NCERT Class 7 Hindi Chapter 13 Ek Tinka Summary, Explanation with Video and Question Answers from Vasant Bhag 2 Book

 
Ek Tinka Summary NCERT Solution for Class 7 Hindi Vasant Bhag 2 book Chapter 13 Ek Tinka Summary and detailed explanation of lesson “Ek Tinka” along with meanings of difficult words. Given here is the complete explanation of the lesson, along with all the exercises, Questions and Answers are given at the back of the lesson. Take Free Online MCQs Test for Class 7.
 
इस लेख में हम हिंदी कक्षा 7 ” वसंत भाग – 2 ” के पाठ – 13 ” एक तिनकापाठ के पाठप्रवेश , पाठसार , पाठव्याख्या , कठिनशब्दों के अर्थ और NCERT की पुस्तक के अनुसार प्रश्नों के उत्तर , इन सभी के बारे में चर्चा करेंगे


 

कक्षा – 7 पाठ 13 “एक तिनका

 

एक तिनका पाठ प्रवेशएक तिनका पाठ की व्याख्या
एक तिनका पाठ सारएक तिनका प्रश्न–अभ्यास

 

कवि परिचय

कवि – ‘हरिऔध’ जी

 

 

एक तिनका पाठ प्रवेश

हम सब जानते हैं कि जीवन एक अस्थाई ठिकाना है लेकिन फिर भी पता नहीं व्यक्ति किस बात का घमंड करता है। सबकी चाहत है की सारा ज़माना उनके क़दमों में हो पर सब यह भूल जाते हैं कि एक न एक दिन तुम्हारे शरीर को मिट्टी में दब जाना या जल जाना है। घमंड से आदमी का नुकसान होता है। अहंकार से आदमी अपने आप को खो देता है और जीवन भर अकेला रहता है क्योंकि घमंडी आदमी से कोई भी बात करना पसंद नहीं करता। किसी भी परिस्तिथि में इन्सान को घमंड नहीं करना चाहिए। इस दुनिया में जो आया है वो एक न एक दिन जाएगा। कहा भी गया है ” अपनी उम्र और पैसों पर कभी घमंड मत करना क्योंकि जो चीजें गिनी जा सके वो यकीनन खत्म हो जाती है। “

कहने का अभिप्राय यह है कि तुम्हें जन्म दुसरे ने दिया , नाम दुसरे ने दिया , शिक्षा दुसरे ने दी , रिश्ता भी दुसरे से जुड़ा , काम करना भी दुसरे ने सिखाया , अंत में शमशान भी दुसरे ले जायेंगे। तुम्हारा इस संसार में है क्या जिसका तुम घमंड करते हो। प्रस्तुत कविता ” एक तिनका ” में भी कवि हमें यही सीख देना चाहता है कि आपको जो कुछ मिला है उसका घमंड मत करो , घमंड और ईर्ष्या करने वाले लोगों को कभी मन की शांति नहीं मिलती।
 

 

 

एक तिनका पाठ सार

एक तिनका कविता में कवि ‘हरिऔध जी ने हमें कभी भी अहंकार ना करने की सलाह देते हुए कहते है कि एक दिन जब वे अभिमान से तथा अकड़ से भरे हुए अपने घर के छत के निचले हिस्से पर खड़े होकर घमंड से चुर होकर सोच रहे थे कि उनके जीवन में कोई दुख नहीं है। तभी एकदम से हवा से उड़कर एक तिनका उड़ता हुआ आया और उनकी आँख मे पड़ जाता है और उनका अपने जीवन में किसी दुःख के न होने का घमंड चूर – चूर हो गया।  आँख में तिनका चले जाने के कारण वे अपने घमंड पर लज्जित हो गए और चिन्तित हो कर तिलमीला उठते है, उन्हें बड़ी तकलीफ होती है।  तिनके के आँख  में जाने के कारण उनकी आँख लाल हो गई थी और उसमें दर्द होने लग गया था। उनकी तकलीफ को देखकर लोग उनकी मदद करने पहुँच जाते है। कपड़े की मूँठ से जैसे-तैसे तिनका उनकी आँख से निकला जा सका। तिनके के निकलने के साथ ही कवि के मन से घमंड भी निकल जाता है और उन्हें यह एहसास होता है कि मनुष्य को जीवन में कभी अहंकार नहीं करना चाहिए । कवि कहते हैं कि आँख में तिनका चले जाने से उन्हें बड़ी ही बेचैनी हुई। उनकी आँख लाल हो गई और दुखने लगी। इसके बाद उन्हें मन में एक ख़याल आया कि उन्हें घमंड नहीं करना चाहिए था, उनका घमंड तो एक मामूली तिनके ने ही तोड़ दिया। इन पंक्तियों के ज़रिए कवि हमें भी घमंड से दूर रहने का संदेश दे रहे हैं। चाहे इंसान कितना भी बड़ा हो जाए, उसका घमंड चकनाचूर हो ही जाता है। एक तिनका कविता में कवि हरिऔध जी ने हमें घमंड ना करने की प्रेरणा दी है।
 

