Bhaktin Question Answers

 

CBSE Class 12 Hindi Aroh Bhag 2 Book Chapter 10 Bhaktin Question Answers

  

Bhaktin Class 12 – CBSE Class 12 Hindi Aroh Bhag-2 Chapter 10 Bhaktin Question Answers. The questions listed below are based on the latest CBSE exam pattern, wherein we have given NCERT solutions of the chapter, extract based questions, multiple choice questions, short and long answer questions.

 सीबीएसई कक्षा 12 हिंदी आरोह भाग-2 पुस्तक पाठ 10 भक्तिन प्रश्न उत्तर | इस लेख में NCERT की पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर तथा महत्वपूर्ण प्रश्नों का व्यापक संकलन किया है।

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भक्तिन पाठ के पाठ्यपुस्तक पर आधारित प्रश्न – Textbook Based Questions

 

प्रश्न 1 – भक्तिन अपना वास्तविक नाम लोगों से क्यों छुपाती थी? भक्तिन नाम किसने और क्यों दिया होगा?

उत्तर – भक्तिन का वास्तविक नाम लछमिन अर्थात् लक्ष्मी था। जिसका अर्थ होता है – धन की देवी। इस नाम के विपरीत लक्ष्मी अत्यंत गरीब थी। लक्ष्मी के पास धन बिलकुल नहीं था। लक्ष्मी नाम को सुनकर लोग उसका मजाक ना बनाएं, इसीलिए वह अपना वास्तविक नाम लोगों से छुपाती थी और उसे यह बिलकुल भी पसंद नहीं था कि कोई भी उसे लक्ष्मी नाम से पुकारे।

भक्तिन नाम लक्ष्मी को लेखिका महादेवी वर्मा ने दिया था। लेखिका ने उसके गले में कंठी माला और उसके आचार, व्यवहार व स्वभाव को देखते हुए उसे यह नाम दिया था।

 

प्रश्न 2 – दो कन्या-रत्न पैदा करने पर भी भक्तिन पुत्र-महिमा में अंधी अपनी जिठानियों द्वारा घृणा व उपेक्षा का शिकार बनी। ऐसी घटनाओं से ही अकसर  यह धारणा चलती है की स्त्री ही स्त्री की दुश्मन होती है। क्या इससे आप सहमत है ?

उत्तर – दो कन्या-रत्न पैदा करने पर भी भक्तिन पुत्र-महिमा में अंधी अपनी जिठानियों द्वारा घृणा व उपेक्षा की शिकार बनी। भक्तिन की सास ने तीन पुत्र थे तथा उसकी जिठानियों के भी पुत्र थे। पाठ में ऐसी बहुत सी घटनाएँ हैं जिससे यह बात सही साबित होती है कि स्त्री ही स्त्री की दुश्मन होती है। 

भक्तिन को उसके पति से अलग करने के लिए सास व जिठानियों ने अनेक षड्यंत्र किए थे। 

भक्तिन की जमीन, जायजाद व अन्य चीजों पर भी उसकी जेठानी की नजर थी। इसीलिए वह भक्तिन से ईर्ष्या भाव रखती थी और उसे कई तरह से प्रताड़ित करती थी ताकि वह घर छोड़कर चली जाए और सारी जायजाद उसके बेटों को मिल जाय।

हमारा समाज पहले से ही पुरुष प्रधान समाज रहा है जिस कारण बेटों को बेटियों से अधिक महत्व दिया जाता है। इसी कारण केवल दो बेटियाँ होने पर भक्तिन को तंग किया जाता था। 

ऐसी घटनाएं अक्सर हमारे समाज में भी देखने को मिलती रहती हैं, जिस कारण हम इस बात से पूरी तरह तो नहीं केवल कुछ हद तक सहमत हैं कि स्त्री ही स्त्री की दुश्मन होती है। क्योंकि अब समय बदल गया है। धीरे-धीरे लोगों की बेटियों के प्रति सोच भी बदलने लगी है। स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देने से, शिक्षित बेटियों व उनकी माताओं के साथ भेदभाव भी अब कम होने लगा है।

  

प्रश्न 3 – भक्तिन की बेटी पर पंचायत दवारा ज़बरन पति थोपा जाना एक दुर्घटना भर नहीं, बल्कि विवाह के संदर्भ में स्त्री के मानवाधिकार (विवाह करें या न करें अथवा किससे करें) की स्वतंत्रता को कुचलते रहने की सदियों से चली आ रही सामाजिक परंपरा का प्रतीक हैं। कैसे? 

