Papa Kho Gaye Class 7 Hindi Chapter 7 Summary, Explanation, and Question Answers



 

NCERT Class 7 Hindi Vasant Bhag 2 Chapter 7 Papa Kho Gaye Summary, Explanation with Video, and Question Answers 

Papa Kho Gaye NCERT Class 7 Hindi Vasant Bhag 2 book Chapter 7 Papa Kho Gaye Summary and Detailed Explanation of lesson along with meanings of difficult words. Given here is the complete explanation of the lesson, along with a summary and all the exercises, Questions Answers given at the back of the lesson. Take Free Online MCQs Test for Class 7.


 


 

इस लेख में हम हिंदी कक्षा 7 ” वसंत भाग – 2 ” के पाठ – 7 ” पापा खो गए ” पाठ के पाठ – प्रवेश , पाठ – सार, पाठ – व्याख्या , कठिन – शब्दों के अर्थ और NCERT की पुस्तक के अनुसार प्रश्नों के उत्तर , इन सभी के बारे में चर्चा करेंगे –

 

कक्षा – 7 पाठ 7 “पापा खो गए”

 

पापा खो गए पाठ प्रवेशपापा खो गए पाठ की व्याख्या
पापा खो गए पाठ सारपापा खो गए प्रश्न-अभ्यास

 

 

लेखक परिचय

लेखक – विजय तेंदुलकर
 

 

पाठ प्रवेश ( पापा खो गए )

यह एकांकी लेखक श्री विजय तेंदुलकर जी द्वारा लिखा गया है जिसमें निर्जीव वस्तुओं की पीड़ा का सजीव चित्रण किया गया है और पाठ के द्वारा बच्चों के अपहरण के बढ़ते वारदातों को दिखाया है| रात के समय सड़क पर एक बिजली का खंभा, एक पेड़, एक लैटरबॉक्स और दीवार पर नाचने की मुद्रा में खड़ी लड़की का पोस्टर है। इस एकांकी के जरिए लेखक ने इंसानों के अंदर की इंसानियत को जगाने की कोशिश की है। इस एकांकी में लेखक ने दिखाया है कि किस तरह एक आदमी के अंदर का शैतान कभी – कभी उस पर इतना हावी हो जाता है कि उसे ये पता होते हुए भी कि वह बुरा काम कर रहा है , वह उस बुरे काम को करना ही पसंद करता है। इस एकांकी के जरिए लेखक ने निर्जीव चीजों के द्वारा इंसानों की कई कमियों को बहुत ही अद्भुत तरीके से उजागर करने का प्रयास किया है। जैसे – इंसानों के घमंड को लेखक ने बिजली के खम्भे के शुरवाती व्यवहार से दर्शाया है।

पेड़ , खम्भे और कौए के लड़की के घबरा जाने पर भी उससे बात न करना इंसानों के स्वार्थी स्वभाव की और इशारा करता है। अंत में लेखक एकांकी के जरिए दर्शकों को सीख देना चाहता है कि सभी को एक दूसरे की मदद करने के लिए हमेशा प्रयास करना चाहिए। जैसे पेड़ , खम्भे , लैटरबक्स और कौए ने अपने स्वभाव के विरुद्ध जा कर भी उस छोटी लड़की को उसके घर पहुँचाने का पूरा प्रयास किया।
 

 

 

पाठ सार (पापा खो गए )

यह एकांकी लेखक श्री विजय तेंदुलकर जी द्वारा लिखा गया है , जिसमें निर्जीव वस्तुओं की पीड़ा का सजीव चित्रण किया गया है और पाठ के द्वारा बच्चों के अपहरण के बढ़ते वारदातों को दिखाया है। प्रस्तुत पाठ के प्रारम्भ में ही एकांकी के सभी पात्रों के बारे में बताया गया है कि एकांकी में कौन – कौन से पात्र हैं – इस एकांकी में एक बिजली का खंभा है , एक नाचने वाली है , एक पेड़ है , एक छोटी लड़की है , एक लैटरबक्स है , एक आदमी है और एक कौआ है। एकांकी की शुरुआत बिजली के खम्बे से होती है , खंभा और पेड़ बातें करते हुए दिन और रात , सर्दी और बरसात की बातें करते हैं। बिजली के खम्बे को बरसात का मौसम बिलकुल पसंद नहीं है। पेड़ भी खम्बे का साथ देते हुए कहता है कि उस पर भी एक रात को आसमान से गड़गड़ाती बिजली आकर पड़ी थी। उस बात को याद करते हुए पेड़ उस बिजली को आफत का नाम देता है। बिजली का खंभा अपनी तारीफ़ करता हुआ कहता है कि उसकी तबीयत ही लोहे की है जो वह आज तक कभी बीमार नहीं पड़ा , वरना कोई भी इस तरह की बारिश में , ठंडी में या धूप में खड़ा रहे , तो जरूर बीमार पड़ जाएगा। खम्बे की बात सुन कर पेड़ कहता है कि माना की अपने पत्तों का कोट पहनकर उसे सरदी , बारिश या धूप में उतनी तकलीफ नहीं होती , जितनी किसी और को होती होगी , परन्तु खम्बे को कहता है कि वह उस से बहुत पहले से उस जगह पर इसी तरह से खड़ा है। उसी जगह पर उसका जन्म हुआ है। पेड़ कहता है कि उस समय वह अकेला था  जिस कारण उसे बहुत अकेलापन महसूस होता था। पेड़ बिजली के खम्बे से कहता है कि जब उसे यहाँ लाकर खड़ा किया गया तो पेड़ ने सोचा था कि चलो कोई साथी तो मिला , उसके लिए इतना ही काफी था। लेकिन जैसा पेड़ ने सोचा वैसा कुछ नहीं हुआ। खम्बा शुरू – शुरू में पेड़ से बात करने को ही तैयार नहीं था।  जब खम्बे ने पेड़ से कोई बात नहीं की तो पेड़ ने भी निश्चय कर लिया कि वह नहीं अब खम्बे से कभी बात नहीं करेगा। पेड़ की बात सुन कर खंभा कहता है कि एक दिन आँधी – पानी के कारण वह बिलकुल पेड़ के ऊपर ही आ पड़ा था। पेड़ ने खम्बे को अपने ऊपर का ऊपर झेल लिया था ,  इस बात को खम्बा अच्छा कहता है। क्योंकि खम्बे के पेड़ पर गिर जाने के कारण पेड़ चाहे  खुद काफ़ी जख्मी हो गया था किन्तु उसने खम्बे को निचे नहीं गिरने दिया। इसी घटना के बाद खम्बे का घमंड भी ख़त्म हो गया था और खम्बे और पेड़ की दोस्ती हो गई थी। वही पास में लैटरबक्स किसी दोहे का एक चरण गुनगुनाता है और रुक जाता है। जब लैटरबक्स गुनगुना रहा था तो उसके गुनगुनाने की आवाज को सुन कर कौआ पेड़ के पीछे से झाँककर काँव – काँव की आवाज करते हुए कहता है कि कौन है जो रात के वक्त इतनी मीठी आवाजें लगाकर उसकी नींद खराब कर रहा है ? लैटरबक्स अपने पेट में हाथ डालकर एक पत्र को निकालता है। और धीरे से उस पत्र को जीभ को लगाकर खोलता है। उसमें से कागज को निकालकर रोशनी में पढ़ने लगता है। खंभा लैटरबक्स को टोकते हुए कहता है कि क्यों , लाल ताऊ , आज किस – किस के पत्र चोरी – चोरी पढ़ रहे हो ? खम्बे की बात सुन कर लैटरबक्स आश्चर्य से खम्बे को देखता है और कहता है कि चोरी – चोरी ? चोरी किसलिए ? लैटरबक्स के अनुसार सारी चिट्ठियाँ उसी के अंदर होती है तो चोरी की तो बात ही नहीं होती। लैटरबक्स को किसी दूसरे की चिट्ठी को पढ़ना गलत नहीं लगता क्योंकि उसके अनुसार वह दूसरों की चिट्ठियाँ पढता जरूर है लेकिन किसी की भी निजी बातों को किसी दूसरों को नहीं बताता है। तभी पेड़ को किसी के आने की आहट सुनाई पड़ी और उसने खम्बे और लैटरबक्स को सावधान करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि कोई आ रहा है पेड़ की बात सुन कर सब चुप हो जाते हैं। तभी एकांकी के दृश्य में एक भिखारी जैसा दिखने वाला आदमी आता है। उसके कंधे पर एक लड़की सोई हुई है। वह आदमी अपने आप से ही बातें करता हुआ कहता है कि वह बच्चे उठानेवाला है। वह आदमी काफी दूर चल कर आया था जिस कारण उसे अब भूख लग गई थी। वह आदमी एक योजना बनाता है कि वह उस लड़की को वहीँ लेटाकर अपने लिए कुछ खाने की तलाश करने जाएगा। वह आदमी सारा विचार कर के पेड़ की आड़ में लड़की को डाल देता है। उस पर अपना कोट फैला देता है और इधर – उधर ज़रा सचेत हो कर देखता है , कि कहीं कोई आस – पास तो नहीं है। फिर संतुष्ट हो कर की कोई नहीं है वह आदमी एक – एक कदम सावधानी से रखता हुआ वहाँ से खाने की तलाश करने के लिए निकल जाता है। खम्बे ने उस आदमी की सारी बातें सुनी थी और उस आदमी की बातों से खम्बे को कुछ गलत होने की आशंका हो रही थी। पेड़ भी खम्बे की बातों से सहमत होते हुए कहता है की वह आदमी जरूर कोई बहुत बुरा आदमी है। क्योंकि वह उस बच्ची को उठा कर लाया है और उस बच्ची को देख कर पेड़ कहता है कि यह लड़की तो बहुत छोटी सी है। लैटरबक्स भी पेड़ और खम्बे से कहता है कि वह आदमी उस बच्ची को कहीं से उठाकर लाया है। लैटरबक्स ने उस आदमी को यह कहते सुना था। पेड़ कौए को जगाता है। लैटरबक्स कहता है कि चील जैसे चूहा उठा लेती है , वैसे ही वह बदमाश आदमी इस छोटी सी बच्ची को उठा लाया है। पेड़ , खम्भा और लैटरबक्स को उस आदमी के इरादे अच्छे नहीं लग रहे थे और वह बच्ची बहुत छोटी थी जिसे वह कहीं से उठा कर लाया था। यही कारण था कि उनके मन में न जाने कैसे – कैसे ख्याल आ रहे थे। कौआ कहता है कि यह सच ही है कि आजकल कुछ दुष्ट लोग बच्चों को उठा ले जाते हैं। पेड़ उस बुरे आदमी के द्वारा उस छोटी लड़की को कुछ भी नहीं करने देना चाहता था , इसीलिए वह सभी को उस दुष्ट  रोकने के लिए कहता है। लैटरबक्स पेड़ की बात पर हैरानी से कहता है कि पर वे लोग कैसे उस आदमी को रोक सकते हैं ?  लैटरबक्स के कहने का अभिप्राय यह था कि वे तो किसी के भी सामने न तो बोलते हैं न ही चलते हैं अर्थात वे सभी के लिए निर्जीव हैं , तो वे कैसे उस दुष्ट आदमी को रोक सकते हैं। इतनी देर में छोटी लड़की उठकर बैठ जाती है। छोटी लड़की ने कभी भी किसी पेड़ , खम्भे , लैटरबक्स और कौए को बात करते नहीं देखा था , उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह जो देख रही है वह सपना है या हकीकत। लड़की बहुत ज्यादा आश्चर्य से अपने आप से कहती है कि क्या ? ये सब बोल रहे हैं ? लैटरबक्स , बिजली का खंभा , यह पेड़ … कौआ … उस छोटी लड़की की बात सुन कर कौआ सबको इशारा करता है। तभी सब एकदम चुप , स्तब्ध हो जाते हैं। लड़की इन सबके पास जाकर खड़ी हो जाती है। अच्छी तरह सबको देखती है  , पर सभी निर्जीव लगते हैं। लड़की उन सभी की ओर देखती हुई प्रश्न पूछती है कि कौन बोल रहा था ? कौन गप्पें मार रहा था ? लेकिन पेड़ , खम्भे , लैटरबक्स और कौए सभी चुप रहते हैं।  लड़की फिर पूछती है कि कौन बातें कर रहा था ? अब लड़की को डर लग रहा था। वह डरते हुए कहती है कि वह कहाँ है ? यह सब क्या है ? उसका घर कहाँ है ? उसके पापा कहाँ हैं ? मम्मी कहाँ हैं ? वह कहाँ है ? इतना कह कर वह फिर कहती है कि उसे  अब बहुत डर लग रहा है। लड़की को डरा हुआ देख कर लैटरबक्स से रहा नहीं जाता और वह पेड़ से कहता है कि अब मुझसे चुप नहीं रहा जाता क्योंकि वह छोटी लड़की बहुत घबरा गई है। इतना कह कर वह थोड़ा आगे सरककर छोटी लड़की से कहता है कि बच्ची घबरा मत। लड़की आवाज सुन कर पहले ऊपर देखती है फिर सामने देख कर पूछती है कि कौन है ? क्योंकि उसे अपने सामने कोई दिखाई नहीं दे रहा था जो उससे बात कर सके।  लैटरबक्स फिर कहता है कि वह लैटरबक्स है जो उससे बात कर रहा है। लैटरबक्स और लड़की बहुत सारी बातें करते हैं। लैटरबक्स उस पर लाल रंग करने वालों पर गुस्सा है क्योंकि उन्होंने उसे पूरा लाल ही रंग दिया है कोई और रंग नहीं दिया। उसे अपना लाल रंग उतना पसंद नहीं है। परन्तु लड़की लैटरबक्स से कहती है कि वह सच्ची में बहुत अच्छा है। लैटरबक्स लड़की से प्रश्न पूछता है कि वह कहाँ रहती है ? लड़की बहुत छोटी थी उसे अपने घर का पता नहीं पता था , जिस कारण लैटरबक्स उसे प्यार – प्यार से धीरे – धीरे समझा – समझा का कर पूछ रहा था और उसके मुँह से निकल पड़ा की सब उसे लाल ताऊ कह कर पुकारते हैं , यही बात लड़की ने पकड़ ली और लैटरबक्स से पूछने लगी कि सब यानि कौन उसे लाल ताऊ कह कर पुकारते हैं। लैटरबक्स हड़बड़ा जाता है परन्तु बात को संभालते हुए कहता है कि नहीं – नहीं … यहाँ तो कोई नहीं। वह वैसे बता रहा था उस लड़की को कि कोई उसे लाल ताऊ कहे तो , वह उसका असली नाम नहीं होगा न , उसी तरह उसके घरवाली सड़क का असली नाम भी कुछ और होगा। पेड़ , खंभा , कौआ – सभी ठंडी लंबी साँस लेते हैं। क्योंकि वे अभी पकडे जाने वाले थे परन्तु लैटरबक्स ने बात को संभल लिया। लैटरबक्स अब अपने पेट से लिफाफे निकालकर दिखाते हुए कहता है कि यह देख , इस पर जैसे पता लिखा हुआ है , वैसा पता नहीं है तेरा ? लड़की को कुछ भी पता नहीं था वह इंकार करते हुए कहती है कि उसे सच्ची में उसके घर का पता नहीं आता। जब लड़की कहती है कि उसे सच में नहीं पता कि उसका घर जिस गली में है उसके पास की सड़क का क्या नाम है तो खंभा लैटरबक्स और लड़की की बात – चीत के बीच में ही बोल पड़ता है कि कमाल है। अर्थात खम्बे को यकीन ही नहीं पा रहा था कि किसी को अपने घर का पता कैसे नहीं पता हो सकता। खम्बे के बीच में ही बोल पड़ने के कारण लड़की हैरानी से खंभे की तरफ देखती है। लैटरबक्स बहुत ही प्यार से लड़की को समझते हुए कहता है कि वह बिलकुल भी न घबराए। हम लोग ही बोल रहे हैं , हम लोग ही नाच रहे हैं , चल रहे हैं , गा भी रहे हैं। लड़की फिर हैरानी से पूछती है कि हम लोग ही मतलब कौन ? बताओ न ? बताओ जल्दी। लैटरबक्स  कहता है कि हम लोग ही … यानी कि हम लोग ही … वह लैटरबक्स , यह पेड़ … वह बिजली का खंभा … और यह कौआ भी। वह सिनेमा का पोस्टर भी। लड़की यह सब सुन कर बहुत हैरान हो  जाती है। लैटरबक्स उसे विश्वास दिलाते हुए कहता है कि यह सब सच है बस इनसानों के सामने ही वे लोग ये सब नहीं करते। क्योंकि इनसानों को ऐसा दिखाई देता है जैसे कोई भूत उनके सामने ये सब कर रहा हो। वे बहुत घबरा जाते हैं। क्योंकि उनके लिए वे सिर्फ निर्जीव चीजें हैं , जो न तो बोल सकते हैं , न चल सकते हैं  और न ही नाच सकते हैं इसीलिए जब वे अकेले होते हैं तब बोलते , चलते , और नाचते हैं।  छोटी लड़की डरने की जगह खुश हो रही थी क्योंकि उसे सब कुछ अच्छा लग रहा था। लड़की सभी से कहती है कि क्या हम अब खेलें ?  पोस्टर पर बनी नाचनेवाली का संतुलन फिर खोता है। घुँघरुओं की आवाज फिर से गूँजती है। लड़की उस पोस्टर वाली लड़की की और इशारा करते हुए कहती है कि यह एक लड़की बार – बार गिर रही है। फिर  ज़रा सोचकर सबसे कहती है कि क्या वह उन सबको नाच करके दिखाए ? वह बताती है कि उसकी मम्मी ने उसे नाचना सिखाया है। सभी एक साथ कह उठते हैं कि हाँ , हाँ , दिखाओ न ? वाह। लड़की नाच करने लगती है। पेड़ धीरे से खंभे से कहता है कि थोड़ी देर में वह भी आ जाएगा। बीच – बीच में वे सभी उस दुष्ट आदमी से उस छोटी बच्ची को बचाने की योजना पर चर्चा करने के लिए एक दूसरे के कान में फुसफुसा रहे थे क्योंकि वे छोटी लड़की को उस दुष्ट आदमी के बारे में बता कर डराना नहीं चाहते थे। फिर से वे नाचते हैं। फिर से प्रशंसा करते हैं। सभी जब नाच – गाना कर रहे थे तभी वह दुष्ट आदमी आ जाता है। उस दुष्ट आदमी को देखते ही सब हैरान हो जाते हैं। नाचने वाली पोस्टर के बीच में जा कर खड़ी हो जाती है। सभी अपनी – अपनी जगह पर खड़े हो जाते हैं और वह छोटी लड़की भी घबराकर पेड़ के पीछे दुबक जाती है। अर्थात उस दुष्ट आदमी को देख कर सब के सब अपनी – अपनी जगह पर लौट जाते हैं और वह छोटी लड़की भी डर कर पेड़ के पीछे छुप जाती है।  वह दुष्ट आदमी उस छोटी लड़की को ढूँढ़ने लगता है। पेड़ , खंभा , लैटरबक्स , पोस्टर इन सबके बीचों बीच लपक – झपक कर लड़की बचने का प्रयत्न करते है अर्थात पेड़ , खम्भा , लैटरबक्स और कौआ उस छोटी लड़की की हिफ़ाज़त करने लगते हैं। लड़की किसी भी तरह उस दुष्ट आदमी के हाथ नहीं लगती। तभी एकदम से कौआ भूत चिल्लाता है। कौए के पीछे – पीछे पेड़ , खंभा , लैटरबक्स नाचते हुए भूत … भूत चिल्लाने लगते हैं। तीनों और ज्यादा जोर – जोर से चिल्लाते – चीखते हैं। इसी के साथ ‘ भूत – भूत ’ करता वह दुष्ट आदमी घबराकर भाग निकलता है। सभी इधर – उधर देखते हैं , पर लड़की का कहीं पता नहीं चलता। सभी चिंता में डूब जाते हैं। खंभा परेशान हो कर कहता है गई कहाँ ? कौआ उसे सांत्वना देते हुए कहता है कि यहीं तो थी। पेड़ ढूँढ़ते हुए कहता है कि कहीं नहीं मिल रही। लैटरबक्स हैरानी के साथ कहता है कि कहीं उठाकर तो नहीं ले गया बच्ची को वो बदमाश ? फिर से सभी इधर – उधर ढूँढ़ते हैं। लड़की नहीं मिलती। सभी घबरा जाते हैं। तभी नाचने वाली के पीछे से लड़की धीरे से झाँकती है। लड़की अपने शरारत भरे अंदाज से कहती है कि वह यहाँ है ,  उसको पकड़ो। सभी खुश होकर इधर – उधर देखने लगते हैं। उसे पकड़ने दौड़ते हैं। वह पकड़ में नहीं आती। सबको भगाती रहती है। सब थक जाते हैं। आखिर कौआ उसे पकड़ता है। लड़की कहती है कि अब उसे बहुत नींद आ रही है। क्योंकि वह बहुत थक गई थी। यह कह कर वह लेट जाती है। वह गहरी नींद में सो जाती है। इसी बीच खंभा कहता है कि थोड़ी देर बाद सुबह हो जाएगी। पेड़ भी परेशान हो कर कहता है कि तब यह छोटी लड़की कहाँ जाएगी ? लैटरबक्स भी परेशान हो उठता है और कहता है कि उसे तो अपने घर का पता – ठिकाना ही मालूम नहीं है , यह तो अपनी गली का नाम तक नहीं बता सकती है। बेचारी को अपने पापा का नाम भी नहीं मालूम है। क्योंकि वह अभी बहुत छोटी है। कौआ उन सब की बात सुन कर कहता है कि क्या वह बताए कि वह छोटी लड़की कहाँ जाएगी ? सभी हैरानी के साथ कौए से एक साथ ही पूछते हैं कि वह क्या बता सकता है ? कौआ सभी से कहता है कि हम सब मिलकर कुछ करें तो इस छोटी लड़की को उसके पापा से मिलवा सकते हैं। पेड़ , खम्भा , लैटरबक्स जब कौए से पूछते हैं कि वे कैसे इस छोटी लड़की को उसके पापा से मिलवा सकते हैं। तो कौआ कहता है कि बहुत आसान है। यह कह कर कौआ अपनी योजना सभी को बताने लगता है कि सुबह जब हो जाए पेड़ राजा , तो आप अपनी घनी – घनी छाया इस छोटी लड़की पर किए रहें , वह आराम से देर तक सोती रहेगी और खंभे महाराज , आप जरा टेढे़ होकर खड़े रहिएगा। खंभा अपने टेढे़ होकर खड़े पर सवाल करते हुए कहता है कि उसके टेढे़ होकर खड़े रहने से क्या होगा ? कौआ खम्भे को समझाते हुए कहता है कि जब वह टेढे़ होकर खड़े रहेगा तो पुलिस को लगेगा कि कोई एक्सीडैंट हो गया है। पुलिस यहाँ आएगी और हमारी इस छोटी सहेली को देखेगी। फिर पुलिस लगाएगी इसके घर का पता। पुलिस सबके घर का पता मालूम करती है। खोए हुए बच्चों को उनके घर पहुँचाती है। खंभा जब कौए की पूरी बात सुनता है तो वह टेढे़ होकर खड़े रहेने को मान जाता है और कहता है कि वह तिरछा होकर खड़ा जरूर रहेगा। परन्तु वह आगे कौए से सवाल करता है कि मान लो अगर पुलिस नहीं आई तो फिर क्या होगा ? कैसे इस छोटी लड़की के घर का पता चलेगा। कौआ इसके बारे में भी समाधान बताता है कि वह बार – बार यहाँ जोर – जोर से काँव – काँव करता रहेगा। ताकि लोगों का ध्यान उनकी तरफ हो। और अगर फिर भी उनका ध्यान इधर नहीं आया तो वह उनकी चीजें अपनी चोंच से उठा – उठाकर यहाँ लाता जाएगा। लैटरबक्स को फिर भी संदेह होता है और वह कहता है कि इतना करने के बाद भी कोई नहीं आया तो ? कौआ फिर समाधान बताते हुए कहता है कि अगर इतना सब कुछ करने के बाद भी कोई नहीं आया तो वह लैटरबक्स को एक काम करने के लिए कहता है। लैटरबक्स जल्दी से कहता है कि वह जरूर करेगा , अपनी अच्छी गुड़िया के लिए तो वह कुछ भी करने के लिए तैयार है। छोटी लड़की को उसके घर पहुँचाने के लिए पेड़ , खम्भा , लैटरबक्स और कौआ जो भी कर सकते थे वे सब कुछ करने के लिए तैयार थे। कौआ सब को जो – जो करने के लिए कहता है सभी बिना हिचकिचाहट के करने को तैयार हो जाते है। अब एकांकी के दृश्य में सब अँधेरा हो जाता है। कुछ देर बाद उजाला दिखाई पड़ता है। इसका अर्थ हुआ सुबह हो गई है। सभी जिस तरह कौए ने कहा था करने लगते है , जैसे – खंभा अपनी जगह पर टेढ़ा होकर खड़ा जो जाता है। पेड़ सोई हुई लड़की पर झुककर अपनी छाया किए हुए है। कौए की काँव – काँव जोर – जोर से सुनाई दे रही है और सिनेमा के पोस्टर पर बड़े – बड़े अक्षरों में लिखा है – पापा खो गए हैं। पोस्टर पर कौए ने लैटरबक्स को ” पापा खो गए ” इसी लिए लिखवाया था क्योंकि वे खुद तो लोगो को नहीं बता सकते थे कि उस छोटी लड़की के साथ क्या हुआ है ? वह कैसे वहाँ पहुँची है ? उनका मकसद यही था कि वे किसी तरह लोगों तक यह बात पहुँचा पाएँ कि वह लड़की खो गई है , ताकि लोग उसे उसके घर पहुँचा दें।

