस- खरा, शुद्ध, सच्चा
- महामानव- महान मनुष्य
- युग दृष्टा- युग को देखने वाला
- युग स्रष्टा- युग निर्माता
- साहस- वीरता, निर्भीकता
- ज्वलन्त- जलता हुआ
- जूझना- संघर्ष करना, लड़ना
- आह्वान- बुलावा
- सन्- साल, वर्ष
- सोलह सौ निन्यानवे– 1699
- वैशाखी- पंजाब का प्रमुख पर्व, वैशाख मास में मनाया जाने वाला त्योहार
- पावन- पवित्र, शुभ
- बेला- समय, घड़ी
- दशम नानक- गुरु गोबिंद सिंह जी (दसवें सिख गुरु)
- द्वारे- द्वार पर, दरबार में
- उमड़े- एकत्र हुए, बड़ी संख्या में आए
- भक्तों- श्रद्धालु, भगवान या गुरु में विश्वास रखने वाले
- शिष्यों- नुयायियों, भक्त जन
- विशाल- बहुत बड़ा
- तेजपुंज- अत्यंत तेजस्वी
- नंगी तलवार- बिना म्यान की तलवार, खुली हुई तलवार
- बारम्बार- बार-बार, लगातार
- अकाल पुरुष- ईश्वर, परमात्मा
- फरमान– आज्ञा
- बलिदान- त्याग, अपना जीवन अर्पित करना
- अन्याय- अनीति, गलत व्यवहार
- मुक्ति- छुटकारा, स्वतंत्रता
- शीश कटाने– सिर अर्पित करने, बलिदान देने के लिए
- मरजीवा- वह जो मरकर भी जीवित माना जाए; मृत्यु को स्वीकार करके बलिदान देने वाल
- उपहार– भेंट, श्रद्धांजलि
- अद्भुत- आश्चर्यजनक, अनोखा
- त्याग- बलिदान, परोपकार के लिए कुछ छोड़ देना
- मरणासन्न- मरने के करीब
- चेतना- जागरूकता, जीवित भावना
- नवरक्त संचार– नए खून का संचार, नई ऊर्जा या शक्ति का प्रसार
- सन्नाटा- चुप्पी
- मौन– चुप्पी, बिना बोले रहना
- सभा- लोगों का समूह, बैठक
- भयभीत- डर से भरा हुआ
- निवासी– रहने वाला, वासी
- कृपा कर- दया करके, मेहरबानी करके
- सौभाग्य- बड़ा सम्मान, शुभ अवसर
- धर्म-रक्षा– धर्म की सुरक्षा, धार्मिक कर्तव्य की रक्षा
- भेंट- उपहार, अर्पण
- शीश– सिर
- गुरुवर- गुरु श्रेष्ठ
- प्राण- जीवन, जान
- खिल उठे- प्रसन्न हो उठे, खुशी से भर गए
- दशमेश– सिक्खों के दसवें गुरु अर्थात् श्री गुरु गोबिन्द सिंह
- बाँह थाम- हाथ पकड़कर
- उभरा स्वर– आवाज़ सुनाई दी
- विराम- रुक जाना, ठहराव
- भयाकुल– डर और चिंता से भरा हुआ
- चकित- हैरान
- दिल थाम- डर और चिंता से चुप रह जाना, सांस रोक लेना
- रक्तरंजित- रक्त से सनी हुई
- अपेक्षित- जिसकी ज़रूरत या आशा हो
- प्राण के लाले पड़े हैं- जीवन संकट में पड़ गया है, जान पर बन आई है
- स्तब्ध- चकित, हैरान, शब्दहीन
- मानो- जैसे
- जड़े हैं- स्थिर, हिल न पाना
- किन्तु- लेकिन, परंतु
- बलिदान-व्रत-धारी- बलिदान देने का संकल्प रखने वाला
- करबद्ध- हाथ जोड़े गुरुचरण बलिहारी– गुरुओं के चरणों पर स्वयं को समर्पित करना, गुरु की महिमा स्वीकार करना
- हर्षित- प्रसन्न
- लीला- दिव्य कार्य, चमत्कार
- विस्मयकारी- आश्चर्यजनक
- टप टप – धीरे-धीरे गिरने की आवाज
- टपक रहे- गिर रहे, बह रहे
- रक्त बिन्दु- खून की बूंदें
- चम-चम- चमकना
- बलि- बलिदान
- बारम्बार- बार-बार, फिर-फिर
- अपरम्पार- असीम, अपार, जिसका पार न पाया जा सके
- बलिदानों- बलिदान, त्याग करने वाले लोगों के कार्य
- क्रम में– एक के बाद एक
- शीश- सिर
- अद्भुत- आश्चर्यजनक
- पर्दा- परदा, आवरण
- प्रकट हुए– सामने आए, दिखाई दिए
- चकित- हैरान
- न्यारे- अलग, विशिष्ट
- खालिस– शुद्ध
- खालसा- गुरु गोबिंद सिंह द्वारा स्थापित वीर सिख पंथ
- शुभाचरण– अच्छे कर्म करने वाला, सदाचार
- पथ- मार्ग, रास्ता
- निर्भय- बिना डर के
- पंथ- धर्म, समुदाय
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Chapter 7 – पंच परमेश्वर
- गाड़ी – गहरी, पक्की
- साझे – इकट्टे
- अटल – दृढ़, पक्का
- मूलमंत्र – मूख्य साधन, कुंजी
- खाला – मौसी
- मिलकियत – संपत्ति
- रजिस्ट्री – जमीन-जायदाद बेचने-खरीदने के लिए की जाने वाली कानूनी लिखा-पढ़ी
- खातिरदारी – सत्कार
- सालन – साग आदि की मसालेदार तरकारी
- निष्ठुर – कठोर
- नित्य – हमेशा
- ऊसर – बंजर
- बघारी – तड़का, छाँक
- गृहस्वामिनी – घर की मालकिन
- निर्वाह – गुजारा
- धृष्टता – ढिठाई, ढीठपन
- खटपट – बहस
- संदेह – शक
- अनुग्रहों – कृपा
- ऋणी – कर्जदार
- साहस – हिम्मत
- फ़रिश्ते – देवदूत
- कमान – धनुष
- बिरला – बहुत कम मिलने वाला
- दीन-वत्सल – दीनों से प्रेम करने वाले
- अबला – बेचारी
- दुखड़े – दुःख
- सांत्वना – दिलासा, ढास बंधाना
- दमभर के लिए – थोड़ी देर के लिए
- ईमान – धर्म सत्य
- सचेत – सजग, सावधान, होशियार
- अलबत्ता – अवश्य, जरूर, लेकिन, बेशक
- ता-हयात – तमाम उम्र
- कबूल – मंजूर
- बेकस – निस्सहाय
- बेवा – विधवा
- कचहरी – न्यायालय, अदालत
- सिवा – अलावा
- असामियों – किसी महाजन या दुकानदार से लेन देन
- वैमनस्य – बैर, विरोध
- झमेले – झगड़ा, बखेड़ा, समस्या
- कन्नी काटना – सामने आने से बचना, कतरा कर निकल जाना, आँख बचाकर भाग जाना
- अर्जार्ज – प्रार्थना
- ख़िदमत – सेवा
- फर्ज़ – कर्तव्य
- माहवार – हर महीने, मासिक, प्रतिमास
- मुनाफ़ा – फायदा
- जिरह – बहस
- कायापलट – बहुत बड़ा परिवर्तन
- संकल्प-विकल्प – सोच-विचार
- नीति-संगत – नीति के अनुरूप
- सन्नाटे – परेशानी
- नीति-परायणता – नीति का पालन करना
- सत्यवादियों – सदा सत्य बोलने वाले
- रसातल – ज़मीन के नीचे के सात तलों में से छठा तल
- शिष्टाचार – सभ्य व्यवहार
- आवभगत – आदर-सत्कार
- कुटिलता – धोखेबाजी, दुष्टता
- मोल – खरीद
- दैवयोग – भाग्य से
- दगाबाजी – छल बाजी, धोखा
- सब्र – सहन, धैर्य
- नेक-बद – भला-बुरा
- बेखटके – बिना संकोच के, बेधड़क
- खेप – एक फेरा, एक बार में ढोया जाने वाला बोझ
- रगेदने – भगाना, दौड़ाना
- इक्का-गाड़ी – अकेले पशु द्वारा खींची जाने वाली एक गाड़ी
- रतजगा – रात भर जागना
- नदारद – गायब, लुप्त
- निगोड़े – निकम्मा, नाकारा
- कुलच्छनी – कुल का नाश करने वाली
- बर्राने – क्रोध में बोलना
- किवाड़ – दरवाजा
- वाड़ गए – समझ गए
- उड़ – परेशानी
- उन – तकलीफ
- बहुधा – प्रायः, अकसर
- संकुचित – तंग
- पथ-प्रदर्शक – राह दिखाने वाला
- सर्वोच्च – सबसे ऊँचा
- देववाणी – देवताओं की वाणी
- सदृश – समान, तुल्य
- समावेश – एक साथ या एक जगह रहना
- जौ भर – रति भर, थोड़ी देर
- रिआयत – कोमल और दयापूर्ण व्यवहार, नरमी
- निर्दयता – बेरहमी, निष्ठुरता
- भलमनसी – सज्जनता
- प्राणघातक – जान लेने वाला
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Chapter 8 – पाजेब
- पाजेब- नुपूर, पायल
- कड़ियाँ- छोटे-छोटे जोड़
- लचक- लचीलापन, झुकने की क्षमता
- निज- अपना
- अनुकूल- अनुसार, जैसा ठीक लगे
- पास-पड़ोस– आसपास के घर
- नन्हीं-बड़ी- छोटी और बड़ी उम्र की