 

 

एक तिनका पाठ व्याख्या

 

मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ ,

एक दिन जब था मुंडेर पर खड़ा।

आ अचानक दूर से उड़ता हुआ ,

एक तिनका आँख में मेरी पड़ा ।

 

शब्दार्थ –

घमंड – अभिमान , अकड़बाज़ , डींग मारने वाला

ऐंठ – अकड़ , गर्व , हठ

मुंडेर – छज्जा ( छत का निचला हिस्सा )

अचानक – एकदम से  

तिनका – सुखे घास का छोटा सा हिस्सा

 

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में कवि कहते हैं कि एक दिन जब वे अभिमान से तथा अकड़ से भरे हुए अपने घर के छत के निचले हिस्से पर खड़े होकर घमंड से चुर होकर सोच रहे थे कि उनके जीवन में कोई दुख नहीं है। तभी एकदम से हवा से उड़कर एक तिनका उड़ता हुआ आया और उनकी आँख मे पड़ जाता है और उनका अपने जीवन में किसी दुःख के न होने का घमंड चूर – चूर हो गया। 

 

भावार्थ – जीवन में कभी किसी भी चीज पर घमंड नहीं करना चाहिए क्योंकि जीवन में आने वाली विभिन्न परिस्थितियों में छोटी से छोटी वस्तु या तुच्छ से तुच्छ व्यक्ति भी आपको हानि या दुःख पहुँचा सकता है।

 

मैं झिझक उठा , हुआ बेचैन – सा ,

लाल होकर आँख भी दुखने लगी।

मूँठ देने लोग कपड़े की लगे ,

ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी।

 

शब्दार्थ –

झिझक – संकोच , किसी कार्य में लज्जा या भय आदि के कारण होने वाला संकोच , हिचक

बेचैन – चिन्तित , व्याकुल , उत्सुक , बेसब्र , उतावला , अधीर

मूँठ – किसी वस्तु को मट्ठी भर का आकार देना

ऐंठ – घमंड  

दबे पाँव आना / जाना (मुहावरा ) –  बिना आहट किए आना / जाना

 

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में कवि कहते हैं कि आँख में तिनका चले जाने के कारण वे अपने घमंड पर लज्जित हो गए और चिन्तित हो उठे। तिनके के आँख  में जाने के कारण उनकी आँख लाल हो गई थी और उसमें दर्द होने लग गया था। लोग कपड़े को मट्ठी भर का आकार दे कर उनकी आँख से तिनका निकालने की कोशिश करने लगे। इस दौरान उनका अहंकार और घमंड उनके मन से बिना कोई आवाज़ किए कहीं दूर भाग गए।

भावार्थ – जीवन में घमंड ही आपके दुःख का सबसे बड़ा कारण होता है और घमंड के चले जाने पर ही आपको मन की शांति प्राप्त हो सकती है अन्यथा नहीं।

 

जब किसी ढब से निकल तिनका गया ,

तब ‘ समझ ’ ने यों मुझे ताने दिए ।

ऐंठता तू किसलिए इतना रहा ,

एक तिनका है बहुत तेरे लिए ।

 

शब्दार्थ –

ढब –  ढंग , तरीका , कोई कार्य करने की विशेष प्रक्रिया , युक्ति , उपाय

यों – इस तरह

ताने – व्यंग्यपूर्ण वाक्य , बुरा भला कहना , निन्दा करना

 

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में कवि कहते हैं कि लोंगो ने जैसे – तैसे उपाय करके कवि की आँखों से तिनका निकाला। इस सारे वाक्य के बाद कवि के मन ने कवि  पर व्यंग्य कस्ते हुए कवि से कहा कि कवि किस बात का घमंड कर रहा था जबकि एक छोटे से तिनके ने ही उसको इतना दुःख दे दिया अर्थात कवि के मन में यह ख़याल आया कि उन्हें घमंड नहीं करना चाहिए था, उनका घमंड तो एक मामूली तिनके ने ही चूर कर दिया।

भावार्थ – व्यक्ति कितना भी ताकतवर हो जाए , कितना भी धनी हो जाए , उसे घमंड नहीं करना चाहिए। जिंदगी में कभी भी अपने किसी हुनर पर घमंड नहीं करना चाहिए क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वजन से डूब जाता है।
 

 

 

Ek Tinka Question Answer (एक तिनका प्रश्न अभ्यास)

 

प्रश्न 1 – नीचे दी गई कविता की पंक्तियों को सामान्य वाक्य में बदलिए।

जैसे – एक तिनका आँख में मेरी पड़ा – मेरी आँख में एक तिनका पड़ा।

मूँठ देने लोग कपड़े की लगे – लोग कपड़े की मूँठ देने लगे।

(क) एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ा – ………

उत्तर – (क) एक दिन जब मुंडेरे पर खड़ा था।

 

(ख) लाल होकर भी दुखने लगी – ………..

