PSEB Class 9 Hindi Chapter 15 Ek Anthin Chakravyuh (एक अंतहीन चक्रव्यूह) Question Answers (Important) 

 

PSEB Class 9 Hindi Ek Anthin Chakravyuh Question Answers and Textbook Solutions – Looking for Ek Anthin Chakravyuh question answers for PSEB Class 9 Hindi Book Chapter 15? Look no further! Our comprehensive compilation of important question answers will help you brush up on your subject knowledge.

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड कक्षा 9 हिंदी पुस्तक के पाठ 15 एक अंतहीन चक्रव्यूह प्रश्न उत्तर खोज रहे हैं? आगे कोई तलाश नहीं करें! महत्वपूर्ण प्रश्नों का हमारा व्यापक संकलन आपको अपने विषय ज्ञान को बढ़ाने में मदद करेगा। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड कक्षा 9 के हिंदी प्रश्न उत्तर का अभ्यास करने से परीक्षा में आपके प्रदर्शन में काफी सुधार हो सकता है। हमारे समाधान इस बारे में एक स्पष्ट विचार प्रदान करते हैं कि उत्तरों को प्रभावी ढंग से कैसे लिखा जाए। हमारे एक अंतहीन चक्रव्यूह प्रश्न उत्तरों को अभी एक्सप्लोर करें उच्च अंक प्राप्त करने के अवसरों में सुधार करें।

The questions listed below are based on the latest PSEB exam pattern, wherein we have given Textbook Questions to the chapter’s extract-based questions, multiple choice questions, extra  answer questions with solutions

Also, practicing with different kinds of questions can help students learn new ways to solve problems that they may not have seen before. This can ultimately lead to a deeper understanding of the subject matter and better performance on exams. 

 

Related: 

 

PSEB Class 9 Chapter 15 Ek Anthin Chakravyuh Textbook Questions

(क) विषय-बोध

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो पंक्तियों में दीजिए-
(i) नशे के चक्रव्यूह में फँसा आदमी क्या कुछ लुटा देता है?
उत्तर– नशे के चक्रव्यूह में फँसा आदमी अपना तन, मन और धन सब कुछ लुटा देता है।

(ii) व्यसन या ड्रग एडिक्शन किसे कहते हैं ?
उत्तर– जब नशे की अगली खुराक न मिलने पर शरीर और मन दोनों छटपटाने लगते हैं और व्यक्ति नशे पर पूरी तरह निर्भर हो जाता है, तो इसे व्यसन या ड्रग एडिक्शन कहते हैं।

(iii) नशे के अंतहीन चक्रव्यूह में कौन फँस जाता है?
उत्तर- मन का संतुलन खोजता हुआ और जीवन की कठिनाइयों से परेशान व्यक्ति नशे के अंतहीन चक्रव्यूह में फँस जाता है।

(iv) कोकेन के सेवन से क्या नुकसान होता है?
उत्तर– कोकेन के सेवन से यह आभास होता है कि त्वचा के नीचे असंख्य कीड़े रेंग रहे हों।

(v) नशा करने से पारिवारिक व सामाजिक जीवन पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर- नशा करने से व्यक्ति अपनों का प्यार, साथ, नौकरी और सामाजिक सम्मान खो देता है और समाज से कट जाता है।

(vi) नशा करने से आर्थिक जीवन पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर– नशा करने से आर्थिक समस्याएँ बढ़ती जाती हैं, पैसा नशे में नष्ट होता जाता है और व्यक्ति चोरी या अपराध की ओर बढ़ सकता है।

(vii) कौन-कौन-सी संस्थाएँ नशामुक्ति की सुविधाएँ प्रदान कर रही हैं?
उत्तर– सरकारी और गैर-सरकारी संगठन, अस्पताल, पुलिस तथा स्वयंसेवी संस्थाएँ नशामुक्ति की सुविधाएँ प्रदान कर रही हैं।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन या चार पंक्तियों में दीजिए-

(i) नशे की भूल-भुलैया में लोग क्यों फँस जाते हैं?
उत्तर– लोग अक्सर मित्रों या साथियों के कहने पर, उत्सुकतावश या अनुभव के लिए नशा शुरू करते हैं। जीवन के तनाव, अवसाद, विफलता और निराशा भी उन्हें नशे की ओर धकेल देती है। कुछ लोग दुख भूलने या नीरस जीवन में आनंद लाने के लिए नशा करते हैं। धीरे-धीरे यही आदत उन्हें नशे की भूल-भुलैया में फँसा देती है, जिससे निकलना कठिन हो जाता है।

(ii) लेखक के अनुसार किस तरह के लोग नशे के शिकार होते हैं?
उत्तर- लेखक के अनुसार नशे के शिकार हर उम्र और हर वर्ग के लोग होते हैं। इनमें छात्र-छात्राएँ, किशोर, युवा, कलाकार, अभिनेता, दुकानदार, क्लर्क, मजदूर, रिक्शा-ठेला चलाने वाले, चालक, बेरोजगार आदि सभी शामिल हैं। अर्थात नशा किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज में फैल चुका है।

(iii) लोगों में नशे के बारे में किस तरह की गलतफहमी है? पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।
उत्तर– लोगों में यह गलतफहमी है कि नशा कल्पनाशीलता और सृजनात्मकता बढ़ाता है। कुछ विद्यार्थी यह भी सोचते हैं कि नशा करने से उनकी एकाग्रता बढ़ेगी और पढ़ाई में मदद मिलेगी। जबकि वास्तविकता यह है कि नशा मनन-क्षमता को कमजोर करता है और स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है।

(iv) नशा करने वाले व्यक्ति के स्वभाव में क्या परिवर्तन आ जाता है?
उत्तर– नशा करने वाला व्यक्ति आलसी और पोस्ती हो जाता है। उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है और वह छोटी-छोटी बातों पर झूठ बोलने लगता है। वह पहनावे और स्वच्छता के प्रति लापरवाह हो जाता है। उसमें संदेह और आक्रामकता बढ़ जाती है तथा कभी-कभी आत्मघाती प्रवृत्तियाँ भी दिखाई देने लगती हैं।