- देखा-देखी– दूसरों को देखकर
- खैर- ठीक है, फिलहाल
- सहज– आसानी से
- अबके– इस बार
- इतवा– रविवार
- छुमकती– उछल-कूद करते हुए चलना
- फिरी– घूमती रही
- लड़ियाँ– कड़ियों की पंक्तियाँ
- टखना- पिंडली एवं एड़ी के बीच की दोनों ओर उभरी हड्डी
- सुघड़– सुडौल, सुंदर
- महाशय– सम्मानसूचक शब्द
- सजी-धजी– अच्छे कपड़े और गहनों से सजी हुई
- आस-पास- इधर-उधर
- गौरव- गर्व, सम्मान
- ताली पीटी– खुशी प्रकट करने के लिए ताली बजाई
- ठुमकने लगे- जिद करने लगे, अकड़ दिखाने लगे
- बाईसिकिल– साइकिल
- अबके– इस बार
- छी-छी- नापसंदगी या डाँट प्रकट करने का शब्द
- हँसी-खुशी– आनंदपूर्वक
- घड़ीभर का– थोड़ी देर का
- बारीक- सूक्ष्म
- सुबुक– हल्का
- खासे- अधिक, अच्छे-खासे
- आश्चर्य से- हैरानी के साथ
- मेज़-वेज़- मेज़ आदि जगहें
- उठाने-धरने- इधर-उधर हटाने लगना
- टटोल डालने– ढूँढ़ने लगना, हाथ डालकर देखना
- मनसूबा– इरादा
- रक्खी- रखी
- बॉक्स- संदूक, डिब्बा
- फर्श- ज़मीन
- कहा-सुनी– तकरार, बहस
- दोष- गलती, आरोप
- यहाँ-वहाँ– इधर-उधर
- ख्याल– विचार
- हो न हो- सम्भव है, अवश्य
- मौजूद– उपस्थित
- साफ इंकार- बिल्कुल मना करना
- फिकर– चिंता
- झल्लाकर– गुस्से में
- शहजोर– बलवान
- डाँट-फटकार- सख़्ती से डाँटना
- सिर न चढ़ेगा– ज़्यादा मनमानी नहीं करेगा
- सोलह में पन्द्रह आने- लगभग पूरा विश्वास
- छंटे- चालाक
- फ़रिश्ता– देवदूत
- घुस-घुसकर- बार-बार अंदर जाकर
- खोज लगाना– तलाश करना
- शौक– लगाव, रुचि
- बताते-बरजते– समझाते और रोकते
- उमर- आयु
- शह देना– बढ़ावा देना
- डोर का पिन्ना– पतंग उड़ाने की डोरी का गुच्छा
- इजाजत- अनुमति
- सबक– सीख
- तोड़-ताड़ दूँ- नष्ट कर दूँ
- धुन– लगन, जुनून
- सवेरे– सुबह
- गम्भीरता- गंभीर भाव
- मुँह नहीं खोला- कुछ नहीं बोला
- फूल आया- नाराज़, उदास हो गया
- गुम-सुम– चुपचाप, उदास
- स्थिर किया– निश्चय किया
- अपराध– गलती
- करुणा- दया
- रोष- क्रोध
- अपराध-वृत्ति- गलती करने की प्रवृत्ति
- आतंक- डर
- स्नेह– प्रेम
- खुलकर– बिना डर के
- इनाम- पुरस्कार
- सूजा– फूला हुआ
- माथे पर बल पड़ना- चिंता या तनाव के भाव
- अस्थिर– बेचैन
- उग्रता– अत्यधिक क्रोध
- दोष- गलती
- लक्षण– संकेत
- कोना- कमरे का किनारा
- चुपचाप- बिना बोले
- तलाश- खोज
- संदेह– शक
- भला क्यों- ऐसा क्यों
- उमड़ रहा था- भर आना, बढ़ना
- सहानुभूति– हमदर्दी
- वंचित– दूर रखना
- अतिरिक्त- सिवाय, अलावा
- दुर्घटना– बुरी घटना
- इल्जाम– दोष, आरोप
- भयानक– भयानक
- लाचारी– विवशता
- आलोचना– गुण-दोष विवेचन
- बरी- मुक्त
- ताड़ना– ध्यान से देखना
- आश्वासन– भरोसा दिलाना
- सांत्वना- ढाढ़स, दिलासा
- स्नेहपूर्वक– प्यार से
- अत्यन्त- बहुत अधिक
- हर्ष- खुशी
- बाँहें– भुजाएँ
- गर्व- अभिमान
- उल्लासपूर्वक– बहुत खुशी के साथ
- कबूल– स्वीकार
- शाबाशी– प्रशंसा
- बलैया लेना– बलिहारी जाना
- अगरचे- यद्यपि
- प्रेम से– प्यार से
- आग्रह– ज़ोर देना
- गाड़ दिया– ज़मीन में दबा दिया
- गुम-सुम- चुपचाप, उदास
- उपटकर– झुँझलाकर, गुस्से में
- बरामदा- कमरे के बाहर खुली जगह
- क्षोभ– गहरा दुख, ग्लानि
- जवाब- उत्तर
- दाम- कीमत
- तेजा-तेजी– जल्दबाज़ी
- हाथ फटकारकर– झटके से हाथ हिलाकर
- नतीजा– परिणाम
- कुलच्छिनी- अपशकुनी
- बुदबुदाती हुई– धीमे-धीमे बोलते हुए
- दाम- कीमत
- सहूलियत से- आराम से
- मालूम– जानकारी
- धम्म-धम्म पीटना– जोर-जोर से मारना
- चमड़ी उधेड़ना– बहुत बुरी तरह मारना
- बीच-बचाव- रोक-टोक
- शहीद की भाँति- चुपचाप सहते हुए
- भाव- भावना
- कसूरवार– दोषी
- बेबात की बात– बेकार की चर्चा
- ज्यों-त्यों- जैसे-तैसे
- दिलासा- तसल्ली
- हाल-बेहाल– बहुत बुरी हालत
- प्रण– दृढ़ निश्चय
- खैर- अच्छा, ठीक है
- जिस-जिस भाँति- जिस तरह-तरह से
- बखेड़ा- झगड़ा
- झंझट– परेशानी
- धमकाना– डराना
- हाथ कुछ नहीं आता– कोई परिणाम नहीं निकलता
- सूचना दी– जानकारी दी
- बतला दिया– बता दिया
- ग्यारह आने– पुराने समय की मुद्रा
- रत्ती-रत्ती बात- एक-एक छोटी बात
- मगज- दिमाग
- बदमाश– बुरा व्यक्ति
- उचक्का– ठग, चालाक चोर
- गिल्ली-डण्डा– खेल का नाम
- विशेष प्रसन्न- बहुत अधिक खुश
- अपने आप- खुद
- गोद में टिका रहा- गोद में सटा हुआ बैठा रहा
- हर्ष– प्रसन्नता
- प्रतीत– ज्ञात
- हजरत- सम्मान सूचक संबोधन
- आने– पुराने समय की मुद्रा
- इकन्नी- एक आने का सिक्का
- दुअन्नी– दो आने का सिक्का
- स्पष्ट- साफ़
- क्रोध- गुस्सा
- डपटकर– डाँटते हुए
- पीला पड़ जाना- डर से चेहरा पीला हो जाना
- कोठरी– छोटा बंद कमरा
- मूँद दिया- बंद कर दिया
- सूजा हुआ– फूला हुआ
- बड़बड़ाना– धीमे-धीमे बोलना
- चौराहा- जहाँ कई रास्ते मिलते हों
- भुगत लेंगे- सामना करेंगे
- सुपुर्द- सौंपना
- नरमी- कोमलता
- टस-से-मस होना– ज़रा भी हिलना
- सरोकार– संबंध, मतलब
- गुस्ताखी– अशिष्टता, उदंडता
- प्रतिकार- कार्य आदि को रोकने के लिए किया जाने वाला प्रयत्न
- जबर- ज़ोर, बल
- पुचकारा– प्यार से समझाया
- मुँह फूला हुआ- नाराज़ और उदास चेहरा
- जैसे-तैसे- बड़ी मुश्किल से
- चैन की साँस ली- राहत महसूस की
- रूठा- नाराज़
- शरारत– बदमाशी
- बाज़ नहीं आएगा– मानेगा नहीं
- दुष्ट– शरारती, बुरा
- आध-एक घंटा– लगभग आधा घंटा
- ख्याल आया- ध्यान आया
- मार-पीट– पिटाई
- मन को ठिकाना देना- गुस्सा निकालना
- अभ्यास– आदत
- होशियारी से– समझदारी से
- सख्ती- कठोरता
- मुरौव्वत- उदारता
- झल्ला आया- बहुत गुस्सा आया
- उम्मीद- आशा
- सफाई देना– अपना पक्ष रखना
- लिहाज़ मानता था– आदर करता था, सम्मान करता था
- मुँह डालकर– उदास होकर
- फर्श- ज़मीन
- करुणा– दया
- विरोधी भाव- उल्टी भावनाएँ
- हड़बड़ाकर- घबराकर, जल्दी से
- सिलसिला- घटना-क्रम
- प्रतिरोध– विरोध
- अकड़– कठोरता
- राज़ी-राज़ी- खुशी से, बिना ज़ोर-ज़बरदस्ती
- विशेष प्रभाव– खास असर
- खैर- ठीक है
- पाजेब- पायल
- प्रेमपूर्वक– प्यार से
- रूठा- नाराज़
- उद्यत– तैयार
- आनाकानी– टालमटोल, हिचकिचाहट
- मचलना- ज़िद करने लगना
- भयभीत– डरा हुआ
- बास्कट– वेस्टकोट
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Chapter 9 – दो हाथ
- मग्न – लीन
- अभाव – कमी
- खला – चुभन, पीड़ा
- टीस – कसक, सहसा रह-रह कर उठने वाली पीड़ा
- बेफिकर – बिना किसी परवाह के
- कुरूप – बदसूरत
- अपार – अत्यधिक
- दुलार – प्यार
- झट – जल्दी
- मन भर आना – दुखी होना
- ढेर सारा – बहुत सारा
- लीपना – साफ करना
