PSEB Class 9 Hindi Chapter 16 Bachendri Pal (बचेंद्री पाल) Question Answers (Important)
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- Bachendri Pal Textbook Questions
- Bachendri Pal Extract Based Questions
- Bachendri Pal Multiple Choice Questions
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(क) विषय-बोध
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो पंक्तियों में दीजिए-
प्रश्न 1 – बचेंद्री पाल ने बचपन में क्या दृढ़ निश्चय कर लिया था ?
उत्तर – बचेंद्री पाल ने बचपन में यह दृढ़ निश्चय कर लिया था कि वह परिवार में किसी से पीछे नहीं रहेगी।
प्रश्न 2 – बचेंद्री पाल के माता-पिता किस बात से दुःखी थे ?
उत्तर – बचेंद्री पाल के माता-पिता इस बात से बहुत दुखी रहते थे कि उनके बच्चे ऐसे सपनों की दुनिया में रहते थे जिन्हें वे गरीबी के कारण कभी पूरा नहीं कर सकते थे।
प्रश्न 3 – बचेंद्री पाल ने किन मैदानी खेलों में कप जीते ?
उत्तर – बचेंद्री पाल ने गोला फेंक, डिस्क फेंक तथा लंबी दौड़ में कप जीते।
प्रश्न 4 – बचेंद्री पाल ने कब अपने आपको पर्वतारोहण के लिए पूरी तरह समर्पित किया?
उत्तर – जब बचेंद्री पाल ने एम.ए., बी.एड. कर लिया तब उन्होंने अपने आपको पर्वतारोहण के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया।
प्रश्न 5 – ‘रैपलिंग’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर – रैपलिंग का अर्थ है-ऊँची चट्टान अथवा हिमखंड से एक नाइलोन की रस्सी के सहारे कुछ ही क्षणों में नीचे आना।
प्रश्न 6 – बचेंद्री पाल और अंग दोरजी ने बर्फ काटने के लिए किस चीज़ का इस्तेमाल किया ?
उत्तर – बचेंद्री पाल और अंग दोरजी के बर्फ काटने के लिए फावड़े का इस्तेमाल किया।
प्रश्न 7 – एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने वाली प्रथम भारतीय महिला कौन है ?
उत्तर – एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने वाली प्रथम भारतीय महिला बचेंद्री पाल है।
प्रश्न 8 – एवरेस्ट पर आनन्द के क्षणों में बचेंद्री पाल को किन का ध्यान आया ?
उत्तर – एवरेस्ट पर आनंद में क्षणों में बचेंद्री पाल को अपने माता-पिता का ध्यान आया।
प्रश्न 9 – बचेंद्री पाल को कौन-कौन से पुरस्कार दिए गए ?
उत्तर – बचेंद्री पाल को पद्मश्री, अर्जुन पुरस्कार तथा प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक दिए गए।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन या चार पंक्तियों में दीजिए-
प्रश्न 1 – दस साल की आयु में ही बचेंद्री पाल निडर और स्वतंत्र कैसे बन गई थी ?
उत्तर – जब वे सिर्फ दस साल की थी तभी से वे जंगलों और पहाड़ी ढलानों पर अक्सर अकेली घूमा करती थी। प्रकृति के साथ उनके ऐसे खुलेपन ने उन्हें निडर और स्वतंत्र बना दिया था। बसंत के दिनों में वे उन दूसरे स्थानों से आए पक्षियों के झुंडों को देखने के लिए चुपचाप घर से बाहर निकल जाती थी।
प्रश्न 2 – बचेंद्री पाल प्रतियोगिताओं के शुरू होने से पहले ही कौन-कौन सी दौड़ का अभ्यास करना शुरू कर देती थी ?
उत्तर – बचेंद्री पाल प्रतियोगिताओं के शुरू होने से पहले ही तीन टॅगडी, सूई धागे वाली दौड, बोरा दौड तथा सिर पर पानी भरा मटका रखकर होने वाली दौड़ आदि का अभ्यास करना शुरू कर देती थी।
प्रश्न 3 – बचेंद्री पाल ने अपनी शिक्षा कैसे प्राप्त की ?
उत्तर – बचेंद्री पाल दिन के समय केवल अपने हिस्से का ही नहीं बल्कि कहीं अधिक काम करती थी। वह अपने मित्रों से किताबें उधार लेकर देर रात तक पढ़ती थी। बचेंद्री पाल ने सिलाई का काम भी सीख लिया और सलवार-कमीज के सूट सिलकर हर दिन पाँच से छह रुपये भी कमाने लगी।
प्रश्न 4 – बचेंद्री पाल ने नेहरू संस्थान के पर्वतारोही कोर्स में क्या-क्या सीखा ?
उत्तर – बचेंद्री पाल ने नेहरू संस्थान के पर्वतारोही कोर्स में बरफ और चट्टानों पर चढ़ने के तरीकों का अध्ययन किया और रैपलिंग’ अर्थात ऊँची चट्टान अथवा हिमखंड से एक नाईलौन की रस्सी के सहारे कुछ ही क्षणों में नीचे आने के रोमांच का अनुभव किया।
प्रश्न 5 – तेनजिंग ने बचेंद्री पाल की तारीफ में क्या कहा ?