उत्तर – (ख) आँख लाल होकर दुखने लगी।

 

(ग) ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भागी – ………

उत्तर – (ग) बेचारी ऐंठ दबे पाँवों भगी।

 

(घ) जब किसी दब से निकल तिनका गया। – ………

उत्तर – (घ) किसी ने ढब से तिनका निकाला।

 

प्रश्न 2 – ‘एक तिनका कविता में किस घटना की चर्चा की गई है , जिससे घमंड नहीं करने का संदेश मिलता है ?

उत्तर – इस कविता में उस घटना की चर्चा की गई है जब कवि अपने घर के छज्जे पर अपनी जिंदगी में दुःख के न होने पर घमंड से खड़ा था और अचानक हवाओं के कारण कहीं से उसकी आँख में एक तिनका गिर गया। उस तिनके से वह काफ़ी बेचैन हो उठता है और उसका सारा घमंड चूर हो जाता है। किसी तरह लोग कपड़े की सहायता से उनकी आँखों में पड़ा तिनका निकालते हैं तो कवि सोच में पड़ जाता है कि आखिर उसे किस बात का घमंड था, जो एक तिनके ने उनके घमंड को जमीन पर लाकर खड़ा कर दिया। उसकी बुद्धि ने भी उसे ताने दिए कि तू ऐसे ही घमंड करता था तेरे घमंड को चूर करने के लिए तो एक छोटा सा तिनका ही बहुत है। इस सारी घटना से यह संदेश मिलता है कि व्यक्ति को स्वयं पर घमंड नहीं करना चाहिए। एक तुच्छ व्यक्ति या वस्तु भी हमारी परेशानी का कारण बन सकती है। हर वस्तु का अपना महत्त्व होता है।

 

प्रश्न 3 – आँख में तिनका पड़ने के बाद घमंडी की क्या दशा हुई ?

उत्तर – आँख में तिनका पड़ने के बाद घमंडी की आँख लाल होकर दुखने लगी। वह बहुत बेचैन और परेशान हो गया और उसका सारा घमंड एक क्षण में ही समाप्त हो गया।

 

प्रश्न 4 – घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए उसके आसपास लोगों ने क्या किया ?

उत्तर – घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए उसके आसपास के लोगों ने कपड़े की मुँठ बनाकर उसकी सहायता से आँख में पड़ा तिनका निकाल दिया।

 

प्रश्न 5 – ‘एक तिनका कविता में घमंडी को उसकी ‘समझ ने चेतावनी दी

ऐंठता तू किसलिए इतना रहा ,

एक तिनका है बहुत तेरे लिए।

इसी प्रकार की चेतावनी कबीर ने भी दी है

तिनका कब हूँ न निदिए पाँव तले जो होय।।

कबहूँ उड़ि आँखिन परै, पीर घनेरी होय॥

  • इन दोनों में क्या समानता है और क्या अंतर ? लिखिए।

उत्तर – (क) उपर्युक्त काव्यांश में जब कवि का घमंड एक मामूली से तिनके ने चूर कर दिया तब कवि की बुद्धि ने उसे तना दिया था कि उसको किस बात का घमंड था क्योंकि उसका घमंड तो एक छोटे से तिनके के सामने भी नहीं टिक पाया। कहने का तात्पर्य यह है कि उपर्युक्त काव्यांश के माध्यम से कवि ने यह संदेश दिया है कि अहंकार नहीं करना चाहिए। क्योंकि एक छोटा – सा तिनका भी अगर आँख में पड़ जाए तो मनुष्य को बेचैन कर देता है।

 

(ख) कबीर जी द्वारा दी गई चेतावनी में भी यही समझाया गया है कि हमें किसी को छोटा या तुच्छ समझ कर किसी का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए क्योंकि जिस तरह एक छोटा सा तिनका आपकी आँखों में आकर आपको अत्यधिक पीड़ा का अनुभव करा सकता है उसी तरह कोई भी वस्तु या व्यक्ति आपको पीड़ा पहुँचा सकते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि हर वस्तु या व्यक्ति का अपना महत्त्व होता है किसी को कम समझ कर अपने घमंड में किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।

 

इन दोनों काव्यांशों की पंक्तियों में अंतर –

दोनों काव्यांशों में अंतर यह है कि हरिऔध जी द्वारा लिखी पंक्तियों में हर प्रकार के अहंकार से दूर रहने की चेतावनी दी गई है , क्योंकि एक तिनका भी हमारे अहंकार को चूर कर सकता है और कबीर जी ने छोटी से छोटी वस्तु का  महत्त्व समझाने का प्रयास किया है। दोनों में घमंड से बचने की शिक्षा दी गई है। प्रत्येक तुच्छ समझी जाने वाली वस्तु का अपना महत्त्व होता है।