PSEB Class 9 Hindi Chapter 14 Mahan Rashtrabhakt: Madan Lal Dhingra (महान राष्ट्रभक्त: मदन लाल ढींगरा) Question Answers (Important) 

 

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PSEB Class 9 Chapter 14 Mahan Rashtrabhakt: Madan Lal Dhingra Textbook Questions

अभ्यास
(क) विषय-बोध
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो पंक्तियों में दीजिए-
(i) मदन लाल ढींगरा का जन्म कब हुआ?
उत्तर- मदन लाल ढींगरा का जन्म 18 सितम्बर 1883 को हुआ था।

(ii) मदन लाल ढींगरा को लाहौर कॉलेज की पढ़ाई क्यों छोड़नी पड़ी?
उत्तर- मदन लाल ढींगरा को अपनी देशभक्ति गतिविधियों के कारण लाहौर कॉलेज की पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

(ii) कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर उन्होंने अपना गुजारा कैसे किया?
उत्तर- कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर उन्होंने कई धंधे किए। उन्होंने कारखाने में मजदूरी की तथा रिक्शा और टांगा चलाकर अपना गुजारा किया।

(iv) वे इंग्लैंड में कौन-सी पढ़ाई करने गए थे?
उत्तर- वे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड में मैकेनिकल इंजीनियरिंग (यांत्रिकी अभियांत्रिकी) की पढ़ाई करने गए थे।

(v) मदन लाल ढींगरा किस क्रांतिकारी संस्था के सदस्य बने?
उत्तर- मदन लाल ढींगरा ‘अभिनव भारत’ नामक क्रांतिकारी संस्था के सदस्य बने।

(vi) कर्जन वायली कौन था?
उत्तर– कर्जन वायली ‘स्टेट ऑफ इंडिया’ का सचिव सलाहकार था।

(vii) मदन लाल को फाँसी की सजा कब दी गयी?
उत्तर- मदन लाल ढींगरा को 17 अगस्त 1909 को फाँसी की सजा दी गई।

(viii) शहीद मदन लाल हींगरा की अस्थियाँ भारतभूमि कब लायी गयीं?
उत्तर- शहीद मदन लाल ढींगरा की अस्थियाँ 13 दिसम्बर 1976 को भारतभूमि लाई गईं।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन या चार पंक्तियों में दीजिए-
(i) मदन लाल ढींगरा ने अंग्रेजों से बदला लेने की क्यों ठानी?
उत्तर- मदन लाल ढींगरा अँग्रेजों के अत्याचारों से बहुत दुखी थे। उस समय कई भारतीय क्रांतिकारियों जैसे खुदीराम बोस और कन्हैया लाल दत्त को अँग्रेजों ने मृत्युदंड दे दिया था। इन निर्दोष देशभक्तों की हत्या से उनके मन में अँग्रेजों के प्रति गहरा आक्रोश पैदा हुआ। वे मानते थे कि अँग्रेजों ने भारत को गुलाम बनाकर हजारों लोगों पर अत्याचार किए हैं। इसी कारण उन्होंने अँग्रेजों से बदला लेने की ठान ली।

(ii) कर्जन वायली को मदन लाल ढींगरा ने क्यों मारा?
उत्तर– कर्जन वायली एक उच्च अँग्रेज अधिकारी था और भारतीयों पर हो रहे अत्याचारों का प्रतीक माना जाता था। मदन लाल ढींगरा का विश्वास था कि ऐसे अँग्रेज अधिकारी भारत को गुलामी में जकड़े हुए हैं और निर्दोष भारतीयों को मौत के घाट उतारते हैं। इसलिए उन्होंने कर्जन वायली को भारतीयों पर हो रहे अन्याय के विरोध में पिस्टल की सात गोलियों से मारा।

(iii) मदन लाल ढींगरा की शहादत पर लाला हरदयाल ने क्या कहा था?
उत्तर– लाला हरदयाल ने कहा था कि मदन लाल ढींगरा की शहादत राजपूतों और सिखों की महान कुर्बानियों की स्मृति है। उनके अनुसार अँग्रेज यह सोचते होंगे कि फाँसी देकर उन्होंने स्वतंत्रता की आवाज़ को दबा दिया है, लेकिन वास्तव में यही शहादत भारत को आज़ाद कराएगी। उन्होंने ढींगरा के बलिदान को अमर बताया।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर छह या सात पंक्तियों में दीजिए-
(i) ‘शहीद मदन लाल ढींगरा एक सच्चे देशभक्त थे।’ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर– शहीद मदन लाल ढींगरा का पूरा जीवन देशभक्ति से भरा हुआ था। वे बचपन से ही भारत की स्वतंत्रता के लिए सोचते थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई और सुख-सुविधाओं को छोड़कर देश सेवा को चुना। लाहौर कॉलेज छोड़ने के बाद उन्होंने मेहनत-मजदूरी करके जीवन बिताया, लेकिन अपने विचार नहीं बदले। इंग्लैंड में रहते हुए भी उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ का नारा फैलाया और राष्ट्रवादी गतिविधियों में भाग लिया। उन्होंने अँग्रेज अधिकारी कर्जन वायली को मारकर अँग्रेज सरकार को चेतावनी दी। गिरफ्तारी के बाद भी वे डरे नहीं और अदालत में गर्व से अपने विचार रखे। फाँसी स्वीकार करते समय भी उनका आत्मबल अडिग रहा। इन सभी बातों से स्पष्ट होता है कि मदन लाल ढींगरा एक सच्चे देशभक्त थे।