उत्तर – तेनजिंग ने बचेंद्री पाल की तारीफ में कहा कि वह एक पक्की पर्वतीय लड़की लगती है और उसे तो शिखर पर पहले की प्रयास में पहुँच जाना चाहिए।
प्रश्न 6 – एवरेस्ट पर पहुँच कर बचेंद्री पाल ने घुटनों के बल बैठ कर क्या किया ?
उत्तर – एवरेस्ट पर पहुँच कर बचेंद्री पाल अपने घुटनों के बल बैठी, बरफ पर अपने माथे को लगाकर उन्होंने उस आकाश के माथे (सिर) या स्वर्ग के शिखर माउंट एवरेस्ट के ताज का चुंबन लिया। बिना उठे ही उन्होंने अपने थैले से दुर्गा माँ का चित्र और हनुमान चालीसा निकाला। उन्हें लाल कपड़े में लपेटा छोटी-सी-पूजा-अर्चना की और अपने गले के कफ (स्कार्फ) को हवा में लहराया।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर छह या सात पंक्तियों में दीजिए-
प्रश्न 1 – बचेंद्री पाल का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर – बचेंद्री पाल का जन्म उत्तरांचल के चमौली जिले में बंपा गाँव में 24 मई, सन् 1954 ई० को हुआ। इनकी माता का नाम हंसादेई नेगी तथा पिता का नाम किशन सिंह पाल है। बचेंद्री पाल एक बहुत ही गरीब परिवार से सम्बन्ध रखती थी।
- निडर तथा साहसी – बचेंद्री पाल बचपन से ही निडर तथा साहसी थी। जब वे सिर्फ दस साल की थी तभी से वे जंगलों और पहाड़ी ढलानों पर अक्सर अकेली घूमा करती थी। प्रकृति के साथ उनके ऐसे खुलेपन ने उन्हें निडर और स्वतंत्र बना दिया था। बसंत के दिनों में वे उन दूसरे स्थानों से आए पक्षियों के झुंडों को देखने के लिए चुपचाप घर से बाहर निकल जाती थी।
- स्वप्नदुष्टा – बचेंद्री पाल बहुत बड़ी स्वप्न दुष्टा थी। उन्होंने कभी किसी चीज़ को अपनी पहुँच से बाहर नहीं समझा। जब बचेंद्री पाल ने एम.ए., बी.एड. कर लिया तब उन्होंने अपने आपको पर्वतों पर चढ़ने के लिए पूरी तरह से सौंप दिया।
- दृढ़ निश्चयी – बचेंद्री पाल को पता था कि गढ़वाल में यदि किसी के घर लड़की पैदा हो तो उसे बोझ माना जाता था। इसलिए बचेंद्री पाल ने बचपन से ही यह निश्चय कर लिया था कि वे परिवार में किसी से भी पीछे नहीं रहेगी और जो लड़के करते थे वह केवल वही नहीं करेगी, बल्कि उनसे भी अच्छा करके दिखाएगी। अर्थात बचेंद्री पाल अपने परिवार के लड़कों से भी बड़ा कुछ करना चाहती थी। परिवार के छोटे सदस्य बचेंद्री पाल की कल्पनाओं में बहुत आनंद लेते थे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते थे। बचेंद्री पाल उनसे अक्सर कहती थी कि वे इंतज़ार करे, वे उन्हें सब कुछ करके दिखा देगी।
- पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी अव्वल – बचेंद्री पाल पढ़ाई में भी काफी अच्छी थी, लेकिन खेल-कूद में वे और भी ज्यादा अच्छी थी। जिन-जिन खेलों में बचेंद्री पाल ने भाग लिया, अधिकतर खेलों में वे प्रथम रहती थी और मैदान में खेले जाने वाले खेलों जैसे कि गोला फेंक, डिस्क फेंक व लम्बी दौड़ में भी उन्होंने अनेक कप जीते थे।
- स्वाभिमानी – बचेंद्री पाल जब लगभग तेरह वर्ष की थी और आठवीं की परीक्षा अच्छे अंकों से पास की थी, तभी उनके पिता ने कह दिया था कि वे अब बचेंद्री पाल को स्कूल में भेजने का खर्च सहन नहीं कर सकते और अब बचेंद्री पाल को घर के काम में मदद करनी चाहिए। बचेंद्री पाल ने अपने मन में ऊँची शिक्षा प्राप्त करने का निश्चय कर लिया था, इसलिए वे दिन के समय में न केवल अपने हिस्से का, बल्कि उससे कहीं अधिक घर का काम करती थी और अपने मित्रों से स्कूल की किताबें उधार लेकर देर रात तक बैठकर पढ़ाई भी करती थी। बचेंद्री पाल ने सिलाई का काम भी सीख लिया और सलवार-कमीज के सूट सिलकर हर दिन पाँच से छह रुपये भी कमाने लगी।
- परिश्रमी – बचेंद्री पाल को जब पता चला कि उन्हें एवरेस्ट अभियान के लिए आयोजित जाँच शिविर के लिए चुना है तो अपने आप को और मजबूत बनाने के लिए वे घास चारे और सूखी लकड़ी के भारी से भारी गट्ठर घर लाने लगी। वे रोज़ अपने आने-जाने का रास्ता भी बदल देती थी। वे अधिक कठिन और खराब रास्तों और घाटियों से होकर निकलती थी और जानबूझ कर पत्थरों के ऊपर से चलती थी। इसके अलावा वे सीधी खड़ी ढलाऊ चट्टानों से उतरती थी जिससे कि वे और अधिक संतुलन प्राप्त कर सकें, और अपने ऊँचाई के डर को निकाल सकें। बचेंद्री पाल के इन सभी क्रियाकलापों का एकमात्र उद्देश्य एक सच्चा कुशल पर्वतारोही बनना था।
