भोर और बरखा पाठ के पाठ सार, पाठव्याख्या, कठिन शब्दों के अर्थ और NCERT की पुस्तक के अनुसार प्रश्नों के उत्तर

 
Bhore or Barkha Summary NCERT Class 7 Hindi Vasant Bhag 2 book Chapter 16 Bhore or Barkha Summary and detailed explanation of lesson “Bhore or Barkha” along with meanings of difficult words. Given here is the complete explanation of the lesson, along with all the exercises, Questions and Answers are given at the back of the lesson. Take Free Online MCQs Test for Class 7.


 

इस लेख में हम हिंदी कक्षा 7 ” वसंत भाग – 2 ” के पाठ – 16 ” भोर और बरखा ” पाठ के पाठ – प्रवेश , पाठ – सार , पाठ – व्याख्या , कठिन – शब्दों के अर्थ और NCERT की पुस्तक के अनुसार प्रश्नों के उत्तर , इन सभी के बारे में चर्चा करेंगे – 

 

“भोर और बरखा”

 

भोर और बरखा पाठ  प्रवेशभोर और बरख  की व्याख्या
भोर  और बरखा पाठ  सारभोर और बरखा प्रश्न–अभ्यास

 

कवियत्री परिचय –

कवियत्री – मीरा बाई

 

 

भोर और बरखा पाठ प्रवेश

इस पाठ में कवियत्री मीरा बाई के दो पद दिये गए हैं। मीरा बाई श्रीकृष्ण की महान भक्त और एक अद्वितीय कवियत्री के रूप में जानी जाती हैं। इनकी प्रमुख रचनाएं नरसी का मायरा , राग सोरठा के पद , राग गोविंद आदि हैं। मीरा के पद एक ग्रन्थ में भी संकलित हैं। प्रस्तुत पाठ में भी मीरा के दो पद दिए गए हैं , पहले पद में मीराबाई ने यशोदा माँ द्वारा श्रीकृष्ण को जगाने के किस्से का वर्णन किया है। मीरा के इस पद में माता यशोदा कान्हा को तरह-तरह के प्रलोभन देकर उठाने का प्रयास कर रही हैं। दूसरे पद में मीरा ने सावन के महीने का मनमोहक चित्रण किया है। साथ ही , इन दोनों पदों में मीरा बाई ने श्री कृष्ण के प्रति अपने प्रेम का वर्णन भी किया है।
 

 

 

भोर और बरखा पाठ सार (Summary)

प्रस्तुत पाठ ‘ भोर और बरखा ‘ की कवियत्री ‘ मीरा बाई ‘ हैं। कवियत्री ‘ मीरा बाई ‘ अपनी कृष्ण भक्ति के लिए जानी जाती हैं। इस पाठ में भी उनके दो पद दिए दे हैं , जिसमें से पहले पद में कवियत्री मीरा बाई ने यशोदा माँ द्वारा कान्हा जी को सुबह जगाने के दृश्य का अत्यधिक मनोरम दृश्य प्रस्तुत किया है। कवियत्री मीरा बाई वर्णन करती हैं कि यशोदा माता कान्हा जी को सुबह उठाते हुए कहती हैं कि बाँसुरी धारण करने वाले मेरे प्यारे पुत्र अर्थात कान्हा अब जाग जाओ। रात अब बीत गयी है और सुबह हो चुकी है। सभी लोगों ने अपने – अपने घरों के दरवाजे खोल दिए हैं। सभी गोपियाँ दही को मथकर मक्खन निकाल रही हैं और दही मथते हुए उनके कंगनों में खनखनाहट हो रही है।  यशोदा माता कान्हा जी से कहती हैं कि हमारे दरवाज़े पर देवता और सभी मनुष्य तुम्हारे दर्शन करने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं। तुम्हारे सभी ग्वाल – मित्र तुम्हारे साथ खेलने के किए शोर मचा रहे हैं और सभी तुम्हारी जय – जयकार कर रहे हैं। वो सब हाथ में मक्खन और रोटी लिए , गौ रक्षक अर्थात तुम्हारा गाय चराने जाने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं। कवयित्री मीरा बाई अपने कृष्ण प्रेम को दर्शाते हुए कहती हैं कि उनके प्रभु ने जिस तरह सभी नगरवासियों की रक्षा के लिए पर्वत को धारण किया था उसी तरह जो कोई भी उनकी शरण में जाता है वे सभी का उद्धार करते हैं। अपने दूसरे पद में कवयित्री मीरा बाई सावन का बड़ा ही मनमोहक चित्रण कर रही हैं। इस पद में उन्होंने बताया है कि सावन के महीने में बादलों से बरसात हो रही है , जो अत्यंत मनमोहक लग रही है। सावन की यह बरसात मन को अत्यधिक प्रिय लगने वाली होती हैं अर्थात बरसात मन को शांति प्रदान करने वाली होती हैं। कवयित्री मीरा बाई का मन सावन मास में अत्यधिक उत्साहित होता है क्योंकि बरसात के आगमन से उन्हें उनके प्रभु के आने का आभास होता है। उमड़ – घुमड़ कर बादल आसमान में चारों दिशाओं से आ जाते हैं और आसमान में बिजली भी बहुत तेज कड़कती है जैसे वह बारिश की झड़ी लगाने वाली हों। आसमान से बरसात की नन्ही – नन्ही बूँदें गिरती हैं और साथ – ही – साथ ठंडी हवाऐं चलने से यह मौसम और भी ज्यादा दिलकश हो जाता है। कवयित्री मीरा बाई फिर से अपने आप को श्री कृष्ण की प्रशंसा करने से नहीं रोक पाती और कहती हैं कि प्रभु अपने भक्तों को अलौकिक ख़ुशी का अनुभव व् उनके कल्याण के लिए उनके समक्ष सावन के रूप में आ जाते हैं।
 

