PSEB Class 9 Hindi Chapter 11 Vah chidiya Ek Alarm Ghadi Thi (वह चिड़िया एक अलार्म घड़ी थी) Question Answers (Important)
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- Vah chidiya Ek Alarm Ghadi Thi Textbook Questions
- Vah chidiya Ek Alarm Ghadi Thi Extract Based Questions
- Vah chidiya Ek Alarm Ghadi Thi Multiple Choice Questions
- Vah chidiya Ek Alarm Ghadi Thi Extra Question Answers
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PSEB Class 9 Chapter 11 Vah chidiya Ek Alarm Ghadi Thi Textbook Questions
(क) विषय-बोध
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
प्रश्न 1 – बाज़ार में अलार्म घड़ियों की माँग क्यों घटने लगी है?
उत्तर – मोबाइल फ़ोन में अलार्म की सुविधा होने के कारण बाज़ार में अलार्म घड़ियों की माँग घटने लगी है।
प्रश्न 2 – लेखक को कॉलेज में पुरस्कार में कौन-सी घड़ी मिली थी?
उत्तर – लेखक को कॉलेज में पुरस्कार में अलार्म घड़ी मिली थी।
प्रश्न 3 – लेखक को कविताओं में डूबे रहना कैसे लगता था?
उत्तर – लेखक को कविताओं में डूबे रहना स्वर्ग में जीने जैसा लगता था।
प्रश्न 4 – चिड़िया कमरे में दीवार पर लगी किसकी तस्वीर के पीछे अपना घोंसला बनाने लगी थी?
उत्तर – चिड़िया कमरे में दीवार पर लगी सुमित्रानंदन पंत की तस्वीर के पीछे अपना घोंसला बनाने लगी थी।
प्रश्न 5 – लेखक अपनी कौन-सी दुनिया में खोया रहता था कि चिड़िया की तरफ़ ध्यान ही नहीं देता था?
उत्तर – लेखक अपनी किताबों की दुनिया में खोया रहता था इसी कारण वह चिड़िया की तरफ़ ध्यान ही नहीं देता था।
प्रश्न 6 – लेखक के लिए अब अलार्म घड़ी कौन थी?
उत्तर – चिड़िया अब लेखक के लिए अलार्म घड़ी थी।
प्रश्न 7 – चिड़िया ने लेखक को कौन-सा रत्न दिया था?
उत्तर – चिड़िया ने लेखक को ‘ऊषा सुंदरी’ रूपी रत्न दिया था।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन-चार पंक्तियों में दीजिए-
प्रश्न 1 – पहले किन-किन अवसरों पर घड़ी देने की परंपरा थी ?
उत्तर – पहले कलाई पर बाँधने के लिए या फिर पहने जाने के लिए घड़ी एक उपहार हुआ करती थी। जब कोई परीक्षा में पास हो जाता था तब उपहार के रूप में उसे घड़ी दी जाती थी। कॉलेज में दाखिल होने पर बच्चों को घड़ी दिलवाई जाती थी। शादी में दूल्हे को ससुराल वालों की और से घड़ी जरूर दी जाती थी। कई सरकारी विभागों में सेवा-निवृत्ति पर भी घड़ी देने की परंपरा थी।
प्रश्न 2 – जिन दिनों लेखक के पास घड़ी नहीं थी तब उनके पिता जी क्या कहा करते थे ?
उत्तर – जिन दिनों लेखक के पास घड़ी नहीं थी तब लेखक के पिता जी उससे कहा करते थे कि लेखक को सुबह जितने बजे भी उठना हो, वे अपने तकिये से यह कह कर सो जाएँ कि उन्हें सुबह जल्दी उठा देना। इतना कहने के बाद उनकी नींद सुबह जल्दी खुल जाया करेगी। क्योंकि लेखक के पिता के अनुसार तकिया बातें सुनता है। और ताजुब की बात है कि लेखक द्वारा तकिये से कहने पर उसकी नींद सुबह जल्दी खुल जाया करती थी।
प्रश्न 3 – शाम को चिड़िया लेखक के कमरे में कैसे पधार जाती थी ?
उत्तर – लेखक दिनभर दफ्तर में काम करने के बाद शाम को पढ़ने-लिखने के लिए अपने कमरे का दरवाज़ा खोल कर बैठ जाता था। वह लिखते-पढ़ते समय अपनी किताबों की दुनिया में इतना खो जाया करता था कि कमरे में उसके अलावा कौन आ रहा है या कौन जा रहा है उसे पता ही नहीं चलता था। चिड़िया लेखक के कमरे का दरवाज़ा खुला होने के कारण तथा उसके किताबों में खोए हुए होने के कारण कमरे में पधार जाती थी।
प्रश्न 4 – रोज़ सुबह-सुबह चिड़िया लेखक के पलंग के सिरहाने बैठकर चहचहाती क्यों थी ?
उत्तर – चिड़िया ने लेखक के कमरे की दीवार पर टंगे सुमित्रानंदन पंत जी की तस्वीर के पीछे अपना घोंसला बना रखा था। वह प्रतिदिन शाम को कमरे का दरवाज़ा खुला होने के कारण तथा लेखक के किताबों में खोए हुए होने के कारण अंदर आकर अपने घोंसले में बैठ जाया करती थी। लेखक देर रात तक पढ़ता और लिखता रहता था। इसी कारण वह सुबह देर से उठता था। चिड़िया को सुबह कमरे के बाहर जाना होता था, इसलिए चिड़िया लेखक के पलंग के सिरहाने बैठकर चहचहाती थी ताकि लेखक कमरे का दरवाज़ा खोल दे और वह बाहर चली जाए।
प्रश्न 5 – लेखक ने चिड़िया की तुलना माँ से क्यों की है ?