(v) नशा करने से कौन-कौन-सी भयंकर बीमारियाँ होती हैं?
उत्तर– नशा करने से तपेदिक, एच.आई.वी./एड्स और हेपेटाइटिस-बी जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं। सिगरेट और चिलम से फेफड़े खराब हो जाते हैं और वातस्फीति व फेफड़ों का कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा शरीर कमजोर हो जाता है और रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर छह या सात पंक्तियों में दीजिए-
(i) नशा करने का एक बार का अनुभव आगे चलकर व्यसन में बदल जाता है कैसे?
उत्तर– नशे की शुरुआत प्रायः मित्रों या साथियों के कहने पर केवल एक अनुभव के रूप में होती है। पहली बार नशा करने पर व्यक्ति को कुछ समय के लिए सुख या तनाव से मुक्ति का भ्रम होता है। वह उसी अनुभव को दोबारा पाने के लिए फिर नशा करता है। धीरे-धीरे मन नशे का आदी हो जाता है और बिना नशे के बेचैनी महसूस होने लगती है। बाद में शरीर भी नशे पर निर्भर हो जाता है और खुराक की मात्रा बढ़ने लगती है। नशा न मिलने पर तन-मन में तड़प और असहजता पैदा होने लगती है। इस प्रकार एक बार का अनुभव धीरे-धीरे व्यसन में बदल जाता है, जिससे निकलना बहुत कठिन हो जाता है।

(ii) नशेड़ी व्यक्ति का जीवन अंततः नीरस हो जाता है कैसे?
उत्तर– नशे के कारण व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति और स्मरण-शक्ति कमजोर हो जाती है। उसका मन किसी काम में नहीं लगता और वह आलसी व चिड़चिड़ा बन जाता है। परिवार और समाज से उसका संबंध टूटने लगता है और वह अकेलापन महसूस करता है। मित्र और सगे-संबंधी भी उससे दूर हो जाते हैं। नौकरी छूट जाती है और आर्थिक परेशानियाँ बढ़ जाती हैं। आर्थिक तंगी के कारण उसका आत्मसम्मान भी गिरने लगता है। धीरे-धीरे जीवन में आनंद, उद्देश्य और संबंध सब समाप्त हो जाते हैं। इस तरह नशेड़ी व्यक्ति का जीवन अंततः पूरी तरह नीरस और निराशाजनक हो जाता है।

(iii) नशामुक्ति के क्या-क्या उपाय किए जाते हैं?
उत्तर– नशामुक्ति के लिए चिकित्सीय सहायता बहुत आवश्यक होती है। डॉक्टर कुछ नशों में खुराक को धीरे-धीरे कम कर बंद करते हैं और कुछ में नशा छुड़ाने वाली दवाएँ देते हैं। इस दौरान रोगी को अस्पताल में भर्ती भी करना पड़ सकता है। इसके बाद मानसिक और सामाजिक पुनर्वास किया जाता है, जिससे व्यक्ति सामान्य जीवन में लौट सके। परिवार और प्रियजनों का सहयोग इस प्रक्रिया में बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। रोगी में नया आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करना भी नशामुक्ति का आवश्यक भाग है। इसके अलावा सरकारी, गैर-सरकारी और स्वयंसेवी संस्थाएँ भी नशामुक्ति के उपाय करती हैं।

(iv) निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए-

  • अवसाद, तनाव, विफलता, हताशा आदि मन को कमजोर बनाने वाली स्थितियाँ भी नशे की और धकेल सकती हैं। मन का संतुलन खोजता आदमी एक अंतहीन चक्रव्यूह में फँस जाता है।
  • किंतु अच्छाई इसी में है कि इस चक्रव्यूह से स्वयं को बिल्कुल आजाद ही रखें। कोई कुछ भी कहे, न तो नशों के साथ एक्सपेरिमेंट करना अच्छा है, न ऐसी संगत में रहना ठीक है जहाँ लोग उसके चंगुल में कैद हो।

उत्तर-
अवसाद, तनाव ………………………………………………….. फँस जाता है।
इन पंक्तियों का आशय यह है कि जब व्यक्ति अवसाद, तनाव, असफलता और निराशा जैसी परिस्थितियों से घिर जाता है, तो उसका मन कमजोर हो जाता है। मन को शांति और संतुलन देने के लिए वह नशे की ओर आकर्षित हो सकता है। लेकिन एक बार नशे के रास्ते पर चलने से वह एक ऐसे अंतहीन चक्रव्यूह में फँस जाता है, जिससे निकलना बहुत कठिन हो जाता है।
किंतु अच्छाई ……………………………………… में कैद हो।
लेखक चेतावनी देता है कि सबसे अच्छा उपाय यही है कि नशे से पूरी तरह दूर रहा जाए। न तो नशे का प्रयोग करना चाहिए और न ही ऐसी संगत में रहना चाहिए जहाँ लोग नशे के चंगुल में फँसे हों।

(ख) भाषा- बोध
1. निम्नलिखित में से उपसर्ग तथा मूल शब्द अलग-अलग करके लिखिए-

शब्द उपसर्ग मूल शब्द
निर्बुद्धि ____________ ____________
दुष्प्रभाव __________ __________
बेचैन ____________ ____________
बेरोजगार ____________ ____________
उत्खनन ____________ ____________
विवश ____________ ____________

उत्तर-

शब्द उपसर्ग मूल शब्द
निर्बुद्धि निर् बुद्धि  
दुष्प्रभाव दुः प्रभाव 
बेचैन बे चैन
बेरोजगार बे रोजगार
उत्खनन उत्  खनन
विवश वि वश

2. निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय तथा मूल शब्द अलगअलग करके लिखिए

शब्द मूल शब्द प्रत्यय
निर्भरता ____________ ____________
पुरातात्विक ____________ ____________
मानसिक ____________ ____________
कल्पनाशीलता ____________ ____________
चिकित्सीय ____________ ____________
विफलता ____________ ____________
शारीरिक ____________ ____________
मनोवैज्ञानिक ____________ ____________
सृजनात्मकता ____________ ____________
सरकारी ____________ ____________