प्रश्न 2 – बचेंद्री पाल के एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने का वर्णन कीजिए।
उत्तर – बचेंद्री पाल ने 1 मई, सन् 1984 तक एवरेस्ट पर जाने की योजना की सही तैयारी कर ली थी। 8 मई को साउथ कोल पहुँच कर 9 मई को चोटी पर पहुँचने का प्रयास करना था। उसने 9 मई को प्रातः सात बजे शिखर कैंप से प्रस्थान किया। 16 मई प्रातः 8 बजे तक दूसरे कैंप में पहुँच गई। अगली सुबह: 6:20 पर उसने अंग दोरजी के साथ बिना रस्सी के चढ़ाई शुरू की। उन्होंने चट्टानों पर चढ़ते हुए बर्फ को काटने के लिए कुदाल का प्रयोग किया। वे दो घंटे से पहले ही शिखर के कैंप पर पहुँच गए। इस प्रकार निरंतर बढ़ते हुए वह 23 मई, सन् 1984 को एवरेस्ट चोटी पर पहुँच गई।
(ख) भाषा-बोध
1. निम्नलिखित एकवचन शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए-
| एकवचन – | बहुवचन | एकवचन – | बहुवचन |
| किताब – | ____________ | लड़की – | ____________ |
| कमीज़ – | ____________ | मटका – | ____________ |
| तकनीक – | ____________ | धागा – | ____________ |
| चट्टान – | ____________ | परीक्षा – | ____________ |
| चादर – | ____________ | इच्छा – | ____________ |
| साँस – | ____________ | श्रेणी – | ____________ |
उत्तर –
| एकवचन – | बहुवचन | एकवचन – | बहुवचन |
| किताब – | किताबें | लड़की – | लड़कियाँ |
| कमीज़ – | कमीजें | मटका – | मटके |
| तकनीक – | तकनीकियाँ | धागा – | धागे |
| चट्टान – | चट्टानें | परीक्षा – | परीक्षाएँ |
| चादर – | चादरें | इच्छा – | इच्छाएँ |
| साँस – | साँसें | श्रेणी – | श्रेणियाँ |
2. निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग तथा मूल शब्द अलग-अलग करके लिखिए-
| शब्द | उपसर्ग | मूलशब्द |
| प्रवासी | प्र | वासी |
| प्रशिक्षण | ________ | ________ |
| प्रशिक्षक | ________ | ________ |
| परिवार | ________ | ________ |
| परिश्रम | ________ | ________ |
| अभियान | ________ | ________ |
उत्तर –
| शब्द | उपसर्ग | मूलशब्द |
| प्रवासी | प्र | वासी |
| प्रशिक्षण | प्र | शिक्षण |
| प्रशिक्षक | प्र | शिक्षक |
| परिवार | परि | वार |
| परिश्रम | परि | श्रम |
| अभियान | अभि | यान |
3. निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय तथा मूल शब्द अलग-अलग करके लिखिए-
| शब्द | मूलशब्द | प्रत्यय |
| पढ़ाई | पढ़ | आई |
| ऊँचाई | _________ | _________ |
| चढ़ाई | _________ | _________ |
| न्यूनतम | _________ | _________ |
| बचपन | __________ | __________ |
| सफलता | _________ | _________ |
| कठिनाई | _________ | _________ |
| सुरक्षित | _________ | _________ |
उत्तर –
| शब्द | मूलशब्द | प्रत्यय |
| पढ़ाई | पढ़ | आई |
| ऊँचाई | ऊँच | आई |
| चढ़ाई | चढ़ | आई |
| न्यूनतम | न्यून | तम |
| बचपन | बच्चा | पन |
| सफलता | सफल | ता |
| कठिनाई | कठिन | आई |
| सुरक्षित | सुरक्षा | इत |
PSEB Class 9 Hindi Lesson 16 बचेंद्री पाल सार-आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)
1 –
मेरा जन्म 24 मई, 1954 को हुआ था। गढ़वाल में लड़की होने का क्या अर्थ है, यह मैं जानती हूँ। बचपन से ही मैंने निश्चय कर लिया था कि. मैं परिवार में किसी से पीछे नहीं रहूँगी और न केवल वह करूँगी जो लड़के करते थे, वरन् उनसे अच्छा करके दिखाऊँगी।
मैं एक बहुत बड़ी स्वप्नदृष्टा थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि कोई चीज़ मेरी पहुँच से बाहर है। दस साल की आयु में ही मैं जंगलों और पहाड़ी ढलानों पर प्रायः अकेली घूमा करती थी। प्रकृति के साथ मेरे खुलाब ने मुझे निडर और स्वतंत्र बना दिया था। बसंत के दिनों में मैं उन प्रवासी पक्षियों के झुंडों को देखने के लिए चुपचाप घर से बाहर निकल जाती थी जो सर्दियों में मैदानों में रहते थे।
मेरा परिवार बहुत गरीब था और न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करने में भी असमर्थ था। मेरे माता-पिता इस बात से दुखी थे कि उनके बच्चे ऐसे सपनों की दुनिया में रहते थे जो कभी साकार नहीं हो सकते। लेकिन परिवार के छोटे सदस्य मेरी कल्पनाओं में बहुत आनंद लेते थे और मुझे प्रेरित करते रहते थे। मैं उनसे कहती थी, “इंतज़ार करो, मैं तुम्हें सब कुछ करके दिखा दूँगी।”
प्रश्न 1 – बचेंद्री का जन्म कब हुआ था?