उत्तर – लेखक ने चिड़िया की तुलना माँ से इसलिए की है क्योंकि लेखक के बचपन में उसकी माँ चिड़िया की ही तरह बड़े ही प्यार से उसे जगाती थी। जब लेखक देर तक सोया रहता था तब उसकी माँ चिड़िया की ही तरह बड़ी ही झुंझलाहट से लेखक को जगा दिया करती थी। लेखक को चिड़िया के द्वारा उसे जगाना माँ की याद दिला रहा था। इसलिए लेखक ने चिड़िया की तुलना माँ से की है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर छह-सात पंक्तियों में दीजिए-
प्रश्न 1 – ‘वह चिड़िया एक अलार्म घड़ी थी’ कहानी के द्वारा लेखक क्या संदेश देना चाहता है ?
उत्तर – ‘वह चिड़िया एक अलार्म घड़ी थी’ कहानी के द्वारा लेखक ने परिस्थितियों के अनुसार मनुष्य की आदत में आने वाले बदलाव का संदेश दिया है। लेखक के अनुसार व्यक्ति की आदत कभी नहीं बदलती। परन्तु कभी-कभी परिस्थितियों के अनुसार कुछ ऐसे कारण भी बन जाते हैं जिनके कारण व्यक्ति को अपनी आदतों में बदलाव लाना आवश्यक हो जाता है। ये बदलाव व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा दोनों को बदल देते है। कहानी में लेखक हमें यह समझना चाहता है कि सवेरे के समय को सोते हुए बिताना बेकार है। क्योंकि सुबह का समय अत्यधिक सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है जो व्यक्ति के जीवन में खुशियों का संचार करता है।
प्रश्न 2 – चिड़िया द्वारा लेखक को जगाए जाने के प्रयास को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर – चिड़िया ने लेखक के कमरे की दीवार पर टंगे सुमित्रानंदन पंत जी की तस्वीर के पीछे अपना घोंसला बना रखा था। वह प्रतिदिन शाम को कमरे का दरवाज़ा खुला होने के कारण तथा लेखक के किताबों में खोए हुए होने के कारण अंदर आकर अपने घोंसले में बैठ जाया करती थी। अपनी आदत के अनुसार वह सुबह जल्दी उठकर बाहर जाना चाहती थी। परन्तु देर रात तक जगने के कारण लेखक सुबह के समय सोया रहता था, तब चिड़िया लेखक के पलंग के सिरहाने बैठकर उसे जगाया करती थी और जब लेखक उसके प्यार से जगाने पर भी नहीं उठता था तब वह एक अलग प्रकार की झुंझलाहट से भरी चीं-ची, चीं-चीं किया करती थी ताकि लेखक अपनी नींद से उठ जाए। वह बार-बार पलंग के सिरहाने आकर फुदकती और अपनी तेज़ आवाज़ से सारे कमरे को भर देती थी। कई बार चिड़िया लेखक की रज़ाई का कोना अपनी चोंच से पकड़ कर खींचने लगती थी। वह लेखक के सीने पर पड़ी रजाई के ऊपर बैठकर लेखक को अपनी चहचहाहट से जगाने की लगातार कोशिश किया करती थी।
प्रश्न 3 – लेखक उस वात्सल्यमयी चिड़िया का उपकार क्यों मानता है ?
उत्तर – लेखक उस वात्सल्यमयी चिड़िया का उपकार इसलिए मानता है क्योंकि चिड़िया ने एक माँ की तरह उसे प्यार दिया। माँ के गीत-संगीत की ही तरह अपनी चहचहाहट में उसे गीत-संगीत सुनाया। लेखक की सुबह देर तक सोने की आदत को भी एक माँ की ही तरह अपनी चहचहाहट रूपी डाँट से दूर किया। लेखक को सुबह जल्दी उठना सिखाया। लेखक को समय के महत्त्व तथा सुबह की सकारात्मक ऊर्जा से परिचित करवाया। सुबह की शीतलता तथा प्रकाश से लेखक को अवगत कराया। चिड़िया के ही कारण लेखक सुबह जल्दी उठना सीख गया। सुबह का आनंद, जो वह बचपन से खोता आ रहा था, अब वह पाने लगा था। इसलिए लेखक अपने जीवन में आए बदलाव को वात्सल्यमयी चिड़िया का उपकार मानता है।
(ख) भाषा-बोध
1. निम्नलिखित एकवचन शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए-
| एकवचन | बहुवचन | एकवचन | बहुवचन |
| घोंसला | ___________ | चिड़िया | ___________ |
| कमरा | ___________ | डिबिया | ___________ |
| दरवाज़ा | ___________ | घड़ी | ___________ |
| बच्चा | ___________ | खिड़की | ___________ |
| दूल्हा | ___________ | छुट्टी | ___________ |
उत्तर –
| एकवचन | बहुवचन |
| घोंसला | घोंसले |
| कमरा | कमरे |
| दरवाज़ा | दरवाजे |
| बच्चा | बच्चे |
| दूल्हा | दूल्हे |
| चिड़िया | चिड़ियाँ |
| डिबिया | डिबियाँ |
| घड़ी | घड़ियाँ |
| खिड़की | खिड़कियाँ |