उत्तर-

शब्द मूल शब्द प्रत्यय
निर्भरता निर्भर ता
पुरातात्विक पुरातत्व  इक
मानसिक मानस इक
कल्पनाशीलता कल्पनाशील ता
चिकित्सीय चिकित्सा  ईय
विफलता विफल ता
शारीरिक शरीर  इक 
मनोवैज्ञानिक मनोवैज्ञान इक
सृजनात्मकता सृजनात्मक ता
सरकारी सरकार ई 

 

3. निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ समझकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए

मुहावरा अर्थ वाक्य
मुँह मोड़ना उपेक्षा करना, ध्यान देना ____________________
रगरग में फैलना सब जगह फैलना ____________________
घर करना मन में कोई बात बैठ जान ____________________
सुध रहना याद रहना ____________________
ग़म ग़लत करना दुःख भूलने के लिए नशा करना ____________________
नाता टूटना सम्बन्ध ख़त्म हो जाना ____________________

उत्तर-

मुहावरा अर्थ वाक्य
मुँह मोड़ना उपेक्षा करना, ध्यान देना जीवन की सच्चाइयों से मुँह मोड़ने के लिए थोड़े – से लोग नशे की भूल-भुलैया में खो जाया करते हैं। 
रगरग में फैलना सब जगह फैलना चिलम का धुआँ समाज की रग-रग में बढ़ता-फैलता गया। 
घर करना मन में कोई बात बैठ जान मन में हीन भावना का घर कर जाना नशे की तरफ ले जा सकता है। 
सुध रहना याद रहना नशे के चक्रव्यूह में व्यक्ति ऐसा फस जाता है कि उसे किसी बात की सुध नहीं रहती। 
ग़म ग़लत करना दुःख भूलने के लिए नशा करना कोई गम ग़लत करने, तो कोई नीरस जीवन में रस लाने के लिए नशे के नरक में भैंसता जा रहा है।
नाता टूटना सम्बन्ध ख़त्म हो जाना नशा करने वाले लोगों का वास्तविकता से नाता टूट जाता है। 

4. निम्नलिखित पंजाबी वाक्यों का हिन्दी में अनुवाद कीजिए-
(i) ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਖੁਰਾਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਵੀ ਵੱਧਦੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।
(i) ਨਸ਼ੇ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਆਮਤੌਰ ‘ਤੇ ਕਿਸੇ ਦੋਸਤ ਜਾਂ ਸਾਥੀ ਦੇ ਕਹਿਣ ਵਿੱਚ ਆ ਕੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ।
(i) ਨਸ਼ੇੜੀ ਵਿਅਕਤੀ ਦਾ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕੰਮ ਵਿੱਚ ਮਨ ਨਹੀਂ ਲਗਦਾ।
(iv) ਨਸ਼ੀਲੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਲਤ ਤੋਂ ਮੁਕਤੀ ਪਾਉਣਾ ਅਸਾਨ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ।
(v) ਨਸ਼ਿਆਂ ਤੋਂ ਸਾਨੂੰ ਖੁਦ ਨੂੰ ਹਮੇਸ਼ਾਂ ਅਜ਼ਾਦ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।
उत्तर-
i. धीरे-धीरे खुराक की मात्रा भी बढ़ती जाती है।
ii. नशा अक्सर किसी दोस्त या साथी के कहने पर शुरू होता है।
iii. नशे के आदी व्यक्ति का किसी भी काम में मन नहीं लगता।
iv. नशे की लत से छुटकारा पाना आसान नहीं है।
v. हमें हमेशा खुद को नशे से दूर रखना चाहिए।

(ग) रचनात्मक अभिव्यक्ति
1. ‘घर में बड़ों को नशा करते देखकर भी कुछ किशोर और युवा गुमराह हो जाते हैं।’ क्या आप लेखक की इस उक्ति से सहमत हैं ? यदि हाँ, तो चार-पाँच वाक्यों में उत्तर दीजिए।
उत्तर– हाँ, मैं लेखक की इस उक्ति से पूरी तरह सहमत हूँ। घर के बड़े बच्चों के लिए आदर्श होते हैं और बच्चे उनके व्यवहार की नकल करते हैं। जब वे घर में बड़ों को नशा करते देखते हैं, तो उन्हें यह गलत नहीं लगता। धीरे-धीरे जिज्ञासा और अनुकरण के कारण वे भी नशे की ओर आकर्षित हो जाते हैं। इसलिए बड़ों का जिम्मेदार और संयमित व्यवहार बहुत आवश्यक है।

2. यदि आपको कोई नशा करने के लिए उकसाए तो आप किस तरह उसे मना करेंगे ?
उत्तर- यदि कोई मुझे नशा करने के लिए उकसाए, तो मैं उसे साफ और दृढ़ शब्दों में मना कर दूँगा। मैं उसे बताऊँगा कि नशा स्वास्थ्य, भविष्य और परिवार तीनों के लिए हानिकारक है। मैं सकारात्मक और स्वस्थ आदतों को अपनाने की बात कहूँगा। आवश्यकता पड़ने पर मैं ऐसी संगत से दूरी भी बना लूँगा, ताकि स्वयं को सुरक्षित रख सकूँ।