(ii) आपको शहीद मदन लाल ढींगरा के जीवन से क्या प्रेरणा मिलती हैं?
उत्तर– उत्तर- शहीद मदन लाल ढींगरा के जीवन से हमें सच्ची देशभक्ति, साहस और दृढ़ आत्मविश्वास की महान प्रेरणा मिलती है। उन्होंने अत्यंत कठिन और जोखिम भरी परिस्थितियों में भी अपने उद्देश्य से कभी समझौता नहीं किया। उनका जीवन यह संदेश देता है कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए त्याग करना सबसे बड़ा कर्त्तव्य है। वे अन्याय और अत्याचार के सामने कभी झुके नहीं और सदा सत्य तथा न्याय के मार्ग पर चलते रहे। उन्होंने अपने सिद्धांतों के लिए प्राणों का बलिदान देने में भी संकोच नहीं किया। उनका बलिदान हमें राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने, ईमानदारी से जीवन जीने और देशहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है।

(ख) भाषा-बोध
1. निम्नलिखित शब्दों को शुद्ध करके लिखें-

अशुद्ध शुद्ध अशुद्ध शद्ध
शरेय ___________ मृत्यूदंड ___________
देशभगती ___________ मातरिभूमि ___________
गौर्वान्वित ___________ अस्थीयाँ ___________
सथापना ___________ कालज ___________
आज़ादी ___________ अध्यन ___________
लवारिस ___________ क्राँतीकारी ___________
आतमविश्वास ___________ हजार ___________
यांतरिकी ___________ स्मरिति ___________
परशिक्शण ___________ प्राप्त ___________

उत्तर-

अशुद्ध शुद्ध अशुद्ध शद्ध
शरेय श्रेय  मृत्यूदंड मृत्युदंड 
देशभगती देशभक्ति  मातरिभूमि मातृभूमि 
गौर्वान्वित गौरवान्वित  अस्थीयाँ अस्थियाँ 
सथापना स्थापना कालज कॉलेज 
आजादी  आज़ादी अध्यन अध्ययन 
लवारिस लावारिस  क्राँतीकारी क्राँतिकारी 
आतमविश्वास आत्मविश्वास  हजार हज़ार 
यांतरिकी यांत्रिकी  स्मरिति स्मृति 
परशिक्शण प्रशिक्षण  प्रापत  प्राप्त 

2. निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ समझकर उनका वाक्यों में प्रयोग करें-

मुहावरा अर्थ वाक्य
तर्क के तराजू में तौलना  सोच-समझकर फैसला लेना _____________________
रंग में रंगा जाना प्रभाव पड़ना _____________________
मौत के घाट उतारना मार डालना _____________________
ढेर करना मार गिराना, मार कर गिरा देना _____________________
आवाज को दबाना चुप कराना, डराना _____________________

उत्तर-

मुहावरा अर्थ वाक्य
तर्क के तराजू में तौलना  सोच-समझकर फैसला लेना मदन लाल हर बात को तर्क के तराजू में तोल कर देखते थे।
रंग में रंगा जाना प्रभाव पड़ना मदन लाल खुद शुरू से ही देशभक्ति के रंग में रंगे गए थे। 
मौत के घाट उतारना मार डालना अँग्रेजों ने भारतीयों को केवल गुलाम ही नहीं बनाया बल्कि बिना किसी कारण के मौत के घाट भी उतारा
ढेर करना मार गिराना, मार कर गिरा देना मदन लाल ढींगरा ने पिस्टल निकाली और कर्जन वायली को सात गोलियों से वहीं ढेर कर दिया
आवाज को दबाना चुप कराना, डराना अँग्रेजों ने जनता की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया।

(ग) रचनात्मक अभिव्यक्ति

1. यदि आप मदन लाल ढींगरा के स्थान पर होते तो क्या परिवार वालों के विरोध के बावजूद स्वतंत्रता की लड़ाई में कूद पड़ते?
उत्तर– यदि मैं मदन लाल ढींगरा के स्थान पर होता, तो परिवार के विरोध के बावजूद देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में अवश्य कूद पड़ता। यद्यपि परिवार का प्रेम और उनकी चिंता अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती, फिर भी देश की गुलामी का दर्द उससे बड़ा होता। जब मातृभूमि पर अन्याय और अत्याचार हो रहा हो, तब चुप रहना कर्तव्यहीनता है। मदन लाल ढींगरा की तरह मैं भी यह मानता कि देश पहले है और व्यक्तिगत सुख-सुविधाएँ बाद में। इसलिए राष्ट्रहित में संघर्ष करना मेरा नैतिक दायित्व होता।