और आपने अक्सर छोटे बच्चों को जो खो जाते हैं , कहते सुना होगा कि ” पापा खो गए ” या ” मम्मी खो गई ” , वे कभी नहीं कहते कि वे खो गए हैं। इसी बात को ध्यान में रख कर कौए ने लैटरबक्स को पोस्टर पर ” पापा खो गए ” लिखवाया। ताकि कोई भी उसे पढ़े तो वह समझ जाए कि वह छोटी बच्ची खो गई है। इसी दृश्य के साथ लैटरबक्स धीरे से सरकता हुआ दर्शकों की ओर आता है। लैटरबक्स दर्शकों से कहता है कि वह लाल ताऊ बोल रहा है। आप में से किसी को अगर हमारी इस प्यारी सी बच्ची के पापा मिल जाएँ तो उन्हें जितनी जल्दी हो सके यहाँ ले आइएगा। इसी के साथ एकांकी समाप्त हो जाता है और रंगमंच का परदा गिरता है।
 

 

 

पाठ व्याख्या (पापा खो गए ) –

पात्र  –

बिजली का खंभा

नाचनेवाली

पेड़

लड़की

लैटरबक्स

आदमी

कौआ

प्रस्तुत पाठ के प्रारम्भ में ही एकांकी के सभी पात्रों के बारे में बताया गया है कि एकांकी में कौन – कौन से पात्र हैं – इस एकांकी में एक बिजली का खंभा है , एक नाचनेवाली है , एक पेड़ है , एक छोटी लड़की है , एक लैटरबक्स है , एक आदमी है और एक कौआ है।

सड़क। रात का समय। समुद्र के सामने फुटपाथ। वहीं पर एक बिजली का खंभा। एक पेड़। एक लैटरबक्स। दूसरी ओर धीमे प्रकाश में एक सिनेमा का पोस्टर। पोस्टर पर नाचने की भंगिमा में एक औरत की आकृति। समुद्र से सनसनाती हवा का बहाव। दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज।

लेखक एकांकी के पहले दृश्य को दर्शाते हुए दिखाता है कि एक सड़क है । वहाँ रात का समय है। सामने समुद्र है और समुद्र के सामने एक फुटपाथ है। वहीं फुटपाथ पर एक बिजली का खंभा खड़ा है। एक पेड़ है। एक लैटरबक्स है। फुटपाथ के दूसरी ओर धीमे प्रकाश में एक सिनेमा का पोस्टर लगा हुआ है। उस पोस्टर पर नाचने की भंगिमा ( कलापूर्ण शारीरिक मुद्रा, अदा ) में एक औरत की आकृति बनी हुई है। समुद्र से सनसनाती हवा का बहाव बह रहा है। और दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज भी आ रही है। ( यह पहला दृश्य नजर आता है जैसे ही एकांकी का पर्दा खुलता है )

खंभा : ( जम्हाई रोकते हुए ) राम राम राम ! रात बहुत हो गई।

पेड़ : आजकल की रातें कैसी हैं ! जल्दी बीतने में ही नहीं आतीं।

खंभा : दिन तो कैसे – न – कैसे हड़बड़ी में बीत जाता है।

पेड़ : लेकिन रात को बड़ी बोरियत होती है।

खंभा : तब भी बरसात की रातों से तो ये रातें कहीं अच्छी हैं , पेड़राजा ! बरसात की रातों में तो रातभर भीगते रहो , बादलों से आनेवाले पानी की मार खाते रहो , तेज हवाओं में भी बल्ब को कसकर पकड़े बराबर एक टाँग पर खड़े रहो – बिलकुल अच्छा नहीं लगता। उस वक्त लगता है , इससे तो अच्छा था … न होता बिजली के खंभे का जन्म ! बल्ब फ़ेंक , तब दूर कहीं भाग जाने का जी होता है।

पेड़ : मुझ पर भी एक रात आसमान से गड़गड़ाती बिजली आकर पड़ी थी। अरे , बाप रे ! वो बिजली थी या आफत ! याद आते ही अब भी दिल धक – धक करने लगता है और बिजली जहाँ गिरी थी वहाँ खड्डा कितना गहरा पड़ गया था , खंभे महाराज ! अब जब कभी बारिश होती है तो मुझे उस रात की याद हो आती है। अंग थरथर काँपने लगते हैं।

नोट – इस गद्यांश में लेखक ने बिजली के खम्बे और पेड़ का अद्भुत मानवीकरण किया है और यहाँ बिजली के खम्बे और पेड़ की बात – चीत दिखा रहा है। इनकी बात – चीत से ज्ञात होता है कि एकांकी का यह दृश्य सर्दी के दिनों का है क्योंकि दिन छोटे और रातें लम्बी सर्दी के ही दिनों में होती हैं। 

कठिन शब्द –

जम्हाई – उबासी 

हड़बड़ी – जल्दी , शीघ्रता , उतावलापन जल्दबाज़ी , उतावली , आतुरता

बोरियत – ऊब

व्याख्या – एकांकी की शुरुआत बिजली के खम्बे से होती है खंभा अपनी जम्हाई रोकते हुए कहता है कि राम राम राम ! रात बहुत हो गई। खम्बे की बात का उत्तर वहीँ खड़ा पेड़ देता है कि आजकल की रातें अलग हो गई हैं क्योंकि आजकल रातें जल्दी बीतने वाली नहीं हैं कहने का तात्पर्य यह है कि रातें लम्बी हैं। खंभा कहता है कि दिन तो कैसे – न – कैसे जल्दबाजी में बीत ही जाता है। आगे पेड़ बात पूरी करते हुए कहता है कि लेकिन रात को बड़ी ऊब होती है। अर्थात रातों में पेड़ बहुत बोर हो जाता है। खंभा पेड़ की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहता है कि पेड़राजा चाहे सर्दियों की रातें जैसी भी होती हों , तब भी बरसात की रातों से तो सर्दियों की रातें कहीं अच्छी होती हैं। क्योंकि बरसात की रातों में बहुत तकलीफ झेलनी पड़ती हैं जैसे रातभर भीगते रहो , बादलों से आनेवाले पानी की मार खाते रहो , तेज हवाओं में भी बल्ब को कसकर पकड़ कर एक टाँग पर खड़े रहना पड़ता है। ये सारी बातें बिजली के खम्बे को बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती। खम्बा कहता है कि बरसात के उस वक्त ऐसा लगता है कि इस बरसात को झेलने से तो अच्छा होता कि बिजली के खंभे का जन्म ही न हुआ होता। साथ – ही – साथ खम्बे का मन उस बरसात में बल्ब फ़ेंक कर कहीं दूर भाग जाने का होता है। कहने का तात्पर्य यह है कि बिजली के खम्बे को बरसात का मौसम बिलकुल पसंद नहीं है। पेड़ भी खम्बे का साथ देते हुए कहता है कि उस पर भी एक रात को आसमान से गड़गड़ाती बिजली आकर पड़ी थी। उस बात को याद करते हुए पेड़ उस बिजली को आफत का नाम देता है। उस बिजली की याद आते ही पेड़ का दिल अब भी धक – धक करने लगता है और पेड़ बताता है कि बिजली जहाँ गिरी थी वहाँ खड्डा बहुत गहरा पड़ गया था। पेड़ कहता है कि आज भी जब कभी बारिश होती है तो उसे उस रात की याद आ जाती है। उसका अंग थरथर काँपने लग जाते हैं।

खंभा : मेरी तबीयत ही लोहे की है जो मैं बीमार नहीं पड़ता , वरना कोई भी इस तरह बारिश , ठंडी , धूप में खड़ा रहे , तो जरूर बीमार पड़ जाए। पड़ जाएगा या नहीं ? कितने दिन बीत गए , कितनी रातें , लेकिन मैं बराबर इसी तरह खड़ा हूँ। ( लंबी ठंडी साँस छोड़कर ) छे ! चुंगी की यह नौकरी भी कोई नौकरी है !