(घ) पाठ्येतर सक्रियता
1. नशा उन्मूलन सम्बन्धी प्रभावशाली नारे एक चार्ट पर लिखकर कक्षा की दीवार पर लगाइए।
2. तख्तियाँ बनाकर उन पर सुंदर लिखावट के साथ नशा-उन्मूलन सम्बन्धी प्रभावशाली नारे लिखें और जब भी स्कूल की ओर से नशा-उन्मूलन रैली का आयोजन किया जाए तो इन नारों से समाज को नशों से दूर रहने के लिए जागृत करें।
3. नशों के घातक परिणामों से सम्बन्धित चित्र अखबारों, मैगजीनों, इंटरनेंट आदि से इकट्ठे कीजिए और उनका कोलाज बनाइए।
4. नशा-उन्मूलन संबंधी कोई एकांकी ढूँढें अथवा अपने मित्रों अध्यापकों की मदद से छोटी-सी नाटिका लिखें और उसे बाल-सभा में मंचित करें।
5. जब भी कभी आपके स्कूल में नशों के विरोध में कोई आयोजन हो तो उस अवसर पर ‘नशामुक्ति’ / ‘नशाबंदी’ विषय पर छात्रों का एक समूह मिलकर एक प्रदर्शनी का आयोजन करे।
6. स्कूल में नशा-उन्मूलन विषय पर आयोजित होने वाली विभिन्न क्रियाओं जैसे ‘निबन्ध’, ‘भाषण’, ‘वाद-विवाद’ तथा ‘पोस्टर बनाना’ आदि प्रतियोगिताओं में सक्रिय भाग लें।
7. 1 दिसम्बर को प्रतिवर्ष ‘विश्व एड्स दिवस’ के अवसर पर स्कूल में आयोजित होने वाली कार्यशाला में भाग लें। इस अवसर पर अध्यापकों, रिसोर्स पर्सन्स, चिकित्सकों आदि के ‘एड्स’ विषय पर बहुमूल्य विचार सुनें एवं इस अवसर पर आयोजित ‘प्रश्नोत्तरी काल’ में ‘एड्स’ से सम्बन्धित प्रश्न पूछकर अपनी सभी जिज्ञासाओं को शांत करें।

(ङ) ज्ञान-विस्तार
1. कोकेन : यह भी एक खतरनाक ड्रग है। इसकी लत से दृष्टिभ्रम, मतिभ्रम, क्रोधयुक्त उन्माद आदि होने लगता है और पूरी तरह से मनुष्य का मानसिक व नैतिक पतन हो जाता है। भारत सहित अनेक देशों में इसके उपयोग व बिक्री पर रोक है।
2. एल. एस. डी. (लाइसर्जिक एसिड डाई ऐथाइलामाइड) : तेज मादक पदार्थ जिसे लेने से मानसिक व्यवहार और शारीरिक क्रिया-कलापों पर गहरा असर पड़ता है। मन व्यग्रता से घिर उठता है, मतिभ्रम और दृष्टिभ्रम होने से सच्चाई से नाता टूट जाता है और तरह-तरह की मानसिक विकृतियां दिलोदिमाग पर हावी हो जाती हैं।
3. पीसीपी (फेनसाइक्लीडिन) : कई नामों जैसे एंजल डस्ट, पीस पिल ( शाँति की गोली) और सेरनिल के नाम से बिकने वाली नशे की गोली जिसे लेने से सच्चाई से नाता टूट जाता है और मन-मस्तिष्क में कई तरह के भ्रम विभ्रम उठ खड़े होते हैं।
4. कैनाबिस : देश के कई हिस्सों में उगने वाली बूटी, जिसके विभिन्न हिस्सों से मादक पदार्थ भांग, गांजा और चरस प्राप्त किए जाते हैं। इनका नशे करने से मतिभ्रम उत्पन्न होता है, जिसके चलते छोटी-सी चीजें बहुत बड़ी दिखने लग सकती हैं, कानों में आवाजें सुनाई देने लग सकती हैं, और नशे की इस हालत में आदमी कई प्रकार से अपना बुरा कर सकता है। लंबे समय तक इनके सेवन से तन-मन दोनों पर गंभीर दुष्परिणाम पड़ते हैं।
5. एम्फेटामिन दवाएं : मस्तिष्क को उत्तेजित करने वाली शक्तिशाली दवाओं का एक खास वर्ग। अक्सर इन दवाओं का दुरुपयोग एकाग्रता और मानसिक सतर्कता में वृद्धि लाने के लिए होता है। युवा पीढ़ी में ‘स्पीड’ के नाम से लोकप्रिय ये दवाएं नींद भगाने, थकान मिटाने और सुखबोध उत्पन्न करने के लिए प्रयोग में लाई जाती हैं, किंतु उनके सेवन से तन-मन पर अनेक दुष्परिणाम पड़ सकते हैं। ये दवाएं अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कनों की गड़बड़ी, ब्लड प्रेशर में वृद्धि पैदा करती हैं, आदमी को नशाखोर बनाती हैं। और दिल पर बुरा असर डाल मौत की नींद सुला सकती हैं।
6. एच.आई.बी. (ह्यूमन इम्यूनो डेफिशिएन्सी वायरस) : यह एक विषाणु है जिसके साथ एड्स फैलता है।
7. एड्स : यह अंग्रेजी के अक्षर ए.आई.डी.एस. से बना है अर्थात् एक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएन्सी सिन्ड्रोम । वास्तव में यह कोई रोग नहीं है अपितु एक शारीरिक अवस्था है। जिसमें मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होते-होते लगभग खत्म ही हो जाती है तथा मनुष्य फिर साधारण रोग-कीटाणुओं द्वारा फैलने वाली सामान्य बीमारियों से भी अपने आप को बचा नहीं पाता। इस तरह फिर वह प्राणघातक संक्रामक रोगों व कई तरह के कैंसर आदि से ग्रस्त हो सकता है।
8. तपेदिक (क्षयरोग) T.B. (Tubercle bacillus) : यह एक संक्रामक बीमारी है जो आमतौर पर फेफड़ों पर हमला करती है लेकिन यह शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकती है। यह हवा के माध्यम से तब फैलती है जब वे लोग जो टी.बी. संक्रमण से ग्रसित हैं और छींक, खांसी या किसी अन्य प्रकार से हवा के माध्यम से अपनी लार संचारित कर देते हैं।
9. हेपेटाइटस बी / यकृतशोथ : यह वायरस के कारण होने वाली एक संक्रामक बीमारी है जिसके कारण लीवर में सूजन और जलन पैदा होती है।

 

PSEB Class 9 Hindi Lesson 15 एक अंतहीन चक्रव्यूह सार-आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)