2. भारत की स्वतंत्रता की चिंगारी को आग में बदलने का काम मदन लाल ढींगरा की शहादत को जाता है। कैसे?
उत्तर- मदन लाल ढींगरा की शहादत ने भारतीय युवाओं में नई चेतना और क्रांतिकारी भावना का संचार किया। कर्जन वायली जैसे अँग्रेज अधिकारी को दंड देकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि अत्याचारी शासन अजेय नहीं है। उनकी निर्भीकता और बलिदान ने लोगों के मन से भय को दूर किया और स्वतंत्रता आंदोलन को तेज़ किया। उनकी शहादत ने देशवासियों को संगठित होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी, जिससे स्वतंत्रता की छोटी-सी चिंगारी एक प्रचंड आग में बदल गई।

 

 

PSEB Class 9 Hindi Lesson 14 महान राष्ट्रभक्त: मदन लाल ढींगरा सार-आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)

निम्नलिखित गद्याँशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
1.
भारतीय स्वतंत्रता की चिंगारी को अग्नि में बदलने का श्रेय महान शहीद मदन लाल ढींगरा को जाता है। मदन लाल ढींगरा का जन्म 18 सितम्बर 1883 में पंजाब में एक सम्पन्न परिवार में हुआ। उनके पिता साहिब गुरदित्ता मल गुरदासपुर में सिविल सर्जन थे। सेवामुक्त होकर वे अमृतसर में रहने लगे।
मदन लाल शुरू से ही स्वतंत्रता प्रेमी थे। हर बात को वह तर्क के तराजू में तोल कर देखते थे। बचपन की कई ऐसी घटनाएँ मदन लाल ढींगरा के आत्मविश्वास को अभिव्यक्त करती हैं। भले ही मदन के परिवार में राष्ट्रभक्ति की कोई ऐसी परम्परा नहीं थी परन्तु वह खुद शुरू से ही देशभक्ति के रंग में रंगे गए थे। लाहौर कॉलेज में पढ़ते हुए उन्हें देशभक्ति के कारण कॉलेज छोड़ना पड़ा। कॉलेज छोड़कर उन्होंने कई धंधे किए, जिनमें कारखाने की मज़दूरी तथा अपना गुजारा करने के लिए रिक्शा और टांगा तक चलाना भी शामिल है। घर में केवल उनके बड़े भैया ही उनकी बात को सुनते व समझते थे। बड़े भैया के कारण ही वे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए सन् 1906 में इंग्लैंड चले गए। वहाँ उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन में यांत्रिकी अभियांत्रिकी (मकैनिकल इंजीनियरिंग) में दाखिला ले लिया। यह मदन लाल ढींगरा के जीवन का नया मोड़ था। भाई की सहायता के बिना यह सब संभव न था । विदेश में रहकर अध्ययन करने में उनके बड़े भाई ने तो उनकी मदद की ही परंतु इसके साथ-साथ इंग्लैंड में रह रहे कुछ राष्ट्रवादी कार्यकर्त्ताओं ने भी उनकी आर्थिक सहायता की।

1.भारतीय स्वतंत्रता की चिंगारी को अग्नि में बदलने का श्रेय किसे दिया जाता है?
(क) भगत सिंह
(ख) चन्द्रशेखर आज़ाद
(ग) मदन लाल ढींगरा
(घ) लाला लाजपत राय
उत्तर- (ग) मदन लाल ढींगरा

2. मदन लाल ढींगरा का जन्म कब हुआ था?
(क) 15 अगस्त 1885
(ख) 18 सितम्बर 1883
(ग) 20 जुलाई 1882
(घ) 26 जनवरी 1884
उत्तर– (ख) 18 सितम्बर 1883

3. इंग्लैंड में मदन लाल ढींगरा ने किस विषय में शिक्षा प्राप्त की?
(क) कानून
(ख) चिकित्सा
(ग) साहित्य
(घ) यांत्रिकी अभियांत्रिकी
उत्तर– (घ) यांत्रिकी अभियांत्रिकी

4. लाहौर कॉलेज छोड़ने के बाद मदन लाल ढींगरा ने क्या किया?
उत्तर- लाहौर कॉलेज में पढ़ते समय देशभक्ति के कारण मदन लाल ढींगरा को कॉलेज छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अपने जीवन-यापन के लिए कई छोटे-बड़े काम किए। उन्होंने कारखाने में मज़दूरी की और अपनी आजीविका के लिए रिक्शा तथा टांगा भी चलाया। इन कठिन परिस्थितियों में भी उनका आत्मविश्वास और देशप्रेम बना रहा।