उत्तर – हमारा समाज शुरू से ही एक पुरुष प्रधान समाज रहा है। इस समाज में स्त्री की इच्छा और अनिच्छा को कोई महत्व नहीं दिया जाता। स्त्री पर प्राचीनकाल  से हर फैसला थोपा जाता रहा है। विवाह के बारे में वह निर्णय नहीं ले सकती। उसके बड़े-बुजुर्ग या माता-पिता जिसे चाहे वही उसका पति बन जाता है। लड़की यदि मान जाए, तो ठीक वरना उसकी शादी जबरदस्ती करवा दी जाती है। घर के बड़े बुजुर्ग सदस्यों की इच्छा के अनुसार ही महिलाओं को अपना जीवन जीना पड़ता है। बल्कि आज के आधुनिक समय में भी हमारे देश में महिलाओं को उनके मानवाधिकारों से वंचित रखा जाता है। समय बदल जाने पर भी उनके मानवाधिकारों का हनन होता हैं। ऐसा बिलकुल नहीं है कि सिर्फ अशिक्षित महिलाओं के साथ क्रूरता होती है बल्कि शिक्षित महिलाएं भी इसका शिकार होती है।

भक्तिन की बेटी के साथ भी यही हुआ। भक्तिन और उसकी विधवा बेटी की इच्छा ना होते हुए भी उसे उस तीतरबाज व्यक्ति के साथ सिर्फ इसलिए शादी करनी पड़ी क्योंकि गांव की पंचायत व बड़े बुजुर्गों ने यह फैसला सूना दिया था। यह भी तो भक्तिन की बेटी के मानवाधिकारों का हनन ही था। 

 

प्रश्न 4- भक्तिन अच्छी है ,यह कहना कठीन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का आभाव नहीं। लेखिका ने ऐसा क्यों कहा होगा?

उत्तर – हर व्यक्ति के स्वभाव में गुण और अवगुण दो पहलुओं की तरह होते हैं। भक्तिन एक सीधी-सादी, ग्रामीण संस्कृति के अनुसार अपना जीवन जीने वाली महिला थी और वह लेखिका को खुश रखने का हर संभव प्रयास करती रहती थी। भक्तिन में भले ही सेवा-भाव है, वह अपने कार्य के प्रति वह कर्तव्यपरायणा है, परंतु इसके बावजूद उसमें अनेक दुर्गुण भी हैं। लेखिका को भक्तिन के निम्नलिखित दुर्गुण लगते हैं –

वह लेखिका के इधर-उधर पड़े पैसे-रुपये भंडार-घर की मटकी में छिपा देती है। जब उससे इसके बारे में पूछा जाता है तो वह स्वयं को सही ठहराने के लिए तरह-तरह के तर्क देती है।

वह लेखिका को प्रसन्न रखने के लिए हर संभव प्रयास करती है और बात को इधर-उधर घुमाकर बताती है। वह इसे झूठ भी नहीं मानती।

वह किसी भी तर्क को नहीं मानती।

वह दूसरों को अपने अनुसार ढालना चाहती है, परंतु स्वयं में वह रति भर भी  परिवर्तन नहीं करती।

पढ़ाई-लिखाई में उसकी कोई रुचि नहीं है। वह खुद अनपढ़ होने पर भी दूसरों की गुरु बनी फिरती है। 

 

प्रश्न 5 – भक्तिन द्वारा शास्त्र के प्रश्न को सुविधा से सुलझा लेने का क्या उदाहरण लेखिका ने दिया हैं?

उत्तर – जब लेखिका चोरी हुए पैसों के बारे में भक्तिन से पूछती है तो वह कहती है कि पैसे उसने सँभालकर रख लिए हैं। वह कहती कि क्या अपने ही घर में पैसे सँभालकर रखना चोरी है। वह कहती है कि चोरी और झूठ तो धर्मराज युधिष्ठिर में भी होगा। नहीं तो वे श्रीकृष्ण को कैसे खुश रख सकते थे और संसार को कैसे चला सकते थे। साथ ही साथ विधवा होने के बाद भक्तिन हर बृहस्पतिवार को अपना सिर मुंडवा लेती थी। लेकिन लेखिका को महिलाओं का सिर मुंडवाना बिल्कुल पसंद नहीं था। इसीलिए उन्होंने भक्तिन को ऐसा करने से मना किया लेकिन भक्तिन ने शास्त्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि “तीरथ गए मुँड़ाए सिद्ध अर्थात सिद्ध लोग सिर मुंड़वा कर ही तीर्थ को गए”। इस तर्क के आगे लेखिका कुछ नहीं बोल पायी। और भक्तिन हर बृहस्पतिवार को अपना सिर मुंड़वाती रही। इस तरह चोरी करने की घटनाओं और महाराज युधिष्ठिर व् सिर मुंड़वाने के उदाहरणों के माध्यम से लेखिका ने शास्त्र प्रश्न को सुविधा से सुलझा लेने का वर्णन किया है। 

 

प्रश्न 6 – भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती कैसे हो गईं? 