| छुट्टी | छुट्टियाँ |
2. निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग तथा मूल शब्द अलग-अलग करके लिखिए-
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द |
| उपहार | _______ | _______ |
| उपस्थित | _______ | _______ |
| उपलब्ध | _______ | _______ |
| उपकार | _______ | _______ |
| अभिभूत | _______ | _______ |
| सुमंगल | _______ | _______ |
| अनुभूति | _______ | _______ |
| बेख़बर | _______ | _______ |
उत्तर –
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द |
| उपहार | उप | हार |
| उपस्थित | उप ____ | स्थित____ |
| उपलब्ध | उप | लब्ध |
| उपकार | उप | कार |
| अभिभूत | अभि | भूत |
| सुमंगल | सु | मंगल |
| अनुभूति | अनु _ | भूति___ |
| बेख़बर | बे | खबर |
3. निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय तथा मूल शब्द अलग-अलग करके लिखिए-
| शब्द | मूल शब्द | प्रत्यय |
| चहचहाहट | _______ | _______ |
| झुंझलाहट | _______ | _______ |
| रोशनदान | _______ | _______ |
| कृतज्ञता | _______ | _______ |
| सघनता | _______ | _______ |
| मानवीय | _______ | _______ |
उत्तर –
| शब्द | मूल शब्द | प्रत्यय |
| चहचहाहट | चहचह | आहट |
| झुंझलाहट | झुंझला | आहट |
| रोशनदान | रोशन | दान |
| कृतज्ञता | कृतज्ञ | ता |
| सघनता | सघन | ता |
| मानवीय | मानव | ईय |
4. पाठ में आए निम्नलिखित तत्सम शब्दों के तद्भव रूप तथा तद्भव शब्दों के तत्सम रूप लिखिए-
| तत्सम | तद्भव | तत्सम | तद्भव |
| रात्रि | _________ | सच | _________ |
| आश्रय | _________ | नींद | _________ |
| कृपा | _________ | मोती | _________ |
| गृह | _________ | चिड़िया | _________ |
| सूर्य | _________ | माँ | _________ |
उत्तर –
| तत्सम | तद्भव |
| रात्रि | रात |
| आश्रय | आसरा |
| कृपा | किरपा |
| गृह | घर |
| सूर्य | सूरज |
| सच | सत्य |
| नींद | निद्रा |
| मोती | मुक्ता |
| चिड़िया | खग |
| माँ | मातृ |
PSEB Class 9 Hindi Lesson 11 वह चिड़िया एक अलार्म घड़ी थी सार-आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)-
निम्नलिखित गद्याँशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
1 –
अब मोबाइल फ़ोन में अलार्म उपलब्ध रहने से अलार्म घड़ियों की बाज़ार में माँग घटने लगी है परंतु एक समय घरों में अलार्म घड़ी महत्वपूर्ण वस्तु हुआ करती थी। परीक्षा के दिनों में सिरहाने रखी अलार्म घड़ी भोर में जगाती थी। सुबह जल्दी यात्रा करनी होती, तो रात को घड़ी में अलार्म लगा देते थे ताकि सुबह समय पर उठा जा सके। अलार्म घड़ियाँ बहुत काम आती थीं, परंतु आज जैसे हर किसी के पास मोबाइल फ़ोन है, कुछ इसी तरह पहले सबके पास घड़ियाँ उपलब्ध नहीं रहती थीं। कलाई पर घड़ी एक उपहार हुआ करती थी। परीक्षा में पास होने पर और कॉलेज में दाखिला होने पर बच्चों को दिलवाई जाती थी, तो शादी में दूल्हे को ससुराल पक्षवाले घड़ी अवश्य देते थे। कई सरकारी विभागों में सेवा-निवृत्ति पर भी घड़ी देने की परंपरा थी। हम लोग कहते थे कि सेवा-निवृत्ति के बजाय नौकरी लगने पर विभाग द्वारा पहले ही कर्मचारी को एक घड़ी भेंट में दी जानी चाहिए ताकि वह समय पर अपने काम पर उपस्थित हुआ करे।
प्रश्न 1 – अब मोबाइल फ़ोन में क्या उपलब्ध रहने से अलार्म घड़ियों की बाज़ार में माँग घटने लगी ?
(क) अलार्म
(ख) समय
(ग) बात करने की सुविधा
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) अलार्म
प्रश्न 2 – किसी समय घरों में अलार्म घड़ी __________वस्तु हुआ करती थी
(क) बेकार
(ख) महत्वपूर्ण
(ग) बेमतलब
(घ) सजावट की
उत्तर – (ख) महत्वपूर्ण
प्रश्न 3 – परीक्षा के दिनों में सिरहाने रखी ___________भोर में जगाती थी।
(क) अलार्म घड़ी
(ख) तकिया
(ग) फोन
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) अलार्म घड़ी
प्रश्न 4 – शादी में दूल्हे को ससुराल पक्षवाले क्या अवश्य देते थे?