5. मदन लाल ढींगरा के जीवन में उनके बड़े भाई की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- मदन लाल ढींगरा के जीवन में उनके बड़े भाई का महत्त्वपूर्ण योगदान था। परिवार में केवल बड़े भाई ही उनकी भावनाओं को समझते थे। उन्हीं की सहायता से मदन लाल 1906 में उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए। इंग्लैंड में पढ़ाई के दौरान बड़े भाई ने आर्थिक सहायता की, जिससे मदन लाल यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन में यांत्रिकी अभियांत्रिकी की पढ़ाई कर सके।

2.
लंदन में मदन लाल ढींगरा भारत के प्रखर राष्ट्रवादी नेता विनायक दामोदर सावरकर तथा श्याम जी कृष्ण वर्मा के संपर्क में आए। इन्होंने उनके संपर्क में आने पर जहाँ अपने को गौरवान्वित महसूस किया वहीं सावरकर तथा श्याम जी कृष्ण वर्मा भी मदन लाल ढींगरा की देशभक्ति से प्रभावित हुए। कहा जाता है कि सावरकर ने ही मदन लाल को ‘अभिनव भारत’ नामक क्रांतिकारी संस्था का सदस्य बनाया और उन्हें हथियार चलाने का प्रशिक्षण भी दिया। लंदन में श्याम जी कृष्ण वर्मा के संरक्षण में भारतीय छात्रों में राष्ट्रवादी विचारों के प्रचार के लिए ‘इंडिया हाउस’ की स्थापना गयी। मदन लाल ‘इडिया हाउस’ में ही रहते थे। उन दिनों खुदीराम बोस, कन्हैया लाल दत्त, सतिन्दर पाल और काशी राम जैसे क्रांतिकारियों को अंग्रेज़ों ने मृत्युदंड दे दिया। इन घटनाओं ने मदन लाल ढींगरा और सावरकर जैसे देशभक्तों के मन में अंग्रेजों के प्रति नफ़रत और बदले की भावना को जन्म दिया।
1 जुलाई, 1909 को ‘भारतीय राष्ट्रीय संस्था’ के सदस्य (इनमें अंग्रेज भी सदस्य थे) वार्षिक दिवस मनाने के लिए एकत्र हुए। इसी समारोह में कर्जन वायली भी परिवार समेत आया। वह उस समय ‘स्टेट ऑफ इंडिया’ का सचिव सलाहकार था। मदन लाल ढींगरा ऐसे अधिकारियों से नफरत करते थे। मदन लाल ढींगरा का मानना था कि ऐसे नीच अधिकारियों ने हजारों भारतीयों को केवल गुलाम ही नहीं बनाया बल्कि बिना किसी कारण के मौत के घाट उतारा है। 22 वर्ष के नौजवान ने अपनी जेब से पिस्टल निकाला और कर्जन वायली को सात गोलियों से वहीं ढेर कर दिया। मदन लाल ढींगरा सच्चे देशभक्त थे। वे भागे नहीं बल्कि बड़े आराम से अपना चश्मा ठीक करते हुए उन्होंने भरी सभा में अपने देशभक्त होने का साक्ष्य दिया।

1.लंदन में मदन लाल ढींगरा किन राष्ट्रवादी नेताओं के संपर्क में आए?
(क) लाला लाजपत राय और गोपाल कृष्ण गोखले
(ख) विनायक दामोदर सावरकर और श्याम जी कृष्ण वर्मा
(ग) महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू
(घ) बाल गंगाधर तिलक और मदन मोहन मालवीय
उत्तर– (ख) विनायक दामोदर सावरकर और श्याम जी कृष्ण वर्मा

2. मदन लाल ढींगरा को किस क्रांतिकारी संस्था का सदस्य बनाया गया था?
(क) गदर पार्टी
(ख) आज़ाद हिंद फौज
(ग) अभिनव भारत
(घ) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
उत्तर– (ग) अभिनव भारत

3. मदन लाल ढींगरा ने कर्जन वायली को कब गोली मारी?
(क) 1 जुलाई 1909
(ख) 22 जून 1908
(ग) 15 अगस्त 1907
(घ) 26 जनवरी 1910
उत्तर– (क) 1 जुलाई 1909

4. किन घटनाओं से मदन लाल ढींगरा के मन में अँग्रेजों के प्रति नफ़रत की भावना उत्पन्न हुई?
उत्तर- उस समय अँग्रेज सरकार ने खुदीराम बोस, कन्हैया लाल दत्त, सतिन्दर पाल और काशी राम जैसे अनेक क्रांतिकारियों को मृत्युदंड दे दिया था। इन क्रूर घटनाओं ने मदन लाल ढींगरा और सावरकर जैसे देशभक्तों के मन में अँग्रेजों के प्रति गहरी नफ़रत और बदले की भावना को जन्म दिया।