- चूम लेती – चुंबन करना, लाड़ करना
- अनजाने – बिना जाने
- बेचैन – परेशान
- भोली – नादान
- गम्भीर – गहरा
- सौन्दर्य – सुंदरता
- स्निग्ध – चिकना
- उपहास – निंदा, बुराई
- व्यर्थ – बेकार
- आँकी – नापी
- सम्पन्नता – समृद्ध
- जागृति – जाग, जागना
- श्रद्धालु – जिसके मन में श्रद्धा हो, श्रद्धावान, धर्मात्मा
- उदय – उगना
- परत – तह, स्तर
- टटोलती – स्पर्श द्वारा मालूम करना, छूना
- उमंग – उत्साह
- अन्तर्मन – मन के भीतर
- उद्वेलन – उछाल (भावों की उथल पुथल)
- उदित – उदय, उगना
- बदशक्ल – जो देखने में अच्छा न हो
- निपटा – ख़त्म, पूरा
- सभापति – सभा को सम्बोधित करने वाला
- मौन – चुप
- भयंकर विस्फोट – धमाका, फूटना, अचानक वृद्धि
- बाह्य – बाहरी
- अद्वितीय – अनोखा, अनूठा
- अलौकिक – जो लोक में न मिलता हो, अद्भुत, अपूर्व
- समस्त – सारा
- उपलब्धि – प्राप्ति, सफलता, सिद्धि
- कर्मशीलता – फल की इच्छा छोड़कर काम करना
- सर्जक – रचना करने वाला
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Chapter 10 – साए
- नन्हें-नन्हें- बहुत छोटे
- दुधमुँहे बच्चे– दूध पीने वाले छोटे बच्चे
- रुग्ण- बीमार
- सुदूर– बहुत दूर
- राह देखना– इंतज़ार करना
- डाकिया– पत्र बाँटने वाला
- अर्सा- लंबा समय
- करुण– दयनीय, दुःख से भरा
- रंगभेद- नस्ल या रंग के आधार पर भेदभाव
- अनावश्यक– बेकार, फालतू
- विलंब– देरी
- ऑपरेशन– शल्य-चिकित्सा
- सार लगता नहीं– लाभ की संभावना न होना
- चंद दिनों की मेहमानदारी– थोड़े दिनों का जीवन शेष होना
- सूझता नहीं- समझ में नहीं आता
- रखवाला– रक्षा करने वाला
- परवरिश– पालन-पोषण
- अबोध– अनजान, नासमझ
- रुलाईभरी आँखें- आँसुओं से भरी आँखें
- तार- टेलीग्राम
- मोहर– मुहर, छाप
- परमात्मा- ईश्वर
- तनिक– थोड़ा
- मुरझाए मुखड़े– उदास चेहरे
- खिल उठे– प्रसन्न हो गए
- नियमित– लगातार
- टाइपराइटर– टाइप करने की मशीन
- कारोबार– व्यवसाय
- विस्तार– बढ़ोतरी
- इरादा– योजना, मन का सोचना
- फार्म हाउस– खेती से जुड़ा घर
- उत्साहजनक- उत्साह बढ़ाने वाला
- स्वाभाविक– बिना किसी बनावट के
- प्रसन्नता- खुशी
- डूबती नाव पार लगना- बिगड़ती स्थिति का सुधर जाना
- लगभग– करीब-करीब
- तरसना– बहुत इच्छा होना
- हिदायतें– सीख
- अक्षरशः- ज्यों-का-त्यों
- कष्ट- परेशानी, दुःख
- अव्वल– प्रथम
- वजीफ़ा– छात्रवृत्ति
- ब्याह- विवाह
- जात-बिरादरी– एक ही जाति या समुदाय के लोग
- उपयुक्त– योग्य
- पक्ष में– समर्थन में
- दहेज- विवाह में दिया जाने वाला धन या सामान
- खोज करना- तलाश करना
- वर- दूल्हा
- तलाश- खोज
- भटकना- इधर-उधर घूमना
- खाता-पीता घर– संपन्न परिवार
- घराना- परिवार
- भरम- भ्रम, गलत धारणा
- बटोरना- इकट्ठा करना
- सहज- आसान
- तिथि– तारीख
- निश्चित– तय
- गहने- आभूषण
- विवशता– मजबूरी
- कारोबार- व्यवसाय
- हड़ताल– काम बंद करना
- संकट- कठिन स्थिति
- वर-वधू– दूल्हा-दुल्हन
- धूमधाम– बड़े उत्सव के साथ
- सर्वप्रथम– सबसे पहले
- सर्टिफिकेट– प्रमाण-पत्र
- वजीफ़ा- छात्रवृत्ति
- कीमती- मूल्यवान
- मर्मस्पर्शी- दिल को छू लेने वाला
- जिंदगी की डोर– जीवन की आशा
- अड़चन– बाधा
- स्थगित- कुछ समय के लिए रोक देना
- अबाध– बाधा रहित, बिना रुकावट
- कठिन– मुश्किल
- बिता लेंगे- समय गुज़ारेंगे
- उत्तर– जवाब
- नियमित रूप से– लगातार
- विश्वास के आदमी– भरोसेमंद लोग
- खटना- मेहनत करना
- आबोहवा– जलवायु
- विवशता- मजबूरी
- अंत में– आखिरकार
- संभावना- उम्मीद
- प्रत्युत्तर– जवाब में
- विस्तृत- विस्तार से, फैला हुआ
- इलाज- उपचार
- कार्यक्रम बनाना– योजना तैयार करना
- अकस्मात- सहसा, अचानक
- चौंकाना– हैरान करना
- उत्कंठा– प्रबल इच्छा
- चकित- हैरान
- एकाएक- अचानक
- निगाहें- नज़र
- निक्कर– बच्चों की छोटी पैंट
- गुल्ली-डंडा– बच्चों का खेल
- हवाई अड्डा– विमान उतरने-उड़ने का स्थान
- नेमप्लेट– नाम की पट्टी
- धुँधली- हल्की, साफ़ न दिखने वाली
- पूछताछ– जानकारी लेना
- वृद्ध- बूढ़ा व्यक्ति
- अप्रवासी– दूसरे देश में रहने वाला व्यक्ति
- दफ़्तर– कार्यालय
- निपट अकेले- बिल्कुल अकेले
- बरामदा– घर का बाहरी भाग
- प्रतीक्षा- इंतज़ार
- ऊँघना- नींद में झपकी लेना
- नाम-धाम- नाम और पहचान
- बाँहों में भर लेना– गले लगाना
- उत्साह– खुशी, उमंग
- स्वागत- आदरपूर्वक ग्रहण करना
- इंगित– इशारा
- ढुलका– झुका हुआ
- किलकना– हँसना
- गौर से– ध्यानपूर्वक
- झेंपना– संकोच करना
- खिलखिलाना- ज़ोर से हँसना
- जिगरी दोस्त- बहुत घनिष्ठ मित्र
- सगे भाई- असली भाई
- लगन– मेहनत और मन लगाकर
- सांझे में– मिलकर, साझेदारी में
- फ़र्म- व्यापारिक संस्था
- बदौलत– कारण से
- ठिठकना- अचानक रुक जाना
- थामना- पकड़ना
- कठिनाई– परेशानी
- हौले से- धीरे से
- सहलाना- प्यार से हाथ फेरना
- शून्य- खालीपन
- पलकें टिकाए- एकटक देखना
- मौन– चुप्पी
- मौन भंग होना- चुप्पी टूटना
- खोए-खोए– विचारों में डूबा हुआ
- तिनके– सूखे घास के छोटे टुकड़े
- साया- छाया
- आसरा– सहारा
- भँवर– लहरों का चक्कर
- तंतु– डोर, धागा
- छिन्न-छिन्न- टुकड़ों में बँटा हुआ
- पलभर– बहुत कम समय
- असमंजस- दुविधा
- गंभीर- गहरा
- विलीन- मिलकर समाप्त हो जाना
- अनाथ– जिसके माता-पिता न हों
- घुल-घुलकर– धीरे-धीरे कमजोर होकर
- हताशा- निराशा
- असुरक्षा– सुरक्षा का अभाव
- बीहड़- ऊबड़-खाबड़
- अदृश्य– जो दिखाई न दे
- गुजर जाना– मृत्यु हो जाना
- सांझा कारोबार– मिलकर किया गया व्यापार
- सरसब्ज- हरा-भरा
- वचन– वादा
- डबडबाई आँखें– आँसुओं से भरी आँखें
- धुँधला चित्र– साफ़ न दिखने वाला चित्र
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Chapter 11 – वह चिड़िया एक अलार्म घड़ी थी
- भोर – प्रातः काल
- उपलब्ध – मौजूद
- उपहार – तौफ़ा, भेंट
- दाखिला – प्रवेश
- सेवा-निवृत्ति – रिटायरमेंट, कार्यकाल समाप्त होना
- सम्मोहक – वह जो मोह लेता हो, मोहक, लुभावना
- संवेदना – अनुभूति, अनुभव
- सघनता – अधिकता, गंभीरता, प्रगाढ़ता, गाढ़ापन
- फ़ॉर्मूले – तरीके
- कौतूहल – जिज्ञासा, उत्सुकता
- आश्चर्यजनक – हैरान
- अनुभव – काम की जानकारी, तजुर्बा
- रास – पसंद
- सुहाता – सुखद, मनभावन, प्यारा
- एकांत – अकेले
- सौंदर्य – सुंदरता
- सुधर – सही, अच्छी
- तीन दशक – 30 साल (तीस वर्ष)
- लायक – उचित, ठीक
- अभ्यास – किसी काम को बार-बार करना, आदत
- अस्सी का दशक – 1980 से 1989 तक का समय
- निशाचरी – राक्षसी, रात में घूमने वाली, रात में सक्रिय रहने वाली (जैसे उल्लू, चमगादड़)