निम्नलिखित गद्याँशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1
धरती पर जीवन का अंकुर फूटते ही आदमी तरह-तरह के प्रयोग करने लगा था। नशे की मायावी दुनिया से उसका प्रथम परिचय उन्हीं दिनों हुआ। सहस्रों वर्ष पहले धरती पर पग धरते. ही उसने कौतूहलवश अपने आसपास उग रही वनस्पतियों के साथ न जाने कितने ही खेल खेलें। उसे कुछ वनस्पतियों में मन को बहलाने और रंगने के गुण दिखे। समय की धारा में वह निर्बुद्धि उनके चक्रव्यूह में ऐसा फैसा कि उसे सुध ही न रही और वह इन का बंदी बन गया। सच, मादक पदार्थों के आकाशकुसुम हैं हीं ऐसे कि कोई कितना ही छटपटाए, इस चक्रव्यूह से बचकर निकल पाना बहुत मुश्किल है। नशे के दलदल भरे चक्रव्यूह में फँसा आदमी तन-मन-धन अपना सब कुछ ही लुटा देता है। सभ्यता का सूर्य उगने से बहुत पहले ही आदमी ने पेड़-पौधों से नशीले पदार्थ पाकर उनका रसास्वादन शुरू कर दिया था। पुरातात्विक उत्खननों से पता चला है कि पाषाण युग में भी अफीम का सेवन हुआ करता था। भाँग, गांजा और चरस का इतिहास भी हजारों साल पुराना है। भारत, मिस्त्र, चीन और तुर्की में 3,000 वर्ष ईसा पूर्व से इनके इस्तेमाल के सुस्पष्ट उल्लेख मिलते हैं। उत्तरी और केंद्रीय अमेरिका के कबीलों ने मैक्सीको में उगने वाले नशीले नागफनी और दक्षिण अमेरिकी आदिवासियों ने कोकेन का सदियों से नशा किया है।

1. मनुष्य का नशे की दुनिया से पहला परिचय कैसे हुआ?
(क) मजबूरी के कारण
(ख) रोग के उपचार के लिए
(ग) कौतूहलवश वनस्पतियों के प्रयोग से
(घ) व्यापार के उद्देश्य से
उत्तर– (ग) कौतूहलवश वनस्पतियों के प्रयोग से

2. नशे के चक्रव्यूह में फँसकर आदमी क्या खो देता है?
(क) केवल धन
(ख) केवल स्वास्थ्य
(ग) केवल सामाजिक सम्मान
(घ) तन, मन और धन सब कुछ
उत्तर- (घ) तन, मन और धन सब कुछ

3. पाषाण युग में किस नशीले पदार्थ के सेवन के प्रमाण मिलते हैं?
(क) अफीम
(ख) चरस
(ग) गांजा
(घ) कोकेन
उत्तर– (क) अफीम

4. मनुष्य ने सबसे पहले नशीले पदार्थ कहाँ से प्राप्त किए?
उत्तर- मनुष्य ने नशीले पदार्थ पेड़-पौधों और वनस्पतियों से प्राप्त किए।

5. भाँग, गांजा और चरस का इतिहास कितना पुराना है?
उत्तर– भाँग, गांजा और चरस का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है।

2
19वीं सदी के उत्तर्शद्ध तक मन की तार-तरंगों को रागमय बनाने के ये भ्रामक प्रयास आबादी के छोटे- से हिस्से तक सीमित थे। जीवन की सच्चाइयों से मुँह मोड़ने के लिए थोड़े – से लोग नशे की भूल-भुलैया में खो जाया करते थे। जैसे-जैसे जीवन का रूप बदला, तौर-तरीके और मूल्य बदले, चिलम का धुआँ समाज की रग-रग में बढ़ता-फैलता गया। आज नशा करनेवालों में हर तबके और हर उम्र के लोग – हाई स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राएँ, पढ़ाई बीच में छोड़ देनेवाले किशोर और युवा कलाकार, अभिनेता-अभिनेत्रियाँ, छोटे-बड़े दुकानदार, दफ्तर में कलम घिसते क्लर्क, छोटी-बड़ी फैक्टरियों में काम करते मजदूर, रिक्शा-ठेला खींचने वाले, तिपहिया स्कूटर और टैक्सी-चालक, पान-सिगरेट बेचनेवाले, और बेरोजगार-सभी इस भूल-भुलैया में सम्मिलित हैं। कोई गम ग़लत करने, तो कोई शून्य, स्नेहरिक्त, नीरस जीवन में रस लाने के लिए, कोई उत्सुकतावश तो कोई फैशनेबल दिखने-कहलाने के लिए नशे के नरक में भैंसता जा रहा है।
मोटे तौर पर आदमी की नशे की निर्भरता दो तरह की होती है। पहली वह, जिसमें नशा न मिलने पर मन बेचैन होने लगता है, पर शारीरिक लक्षण नहीं उभरते। इसे मनोवैज्ञानिक निर्भरता (साइकोलॉजिकल डिपेंडेंस) कहते हैं। कुछ नशों में मन के बाद शरीर भी नशे का इतना गुलाम हो जाता है कि अगली खुराक न मिलने पर छटपटाने लगता है। धीरे-धीरे खुराक की मात्रा भी बढ़ती जाती है। यह दूसरी अवस्था शारीरिक निर्भरता (फिजिकल डिपेंडेंस) के दरजे में आती है। इसे ही व्यसन या ड्रग एडिक्शन भी कहते हैं।

1.19वीं सदी के उत्तरार्ध तक नशे का प्रचलन किस तक सीमित था?
(क) पूरे समाज तक
(ख) केवल ग्रामीण लोगों तक
(ग) आबादी के छोटे-से हिस्से तक
(घ) केवल युवाओं तक
उत्तर– (ग) आबादी के छोटे-से हिस्से तक

2. आज नशा करने वालों में कौन शामिल हैं?
(क) केवल मजदूर वर्ग
(ख) केवल छात्र
(ग) केवल बेरोजगार
(घ) हर तबके और हर उम्र के लोग
उत्तर– (घ) हर तबके और हर उम्र के लोग