 

 

भोर और बरखा पाठ व्याख्या Explanation

1

जागो बंसीवारे ललना !

जागो मोरे प्यारे !

रजनी बीती , भोर भयो है , घर – घर खुले किंवारे।

गोपी दही मथत , सुनियत हैं कंगना के झनकारे ।।

उठो लालजी ! भोर भयो है , सुर – नर ठाढ़े द्वारे।

ग्वाल – बाल सब करत कुलाहल , जय – जय सबद उचारै ।।

माखन – रोटी हाथ मँह लीनी , गउवन के रखवारे।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर , सरण आयाँ को तारै ।।

शब्दार्थ – Meaning of Difficult words

बंसीवारे – बाँसुरी वाले , श्री कृष्ण , कान्हा

ललना – लाल , पुत्र

रजनी – रात , निशा , रात्रि

बीतना – ख़त्म होना , बीत जाना

भोर – सुबह , सूर्योदय के पूर्व की स्थिति , प्रातःकाल , तड़के

किंवारे – दरवाजे

गोपी – गोपियाँ , सखियाँ

मथत – मथना , दूध या दही को मथानी आदि से बिलोना , छानना 

सुनियत – सुनाई देते हैं

कंगना – कंगन

झनकारे – झंकार , झनझन , खनखनाहट

लालजी – दुलारे , प्यारे

सुर – देव , देवता

ठाढ़े – खड़े होना

द्वारे – दरवाजे पर

ग्वाल – बाल – ग्वालों के बच्चे

करत – कर रहे हैं

कुलाहल – शोर , धूम , कुहराम

सबद – सभी

उचारै – उच्चारण करना , शब्द को मुख से बोलना

लीनी – लिए हुए

गउवन – गाय , गौ

रखवारे – रक्षक , रक्षा करने वाले

गिरधर – वह जो पहाड़ को धारण करे , पहाड़ उठाने वाले

नागर – नगरवासी , नागरिक

सरण – गमन , धीरे – धीरे आगे बढ़ना या चलना , रेंगना , खिसकना , सरकना

आयाँ – आने वाले

तारै – तरण करना , उद्धार करना , कल्याण करना

व्याख्या – इस पद में कवियत्री मीरा बाई वर्णन करती हैं कि यशोदा माता कान्हा जी को सुबह उठाते हुए कहती हैं कि बाँसुरी धारण करने वाले मेरे प्यारे पुत्र अर्थात कान्हा अब जाग जाओ। रात अब बीत गयी है और सुबह हो चुकी है। सभी लोगों ने अपने – अपने घरों के दरवाजे खोल दिए हैं। सभी गोपियाँ दही को मथकर मक्खन निकाल रही हैं और दही मथते हुए उनके कंगनों में खनखनाहट हो रही है। यशोदा माता बड़े प्यार से कान्हा जी को उठाते हुए कहती हैं कि मेरे दुलारे अब उठ जाओ। सुबह हो गई है और हमारे दरवाज़े पर देवता और सभी मनुष्य तुम्हारे दर्शन करने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं। तुम्हारे सभी ग्वाल – मित्र तुम्हारे साथ खेलने के किए शोर मचा रहे हैं और सभी तुम्हारी जय – जयकार कर रहे हैं। वो सब हाथ में मक्खन और रोटी लिए , गौ रक्षक अर्थात तुम्हारा गाय चराने जाने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं। कवियत्री मीरा बाई कहती हैं कि उनके प्रभु ने जिस तरह सभी नगरवासियों की रक्षा के लिए पर्वत को धारण किया था उसी तरह जो कोई भी उनकी शरण में जाता है वे सभी का उद्धार करते हैं।