पेड़ : अपने पत्तों का कोट पहनकर मुझे सरदी , बारिश या धूप में उतनी तकलीफ नहीं होती , तो भी तुमसे बहुत पहले का खड़ा हूँ मैं यहाँ। यहीं मेरा जन्म हुआ – इसी जगह। तब सब कुछ कितना अलग था यहाँ। वहाँ के , वे सब ऊँचे – ऊँचे घर नहीं थे तब। यह सड़क भी नहीं थी। वह सिनेमा का बड़ा सा पोस्टर और उसमें नाचनेवाली औरत भी तब नहीं थी। सिर्फ सामने का यह समुद्र था। बहुत अकेलापन महसूस होता था। तुम्हें जब यहाँ लाकर खड़ा किया गया तो सोचा , चलो कोई साथी तो मिला – इतना ही सही। लेकिन वो भी कहाँ ? तुम शुरू – शुरू में मुझसे बोलने को ही तैयार नहीं थे। मैंने बहुत बार कोशिश की , पर तुम्हारी अकड़ जहाँ थी वहीं कायम ! बाद में मैंने भी सोच लिया , इसकी नाक इतनी ऊँची है तो रहने दो। मैंने भी कभी आवाज नहीं लगाई , हाँ ! अपना भी स्वभाव ज़रा ऐसा ही है।

नोट – एकांकी के इस दृश्य में खम्बा अपने कभी न बीमार पड़ने का कारण बता रहा है और पेड़ बता रहा है कि कैसे जब खम्बे को उसके पास खड़ा किया गया तो उसे लगा  था कि उसका अकेलापन दूर हो जाएगा लेकिन कैसे उसकी यह सोच गलत साबित हुई।

कठिन शब्द –

चुंगी – महसूल ( जैसे – माल ले जाने से पहले चुंगी देना ) , चंगुल भर वस्तु

अकड़ – घमंड , कड़ापन

कायम – नियत स्थान पर ठहरा हुआ , स्थिर , निश्चित , मुकर्रर , निर्धारित , स्थायी , दृढ़ , बरकरार  , स्थापित , प्रचलित , निर्मित

व्याख्या – पेड़ के द्वारा जब बरसात का जिक्र किया गया तब बिजली का खंभा अपनी तारीफ़ करता हुआ कहता है कि उसकी तबीयत ही लोहे की है जो वह आज तक कभी बीमार नहीं पड़ा , वरना कोई भी इस तरह की बारिश में , ठंडी में या धूप में खड़ा रहे , तो जरूर बीमार पड़ जाएगा। अपनी बात को सही साबित करने के लिए खम्बा पेड़ से पूछता है कि इस तरह की बारिश में , ठंडी में या धूप में कोई खड़ा रहे , तो जरूर बीमार पड़ जाएगा या नहीं ? आगे अपनी बात कहता है कि न जाने कितने दिन बीत गए हैं , कितनी ही रातें गुजर गई हैं , लेकिन वह बिना अपनी जगह से हिले इसी तरह खड़ा है। अपनी बात को ख़त्म करता हुआ खम्बा लंबी ठंडी साँस छोड़कर कहता है कि उसे उसकी यह नौकरी बिलकुल पसंद नहीं है। खम्बे की बात सुन कर पेड़ कहता है कि माना की अपने पत्तों का कोट पहनकर उसे सरदी , बारिश या धूप में उतनी तकलीफ नहीं होती , जितनी किसी और को होती होगी , परन्तु खम्बे को कहता है कि वह उस से बहुत पहले से उस जगह पर इसी तरह से खड़ा है। उसी जगह पर उसका जन्म हुआ है। उसके जन्म के समय उस जगह का दृश्य कैसा था इस बात का वर्णन करते हुए पेड़ बिजली के खम्बे से कहता है कि तब इस जगह पर सब कुछ बहुत अलग था। वहाँ मौजूद ऊँचे – ऊँचे घर दिखाते हुए पेड़ कहता कि वे ऊँचे – ऊँचे घर भी यहाँ नहीं थे। जिस सड़क के किनारे पेड़ और खम्बा खड़े थे वह सड़क भी नहीं थी। जो सिनेमा का बड़ा सा पोस्टर और उसमें नाचनेवाली औरत को वे उनके सामने देखते हैं वे भी तब नहीं थे। समुद्र की ओर इशारा करते हुए पेड़ कहता है की सिर्फ सामने का यह समुद्र तब भी था और अब भी है। पेड़ कहता है कि उस समय वह अकेला था  जिस कारण उसे बहुत अकेलापन महसूस होता था। पेड़ बिजली के खम्बे से कहता है कि जब उसे यहाँ लाकर खड़ा किया गया तो पेड़ ने सोचा था कि चलो कोई साथी तो मिला , उसके लिए इतना ही काफी था। लेकिन जैसा पेड़ ने सोचा वैसा कुछ नहीं हुआ। खम्बा शुरू – शुरू में पेड़ से बात करने को ही तैयार नहीं था। पेड़ ने बहुत बार खम्बे से बात करने की कोशिश की , पर खम्बे का घमंड जैसा था वैसा ही बरकरार रहा अर्थात खम्बे ने पेड़ से कोई बात नहीं की। बाद में पड़े ने भी सोच लिया था कि इस खम्बे की नाक इतनी ऊँची है तो रहने दो। पेड़ ने भी फिर कभी खम्बे को आवाज नहीं लगाई। इस बात को स्पष्ट करने के लिए पेड़ कहता है कि उसका भी स्वभाव थोड़ा सा ऐसा ही है। कहने का तात्पर्य यह है कि जब खम्बे ने पेड़ से कोई बात नहीं की तो पेड़ ने भी निश्चय कर लिया कि वह नहीं अब खम्बे से कभी बात नहीं करेगा।

खंभा : और एक दिन जब आँधी – पानी में मैं बिलकुल तुम्हारे ऊपर ही आ पड़ा ?

पेड़ : बाप रे ! कैसा था वो आँधी – पानी का तूफान ! अबबsब !

खंभा : तुम खड़े थे , इसीलिए मैं कुछ संभल गया , हाँ। तुमने मुझे ऊपर का ऊपर झेल लिया , वह अच्छा हुआ। चाहे तुम खुद काफ़ी जख्मी हो गए। बाद में मेरा गरूर भी झड़ गया और अपनी दोस्ती हो गई।

पेड़ : हूँ ! हवा आज भी बहुत है।

दोनों चुप। हवा की आवाज। कुत्ते का भौंकना। पोस्टर पर बनी नाचनेवाली औरत टेढ़ी हो जाती है। उसके घुँघरू बजते हैं। वह फिर पहले की तरह स्थिर हो जाती है। लैटरबक्स किसी दोहे का एक चरण गुनगुनाता है और रुक जाता है।

नोट –  एकांकी के इस दृश्य में खम्बा और पेड़ बता रहे हैं कि उनकी दोस्ती कैसे हुई ? इस दृश्य में लेखक ने बिजली के खम्बे , पेड़ , पोस्टर में बनी नाचने वाली और लैटरबक्स जैसी निर्जीव वस्तुओं का अत्यंत अद्भुत मानवीकरण किया है। 

कठिन शब्द –

गरूर – अभिमान , घमंड , गर्व , गुमान , नखरा

स्थिर – निश्चल , अचर , स्थायी

व्याख्या – पेड़ की बात सुन कर खंभा आगे की बात बताते हुए कहता है कि एक दिन आँधी – पानी के कारण वह बिलकुल पेड़ के ऊपर ही आ पड़ा था। पेड़ भी उस दिन को याद करता हुआ कहता है कि उस दिन आने वाला आँधी – पानी का तूफान बहुत भयानक था। खंभा आगे की बात पूरी करता हुआ पेड़ से कहता है कि वह खड़ा था , इसीलिए खम्बा कुछ संभल गया। पेड़ ने खम्बे को अपने ऊपर का ऊपर झेल लिया था ,  इस बात को खम्बा अच्छा कहता है। क्योंकि खम्बे के पेड़ पर गिर जाने के कारण पेड़ चाहे  खुद काफ़ी जख्मी हो गया था किन्तु उसने खम्बे को निचे नहीं गिरने दिया। इसी घटना के बाद खम्बे का घमंड भी ख़त्म हो गया था और खम्बे और पेड़ की दोस्ती हो गई थी। पेड़ खम्बे की बात को मानता है और कहता है कि हवा तो आज भी बहुत है। इतना कह कर दोनों चुप हो जाते हैं। हवा की आवाज आती है। कुत्ते का भौंकना सुनाई दे रहा था। सिनेमा के पोस्टर पर बनी नाचनेवाली औरत टेढ़ी हो जाती है। उसके घुँघरू बजने लगते हैं। वह फिर से पहले की तरह अपनी जगह पर स्थायी हो जाती है। वही पास में लैटरबक्स किसी दोहे का एक चरण गुनगुनाता है और रुक जाता है।

कौआ : ( पेड़ के पीछे से झाँककर)  काँsव। कौन है जो रात के वक्त इतनी मीठी आवाजें लगाकर मेरी नींद खराब करता है ? ज़राभर चैन नहीं इन्हें।

लैटरबक्स : हूँ ! मीठी आवाज में नहीं गाएँ तो क्या इस कौए जैसी कर्कश काँव – काँव करें ? कहता है – जराभर भी चैन नहीं। ( पेट में हाथ डालकर एक पत्र निकालता है। धीरे से जीभ को लगाकर खोलता है। उसमें से कागज निकालकर रोशनी में पढ़ने लगता है। ) यह किसकी चिट्ठी आकर पड़ी है ? हैडमास्टर ?

ठीक। क्या कहता है ? श्रीमान , श्रीयुत् गोविन्द राव जी … उँफ – उँफ … आपका लड़का परीक्षित पढ़ाई में काफी कमजोर है। क्लास में उसका ध्यान पढ़ाई में बिलकुल नहीं रहता। इसकी बजाय उसे क्लास से गायब रहकर बंटे खेलना ज्यादा अच्छा लगता है। आप एक बार खुद आकर मुझसे मिलिए … मिलिए ? परीक्षित के पापा हैडमास्टर से मिल भी लेंगे , तो क्या हो जाएगा ? स्कूल में बच्चे पढ़ें नहीं , क्लास से गायब रहकर बंटे खेलते रहें , इसका क्या मतलब ? फीस के पैसे क्या फोकट में आते हैं ? सभी पापा लोग आफिस में इतना काम करते हैं तब कहीं जाकर मिलते हैं पैसे। उन्हें ये बच्चे फोकट के समझें , आखिर क्यों ? छे ! मुझे हैडमास्टर होना चाहिए था। इस परीक्षित के होश तब मैं अच्छी तरह ठिकाने लगाता। (वह पत्र रखकर दूसरा निकालता है। ) यह किसका है?

नोट – एकांकी के इस दृश्य में कौवे और लैटरबक्स की बात – चीत का वर्णन है। इस दृश्य में लैटरबक्स द्वारा उसके अंदर डाले गए लोगों द्वारा पत्रों को पढ़ने का वर्णन किया गया है।

कठिन शब्द –

कर्कश – कठोर , निर्दय

फोकट – निस्सार , मुफ़्त का

व्याख्या – जब लैटरबक्स गुनगुना रहा था तो उसके गुनगुनाने की आवाज को सुन कर कौआ पेड़ के पीछे से झाँककर काँsव – काँsव की आवाज करते हुए कहता है कि कौन है जो रात के वक्त इतनी मीठी आवाजें लगाकर उसकी नींद खराब कर रहा है ? कौआ गुस्से से कहता है कि किसी को ज़रा भी चैन नहीं है। कौआ इसलिए नाराज हो गया था क्योंकि लैटरबक्स के गुनगुनाने की आवाज से उसकी नींद खराब हो गई थी। लैटरबक्स कौवे की बात सुन कर चिढ़ते हुए कहता है कि अगर मीठी आवाज में नहीं गाएँ तो क्या इस कौए जैसी कठोर काँव – काँव करें ? गुस्से से कौवे की बात को दोहराते हुए कहता है कि जराभर भी चैन नहीं। इतना कह कर लैटरबक्स अपने पेट में हाथ डालकर एक पत्र को निकालता है। और धीरे से उस पत्र को जीभ को लगाकर खोलता है। उसमें से कागज को निकालकर रोशनी में पढ़ने लगता है। लैटरबक्स अपने आप से ही कहता है की यह किसकी चिट्ठी आकर पड़ी हुई है ? लैटरबक्स देखता है कि वह पत्र किसी हैडमास्टर का था। यह देख कर लैटरबक्स उस पत्र को पढ़ने लगता है कि वह हैडमास्टर क्या कहता है ? उस पत्र में लिखा था कि श्रीमान , श्रीयुत् गोविन्द राव जी … उँफ – उँफ … आपका लड़का परीक्षित पढ़ाई में काफी कमजोर है। क्लास में उसका ध्यान पढ़ाई में बिलकुल नहीं रहता। इसकी बजाय उसे क्लास से गायब रहकर बंटे खेलना ज्यादा अच्छा लगता है। आप एक बार खुद आकर मुझसे मिलिए। यह पढ़ कर लैटरबक्स कहने लगता था कि अगर परीक्षित के पापा हैडमास्टर से मिल भी लेंगे , तो क्या हो जाएगा ? लैटरबक्स गुस्से से बड़बड़ाता है कि स्कूल में बच्चे अगर पढ़ नहीं रहे हैं , क्लास से गायब रहकर बंटे खेलते रहें , इसका क्या मतलब है ? लैटरबक्स बच्चों पर गुस्सा दिखाते हुए कहता है कि फीस के पैसे क्या मुफ्त में आते हैं ? सभी पापा लोग आफिस में इतना काम करते हैं तब कहीं जाकर पैसे मिलते हैं । और ये बच्चे समझते हैं कि पैसे मुफ्त में आते हैं। लैटरबक्स कहता है कि उसे हैडमास्टर होना चाहिए था। तब इस परीक्षित के होश अच्छी तरह ठिकाने लगाता। यह कहकर लैटरबक्स उस पत्र को वापिस रख कर दूसरा पत्र निकालता है। और फिर बड़बड़ाता है कि अब यह किसका पत्र है?

खंभा : क्यों , लाल ताऊ , आज किस – किस के पत्र चोरी – चोरी पढ़ते रहे ?

लैटरबक्स : ( आश्चर्य से ) चोरी – चोरी ? चोरी किसलिए ? सभी चिट्ठियाँ मेरे ही तो कब्ज़े में होती हैं। अच्छी तरह रोज – रोज पढ़ता हूँ।

पेड़ : कब्ज़े में होने का मतलब यह तो नहीं , लाल ताऊ , कि लोगों की चिट्ठियाँ फाड़ – फाड़कर पढ़ते रहो ? पोस्टमास्टर को पता चल गया तो?

लैटरबक्स : चलता है पता तो चल जाने दो। मेरी तरह यहाँ रात – दिन बैठकर दिखाएँ तब पता चले। परसों वह पोस्टमैन मेरे पेट में से चिट्ठियाँ निकाल रहा था और मुझे इतनी लंबी जम्हाई आई कि रोके नहीं रुकी। ( जम्हाई लेता है। ) वह देखता ही रह गया। चिट्ठियों का बंडल बनाकर जल्दी – जल्दी चलता बना वह। लेकिन यह लैटरबक्स , इसे नहीं बोरियत होती एक जगह बैठे – बैठे ? मैं कहता हूँ, चार चिट्ठियाँ मन बहलाने के लिए पढ़ भी लीं तो क्या हो गया?

पेड़ : लेकिन चिट्ठी जिसे लिखी गई हो , लाल ताऊ , उसे ही पढ़नी चाहिए। वह प्राइवेट होती है प्राइवेट।

लैटरबक्स : मैं कहाँ किसी की चिट्ठी पास रख लेता हूँ ? जिसकी होती है उसे मिल ही जाती है। किसी की गुप्त बातें मैं कब बाहर निकलने देता हूँ ? वह मुझ तक ही रहती हैं। इसीलिए तो मुझे अपना बहुत महत्त्व लगता है।

नोट – एकांकी के इस दृश्य में खम्बा और पेड़ लैटरबक्स को किसी दूसरों के पत्रों को पढ़ने के लिए डाँट रहे हैं लेकिन लैटरबक्स किसी दूसरे के पत्र को पढ़ना गलत नहीं समझता क्योंकि वह किसी भी पत्र की बात किसी दूसरे को नहीं बताता।

कठिन शब्द –

क़ब्ज़ा – अधिकार , दखल

प्राइवेट – निज का , आपसी , निजी

गुप्त – छिपा हुआ , अपरिचित

व्याख्या – जब लैटरबक्स हैडमास्टर का पत्र पढ़ कर रख देता है और किसी दूसरे पत्र को पढ़ने के लिए खोलने लगता है तब खंभा लैटरबक्स को टोकते हुए कहता है कि क्यों , लाल ताऊ , आज किस – किस के पत्र चोरी – चोरी पढ़ रहे हो ? खम्बे की बात सुन कर लैटरबक्स आश्चर्य से खम्बे को देखता है और कहता है कि चोरी – चोरी ? चोरी किसलिए ? सभी चिट्ठियाँ तो उसके ही अधिकार में होती हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि लैटरबक्स के अनुसार सारी चिट्ठियाँ उसी के अंदर होती है तो चोरी की तो बात ही नहीं होती। और लैटरबक्स के अनुसार वह अच्छी तरह रोज – रोज पढ़ता है अर्थात वह किसी भी चिट्ठी को नुक्सान नहीं पहुँचता सिर्फ पढ़ कर वापिस रख देता है। लैटरबक्स की बात सुन कर पेड़ लैटरबक्स से कहता है कि चिट्ठियाँ आपके अधिकार में हैं इसका मतलब यह तो नहीं है लाल ताऊ कि लोगों की चिट्ठियाँ फाड़ – फाड़कर पढ़ते रहो ? अगर कहीं पोस्टमास्टर को पता चल गया तो ? पेड़ की बात सुन कर लैटरबक्स पोस्टमास्टर को बुरा भला कहता है कि पोस्टमास्टर को पता चलता है तो चल जाने दो। हमारी तरह यहाँ रात – दिन बैठकर दिखाएँ तब उसे पता चले। लैटरबक्स बीते दिनों की बात सुनाता हुआ कहता है कि परसों वह पोस्टमैन उसके पेट में से चिट्ठियाँ निकाल रहा था और उसे इतनी लंबी जम्हाई आई कि वह पोस्टमैन के सामने होते हुए भी अपनी जम्हाई को नहीं रोक सका। लैटरबक्स एक और जम्हाई लेता हुआ कहता है कि जब उस पोस्टमैन ने उसे जम्हाई लेते हुए देखा तो वह देखता ही रह गया। उसने चिट्ठियों का बंडल बनाया और वहाँ से जल्दी – जल्दी चलता बना। कहने का तात्पर्य यह है कि जब पोस्टमैन ने लैटरबक्स को जम्हाई लेते देखा तो वह डर गया था क्योंकि कोई भी निर्जीव चीज़ सजीव चीजों की तरह व्यवहार नहीं कर सकती इसी कारण वह पोस्टमैन वहाँ से जल्दी – जल्दी चला गया। लैटरबक्स आगे कहता है कि लेकिन कोई यह नहीं सोचता कि बेचारा यह लैटरबक्स , इसे एक जगह बैठे – बैठे बोरियत नहीं होती होगीं ? लैटरबक्स  अपने पत्र पढ़ने की बात को सही बताते हुए कहता कि अगर अपनी बोरियत को मिटाने के लिए वह चार चिट्ठियाँ पढ़ भी लेता है तो क्या बुरा करता है ? पेड़ लैटरबक्स  की चिट्ठियाँ पढ़ने की बात को गलत बताते हुए कहता है कि लाल ताऊ चिट्ठी जिसे लिखी गई हो , उसे ही पढ़नी चाहिए। वह निजी होती है अर्थात उसमें किसी की निजी बातचीत होती है , किसी की निजी बातों को बिना उसकी इज्जाजत गलत बात है। लैटरबक्स फिर भी अपनी बात पर अड़ा रहता है और अपनी बात को फिर से सही साबित करते हुए कहता है कि वह कहाँ किसी की चिट्ठी अपने पास रख लेता है ? जिसकी चिट्ठी होती है , उसे मिल ही जाती है। किसी की छुपी हुई बातें वह कब बाहर निकलने देता है ? वह उस तक ही रहती हैं। इसीलिए तो लैटरबक्स को अपना बहुत महत्त्व लगता है। कहने का तात्पर्य यह है कि लैटरबक्स को किसी दूसरे की चिट्ठी को पढ़ना गलत नहीं लगता क्योंकि उसके अनुसार वह दूसरों की चिट्ठियाँ पढता जरूर है लेकिन किसी की भी निजी बातों को किसी दूसरों को नहीं बताता है।  लैटरबक्स को अपना बहुत महत्त्व लगता है , इसका तात्पर्य यह है कि आज कल स्वार्थी समाज में ऐसे लोग न के बराबर होते हैं जो अपने फायदे के लिए किसी की निजी बातों का लाभ नहीं उठाते। लैटरबक्स भी उन में से है जिसको लोगो की निजी बाते पता होती हैं लेकिन वह किसी को नहीं बताता तभी उसे अपना बहुत अधिक महत्त्व लगता है।