उत्तर – भक्तिन एक ग्रामीण, देहाती महिला थी। शहर में आकर भी उसने अपने आप में कोई परिवर्तन नहीं किया। बल्कि वह तो दूसरों को भी अपने अनुसार बना लेना चाहती थी। भक्तिन ने लेखिका का मीठा खाना बिल्कुल बंद कर दिया था। उसने गाढ़ी दाल व मोटी रोटी खिलाकर लेखिका की स्वास्थ्य संबंधी चिंता दूर कर दी। भक्तिन के आने के बाद लेखिका को रात को मकई का दलिया, सवेरे मट्ठा, तिल लगाकर बाजरे के बनाए हुए ठंडे पुए, ज्वार के भुने हुए भुट्टे के हरे-हरे दानों की खिचड़ी व सफेद महुए की लपसी मिलने लगी थी और इन सबको लेखिका भी स्वाद से खाने लगी। इसके अलावा  भक्तिन ने महादेवी को देहाती भाषा भी सिखा दी थी। इस प्रकार कहा जा सकता है कि भक्तिन का साथ पा कर महादेवी भी देहाती बन गई।

 

भक्तिन पाठ पर आधारित अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर – (Important Question Answers)

 

प्रश्न 1 – भक्तिन का व्यक्तित्व स्पष्ट कीजिए?

उत्तर – भक्तिन का कद छोटा व शरीर दुबला था और उसके होंठ पतले थे। वह गले में कंठी-माला पहनती थी। वैसे तो उसका नाम लछमिन (लक्ष्मी) था, परंतु उसने अपना परिचय ईमानदारी से देने के बाद लेखिका से यह नाम प्रयोग न करने की प्रार्थना की थी, क्योंकि उसका नाम उसकी आर्थिक स्थिति से बिल्कुल विपरीत था। फिर उसकी कंठी-माला को देखकर लेखिका ने उसका नाम ‘भक्तिन’ रख दिया था। जब भी कोई पूछता था कि वह लेखिका के साथ कब से है तो वह बोल दिया करती थी कि पचास वर्षों से। सेवा-धर्म में वह हनुमान जी से स्पर्द्धा करती थी।

 

प्रश्न 2 – भक्तिन का वास्तविक नाम क्या था और उसने लेखिका को उसका वास्तविक नाम उपयोग न करने को क्यों कहा?

उत्तर – भक्तिन अनामधन्या गोपालिका की कन्या थी। जिसका वास्तविक नाम था  लछमिन अर्थात लक्ष्मी। लक्ष्मी की समृद्धि भक्तिन के कपाल की कुंचित रेखाओं में नहीं बँध सकी। अर्थात लक्ष्मी अपने नाम के विपरीत अत्यंत गरीब थी। वैसे तो जीवन में प्रायः सभी को अपने-अपने नाम का विरोधाभास लेकर जीना पड़ता है; पर भक्तिन बहुत समझदार थी , क्योंकि वह अपना समृद्धि-सूचक नाम किसी को बताती नहीं। केवल जब नौकरी की खोज में आई थी, तब ईमानदारी का परिचय देने के लिए उसने शेष इतिवृत्त के साथ यह भी बता दिया; पर इस प्रार्थना के साथ कि लेखिका कभी उस नाम का उपयोग न करे। क्योंकि उसे यह भी डर रहता था कि लोग उसका मज़ाक बनाएंगे। 

 

प्रश्न 3 – भक्तिन के जीवन का इतिवृत्त संक्षेप में लिखे। 

उत्तर – भक्तिन ऐतिहासिक झूँसी में गाँव-प्रसिद्ध एक सूरमा की एकलौती बेटी ही नहीं, विमाता की किंवदति बन जाने वाली ममता की छाया में भी पली थी। पाँच वर्ष की आयु में उसे हँडिया ग्राम के एक संपन्न गोपालक की सबसे छोटी पुत्रवधू बनाकर पिता ने शास्त्र से दो पग आगे रहने की ख्याति कमाई और नौ वर्षीया युवती का गौना देकर विमाता ने, बिना माँगे पराया धन लौटाने वाले महाजन का पुण्य लूटा। पिता का उस पर अगाध प्रेम होने के कारण स्वभावतः ईर्ष्यालु और संपत्ति की रक्षा में सतर्क विमाता ने उनके मरणांतक रोग का समाचार तब भेजा, जब वह मृत्यु की सूचना भी बन चुका था। 

 

प्रश्न 4 – भक्तिन के ससुराल वालों का व्यवहार उसके साथ कैसा था ?

उत्तर – भक्तिन के ससुराल वालों का व्यवहार उसके प्रति बिलकुल भी अच्छा नहीं था। जब उसने गेहुँए रंग और बटिया जैसे मुख वाली पहली कन्या के दो संस्करण और कर डाले तब सास और जिठानियों ने ओठ बिचकाकर उपेक्षा प्रकट की। सास और जिठानियाँ चाहती थीं कि भक्तिन का पति उसकी पिटाई करे। वे उस पर रौब जमाना चाहती थीं। परन्तु ससुराल में केवल उसका पति ही उससे अच्छा व्यवहार करता था और उस पर विश्वास करता था। भक्तिन द्वारा  तीन कन्याओं को जन्म देने से और उसकी सास व जेठानियों ने लड़के पैदा होने से हमेशा ही भक्तिन को प्रताड़ित किया जाता था। जब भक्तिन के पति की मृत्यु हुई तो, सम्पति के लालच में ससुराल वालों ने भक्तिन पर पुनर्विवाह के लिए दबाव डाला। उसकी विधवा लड़की के साथ भी यही हुआ और षडियंत्र रच कर जबरदस्ती उसकी इच्छा के विरुद्ध उसका विवाह कर दिया गया। जिसके परिणामस्वरूप उनकी सम्पति का पतन हो गया और लगान न दे पाने के कारण अपमान सहन कर, अंत में, भक्तिन को गाँव छोडना पड़ा।

 

प्रश्न 5 – सारा काम करने के बावजूद भी भक्तिन और उसकी लड़कियों के साथ भोजन पर भी कैसे भेदभाव होता था?