(क) गाडी
(ख) घड़ी
(ग) घर
(घ) घोड़ी
उत्तर – (ख) घड़ी
प्रश्न 5 – कई सरकारी विभागों में ___________ पर भी घड़ी देने की परंपरा थी।
(क) कार्यकाल में
(ख) सेवा-निवृत्ति
(ग) छुट्टियों
(घ) प्रमोशन
उत्तर – (ख) सेवा-निवृत्ति
2 –
जिन दिनों हमारे पास कोई घड़ी नहीं थी, तब पिता जी कहा करते थे कि तुम्हें सुबह जितने बजे भी उठना हो, तुम अपने तकिये से कहकर सो जाओ कि सुबह मुझे इतने बजे उठा देना। बस, फिर तुम्हारी नींद सुबह उतने ही बजे खुल जाएगी। बचपन में कितनी ही बार इस फ़ॉर्मूले को अपनाया था और सही पाया था। तकिया हमारी बात सुनता है और ठीक समय पर हमें जगा भी देता है। यह कौतूहल भरा आश्चर्यजनक अनुभव बहुत अच्छा लगता था, भले ही तब उसका रहस्य हमें पता नहीं था। मुझे सुबह-सुबह उठकर पढ़ना रास नहीं आता था। रात में देर तक पढ़ना सुहाता था। रात्रि के एकांत में मध्य रात्रि से भोर तक पढ़ते रहना और सुबह-सुबह नींद आ जाने पर देर से उठना मेरी आदत होती जा रही थी। कई बार रात को दो या तीन बजे तक पढ़ने के कारण सुबह जल्दी नींद नहीं खुलती थी और सुबह का सौंदर्य सिर्फ़ कविताओं में ही महसूस किया जाता था। पुरस्कार में मिली वह अलार्म घड़ी जब खराब हुई, तो फिर सुधर नहीं सकी। आज भी वह तीन दशकों से अधिक समय से मेरे पास बंद हालत में है, वह अब सुधरने योग्य नहीं रही परंतु मैं भी कहाँ सुधरने लायक बचा था! देर रात तक पढ़ना और सुबह देर तक सोना एक अभ्यास ही बन गया था।
प्रश्न 1 – लेखक के पिता जी क्या कहा करते थे ?
(क) कि तुम्हें सुबह जितने बजे भी उठना हो, तुम अपने तकिये से कहकर सो जाओ कि सुबह मुझे इतने बजे उठा देना।
(ख) कि सुबह खुद उठने का अभ्यास करना चाहिए
(ग) कि देर तक नहीं पढ़ना चाहिए
(घ) कि तकिए को साफ करके सोना चाहिए
उत्तर – (क) कि तुम्हें सुबह जितने बजे भी उठना हो, तुम अपने तकिये से कहकर सो जाओ कि सुबह मुझे इतने बजे उठा देना।
प्रश्न 2 – __________हमारी बात सुनता है और ठीक समय पर हमें जगा भी देता है।
(क) तकिया
(ख) पिता
(ग) माँ
(घ) पडोसी
उत्तर – (क) तकिया
प्रश्न 3 – कौन सा कौतूहल भरा आश्चर्यजनक अनुभव लेखक को बहुत अच्छा लगता था, भले ही तब उसका रहस्य उन्हें पता नहीं था?
(क) चिड़िया का सुबह उठाना
(ख) तकिए को सुबह उठाने को कहना
(ग) अलार्म घड़ी का सुबह बजना
(घ) पिता की डांट से जगना
उत्तर – (ख) तकिए को सुबह उठाने को कहना
प्रश्न 4 – लेखक को सुबह-सुबह उठकर पढ़ना ___________ नहीं आता था।
(क) रास
(ख) आनंद
(ग) अच्छा
(घ) रोमांचक
उत्तर – (क) रास
प्रश्न 5 – देर रात तक _________और सुबह देर तक __________एक अभ्यास ही बन गया था।
(क) सोना और पढ़ना
(ख) पढ़ना और सोना
(ग) जागना और सोना
(घ) पढ़ना और जागना
उत्तर – (ख) पढ़ना और सोना
3 –
वह अस्सी का दशक था, मेरी नई-नई नौकरी लगी थी। पहली बार घर से बाहर निकला था। एक कमरा किराए पर लेकर रहता था। अकेले रहने का यह पहला पहला अनुभव। कमरे में मैंने महादेवी, पंत और निराला जी की सुंदर तसवीरें फ्रेम करवाकर टाँग दी थीं। एक तरफ़ गुसाईं तुलसीदास जी का चित्र, अपनी पुस्तकें और अपना एकांत । रातें जाग-जागकर बिताना, कविताएँ लिखना और कविताओं में डूबे रहना जैसे स्वर्ग में जीना था परंतु अपने उस एकांत में, निशाचरी वृत्ति के कारण फिर सुबह जल्दी उठना मुश्किल होने लगा। पड़ोसी कृपा करके दरवाज़ा खटखटाते तो नींद खुलती। देर-सवेर दफ़्तर पहुँचता । अलार्म घड़ी भी नहीं थी और न ही खरीदने का ख्याल आया। मोबाइल फोन तो तब देखे भी नहीं थे।
मेरे कमरे में सिर्फ़ एक दरवाज़ा ही था। न कोई खिड़की थी, न कोई रोशनदान परंतु फिर भी वह कमरा बहुत प्यारा लगता था। किराया भी काफ़ी कम था। इन सबसे बढ़कर पड़ोसी बहुत अच्छे थे। देर तक रात में पढ़ने-लिखने का व्यसन बढ़ता जा रहा था और इसमें कोई व्यवधान नहीं था।
प्रश्न 1 – लेखक पहली बार घर से बाहर किस कारण निकला था ?
(क) नई-नई नौकरी के कारण
(ख) कॉलेज के कारण
(ग) पढ़ाई के कारण
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) नई-नई नौकरी के कारण
प्रश्न 2 – कमरे में लेखक ने किसकी तसवीरें फ्रेम करवाकर टाँग दी थीं ?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
(ग) सुमित्रानंद पंत
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी
प्रश्न 3 – लेखक को अपना कमरा बहुत प्यारा क्यों लगता था ?