पेड़ : कोई आ रहा लगता है – सब चुप हो जाते हैं। पोस्टर पर बनी नाचनेवाली का संतुलन फिर से बिगड़ता है। फिर पहले की तरह स्थिर और स्तब्ध् हो जाती है। तेज हवा की भनभनाहट। भिखारी जैसा एक आदमी आता है। उसके कंधे पर सोई हुई एक लड़की है।

आदमी : मैं बच्चे उठानेवाला हूँ। दूसरा कोई काम करने की मेरी इच्छा नहीं होती। अभी थोड़ी देर पहले एक घर से यह लड़की उठाई है मैंने। गहरी नींद सो रही थी। अब तक उठी नहीं है। उठेगी भी नहीं , मैंने इसे थोड़ी बेहोशी की दवा जो दी है। अब मुझे लगी है भूख। दिनभर कुछ खाने का वक्त ही नहीं मिला। पेट में जैसे चूहे दौड़ रहे हों ! … तो ऐसा किया जाए … इसे यहीं लेटाकर अपने ज़रा कुछ खाने की तलाश करें … देखें कुछ मिल जाए तो ! इतनी रात गए यहाँ इस वक्त अब किसी का आना मुमकिन नहीं।

पेड़ की ओट में लड़की को डाल देता है। उस पर अपना कोट फैला देता है और इधर – उधर ज़रा चौकस होकर देखता है। फिर एक – एक कदम सावधानी से रखता हुआ निकल जाता है।

नोट  – एकांकी के इस दृश्य में बच्चे उठाने वाले व्यक्ति का वर्णन किया गया है।

कठिन शब्द –

भनभनाहट – गुंजार

ओट – आड़ ( जैसे – परदे की ओट में ) , रोक

चौकस- जो सचेत हो , जागरूक , सचेत , सावधान , दुरुस्त , ठीक

व्याख्या – जब लैटरबक्स दूसरों की चिट्ठियों को बिना उनकी इज्जाजत के पढ़ने को सही ठहराते हुए अपनी बातें पेड़ और बिजली के खम्बे को समझा रहा था तभी पेड़ को किसी के आने की आहट सुनाई पड़ी और उसने खम्बे और लैटरबक्स को सावधान करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि कोई आ रहा है पेड़ की बात सुन कर सब चुप हो जाते हैं। पोस्टर पर बनी नाचनेवाली औरत का संतुलन फिर से बिगड़ जाता है परन्तु वह फिर से अपने आप को सँभालते हुए पहले की तरह स्थिर और स्तब्ध् हो जाती है। सभी के चुप हो जाने के कारण वहाँ केवल तेज हवा के बहने की ही आवाज सुनाई पड़ रही थी। तभी एकांकी के दृश्य में एक भिखारी जैसा दिखने वाला आदमी आता है। उसके कंधे पर एक लड़की सोई हुई है। वह आदमी अपने आप से ही बातें करता हुआ कहता है कि वह बच्चे उठानेवाला है। वह बच्चे इसलिए उठता है क्योंकि दूसरा कोई काम करने की उसकी इच्छा नहीं होती। वह आगे बड़बड़ाता है कि उसने अभी थोड़ी देर पहले ही एक घर से उस लड़की को उठाया है जो उसके कंधे पर थी। वह बहुत गहरी नींद में सो रही थी। क्योंकि काफी समय हो गया था उस आदमी के द्वारा उस लड़की को उठाए हुए वह अब तक नहीं उठी थी। उसके अभी तक न उठने का कारण भी वह आदमी बताता है कि वह लड़की अब तक इसलिए नहीं उठी है क्योंकि उस आदमी ने उसे थोड़ी बेहोशी की दवा दी हुई है। वह आदमी काफी दूर चल कर आया था जिस कारण उसे अब भूख लग गई थी। भूख का एक और कारण यह भी था कि उसने दिनभर से कुछ भी नहीं खाया था। उस बच्ची को उठाने के लिए योजना बनाने में लगे समय के कारण उसे खाना खाने का वक्त ही नहीं मिला। अब उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके पेट में अब चूहे दौड़ रहे हों। अब वह आदमी एक योजना बनाता है कि वह उस लड़की को वहीँ लेटाकर अपने लिए कुछ खाने की तलाश करने जाएगा। वह सोचता है की कुछ न कुछ तो खाने को मिल ही जाएगा। और रात भी बहुत हो गई थी जिस कारण उसे विश्वास था कि इतनी रात में वहाँ अब किसी का आना मुमकिन नहीं है जिस कारण वह उस लड़की को वहाँ छोड़ सकता था। कहने का तात्पर्य यह है कि वह लड़की को इस तरह से उठा कर खाना ढूँढने नहीं जा सकता था इसलिए उसने लड़की को वहीं छोड़ने का फैसला लिया। वह आदमी सारा विचार कर के पेड़ की आड़ में लड़की को डाल देता है। उस पर अपना कोट फैला देता है और इधर – उधर ज़रा सचेत हो कर देखता है , कि कहीं कोई आस – पास तो नहीं है। फिर संतुष्ट हो कर की कोई नहीं है वह आदमी एक – एक कदम सावधानी से रखता हुआ वहाँ से खाने की तलाश करने के लिए निकल जाता है।

खंभा : ( पेड़ से ) श – s s ! पेड़ राजा , दाल में कुछ काला नज़र आता है।

पेड़ : वह जरूर बहुत बुरा आदमी है कोई। और यह लड़की तो छोटी सी है।

लैटरबक्स : वह उसे कहीं से उठाकर लाया है। मैंने सुना है।

पेड़ : ( कौए को जगाते हुए ) श् श् श् ! ए s ए कौए , जाग न ? जाग !

कौआ : दिन हो गया ?

पेड़ : नहीं , दिन नहीं हुआ , पर एक दुष्ट आदमी एक छोटी सी लड़की को कहीं से उठाकर ले आया है। चुप्प ! वो आदमी इस

वक्त यहाँ नहीं है। वो लड़की उठ जाएगी तो चिल्लाएगी।

कौआ : ( आलस से उठते हुए ) आँखों पर एक चुल्लू पानी डालकर अभी आया। ( जाता है। )

खंभा : भयंकर , बहुत ही भयंकर !

पेड़ : ( झुककर लड़की को देखकर ) बच्ची बहुत प्यारी है। कौन जाने किसकी है !

लैटरबक्स : ( मुड़कर देखते हुए ) नासपीटे ने सोई हुई को उठा लिया कहीं से। चील जैसे चूहा उठा लेती है , वैसे।

नोट – नोट – एकांकी के इस दृश्य में पेड़ , खम्बा और लैटरबक्स उस बदमाश आदमी को बुरा भला कह रहे हैं क्योंकि वह छोटी से बच्ची को कही से सोते हुए ही उठा लाया है और पेड़ , खम्बा और लैटरबक्स को उस आदमी का इरादा ठीक नहीं लग रहा था।

कठिन शब्द –

दाल में कुछ काला होना ( लोकोक्ति ) ( मुहावरा ) – किसी अवांछनीय घटना का खटका या आशंका होना

दुष्ट – बुरे आचरण वाला , कुटिल मनोवृत्ति वाला , दुर्जन , बदमाश , नीच

चुल्लू पानी – जितना पानी अपनी हथेली में आए , थोड़ा सा पानी

भयंकर – जिसे देखकर लोग भयभीत होते हों , आकार प्रकार की दृष्टि से उग्र तथा डरावना , बहुत अधिक तीव्र या प्रबल

नासपीटा – गाली के रूप में प्रयुक्त , जिसका सर्वनाश हो जाए

व्याख्या – जब वह बच्चे उठाने वाला आदमी बच्ची को पेड़ की आड़ में डाल कर खाना ढूँढने चला जाता है , तब खंभा पेड़ को शांत रहने का इशारा कर के पेड़ से कहता है कि पेड़ राजा , दाल में कुछ काला नज़र आता है। कहने का तात्पर्य यह है कि खम्बे ने उस आदमी की सारी बातें सुनी थी और उस आदमी की बातों से खम्बे को कुछ गलत होने की आशंका हो रही थी। पेड़ भी खम्बे की बातों से सहमत होते हुए कहता है की वह आदमी जरूर कोई बहुत बुरा आदमी है। क्योंकि वह उस बच्ची को उठा कर लाया है और उस बच्ची को देख कर पेड़ कहता है कि यह लड़की तो बहुत छोटी सी है। लैटरबक्स भी पेड़ और खम्बे से कहता है कि वह आदमी उस बच्ची को कहीं से उठाकर लाया है। लैटरबक्स ने उस आदमी को यह कहते सुना था। पेड़ कौए को जगाते हुए कहता है कि ए कौए , जाग न ? जाग ! साथ ही वह कौए को चुप रहने का इशारा भी करता है ताकि कौआ शोर न मचाए। कौआ सोचता है की दिन हो गया है तभी पेड़ उसे जगा रहा है परन्तु पेड़ कौए से कहता है कि दिन नहीं हुआ है , पर एक बुरे आचरण वाला आदमी एक छोटी सी लड़की को कहीं से उठाकर ले आया है। कौआ जोर से न बोले इसलिए पेड़ पूरी बात कहता है और कौए को चुप्प रहने के कहता है और बताता है कि वो बुरे आचरण वाला आदमी इस वक्त यहाँ नहीं है। वो लड़की उठ जाएगी तो चिल्लाएगी। कौआ आलस से उठते हुए कहता है कि वह अपनी आँखों पर थोड़ा सा पानी डालकर अभी आता है और वह वहाँ से चला जाता है। खंभा परेशान होकर कहता है कि यह सब बहुत ही डरावना है। क्योंकि उन्होंने कभी ऐसा कुछ नहीं देखा था। पेड़ फिर से झुककर लड़की को देखकर कहता है कि बच्ची बहुत प्यारी है , पता नहीं किसकी है। लैटरबक्स उस आदमी की दिशा में मुड़कर देखते हुए कहता है कि नासपीटे ने सोई हुई को ही कहीं से उठा लिया। उदाहरण देते हुए लैटरबक्स कहता है कि चील जैसे चूहा उठा लेती है , वैसे ही यह बदमाश आदमी इस छोटी सी बच्ची को उठा लाया है।

खंभा : मैं भी देखना चाहता हूँ उसे , पर मुझसे झुका ही नहीं जाता। लाल ताऊ , अभी भी सो रही है क्या वो ?

लैटरबक्स : हाँ – हाँ … हाँ , खंभे महाराज।

कौआ : ( आकर ) कौन उठा लाया ? किसे ? बोलो अब।

पेड़ : इसे … इस छोटी लड़की को एक दुष्ट आदमी उठा लाया है।

कौआ : ( देखकर ) अच्छा … यह लड़की ! और वह दुष्ट आदमी कहाँ है ? इसे उठाकर लानेवाला ?

खंभा : वह ज़रा गया है खाने की तलाश में … भूख लगी थी उसे।

लैटरबक्स : थोड़ी ही देर में आ जाएगा नासपीटा ! और यह खिलौने – सी बच्ची … ( गला रुँध् जाता है। ) नहीं नहीं , ऐसी कल्पना भी नहीं की जा सकती। कौन जाने क्या होगा इस बच्ची का !

कौआ : हाँ सच ! आजकल कुछ दुष्ट लोग बच्चों को उठा ले जाते हैं। मैं तो घूमता रहता हूँ न ? ऐसा होते देखा है।

पेड़ : मैं बताऊँ ? अपन यह काम नहीं होने देंगे।

लैटरबक्स : पर मैं कहता हूँ , यह होगा कैसे ?

खंभा : होगा कैसे मतलब ? उस दुष्ट को मज़े से इस बच्ची को उठा ले जाने दें ?

कौआ : वह दुष्ट है कौन ? पहले उसे नज़र तो आने दीजिए।

नोट – एकांकी के इस भाग में छोटी सी बच्ची को उस दुष्ट से बचाने के लिए पेड़ , खम्भा , लैटरबक्स और कौआ सभी योजना बनाते हुए दर्शाए गए हैं।

कठिन शब्द –

गला रुँध् जाना – भावातिरेक के कारण गले आवाज़ न निकलना

व्याख्या – जब पेड़ और लैटरबक्स उस छोटी सी लड़की को देख कर बातें कर रहे थे तो खंभा भी उसे देखने की इच्छा जाहिर करता है लेकिन वह झुक ही नहीं पाता। इसलिए वह उसके बारे में लैटरबक्स से ही पूछता है कि लाल ताऊ क्या वह लड़की अभी भी सो रही है ? लैटरबक्स खम्बे को बताते कहता है कि हाँ – हाँ … हाँ , खंभे महाराज यह लड़की अभी भी सोई हुई है। इतने में कौआ भी अपने मुँह पर पानी डाल कर आ जाता है और आकर पूछता है कि कौन उठा लाया ? किसे उठा लाया ? बोलो अब। पेड़ लड़की की और इशारा करते हुए कौए को बताता है कि इसे … इस छोटी लड़की को एक दुष्ट आदमी उठा लाया है। कौआ उस लड़की को देखकर कहता है , अच्छा … यह लड़की ! और वह दुष्ट आदमी कहाँ है ? इसे उठाकर लाने वाला ? खंभा कौए के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहता है कि वह ज़रा खाने की तलाश में गया है … उसे भूख लगी थी। लैटरबक्स आगे की बात पूरी करता हुआ कहता है कि थोड़ी ही देर में आ जाएगा नासपीटा ! और यह खिलौने – सी बच्ची … इतना कह कर भावातिरेक के कारण उसके गले से आवाज़ निकलना बंद हो गया।  अर्थात उसका गला भर आया क्योंकि वह उस लड़की  के साथ कुछ गलत होने के बारे में सोच भी नहीं सकता था। कुछ सोचते – सोचते लैटरबक्स चिल्ला पड़ा नहीं नहीं , ऐसी कल्पना भी नहीं की जा सकती। कौन जाने क्या होगा इस बच्ची का ! कहने का तात्पर्य यह है कि पेड़ , खम्भा और लैटरबक्स को उस आदमी के इरादे अच्छे नहीं लग रहे थे और वह बच्ची बहुत छोटी थी जिसे वह कहीं से उठा कर लाया था। यही कारण था कि उनके मन में न जाने कैसे – कैसे ख्याल आ रहे थे। कौआ कहता है कि यह सच ही है कि आजकल कुछ दुष्ट लोग बच्चों को उठा ले जाते हैं। यह बात कौआ इतने विश्वास के साथ इसलिए कह पता है क्योंकि वह तो इधर – उधर घूमता ही रहता है और उसने कई बार ऐसा होते देखा भी है। पेड़ यह सब सुन कर अपनी बात सभी के समक्ष रखते हुए कहता है कि उन लोगो को यह काम नहीं होने देना चाहिए। कहने का तात्पर्य यह है कि पेड़ उस बुरे आदमी के द्वारा उस छोटी लड़की को कुछ भी नहीं करने देना चाहता था , इसीलिए वह सभी को उस दुष्ट  रोकने के लिए कहता है। लैटरबक्स पेड़ की बात पर हैरानी से कहता है कि पर वे लोग कैसे उस आदमी को रोक सकते हैं ?  लैटरबक्स के कहने का अभिप्राय यह था कि वे तो किसी के भी सामने न तो बोलते हैं न ही चलते हैं अर्थात वे सभी के लिए निर्जीव हैं , तो वे कैसे उस दुष्ट आदमी को रोक सकते हैं। खंभा लैटरबक्स की बात को काटता हुआ कहता है कि होगा कैसे मतलब ? उस दुष्ट को मज़े से इस बच्ची को उठा ले जाने दें ? अर्थात खम्भा भी चाहता था कि वे उस छोटी लड़की की रक्षा करे। कौआ उन सबके बिच में ही बोल पड़ता है कि वह दुष्ट है कौन ? पहले उसे नज़र तो आने दीजिए। अर्थात पहले उस दुष्ट आदमी को देख तो लो वो है कौन तब उसे सबक सीखा सकेंगे न।

लैटरबक्स : मैंने देखा है नासपीटे को। अच्छी तरह करीब से देखा है। बहुत ही दुष्ट लगा मुझे तो। कैसी नज़र थी उसकी ! घड़ीभर को तो मुझे लगा , कहीं यह मुझे ही न उठा ले जाए।

कौआ : ताऊ , आपको ? खो खो करके  हँसता है। छोटी लड़की अब तक कुछ जाग चुकी है। अधखुली आँखों से सामने देखती है – पेड़ , खंभा , लैटरबक्स और कौआ एक दूसरे से बातें कर रहे हैं।

लैटरबक्स : इतना मुँह फाड़कर हँसने की क्या बात है इसमें ?

खंभा : उसकी वह गंदी नज़र , यहाँ से मुझे भी खूब अच्छी तरह दिखाई दे रही थी।

पेड़ : छोटे बच्चों को उठाने से ज्यादा बुरा काम और क्या हो सकता है ?

लड़की उठकर बैठ जाती है। स्वप्न देखने जैसी भाव – मुद्रा।

लैटरबक्स : कैसा मन होता है नासपीटों का ? उनका वहीं जानें ! उनका वही जानें !

कौआ : ताऊ , एक जगह बैठे रहकर यह कैसे जान सकोगे ? उसके लिए तो मेरी तरह रोज चारों दिशाओं में गश्त लगानी पड़ेगी , तब जान पाओगे यह सब।

पेड़ : काफी समझदार है तू। अरे यह हमसे कैसे हो सकेगा ?