- वृत्ति – कार्य, व्यापार
- ख्याल – विचार
- व्यसन – बुरी आदत, लत
- व्यवधान – बाधा, परदा, ओट
- खंगाल – किसी चीज़ को अच्छे से साफ़ करना, छानबीन करना, या पूरी तरह से खाली कर देना/तलाशना
- अपूर्व – अद्भुत
- मिन्नतें – प्राथनाएँ
- बेख़बर – जिसे कोई खबर या जानकारी न हो, अनजान
- गृह-प्रवेश – नवनिर्मित घर में निवास करना
- गृहस्थी – परिवार, वंश
- पधार – प्रवेश करना
- झुंझलाहट – चिढ़, ग़ुस्सा
- तीव्र – तेज
- फुदकती – कुदकना
- गुँज – ध्वनि की प्रतिध्वनि या गूँज
- आश्रय – ठिकाना
- सुहाता – अच्छा लगना
- वाणी – आवाज
- मानस – मन
- जागृति – जागना, जागरूकता, चेतना, या सचेत होना
- नभचारिणी – आकाश में घूमने वाली
- सौरभ – अच्छी गन्ध या महक, खुशबु
- ताना-बाना – बुनावट का तार, बुना हुआ, बुनी हुई वस्तु
- सूने – वीरान
- सुवर्ण छवि – सुनहरी आकृति
- अभिभूत – पूरी तरह से किसी भावना (जैसे खुशी, दुःख, आश्चर्य) या स्थिति से घिर जाना या हावी हो जाना, पराजित महसूस करना
- कोठरी – छोटा कमरा
- शय्या – बिस्तर
- भोर – सुबह
- देह – शरीर
- कांति – चमक, आभा
- कौंध – बिजली की चमक, चमक
- कोमलकांत – मृदुल तथा कमनीय
- अप्रतिम – बेजोड़, अनुपम
- व्यर्थ – बेकार
- वात्सल्य – ममता
- यांत्रिक – मशीन या यंत्र से संबंधित
- अवतरित – उतरा हुआ
- सुमंगल – बहुत शुभ, कल्याणकारी, मंगलमय
- सरिताओं – नदियों
- निर्मलता – स्पष्टता, शुद्धि, निर्मलता, सफ़ाई
- चरम – सीमा
- उपक्रम – आरंभ, आयोजन
- जीवन स्मृति – जीवन की यादें, आत्मकथा
- मीनाकारी – स्वर्ग जैसी सुंदरता को धातु पर उकेरना
- कृतज्ञता – आभार या धन्यवाद व्यक्त करने की भावना
- अभिनंदन – अभिवादन, सराहना करना
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Chapter 12 – नींव की ईंट
- चमकीली- चमकदार
- सुघड़- सुडौल, जिसकी बनावट सुंदर हो
- कँगूरा- चोटी, शिखर, गुंबद बुर्ज
- नींव- भवन का आधार, बुनियाद
- चमक-दमक- बाहरी सजावट, दिखावा
- आवरण- पर्दा
- ठोस- मजबूत
- सत्य- सच
- शिवम्- कल्याणकारी
- सुंदरम्- सुंदर, आकर्षक
- कठोर- सख्त, कड़ा
- भद्दापन- बदसूरती
- मुख मोड़ना- ध्यान न देना, दूर होना
- धन्य- प्रशंसनीय, सराहनीय
- कट-छँटकर- तराशकर, आकार देकर
- बरबस- अपने आप, अनायास
- लोक लोचन- लोगों की नजरों
- आकृष्ट- आकर्षित
- गड़ गई- मजबूती से धँस गई
- अस्ति-नास्ति- होना न होना
- पुख़्तापन- मजबूती, दृढ़ता
- बेतहाशा- अचानक और वेगपूर्वक
- कँगूरे के गीत गाना- ऊपर दिखाई देने वाली सफलता की प्रशंसा करना
- नींव के गीत गाना- आधार बनने वालों की सराहना करना
- पक्की- मजबूत, दृढ़
- शोभा- सुंदरता
- सौगुनी- कई गुना बढ़ी हुई
- पायदारी- मजबूती
- मुनहसिर- निर्भर
- अर्पित- दिया हुआ
- सात हाथ- बहुत गहराई
- स्वच्छ- साफ़, शुद्ध
- सुनहली- स्वर्ण जैसी, उजली
- अंधकूप- अँधेरा कुआँ
- क़बूल किया- स्वीकार किया
- अस्तित्व- हस्ती
- विलीन- ओझल, अदृश्य, मिल जाना
- सृष्टि- रचना, संसार
- बलिदान- बलिदान
- तपे-तपाए- कष्ट सहकर निखरे हुए
- मौन-मूक- चुपचाप, बिना बोले
- शहादत- बलिदान, कुर्बानी
- लाल सेहरा- बलिदान का गौरवपूर्ण प्रतीक
- मौन-मूक- चुपचाप, बिना बोले
- शुहरत– शोहरत, ख्याति, प्रसिद्धि
- बलिदान- त्याग
- प्रसिद्धि- ख्याति
- कलश- मंदिर का शिखर
- आधारशिला– बुनियाद का पत्थर
- अमर- सदा जीवित रहने वाला
- धर्म-प्रचार- धर्म का प्रसार
- अनाम- बिना नाम वाला, गुमनाम
- उत्सर्ग- बलिदान
- शूली- लोहे की नुकीली छड़, प्राण दंड देने का एक साधन
- वन-वन की खाक छानना– जंगलों में भटकना
- पुण्य-प्रताप- अच्छे कर्मों का प्रभाव
- फल-फूल रहा है- आगे बढ़ रहा है, विकसित हो रहा है
- नींव की ईंट- आधार बनने वाला व्यक्ति
- गिरजाघर– चर्च
- आज़ाद- स्वतंत्र
- बलिदान- त्याग, कुर्बानी
- इतिहास में स्थान पाना– इतिहास में नाम दर्ज होना
- कोना- क्षेत्र, हिस्सा
- दधीचि- महान त्यागी ऋषि, यहाँ अत्यधिक बलिदान देने वाले व्यक्ति का प्रतीक
- हड्डियों का दान– अपना सर्वस्व त्याग देना
- विदेशी– बाहरी, पराया
- वृत्रासुर– अत्याचारी शत्रु (यहाँ विदेशी शासकों का प्रतीक)
- नाश- अंत, विनाश
- मूढ़- मूर्ख
- सत्य- सच
- धर्म- जिम्मेदारी (कर्त्तव्य के अर्थ में)
- सृष्टि- रचना
- नव-निर्माण- नए सिरे से निर्माण
- अफ़सोस- दुख
- होड़ा-होड़ी- प्रतिस्पर्धा, एक दूसरे से आगे बढ़ जाने की कोशिश
- कामना- इच्छा
- लुप्त- गायव
- शासक– शासक वर्ग, सरकार
- नौजवान- युवा
- खपा देना– पूरी तरह लग जाना
- प्रेरणा- उत्साह
- अनुप्राणित- प्रेरित
- चेतना- जागरूकता
- अभिभूत- पूरी तरह प्रभावित
- शाबाशी- प्रशंसा
- दलबंदियाँ- गुटबाज़ी
- वासना– इच्छा
- आतुर- उतावला
- चुनौती- ललकार, कठिन परीक्षा
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Chapter 13 – हिम्मत और जिंदगी
- कंठ – गला
- बदन – शरीर
- तर – भीगा हुआ
- वश – अधीन
- अभ्यास – आदत
- शीतलता – ठंडक
- तरलाई – चंचलता, चपलता
- सन्तुष्ट – तृप्त, प्रसन्न, खुश
- सेज – बिस्तर
- भ्रम – शंका
- उपवास – भोजन का त्याग, व्रत
- संयम – रोक, निग्रह, नियंत्रण
- आत्महत्या – ख़ुदकुशी, खुद को खत्म करना
- साधन – ज़रिया, सामग्री
- परमार्थ- सर्वोच्च उद्देश्य, परम लक्ष्य, या दूसरों का भला करना, परोपकार
- उपदेश – शिक्षा की बात बतलाना, निर्देश
- निरा भोगी – पूरी तरह से इंद्रिय सुख में लिप्त व्यक्ति, व्यसनी, केवल सुख भोगने वाला, या केवल भोग-विलास करने वाला
- हस्तियाँ – व्यक्तित्व, महान व्यक्ति, मशहूर लोग
- कस्तूरी के एक नाफे – कस्तूरी हिरण की नाभि में पाई जाने वाली सुगंधित थैली
- अधिकांश – ज्यादातर
- लाक्षागृह – लाख (राल) से बना घर या महल
- जोखिम – कठिनाई
- सूरतें – स्थिति
- मकसद – उद्देश्य
- अंधियाली – अंधेरा, अँधकार
- हमजोली – साथी, संगी
- संयोग – मेल, संबंध
- गोधूलि – साँझ, शाम
- साहस – हिम्मत
- निडर – साहसी, हिम्मती
- बेखौफ – निडर
- जनमत – समाज, सार्वजनिक राय
- उपेक्षा – तिरस्कार, निरादर, अवहेलना
- ममि – मृत शरीर
- रस – आनंद
- व्यावहारिक – व्यवहार में आने योग्य
- कायर – डरपोक
- धिक्कार – निन्दा, फटकार, गाली
- पूंजी – जमा किया हुआ धन
- फुनगी – पेड़ की शाखा का अग्र भाग
- वास्ते – के लिए
- अन्तराल में – बीच में
- मौक्तिक-कोष – मोतियों का खजाना
- कामना – इच्छा
- निर्झरी – झरने से निकलने वाली नदी, या पहाड़ी नदी
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Chapter 14 – महान राष्ट्रभक्त : मदन लाल ढींगरा