(क) 24 मई, 1854
(ख) 14 मई, 1954
(ग) 24 मई, 1954
(घ) 24 मई, 1952
उत्तर – (ग) 24 मई, 1954
प्रश्न 2 – बचपन से ही बचेंद्री ने क्या निश्चय कर लिया था ?
(क) परिवार में किसी से पीछे नहीं रहेगी
(ख) पर्वतारोही बनेगी
(ग) उच्च शिक्षा प्राप्त करेगी
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) परिवार में किसी से पीछे नहीं रहेगी
प्रश्न 3 – प्रकृति के साथ बचेंद्री के खुलाब ने उसे क्या बना दिया था?
(क) निडर
(ख) स्वतंत्र
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) केवल (क)
उत्तर – (ग) (क) और (ख) दोनों
प्रश्न 4 – बसंत के दिनों में बचेंद्री किन पक्षियों के झुंडों को देखने के लिए चुपचाप घर से बाहर निकल जाती थी?
(क) छोटे
(ख) अद्धभुत
(ग) प्रवासी
(घ) निकटवर्ती
उत्तर – (ग) प्रवासी
प्रश्न 5 – लेकिन परिवार के छोटे सदस्य किसकी कल्पनाओं में बहुत आनंद लेते थे ?
(क) बचेंद्री
(ख) दोरजी
(ग) तेनजिंग
(घ) कमला
उत्तर – (क) बचेंद्री
2 –
मैं हर तरह की बाहरी क्रीड़ा में विशिष्टता हासिल करना चाहती थी, विशेष रूप से लड़कों के साथ होने वाली प्रतियोगिताओं में। मैं दौड़ की वार्षिक प्रतियोगिताओं जैसे कि तीन टैगड़ी, सुई-धागे वाली दौड़, बोरा दौड़ तथा सिर पर पानी भरा मटका रखकर होने वाली दौड़ आदि का अभ्यास प्रतियोगिताओं के शुरू होने से पहले पूरे परिश्रम से करती थी। मैं पढ़ाई में काफी अच्छी थी, लेकिन खेल-कूद में और भी बेहतर। जिन-जिन खेलों में मैंने भाग लिया, अधिकांश में प्रथम रही और मैदानी खेलों जैसे कि गोला फेंक, डिस्क फेंक व लम्बी दौड़ में अनेक कप जीते।
मैं लगभग तेरह वर्ष की थी और आठवीं की परीक्षा अच्छे अंकों से पास की थी, तभी मेरे पिता ने कहा कि वे अब मुझे स्कूल में भेजने का खर्च बर्दाश्त नहीं कर सकते और अब मुझे घर के काम में मदद करनी चाहिए। मैंने अपने मन में ऊँची शिक्षा प्राप्त करने का निश्चय कर लिया था, इसलिए मैं दिन के समय न केवल अपने हिस्से का, बल्कि उससे कहीं अधिक घर का काम करती थी और अपने मित्रों से स्कूल की किताबें उधार लेकर देर रात तक बैठकर अध्ययन करती थी। मेरे तीव्र उत्साह और दृढ़ संकल्प को देखकर हर आदमी प्रभावित था। और अंत में मेरी माता और बहन कमला ने मेरे पिता से मुझे आगे पढ़ाने की वकालत की और मुझे नौवीं कक्षा में दाखिला लेने की अनुमति मिल गई। मैंने सिलाई का काम सीख लिया और सलवार-कमीज के सूट सिलकर पाँच से छह रुपये प्रतिदिन कमाने लगी।
प्रश्न 1 – कौन हर तरह की बाहरी क्रीड़ा में विशिष्टता हासिल करना चाहती थी?