लड़की स्वप्न देखती हुई – सी खड़ी है।

लड़की : अं ? क्या ? ये सब बोल रहे हैं ? लैटरबक्स , बिजली का खंभा , यह पेड़ … कौआ …

कौआ सबको इशारा करता है। तभी सब एकदम चुप , स्तब्ध हो जाते हैं। लड़की इन सबके पास जाकर खड़ी हो जाती है। अच्छी तरह सबको देखती है  , पर सभी निर्जीव लगते हैं।

नोट – एकांकी के इस दृश्य में छोटी लड़की के नींद से जागने का दृश्य दर्शाया गया है। नींद से जागने के बाद वह पेड़ , खंभे , लैटरबक्स और कौए को बात करते हुए देखती है परन्तु उसे लगता है कि वह सपना देख रही है।

कठिन शब्द –

घड़ीभर – थोड़ी देर

अधखुली – आधी खुली हुई

भाव – मुद्रा – भाव की दशा या अवस्था

गश्त – पुलिस कर्मचारियों का पहरे के लिए घूमना , भ्रमण , फिरना

व्याख्या – कौए के पूछने पर कि वह बच्चे उठाने वाला दुष्ट आदमी कैसा दिखता है , लैटरबक्स कहता है कि उसने उस नासपीटे को देखा है । वो भी बहुत अच्छी तरह से बहुत करीब से देखा है। लैटरबक्स उस दुष्ट आदमी का हुलिया बताते हुए कहता है कि उसे तो वह बहुत ही दुष्ट लगा। उसकी नज़र भी बहुत बुरी लग रही थी। थोड़ी देर को तो लैटरबक्स को लगा था कि कहीं वह उसे ही न उठा ले जाए। कौआ लैटरबक्स की बात सुन कर उस पर हँसने लगता है। छोटी वह लड़की अब तक कुछ जाग चुकी थी। परन्तु वह पूरी तरह से नहीं जागी थी उसने अपनी आधी खुली हुई आँखों से सामने देखा , तो उसने देखा कि पेड़ , खंभा , लैटरबक्स और कौआ एक दूसरे से बातें कर रहे हैं। किसी ने भी ध्यान नहीं दिया कि वह छोटी लड़की जाग गई है और उन्हें ही देख रही है। लैटरबक्स कौए पर गुस्सा करते हुए कह रहा था कि इतना मुँह फाड़कर हँसने की क्या बात है इसमें ? क्योंकि कौआ लैटरबक्स के यह कहने पर हँस रहा था कि लैटरबक्स को यह लग गया था कि वह दुष्ट आदमी लैटरबक्स को ही उठा ले जाएगा। खंभा लैटरबक्स की बात पर हामी भरते हुए कहता है कि उस दुष्ट आदमी की वह गंदी नज़र , खम्बे को भी उसकी जगह से खूब अच्छी तरह दिखाई दे रही थी। पेड़ खम्बे और लैटरबक्स की बात मानते हुए कहता है कि छोटे बच्चों को उठाने से ज्यादा बुरा काम और क्या हो सकता है ? इतनी देर में छोटी लड़की उठकर बैठ जाती है। वह स्वप्न देखने जैसी अवस्था में बैठी थी। कहने का तात्पर्य यह है कि छोटी लड़की ने कभी भी किसी पेड़ , खम्भे , लैटरबक्स और कौए को बात करते नहीं देखा था , उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह जो देख रही है वह सपना है या हकीकत। लैटरबक्स यह नहीं जान पा रहा था कि ये दुष्ट आदमी इतना बुरा काम कैसे कर लेते हैं। कौआ लैटरबक्स को समझाते हुए कहता है कि ताऊ , एक जगह बैठे रहकर यह कैसे जान सकोगे ? उसके लिए तो कौए की तरह रोज चारों दिशाओं में घूमना पड़ता है , तब लोगो के बारे में कुछ जान पाओगे। पेड़ कौए की तारीफ़ करता हुआ कहता है कि वह काफी समझदार है। लेकिन यह उन से कैसे हो सकेगा ? अर्थात कौआ उड़ सकता था इसलिए कहीं भी आ – जा सकता था , लेकिन पेड़ , खम्बा और लैटरबक्स सभी के लिए निर्जीव वस्तुएँ थी , वे अपनी जगह से कहीं नहीं जा सकते थे। अब तक लड़की स्वप्न देखती हुई – सी खड़ी हो जाती है। लड़की बहुत ज्यादा आश्चर्य से अपने आप से कहती है कि क्या ? ये सब बोल रहे हैं ? लैटरबक्स , बिजली का खंभा , यह पेड़ … कौआ … उस छोटी लड़की की बात सुन कर कौआ सबको इशारा करता है। तभी सब एकदम चुप , स्तब्ध हो जाते हैं। लड़की इन सबके पास जाकर खड़ी हो जाती है। अच्छी तरह सबको देखती है  , पर सभी निर्जीव लगते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि पहले किसी ने ध्यान नहीं दिया था कि छोटी लड़की जाग गई है इसी कारण वे अपनी बात – चीत करने में व्यस्त थे परन्तु जैसे ही उन्हें ज्ञात हुआ कि वह छोटी लड़की जाग गई है और उन लोगो को ही देख रही है वे सभी ऐसे चुप चाप खड़े हो जाते हैं जैसे उनमें प्राण है न हो। ताकि छोटी लड़की को उन सब पर शक न हो।

लड़की : ये तो ठीक लग रहे हैं। फिर मुझे जो दिखाई दिया वह सपना था … या कुछ और ? ( फिर गौर से देखती है , सभी निःस्तब्ध। )

कौन बोल रहा था ? कौन गप्पें मार रहा था ? ( सभी चुप ) कौन बातें कर रहा था ? मुझे … मुझे डर लग रहा है। मैं कहाँ हूँ ? यह .. यह सब क्या है ? मेरा घर कहाँ है ? मेरे पापा कहाँ हैं ? मम्मी कहाँ हैं ? कहाँ हूँ मैं ? मुझे … मुझे बहुत डर लग रहा है … बहुत डर लग रहा है। कैसा अँधेरा है चारों तरफ ! रात है … सपना देख रही थी मैं। पर सब सच है … कोई तो बोलो न … नहीं तो चीखूँगी मैं … चीखूँगी।

सभी चुप। स्तब्ध। लड़की घबराकर एक कोने में अंग सिकोड़कर बैठ जाती है। फिर अपना सिर घुटनों में डाल लेती है।

लड़की : मुझे डर लग रहा है … मुझे डर लग रहा है …

लैटरबक्स : ( पेड़ से ) अब मुझसे चुप नहीं रहा जाता … बहुत घबरा गई है। ( आगे सरककर ) बच्ची घबरा मत …

लड़की : ( पहले ऊपर देखती है फिर सामने ) कौन ?

लैटरबक्स: मैं हूँ , लैटरबक्स।

लड़की : तुम … तुम बोलते हो ?

लैटरबक्स : हाँ , मेरे मुँह नहीें है क्या ?

लड़की : तुम चलते भी हो ?

लैटरबक्स : हाँ , आदमियों को देख – देखकर।

लड़की : सच ?

लैटरबक्स : उसमें क्या है ? ( थोड़ा चलकर दिखाता है ) पर तू घबरा मत।

लड़की : ( एकदम खिलखिलाकर हँसती है। ) मज़्जा !

लैटरबक्स बोलता है … चलता भी है !

लैटरबक्स : ( खुश होकर ) वैसे मैं थोड़ा सा गा भी लेता हूँ । कुछ भजन वगैरह।

लड़की : सच ?

लैटरबक्स : ( भजन की एक लाइन गाता है। )  हूँ !

लड़की : तुम मजेदार हो। बहुत – बहुत अच्छे हो।

लैटरबक्स : पर मैं बहुत लाल हूँ। नासपीटों के पास जैसे दूसरा रंग ही नहीं था। लाल रंग पोत दिया मुझ पर।

लड़की : लैटरबक्स , तुम सच्ची बहुत अच्छे हो। पर मुझे न , अभी भी बिलकुल सच नहीं लग रहा है। सपना लग रहा है … सपना।

नोट – एकांकी के इस दृश्य में दर्शाया गया है कि जब पेड़ , खम्भे , लैटरबक्स और कौए को पता चलता है कि वह छोटी लड़की उन सभी को बातें करते हुए देख रही है तो सभी चुप – चाप खड़े हो जाते हैं जैसे उनमे कोई प्राण ही न हों। परन्तु जब लैटरबक्स देखता है कि वह छोटी लड़की डर रही है तो वह उससे बातें करने लगता है।

कठिन शब्द –

गौर से – ध्यान से

निस्तब्ध – निश्चेष्ट , गतिहीन

व्याख्या – जब लड़की पेड़ , खम्भे , लैटरबक्स और कौए को ध्यान से देखती है तो उसे सब कुछ ठीक लगता है। क्योंकि पेड़ , खम्भे , लैटरबक्स और कौए ने लड़की को देख कर बातें करना बंद कर दिया था और सभी चुप – चाप ऐसे खड़े हो गए थे जैसे उनमें कोई प्राण ही न हों। लड़की अपने आप पर कुछ संदेह करते हुए कहती है कि फिर उसे जो दिखाई दिया था वह उसका सपना था … या कुछ और ? ऐसा सोचे हुए वह फिर से ध्यान से पेड़ , खम्भे , लैटरबक्स और कौए को देखती है , सभी चुप – चाप बिना हिले – डुले खड़े रहते हैं। लड़की उन सभी की ओर देखती हुई प्रश्न पूछती है कि कौन बोल रहा था ? कौन गप्पें मार रहा था ? लेकिन पेड़ , खम्भे , लैटरबक्स और कौए सभी चुप रहते हैं।  लड़की फिर पूछती है कि कौन बातें कर रहा था ? अब लड़की को डर लग रहा था। वह डरते हुए कहती है कि वह कहाँ है ? यह सब क्या है ? उसका घर कहाँ है ? उसके पापा कहाँ हैं ? मम्मी कहाँ हैं ? वह कहाँ है ? इतना कह कर वह फिर कहती है कि उसे  अब बहुत डर लग रहा है। चारों तरफ देख कर फिर कहती है कि कैसा अँधेरा है , रात है। क्या वह सपना देख रही थी। कहने का तात्पर्य यह है कि उस छोटी लड़की को डर इसलिए लग रहा था क्योकि वह दुष्ट आदमी उसे सोते हुए ही उठा कर ले आया था जिस कारण उसे नहीं पता था कि वह कहाँ पर है और छोटी सी होने के कारण रात में बिना अपने परिवार के किसी अनजान जगह पर अकेले होने पर उसे डर लग रहा था और साथ ही साथ उसने पेड़ , खम्भे , लैटरबक्स और कौए को भी बातें करते हुए सुना जिससे उसका डर और ज्यादा बढ़ गया था। उसे लग रहा था कि उसने सच में पेड़ , खम्भे , लैटरबक्स और कौए को बातें करते देखा था इसलिए वह बार – बार कहती है कि सब सच है , कोई तो बोलो न. नहीं तो वह चीखेगी। चीखने की बात उसने इसलिए की क्योंकि उसे लगा कि अगर कोई उसकी बात सुन रहा है तो उसके चीखने की बात सुन कर जरूर उससे बात करेगा परन्तु कोई कुछ नहीं बोलता सभी चुप – चाप बिना हिले – डुले खड़े रहते हैं।  अब लड़की घबरा जाती है और घबराकर एक कोने में अंग सिकोड़कर बैठ जाती है। फिर अपना सिर दोनों घुटनों के बीच में डाल लेती है। और फिर से कहती है कि उसे बहुत डर लग रहा है। लड़की को डरा हुआ देख कर लैटरबक्स से रहा नहीं जाता और वह पेड़ से कहता है कि अब मुझसे चुप नहीं रहा जाता क्योंकि वह छोटी लड़की बहुत घबरा गई है। इतना कह कर वह थोड़ा आगे सरककर छोटी लड़की से कहता है कि बच्ची घबरा मत। लड़की आवाज सुन कर पहले ऊपर देखती है फिर सामने देख कर पूछती है कि कौन है ? क्योंकि उसे अपने सामने कोई दिखाई नहीं दे रहा था जो उससे बात कर सके।  लैटरबक्स फिर कहता है कि वह लैटरबक्स है जो उससे बात कर रहा है। लड़की हैरानी से पूछती है कि क्या वह बोल सकता है ? लैटरबक्स इस पर चिढ़ते हुए कहता है कि वह क्यों नहीं बोल सकता उसके पास भी तो मुँह है। लड़की फिर से उससे प्रश्न करती है कि क्या वह चल भी सकता है ? लैटरबक्स हाँ में अपना सर हिलाते हुए कहता है कि उसने आदमियों को देख – देखकर चलना सीखा है। लड़की को उसकी बातों पर विश्वास नहीं होता तो लैटरबक्स उसे थोड़ा चलकर दिखाता है और साथ ही साथ उसे कहता है कि वह घबराए न। कहने का तात्पर्य यह है कि लैटरबक्स नहीं चाहता था कि लड़की उसे चलता हुआ देख कर डर न जाए इसी लिए उसने पहले ही लड़की को कहा कि वह उसे चलता देख कर न घबराए। लड़की खबरने के स्थान पर एकदम खिलखिलाकर हँसती है और कहती है कि यह सब मज्जेदार है कि एक लैटरबक्स बोलता है और चलता भी है। लैटरबक्स यह देख कर खुश हो जाता है कि लड़की को उसका चलना और बोलना अच्छा लगा है , लैटरबक्स खुश होकर लड़की से कहता है कि वैसे वह  थोड़ा सा गा भी लेता है। जैसे कुछ भजन वगैरह। लड़की  को उसकी बातों पर विश्वास नहीं होता तो लैटरबक्स भजन की एक लाइन गाता है। लड़की लैटरबक्स से कहती है कि वह बहुत मजेदार है। और बहुत – बहुत अच्छा भी है। लैटरबक्स को अच्छा लगता है कि लड़की को वह पसंद आया था लेकिन वह फिर कहता है कि पर वह बहुत लाल है। नासपीटों के पास जैसे दूसरा रंग ही नहीं था। लाल रंग पोत दिया उस  पर। कहने का तात्पर्य यह है कि लैटरबक्स उस पर लाल रंग करने वालों पर गुस्सा है क्योंकि उन्होंने उसे पूरा लाल ही रंग दिया है कोई और रंग नहीं दिया। उसे अपना लाल रंग उतना पसंद नहीं है। परन्तु लड़की लैटरबक्स से कहती है कि वह सच्ची में बहुत अच्छा है। परन्तु लड़की अब भी लैटरबक्स से कहती है कि उसे अभी भी बिलकुल विश्वास नहीं हो रहा है कि वह एक लैटरबक्स से बातें कर रही है। उसे अभी भी सब कुछ सपना ही लग रहा है। कहने का तात्पर्य यह है कि छोटी लड़की ने कभी भी न तो खुद किसी लैटरबक्स को बात करते देखा था और न ही किसी अन्य व्यक्ति से इस बारे में कुछ सुना था इसलिए उसे सब कुछ सपना ही लग रहा था।

लैटरबक्स : कभी न देखी हो ऐसी चीज देख लो यों ही लगता है। तू रहती कहाँ है ?

लड़की : मैं अपने घर में रहती हूँ।

लैटरबक्स : बहुत अच्छे ! हर किसी को अपने घर ही रहना चाहिए। पर तेरा यह घर है कहाँ ?

लड़की : हँ ? घर … हमारी गली में है।

लैटरबक्स : हम जैसे अपने घरों में रहते हैं वैसे ही घर भी गली में हो तो अच्छा रहता है। पर यह गली है कहाँ ?

लड़की : सड़क पर। आसान तो है मिलनी। हमारी गली एक बड़ी सड़क पर है , हाँ। उस सड़क पर न , आदमी – ही – आदमी आते – जाते रहते हैं।

लैटरबक्स : यह तो अच्छा ही है कि हम घरों में हों , घर गली में , गलियाँ सड़कों पर और सड़कों पर बहुत से लोग हों। इससे चोरी – वोरी भी कम होती है। पर तुम्हारी इस सड़क का नाम क्या है ?

लड़की : नाम ? हमारे घरवाली सड़क।

लैटरबक्स : अरे , वह तो तुम्हारा दिया हुआ नाम है न ? जैसे मुझे सबने नाम दिया है लाल ताऊ । पर मेरा असली नाम तो लैटरबक्स है।

लड़की : ये सब कौन ? ये सब यानी कौन ? यहाँ तो कोई नहीं है।

लैटरबक्स : ( हड़बड़ाकर ) है। नहीं – नहीं … यहाँ तो कोई नहीं। मैं वैसे बता रहा था तुझे … कोई मुझे ऐसे कहे तो …

पेड़ , खंभा , कौआ – सभी ठंडी लंबी साँस लेते हैं।

लैटरबक्स : तो तेरी उस सड़क का – लोगों का दिया हुआ नाम क्या है ?

लड़की : मुझे नहीं पता। सभी उसे सड़क कहते हैं , सच। कोई – कोई रोड भी कहता है , रोड।

लैटरबक्स : ( पेट से लिफाफे निकालकर दिखाते हुए ) यह देख , इस पर जैसे पता लिखा हुआ है , वैसा पता नहीं है तेरा ?