- स्वतंत्रता– आज़ादी
- चिंगारी– आग का एक छोटा कण या टुकड़ा
- अग्नि- आग
- श्रेय- अधिकार, यश
- शहीद– देश के लिए प्राण देने वाला वीर
- सम्पन्न- खुशहाल
- सिविल सर्जन- सरकारी अस्पताल का वरिष्ठ डॉक्टर
- सेवामुक्त- नौकरी से निवृत्त (रिटायर)
- स्वतंत्रता प्रेमी– आज़ादी से प्रेम करने वाला
- तर्क– सोच-विचार, कारण के आधार पर विचार
- तराजू में तोलना– ठीक से जाँच-परख करना
- अभिव्यक्त– प्रकट
- राष्ट्रभक्ति- देश से प्रेम
- परम्परा- रीति-रिवाज़, चली आ रही प्रथा
- देशभक्ति के रंग में रंगे– पूरी तरह देशप्रेम में डूबे हुए
- धंधे– काम-काज, रोज़गार
- मज़दूरी– मेहनत का काम
- गुजारा- जीवन चलाने का साधन
- रिक्शा / टांगा- सवारी ढोने के साधन
- उच्च शिक्षा– बड़ी पढ़ाई, आगे के पढ़ाई
- यांत्रिकी अभियांत्रिकी (मकैनिकल इंजीनियरिंग)– मशीनों से संबंधित इंजीनियरिंग की पढ़ाई
- दाखिला– प्रवेश, नाम लिखवाना
- विदेश– अपने देश से बाहर का देश
- अध्ययन- पढ़ाई
- राष्ट्रवादी कार्यकर्ता– देश की आज़ादी के लिए काम करने वाला व्यक्ति
- आर्थिक सहायता– पैसों से मदद
- प्रखर– अत्यंत तेज, प्रभावशाली
- राष्ट्रवादी नेता- देश की आज़ादी और हितों के लिए कार्य करने वाला नेता
- संपर्क में आना- मिलना, संबंध होना
- गौरवान्वित– महिमा से युक्त
- प्रभावित– असर पड़ना
- अभिनव– बिल्कुल नया।
- क्रांतिकारी– देश की आज़ादी के लिए सशस्त्र संघर्ष करने वाला
- संस्था- संगठन
- सदस्य– किसी संगठन से जुड़ा व्यक्ति
- प्रशिक्षण– सिखलाई, ट्रेनिंग
- संरक्षण– देखरेख
- प्रचार– फैलाना
- स्थापना– किसी चीज़ को स्थापित करना, बनाना
- इंडिया हाउस– लंदन में भारतीय राष्ट्रवादियों का केंद्र
- मृत्युदंड– फाँसी की सज़ा
- वार्षिक दिवस– सालाना समारोह
- एकत्र हुए- इकट्ठा हुए
- समारोह– उत्सव, आयोजन
- सचिव सलाहकार- उच्च पदाधिकारी, परामर्श देने वाला अधिकारी
- नीच– दुष्ट, अत्याचारी
- गुलाम बनाना– पराधीन करना
- मौत के घाट उतारना– मार देना
- नौजवान– युवा
- पिस्टल– छोटी बंदूक
- ढेर कर दिया- मार गिराया
- साक्ष्य– सबूत
- साहसपूर्ण– हिम्मत भरा
- चेतावनी- सावधान करने का संकेत
- हर कीमत चुकाना– कोई भी बलिदान देने को तैयार होना
- बंग-भंग आंदोलन– बंगाल के विभाजन के विरोध में चला आंदोलन
- गुंजाया– गूँज पैदा की
- वंदे मातरम्- मातृभूमि की वंदना का नारा
- उच्च आदर्श– महान विचार और मूल्य
- स्वामी– मालिक
- भारतीय संस्कृति- भारत की परंपराएँ और सभ्यता
- मूल्य- नैतिक सिद्धांत
- अनुपालन– रक्षण
- आरोप– इल्ज़ाम
- अभियोग– मुकद्दमा
- अदालत- न्यायालय
- गर्व- अहंभाव, घमंड
- समर्पित करना– अर्पित करना
- सुनहरे दिन- अच्छे और उज्ज्वल समय
- स्वतंत्र– आज़ाद
- मातृभूमि- जन्मभूमि, देश
- अधिकार– हक
- जेल- कारागार
- हिम्मत– साहस
- सराहा– प्रशंसा की
- जूझ रहे थे- संघर्ष कर रहे थे
- मेंबर पार्लीमैंट– संसद सदस्य
- संस्मरण– यादें, स्मृतियाँ
- आत्मसम्मान– खुद का सम्मान
- आत्मबल– मन की शक्ति
- न्यायपालिका- न्याय देने वाली संस्था
- महान् शहादत– देश के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान
- शहीदी/ शहादत- देश के लिए प्राण त्याग
- स्मृति पुंज– यादों का समूह
- कुर्बानी– बलिदान
- अमर– जो कभी न मरे, सदा जीवित रहने वाला
- स्वतंत्रता की आवाज़– आज़ादी की पुकार
- दबा दिया– समाप्त कर दिया
- वास्तविकता- सच्चाई
- स्वतंत्र बनाएगी– आज़ाद करेगी
- आवश्यकता– ज़रूरत
- प्रभावित- असर
- स्मृति में- याद में
- पत्रिका– नियमित रूप से निकलनेवाली पुस्तिका
- विचारधारा- सोच, विचारों की दिशा
- संवाहक– आगे ले जाने वाली
- जोशभरा- उत्साह से भरा हुआ
- वक्तव्य- कथन
- अनुभव– महसूस
- राष्ट्र देवता– राष्ट्र को ईश्वर के समान मानना
- अपमान– बेइज्जती, तिरस्कार
- राष्ट्र पूजा– देश की भक्ति
- देह– शरीर
- लावारिस– जिसका कोई दावा न करे
- करार देना– घोषित करना
- दफना दिया– मिट्टी में दबा देना
- अनथक– बिना थके
- प्रयत्न- प्रयास
- संबंधी– रिश्तेदार
- अस्थियाँ– हड्डियाँ
- स्नेह- प्रेम
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Chapter 15 – एक अंतहीन चक्रव्यूह
- अंकुर फूटना- आरंभ होना, शुरुआत होना
- प्रयोग– आज़माना, परीक्षण करना
- मायावी- भ्रम पैदा करने वाली, आकर्षक
- प्रथम परिचय– पहली बार जान-पहचान
- सहस्रों– हजारों
- पग- कदम
- कौतूहलवश- उत्सुकता के कारण
- वनस्पतियाँ– पेड़-पौधे
- मन को बहलाना– मन को खुश करना
- समय की धारा– समय का प्रवाह
- निर्बुद्धि– बिना समझे, मूर्खतापूर्ण ढंग से
- चक्रव्यूह- चक्र के रूप में सेना की स्थापना
- टिप्पणी: युद्ध में एक ऐसी मोर्चाबंदी जिसके अंदर फँसने के बाद उसमें से फिर बाहर निकलना असंभव हो जाता है, नशे की लत पड़ने पर भी यही स्थिति होती है कि व्यक्ति फिर नशे के दलदल से बाहर नहीं आ पाता।
- सुध न रहना– होश न रहना
- बंदी बन जाना– गुलाम हो जाना
- मादक पदार्थ– नशीले पदार्थ
- आकाशकुसुम– बहुत आकर्षक लेकिन भ्रमित करने वाली वस्तु
- छटपटाना- बेचैन होना
- दलदल– कीचड़, ऐसी स्थिति जिससे निकलना कठिन हो
- सभ्यता- सभ्य होने का भाव।
- सूर्य- सूरज
- रसास्वादन– स्वाद लेना
- पुरातात्विक– पुरातत्व (प्राचीन वस्तुओं की खोज एवं अध्ययन) से सम्बन्धित
- उत्खनन- जमीन से खोदकर निकालना, खुदाई
- पाषाण- पत्थर
- सेवन- उपयोग करना, खाना-पीना
- सुस्पष्ट उल्लेख– स्पष्ट विवरण
- कबीले– आदिवासी समूह
- नागफनी– साँप के फन के आकार का गूदेदार पौधा
- आदिवासी- मूल निवासी लोग
- कोकेन- कोका की पत्तियों से तैयार किया गया द्रव्य, जिसे लगाने से अंग सुन्न हो जाता है।
- सदी- शताब्दी, सौ वर्ष की अवधि
- उत्तरार्द्ध- पिछला आधा भाग
- तार-तरंगें- मन की भावनाएँ और विचार
- रागमय– आनंदपूर्ण, सुखद
- भ्रामक– भ्रम उत्पन्न करने वाला, बहलाने वाला
- आबादी– जनसंख्या
- सीमित- सीमाबद्ध
- भूल-भुलैया- उलझन भरा रास्ता
- तौर-तरीके– जीवन जीने के ढंग
- चिलम- मिट्टी की बनी हुई नली जिस में तंबाकू जलाकर पीते हैं।
- मूल्य– आदर्श, मान्यताएँ
- रग-रग में फैलना- पूरी तरह फैल जाना
- तबका- वर्ग
- किशोर- कम उम्र के लड़के-लड़कियाँ
- कलम घिसना- दफ्तर में कागज़ी काम करना
- सम्मिलित– शामिल
- ग़म ग़लत करना- दुःख भूलने के लिए नशा करना
- शून्य- खालीपन
- स्नेहरिक्त- स्नेह से रहित
- नीरस- उबाऊ, बिना आनंद का
- उत्सुकतावश- जिज्ञासा के कारण
- फैशनेबल- आधुनिक दिखने वाला