उत्तर – भक्तिन की जिठानियाँ बैठकर केवल लोक-चर्चा करतीं थी और उनके कलूटे लड़के धूल उड़ाते फिरते थे अर्थात केवल खेलते रहते थे। भक्तिन सारा काम करती जैसे – मट्ठा फेरती, कूटती, पीसती, राँधती और उसकी नन्ही लड़कियाँ गोबर उठातीं, कंडे पाथतीं। जिठानियाँ अपने भात पर सफेद राब रखकर गाढ़ा दूध डालतीं और अपने लड़कों को औटते हुए दूध पर से मलाई उतारकर खिलातीं। इसके विपरीत भक्तिन काले गुड़ की डली के साथ कठौती में मट्ठा पाती और उसकी लड़कियाँ चने-बाजरे की घुघरी चबातीं।

 

प्रश्न 6 – भक्तिन ने किस प्रकार अपनी सम्पति को सुरक्षित रखने का प्रयास किया?

उत्तर – भक्तिन के हरे-भरे खेत, मोटी-ताजी गाय-भैंस और फलों से लदे पेड़ देखकर जेठ- जिठौतों के मुँह में पानी भर आना ही स्वाभाविक था। इन सबकी प्राप्ति तो तभी संभव थी, जब भक्तिन दूसरा ब्याह कर लेती; पर जन्म से खोटी भक्तिन इनके चकमे में आई ही नहीं। उसने ससुर, अजिया ससुर और जाने कितनी पीढ़ियों के ससुरगणों की उपार्जित जगह-ज़मीन में से सुई की नोक बराबर भी देने की उदारता नहीं दिखाई। इसके अतिरिक्त गुरु से कान फुँकवा, कंठी बाँध और पति के नाम पर घी से चिकने केशों को समर्पित कर अपने कभी न टलने की घोषणा कर दी। भविष्य में भी संपत्ति सुरक्षित रखने के लिए उसने छोटी लड़कियों के हाथ पीले कर उन्हें ससुराल पहुँचाया और पति के जाने से, बड़े दामाद को घरजमाई बनाकर रखा। इस प्रकार उसने अपनी सम्पति को सुरक्षित रहने का प्रयास किया। 

 

प्रश्न 7 – ‘भक्तिन का दुर्भाग्य भी उससे कम हठी नहीं था’ ऐसा क्यों कहा गया है?

उत्तर – भक्तिन का दुर्भाग्य भी उससे कम हठी नहीं था, इसी से किशोरी से युवती होते ही बड़ी लड़की भी विधवा हो गई। भक्तिन से पार न पा सकने वाले जेठों और काकी को परास्त करने के लिए कटिबद्ध जिठौतों ने आशा की एक किरण देख पाई। विधवा बहिन के गठबंधन के लिए बड़ा जिठौत अपने तीतर लड़ाने वाले साले को बुला लाया, क्योंकि उसका हो जाने पर सब कुछ उन्हीं के अधिकार में रहता। भक्तिन की लड़की भी माँ से कम समझदार नहीं थी, इसी से उसने वर को नापसंद कर दिया। परन्तु एक दिन माँ की अनुपस्थिति में वर महाशय ने बेटी की कोठरी में घुस कर भीतर से द्वार बंद कर लिया और उसके समर्थक गाँववालों को बुलाने लगे। अपीलहीन फैसला हुआ कि चाहे उन दोनों में एक सच्चा हो चाहे दोनों झूठे; पर जब वे एक कोठरी से निकले, तब उनका पति-पत्नी के रूप में रहना ही कलियुग के दोष का परिमार्जन कर सकता है। संबंध कुछ सुखकर नहीं हुआ, क्योंकि दामाद अब निश्चित होकर तीतर लड़ाता था और बेटी विवश क्रोध से जलती रहती थी। इतने यत्न से सँभाले हुए गाय-ढोर, खेती-बारी जब पारिवारिक द्वेष में ऐसे झुलस गए कि लगान अदा करना भी भारी हो गया, सुख से रहने की कौन कहे। अंत में एक बार लगान न पहुंँचने पर ज़मींदार ने भक्तिन को बुलाकर दिन भर कड़ी धूप में खड़ा रखा। यह अपमान तो उसकी कर्मठता में सबसे बड़ा कलंक बन गया, अतः दूसरे ही दिन भक्तिन कमाई के विचार से शहर आ पहुँची।

 

प्रश्न 8 – पहली रसोई में भक्तिन ने लेखिका को क्या परोसा और लेखिका के नाखुश होने पर क्या तर्क दिए?