(क) क्योंकि उसका किराया काफ़ी कम था।
(ख) क्योंकि पड़ोसी बहुत अच्छे थे।
(ग) क्योंकि वहां लेखक को एकांत मिलता था।
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी
प्रश्न 4 – निशाचरी वृत्ति के कारण लेखक के लिए क्या मुश्किल होने लगा?
(क) रात में पढ़ना
(ख) सुबह जल्दी उठना
(ग) रात में सोना
(घ) सुबह देर तक सोना
उत्तर – (ख) सुबह जल्दी उठना
प्रश्न 5 – ___________ कृपा करके दरवाज़ा खटखटाते तो नींद खुलती।
(क) पिता
(ख) पड़ोसी
(ग) माँ
(घ) दोस्त
उत्तर – (ख) पड़ोसी
4 –
जब मैं अपनी बंद कोठरी की शय्या को छोड़कर भोर में चिड़िया को बाहर जाने देने के लिए दरवाज़ा खोलता, तो दरवाज़े से उस ताजी सुबह की देह की कांति कमरे में कौंध जाती। ठंडी हवा का स्पर्श और बहुत कोमलकांत उजाला आँखों को सहलाता। मुझे लगा किसी अप्रतिम अनुभव को मैं देर तक सोकर व्यर्थ करता रहा हूँ। अब भी मैं रात को देर तक पढ़ता हूँ परंतु अब वह चिड़िया मेरी अलार्म घड़ी है, जो मुझे अपने साथ सुबह जगा लेती है। अब वह पलंग के सिरहाने या मेरी रजाई पर बैठकर मधुर चहचहाहट से मुझे जगाती है। उसकी चहचहाहट में अब वह झुंझलाहट नहीं, एक वात्सल्य भरी जागृति है। यह किसी घड़ी की यांत्रिक ध्वनि नहीं है, अपनेपन से भरी पुकार है, जो मुझे आसमान से अवतरित होती हुई प्रातः काल की सुमंगल घड़ी में पुकारती है। उस सुमंगल घड़ी में सरिताओं का जल, आकाश की वायु, सूर्य का प्रकाश – सब अपनी निर्मलता के चरम पर पहुँचकर सृष्टि में नए फूल खिलाने का उपक्रम करते हैं।
अब मैं चिड़िया के साथ जगना सीख गया था और सुबह की फूलों की सुगंध से भरी ताज़गी का वरदान पाने लगा था।
रवींद्रनाथ ने अपनी जीवन स्मृति में सच ही लिखा है, “मैं देवदार के जंगलों में घूमा, झरनों के किनारे बैठा, उसके जल में स्नान किया, कंचनजंगा की मेघमुक्त महिमा की ओर ताकता बैठा रहा लेकिन जहाँ मैंने यह समझा था कि पाना सरल होगा, वहीं मुझे खोजने पर भी कुछ नहीं मिला। परिचय मिला लेकिन और कुछ देख नहीं पाया। रत्न देख रहा था, सहसा वह बंद हो गया, अब मैं डिबिया देख रहा था। लेकिन डिबिया के ऊपर कैसी ही मीनाकारी क्यों न हो, उसको गलती से डिबिया मात्र मानने की आशंका नहीं रही।”
सच है, एक बार रत्न दिख गया तो फिर भले ही डिबिया बंद हो जाए, पर उस डिबिया में रत्न है, यह अनुभूति नहीं जानी चाहिए। रवींद्रनाथ की इन पंक्तियों में डिबिया की मीनाकारी का भी जो उल्लेख है, वह महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 1 – जब लेखक अपनी बंद कोठरी की शय्या को छोड़कर भोर में चिड़िया को बाहर जाने देने के लिए दरवाज़ा खोलता, तो क्या पाता?
(क) दरवाज़े से ताजी सुबह की देह की कांति लेखक के कमरे में कौंध जाती।
(ख) ठंडी हवा का स्पर्श और बहुत कोमलकांत उजाला लेखक की आँखों को सहलाता।
(ग) लेखक को लगा किसी अप्रतिम अनुभव को वह देर तक सोकर व्यर्थ करता रहा।
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी
प्रश्न 2 – वह चिड़िया लेखक की क्या है?
(क) सुबह की साथी
(ख) अलार्म घड़ी
(ग) शाम की साथी
(घ) माँ की ममता
उत्तर – (ख) अलार्म घड़ी
प्रश्न 3 – यह किसी घड़ी की ______________ ध्वनि नहीं है, अपनेपन से भरी पुकार है
(क) यांत्रिक
(ख) कर्कश
(ग) मधुर
(घ) रोमांचक
उत्तर – (क) यांत्रिक
प्रश्न 4 – रवींद्रनाथ ने अपनी जीवन स्मृति में क्या सच ही लिखा है?