5. कर्जन वायली की हत्या के बाद मदन लाल ढींगरा का आचरण क्या दर्शाता है?
उत्तर- कर्जन वायली को गोली मारने के बाद मदन लाल ढींगरा भागे नहीं। उन्होंने बड़े शांत भाव से अपना चश्मा ठीक किया और भरी सभा में अपने देशभक्त होने का प्रमाण दिया। उनका यह साहसी और निडर व्यवहार दर्शाता है कि वे सच्चे देशभक्त थे। उन्हें अपने कृत्य पर गर्व था और वे अपने देश के लिए बलिदान देने को सदैव तैयार थे।

3.
1909 में अंग्रेज़ों के लिए यह पहली साहसपूर्ण चेतावनी थी कि भारतीय अपना देश आजाद करवाना चाहते हैं तथा आज़ादी के लिए हर कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं। मदन लाल ढींगरा ने बंग-भंग आंदोलन के समय भी लंदन की गलियों को ‘वंदे मातरम्’ से गुंजाया था। वे अपनी कमीज़ के ऊपर ‘वंदे मातरम्’ लिखकर लंदन के बाजारों में घूमा करते थे। अपनी हर पुस्तक के ऊपर मदन लाल ढींगरा न लिखकर ‘वंदे मातरम्’ लिखा करते थे। मदन लाल ढींगरा उच्च आदशों के स्वामी थे। वे भारतीय संस्कृति के मूल्यों का अनुपालन करना भी खूब जानते थे।
कर्जन वायली की हत्या के आरोप में उन पर 22 जुलाई, 1909 को अभियोग चलाया गया। मदन लाल ढींगरा ने अदालत में बड़े खुले शब्दों में कहा कि ‘मुझे गर्व है कि मैं अपना जीवन भारत माँ को समर्पित कर रहा हूँ। आप याद रखना कि भारत के सुनहरे दिन आने वाले हैं। बहुत जल्दी ही भारत माँ स्वतंत्र होगी।’ उन्होंने कहा कि ‘दुनिया के हर नागरिक को अपनी मातृभूमि स्वतंत्र कराने का अधिकार है। अंग्रेजों को कोई हक नहीं कि वे बिना किसी कारण भारतीयों को गुलाम बनाकर रखें।’
17 अगस्त, 1909 को मदन लाल ढींगरा को पेंटोबिले की जेल, लंदन में फाँसी की सजा दी गई थी। यह वही जेल थी जहाँ शहीद ऊधमसिंह को भी फाँसी दी गयी थी। आयरिश लोगों ने मदन लाल ढींगरा की हिम्मत को सराहा क्योंकि वे खुद इंग्लैंड में रहकर अपनी आज़ादी के लिए जूझ रहे थे। मिस्टर वी. एस. बलंट, जो उस समय इंग्लैंड के मेंबर पालमेंट थे, ने अपने संस्मरणों में लिखा है कि ‘मैंने किसी ईसाई को भी इतने आत्मसम्मान और आत्मबल के साथ न्यायपालिका का सामना करते हुए नहीं देखा।’

1.’अनुपालन’ शब्द में कौन-सा उपसर्ग है?
(क) पालन
(ख) अनु
(ग) अनुपा
(घ) पाल
उत्तर– (ख) अनु

2. मदन लाल ढींगरा लंदन की गलियों में किस नारे को लिखकर और बोलकर घूमते थे?
(क) इंकलाब ज़िंदाबाद
(ख) भारत माता की जय
(ग) स्वराज हमारा अधिकार है
(घ) वंदे मातरम्
उत्तर- (घ) वंदे मातरम्

3. मदन लाल ढींगरा को फाँसी की सज़ा कब दी गई?
(क) 22 जुलाई 1909
(ख) 1 जुलाई 1909
(ग) 17 अगस्त 1909
(घ) 15 अगस्त 1910
उत्तर– (ग) 17 अगस्त 1909

4. अदालत में मदन लाल ढींगरा ने अपने विचार कैसे व्यक्त किए?
उत्तर- उन्होंने गर्व से कहा कि वे अपना जीवन भारत माँ को समर्पित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के सुनहरे दिन आने वाले हैं और देश शीघ्र ही स्वतंत्र होगा।

5. मदन लाल ढींगरा की शहादत पर विदेशी लोगों की क्या प्रतिक्रिया थी?
उत्तर– मदन लाल ढींगरा की हिम्मत और आत्मबल को विदेशी लोगों ने भी सराहा। आयरिश लोग, जो स्वयं अंग्रेज़ों के विरुद्ध स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे थे, उनकी वीरता से प्रभावित हुए। इंग्लैंड के सांसद मिस्टर वी. एस. बलंट ने लिखा कि उन्होंने किसी ईसाई को भी इतने आत्मसम्मान और साहस के साथ न्यायपालिका का सामना करते हुए नहीं देखा।