3. लोग नशे की भूल-भुलैया में क्यों फँस जाते हैं?
उत्तर– कुछ लोग ग़म भूलने के लिए, तो कुछ नीरस जीवन में आनंद लाने के लिए नशा करते हैं। कुछ लोग उत्सुकतावश या फैशनेबल दिखने के लिए भी नशे के जाल में फँस जाते हैं।

4. मनोवैज्ञानिक निर्भरता क्या है?
उत्तर– इसमें नशा न मिलने पर व्यक्ति का मन बेचैन हो जाता है। लेकिन इस अवस्था में शरीर पर कोई स्पष्ट शारीरिक लक्षण दिखाई नहीं देते।

5. शारीरिक निर्भरता में व्यक्ति की क्या स्थिति होती है?
उत्तर- शारीरिक निर्भरता में मन के साथ शरीर भी नशे का गुलाम हो जाता है। अगली खुराक न मिलने पर व्यक्ति छटपटाने लगता है और खुराक की मात्रा बढ़ती जाती है।

3
नशे की शुरुआत अक्सर किसी दोस्त या साथी के कहे में आकर होती है। यह एक ‘अनुभव’ ही कई बार आगे चलकर व्यसन में तबदील हो जाता है। अवसाद, तनाव, विफलता, हताशा आदि मन को कमजोर बनाने वाली स्थितियाँ भी आदमी को नशे की ओर धकेल सकती हैं। मन का संतुलन खोजता आदमी एक अंतहीन चक्रव्यूह में फँस जाता है।
कुछ इस गलतफहमी का शिकार हो जाते हैं कि नशा कल्पनाशीलता और सृजनात्मकता बढ़ाता है। जबकि वास्तविकता यह है कि नशा करने से मननक्षमता क्षीण हो जाती है और व्यक्ति अपना स्वास्थ्य भी गँवा सकता है। कुछ विद्यार्थी परीक्षा के दिनों में यह सोचकर भी नशीली दवाएँ लेने लगते हैं कि इससे उनकी मानसिक एकाग्रता बेहतर बन जाएगी, पर होता उलटा है।
व्यक्तित्व की कुछ खामियाँ भी आदमी को नशे में डुबो सकती हैं। जरा-जरा-सी बात पर चिंता, तनाव, अवसाद और मन में हीन भावना का घर कर जाना नशे की तरफ ले जा सकता है। घर में बड़ों को नशा करते देखकर भी कुछ किशोर और युवा गुमराह हो जाते हैं।
हर नशा मन की दुनिया पर गहरा असर डालता है। ज़्यादातर मादक पदार्थ सुख का भ्रांति-भाव पैदा करते हैं। आदमी पर मदहोशी-सी छा जाती है और मन कुछ सोच नहीं पाता। इसके साथ-साथ हर नशे का अपना एक खास रंग होता है। एल. एस. डी. और पी.सी.पी. नाना प्रकार के भ्रमराक्षस ( इल्यूजन) उत्पन्न करते हैं – रंगों में सुर्खी आ जाती है, खुद का अस्तित्व परिवेश में मिटता लगता है और मन अद्भुत कल्पनाओं की उड़ान भरने लगता है। कैनाबिस लेने के बाद मन प्रमत्त हो उठता है, बेवजह हँसो और रुलाई छूटने लगती है और वास्तविकता से नाता टूट जाता है। कोई चीज़ बड़ी दिखती है तो कोई छोटी, सुबह शाम लगती है और शाम सुबह। अपना शरीर ही अपरिचित-सा दिखने लगता है। एंफेटामिन दवाएँ विभ्रम पैदा करती हैं। आदमी दृष्टि-भ्रम और श्रुति-भ्रमों से घिर जाता है। कोकेन के सेवन से कभी यह आभास होता है कि मानो त्वचा के नीचे असंख्य कीड़े रेंगने लगे हैं।

1.लोगों में नशे को लेकर कौन-सी गलतफहमी पाई जाती है?
(क) नशा कल्पनाशीलता और सृजनात्मकता बढ़ाता है
(ख) नशा याददाश्त कम करता है
(ग) नशा स्वास्थ्य को बिगाड़ता है
(घ) नशा हानिकारक होता है
उत्तर– (क) नशा कल्पनाशीलता और सृजनात्मकता बढ़ाता है

2. नशे की शुरुआत प्रायः कैसे होती है?
(क) बीमारी के कारण
(ख) पारिवारिक परंपरा से
(ग) दोस्त या साथी के कहने पर
(घ) आर्थिक लाभ के लिए
उत्तर– (ग) दोस्त या साथी के कहने पर

3. कोकेन के सेवन से व्यक्ति को क्या अनुभव होता है?
(क) अत्यधिक नींद
(ख) शरीर में दर्द
(ग) मानसिक शांति
(घ) त्वचा के नीचे कीड़े रेंगने का आभास
उत्तर- (घ) त्वचा के नीचे कीड़े रेंगने का आभास

4. एक बार का नशे का अनुभव व्यसन में कैसे बदल जाता है?
उत्तर– नशा पहले केवल एक अनुभव के रूप में किया जाता है। धीरे-धीरे वही अनुभव आदत बनकर व्यसन में बदल जाता है।

5. नशा करने से मन और स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर– नशा करने से मनन-क्षमता कमजोर हो जाती है। साथ ही व्यक्ति अपना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी गँवा सकता है।