(क) बचेंद्री
(ख) कमला
(ग) तेनज़िंग
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) बचेंद्री
प्रश्न 2 – जिन-जिन खेलों में बचेंद्री ने भाग लिया,अधिकांश में कौन सा स्थान पर रही ?
(क) दूसरे
(ख) पांचवें
(ग) तीसरे
(घ) पहले
उत्तर – (घ) पहले
प्रश्न 3 – लगभग तेरह वर्ष में बचेंद्री ने _________ परीक्षा अच्छे अंकों से पास की थी?
(क) आठवीं की
(ख) दसवीं की
(ग) पाँचवी की
(घ) सातवीं की
उत्तर – (क) आठवीं की
प्रश्न 4 – गद्यांश के अनुसार बचेंद्री ने अपने मन में किसका निश्चय कर लिया था?
(क) पर्वतारोहण का
(ख) कुछ अलग करने का
(ग) ऊँची शिक्षा प्राप्त करने का
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (ग) ऊँची शिक्षा प्राप्त करने का
प्रश्न 5 – किसके तीव्र उत्साह और दृढ़ संकल्प को देखकर हर आदमी प्रभावित था?
(क) बचेंद्री
(ख) दोरजी
(ग) तेनजिंग
(घ) कमला
उत्तर – (क) बचेंद्री
3 –
जब मैंने सुना कि ‘इंडियन माउन्टेनियरिंग फाउंडेशन’ (आई.एम.एफ.) ने 1984 में होने वाले एवरेस्ट अभियान के लिए आयोजित जाँच शिविर के लिए मुझे चुना है तो मैं जैसे एक बदली हुई इंसान बन गई। अपने आप को मजबूत बनाने के लिए मैं घास चारे और सूखी लकड़ी के भारी से भारी गट्ठर घर लाने लगी। मैं रोज़ आने-जाने का रास्ता भी बदल देती थी। मैं अधिक दुर्गम रास्तों और घाटियों से होकर निकलती और जानबूझ कर पत्थरों के ऊपर से चलती अथवा सीधी खड़ी ढलाऊ चट्टानों से उतरती जिससे कि मैं बेहतर संतुलन प्राप्त कर सकूँ, ऊँचाई के डर को निकाल सकूँ। मेरे सभी क्रियाकलापों का एकमात्र उद्देश्य एक सच्चा दक्ष पर्वतारोही बनना था।
एक बार तेनजिंग ने हँसते हुए मुझसे कहा था कि “तुम एक पक्की पर्वतीय लड़की लगती हो, तुम्हें तो शिखर पर पहले ही प्रयास में पहुँच जाना चाहिए।” ये शब्द ही मेरे साथी बने।
मई 1984 तक आरोहण योजना को शुरू करने की पूरी तैयारी हो चुकी थी। हमें 8 मई को साउथ कोल पहुँचकर 9 मई को चोटी पर पहुँचने का प्रयास करना था। 9 मई को हमने प्रात: सात बजे शिखर कैंप से प्रस्थान किया।
16 मई को प्रातः आठ बजे तक हम कैंप II तक पहुँच गये थे। मैंने अगले दिन की महत्वपूर्ण चढ़ाई की तैयारी शुरू कर दी।
सुबह 6:20 पर जब अंग दोरजी और मैं साउथ कोल से बाहर निकले तो दिन ऊपर चढ़ आया था। हल्की-हल्की हवा चल रही थी लेकिन ठंड भी बहुत अधिक थी। मैं अपने आरोही उपस्कर में काफी सुरक्षित और गरम थी। हमने बगैर रस्सी के ही चढ़ाई की। अंग दोरजी एक निश्चित गति से ऊपर चढ़ते गए और मुझे उनके साथ चलने में कोई कठिनाई नहीं हुई।
प्रश्न 1 – ______ में होने वाले एवरेस्ट अभियान के लिए आयोजित जाँच शिविर के लिए बचेंद्री को चुना गया।
(क) 1984
(ख) 1982
(ग) 1985
(घ) 1983
उत्तर – (क) 1984
प्रश्न 2 – “तुम एक पक्की पर्वतीय लड़की लगती हो।” किसके कथन हैं।
(क) बचेंद्री
(ख) दोरजी
(ग) तेनजिंग
(घ) कमला
उत्तर – (ग) तेनजिंग
प्रश्न 3 – अपने आप को मजबूत बनाने के लिए बचेंद्री पाल ने क्या किया ?
(क) घास चारे और सूखी लकड़ी के भारी से भारी गट्ठर घर लाने लगी
(ख) रोज़ आने-जाने का रास्ता भी बदल देती थी
(ग) अधिक दुर्गम रास्तों और घाटियों से होकर निकलती और जानबूझ कर पत्थरों के ऊपर से चलती
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी
प्रश्न 4 – मई 1984 तक _________ योजना को शुरू करने की पूरी तैयारी हो चुकी थी।
(क) आगमन
(ख) प्रस्थान
(ग) आरोहण
(घ) अवरोहण
उत्तर – (ग) आरोहण
प्रश्न 5 – अंग दोरजी के साथ ऊपर चढ़ते हुए किसे कोई कठिनाई नहीं हुई?