- नरक– अत्यंत कष्टदायक स्थिति
- भैंसना– फँसना, डूब जाना
- मोटे तौर पर- सामान्य रूप से
- निर्भरता– आदत, आश्रित होना
- बेचैन– अशांत
- शारीरिक लक्षण- शरीर में दिखाई देने वाले संकेत
- मनोवैज्ञानिक निर्भरता- मानसिक आदत
- गुलाम हो जाना- पूरी तरह वश में हो जाना
- खुराक- मात्रा, डोज
- दरजा- स्तर
- शारीरिक निर्भरता- शरीर की लत
- व्यसन- लत
- ड्रग एडिक्शन- नशीले पदार्थ पर शारीरिक व मानसिक रूप से निर्भरता
- नशे की शुरुआत– नशा करने की पहली अवस्था
- साथी- मित्र, संगत करने वाला
- अनुभव- तजुर्बा
- तबदील हो जाना- बदल जाना
- अवसाद- सुस्ती, थकावट, उदासी
- तनाव– मानसिक दबाव
- विफलता- असफलता
- हताशा– निराशा, दुःख
- धकेलना- किसी ओर मजबूर करना
- संतुलन– मानसिक स्थिरता
- अंतहीन- जिसका अंत न हो
- गलतफहमी- गलत धारणा
- कल्पनाशीलता– मन की कल्पना शक्ति
- सृजनात्मकता- मौलिकता, रचनात्मक शक्ति
- वास्तविकता- सच्चाई
- मनन-क्षमता- सोचने-समझने की शक्ति
- क्षीण- कमजोर
- गँवा देना- खो देना
- एकाग्रता– ध्यान लगाने की शक्ति
- व्यक्तित्व- व्यक्ति के गुण
- खामियाँ- कमजोरियाँ, दोष
- हीन भावना- अपने को तुच्छ समझने की भावना
- घर कर जाना- स्थायी रूप से बस जाना
- गुमराह- गलत रास्ते पर पड़ जाना
- गहरा असर- तेज प्रभाव
- मादक पदार्थ– नशा करने वाली वस्तुएँ
- भ्रांति- भ्रम, संदेह
- मदहोशी- नशे की अवस्था
- परिवेश- आसपास का वातावरण
- भ्रमराक्षस (इल्यूजन)– दृष्टि या मन का धोखा
- सुर्खी- लालिमा
- अस्तित्व- होने का बोध
- अद्भुत- विचित्र, आश्चर्यजनक
- प्रमत्त- अत्यधिक उत्तेजित
- वास्तविकता से नाता टूटना– सच से संपर्क समाप्त होना
- अपरिचित– अनजाना
- विभ्रम- संदेह
- दृष्टि-भ्रम- आँखों से गलत दिखाई देना
- श्रुति-भ्रम- कानों से गलत सुनाई देना
- आभास- अनुभव, महसूस होना
- रेंगना- धीरे-धीरे चलना
- सेवन– उपयोग
- मनन-क्षमता- सोचने-समझने की शक्ति
- स्मरण-शक्ति– याद रखने की क्षमता
- रोगी- बीमार व्यक्ति
- आलस्य- सुस्ती
- पोस्ती- नशे में डूबा हुआ, सुस्त
- चिड़चिड़ा- जल्दी गुस्सा करने वाला
- लापरवाह– बेपरवाह, ध्यान न देने वाला
- व्यक्तिगत स्वच्छता– निजी साफ-सफाई
- शंकालु- संदेह करने वाला
- हावी होना- प्रभावी हो जाना
- उतारू हो जाना– करने को तैयार हो जाना
- आत्महत्या- स्वयं को मार लेना
- दर- अनुपात, संख्या
- नशीले पदार्थ- नशा करने वाली वस्तुएँ
- दुष्प्रभाव- हानिकारक असर
- भूख मर जाना- भूख न लगना
- दुर्बल- कमजोर
- काबिल- सक्षम
- तपेदिक– क्षय रोग, टी. बी. (Tubercle bacillus)
- संक्रामक रोग- फैलने वाले रोग
- मतली- मिचली, जी मचलने की अवस्था
- क़ै- वमन, उल्टी करना
- रुग्ण- बीमार, दूषित
- फिल्टर- छानने का यंत्र
- रस लेना– पूरा असर पाना
- वातस्फीति (एंफाइसिमा)- फेफड़ों की बीमारी जिसमें साँस फूलती है
- आशंका- डर, संभावना
- कई गुणा- कई गुना अधिक
- टीका- इंजेक्शन की सुई
- नस- शिरा
- यकृतशोध (हेपेटाइटिस-बी)– जिगर की सूजन
- एड्स- (एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम) एक विशेष तरह के वायरस से उत्पन्न एक रोग जिसमें
- शरीर की रोग-बचाव प्रणाली बेअसर हो जाती है।
- रुग्णताएँ- बीमारियाँ
- खंडहर- उजड़ा हुआ स्थान
- निरपट- बिल्कुल
- सगे-संबंधी- रिश्तेदार
- दिनोंदिन- दिन-प्रतिदिन
- खुराक- नशे की मात्रा
- तस्करी- अवैध व्यापार
- दलदल- कीचड़, फँसाने वाली स्थिति
- विवश- मजबूर
- मुक्ति पाना- छुटकारा मिलना
- आसक्तता- लिप्तता
- खुराक- नशे की मात्रा
- तड़प- तीव्र बेचैनी
- अवहार लक्षण- नशा छोड़ने पर दिखने वाले लक्षण
- चंद- कुछ
- कायम रहना- बना रहना
- चिकित्सीय- चिकित्सा से संबंधित
- चंगुल- पकड़
- मनोरोग विशेषज्ञ- मानसिक रोगों के डॉक्टर
- नशा-मुक्ति- नशे से छुटकारा
- चिकित्सीय पद्धतियाँ– इलाज के तरीके
- व्यवहार में लाना– लागू करना
- छुटकारा दिलाना– मुक्त करना
- नियंत्रण में रहना– काबू में रहना
- उपचार- इलाज
- प्रथम चरण- पहला चरण
- प्रायः– सामान्यतः
- मानसिक- मन से संबंधित
- सामाजिक- समाज से जुड़ा
- पुनर्वास– बीमारी आदि के कारण उजड़े बर्बाद हुए लोगों का उपचार करके उन्हें फिर से बसाना
- आवश्यक कदम– जरूरी उपाय
- परिवारजन- परिवार के लोग
- प्रियजन- अपने लोग
- सहयोग- मदद
- संकल्प- दृढ़ निश्चय
- यज्ञ- यहाँ कठिन और पवित्र कार्य के अर्थ में
- सम्पन्न होना– पूरा होना
- सरकारी / गैर-सरकारी संगठन- सरकार द्वारा / निजी संस्थाएँ
- स्वयंसेवी संस्थाएँ- सेवा करने वाली संस्थाएँ
- एक्सपेरिमेंट– प्रयोग
- संगत- साथ, मित्रता
- देखादेखी- दूसरों की नकल में
- क़ैद- बंधन
- अंधियारा- अँधेरा, निराशा
- सिसकियाँ- करुण आवाज़ में रोना
- साया- छाया, प्रभाव
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Chapter 16 – बचेंद्री पाल
- गढ़वाल – उत्तराखंड का एक पहाड़ी भू-भाग
- स्वप्नदृष्टा – स्वप्न देखने वाला
- खुलाब – खुलापन
- निडर – जो किसी से न डरे
- प्रवासी – दूसरे स्थान का निवासी
- न्यूनतम – कम से कम
- क्रीड़ा – खेल
- विशिष्टता – विशेषता
- बेहतर – अच्छा
- अधिकांश – ज्यादातर
- बर्दाश्त – सहन करने की शक्ति
- तीव्र – तेज़
- दृढ़ संकल्प – पक्का इरादा
- उद्देश्य – लक्ष्य
- पर्वतारोहण – पर्वतों पर चढ़ना
- समर्पित – खुद को सौंप देना
- बजाय – बदले में
- आवेदन – निवेदन, प्रार्थना करना
- प्रशिक्षण – नियमित रूप से दी जानेवाली व्यावहारिक शिक्षा, ट्रेनिंग
- संस्तुति – प्रशंसा
- दुर्गम – कठिन
- आरोहण – चढ़ना
- प्रस्थान – जाना, रवानगी, कूच
- आरोही – चढ़ने या ऊपर जाने वाला
- उपस्कर – घर का सामान, सामग्री, उपकरण या रसद
- रोमांच – रोंगटे खड़े होना
- फावड़ा – कुदाल
- सागरमाथा – आकाश का माथा (सिर), स्वर्ग का शिखर, और यह नेपाल में माउंट एवरेस्ट का नेपाली नाम है
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Chapter 17 – कैसे बचें उपभोक्ता धोखाधड़ी से
- रोज़मर्रा- रोजाना की
- उपभोक्ता- सामान या सेवा खरीदने वाला व्यक्ति
- ठगी- धोखा देकर नुकसान पहुँचाना
- धोखाधड़ी– छल, कपट
- शिकार होना- प्रभावित होना, फँस जाना
- ऐक्सपायरी डेट– समापन तिथि
- क्रॉस- लाँधी हुई, बीती हुई
- गारंटी- निश्चित समय तक सेवा या मरम्मत का आश्वासन
- सर्विस- सेवा
- उत्पाद- वस्तु, सामान
- वज़न- भार
- चिकित्सक– वैद्य, डॉक्टर
- इलाज– उपचार
- लुभावने- आकर्षित करने वाले
- विज्ञापन- प्रचार
- प्रभावित– असर डालना
- खामियाजा– नुकसान
- अंतत- अंत में