4
लगभग सभी नशों का लगातार सेवन मनन-क्षमता और स्मरण-शक्ति को कमजोर बना देता है। रोगी पर आलस्य छाया रहता है और वह पोस्ती हो जाता है। किसी कामकाज में मन नहीं लगता, स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। ज़रा-ज़रा-सी बात पर झूठ बोलने की आदत बन जाती है। पहनावे और व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति लापरवाह हो जाता है। शंकालु भाव हावी होने पर मरने-मारने पर उतारू हो जाता है। नशा करने वाले लोगों में आत्महत्या की दर भी अधिक पाई गई है।
नशीले पदार्थों का सेवन शरीर पर भी कई दुष्प्रभाव डालता है। भूख मर जाती हैं, जिससे शरीर दुर्बल हो जाता है और रोगों से लड़ने के काबिल नहीं रहता। यही कारण है कि नशा करने वालों में तपेदिक, एच.आई.वी. और दूसरे संक्रामक रोग अधिक पाए जाते हैं। मतली, क़ै और शरीर के दर्द भी उन्हें सताते हैं। सिगरेट और चिलम के सहारे नशा करनेवालों के फेफड़े रुग्ण हो जाते हैं। यह लोग बिना फिल्टर की सिगरेट पीते हैं और नशे का पूरा रस लेने के लिए उसका धुआँ देर तक भीतर रोके रखते हैं। इससे वातस्फीति (एंफाइसिमा, दम फूलने का एक रोग) और फेफड़े का कैंसर होने की आशंका कई गुणा बढ़ जाती है। पूरे समूह में एक ही टीके से नस में नशीली दवा लेनेवालों में यकृतशोध ( हेपेटाइटिस-बी) और एच.आई.वी. एड्स का खतरा बढ़ जाता है।
मन और तन की ये रुग्णताएँ रोगी के पारिवारिक और सामाजिक जीवन को भी खंडहरों में बदल देती हैं। वह अपनों का प्यार और साथ खो बैठता है और दुनिया में निरपट अकेला हो जाता है। नौकरी छूट जाती है, मित्र और सगे-संबंधी छूट जाते हैं। आर्थिक समस्याएँ दिनोंदिन बढ़ती जाती हैं। इसके बावजूद मन और तन की छटपटाहट अगली खुराक जुटाने के लिए, उससे चोरी, नशीले पदार्थों की बिक्री, तस्करी आदि कुछ भी करवा सकती है जिससे वह फिर और ज्यादा दलदल में फँसता जाता है तथा अपराधी का जीवन जीने के लिए विवश हो जाता है।

1.नशे का लगातार सेवन किस पर सबसे पहले प्रभाव डालता है?
(क) शारीरिक बल पर
(ख) सामाजिक प्रतिष्ठा पर
(ग) मनन-क्षमता और स्मरण-शक्ति पर
(घ) धन-संपत्ति पर
उत्तर– (ग) मनन-क्षमता और स्मरण-शक्ति पर

2. नशा करने वालों में कौन-सी बीमारी अधिक पाई जाती है?
(क) मधुमेह
(ख) तपेदिक और एच.आई.वी.
(ग) हृदय रोग
(घ) मलेरिया
उत्तर– (ख) तपेदिक और एच.आई.वी.

3. नस में एक ही टीके से नशा करने पर किस रोग का खतरा बढ़ जाता है?
(क) कैंसर
(ख) दमा
(ग) पीलिया
(घ) हेपेटाइटिस-बी और एच.आई.वी./एड्स
उत्तर– (घ) हेपेटाइटिस-बी और एच.आई.वी./एड्स

4. नशा करने से व्यक्ति के स्वभाव में क्या परिवर्तन आ जाता है?
उत्तर– नशा करने से व्यक्ति आलसी और चिड़चिड़ा हो जाता है। वह छोटी-छोटी बातों पर झूठ बोलने लगता है और लापरवाह बन जाता है।

5. नशे का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर– नशे से भूख मर जाती है और शरीर दुर्बल हो जाता है। इससे रोगों से लड़ने की क्षमता भी कम हो जाती है।

 

PSEB Class 9 Hindi Lesson 15 एक अंतहीन चक्रव्यूह बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1.‘एक अंतहीन चक्रव्यूह’ निबंध का मुख्य विषय क्या है?
(क) आधुनिक शिक्षा
(ख) पर्यावरण संकट
(ग) नशे की लत और उसके दुष्परिणाम
(घ) बेरोज़गारी
उत्तर- (ग) नशे की लत और उसके दुष्परिणाम

2. लेखक के अनुसार नशे की शुरुआत प्रायः किस कारण होती है?
(क) बीमारी के कारण
(ख) मनोरंजन और प्रयोग के कारण
(ग) गरीबी के कारण
(घ) शिक्षा के कारण
उत्तर– (ख) मनोरंजन और प्रयोग के कारण

3. नशे का व्यक्ति पर पहला प्रभाव किस पर पड़ता है?
(क) धन पर
(ख) समाज पर
(ग) राजनीति पर
(घ) मन पर
उत्तर- (घ) मन पर

4. नशे की मनोवैज्ञानिक निर्भरता किसे कहते हैं?
(क) शरीर में दर्द होना
(ख) नशा न मिलने पर मन का बेचैन होना
(ग) भूख न लगना
(घ) बुखार आना
उत्तर– (ख) नशा न मिलने पर मन का बेचैन होना

5. लेखक के अनुसार नशा व्यक्ति को किस दलदल में फँसा देता है?
(क) शिक्षा
(ख) चक्रव्यूह
(ग) खेल
(घ) यात्रा
उत्तर- (ख) चक्रव्यूह

6. पाषाण युग में किस नशीले पदार्थ का सेवन होता था?
(क) अफीम
(ख) शराब
(ग) तंबाकू
(घ) कोकेन
उत्तर– (क) अफीम

7. नशा करने वालों में आत्महत्या की दर क्यों अधिक पाई जाती है?
(क) शारीरिक शक्ति बढ़ने से
(ख) मानसिक असंतुलन के कारण
(ग) धन की अधिकता से
(घ) सामाजिक सम्मान से
उत्तर– (ख) मानसिक असंतुलन के कारण

8. नशा करने से मनन-क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(क) बढ़ जाती है
(ख) स्थिर रहती है
(ग) समाप्त हो जाती है
(घ) कमजोर हो जाती है
उत्तर– (घ) कमजोर हो जाती है

9. नशे की लत में फँसे व्यक्ति में कौन-सा स्वभाव विकसित हो जाता है?
(क) विनम्रता
(ख) चिड़चिड़ापन
(ग) परिश्रम
(घ) साहस
उत्तर– (ख) चिड़चिड़ापन

10. नशीले पदार्थ शरीर को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
(क) शक्तिशाली बनाते हैं
(ख) रोगों से लड़ने योग्य बनाते हैं
(ग) दुर्बल बना देते हैं
(घ) सुंदर बनाते हैं
उत्तर- (ग) दुर्बल बना देते हैं