लड़की : मुझे नहीं पता। सच्ची , मुझे नहीं पता।

नोट – एकांकी के इस दृश्य में लैटरबक्स उस छोटी लड़की से उसके घर का पता पूछने की कोशिश करता है , ताकि उसे पता चल सके कि वह दुष्ट आदमी उसे कहाँ से उठा कर लाया है।

कठिन शब्द –

यों ही – ऐसा ही

व्याख्या – जब लड़की को विश्वास नहीं हो पा रहा था कि वह जो देख रही है वह सपना नहीं हकीकत है तो लैटरबक्स उसे समझाते हुए कहता है कि कभी न देखी हो ऐसी चीज देख लो तो ऐसा ही लगता है। कहने का तात्पर्य यह है कि जब आप किसी ऐसी चीज को देख लेते हैं जिसकी आपने कभी कल्पना भी न की हो तो आपको वह सपना ही लगता है। लैटरबक्स लड़की से प्रश्न पूछता है कि वह कहाँ रहती है ? लड़की बड़ी मासूमियत से जवाब देती है कि वह तो अपने घर में रहती है। लैटरबक्स लड़की का जवाब सुन कर बड़े प्यार से कहता है कि बहुत अच्छे , हर किसी को अपने घर ही रहना चाहिए। अगला प्रश्न पूछता है कि पर उसका यह घर है कहाँ ? लड़की कुछ सोचते हुए कहती है कि घर वह तो उसकी गली में है। लैटरबक्स लड़की को बहलाते हुए उसका जवाब दोहराता है कि हम जैसे अपने घरों में रहते हैं वैसे ही घर भी गली में हो तो अच्छा रहता है। आगे लैटरबक्स लड़की से उसके घर वाली गली के बारे में प्रश्न करता है कि पर यह गली है कहाँ ? लड़की फटाक से कहती है कि सड़क पर। उसके घर वाली गली आसान से मिल जाती है। क्योंकि उसके घर वाली गली एक बड़ी सड़क पर है। और सड़क के बारे में लड़की लैटरबक्स को बताती है कि उस सड़क पर , आदमी – ही – आदमी आते – जाते रहते हैं। लैटरबक्स फिर बड़े आराम से लड़की की कही हुई बातों को दोहराते हुए कहता है कि यह तो अच्छा ही है कि हम घरों में हों , घर गली में , गलियाँ सड़कों पर और सड़कों पर बहुत से लोग हों। इससे चोरी – वोरी भी कम होती है। आगे लैटरबक्स लड़की से उसके घर वाली गली के सामने वाली सड़क के बारे में पूछता है कि पर उसकी इस सड़क का नाम क्या है ? लड़की कुछ सोच कर कहती है हमारे घरवाली सड़क। लैटरबक्स कहता है कि यह नाम तो उस लड़की द्वारा दिया हुआ नाम है। जैसे उस लैटरबक्स को सबने नाम दिया है लाल ताऊ । पर उसका असली नाम तो लैटरबक्स है। उसी तरह उस सड़क का असली नाम लैटरबक्स लड़की से पूछता है। लड़की सड़क का नाम न बताते हुए लैटरबक्स की बातों में से पूछ लेती है कि ये सब कौन ? ये सब यानी कौन ? यहाँ तो कोई नहीं है। कहने का तात्पर्य यह है कि लड़की बहुत छोटी थी उसे अपने घर का पता नहीं पता था , जिस कारण लैटरबक्स उसे प्यार – प्यार से धीरे – धीरे समझा – समझा का कर पूछ रहा था और उसके मुँह से निकल पड़ा की सब उसे लाल ताऊ कह कर पुकारते हैं , यही बात लड़की ने पकड़ ली और लैटरबक्स से पूछने लगी कि सब यानि कौन उसे लाल ताऊ कह कर पुकारते हैं। लैटरबक्स हड़बड़ा जाता है परन्तु बात को संभालते हुए कहता है कि नहीं – नहीं … यहाँ तो कोई नहीं। वह वैसे बता रहा था उस लड़की को कि कोई उसे लाल ताऊ कहे तो , वह उसका असली नाम नहीं होगा न , उसी तरह उसके घरवाली सड़क का असली नाम भी कुछ और होगा। पेड़ , खंभा , कौआ – सभी ठंडी लंबी साँस लेते हैं। क्योंकि वे अभी पकडे जाने वाले थे परन्तु लैटरबक्स ने बात को संभल लिया। लैटरबक्स लड़की से फिर प्रश्न करता है कि तो उसकी उस सड़क का – लोगों का दिया हुआ नाम क्या है ? लड़की बहुत ही मासूमियत से जवाब देती है कि उसे नहीं पता। सभी उसे सड़क कहते हैं। कोई – कोई रोड भी कहता है। लैटरबक्स अब अपने पेट से लिफाफे निकालकर दिखाते हुए कहता है कि यह देख , इस पर जैसे पता लिखा हुआ है , वैसा पता नहीं है तेरा ? लड़की को कुछ भी पता नहीं था वह इंकार करते हुए कहती है कि उसे सच्ची में उसके घर का पता नहीं आता।

यहाँ से हमें ज्ञात होता है कि लड़की बहुत छोटी है जो उसे अपने घर का पता भी नहीं आता।

खंभा : ( बीच में ही ) कमाल है!

लड़की आश्चर्य से खंभे की तरफ देखती है। वह चुप।

लड़की : कौन बोला यह , कमाल है ? अँ … कौन ?

लैटरबक्स : खंभा … ( जीभ काटकर ) नहीं – नहीं , यूँ ही लगा है तुझे। यूँ ही …

लड़की : मुझे सुनाई दिया है वहाँ से … ऊपर से।

पेड़ : हँ ! ( एकदम मुँह पर टहनी रखता है।)

लड़की : देखो , वहाँ से … वहाँ से आई है आवा । जरूर आई है। उस पेड़ पर से आई है।

कौआ : मैंने नहीं की। ( चोंच दबाकर रखता है। )

लड़की : कौन बोला यह ? कौन ? कौआ ?

खंभा : गधा है यह भी।

पेड़ : जब न बोलना हो तो जरूर …

पोस्टर पर बनी नाचनेवाली का संतुलन पुनः बिगड़ता है। वह फिर से अपने पाँव टिकाती है। घुँघरुओं की आवाज।

लड़की : वो देखो , देखो , कोई नाच रहा है। ( सभी एकटक देखते रहते हैं। ) क्या है यह ? क्या है ? कौन बोलता है ? कौन नाच रहा है ? कौन ?

लैटरबक्स : ( प्यार से ) देख , तू बिलकुल घबरा मत। हमीं बोल रहे हैं , हमीं नाच रहे हैं , चल रहे हैं , गा भी रहे हैं।

लड़की : हमीं मतलब कौन ? बताओ न ? बताओ जल्दी।

लैटरबक्स : हमीं … यानी कि हमीं … मैं लैटरबक्स , यह पेड़ … वह बिजली का खंभा … यह कौआ भी। वह सिनेमा का पोस्टर।

लड़की : कसम से ?

लैटरबक्स : कसम से। बस इनसानों के सामने हम नहीं करते यह सब। इनसानों को ऐसा दिखाई देता है , भूत करते हैं यह सब तो। घबरा जाते हैं। इसीलिए जब हम अकेले होते हैं तब बोलते , चलते , नाचते …

नाचनेवाली का संतुलत पुनः बिगड़ता है। घुँघरुओं की आवाज। वह फिर पहले की स्थिति में आती है।

लड़की : मजे हैं। खूब – खूब मजे हैं ! ( अपने इर्द – गिर्द सबको देखती है। ) लैटरबक्स , अब मुझे यहाँ डर नहीं लगता … ज़रा भी डर नहीं लगता।

खंभा

पेड़:        शाब्बाश !

कौआ

लड़की हैरान होती है , फिर ताली बजाकर खिलखिलाकर हँसती है।

नोट – एकांकी के इस दृश्य में दर्शाया गया है कि जब पेड़ , खम्बा और कौआ देखते हैं कि उस छोटी लड़की को अपने घर के बारे में कुछ भी पता नहीं है तो वे बीच में बोल पड़ते हैं और लड़की को पता चलता है कि सिर्फ लैटरबक्स ही नहीं है जो बोल सकता है , पेड़ , खम्बा और कौआ भी बोल सकते हैं।

कठिन शब्द –

आश्चर्य – अचरज , अचंभा , हैरानी

एकटक – बिना पलक गिराए

इर्द – गिर्द – इधर – उधर 

व्याख्या – जब लड़की कहती है कि उसे सच में नहीं पता कि उसका घर जिस गली में है उसके पास की सड़क का क्या नाम है तो खंभा लैटरबक्स और लड़की की बात – चीत के बीच में ही बोल पड़ता है कि कमाल है। अर्थात खम्बे को यकीन ही नहीं पा रहा था कि किसी को अपने घर का पता कैसे नहीं पता हो सकता। खम्बे के बीच में ही बोल पड़ने के कारण लड़की हैरानी से खंभे की तरफ देखती है। लड़की के देखते ही वह एकदम से चुप हो जाता है। लड़की पूछती है कि कौन बोला , कमाल है ? कौन ? लैटरबक्स भी एकदम से बोल पड़ता है कि यह खंभा , इतना बोलते ही लैटरबक्स अपनी जीभ काटता है और कहता है नहीं – नहीं , तुझे यूँ ही लगा है कि कोई कुछ बोला है , लेकिन कोई भी कुछ नहीं बोला है। लड़की ऊपर की और इशारा करते हुए कहती है कि उसे ऊपर से कुछ सुनाई दिया है। पेड़ भी कहीं कुछ न बोल दे इस लिए पेड़ एकदम अपने मुँह पर अपनी एक टहनी रखता है। लड़की लैटरबक्स को दिखाते हुए कहती है कि देखो , वहाँ ऊपर से आई है आवाज। जरूर उस पेड़ पर से आई है। इतना सुनते ही कौआ जो पेड़ पर बैठा हुआ था बोल पड़ता है कि उस ने कोई आवाज नहीं की है। कौआ जैसे ही बोलता है अपनी चोंच दबाकर रख लेता है। लड़की फिर हैरानी से पूछती है कि अब कौन बोला यह ? कौन ये कौआ ? खंभा बीच में ही कौए को डाँटते हुए बोल पड़ता है कि गधा है यह भी। पेड़ भी खम्बे का साथ देते हुए बोल पड़ता है कि जब न बोलना हो तो जरूर … अभी पेड़ ने इतना ही कहा था कि फिर से पोस्टर पर बनी नाचने वाली का संतुलन पुनः बिगड़ जाता है। वह फिर से अपने पाँव टिकाती है। लेकिन इस बीच उसके घुँघरुओं की आवाज सुनाई पड़ती है। लड़की का ध्यान घुँघरुओं की ओर हो जाता है और वह लैटरबक्स को कहती है कि वो देखो , देखो , कोई नाच रहा है। सभी बिना पलक गिराए देख रहे थे।  क्या है यह ? क्या है ? कौन बोलता है ? कौन नाच रहा है ? कौन ? छोटी लड़की बहुत परेशान हो गई थी क्योंकि उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि कौन बोल रहा है , कौन नाच रहा है , वहाँ उसके साथ क्या हो रहा है ? लैटरबक्स बहुत ही प्यार से लड़की को समझते हुए कहता है कि वह बिलकुल भी न घबराए। हम लोग ही बोल रहे हैं , हम लोग ही नाच रहे हैं , चल रहे हैं , गा भी रहे हैं। लड़की फिर हैरानी से पूछती है कि हम लोग ही मतलब कौन ? बताओ न ? बताओ जल्दी। लैटरबक्स  कहता है कि हम लोग ही … यानी कि हम लोग ही … वह लैटरबक्स , यह पेड़ … वह बिजली का खंभा … और यह कौआ भी। वह सिनेमा का पोस्टर भी। लड़की यह सब सुन कर बहुत हैरान हो  जाती है। लैटरबक्स उसे विश्वास दिलाते हुए कहता है कि यह सब सच है बस इनसानों के सामने ही वे लोग ये सब नहीं करते। क्योंकि इनसानों को ऐसा दिखाई देता है जैसे कोई भूत उनके सामने ये सब कर रहा हो। वे बहुत घबरा जाते हैं। क्योंकि उनके लिए वे सिर्फ निर्जीव चीजें हैं , जो न तो बोल सकते हैं , न चल सकते हैं  और न ही नाच सकते हैं इसीलिए जब वे अकेले होते हैं तब बोलते , चलते , और नाचते हैं। नाचने वाली का संतुलत पुनः बिगड़ता है। घुँघरुओं की आवाज फिर से सुनाई पड़ती है। वह फिर से अपने आप को संभालते हुए पहले की स्थिति में आ जाती है। लड़की घबराने की जगह खुश होते हुए कहती है कि ये सब तो खूब – खूब मज्जेदार है। इतना कह कर वह अपने इधर – उधर सबको देखने लगती है। और लैटरबक्स से कहती है कि अब उसे यहाँ डर नहीं लग रहा है। थोड़ा भी डर नहीं लग रहा है। खंभा , पेड़ और कौआ एक साथ कहते है कि शाब्बाश। लड़की हैरान होती है , फिर ताली बजाकर खिलखिलाकर हँसने लगती है। कहने का तात्पर्य यह है कि छोटी लड़की डरने की जगह खुश हो रही थी क्योंकि उसे सब कुछ अच्छा लग रहा था।

लड़की : सब चलकर पहले मेरे पास आओ। ( सभी पहले हिचकिचाते हैं। ) आओ न पास … । नहीं तो मैं नहीं बोलूँगी , जाओ। ( सब बारी – बारी से पास आते हैं। )  बैठो। ( सब बैठ जाते हैं, सिर्फ खंभा सीधा खड़ा है। ) खंभे … खंभे , नीचे बैठो। ( वह अभी भी खड़ा है। ) बैठो न ! देखो , नहीं तो मैं रोऊँगी।

लैटरबक्स : अरे , मैं बताता हूँ तुझे। उससे बिलकुल बैठा नहीं जाता।

लड़की : क्यों ?

पेड़ : क्योंकि जब से वह यहाँ खड़ा किया गया तबसे कभी बिलकुल बैठा ही नहीं।

लड़की : ( व्याकुल होकर )  अय्या रे ! मतलब यह बिच्चारा लगातार खड़ा ही रहता है , टीचर से जैसे सजा मिली हो ? ( खंभा स्वीकृतिसूचक गरदन हिलाता है। ) फिर तो चलो , हम सब मिलकर इसे बिठाते हैं। हँ ? चलो …

सब मिलकर बड़े यत्न से खंभे को बैठाते हैं। बैठने में उसे बहुत तकलीफ होती है , लेकिन बाद में बैठ जाता है।

लड़की : ( ताली बजाती है। ) एक लड़का बैठ गया। बैठ गया जी , एक लंबा लड़का बैठ गया !

खंभा : ( जरा सुख महसूस करते हुए ) बहुत अच्छा लग रहा है बैठकर। सच – सच बताऊँ? हम खड़े रहते हैं न , तब बैठने का सपना देखते हैं। सपने में भी बैठना कितना अच्छा लगता है!

लड़की : मुझे भी वैसा ही लग रहा है। मैं यहाँ कैसे आ गई ? मुझे बिलकुल भी पता नहीं।

पेड़ : मैंने देखा था … ( जीभ काटता है। ) अहँ … मैंने नहीं देखा , मैं यह कह रहा था।

लड़की : यह लड़का जो जी में आए बोल देता है। तुम्हें जीरो नंबर।

पेड़ : ( खंभे को आँख मारकर ) चलो ठीक। जीरो तो जीरो सही।

लड़की : ए , हम अब खेलें ? हँ ? ( पोस्टर पर बनी नाचनेवाली का संतुलन फिर खोता है। घुँघरुओं की आवाज। ) मज्जा ! एक लड़की बार – बार गिर रही है।गिर रही है। ( ज़रा सोचकर ) ए , मैं तुम्हें नाच करके दिखाऊँ? हँ ? मेरी मम्मी ने सिखाया है मुझे। दिखाऊँ करके ?

सभी : हाँ , हाँ , दिखाओ न ? वाह !

लड़की नाच करने लगती है।

पेड़ : ( खंभे से धीरे से ) थोड़ी देर में वह भी आ जाएगा।

खंभा : कौन ?

पेड़ : वह … वही … दुष्ट आदमी … वह बच्चे उठानेवाला।

खंभा : सचमुच ! ( कौए से ) उसके आने का वक्त हो गया।

कौआ : किसके ?

खंभा : हूँ … उस बच्चे उठानेवाले का। इसे अभी ले जाएगा वह।

लैटरबक्स : बाप रे ! तब फिर ?

पेड़ : क्या किया जाए ?

खंभा : कुछ तो करना ही पड़ेगा !

पेड़ : लेकिन क्या ?

नोट – एकांकी के इस दृश्य में पेड़ , खम्बा , लैटरबक्स और कौआ उस छोटी लड़की के साथ खेल रहे हैं लेकिन जैसे ही उन्हें ध्यान आता है कि  वह दुष्ट आदमी आने वाला है तो वे फिर से यही सोचने लग जाते हैं कि उस दुष्ट आदमी से उस छोटी लड़की को कैसे बचाएंगे।