(क) रत्न देख रहा था, सहसा वह बंद हो गया, अब मैं डिबिया देख रहा था। लेकिन डिबिया के ऊपर कैसी ही मीनाकारी क्यों न हो, उसको गलती से डिबिया मात्र मानने की आशंका नहीं रही।
(ख) परिचय मिला लेकिन और कुछ देख नहीं पाया।
(ग) मैं देवदार के जंगलों में घूमा, झरनों के किनारे बैठा, उसके जल में स्नान किया, कंचनजंगा की मेघमुक्त महिमा की ओर ताकता बैठा रहा लेकिन जहाँ मैंने यह समझा था कि पाना सरल होगा, वहीं मुझे खोजने पर भी कुछ नहीं मिला।
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी
प्रश्न 5 – एक बार रत्न दिख गया तो फिर भले ही डिबिया बंद हो जाए, पर उस डिबिया में __________ है, यह अनुभूति नहीं जानी चाहिए।
(क) क्या
(ख) रत्न
(ग) मोती
(घ) खजाना
उत्तर – (ख) रत्न
PSEB Class 9 Hindi Lesson 11 वह चिड़िया एक अलार्म घड़ी थी बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)
प्रश्न 1 – मोबाइल फ़ोन में अलार्म उपलब्ध रहने के कारण बाज़ार में किसकी माँग घटने लगी है।
(क) दीवार घड़ियों की
(ख) अलार्म घड़ियों की
(ग) कलाई घड़ियों की
(घ) जेब घड़ियों की
उत्तर – (ख) अलार्म घड़ियों की
प्रश्न 2 – लेखक को पहली अलार्म घड़ी कहाँ मिली थी?
(क) कॉलेज में पुरस्कार में
(ख) स्कूल में पुरस्कार में
(ग) कॉलेज में दोस्तों से
(घ) स्कूल में अध्यापक से
उत्तर – (क) कॉलेज में पुरस्कार में
प्रश्न 3 – लेखक को किसमें डूबे रहना स्वर्ग में जीने जैसा लगता था?
(क) एकांत में
(ख) किताबों में
(ग) रजाई में
(घ) कविताओं में
उत्तर – (घ) कविताओं में
प्रश्न 4 – चिड़िया कमरे में दीवार पर लगी किसकी तस्वीर के पीछे अपना घोंसला बनाने लगी थी?
(क) सुमित्रानंदन पंत की
(ख) निराला जी की
(ग) तुलसीदास जी की
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर – (क) सुमित्रानंदन पंत की
प्रश्न 5 – लेखक अपनी किताबों की दुनिया में खोया रहता था इसी कारण वह किसकी तरफ़ ध्यान ही नहीं देता था?
(क) सफाई
(ख) पडोसी
(ग) चिड़िया
(घ) समय
उत्तर – (ग) चिड़िया
प्रश्न 6 – ‘लेखक के लिए चिड़िया क्या थी?
(क) अलार्म घड़ी
(ख) मेहमान
(ग) परेशानी
(घ) साथी
उत्तर – (क) अलार्म घड़ी
प्रश्न 7 – वर्तमान में किसमें अलार्म की सुविधा है?
(क) दीवार घड़ियों में
(ख) मोबाइल फोन में
(ग) कलाई घड़ियों में
(घ) जेब घड़ियों में
उत्तर – (ख) मोबाइल फोन में
प्रश्न 8 – पहले दूल्हे को ससुराल पक्ष वाले शादी में क्या अवश्य देते थे ?
(क) किताबें
(ख) घड़ी
(ग) घर
(घ) गाडी
उत्तर – (ख) घड़ी
प्रश्न 9 – लेखक को पहली बार कलाई घड़ी कब मिली थी ?
(क) परीक्षा पास करने पर
(ख) कॉलेज में प्रवेश लेने पर
(ग) प्रतियोगिता में जितने पर
(घ) स्कूल में प्रवेश लेने पर
उत्तर – (ख) कॉलेज में प्रवेश लेने पर
प्रश्न 10 – लेखक को क्या रास नहीं आता था?
(क) सुबह-सुबह उठकर पढ़ना
(ख) सुबह-सुबह उठना
(ग) रात-रात भर उठकर पढ़ना
(घ) सुबह-सुबह दफ्तर जाना
उत्तर – (क) सुबह-सुबह उठकर पढ़ना
प्रश्न 11 – लेखक के कमरे में सिर्फ क्या था?
(क) सिर्फ एक दरवाजा
(ख) सिर्फ एक रोशनदान
(ग) सिर्फ एक खिड़की
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) सिर्फ एक दरवाजा
प्रश्न 12 – लेखक की नींद कैसे खुलती थी?
(क) माँ द्वारा दरवाजा खटखटाने से
(ख) पिता द्वारा दरवाजा खटखटाने से
(ग) पड़ोसियों द्वारा दरवाजा खटखटाने से
(घ) चिड़िया द्वारा दरवाजा खटखटाने से
उत्तर – (ग) पड़ोसियों द्वारा दरवाजा खटखटाने से
प्रश्न 13 – पलंग के सिरहाने बैठी वह —————— मुझे प्यार से देख रही थी।
(क) चिड़िया
(ख) अलार्म घड़ी
(ग) गौरैया
(घ) गिलहरी
उत्तर – (क) चिड़िया
प्रश्न 14 – लेखक की नई-नई नौकरी किस दशक में लगी थी ?
(क) साठवें
(ख) पचासवें
(ग) अस्सीवें
(घ) नब्बेवें
उत्तर – (ग) अस्सीवें
प्रश्न 15 – किस वृत्ति के कारण लेखक का सुबह जल्दी उठना मुश्किल हो जाता ?
(क) दिनचर्य
(ख) लेखकीय
(ग) निशाचरी
(घ) भ्रमरी
उत्तर – (ग) निशाचरी
प्रश्न 16 – दरवाज़ा खुलवाने के लिए चिड़िया किसके सिरहाने बैठकर चहचहाती थी ?
(क) दरवाजे
(ख) कुर्सी
(ग) मेज़
(घ) पलंग
उत्तर – (घ) पलंग
प्रश्न 17 – लेखक को सुबह किसने जगना सिखाया ?