उत्तर – भक्तिन की पहली रसोई में भोजन के समय जब लेखिका ने अपनी निश्चित सीमा के भीतर निर्दिष्ट स्थान ग्रहण कर लिया, तब भक्तिन ने प्रसन्नता से लबालब दृष्टि और आत्मतुष्टि से आप्लावित मुसकुराहट के साथ लेखिका की फूल की थाली में एक अंगुल मोटी और गहरी काली चित्तीदार चार रोटियाँ रखकर उसे टेढ़ी कर गाढ़ी दाल परोस दी। पर जब भक्तिन के उत्साह पर तुषारपात करते हुए लेखिका ने रुआँसे भाव से कहा- ‘यह क्या बनाया है?’ तब भक्तिन हतबुद्धि हो रही। और तर्क देते हुए कहने लगी कि रोटियाँ अच्छी सेंकने के प्रयास में कुछ अधिक खरी हो गई हैं; पर अच्छी हैं। तरकारियाँ थीं, पर जब दाल बनी है तब उनका क्या काम-शाम को दाल न बनाकर तरकारी बना दी जाएगी। और शहर के लोग क्या कलाबत्तू खाते हैं? फिर वह कुछ अनाड़िन या फूहड़ नहीं है। उसके ससुर, पितिया ससुर, अजिया सास आदि ने उसकी पाक-कुशलता के लिए न जाने कितने मौखिक प्रमाण-पत्र दे डाले हैं।

 

प्रश्न 9 – भक्तिन अपनी बातों के कैसे-कैसे तर्क देती थी?

उत्तर – लेखिका बताती है कि भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं। वह सत्यवादी हरिश्चंद्र नहीं बन सकती; पर ‘नरो वा कुंजरो वा’ कहने में भी विश्वास नहीं करती। लेखिका के इधर-उधर पड़े पैसे-रुपये, भंडार-घर की किसी मटकी में कैसे अंतरहित हो जाते हैं, यह रहस्य भी भक्तिन जानती है। पर, उस संबंध में किसी के संकेत करते ही वह उसे शास्त्रार्थ के लिए चुनौती दे डालती है, जिसको स्वीकार कर लेना किसी तर्क-शिरोमणि के लिए संभव नहीं। वह तर्क देती है कि लेखिका का घर उसका अपना घर ठहरा, पैसा-रुपया जो इधर-उधर पड़ा देखा, सँभालकर रख लिया। यह क्या चोरी है! भक्तिन के जीवन का परम कर्तव्य लेखिका को प्रसन्न रखना है-जिस बात से लेखिका को क्रोध आ सकता है, वह उसे बदलकर इधर-उधर करके बताती है, और तर्क देती है कि क्या यह झूठ है! इतनी चोरी और इतना झूठ तो धर्मराज महाराज में भी होगा, नहीं तो वे भगवान जी को कैसे प्रसन्न रख सकते और संसार को कैसे चला सकते! लेखिका को स्त्रियों का सिर मुंडवाना अच्छा नहीं लगता था, अतः उन्होंने भक्तिन को रोका। भक्तिन ने अकुंठित भाव से उत्तर दिया कि शास्त्र में लिखा है-‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध।’ 

 

प्रश्न 10 – पढ़ाई से बचने के लिए भक्तिन ने क्या तर्क देकर पीछा छुड़ाया?

उत्तर – लेखिका को समझ नहीं आता कि भक्तिन मूर्ख है या विद्या-बुद्धि का महत्त्व नहीं जानती, यह कहना असत्य कहना है। अपने विद्या के अभाव को भक्तिन  लेखिका की पढ़ाई-लिखाई पर अभिमान करके भर लेती है। एक बार जब लेखिका ने सब काम करनेवालों से अँगूठे के निशान के स्थान में हस्ताक्षर लेने का नियम बनाया तब भक्तिन बड़े कष्ट में पड़ गई, क्योंकि एक तो उससे पढ़ने की मुसीबत नहीं उठाई जा सकती थी, दूसरे सब गाड़ीवान दाइयों के साथ बैठकर पढ़ना उसकी वयोवृद्धता का अपमान था। अतः उसने कहना आरंभ किया कि उसकी मलकिन तो रात-दिन किताबों में गड़ी रहती हैं। अब अगर वह भी पढ़ने  लग जाए तो घर कामों को कौन करेगा। पढ़ाने वाले और पढ़ने वाले दोनों पर इस तर्क का ऐसा प्रभाव पड़ा कि भक्तिन इंस्पेक्टर के समान क्लास में घूम-घूमकर किसी के आ इ की बनावट किसी के हाथ की मंथरता, किसी की बुद्धि की मंदता पर टीका-टिप्पणी करने का अधिकार पा गई। उसे तो अँगूठा निशानी देकर वेतन लेना नहीं होता, इसी से बिना पढ़े ही वह पढ़ने वालों की गुरु बन बैठी। 

 