(क) बचेंद्री
(ख) दोरजी
(ग) तेनजिंग
(घ) कमला
उत्तर – (क) बचेंद्री
4 –
जमी हुई बरफ की सीधी व डलाऊ चट्टानें इतनी सख्त और भुरभुरी थीं मानो शीशे की चादरें बिछी हों। हमें बरफ काटने के फावड़े का इस्तेमाल करना पड़ा और मुझे बड़ी सख्ती से फावड़ा चलाना पड़ा जिससे कि उस जमी हुई बरफ की धरती को फावड़े के दाँत काट सकें।
दो घंटे से कम समय में ही हम शिखर कैंप पर पहुँच गये। अंग दोरजी ने पीछे मुड़कर देखा और मुझसे कहा कि क्या मैं थक गई हूँ? मैंने जवाब दिया, “नहीं” जिसे सुनकर वे बहुत। अधिक आश्चर्यचकित और आनंदित हुए। उन्होंने कहा कि पहले वाले दल ने तो शिखर कैंप पर पहुँचने में चार घंटे लगाये थे और यदि इसी गति से चलते रहे तो हम शिखर पर दोपहर 1 बजे तक पहुँच जाएंगे।
मेरी सांस मानो रुक गई थी। मुझे लगा कि सफलता बहुत नजदीक है। 23 मई, 1984 के दिन दोपहर के 1 बजकर सात मिनट पर मैं एवरेस्ट की चोटी पर खड़ी थी। एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने वाली मैं प्रथम भारतीय महिला थी।
प्रश्न 1 – जमी हुई बरफ की सीधी व डलाऊ चट्टानें इतनी सख्त और भुरभुरी थीं मानो ________ की चादरें बिछी हों।
(क) शीशे
(ख) बर्फ
(ग) पानी
(घ) लोहे
उत्तर – (क) शीशे
प्रश्न 2 – बचेंद्री पाल को बरफ काटने के _________ का इस्तेमाल करना पड़ा।
(क) तरीके
(ख) फावड़े
(ग) अपकरण
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (ख) फावड़े
प्रश्न 3 – बचेंद्री पाल कितने समय में ही शिखर कैंप पर पहुँच गये?
(क) एक घंटे से कम समय में
(ख) दो घंटे से अधिक समय में
(ग) दो घंटे से कम समय में
(घ) तीन घंटे के समय में
उत्तर – (ग) दो घंटे से कम समय में
प्रश्न 4 – पहले वाले दल ने तो शिखर कैंप पर पहुँचने में कितने घंटे लगाये थे ?
(क) चार
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) सात
उत्तर – (क) चार
प्रश्न 5 – 23 मई, 1984 के दिन दोपहर के कितने बजे बचेंद्री पाल एवरेस्ट की चोटी पर खड़ी थी?
(क) 1 बजकर पांच मिनट
(ख) 1 बजकर सात मिनट
(ग) 1 बजकर तीन मिनट
(घ) 1 बजकर चार मिनट
उत्तर – (ख) 1 बजकर सात मिनट
PSEB Class 9 Hindi Lesson 16 बचेंद्री पाल बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)
प्रश्न 1 – बचेंद्री पाल अपने माता-पिता की कौन-सी संतान है ?
(क) तीसरी
(ख) पहली
(ग) चौथी
(घ) दूसरी
उत्तर – (क) तीसरी
प्रश्न 2 – प्रकृति के साथ उसके खुलाव ने बचेंद्री पाल को कैसा बना दिया?
(क) बेपरवाह और स्वतंत्र
(ख) आलसी और निकम्मा
(ग) निडर और स्वतंत्र
(घ) आलसी और स्वतंत्र
उत्तर – (ग) निडर और स्वतंत्र
प्रश्न 3 – परिवार के _______ सदस्य बचेंद्री पाल की कल्पनाओं में आनंद लेते थे।
(क) बड़े
(ख) छोटे
(ग) सभी
(घ) बुजुर्ग
उत्तर – (ख) छोटे
प्रश्न 4 – बचेंद्री पाल के जीवन का क्या उद्देश्य था?
(क) बचेंद्री पाल के जीवन का उद्देश्य शिक्षा प्राप्त करना था
(ख) बचेंद्री पाल के जीवन का उद्देश्य पवर्तरोहण था
(ग) केवल (ख)
(घ) (क) और (ख) दोनों
उत्तर – (घ) (क) और (ख) दोनों
प्रश्न 5 – पर्वतारोही कोर्स के लिए बचेंद्रीपाल ने कहाँ आवेदन किया ?
(क) नेहरू संस्थान में
(ख) इंडियन माउन्टेनियरिंग फाउंडेशन
(ग) कमला संस्थान में
(घ) गाँधी संस्थान में
उत्तर – (क) नेहरू संस्थान में
प्रश्न 6 – बचेंद्रीपाल एवरेस्ट की चोटी पर कब पहुँची ?