भावार्थ – कवियत्री मीरा बाई के इस पद में उन्होंने यशोदा माँ द्वारा कान्हा जी को सुबह जगाने के दृश्य का अत्यधिक मनोरम दृश्य प्रस्तुत किया है। गाँव में सुबह जहाँ एक और गोपियाँ अपने कामों में व्यस्त हो गई हैं वहीँ दूसरी और देवता और मनुष्य सभी श्री कृष्ण के उठने और उनके दर्शन के इन्तजार में उनके दरवाजे पर खड़े हैं। कवियत्री मीरा बाई ने इस पद के द्वारा श्री कृष्ण को सभी का उद्धार करने वाला बताया है।

 

2

बरसे बदरिया सावन की।

सावन की , मन – भावन की ।।

सावन में उमग्यो मेरो मनवा , भनक सुनी हरि आवन की।

उमड़ – घुमड़ चहुँदिस से आया , दामिन दमकै झर लावन की ।।

नन्हीं – नन्हीं बूँदन मेहा बरसे , शीतल पवन सुहावन की।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर ! आनंद – मंगल गावन की ।।

शब्दार्थ –

बरसे – बरसना

बदरिया – बादल का टुकड़ा, घटा

सावन – वर्ष का एक महीना जो आषाढ़ के बाद और भाद्रपद के पहले आता है , श्रावण मास

मन – भावन – मन को भाने वाला , मन को प्रिय या भला लगने वाला , प्रियदर्शी , आत्मीय

उमग्यो – उत्साहित होना

मेरो – मेरा

मनवा – मन

भनक – मंद और अस्पष्ट ध्वनि , आभास , उड़ती हुई ख़बर

हरि – विष्णु , ईश्वर , भगवान

आवन – आना

उमड़ – घुमड़ – गरजना , जल्दबाज़ी

चहुँदिस – चारों दिशाओं

दामिन – बिजली , विजेता

दमकै – चमकना

शीतल – ठंडी

पवन – हवा

सुहावन – दिलकश , उत्तम , सुंदर , हसीन , खूबसूरत

आनंद – सुख , हर्ष , प्रसन्नता , अलौकिक ख़ुशी का अनुभव

मंगल – कल्याण , भलाई

व्याख्या – अपने दूसरे पद में कवियत्री मीरा बाई सावन का बड़ा ही मनमोहक चित्रण कर रही हैं। इस पद में उन्होंने बताया है कि सावन के महीने में बादलों से बरसात हो रही है , जो अत्यंत मनमोहक लग रही है। सावन की यह बरसात मन को अत्यधिक प्रिय लगने वाली होती हैं अर्थात बरसात मन को शांति प्रदान करने वाली होती हैं। कवयित्री मीरा बाई का मन सावन मास में अत्यधिक उत्साहित होता है क्योंकि बरसात के आगमन से उन्हें उनके प्रभु के आने का आभास होता है। उमड़ – घुमड़ कर बादल आसमान में चारों दिशाओं से आ जाते हैं और आसमान में बिजली भी बहुत तेज कड़कती है जैसे वह बारिश की झड़ी लगाने वाली हों। आसमान से बरसात की नन्ही – नन्ही बूँदें गिरती हैं और साथ – ही – साथ ठंडी हवाऐं चलने से यह मौसम और भी ज्यादा दिलकश हो जाता है। कवियत्री मीरा बाई कहती हैं कि उनके प्रभु ने जिस तरह सभी नगरवासियों की रक्षा के लिए पर्वत को धारण किया था उसी तरह आभास होता है कि प्रभु अपने भक्तों को अलौकिक ख़ुशी का अनुभव व् उनके कल्याण के लिए उनके समक्ष सावन के रूप में आ गए हैं।