कठिन शब्द –

व्याकुल – बेचैन , परेशान , व्यस्त

स्वीकृतिसूचक – स्वीकृति की सूचना देने वाला

यत्न – कोशिश , प्रयत्न , उपाय , युक्ति

व्याख्या – जब लड़की को यकीन हो जाता है कि लैटरबक्स के साथ – साथ वह पेड़ , खम्भा और कौआ भी बोल सकते हैं तो लड़की सबको चलकर पहले उसके पास आने के लिए कहती है। लेखिन सभी पहले हिचकिचाने लगते हैं।  लड़की अपनी बात पर जोर देते हुए उन्हें अपने पास आने को फिर कहती है। और साथ ही यह भी कहती है कि अगर उन्होंने उसकी बात नहीं मानी तो वह उनमें से किसी से बात नहीं करेगी। उसकी बात सुन कर सब बारी – बारी से उसके पास आते हैं। फिर लड़की सभी को बैठने के लिए कहती है। सब लड़की की बात मानते हुए बैठ जाते हैं, सिर्फ खंभा सीधा खड़ा रह जाता है। लड़की खम्भे को खड़ा देख कर खंभे को फिर से नीचे बैठने के लिए कहती है। लेकिन खम्भा अभी भी खड़ा था। लड़की फिर से खम्भे को बैठने को बोलती है और अगर उसने उसकी बात नहीं मानी तो लड़की कहती है कि वह रोएगी। लैटरबक्स लड़की की बात सुन कर लड़की को समझते हुए कहता है कि उस खम्भे से बिलकुल बैठा नहीं जाता। लड़की को समझ में नहीं आता कि खम्भा क्यों बैठ नहीं सकता ? पेड़ उसका उत्तर देते हुए कहता है कि क्योंकि जब से वह यहाँ खड़ा किया गया तबसे कभी बिलकुल बैठा ही नहीं है। लड़की हैरान होकर कहती है कि मतलब यह बेचारा लगातार खड़ा ही रहता है , टीचर से जैसे सजा मिली हो ? लड़की की बात पर खंभा हाँ में अपनी गरदन हिलाता है। लड़की यह देख कर सभी से कहती है कि फिर तो चलो , हम सब मिलकर इसे बिठाते हैं। सब मिलकर बड़ी कोशिश कर के खंभे को बैठाते हैं। बैठने में उसे बहुत तकलीफ होती है , लेकिन बाद में बैठ जाता है। खम्भे को बैठते देख लड़की खुश होकर ताली बजाती है। और कहती है कि एक लड़का बैठ गया। बैठ गया जी , एक लंबा लड़का बैठ गया। खंभा भी थोड़ा सुख महसूस करते हुए कहता है कि उसे बैठकर बहुत अच्छा लग रहा है। खम्भा आगे कहता है कि अगर वह सच – सच बताए तो जब खम्भे खड़े रहते हैं , तब बैठने का सपना देखते हैं। सपने में भी बैठना कितना अच्छा लगता है। कहने का तात्पर्य यह है कि खम्भे को अपना बैठने अभी भी एक सपना ही लग रहा था। लड़की भी खम्भे का साथ देते हुए कहती है कि उसे भी सब सपना ही लग रहा है कि वह यहाँ कैसे आ गई ? उसे बिलकुल भी पता नहीं। पेड़ कह उठता है कि उस ने देखा था इतना कह कर वह अपनी जीभ काट देता है। और बात बदलते हुए कहता है कि उसने नहीं देखा , वह यह कह रहा था। लड़की पेड़ को कहती है कि तुम्हारे जो जी में आए बोल देते हो। तुम्हें जीरो नंबर। पेड़ खंभे को आँख मारते हुए कहता है चलो ठीक है जीरो तो जीरो सही। लड़की सभी से कहती है कि क्या हम अब खेलें ?  पोस्टर पर बनी नाचनेवाली का संतुलन फिर खोता है। घुँघरुओं की आवाज फिर से गूँजती है। लड़की उस पोस्टर वाली लड़की की और इशारा करते हुए कहती है कि यह एक लड़की बार – बार गिर रही है। फिर  ज़रा सोचकर सबसे कहती है कि क्या वह उन सबको नाच करके दिखाए ? वह बताती है कि उसकी मम्मी ने उसे नाचना सिखाया है। सभी एक साथ कह उठते हैं कि हाँ , हाँ , दिखाओ न ? वाह। लड़की नाच करने लगती है। पेड़ धीरे से खंभे से कहता है कि थोड़ी देर में वह भी आ जाएगा। खंभा पूछता है कि कौन आ जाएगा ? पेड़ खम्भे को याद दिलाते हुए कहता है कि वह , वही , दुष्ट आदमी , वह बच्चे उठाने वाला। खंभा को याद आ जाता है और वह कहता है कि सचमुच वह आने वाला ही होगा। फिर वह कौए से कहता है कि उसके आने का वक्त हो गया है। कौआ भी पूछता है कि किसके आने का वक्त हो गया है ? खंभा उसे भी याद दिलाते हुए कहता है कि उस बच्चे उठाने वाले का। इसे अभी ले जाएगा वह। लैटरबक्स परेशान होते हुए कहता है फिर अब क्या किया जाए ? पेड़ भी सवाल दोहराता है कि क्या किया जाए ? खंभा सोचते हुए कहता है कि कुछ तो करना ही पड़ेगा। पेड़ को समझ में नहीं आ रहा था कि वे क्या और  कैसे कुछ कर सकते हैं ?

पोस्टर पर बनी नाचनेवाली आती है। लड़की और वह दोनों मिलकर नाचने लगती हैं। सभी दाद देते हैं। नाच खूब रंग में आता है। सभी भाग लेते हैं पर बीच में ही एक दूसरे के कान में कुछ फुसफुसाते हैं। पुनः नाचते हैं। दाद देते हैं। तभी वह दुष्ट आदमी आता है। देखते ही सब निःस्तब्ध। नाचनेवाली पोस्टर के बीच जा खड़ी होती है। सभी अपनी – अपनी जगह पर और वह लड़की घबराकर पेड़ के पीछे दुबक जाती है।

आदमी : ( मूँछों पर हाथ फेरकर डकार लेता है। ) वाह ! पेट भर खा लिया। अब आगे चला जाए। ( लड़की जहाँ सो रही थी वहाँ देखता है , सिर्फ कोट ही वहाँ दिखाई पड़ता है। उसका चेहरा बदलता है। ) कहाँ गई ? गई कहाँ वह छोकरी ? मैं छोड़गा नहीं उसे। अभी , पकड़ के लाता हूँ। मुझे चकमा देती है ! ढूँढ़ने लगता है। पेड़ , खंभा , लैटरबक्स , पोस्टर इन सबके बीचोंबीच लपक – झपक कर लड़की बचने का प्रयत्न करती है और वह दुष्ट आदमी पीछे – पीछे। होते – होते सभी वस्तुएँ सरकते – सरकते उसके रास्ते में आने लगती हैं। उस छोटी लड़की का संरक्षण करने लगती हैं। धीरे – धीरे इस सारे क्रम का वेग बढ़ने लगता है जिसे ढोलक या तबले की ताल भी मिलती है। लड़की किसी भी तरह उस दुष्ट आदमी के हाथ नहीं लगती। तभी एकदम से कौआ चिल्लाता है।

कौआ : भूत !

पीछे – पीछे पेड़ , खंभा , लैटरबक्स नाचते हुए चिल्लाने लगते हैं।

पेड़

खंभा :         भूत … भूत !

लैटरबक्स

तीनों और ज्यादा जोर – जोर से चिल्लाते – चीखते हैं। इसी के साथ ‘ भूत – भूत ’ करता वह दुष्ट आदमी घबराकर भाग निकलता है। सभी पेट पर हाथ रखे जी भरकर हँसते हैं।

खंभा : मजा आ गया !

कौआ : खूब भद्द उड़ाई !

पेड़ : क्यों उठाकर लाया था बच्ची को ? बड़ा आया बच्चे चुराकर भागनेवाला ! अच्छी खातिर की उसकी !

लैटरबक्स : अच्छी नाक कटी दुष्ट की।

खंभा : अरे , पर वो कहाँ है ?

कौआ : वो कौन ?

पेड़ : कौन ?

खंभा : वो … वो छोटी … लड़की अपनी …

लैटरबक्स : अरे – अरे वो … वो कहाँ गई ?

पेड़ : कौन ?

कौआ : देखूँ … देखते हैं …

इधर – उधर देखते हैं , पर लड़की का कहीं पता नहीं। सभी चिंताग्रस्त ।

खंभा : गई कहाँ ?

कौआ : यहीं तो थी।

पेड़ : कहीं नहीं मिल रही।

लैटरबक्स : उठाकर तो नहीं ले गया बच्ची को बदमाश ?

फिर से ढूँढ़ते हैं। लड़की नहीं मिलती। सभी घबराए हुए हैं। पोस्टर पर बनी नाचनेवाली भी जहाँ की तहाँ उसी भंगिमा में बैठी है।

कौआ : ( निराश ) नहीं भई , कहीं दिखाई नहीं देती।

पेड़ : मुझे तो लगता है , बहुत करके वही ले गया होगा उसे …

लैटरबक्स : कितनी प्यारी बच्ची थी रे , कितनी प्यारी !

खंभा : और स्वभाव कितना अच्छा था उसका।

सभी शोकग्रस्त बैठे हैं। तभी नाचनेवाली के पीछे से लड़की धीरे से झाँकती है।

लड़की : ( शरारत से ) मैं यहाँ हूँ … मुझे पकड़ो !

सभी आनंदित होकर इधर – उधर देखने लगते हैं। उसे पकड़ने दौड़ते हैं। वह पकड़ में नहीं आती। सबको भगाती रहती है। सब थक जाते हैं। आखिर कौआ उसे पकड़ता है।

कौआ : ( ध्प से ) कैसे पकड़ ली !

लड़की : पर पहले कैसे घबरा गए थे सब ? अहा ! मज्जा ! (ताली बजाती है। पोस्टर पर बनी नाचनेवाली भी ताली बजाती है। लड़की थककर बैठ जाती है। ) खूब मज्जा आया। मुझे ज़रा साँस लेने दो अब। ए ,पर मैं बहुत घबरा गई थी उस दुष्ट आदमी से। तुम्हीं ने बचा लिया मुझे। अहा मुझे … बहुत नींद आ रही है। थक गई मैं। ( लेटती है। )

बहुत थक गई। मुझे उठा देना , हाँ … फिर हम मजा करेंगे … बहुत थक गई। मुझे उठा देना , हाँ … फिर हम मजा करेंगे। ( गहरी नींद सो जाती है। सब उसे देखते हुए खड़े हैं – प्यार से। )

नोट – एकांकी के इस दृश्य में सभी मिल कर उस दुष्ट आदमी को भगाने में कामयाब हो जाते हैं। लड़की पोस्टर के पीछे छिप जाती है और सभी को लगता है वह दुष्ट आदमी उसे ले गया है। सभी दुखी हो जाते हैं लेकिन बाद में जब लड़की बाहर आती है तो सभी ख़ुशी से उसके साथ खूब खेलते हैं। बाद में लड़की थक कर वहीँ गहरी नीद में सो जाती है।

कठिन शब्द –

दाद देना – ( लोकोक्ति अथवा हिन्दी मुहावरा )  – कार्य या बात को प्रशंसनीय समझकर वाह वाह करना

संरक्षण – हिफ़ाज़त , पालना पोसना

चिंताग्रस्त – चिंता में डूबा हुआ , चिंता में पड़ा हुआ

भंगिमा – कलापूर्ण शारीरिक मुद्रा , अदा , कुटिलता , वक्रता

व्याख्या – जब पेड़ , खम्बा , लैटरबक्स और कौआ उस दुष्ट आदमी से उस छोटी बच्ची को बचाने की योजना पर चर्चा कर रहे थे तभी पोस्टर पर बनी नाचने वाली भी उनके सामने आ जाती है। लड़की और वह दोनों मिलकर नाचने लगती हैं। पेड़ , खम्बा , लैटरबक्स और कौआ सभी ने दोनों के नाच की प्रशंसा की। नाच खूब रंग में आता है। सभी भाग लेते हैं पर बीच में ही एक दूसरे के कान में कुछ फुसफुसाते रहते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि बीच – बीच में वे सभी उस दुष्ट आदमी से उस छोटी बच्ची को बचाने की योजना पर चर्चा करने के लिए एक दूसरे के कान में फुसफुसा रहे थे क्योंकि वे छोटी लड़की को उस दुष्ट आदमी के बारे में बता कर डराना नहीं चाहते थे। फिर से वे नाचते हैं। फिर से प्रशंसा करते हैं। सभी जब नाच – गाना कर रहे थे तभी वह दुष्ट आदमी आ जाता है। उस दुष्ट आदमी को देखते ही सब हैरान हो जाते हैं। नाचने वाली पोस्टर के बीच में जा कर खड़ी हो जाती है। सभी अपनी – अपनी जगह पर खड़े हो जाते हैं और वह छोटी लड़की भी घबराकर पेड़ के पीछे दुबक जाती है। अर्थात उस दुष्ट आदमी को देख कर सब के सब अपनी – अपनी जगह पर लौट जाते हैं और वह छोटी लड़की भी डर कर पेड़ के पीछे छुप जाती है। वह दुष्ट आदमी अपनी मूँछों पर हाथ फेरकर डकार लेता है। और कहता है कि वाह ! पेट भर खा लिया। अब आगे चला जाए। इतना कह कर उस दुष्ट आदमी ने उस छोटी लड़की को जहाँ सोता हुआ छोड़ कर गया था , वहाँ देखता है , वह देखता है कि वहाँ सिर्फ कोट ही पड़ा है। यह देख कर उसका चेहरा बदल जाता है। लड़की को वहाँ न देख कर वह दुष्ट आदमी अपने आप से कहता है कि वह लड़की कहाँ गई ? गई कहाँ वह छोकरी ? मैं छोड़गा नहीं उसे। अभी , पकड़ के लाता हूँ। मुझे चकमा देती है ! इतना कह कर वह दुष्ट आदमी उस छोटी लड़की को ढूँढ़ने लगता है। पेड़ , खंभा , लैटरबक्स , पोस्टर इन सबके बीचों बीच लपक – झपक कर लड़की बचने का प्रयत्न करती है और वह दुष्ट आदमी उसके पीछे – पीछे उसे पकड़ने के लिए भाग रहा था। जब वह दुष्ट आदमी छोटी लड़की को पकड़ने की कोशिश कर रहा था तब सभी वस्तुएँ सरकते – सरकते उसके रास्ते में आने लगती हैं। अर्थात पेड़ , खम्भा , लैटरबक्स और कौआ उस छोटी लड़की की हिफ़ाज़त करने लगते हैं। धीरे – धीरे इस सारे काम की रफ़्तार बढ़ने लगती है अर्थात धीरे – धीरे सभी तेजी से भागने लगते हैं , लड़की तेजी से बचने के लिए भागती है , दुष्ट आदमी तेजी से उस लड़की को पकड़ने के लिए उसके पीछे भागता है और पेड़ , खम्भा , लैटरबक्स और कौआ उस छोटी लड़की की हिफ़ाज़त करने के लिए उस दुष्ट आदमी के रास्ते के बीच में आने लगते हैं। ऐसा लग रहा था जिसे ढोलक या तबले की ताल भी मिल रही है। लड़की किसी भी तरह उस दुष्ट आदमी के हाथ नहीं लगती। तभी एकदम से कौआ भूत चिल्लाता है। कौए के पीछे – पीछे पेड़ , खंभा , लैटरबक्स नाचते हुए भूत … भूत चिल्लाने लगते हैं। तीनों और ज्यादा जोर – जोर से चिल्लाते – चीखते हैं। इसी के साथ ‘ भूत – भूत ’ करता वह दुष्ट आदमी घबराकर भाग निकलता है। उस दुष्ट आदमी के भागते ही सभी पेट पर हाथ रखे जी भरकर हँसते हैं। खंभा हँसते हुए कहता है कि मजा आ गया। कौआ भी खम्भे का साथ देता हुआ कहता है कि खूब मजा आया। पेड़ भी उस दुष्ट आदमी का मजाक उठाते हुए कह उठा है कि क्यों उठाकर लाया था बच्ची को ? बड़ा आया बच्चे चुराकर भागने वाला। अच्छी खबर ली उसकी। लैटरबक्स भी उस दुष्ट आदमी का मजाक उठाते हुए कह उठा है कि अच्छी नाक कटी दुष्ट की।तभी खंभा कहता है कि अरे , पर वो कहाँ है ? कौआ खम्भे से पूछता है कि वो कौन ? पेड़ भी नहीं समझ पता वे किसकी बात कर रहे हैं ? खंभा सभी को याद दिलाते हुए कहता है कि वो … वो छोटी … लड़की अपनी … लैटरबक्स भी छोटी लड़की को ढूँढने लगता है कि अरे – अरे वो … वो कहाँ गई ? कौआ हर जगह देखता हैं। सभी इधर – उधर देखते हैं , पर लड़की का कहीं पता नहीं चलता। सभी चिंता में डूब जाते हैं। खंभा परेशान हो कर कहता है गई कहाँ ? कौआ उसे सांत्वना देते हुए कहता है कि यहीं तो थी। पेड़ ढूँढ़ते हुए कहता है कि कहीं नहीं मिल रही। लैटरबक्स हैरानी के साथ कहता है कि कहीं उठाकर तो नहीं ले गया बच्ची को वो बदमाश ? फिर से सभी इधर – उधर ढूँढ़ते हैं। लड़की नहीं मिलती। सभी घबरा जाते हैं। क्योंकि उन सभी को लगता है कि वो दुष्ट आदमी भागते हुए उस छोटी लड़की को भी अपने साथ उठा कर भाग गया होगा। पोस्टर पर बनी नाचने वाली भी जहाँ की तहाँ उसी कलापूर्ण शारीरिक मुद्रा में बैठी रहती है।

कौआ निराश हो कर कहता है कि नहीं भई , कहीं दिखाई नहीं देती। पेड़ भी कहता है कि उसे भी लगता है , वही ले गया होगा उसे जब किसी का ध्यान उसकी ओर नहीं गया। लैटरबक्स बहुत दुखी हो कर कहता है कि कितनी प्यारी बच्ची थी। खंभा भी लैटरबक्स का साथ देता हुआ कहता है की और स्वभाव कितना अच्छा था उसका। सभी शोक की दशा में बैठे हुए थे। तभी नाचने वाली के पीछे से लड़की धीरे से झाँकती है। लड़की अपने शरारत भरे अंदाज से से कहती है कि वह यहाँ है ,  उसको पकड़ो। सभी खुश होकर इधर – उधर देखने लगते हैं। उसे पकड़ने दौड़ते हैं। वह पकड़ में नहीं आती। सबको भगाती रहती है। सब थक जाते हैं। आखिर कौआ उसे पकड़ता है। कौआ ध्प से कहता है कि कैसे पकड़ ली। कहने का तात्पर्य यह है कि जब सभी को लगता है कि छोटी लड़की को वह दुष्ट आदमी ले गया है तो सभी बहुत दुखी हो जाते हैं , लेकिन जब पता चलता है कि लड़की वहीँ पोस्टर के पीछे छुपी हुई थी तो सभी उसके साथ खेलने लगते हैं।

लड़की कौए द्वारा उसे पकडे जाने पर कहती है कि अभी तो पकड़ लिया है पर पहले कैसे घबरा गए थे सब ? यह कह कर छोटी लड़की ताली बजाती हुई ख़ुशी से हँसने लगती है। पोस्टर पर बनी नाचने वाली भी ताली बजाती है। लड़की खेल – खेलकर थक जाती है और थककर बैठ जाती है। और कहती है कि उसे खूब मज्जा आया। अब ज़रा साँस लेने दो। लड़की कहती है कि वह बहुत घबरा गई थी , जब उसने उस दुष्ट आदमी को देखा। छोटी लड़की पेड़ , खम्भे , लैटरबक्स और कौए से कहती है कि उन सभी ने उसे उस दुष्ट आदमी से बचा लिया। आगे वह कहती है कि अब उसे बहुत नींद आ रही है। क्योंकि वह बहुत थक गई थी। यह कह कर वह लेट जाती है। वह गहरी नींद में सो जाती है लेकिन सोने से पहले बार – बार यही कहती रहती है कि वह बहुत थक गई है। इसलिए सो रही है लेकिन थोड़ी देर में उसे उठा देना , हाँ … फिर हम सब फिर से मजा करेंगे … फिर छोटी लड़की गहरी नींद सो जाती है। सब प्यार से उसे देखते हुए खड़े हैं।

कौआ : सो गई बच्ची।            

पेड़ : थक गई थी न बहुत ? तभी झट से सो गई।

लैटरबक्स लड़की को प्रेम से थपथपाने लगता है। कौआ उसके पैर दबाता है।

खंभा : थोड़ी देर बाद सुबह हो जाएगी।

पेड़ : तब यह कहाँ जाएगी ?