(क) 23 मई, सन् 1986 को दोपहर 1 बजे
(ख) 33 मई, सन् 1984 को दोपहर 1 बजे
(ग) 23 मई, सन् 1984 को दोपहर 1 बजे
(घ) 21 मई, सन् 1984 को दोपहर 1 बजे
उत्तर – (ग) 23 मई, सन् 1984 को दोपहर 1 बजे
प्रश्न 7 – शिखर पर बचेंद्रीपाल ने कितना समय व्यतीत किया ?
(क) 43 मिनट
(ख) 41 मिनट
(ग) 45 मिनट
(घ) 33 मिनट
उत्तर – (क) 43 मिनट
प्रश्न 8 – बचेंद्रीपाल कितनी वर्ष की आयु में ही पहाड़ी ढलानों पर घूमती थी?
(क) बारह
(ख) चौदाह
(ग) दस
(घ) तरह
उत्तर – (ग) दस
प्रश्न 9 – इंडियन माउन्टेनियरिंग फाउंडेशन ने सन् _______ ई० के एवरेस्ट अभियान के लिए बचेंद्रीपाल को चुना।
(क) 1981
(ख) 1984
(ग) 1983
(घ) 1986
उत्तर – (ख) 1984
प्रश्न 10 – तुम्हें तो शिखर पर पहले ही प्रयास में पहुँच जाना चाहिए। – किसके कथन हैं।
(क) बचेंद्री
(ख) दोरजी
(ग) तेनजिंग
(घ) कमला
उत्तर – (ग) तेनजिंग
प्रश्न 11 – बचेंद्री पाल सलवार-कमीज के सूट सिलकर प्रतिदिन कितना कमाने लगी?
(क) चार से पांच रुपये
(ख) पाँच से छह रुपये
(ग) दो से तीन रुपये
(घ) तीन से चार रुपये
उत्तर – (ख) पाँच से छह रुपये
प्रश्न 12 – बचेंद्रीपाल कैम्प दो तक कब पहुँची ?
(क) 8 मई
(ख) 13 मई
(ग) 15 मई
(घ) 16 मई।
उत्तर – (घ) 16 मई
प्रश्न 13 – ‘मैं बहुत खुश हूँ’- कथन किसका है ?
(क) बचेंद्री का
(ख) दोरजी का
(ग) तेनजिंग का
(घ) कमला का
उत्तर – (ख) दोरजी का
प्रश्न 14 – स्वप्नदृष्टा का क्या ?
(क) स्वप्न देखने वाला
(ख) स्वप्न दिखाने वाला
(ग) ऊँची इच्छा रखने वाला
(घ) किसी को कुछ न समझने वाला
उत्तर – (क) स्वप्न देखने वाला
प्रश्न 15 – रैपलिंग का क्या अर्थ है ?
(क) ऊँची चट्टान से उतरना
(ख) रस्सी द्वारा नीचे उतरना
(ग) ऊँची चट्टान पर रस्सी द्वारा चढ़ना
(घ) ऊँची चट्टान से रस्सी द्वारा नीचे उतरना
उत्तर – (घ) ऊँची चट्टान से रस्सी द्वारा नीचे उतरना
प्रश्न 16 – आरोहण योजना की पूरी तैयारी कब तक हो गई थी ?
(क) मई 1980 तक
(ख) मई 1982 तक
(ग) मई 1984 तक
(घ) मई, 1986 तक
उत्तर – (ग) मई, 1984 तक
प्रश्न 17 – बचेंद्रीपाल ने आठवीं की परीक्षा लगभग कितने वर्षों की आयु में पास की थी ?
(क) 11
(ख) 12
(ग) 13
(घ) 14
उत्तर – (ग) 13
प्रश्न 18 – बद्रीपाल का जन्म कब हुआ था ?
(क) 24 मई, 1954
(ख) 24 मई, 1955
(ग) 24 मई, 1956
(घ) 24 मई, 1958.
उत्तर: (क) 24 मई, 1954.
प्रश्न 19 – बद्रीपाल कैसी लड़की थी ?
(क) स्वप्न दृष्टा
(ख) साहसी
(ग) दृढ़निश्चयी
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी
प्रश्न 20 – ‘बचेंद्रीपाल’ पाठ किसकी रचना है ?
(क) बचेंद्रीपाल
(ख) महादेवी वर्मा
(ग) तेनज़िंग
(घ) अंग दोरजी
उत्तर – (क) बचेंद्रीपाल
PSEB Class 9 Hindi बचेंद्री पाल प्रश्न और उत्तर (Extra Question Answers)
प्रश्न 1 – बचेंद्री पाल ने क्यों निश्चय किया कि वे परिवार में किसी से पीछे नहीं रहेगी ?
उत्तर – बचेंद्री पाल को पता था कि गढ़वाल में यदि किसी के घर लड़की पैदा हो तो उसे बोझ माना जाता था। इसलिए बचेंद्री पाल ने बचपन से ही यह निश्चय कर लिया था कि वे परिवार में किसी से भी पीछे नहीं रहेगी और जो लड़के करते थे वह केवल वही नहीं करेगी, बल्कि उनसे भी अच्छा करके दिखाएगी। अर्थात बचेंद्री पाल अपने परिवार के लड़कों से भी बड़ा कुछ करना चाहती थी।
प्रश्न 2 – बचेंद्री पाल खेल में जितने के लिए किस तरह का परिश्रम करती थी ?