भावार्थ – इस पद में कवियत्री मीरा बाई बरसात का बड़ा ही मनमोहक चित्रण कर रही हैं। पद में उन्होंने बताया है कि सावन के महीने में होने वाली बरसात मन को शांत करने वाली होती है। बरसात के आगमन से उन्हें उनके प्रभु के आने का आभास होता है। उमड़-घुमड़ कर बादल आसमान में चारों तरफ फैल जाते हैं, आसमान में बिजली भी कड़कती है। बरसात कवियत्री मीरा बाई को ऐसा महसूस करवाती हैं , मानो श्रीकृष्ण ख़ुद चलकर उनके कल्याण के लिए उनके समक्ष सावन के रूप में आ गए हैं।
 

 

 

Bhore or Barkah Question Answer (भोर और बरखा प्रश्न अभ्यास)

प्रश्न 1 – ‘ बंसीवारे ललना ’ ‘ मोरे प्यारे लाल जी ’ कहते हुए , यशोदा किसे जगाने का प्रयास करती हैं और कौन – कौन – सी बातें कहती हैं ?

उत्तर – ‘ बंसीवारे ललना ’ ‘ मोरे प्यारे ’ व ‘ लाल जी ’ कहते हुए , यशोदा श्रीकृष्ण को जगाने का प्रयास कर रही हैं। वह उनसे कहती हैं कि बाँसुरी धारण करने वाले मेरे प्यारे पुत्र अर्थात कान्हा अब जाग जाओ। रात अब बीत गयी है और सुबह हो चुकी है। सभी लोगों ने अपने – अपने घरों के दरवाजे खोल दिए हैं। सभी गोपियाँ दही को मथकर मक्खन निकाल रही हैं और दही मथते हुए उनके कंगनों में खनखनाहट हो रही है। यशोदा माता बड़े प्यार से कान्हा जी को उठाते हुए कहती हैं कि मेरे दुलारे अब उठ जाओ। सुबह हो गई है और हमारे दरवाज़े पर देवता और सभी मनुष्य तुम्हारे दर्शन करने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं। तुम्हारे सभी ग्वाल – मित्र तुम्हारे साथ खेलने के किए शोर मचा रहे हैं और सभी तुम्हारी जय – जयकार कर रहे हैं। वो सब हाथ में मक्खन और रोटी लिए , गौ रक्षक अर्थात तुम्हारा गाय चराने जाने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं।

 

प्रश्न 2 – नीचे दी गई पंक्ति का आशय अपने शब्दों में लिखिए – ‘ माखन – रोटी हाथ मँह लिनी , गउवन के रखवारे। ’

उत्तर – तुम्हारे सभी ग्वाल – मित्र तुम्हारे साथ खेलने के किए शोर मचा रहे हैं और सभी तुम्हारी जय – जयकार कर रहे हैं। वो सब हाथ में मक्खन और रोटी लिए , गौ रक्षक अर्थात तुम्हारा गाय चराने जाने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं। हे कृष्ण उठो और जाओ।

 

प्रश्न 3 – पढ़े हुए पद के आधार पर ब्रज की भोर का वर्णन कीजिए।

उत्तर – ब्रज में भोर होते ही सभी लोगों ने अपने – अपने घरों के दरवाजे खोल दिए हैं। सभी गोपियाँ दही को मथकर मक्खन निकाल रही हैं और दही मथते हुए उनके कंगनों में खनखनाहट हो रही है। घर – घर में मंगलाचार होता है , ग्वाल – बाल गौओं को चराने के लिए वन में जाने की तैयारी करते हैं।

 

प्रश्न 4 – मीरा को सावन मनभावन क्यों लगने लगा ?

उत्तर – सावन के महीने में बादलों से बरसात हो रही है , जो मीरा को अत्यंत मनमोहक लग रही है। सावन की यह बरसात मन को अत्यधिक प्रिय लगने वाली होती हैं अर्थात बरसात मन को शांति प्रदान करने वाली होती हैं। कवयित्री मीरा बाई का मन सावन मास में अत्यधिक उत्साहित होता है क्योंकि बरसात के आगमन से उन्हें उनके प्रभु के आने का आभास होता है।

 

प्रश्न 5 – पाठ के आधार पर सावन की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर – सावन के आते ही उमड़ – घुमड़ कर बादल आसमान में चारों दिशाओं से आ जाते हैं और आसमान में बिजली भी बहुत तेज कड़कती है जैसे वह बारिश की झड़ी लगाने वाली हों। आसमान से बरसात की नन्ही – नन्ही बूँदें गिरती हैं और साथ – ही – साथ ठंडी हवाऐं चलने से यह मौसम और भी ज्यादा दिलकश हो जाता है।