(क) पिता ने
(ख) माँ ने
(ग) चिड़िया ने
(घ) पड़ोसी ने
उत्तर – (ग) चिड़िया ने
प्रश्न 18 – लेखक सुबह उठने की आदत के लिए किसका आभार रखता है ?
(क) चिड़िया का
(ख) पडोसी का
(ग) पिता का
(घ) किताबों का
उत्तर – (क) चिड़िया का
प्रश्न 19 – चिड़िया सुबह सुबह लेखक को किस लिए जगाती थी ?
(क) अच्छी आदत के लिए
(ख) बाहर जाने के लिए
(ग) खाना खाने के लिए
(घ) खिड़की खोलने के लिए
उत्तर – (ख) बाहर जाने के लिए
प्रश्न 20 – वह चिड़िया एक अलार्म घड़ी थी….. कहानी के लेखक कौन हैं ?
(क) सुमित्रानन्द पंत
(ख) निराला जी
(ग) गोविंद कुमार ‘गुंजन’
(घ) तुलसीदास जी
उत्तर – (ग) गोविंद कुमार ‘गुंजन’
PSEB Class 9 Hindi वह चिड़िया एक अलार्म घड़ी थी प्रश्न और उत्तर (Extra Question Answers)
प्रश्न 1 – पहले के समय में अलार्म घड़ियाँ क्यों महत्वपूर्ण थी ?
उत्तर – पहले के समय में जब सभी घरों में अलार्म घड़ी महत्वपूर्ण वस्तु मानी जाती थी। जब परीक्षा के दिन होते तो सिरहाने पर रखी अलार्म घड़ी ही सुबह होने पर जगाती थी। यदि किसी को सुबह जल्दी यात्रा करनी होती, तो रात को घड़ी में अलार्म लगा देते थे ताकि सुबह समय पर उठा जा सके। उस समय अलार्म घड़ियाँ बहुत काम आती थीं।
प्रश्न 2 – लेखक की पहली अलार्म घड़ी का एहसास कैसा था ?
उत्तर – लेखक को पहली बार अलार्म घड़ी कॉलेज में एक निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार के रूप में ही मिली थी। उस अलार्म घड़ी में चाबी भरकर अलार्म की घंटी बार-बार बजाकर उसके लुभावने प्रभाव को लेखक बहुत गहराई तक महसूस करता था। वह आवाज लेखक को जगाने वाली थी, जो उसे रोमांचित कर देती थी। लेखक को उस आवाज में जो नशा और स्वाद मिलता था, वह महँगे-से-महँगे अलार्म की आवाज वाले मोबाइल फ़ोन से भी नहीं मिलता था।
प्रश्न 3 – जब लेखक के पास घड़ी नहीं हुआ करती थी तो लेखक के पिता उन्हें सुबह उठने का कौन सा तरिका बताते थे ?
उत्तर – पहले के दिनों में जब लेखक के पास कोई घड़ी नहीं हुआ करती थी, तब लेखक के पिता जी उनसे कहा करते थे कि उन्हें सुबह जितने बजे भी उठना हो, वे अपने तकिये से कहकर सो जाया करे कि सुबह उन्हें इतने बजे उठा देना। बस, फिर उनकी नींद सुबह उतने बजे ही खुल जाएगी। बचपन में न जाने लेखक ने कितनी ही बार इस तरीके को अपनाया था और इस तरीके को सही काम करते भी पाया था कि तकिया उनकी बात सुनता है और ठीक समय पर उन्हें जगा भी देता है। यह जिज्ञासा से भरा हैरान करने वाला अनुभव लेखक को बहुत अच्छा लगता था, भले ही उस समय इस बात का रहस्य लेखक को पता नहीं था।
प्रश्न 4 – लेखक को कौन सी बुरी आदत हो गई है ?
उत्तर – लेखक को सुबह-सुबह उठकर पढ़ना पसंद नहीं था। उन्हें देर रात तक पढ़ना अच्छा लगता था। रात के अकेले में बीच रात से सुबह तक पढ़ते रहना और सुबह-सुबह नींद आ जाने पर देर से उठना लेखक की आदत बनती जा रही थी। कई बार रात को दो या तीन बजे तक पढ़ने के कारण लेखक की सुबह जल्दी नींद नहीं खुलती थी और लेखक के द्वारा सुबह की सुंदरता को सिर्फ़ कविताओं में ही महसूस किया जाता था। लेखक को पुरस्कार में जो अलार्म घड़ी मिली थी, जब वह खराब हुई, तो फिर वह ठीक नहीं की जा सकी। वर्तमान समय में भी वह घड़ी तीस सालों से भी अधिक समय से लेखक के पास बंद हालत में है, और वह अब ठीक होने की हालत में नहीं है। परंतु लेखक भी मानता है कि घड़ी की ही तरह वह भी अब ठीक होने की हालत में नहीं है। क्योंकि देर रात तक पढ़ना और सुबह देर तक सोना एक लेखक की आदत ही बन गया है।
प्रश्न 5 – लेखक का कमरा कैसा था और लेखक को वहां कैसा लगता था ?