लैटरबक्स : उसे अपने घर का पता – ठिकाना ही नहीं मालूम , अपनी गली का नाम तक नहीं बता सकती वह। बेचारी को अपने पापा का नाम भी नहीं मालूम। छोटी है अभी।

खंभा : तो इसका क्या होगा ? कहाँ जाएगी यह ?

लैटरबक्स : सचमुच रे , कहाँ जाएगी ?

कौआ : मैं बताऊँ ?

सभी : क्या ?

कौआ : हम सब मिलकर कुछ करें तो इसको पापा से मिलवा सकते हैं।

सभी : ( उठकर ) कैसे ?

नोट – एकांकी के इस दृश्य में पेड़ , खम्भा , लैटरबक्स और कौआ छोटी बच्ची को उसके घर भेजने के बारे में सोच रहे हैं कि उस छोटी लड़की को कैसे उसके घर भेजा जाए क्योंकि न तो उस लड़की को अपने घर के बारे में कुछ पता है और न ही पेड़ , खम्भा , लैटरबक्स और कौआ उसके घर के बारे में कुछ जानते हैं।

कठिन शब्द –

झट से – जल्दी से

थपथपाना – थपकी देना , दुलारना , उत्साहवर्धन के लिए शाबाशी देना , धीरे से ठोंकना

व्याख्या – जब छोटी बच्ची थक कर गहरी नींद में सो जाती है तब कौआ छोटी लड़की को देख कर कहता है कि छोटी बच्ची सो गई है। पेड़ कौए की बात सुन कर कहता है कि वह बहुत थक गई थी ? तभी इतनी जल्दी से सो गई। लैटरबक्स उस छोटी लड़की को बड़े प्यार से थपकी देने लगता है। कौआ उस लड़की के पैर दबाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि पेड़ , खम्भा , लैटरबक्स और कौआ उस छोटी लड़की से थोड़े ही समय में इतने अधिक घुल – मिल गए थे कि वे उसकी बहुत अधिक परवाह करने लगे थे , जैसे लैटरबक्स उस छोटी लड़की को बड़े प्यार से थपकी दे रहा था और कौआ उस लड़की के पैर दबा रहा था कि कहीं थकने के कारण उसके पैर दर्द न कर रहे हों और वह आराम से सो सके। इसी बीच खंभा कहता है कि थोड़ी देर बाद सुबह हो जाएगी। पेड़ भी परेशान हो कर कहता है कि तब यह छोटी लड़की कहाँ जाएगी ? लैटरबक्स भी परेशान हो उठता है और कहता है कि उसे तो अपने घर का पता – ठिकाना ही मालूम नहीं है , यह तो अपनी गली का नाम तक नहीं बता सकती है। बेचारी को अपने पापा का नाम भी नहीं मालूम है। क्योंकि वह अभी बहुत छोटी है। खंभा भी लैटरबक्स की बात सुन कर परेशान हो जाता है और कहता है कि तो इसका क्या होगा ? यह कहाँ जाएगी ? लैटरबक्स भी बार – बार एक बात दोहरा रहा था सचमुच रे , ये कहाँ जाएगी ? कौआ उन सब की बात सुन कर कहता है कि क्या वह बताए कि वह छोटी लड़की कहाँ जाएगी ? सभी हैरानी के साथ कौए से एक साथ ही पूछते हैं कि वह क्या बता सकता है ? कौआ सभी से कहता है कि हम सब मिलकर कुछ करें तो इस छोटी लड़की को उसके पापा से मिलवा सकते हैं। सभी कौए की बात सुनकर एक दम से उठ जाते है और एक साथ ही पूछ बैठते हैं कि कैसे ?  वे कैसे इस छोटी लड़की को उसके पापा से मिलवा सकते हैं।

कौआ : आसान है। सुबह जब हो जाए पेड़ राजा , तो आप अपनी घनी – घनी छाया इस पर किए रहें , वह आराम से देर तक सोती रहेगी और खंभे महाराज , आप जरा टेढे़ होकर खड़े रहिए।

खंभा : इससे क्या होगा ?

कौआ : पुलिस को लगेगा , एक्सीडैंट हो गया। वो यहाँ आएगी और हमारी इस छोटी सहेली को देखेगी। वो लगाएगी इसके घर का पता। पुलिस सबके घर का पता मालूम करती है। खोए हुए बच्चों को उनके घर पहुँचाती है।

खंभा : रहूँगा , मैं आड़ा होकर खड़ा रहूँगा। पर मान लो , पुलिस नहीं आई तो ?

कौआ : मैं बराबर यहाँ जोर – जोर से काँव – काँव करता रहूँगा। लोगों का ध्यान इधर खींचूँगा। उनकी चीजें अपनी चोंच से उठा – उठाकर लाता जाऊँगा।

लैटरबक्स : पर तब भी कोई नहीं आया तो ?

कौआ : तो आपको एक काम करना होगा , लाल ताऊ।

लैटरबक्स : जरूर करूँ गा , अपनी अच्छी गुड़िया के लिए तो कुछ भी करूँ गा। एक बार घर पहुँचा दिया कि सब ठीक हो गया समझो। क्या करूँ ? बता।

कौआ : आपको लिखना – पढ़ना आता है न ?

कान में बात करने लगता है। तभी पोस्टर पर बनी नाचनेवाली गिर पड़ती हैं। घुँघरुओं की आवाज। पुनः जैसे – तैसे वह अपनी पहले जैसी भंगिमा बनाकर खड़ी होती है।

लैटरबक्स : ( बीच में ही कौए से ) उससे क्या होगा ?

कौआ उसके कान में और कुछ कहता है। लैटरबक्स स्वीकृति में गरदन हिलाता है। अँधेरा। कुछ देर बाद उजाला। सुबह होती है। खंभा अपनी जगह पर टेढ़ा होकर खड़ा है। पेड़ सोई हुई लड़की पर झुककर अपनी छाया किए हुए है। कौए की काँव – काँव जोर – जोर से सुनाई दे रही है और सिनेमा के पोस्टर पर बड़े – बड़े अक्षरों में लिखा है – पापा खो गए हैं। पोस्टर पर बनी नाचनेवाली की इससे मेल खानेवाली भंगिमा। लैटरबक्स धीरे से सरकता हुआ प्रेक्षकों की ओर आता है।

लैटरबक्स : शः ! शः ! लाल ताऊ बोल रहा हूँ। आप में से किसी को अगर हमारी इस प्यारी सी बच्ची के पापा मिल जाएँ तो उन्हें जितनी जल्दी हो सके यहाँ ले आइएगा।

परदा गिरता है।

नोट – एकांकी के इस अंतिम दृश्य में पेड़ , खम्भा , लैटरबक्स और कौआ उस छोटी लड़की को उसके घर पहुँचाने की योजना बना लेते हैं और सुबह होने पर अपनी बनाई हुई योजना के अनुसार काम करने लग जाते हैं।

कठिन शब्द –

आड़ा – तिर्यक , तिरछा , पड़ा , क्षैतिज तल के समांतर , विकट , कठोर

प्रेक्षक – देखने वाला या निरीक्षण करने वाला व्यक्ति , दर्शक

व्याख्या – पेड़ , खम्भा , लैटरबक्स जब कौए से कि वे कैसे इस छोटी लड़की को उसके पापा से मिलवा सकते हैं। तो कौआ कहता है कि बहुत आसान है। यह कह कर कौआ अपनी योजना सभी को बताने लगता है कि सुबह जब हो जाए पेड़ राजा , तो आप अपनी घनी – घनी छाया इस छोटी लड़की पर किए रहें , वह आराम से देर तक सोती रहेगी और खंभे महाराज , आप जरा टेढे़ होकर खड़े रहिएगा। खंभा अपने टेढे़ होकर खड़े पर सवाल करते हुए कहता है कि उसके टेढे़ होकर खड़े रहने से क्या होगा ? कौआ खम्भे को समझाते हुए कहता है कि जब वह टेढे़ होकर खड़े रहेगा तो पुलिस को लगेगा कि कोई एक्सीडैंट हो गया है। पुलिस यहाँ आएगी और हमारी इस छोटी सहेली को देखेगी। फिर पुलिस लगाएगी इसके घर का पता। पुलिस सबके घर का पता मालूम करती है। खोए हुए बच्चों को उनके घर पहुँचाती है। खंभा जब कौए की पूरी बात सुनता है तो वह टेढे़ होकर खड़े रहेने को मान जाता है और कहता है कि वह तिरछा होकर खड़ा जरूर रहेगा। परन्तु वह आगे कौए से सवाल करता है कि मान लो अगर पुलिस नहीं आई तो फिर क्या होगा ? कैसे इस छोटी लड़की के घर का पता चलेगा। कौआ इसके बारे में भी समाधान बताता है कि वह बार – बार यहाँ जोर – जोर से काँव – काँव करता रहेगा। ताकि लोगों का ध्यान उनकी तरफ हो। और अगर फिर भी उनका ध्यान इधर नहीं आया तो वह उनकी चीजें अपनी चोंच से उठा – उठाकर यहाँ लाता जाएगा। लैटरबक्स को फिर भी संदेह होता है और वह कहता है कि इतना करने के बाद भी कोई नहीं आया तो ? कौआ फिर समाधान बताते हुए कहता है कि अगर इतना सब कुछ करने के बाद भी कोई नहीं आया तो वह लैटरबक्स को एक काम करने के लिए कहता है। लैटरबक्स जल्दी से कहता है कि वह जरूर करेगा , अपनी अच्छी गुड़िया के लिए तो वह कुछ भी करने के लिए तैयार है। बस वह एक बार उस छोटी लड़की को उसके घर पहुँचा दें तो सब ठीक हो गया समझो। इतना कह कर लैटरबक्स कौए से कहता कि उसे क्या करना होगा। कौआ लैटरबक्स से प्रश्न करता है कि उसको लिखना – पढ़ना आता है न ? इतना कह कर वह लैटरबक्स के कान में कुछ बात करने लगता है। तभी पोस्टर पर बनी नाचने वाली गिर पड़ती हैं। घुँघरुओं की आवाज फिर से सुनाई पड़ती है। वह फिर से जैसे – तैसे अपनी पहले जैसी स्थिति बनाकर खड़ी हो जाती है। जब कौआ लैटरबक्स के कान में सारी योजना बता रहा था तो लैटरबक्स बीच में ही कौए से पूछता है कि जो वह उससे करने को कह रहा है उससे क्या होगा ? कौआ उसके कान में और कुछ कहने लगता है। लैटरबक्स स्वीकृति में गरदन हिलाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि छोटी लड़की को उसके घर पहुँचाने के लिए पेड़ , खम्भा , लैटरबक्स और कौआ जो भी कर सकते थे वे सब कुछ करने के लिए तैयार थे। कौआ सब को जो – जो करने के लिए कहता है सभी बिना हिचकिचाहट के करने को तैयार हो जाते है। अब एकांकी के दृश्य में सब अँधेरा हो जाता है। कुछ देर बाद उजाला दिखाई पड़ता है। इसका अर्थ हुआ सुबह हो गई है। सभी जिस तरह कौए ने कहा था करने लगते है , जैसे – खंभा अपनी जगह पर टेढ़ा होकर खड़ा जो जाता है।

पेड़ सोई हुई लड़की पर झुककर अपनी छाया किए हुए है। कौए की काँव – काँव जोर – जोर से सुनाई दे रही है और सिनेमा के पोस्टर पर बड़े – बड़े अक्षरों में लिखा है – पापा खो गए हैं। पोस्टर पर कौए ने लैटरबक्स को ” पापा खो गए ” इसी लिए लिखवाया था क्योंकि वे खुद तो लोगो को नहीं बता सकते थे कि उस छोटी लड़की के साथ क्या हुआ है ? वह कैसे वहाँ पहुँची है ? उनका मकसद यही था कि वे किसी तरह लोगों तक यह बात पहुँचा पाएँ कि वह लड़की खो गई है , ताकि लोग उसे उसके घर पहुँचा दें। और आपने अक्सर छोटे बच्चों को जो खो जाते हैं , कहते सुना होगा कि ” पापा खो गए ” या ” मम्मी खो गई ” , वे कभी नहीं कहते कि वे खो गए हैं। इसी बात को ध्यान में रख कर कौए ने लैटरबक्स को पोस्टर पर ” पापा खो गए ” लिखवाया। ताकि कोई भी उसे पढ़े तो वह समझ जाए कि वह छोटी बच्ची खो गई है। पोस्टर पर बनी नाचने वाली इस वाक्य के साथ मेल खाने वाली मुद्रा में खड़ी है। इसी दृश्य के साथ लैटरबक्स धीरे से सरकता हुआ दर्शकों की ओर आता है। लैटरबक्स दर्शकों से कहता है कि वह लाल ताऊ बोल रहा है। आप में से किसी को अगर हमारी इस प्यारी सी बच्ची के पापा मिल जाएँ तो उन्हें जितनी जल्दी हो सके यहाँ ले आइएगा।

इसी के साथ एकांकी समाप्त हो जाता है और रंगमंच का परदा गिरता है।
 

 

 

Papa Kho Gaye Question Answer

प्रश्न 1 – एकांकी में आपको सबसे बुद्धिमान पात्र कौन लगा और क्यों ?

उत्तर – एकांकी में हमें सबसे बुद्धिमान पात्र कौआ लगा क्योंकि वह उड़ – उड़कर सभी घटनाओं की जानकारी रखता है। उसे अच्छे – बुरे लोगों की पहचान भी है। उसी की सूझ – बूझ के कारण दुष्ट आदमी से छोटी लड़की को बचाने में सभी सफल हो सके और अंत में भी कौए ने ही सभी को छोटी लड़की को उसके घर पहुंचाने की योजना भी बताई जो बहुत ही समझदारी और सूझ – बूझ का नतीजा है।

 

प्रश्न 2 – पेड़ और खंभे की दोस्ती कैसे हुई ?

उत्तर – शुरुआत में जब पेड़ का जन्म समुद्र के किनारे हुआ था , उस समय वह उस समुद्र के किनारे पर अकेला बड़ा था। कुछ दिनों बाद वहाँ बिजली के खंभा लगाया गया तो पेड ने उससे मित्रता करने की कोशिश की। लेकिन उस समय खम्भे में बहुत अकड़ थी , जिस कारण वह पेड़ से बात नहीं करता था। एक दिन भारी बारिश और तूफ़ान के कारण जब खंभा पेड़ के ऊपर ही आ गिर पड़ा था। पेड़ ने उसे अपने ऊपर झेल लिया था। पेड़ ने खम्भे को निचे नहीं गिरने दिया था , इस कोशिश में पेड़ को खुद चोट आ गई थी और घाव बन गया था। पेड़ ने खंभे को नीचे गिरने से बचा लिया। उसी दिन से दोनों में दोस्ती हो गई।

 

प्रश्न 3 – लैटरबक्स को सभी लाल ताऊ कहकर क्यों पुकारते थे ?

उत्तर – लैटरबक्स का रंग पूरे का पूरा लाल था , लाल रंग से रंगा हुआ होने के कारण सब उसे लाल ताऊ कहकर पुकारते थे।

 

प्रश्न 4 – लाल ताऊ किस प्रकार बाकी पात्रों से भिन्न है ?

उत्तर – लाल ताऊ अन्य पात्रों से बहुत भिन्न है क्योंकि वह एक ऐसा पात्र है जो पढ़ा लिखा है। वह अपने आप में मस्त रहता था। इंसानो को चलते हुए देख कर उसने भी चलना सीख लिया था , अकेले रहने पर भजन गुनगुनाते रहना उसकी आदत थी। निर्जीव होते हुए भी समाज की चिंताएँ उसे सताती थीं। जब भी वह किसी पत्र को पढता था तो उसमें लिखी समस्या को खुद हल करने की सोचा करता था। लाल ताऊ एकांकी के अन्य पात्रों की तुलना में बहुत मार्मिक हृदय वाला था क्योंकि जब छोटी लड़की डर कर एक कोने में दुबक गई थी , तब वही था जिसने सबसे पहले लड़की से बात की थी। इस तरह वह अन्य पात्रों से भिन्न था।

 

प्रश्न 5 – एकांकी में बच्ची को बचाने वाले पात्रों में केवल एक सजीव पात्र है। उसकी कौन – कौन – सी बातें आपको मजेदार लगी ? लिखिए।

उत्तर – एकांकी में एकमात्र सजीव पात्र ‘ कौआ ’ है। वह काफ़ी होशियार है। उसने लड़की को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। उसे सामयिक घटनाओं का पूरा ज्ञान है और समाज के अच्छे – बुरे लोगों की भी पहचान है। दुष्ट आदमी से बच्ची को बचाने के लिए वही सबसे पहले भूत – भूत चिल्लाता है। उसी की योजनानुसार लड़की को उठाने वाला दुष्ट आदमी भूत के डर से लड़की को वहीँ छोड़कर भाग जाता है और उसी के परामर्श से लड़की को सकुशल घर पहुँचाने के लिए पुलिस के आने का इंतजार करते हैं। जब यह सोचा जाता है कि अगर पुलिस नहीं आई तो क्या होगा? तो भी कौआ ही लैटरबक्स को बड़े – बड़े अक्षरों में ‘ पापा खो गए ’ लिखने व सबको यह कहने कि किसी को इस बच्ची के पापा मिले तो यहाँ आने की सलाह देता है। अतः बच्ची को बचाने के प्रयास में कौआ हमें बहुत मजेदार लगा।

 

प्रश्न 6 – क्या वजह थी कि सभी पात्र मिलकर भी लड़की को उसके घर नहीं पहुँचा पा रहे थे ?

उत्तर – लड़की बहुत छोटी व अबोध थी। जब लैटरबक्स ने उससे उसके माता – पिता , उसके घर के पते के बारे में तरह – तरह से पूछा तो उसे अपने माता – पिता का नाम व घर का पता तक मालूम नहीं था इसीलिए सभी पात्र मिलकर भी उस लड़की को उसके घर नहीं पहुँचा पा रहे थे।

 

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