प्रश्न 11 – लेखिका के साथ भक्तिन उसकी छाया के समान रहती थी। स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर – लेखिका बताती हैं कि कभी उत्तर-पुस्तकों को बाँधकर, कभी अधूरे चित्र को कोने में रखकर, कभी रंग की प्याली धोकर और कभी चटाई को आँचल से झाड़कर वह जैसी सहायता पहुँचाती है, उससे भक्तिन का अन्य व्यक्तियों से अधिक बुद्धिमान होना प्रमाणित हो जाता है। जब कभी लेखिका किसी चित्र को पूरा करने में व्यस्त होने पर बार-बार भोजन के लिए बुलाने पर भी नहीं आतीं, तब भक्तिन कभी दही का शरबत, कभी तुलसी की चाय लेखिका को देकर लेखिका की भूख का कष्ट नहीं सहने देती। दिन भर के कार्य-भार से छुट्टी पाकर जब लेखिका कोई लेख समाप्त करने या भाव को छंदबद्ध करने बैठती हूँ, तब उसकी हिरनी सोना, कुत्ता बसंत और बिल्ली गोधूलि सभी सो जाते। परन्तु लेखिका को रात की निस्तब्धता में अकेली न छोड़ने के विचार से कोने में दरी के आसन पर बैठकर बिजली की चकाचौंध से आँखें मिचमिचाती हुई भक्तिन, प्रशांत भाव से जागरण करती है। वह ऊँघती भी नहीं थी, क्योंकि लेखिका के सिर उठाते ही उसकी धुँधली दृष्टि लेखिका की आँखों का अनुसरण करने लगती थी। यदि लेखिका सिरहाने रखे रैक की ओर देखती थी, तो वह उठकर आवश्यक पुस्तक का रंग पूछती, यदि लेखिका कलम रख देती, तो वह स्याही उठा लाती और यदि लेखिका कागज़ एक ओर सरका देती, तो वह दूसरी फाइल टटोलती।

इस तरह भक्तिन लेखिका से पहले जागती और लेखिका के सोने के बाद सोती और लेखिका के साथ छाया के समान साथ-साथ रहती। 

 

प्रश्न 12 – लेखिका को गाँव में भक्तिन कैसी सुविधाएँ देने की बात करती है?

उत्तर – युद्ध में जब वीरता के स्थान में पलायन-वृत्ति जगा दी थी, तब भक्तिन पहली ही बार सेवक की विनीत मुद्रा के साथ लेखिका से गाँव चलने का अनुरोध करने आई। और लेखिका को आश्वासन देते हुए कहने लगी कि वह लकड़ी रखने के मचान पर अपनी नयी धोती बिछाकर लेखिका के कपड़े रख देगी, दीवार में कीलें गाड़कर और उन पर तख्ते रखकर लेखिका की किताबें सजा देगी, धान के पुआल का गोंदरा बनवाकर और उस पर अपना कंबल बिछाकर वह लेखिका के सोने का प्रबंध करेगी। लेखिका के रंग, स्याही आदि को नयी हँडियों में सँजोकर रख देगी और कागज़-पत्रों को छींके में यथाविधि एकत्र कर देगी। और जब लेखिका ने रुपया न होने की बात कही तो भक्तिन ने परम रहस्य का उद्घाटन करने की मुद्रा बना कर और पोपला मुँह लेखिका के कान के पास लाकर हौले-हौले बताया कि उसके पास पाँच बीसी और पाँच रुपया गड़ा रखा है। उसी से वह सब प्रबंध कर लेगी। फिर लड़ाई तो कुछ अमरौती खाकर आई नहीं है। जब सब ठीक हो जाएगा, तब यहीं लौट आएँगे। 

 

प्रश्न 13 – कारागार से अत्यधिक डरने पर भी भक्तिन लेखिका के साथ जाने के लिए क्या तर्क देती है?

उत्तर – भक्तिन के संस्कार ऐसे हैं कि वह कारागार से वैसे ही डरती है, जैसे यमलोक से। ऐसी यात्रा में किसी को किसी के साथ जाने का अधिकार नहीं, यह आश्वासन भक्तिन के लिए कोई मूल्य नहीं रखता। वह लेखिका के न जाने की कल्पना से इतनी प्रसन्न नहीं होती, जितनी लेखिका के साथ न जा सकने की संभावना से अपमानित। वह तर्क देती कि भला ऐसा अंधेर हो सकता है। जहाँ मालिक वहाँ नौकर-मालिक को ले जाकर बंद कर देने में इतना अन्याय नहीं; पर नौकर को अकेले मुक्त छोड़ देने में पहाड़ के बराबर अन्याय है। ऐसा अन्याय होने पर भक्तिन को बड़े लाट तक लड़ना पड़ेगा। लेखिका बताती है कि चाहे कोई लड़े या न लड़े, पर जहाँ लेखिका से अलग करने की बात आए वहाँ भक्तिन का तो बिना लड़े काम ही नहीं चल सकता।

 

प्रश्न 14 – ‘भक्तिन की कहानी अधूरी है; पर उसे खोकर मैं इसे पूरी नहीं करना चाहती।’ इस कथन का क्या आशय है?