- संरक्षण- रक्षा
- कानून- नियम
- धन- पैसा
- अधिकार- हक
- मसलन- उदाहरण के तौर पर
- सुनवाई- बात रखे जाने का अवसर
- शिकायत निवारण– शिकायत का समाधान
- उपभोक्ता शिक्षा– उपभोक्ता को उसके अधिकारों की जानकारी देना
- ग्राहक- खरीदने वाला व्यक्ति
- जागरूक होना- सचेत होना
- संगठित- मिलकर, एकजुट होकर
- संरक्षण- हिफ़ाज़त
- ताज़ा अध्ययन– हाल का सर्वे, शोध
- मात्र- केवल
- अवगत- जानकार
- हालाँकि– फिर भी
- जागरूक करना– जानकारी देना
- स्वयं- खुद
- स्वैच्छिक- अपनी इच्छा से
- उपभोक्ता संगठन– उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने वाला समूह
- शिकायत दर्ज करना– शिकायत लिखवाना
- हनन- चोट पहुँचना, आघात
- शिकायतकर्ता- शिकायत करने वाला
- तथ्य- सच, यथार्थ
- आरोप- दोष लगाना
- समर्थन- प्रमाण
- दस्तावेज़– विविध लेख्य
- हरजाना– नुकसान
- राहत– आराम, चैन
- उल्लेख- ज़िक्र
- हस्ताक्षर- साइन
- उपरोक्त- ऊपर लिखी हुई
- न्यायालय- अदालत
- शुल्क- फीस
- उपभोक्ता फोरम- उपभोक्ताओं की शिकायत सुनने वाली संस्था
- क्लेम- दावा
- जिलास्तर- ज़िले के स्तर पर
- उपभोक्ता संरक्षण आयोग– उपभोक्ताओं की शिकायत सुनने वाली संस्था
- न्याय की गुहार– न्याय की माँग
- राज्य स्तर- प्रदेश के स्तर पर
- राष्ट्रीय- देश स्तर का
- ध्यान रहे- याद रखें
- अधिकारों का हनन- अधिकारों का उल्लंघन
- पीड़ित- जिसके साथ गलत हुआ हो
- वकील- अधिवक्ता
- पैरवी- अपना पक्ष रखना
- बीपीएल (बिलो पावर्टी लाइन)- गरीबी रेखा से नीचे
- फीस- शुल्क
- लेबल / स्टिकर- चिपकाया गया काग़ज़
- बाज़ार भाव- बाजार की सही कीमत
- एमआरपी- अधिकतम खुदरा मूल्य
- प्रयोग- उपयोग
- उल्लंघन- नियम या अधिकार तोड़ना
- आकर्षक- लुभावना
- भ्रामक विज्ञापन– भ्रम में डालने वाला इश्तिहार
- जाल में फँसना– धोखे में आ जाना
- आवंटित- दिया जाना
- हकदार- अधिकार वाला व्यक्ति
- अकाउंट फ्रीज़– खाता बंद कर देना
- वित्तीय लेनदेन- पैसों का लेन-देन
- सचेत- सावधान, जागरूक
- शिकार होना- फँस जाना
- उत्पाद– वस्तु, सामान
- एगमार्क- गुणवत्ता की सरकारी मुहर
- लोगो- चिह्न
- गुणवत्ता- स्तर, अच्छाई
- उत्पादक- बनाने वाला
- लाइसेंस- अनुमति पत्र
- रद्द- समाप्त
- बैच नंबर / लॉट नंबर– उत्पादन की पहचान संख्या
- उचित- सही
- वैट- कर (टैक्स)
- प्रमाण- सबूत
- दिशा में आगे बढ़ना– कदम उठाना
- परखना- जाँच करना
- पैकेट- डिब्बा
- गारंटी / वारंटी- निश्चित समय तक सेवा या मरम्मत का आश्वासन
- इंटरनैट– ऑनलाइन माध्यम
- कोर सेंटर- सहायता केंद्र
- लॉग इन- प्रवेश करना
- कंप्लेंट रजिस्ट्रेशन– शिकायत दर्ज करना
- शिकायत क्रमांक– शिकायत का नंबर
- कार्यवाही- की जाने वाली प्रक्रिया
- संपादित- पूरी की गई
- निर्देश- आदेश
- अवगत कराया जाना– जानकारी दी जाना
- नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन– उपभोक्ताओं की सहायता के लिए राष्ट्रीय फोन सेवा
- टोलफ्री– निःशुल्क कॉल
- दर्ज कराना- लिखवाना
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Chapter 18 – शिवाजी का सच्चा स्वरूप
- दाहिनी – सीधी
- दालान – बरामदा
- क़िला – गढ़, दुर्ग
- स्तम्भ – खंभा
- भगवा – केसरिया
- जाजम – फर्श आदि पर बिछाई जाने वाली छपी हुई चादर, कालीन
- कमख्याय – रंगीन-बूटीधार रेशमी कपड़ा
- मसनद – गोल लंबोतरा तथा बड़ा तकिया
- वीरासन – , योगियों तांत्रिकों आदि द्वारा अपनाया जाता है।
- शस्त्रों – हथियार
- सुसज्जित – सजा हुआ
- मावली – शिवाजी के खास सैनिक
- बायीं – उलटी
- अभिवादन – सत्कार
- संवाद – चर्चा, समाचार
- निस्तब्धता – चुप्पी
- उत्सुकता – अधीरता, बेसब्री, व्याकुलता, बेचैनी
- हम्माल – मजदूर, कुली
- अधेड़ – मध्यम आयु का
- सदृश – समान बैठने का एक ढंग जो प्रायः प्राचीन योद्धाओं
- अधिपति – स्वामी, प्रधान
- संपदा – दौलत
- मेणा – बंद पालकी
- वृत्त – इतिहास, वृत्तांत
- लुप्त – गायब
- भृकुटि – भौंह
- परिवर्तित – बदली हुई
- भर्राए – दुख, भय, या अत्यधिक रोने के कारण आवाज का भारी या रुँधा हुआ हो जाना
- तत्काल – तुरंत
- सदृश – के समान
- सिपहसालार – सेनापति
- नामाकूल हरकत – अनुचित व्यवहार, मूर्खतापूर्ण व्यवहार बेहूदा शरारत
- मुआफी – क्षमा
- अजीबो गरीब – विचित्र
- इबादत – पूजा
- हिफाज़त – सुरक्षा
- शौहर – पति
- खबरदारी – सावधानीपूर्ण होशियारी से
- कदाचित् – शायद, कभी
- घृणित – घृणा के योग्य
- क्षति – नुकसान
- आततायी – सताने वाले
- सत्ता का अपहरण – राज्य छीनना
- रक्तपात – खून बहाना
- उदारचेता – खुले विचारों वाला
- शील – चरित्र
- इन्द्रियलोलुप – भोग-विलास की इच्छा रखने वाला
- पेशवा – सरदार, नेता
- श्रेयस्कर – कल्याणकारी
- प्रायश्चित्त – पछतावा
- कनखी – तिरछी नजर
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Chapter 19 – प्रकृति का अभिशाप
- पार्श्वभूमि– आस-पास की ज़मीन
- सौरमंडल- सूर्य और उसके ग्रहों का समूह
- मंच- नाटक खेलने का स्थान
- बीचोंबीच– बिल्कुल बीच में
- विशाल- बहुत बड़ा
- सुनहरा- सोने जैसा चमकदार
- सिंहासन- राजा या देवता के बैठने का आसन
- विराजमान- बैठे हुए
- चिंतित– परेशान
- सौर जगत- सूर्य से संबंधित संसार
- कुटुंब– परिवार
- ग्रह- पृथ्वी जैसे खगोलीय पिंड
- विषय– बात, मुद्दा
- प्रिय– प्यारा
- पुत्री- बेटी
- योग्य- सक्षम, लायक
- गोद– आश्रय, स्थान
- जीव-जंतु- पशु-पक्षी और अन्य प्राणी
- पनपना- बढ़ना, विकसित होना
- आश्चर्यजनक– चौंकाने वाला
- अनोखा- सबसे अलग
- मानव– मनुष्य
- रश्मि– किरण
- स्वामी– मालिक, प्रभु
- मस्तिष्क– दिमाग
- लाड़ली– बहुत प्यारी
- उपहार- भेंट, तोहफ़ा
- भ्रमण- घूमना
- नंदनवन– स्वर्ग जैसा सुंदर स्थान
- आतुरता– उत्सुकता, बेचैनी
- हाल- स्थिति
- प्रगति- उन्नति
- अट्टालिका- महल, पक्की इमारत
- विजय- जीत
- उन्नति के शिखर– विकास की ऊँचाई
- प्रवेश- अंदर आना
- बात काटकर- बीच में रोककर बोलना
- भगवन्- हे प्रभु
- उन्नति- प्रगति, आगे बढ़ना
- पतन- गिरावट
- गर्त- गड्ढा
- क्रोधित- गुस्से में
- स्वर– आवाज़
- अशुद्ध- गंदा, शुद्ध न होना
- शिकार होना– प्रभावित होना
- असाधारण- असामान्य, बहुत अधिक
- विषाक्त– ज़हरीला
- समक्ष– सामने
- आत्मघात– अपनी हत्या
- सिवाय- के अलावा
- चारा– उपाय
- आखिर– अंत में
- अधिपति– स्वामी, मालिक
- क्षमा– माफ़ी
- असत्य– झूठा
- कथन– कहना
- क्षुब्ध- क्रोध मिश्रित दुःख
- चकित- हैरान
- तुच्छ- छोटा, विनम्र भाव से कहा गया
- नमन- प्रणाम