4.
ढींगरा की महान् शहादत को याद करते हुए लाला हरदयाल ने कहा कि ‘ढींगरा की शहीदी उन राजपूतों और सिक्खों की कुर्बानियों का स्मृति पुंज है जिसके कारण शहादत अमर बन जाती है। अंग्रेज सोचते होंगे कि उन्होंने मदन लाल ढींगरा को फाँसी देकर सदा 1 के लिए स्वतंत्रता की आवाज को दबा दिया है परंतु वास्तविकता यह है कि यही आवाज़ भारत को स्वतंत्र बनाएगी।’ श्रीमती ऐनी बेसेंट ने मदन लाल की शहीदी पर कहा था कि “हमें देश की स्वतंत्रता के लिए अनेक मदन लालों की जरूरत है।” मदन लाल की शहीदी से प्रभावित हो कर वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने उनकी स्मृति में ‘मदन तलवार’ नामक पत्रिका निकाली। बाद में यह पत्रिका क्रांतिकारियों की विचारधारा की संवाहक बनी। 16 अगस्त, 1909 के ‘डेली न्यूज’ समाचारपत्र में मदन लाल ढींगरा का जोशभरा वक्तव्य छपा जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘एक हिन्दू होने के नाते मैं अनुभव करता हूँ कि गुलामी राष्ट्र देवता का अपमान है। राष्ट्र पूजा ही राम और कृष्ण की पूजा है। मैं तब तक बार-बार जन्म लेना चाहूँगा जब तक भारत माँ स्वतंत्र न हो जाए।’
ब्रिटिश सरकार ने मदन लाल ढींगरा की देह को लावारिस करार देकर दफना दिया। वीर सावरकर जी ने ढींगरा की देह को प्राप्त करने के लिए अनथक प्रयत्न किए, परन्तु वे सफल नहीं हुए, क्योंकि सरकार का कहना था कि वे उनके संबंधी नहीं हैं। कई वर्षों बाद जब 13 दिसम्बर, 1976 को महान शहीद ऊधम सिंह की अस्थियाँ भारत लाई गईं, उसी समय मदन लाल ढींगरा की अस्थियों को भी मातृभूमि का स्नेह प्राप्त हुआ।

1.मदन लाल ढींगरा की शहादत को किसने राजपूतों और सिखों की कुर्बानियों का स्मृति-पुंज बताया?
(क) ऐनी बेसेंट
(ख) वीर सावरकर
(ग) लाला हरदयाल
(घ) वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय
उत्तर– (ग) लाला हरदयाल

2. मदन लाल ढींगरा की स्मृति में ‘मदन तलवार’ पत्रिका किसने निकाली?
(क) लाला हरदयाल
(ख) ऐनी बेसेंट
(ग) वीर सावरकर
(घ) वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय
उत्तर– (घ) वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय

3. मदन लाल ढींगरा की अस्थियाँ भारत कब लाई गईं?
(क) 13 दिसम्बर 1976
(ख) 17 अगस्त 1909
(ग) 15 अगस्त 1947
(घ) 26 जनवरी 1950
उत्तर– (क) 13 दिसम्बर 1976

4. लाला हरदयाल ने मदन लाल ढींगरा की शहादत के बारे में क्या कहा?
उत्तर- लाला हरदयाल ने मदन लाल ढींगरा की शहादत को राजपूतों और सिखों की ऐतिहासिक कुर्बानियों का स्मृति-पुंज बताया। उन्होंने कहा कि अँग्रेज यह सोचते होंगे कि ढींगरा को फाँसी देकर उन्होंने स्वतंत्रता की आवाज को हमेशा के लिए दबा दिया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि यही शहादत भारत को स्वतंत्र बनाएगी। उनके अनुसार ढींगरा की कुर्बानी अमर है।

5. मदन लाल ढींगरा की देह और अस्थियों के साथ ब्रिटिश सरकार का व्यवहार कैसा था?
उत्तर- ब्रिटिश सरकार ने मदन लाल ढींगरा की देह को लावारिस घोषित कर दफना दिया। वीर सावरकर ने उनकी देह प्राप्त करने के लिए अनेक प्रयास किए, पर सरकार ने यह कहकर इंकार कर दिया कि वे उनके संबंधी नहीं हैं। कई वर्षों बाद, 13 दिसम्बर 1976 को, शहीद ऊधम सिंह की अस्थियों के साथ मदन लाल ढींगरा की अस्थियाँ भी भारत लाई गईं और मातृभूमि का स्नेह प्राप्त हुआ।

 

 

PSEB Class 9 Hindi Lesson 14 महान राष्ट्रभक्त: मदन लाल ढींगरा बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1.‘महान देशभक्त: मदन लाल ढींगरा’ निबंध का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(क) अंग्रेजी शासन की प्रशंसा
(ख) भारतीय संस्कृति का वर्णन
(ग) मदन लाल ढींगरा की देशभक्ति का परिचय
(घ) यूरोप की राजनीति का अध्ययन
उत्तर- (ग) मदन लाल ढींगरा की देशभक्ति का परिचय

2. मदन लाल ढींगरा के पिता का नाम क्या था?
(क) साहिब दयाल
(ख) साहिब गुरदित्ता मल
(ग) लाला हरदयाल
(घ) गोपाल दास
उत्तर- (ख) साहिब गुरदित्ता मल