उत्तर – ‘भक्तिन की कहानी अधूरी है; पर उसे खोकर मैं इसे पूरी नहीं करना चाहती।’ लेखिका का यह कथन स्पष्ट करता है कि लेखिका को भी भक्तिन से अगाध प्रेम है और वह भी भक्तिन को अपने आप से अलग नहीं करना चाहती और भक्तिन की मृत्यु के दुखद अंत के साथ अपने लेख को समाप्त नहीं करना चाहती। 

 

प्रश्न 15 – पाठ के आधार पर भक्तिन की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर – ‘भक्तिन’ लेखिका की सेविका है और लेखिका ने इस लेख में भक्तिन के जीवन-संघर्ष का वर्णन किया है। पाठ में भक्तिन के चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ उजागर होती हैं – 

भक्तिन का व्यक्तित्व – भक्तिन एक अधेड़ उम्र की महिला है। उसका कद छोटा व शरीर दुबला-पतला है। उसके होंठ पतले हैं तथा आँखें छोटी हैं।

परिश्रमी – भक्तिन एक परिश्रमी महिला है। ससुराल में भी उसने बहुत मेहनत की है। वह घर, खेत, पशुओं आदि का सारा कार्य अकेले संभालती है। लेखिका के घर में भी वह उसके सारे कामकाज को पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से करती है। वह लेखिका के हर कार्य में सहायता करती है।

स्वाभिमानिनी – भक्तिन बेहद स्वाभिमानिनी महिला है। पिता की मृत्यु पर विमाता के कठोर व्यवहार से उसने मायके में पानी पीना भी सही नहीं समझा और मायके जाना छोड़ दिया। पति की मृत्यु के बाद उसने दुसरा विवाह नहीं किया तथा स्वयं मेहनत करके घर चलाया। जमींदार द्वारा अपमानित किए जाने पर वह गाँव छोड़कर शहर आ गई।

सच्ची सेविका – भक्तिन में सच्चे सेवक के सभी गुण हैं। लेखिका ने उसे हनुमान जी से स्पद्र्धा करने वाली बताया है। वह छाया की तरह लेखिका के साथ रहती है तथा उसका गुणगान करती है। जेल से डरने के बावजूद भी वह लेखिका के साथ जेल जाने के लिए भी तैयार है। वह युद्ध, यात्रा आदि में हर समय उसके साथ रहना चाहती है।

 

भक्तिन पाठ पर आधारित कुछ बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर (Multiple Choice Questions)

 

हुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) एक प्रकार का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन है जिसमें एक व्यक्ति को उपलब्ध विकल्पों की सूची में से एक या अधिक सही उत्तर चुनने के लिए कहा जाता है। एक एमसीक्यू कई संभावित उत्तरों के साथ एक प्रश्न प्रस्तुत करता है।

 

प्रश्न 1 – “भक्तिन” पाठ की लेखिका कौन है?

(क) मीराबाई जी 

(ख) महादेवी शर्मा जी

(ग) महालक्ष्मी वर्मा जी 

(घ) महादेवी वर्मा जी

उत्तर – (घ) महादेवी वर्मा जी

 

प्रश्न 2 – महादेवी वर्मा जी से भक्तिन कितने वर्ष बड़ी थी?

(क) लगभग 25 वर्ष

(ख) लगभग 35 वर्ष

(ग) लगभग 45 वर्ष

(घ) लगभग 50 वर्ष

उत्तर – (क) लगभग 25 वर्ष

 

प्रश्न 3 – भक्तिन का वास्तविक नाम क्या था? 

(क) लछमिम (लक्ष्मी)

(ख) लछमिन (लक्ष्मी)

(ग) लछिमिन (लक्ष्मी)

(घ) लछिमन (लक्ष्मी)

उत्तर – (ख) लछमिन (लक्ष्मी)

 

प्रश्न 4 – भक्तिन किस गांव में बियाही गई थी?

(क) ड़ँडिया

(ख) हिडिया

(ग) हँडिया

(घ) हँडिसा 

उत्तर – (ग) हँडिया

 

प्रश्न 5 – जब भक्तिन का विवाह हुआ तो उसकी आयु क्या थी? 

(क) 5 वर्ष 

(ख) 9 वर्ष

(ग) 19 वर्ष

(घ) 6 वर्ष

उत्तर – (क) 5 वर्ष 

 

प्रश्न 6 – मृत्यु के समय भक्तिन के पति की क्या उम्र थी?

(क) 32 वर्ष 

(ख) 34 वर्ष 

(ग) 36 वर्ष 

(घ) 46 वर्ष 

उत्तर – (ग) 36 वर्ष 

 

प्रश्न 7 – जब भक्तिन के पति की मृत्यु हुई थी, उस समय भक्तिन की उम्र कितनी थी?

(क) 19 वर्ष

(ख) 29 वर्ष

(ग) 39 वर्ष

(घ) 9 वर्ष

उत्तर – (ख) 29 वर्ष

 

प्रश्न 8 – लछमिन से भक्तिन नामकरण किसके द्वारा किया गया था? 

(क) लछमिन के पति 

(ख) लछमिन की माता 

(ग) स्वयं ही 

(घ) महादेवी वर्मा

उत्तर – (घ) महादेवी वर्मा

 

प्रश्न 9 – भक्तिन ने लेखिका से क्या प्रार्थना की थी? 