उत्तर – 1980 से 1989 तक के बीच के समय में लेखक की नई-नई नौकरी लगी थी। लेखक पहली बार घर से बाहर अकेला निकला था और वह एक कमरा किराए पर लेकर रहने लगा था। लेखक के लिए अकेले रहने का यह पहला अनुभव था। लेखक ने अपने कमरे में महादेवी वर्मा, सुमित्रानन्द पंत और निराला जी की सुंदर तस्वीरों को फ्रेम करवाकर टाँग दिया था। कमरे के एक तरफ़ लेखक ने गुसाईं तुलसीदास जी का चित्र, अपनी पुस्तकें और अपने अकेलेपन को रखा था। लेखक के लिए रातें जाग-जागकर बिताना, कविताएँ लिखना और कविताओं में डूबे रहना मानो किसी स्वर्ग में जीने के समान लगता था। लेखक के कमरे में सिर्फ़ एक दरवाज़ा ही था। वहां न कोई खिड़की थी, न कोई रोशनदान था परंतु फिर भी वह कमरा लेखक को बहुत प्यारा लगता था। उसका किराया भी काफ़ी कम था। और इन सबसे बढ़कर वहां पड़ोसी बहुत अच्छे थे। वहां लेखक की देर तक रात में पढ़ने-लिखने की बुरी आदत बढ़ती जा रही थी और वहां उसकी इस आदत के बीच में कोई बाधा भी नहीं थी। लेखक ने हिंदी और अंग्रेज़ी के बहुत सारे साहित्य उस एकांत में पूरी तरह पढ़ व् समझ डाले थे। लेखक को वहां अद्धभुत सुख मिलता था।
प्रश्न 6 – लेखक के कमरे में कौन रहने लगा था और लेखक को इसका एहसास क्यों नहीं हुआ?
उत्तर – लेखक अपनी किताबों की दुनिया में इतना खोया हुआ रहता था कि उसे इस बात की कोई खबर ही हुई कि कब एक चिड़िया उसके कमरे के खुले दरवाज़े से उसके कमरे में आकर दीवार पर लगी पंत जी की तस्वीर के पीछे अपना घोंसला बनाने लगी थी, लेखक इस बात से बेखबर ही रहा। परन्तु जब उसे इस बात का पता चला, तब तक चिड़िया का उसके घोंसले में पूरी तरह गृह-प्रवेश हो चुका था और अब वह अपने घौंसलें में अपनी गृहस्थी जमा चुकी थी। अर्थात जब लेखक को पता चला कि उसके करे में पंत जी की तस्वीर के पीछे चिड़िया ने घौंसला बनाया है तब तक चिड़िया अपना पूरा घौंसला बना चुकी थी और उसमें रहने भी लगी थी।
प्रश्न 7 – चिड़िया लेखक पर चिढ़ और गुस्से से भरी चीं… चीं… क्यों कर रही थी ?
उत्तर – शाम को देर तक लेखक के कमरे का दरवाज़ा खुला रहता था इसलिए खिड़की या रोशनदान न होने के बावजूद भी वह चिड़िया आराम से कमरे ने आ जाती थी। वह अपने घोंसले में आराम करती थी। एक सुबह जब लेखक नींद में था तब चिड़िया उसके पलंग के सिरहाने बैठकर एक अलग तरह की चिढ़ और गुस्से से भरी चीं… चीं… कर रही थी। उसकी आवाज़ बहुत तेज थी, ऐसा लग रहा था मानो वह लेखक के सुबह न उठने पर नाराज हो रही हो। लेखक कुछ समझा नहीं परंतु जैसे ही उठकर दरवाज़ा खोला तो चिड़िया बाहर चली गई। लेखक को तब समझ में आया कि सुबह-सुबह चिड़िया को बाहर जाना होता है। घोंसला में तो वह केवल रातभर आराम करती है। दिन में वह घोंसले में आराम से पड़ी नहीं रहती। कमरे में खिड़की या रोशनदान होता, तो वह चिड़िया लेखक को जगाए बिना स्वयं ही बाहर चली जाती परंतु दरवाजा बंद होने पर उसके बाहर जाने का दूसरा कोई रास्ता भी नहीं था इसीलिए वह दरवाजा खुलवाने के लिए लेखक को जगा रही थी, और लेखक के न जागने पर वह नाराज़ भी हो रही थी।
प्रश्न 8 – सुबह-सुबह उठ कर लेखक ने कैसा महसूस किया ?
उत्तर – सुबह-सुबह पलकें खुलने पर लेखक को सचमुच ऐसा लगा, जैसे किसी ने चेतना को जगाने वाला गीत गाया हो। लेखक को ऐसा लग रहा था उस आकाश में घूमने वाली ने सचमुच ख़ुशी और आनंद की खुशबु की बनावट से उस वीरान कमरे को भर दिया था। सुबह लेखक ने अपने कमरे में ऐसी एक सुनहरी आकृति को महसूस किया था, जिसे पहले लेखक ने कभी महसूस नहीं किया था। लेखक अपने चारों ओर फैले हुए उस ख़ुशी और आनंद की खुशबु की सुनहरी आकृति से मानो पराजित होकर जागा था। अर्थात उस सुबह लेखक ख़ुशी की भावना से घिर कर जागा था। जब लेखक अपने छोटे से कमरे के बिस्तर को छोड़कर सुबह में चिड़िया को बाहर जाने देने के लिए दरवाज़ा खोलता, तो दरवाज़े से ताजी सुबह के शरीर की आभा कमरे को चमका जाती थी। ठंडी हवा का स्पर्श और बहुत कोमल उजाला लेखक की आँखों को सहलाता था। लेखक को ऐसा लगा जैसे वह देर तक सोकर किसी अनुपम व् अनोखे अनुभव को बेकार करता रहा था।