3. मदन लाल ढींगरा की अस्थियाँ किस शहीद के साथ लाई गईं?
(क) भगत सिंह
(ख) करतार सिंह सराभा
(ग) ऊधम सिंह
(घ) चन्द्रशेखर आज़ाद
उत्तर- (ग) ऊधम सिंह

4. मदन लाल ढींगरा को फाँसी कहाँ दी गई?
(क) अंडमान
(ख) पेंटोबिले जेल
(ग) यरवदा जेल
(घ) आगरा जेल
उत्तर– (ख) पेंटोबिले जेल

5. ढींगरा किस नारे को जीवन में अपनाते थे?
(क) इंकलाब ज़िंदाबाद
(ख) भारत माता की जय
(ग) वंदे मातरम्
(घ) जय जवान, जय किसान
उत्तर- (ग) वंदे मातरम्

6. घटना के बाद मदन लाल ढींगरा ने क्या किया?
(क) भाग गए
(ख) आत्मसमर्पण किया
(ग) रोने लगे
(घ) चश्मा ठीक किया
उत्तर– (घ) चश्मा ठीक किया

7. कर्जन वायली को कितनी गोलियाँ मारी गईं?
(क) तीन
(ख) पाँच
(ग) सात
(घ) नौ
उत्तर– (ग) सात

8. ‘प्रशिक्षण’ शब्द में कौन-सा उपसर्ग प्रयुक्त हुआ है?
(क) क्षण
(ख) प्रशि
(ग) शिक्षण
(घ) प्र
उत्तर– (घ) प्र

9. कर्जन वायली की हत्या कब हुई?
(क) 22 जुलाई 1909
(ख) 1 जुलाई 1909
(ग) 17 अगस्त 1909
(घ) 16 अगस्त 1909
उत्तर- (ख) 1 जुलाई 1909

10. कर्जन वायली कौन था?
(क) स्टेट ऑफ इंडिया का सचिव सलाहकार
(ख) गवर्नर
(ग) वायसराय
(घ) सेना अधिकारी
उत्तर– (क) स्टेट ऑफ इंडिया का सचिव सलाहकार

11. किन क्रांतिकारियों को अँग्रेजों ने फाँसी दी थी?
(क) सतिन्दर पाल
(ख) खुदीराम बोस आदि
(ग) कन्हैया लाल दत्त
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर– (घ) उपर्युक्त सभी

12. ‘इंडिया हाउस’ की स्थापना किसने की?
(क) श्याम जी कृष्ण वर्मा
(ख) सावरकर
(ग) मदन लाल ढींगरा
(घ) ऐनी बेसेंट
उत्तर– (क) श्याम जी कृष्ण वर्मा

13. ‘अभिनव भारत’ संस्था से किसने ढींगरा को जोड़ा?
(क) श्याम जी कृष्ण वर्मा
(ख) ऐनी बेसेंट
(ग) सावरकर
(घ) लाला हरदयाल
उत्तर- (ग) सावरकर

14. इंग्लैंड में मदन लाल ढींगरा किन नेताओं के संपर्क में आए?
(क) गांधी और नेहरू
(ख) सावरकर और श्याम जी कृष्ण वर्मा
(ग) तिलक और गोखले
(घ) बोस और सुभाष
उत्तर– (ख) सावरकर और श्याम जी कृष्ण वर्मा

15. ‘आर्थिक’ शब्द में कौन-सा प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है?
(क) इक
(ख) क
(ग) आर्थि
(घ) र्थिक
उत्तर- (क) इक

16. लंदन में मदन लाल ढींगरा किस कॉलेज में पढ़े?
(क) ऑक्सफोर्ड
(ख) कैम्ब्रिज
(ग) यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन
(घ) किंग्स कॉलेज
उत्तर- (ग) यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन

17. मदन लाल ढींगरा इंग्लैंड कब गए?
(क) 1906
(ख) 1905
(ग) 1907
(घ) 1908
उत्तर– (क) 1906

18. परिवार में कौन मदन लाल का समर्थन करता था?
(क) माता
(ख) पिता
(ग) छोटा भाई
(घ) बड़े भाई
उत्तर- (घ) बड़े भाई

19. उन्हें लाहौर कॉलेज क्यों छोड़ना पड़ा?
(क) आर्थिक कारणों से
(ख) बीमारी के कारण
(ग) देशभक्ति के कारण
(घ) परीक्षा में असफल होने से
उत्तर– (ग) देशभक्ति के कारण

20. ‘शहीदी’ शब्द में कौन-सा प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है?
(क) हीदी
(ख) शही
(ग) दी
(घ) ई
उत्तर– (घ) ई

 

PSEB Class 9 Hindi महान राष्ट्रभक्त: मदन लाल ढींगरा प्रश्न और उत्तर (Extra Question Answers)