11. नशा-मुक्ति उपचार का दूसरा चरण क्या है?
(क) सजा
(ख) यात्रा
(ग) शिक्षा
(घ) मानसिक और सामाजिक पुनर्वास
उत्तर- (घ) मानसिक और सामाजिक पुनर्वास

12. नशा-मुक्ति उपचार का पहला चरण क्या है?
(क) पुनर्वास
(ख) दंड
(ग) चिकित्सीय उपचार
(घ) रोजगार
उत्तर– (ग) चिकित्सीय उपचार

13. नशा-मुक्ति के लिए किसकी सहायता आवश्यक है?
(क) पुलिस
(ख) मनोरोग विशेषज्ञ
(ग) व्यापारी
(घ) नेता
उत्तर- (ख) मनोरोग विशेषज्ञ

14. लेखक के अनुसार नशे से मुक्ति क्यों कठिन है?
(क) दवाइयों की कमी से
(ख) इच्छा-शक्ति के अभाव से
(ग) चक्रव्यूह की तरह फँस जाने से
(घ) शिक्षा की कमी से
उत्तर- (ग) चक्रव्यूह की तरह फँस जाने से

15. नशे की लत व्यक्ति को किस ओर ले जाती है?
(क) सेवा कार्य
(ख) अपराध की ओर
(ग) खेलकूद
(घ) अध्यात्म
उत्तर- (ख) अपराध की ओर

16. नशे की खुराक समय के साथ क्या होती है?
(क) बढ़ती जाती है
(ख) स्थिर रहती है
(ग) घटती जाती है
(घ) समाप्त हो जाती है
उत्तर- (क) बढ़ती जाती है

17. एक ही सुई से नशा लेने से किस रोग का खतरा बढ़ता है?
(क) मधुमेह
(ख) एड्स
(ग) दमा
(घ) गठिया
उत्तर- (ख) एड्स

18. बिना फिल्टर की सिगरेट पीने से कौन-सा खतरा बढ़ता है?
(क) फेफड़ों का कैंसर
(ख) हृदय रोग
(ग) नेत्र रोग
(घ) त्वचा रोग
उत्तर- (क) फेफड़ों का कैंसर

19. निबंध का शीर्षक ‘एक अंतहीन चक्रव्यूह’ क्यों सार्थक है?
(क) क्योंकि यह कहानी है
(ख) क्योंकि नशे से निकलना कठिन है
(ग) क्योंकि यह यात्रा है
(घ) क्योंकि यह इतिहास है
उत्तर– (ख) क्योंकि नशे से निकलना कठिन है

20. नशे की लत किस उम्र के लोगों में पाई जाती है?
(क) केवल वृद्धों में
(ख) केवल युवाओं में
(ग) हर उम्र के लोगों में
(घ) केवल बच्चों में
उत्तर- (ग) हर उम्र के लोगों में

 

PSEB Class 9 Hindi एक अंतहीन चक्रव्यूह प्रश्न और उत्तर (Extra Question Answers)

1.एल.एस.डी. और पी.सी.पी. का मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर– ये नशे अनेक प्रकार के भ्रम उत्पन्न करते हैं। व्यक्ति को रंग, समय और अस्तित्व में असामान्यता महसूस होने लगती है।

2. निबंध ‘एक अंतहीन चक्रव्यूह’ किस विषय पर आधारित है?
उत्तर– यह निबंध नशे की लत, उसके कारणों और घातक परिणामों पर आधारित है। इस निबंध में लेखक ने युवाओं को इससे दूर रहने की चेतावनी दी है।

3. नशा पारिवारिक और सामाजिक जीवन को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर– नशे से व्यक्ति अपनों का प्यार और साथ खो देता है। वह अकेला पड़ जाता है और अपराध की ओर बढ़ने लगता है।

4. मनोवैज्ञानिक निर्भरता क्या है?
उत्तर– जब नशा न मिलने पर व्यक्ति का मन बेचैन हो जाता है, पर शरीर में कोई लक्षण नहीं दिखते, उसे मनोवैज्ञानिक निर्भरता कहते हैं।

5. नशे से कौन-कौन से रोग हो सकते हैं?
उत्तर- नशे से तपेदिक, एच.आई.वी., हेपेटाइटिस और फेफड़ों का कैंसर जैसे रोग हो सकते हैं।

6. नशा सामाजिक जीवन को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर– नशा व्यक्ति को परिवार और समाज से अलग कर देता है और उसका सामाजिक जीवन नष्ट हो जाता है।

7. लेखक युवाओं को क्या संदेश देता है?
उत्तर– लेखक युवाओं को यह संदेश देता है कि वे नशों से पूरी तरह दूर रहें और गलत संगत से बचें। वह समझाता है कि नशा जीवन को अंधकार की ओर ले जाता है, इसलिए सजग रहकर सही मार्ग अपनाना ही सुरक्षित और सुखद भविष्य की कुंजी है।

8. नशे से बचने का सबसे अच्छा उपाय क्या है?
उत्तर– नशे से बचने का सबसे अच्छा उपाय है कि उससे कभी शुरुआत ही न की जाए और सजग जीवन जिया जाए।

9. नशा क्यों ‘अंतहीन चक्रव्यूह’ कहलाता है?
उत्तर– नशा इसलिए ‘अंतहीन चक्रव्यूह’ कहलाता है क्योंकि इसमें फँसने के बाद व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से इसका गुलाम बन जाता है। वह चाहकर भी आसानी से इससे बाहर नहीं निकल पाता और धीरे-धीरे उसका जीवन अंधकारमय होता चला जाता है।

10. नशे की लत अपराध की ओर क्यों ले जाती है?
उत्तर- नशे की लत अपराध की ओर इसलिए ले जाती है क्योंकि व्यक्ति को बार-बार नशे की अगली खुराक की जरूरत पड़ती है। इसके लिए वह चोरी, तस्करी और अन्य अवैध कार्य करने लगता है, जिससे वह धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में फँस जाता है।