- सेविका– सेवा करने वाली
- कोटि-कोटि- करोड़ों
- प्रसन्नता– खुशी
- अनायास- अचानक
- खिन्न- दुःखी, उदास
- स्वामिनी- मालकिन
- संकट- कठिनाई, विपत्ति
- दुःख की गाथा- दुखों की कहानी
- तेज़ स्वर– ऊँची आवाज़
- असंभव- जो संभव न हो
- भ्रमण– घूमना
- तीव्र गति– बहुत तेज़ रफ़्तार
- ऊपरी-ऊपरी– केवल सतही
- मंडराना- चारों ओर घूमना, छाया की तरह होना
- घबराए स्वर में- डरे हुए अंदाज़ में
- महादैत्य– महाराक्षस
- मुद्रा– भाव-भंगिमा, हाव-भाव
- b घूमना-फिरना
- वीरता- साहस, बहादुरी
- क्रोधित– गुस्से में भरा हुआ
- वातावरण- चारों ओर का प्राकृतिक परिवेश
- आकृष्ट– खिंचा हुआ
- दैत्य– राक्षस
- त्रेतायुग– हिंदू धर्म का एक प्राचीन युग
- कुल- वंश, खानदान
- प्रादुर्भाव– प्रकट होना, उत्पत्ति
- गत शताब्दी– पिछली सदी
- औद्योगिक– उद्योग सम्बन्धी
- गज़ब ढाना– भारी विनाश करना
- सिंहासन– राजगद्दी
- नत होकर– झुककर, विनम्रता से
- तुच्छ– छोटा, नगण्य
- सेवक- सेवा करने वाला
- घटक– भाग, तत्व
- वायुमंडल– वातावरण
- आच्छादित– ढका हुआ
- उल्काएँ- लौह मिश्रित पत्थर के टुकड़े जो अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं।
- अंतरिक्ष– आकाश
- घर्षण– रगड़
- भस्म– राख
- धरातल– पृथ्वी की सतह
- अस्तित्व- हस्ती, सत्ता, विद्यमान होना
- शुद्ध– साफ़, निर्मल
- अथाह– गहरा
- प्रत्यक्षतः- प्रत्यक्ष रूप से
- तीव्रता से- तेज़ी से
- ह्रास- कमी, गिरावट
- प्रत्येक– हर एक
- असंख्य- बहुत अधिक
- कारखाने- काम करने की जगह, उद्योग-स्थल
- इंजन- मशीन का वह भाग जो शक्ति उत्पन्न करता है
- अत्यधिक- बहुत ज़्यादा
- उत्पन्न– पैदा होना
- दूषित– गंदा, प्रदूषित
- पुनः- फिर से
- वनस्पति- पेड़-पौधे
- सेविका- सेवा करने वाली
- प्रदान- देना
- तीव्र- तेज़
- प्रकाश संश्लेषण- पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश से भोजन बनाने की प्रक्रिया
- विश्लेषित– अलग-अलग किया हुआ
- पोषण- पालन
- प्राणदायिनी– जीवन देने वाली
- अनोखा- विशेष, अद्भुत
- हड़ताल- काम बंद करना
- मुँह बनाकर- नाराज़गी या उपेक्षा दिखाते हुए
- रोनी सूरत– उदास चेहरा
- संतुलित– बराबर, समुचित
- घटती जा रही हूँ- कम होती जा रही हूँ
- औद्योगिक– उद्योगों से संबंधित
- वृद्धि- बढ़ोतरी
- विवेकहीन– बिना समझ-बूझ वाला
- अंधाधुंध– बिना सोचे-समझे
- बस्तियाँ- रहने के स्थान
- फलस्वरूप– परिणामस्वरूप
- क्षमता- शक्ति, योग्यता
- अपितु– बल्कि
- प्रभाव– असर
- निवास-स्थान- रहने का स्थान
- वन्यप्राणी- जंगल में रहने वाले जानवर
- अभाव- कमी
- महत्व- उपयोगिता
- मूल- जड़, आधार
- आधुनिक– नए समय का
- प्रगति- विकास, उन्नति
- आश्चर्य- हैरानी
- वायुमंडल– पृथ्वी के चारों ओर फैली हवा
- विविध- कई प्रकार की
- प्रभाव- असर
- भला– आखिर, वास्तव में
- गंधकयुक्त- गंधक (सल्फर) मिला हुआ
- औषधियाँ- दवाइयाँ
- आँतों– पेट के अंदर की नलियाँ
- तपेदिक– टी.बी. नामक रोग
- रुकावट– बाधा
- गंभीर– गहरी, बहुत महत्त्वपूर्ण
- सूक्ष्म– बहुत छोटे
- कण– छोटे-छोटे कण/टुकड़े
- किरणें- प्रकाश की रेखाएँ
- कीटाणु– रोग पैदा करने वाले सूक्ष्म जीव
- सक्षम- योग्य
- सीसा- लेड धातु
- मिश्रित– मिला हुआ
- मंडरा रहा है- आस-पास खतरे के रूप में घूम रहा है
- ओज़ोन की परत- वायुमंडल की वह परत जो सूर्य की हानिकारक किरणों से रक्षा करती है
- विसर्जित- छोड़ना
- पराबैंगनी किरणें– सूर्य की अत्यंत तीव्र किरणें
- दुष्प्रभाव– बुरा प्रभाव
- सेवन– ग्रहण करना
- आर-पार- पूरी तरह होकर निकल जाना
- विशालकाय– बहुत बड़ा
- नष्ट– समाप्त करना
- प्रभो– हे प्रभु, हे भगवान
- कीटनाशक– कीड़े मारने वाले रसायन
- रसायन- रासायनिक पदार्थ
- क्षति- नुकसान
- यथोचित- जैसा चाहिए वैसा, समुचित
- वनस्पतियाँ– पौधे
- घुलकर– मिलकर
- जलीय- जल सम्बन्धी
- काफ़ी– बहुत
- बहकर आना– पानी के साथ आ जाना
- विषैले पदार्थ- ज़हर जैसे तत्व
- जीव-जंतु– जानवर और अन्य प्राणी
- टैंकर– तेल ढोने वाला बड़ा जहाज़
- कास्टिक सोडा- एक तीव्र रासायनिक पदार्थ
- अशुद्धियाँ- गंदे तत्व
- ज़हरीला पारा– विषैली धातु
- घातक– खतरनाक
- सहारा- आधार, सहायक
- नेपथ्य- परदे के पीछे
- डरावनी– भय उत्पन्न करने वाली
- नाक में दम करना- बहुत अधिक परेशान करना
- करामात- अद्भुत काम
- चौंककर- अचानक डर
- अदृश्य- जो दिखाई न दे
- सताना– कष्ट देना
- विनाश- नाश, समाप्ति
- महाकाल– मृत्यु का प्रतीक
- अभिशाप– बद्दुआ, शाप
- शत्रु– दुश्मन
- रक्षा- बचाव
- घुला-घुलाकर मारना- धीरे-धीरे नष्ट करना
- लाड़ली पुत्री– अत्यंत प्रिय संतान
- कृपा करना- दया करना
- सिमटकर– पास आकर, सहमकर
- शुद्ध– साफ़, निर्मल
- मनमानी– अपनी इच्छा से, बिना रोक-टोक
- प्राणी- जीव
- चिंतामग्न- गहरी चिंता में डूबा हुआ
- मधुर– मीठा, सुरीला
- कष्ट- परेशानी, कठिनाई
- पृथ्वीवासी– पृथ्वी पर रहने वाले लोग
- सुखी- प्रसन्न, आनंदमय
- अपार- अत्यधिक, जिसका पार न पाया जा सके
- झलकना- दिखाई देना
- अनादिकाल– आरम्भ से ही
- लोहा लेना– मुकाबला करना
- चंगुल- पकड़, अधिकार
- निःसंदेह– बेशक, बिना शक के
- दृष्टि डालना- ध्यान से देखना
- बलबूते– ताक़त, जोर
- भले ही– चाहे
- तिनके के समान– बहुत तुच्छ
- घमंड- अहंकार
- विजय पाना– जीत हासिल करना
- सहायक– मदद करने वाला
- नवीनतम– सबसे नया
- रेडियोधर्मिता– रेडियोधर्मी तत्वों से निकलने वाली हानिकारक शक्ति
- बला- मुसीबत
- रेडियोधर्मी तत्व– ऐसे तत्व जिनसे हानिकारक विकिरण निकलता है
- परमाणु-परीक्षण– परमाणु बम या परमाणु शक्ति की जाँच
- विकिरण– किरणों के रूप में फैलने वाली शक्ति
- हानिकारक– नुकसान पहुँचाने वाला
- पीड़ित- प्रभावित, कष्ट झेलने वाला
- पीढ़ी- वंश, आने वाली संतान
- विकृति- विकार, खराबी (विकार के बाद प्राप्त रूप)
- शर्त- बाज़ी
- ध्वनि प्रदूषण– अत्यधिक और कर्कश आवाज़ से होने वाला प्रदूषण
- बहरा- सुनने की शक्ति खो देने वाला
- प्रताप- प्रभाव, ताकत
- साहस– हिम्मत
- चुनौती- ललकार, मुकाबले की बात
- विनाश कार्य– नष्ट करने का काम
- भरोसा– विश्वास
- आदि मानव– प्रारंभिक मानव
- भयभीत– डरा हुआ
- अधीन करना– अपने वश में करना
- देन- उपहार, लाभ
- जड़ से समाप्त करना– पूरी तरह खत्म करना
- उन्मूलन– उखाड़ फेंकना, जड़ से ख़त्म कर देना
- परमावश्यक– अत्यंत आवश्यक
- धन्य- प्रशंसनीय, गौरवान्वित
- आशीर्वाद- शुभकामना
- लोग-कल्याण- समाज का भला
- तथास्तु- ऐसा ही हो
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