1. मदन लाल ढींगरा का पारिवारिक परिचय दीजिए।
उत्तर- मदन लाल ढींगरा का जन्म 18 सितम्बर 1883 को पंजाब के एक सम्पन्न परिवार में हुआ। उनके पिता साहिब गुरदित्ता मल गुरदासपुर में सिविल सर्जन थे। सेवामुक्त होने के बाद वे अमृतसर में रहने लगे। परिवार में देशभक्ति की कोई विशेष परम्परा नहीं थी, फिर भी मदन लाल ढींगरा बचपन से ही देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत थे।

2. सावरकर और श्याम जी कृष्ण वर्मा का मदन लाल ढींगरा के जीवन में क्या योगदान था?
उत्तर- लंदन में मदन लाल ढींगरा विनायक दामोदर सावरकर और श्याम जी कृष्ण वर्मा के संपर्क में आए। दोनों ही नेता उनकी गहरी देशभक्ति से प्रभावित हुए। सावरकर ने उन्हें ‘अभिनव भारत’ नामक क्रांतिकारी संस्था का सदस्य बनाया और हथियार चलाने का प्रशिक्षण भी दिया। श्याम जी कृष्ण वर्मा के संरक्षण में स्थापित ‘इंडिया हाउस’ में रहकर मदन लाल ढींगरा ने राष्ट्रवादी विचारों को और अधिक मजबूती दी।

3. मदन लाल ढींगरा का स्वभाव कैसा था?
उत्तर– मदन लाल ढींगरा अत्यंत तर्कशील, आत्मविश्वासी और निडर व्यक्ति थे। वे हर बात को तर्क के तराजू में तौलते थे। बचपन की घटनाएँ उनके दृढ़ निश्चय को प्रकट करती हैं। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया और अपने देशभक्ति के मार्ग पर अडिग रहे।

4. मदन लाल ढींगरा ‘वंदे मातरम्’ के माध्यम से अपना देशप्रेम कैसे प्रकट करते थे?
उत्तर– मदन लाल ढींगरा ‘वंदे मातरम्’ को अपना जीवन-मंत्र मानते थे। वे बंग-भंग आंदोलन के समय लंदन की गलियों में ‘वंदे मातरम्’ का नारा लगाते थे। वे अपनी कमीज़ पर भी ‘वंदे मातरम्’ लिखकर बाजारों में घूमते थे। इतना ही नहीं, वे अपनी पुस्तकों पर अपना नाम न लिखकर ‘वंदे मातरम्’ लिखा करते थे, जिससे उनका गहरा देशप्रेम प्रकट होता है।

5. इंग्लैंड जाने में मदन लाल के बड़े भाई की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर– मदन लाल ढींगरा के बड़े भाई ही परिवार में उनके विचारों को समझते थे। उन्हीं की सहायता से मदन लाल 1906 में उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए। बड़े भाई ने आर्थिक सहयोग देकर उन्हें यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन में यांत्रिकी अभियांत्रिकी की पढ़ाई करने में सक्षम बनाया।

6. मदन लाल ढींगरा की शहादत का अन्य नेताओं और क्रांतिकारियों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर– मदन लाल ढींगरा की शहादत से अनेक राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी गहराई से प्रभावित हुए। ऐनी बेसेंट ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए अनेक मदन लाल ढींगराओं की आवश्यकता है। वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने उनकी स्मृति में ‘मदन तलवार’ पत्रिका निकाली, जो आगे चलकर क्रांतिकारी विचारधारा की संवाहक बनी।

7. लंदन में मदन लाल ढींगरा के जीवन का नया मोड़ क्या था?
उत्तर– लंदन पहुँचकर मदन लाल ढींगरा का जीवन नया मोड़ लेता है। वहाँ उन्होंने सावरकर और श्याम जी कृष्ण वर्मा जैसे राष्ट्रवादी नेताओं का सान्निध्य प्राप्त किया। ‘इंडिया हाउस’ में रहकर वे क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े रहे।

8. कर्जन वायली की हत्या का क्या कारण था?
उत्तर– मदन लाल ढींगरा अँग्रेज अधिकारियों को अत्याचारी मानते थे। उनका विश्वास था कि ऐसे अधिकारी ने हजारों भारतीयों को बिना कारण मौत के घाट उतार दिया। इसी सोच के कारण उन्होंने 1 जुलाई 1909 को कर्जन वायली को गोली मारकर अँग्रेजी शासन को साहसपूर्ण चुनौती दी।

9. हत्या करने के बाद ढींगरा का व्यवहार कैसा था?
उत्तर– कर्जन वायली की हत्या के बाद मदन लाल ढींगरा भागे नहीं। उन्होंने शांत भाव से अपना चश्मा ठीक किया और अपने कृत्य की जिम्मेदारी ली।

10. अदालत में ढींगरा के विचार क्या थे?
उत्तर- अदालत में मदन लाल ढींगरा ने निडर होकर कहा कि उन्हें गर्व है कि वे अपना जीवन भारत माँ को समर्पित कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत शीघ्र ही स्वतंत्र होगा और हर नागरिक को अपनी मातृभूमि को आज़ाद कराने का अधिकार है।