उत्तर – बचेंद्री पाल हर तरह की बाहरी खेलों में विशेषता प्राप्त करना चाहती थी, खास कर के लड़कों के साथ होने वाली प्रतियोगिताओं में वे सभी से अच्छा करने का प्रयास करती थी। वे दौड़ की वार्षिक प्रतियोगिताओं में जैसे कि तीन टैगड़ी, सुई-धागे वाली दौड़, बोरा दौड़ तथा सिर पर पानी भरा मटका रखकर होने वाली दौड़ आदि का अभ्यास प्रतियोगिताओं के शुरू होने से पहले ही पूरे परिश्रम से करना शुरू कर देती थी। जिन-जिन खेलों में बचेंद्री पाल ने भाग लिया, अधिकतर खेलों में वे प्रथम रहती थी और मैदान में खेले जाने वाले खेलों जैसे कि गोला फेंक, डिस्क फेंक व लम्बी दौड़ में भी उन्होंने अनेक कप जीते थे।
प्रश्न 3 – बचेंद्री पाल उत्साही और दृढ़ निश्चय वाली थी। पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – बचेंद्री पाल जब लगभग तेरह वर्ष की थी और आठवीं की परीक्षा अच्छे अंकों से पास की थी, तभी उनके पिता ने कह दिया था कि वे अब बचेंद्री पाल को स्कूल में भेजने का खर्च सहन नहीं कर सकते और अब बचेंद्री पाल को घर के काम में मदद करनी चाहिए। बचेंद्री पाल ने अपने मन में ऊँची शिक्षा प्राप्त करने का निश्चय कर लिया था, इसलिए वे दिन के समय में न केवल अपने हिस्से का, बल्कि उससे कहीं अधिक घर का काम करती थी और अपने मित्रों से स्कूल की किताबें उधार लेकर देर रात तक बैठकर पढ़ाई भी करती थी। उनके इस तीव्र उत्साह और पक्के इरादे को देखकर हर आदमी उनसे प्रभावित हो जाता था।
प्रश्न 4 – बचेंद्री पाल के अंदर एक अच्छे पर्वतारोही के सभी लक्षण थे। कैसे सिद्ध होता है ?
उत्तर – जब बचेंद्री पाल ने एम.ए., बी.एड. कर लिया तब उन्होंने अपने आपको पर्वतों पर चढ़ने के लिए पूरी तरह से सौंप दिया। घर में खाली बैठने की बदले उन्होंने नेहरू संस्थान के प्रारंभिक पर्वतारोही कोर्स में प्रवेश के लिए निवेदन किया। और उन्हें वहां प्रवेश मिल भी गया और उन्होंने वहाँ बरफ और चट्टानों पर चढ़ने के तरीकों का अध्ययन किया और रैपलिंग’ अर्थात ऊँची चट्टान अथवा हिमखंड से एक नाईलौन की रस्सी के सहारे कुछ ही क्षणों में नीचे आने के रोमांच का अनुभव किया। उन्होंने चट्टान, बरफ और हिम पर चढ़ने की और अधिक उच्च तकनीकें सीखीं। उन्हें वहां अभियान को आयोजित करने की नियमित रूप से दी जाने वाली व्यावहारिक शिक्षा भी दी गई। अधिक ऊँचाई के रूप में बचेंद्री पाल ने, ‘ब्लैक पीक’ अथवा ‘काला नाग-6387 मीटर की चढ़ाई की। इस कोर्स में भी बचेंद्री पाल को ‘ए’ ग्रेड मिला और अभियानों में भाग लेने के लिए उनकी प्रशंसा की गई। बचेंद्री पाल को सिखाने वाले उन्हें बहुत अधिक प्रोत्साहन देते थे और कहते थे कि उनके अंदर एक अच्छे पर्वतारोही के सभी लक्षण हैं।
प्रश्न 5 – एवरेस्ट अभियान के लिए बचेंद्री पाल ने कैसे तैयारियां की ?
उत्तर – बचेंद्री पाल ने जब सुना कि ‘इंडियन माउन्टेनियरिंग फाउंडेशन’ (आई.एम.एफ.) ने 1984 में होने वाले एवरेस्ट अभियान के लिए आयोजित जाँच शिविर के लिए उन्हें चुना है तो वे जैसे एक बदली हुई इंसान बन गई। अपने आप को और मजबूत बनाने के लिए वे घास चारे और सूखी लकड़ी के भारी से भारी गट्ठर घर लाने लगी। वे रोज़ अपने आने-जाने का रास्ता भी बदल देती थी। वे अधिक कठिन और खराब रास्तों और घाटियों से होकर निकलती थी और जानबूझ कर पत्थरों के ऊपर से चलती थी। इसके अलावा वे सीधी खड़ी ढलाऊ चट्टानों से उतरती थी जिससे कि वे और अधिक संतुलन प्राप्त कर सकें, और अपने ऊँचाई के डर को निकाल सकें।