(क) उसे उसके वास्तविक नाम से न बुलाने की

(ख) उसे उसका वेतन समय पर देने की

(ग) उसके काम में दखल न देने की

(घ) उसे उसके वास्तविक नाम से ही बुलाने की

उत्तर – (क) उसे उसके वास्तविक नाम से न बुलाने की

 

प्रश्न 10 – भक्तिन ने लेखिका से उसके असली नाम का प्रयोग न करने की विनती क्यों की?

(क) क्योंकि उसे अपना वास्तविक नाम पसंद नहीं था 

(ख) क्योंकि वह अपने नाम के विपरीत बहुत गरीब थी

(ग) क्योंकि वह अपना परिचय किसी और को नहीं देना चाहती थी

(घ) क्योंकि वह अपने नाम को सभी से छिपाना चाहती थी

उत्तर – (ख) क्योंकि वह अपने नाम के विपरीत बहुत गरीब थी

 

प्रश्न 11 – भक्तिन के द्वारा बनाया गया भोजन कैसा होता था?

(क) सीधा-साधा, सरल व तामसिक 

(ख) सीधा-साधा, सरल व राजसी 

(ग) सीधा-साधा, तीखा व तामसिक 

(घ) सीधा-साधा, सरल व सात्विक

उत्तर – (घ) सीधा-साधा, सरल व सात्विक

 

प्रश्न 12 – भक्तिन का साथ लेखिका को किसके समान लगता था?  

(क) सहेली के समान

(ख) बहन के समान

(ग) छाया के समान

(घ) अंधरे व् उजाले के समान

उत्तर – (ग) छाया के समान

 

प्रश्न 13 – ससुराल में भक्तिन के साथ उसके पति का व्यवहार कैसा था?

(क) बहुत बुरा 

(ख) बहुत क्रूर 

(ग) बहुत अच्छा

(घ) बहुत विपरीत 

उत्तर – (ग) बहुत अच्छा

 

प्रश्न 14 – जेठानियों का भक्तिन के साथ कैसा व्यवहार था?

(क) क्रूरता भरा

(ख) प्रेम भरा

(ग) अनुराग भरा

(घ) स्नेह भरा

उत्तर – (क) क्रूरता भरा

 

प्रश्न 15 – ससुराल वालों भक्तिन का पुनर्विवाह क्यों करना चाहते थे? 

(क) ताकि वो भक्तिन का घर हड़प सकें

(ख) ताकि वो भक्तिन की संपत्ति हड़प सकें

(ग) ताकि वो भक्तिन की जमीन हड़प सकें

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 16 – रोने धोने के अपशकुन से बचने के लिए सास ने भक्तिन को कौन सी खबर नहीं दी?  

(क) उसके पिता की मृत्यु की खबर

(ख) उसके भाई की मृत्यु की खबर

(ग) उसकी माता की मृत्यु की खबर

(घ) उसके पति की मृत्यु की खबर

उत्तर – (क) उसके पिता की मृत्यु की खबर

 

प्रश्न 17 – सेवक धर्म में भक्तिन की तुलना किससे की गई है?

(क) श्रवण कुमार से

(ख) भरत जी से

(ग) लक्ष्मण जी से

(घ) हनुमान जी से

उत्तर – (घ) हनुमान जी से

 

प्रश्न 18 – लेखिका को बिना बताएं भक्तिन घर में बिखरे हुए पैसों को उठाकर कहाँ रख देती थी?

(क) भंडार गृह में

(ख) मटकी में

(ग) भंडार गृह की मटकी में

(घ) अपने पास में

उत्तर – (ग) भंडार गृह की मटकी में

 

प्रश्न 19 – लेखिका जब देर रात तक काम करती थी तो भक्तिन कहां बैठी रहती थी?

(क) जमीन पर दरी बिछा कर 

(ख) कमरे के कोने में 

(ग) जमीन पर पटला बिछा कर 

(घ) कमरे के बाहर 

उत्तर – (क) जमीन पर दरी बिछा कर 

 

प्रश्न 20 – लेखिका जब  बहुत व्यस्त होती थी तो भक्तिन उसको क्या बना कर देती थी?

(क) दही का शरबत या अदरक की चाय 

(ख) तुलसी की चाय या चकुंदर का शरबत 

(ग) मट्ठे का शरबत या तुलसी की चाय 

(घ) दही का शरबत या तुलसी की चाय 

उत्तर – (घ) दही का शरबत या तुलसी की चाय 

 

प्रश्न 21 – लगान न चुका पाने के कारण भक्तिन को क्या सजा मिली थी? 

(क) उसे दिन भर खड़ा रहना पड़ा

(ख) उसे दिन भर धूप में खड़ा रहना पड़ा

(ग) उसे दिन भर नंगे पाँव खड़ा रहना पड़ा

(घ) उसे दिन भर खाना नहीं दिया गया 

उत्तर – (ख) उसे दिन भर धूप में खड़ा रहना पड़ा

 

प्रश्न 22 – भक्तिन के जीवन का चौथा परिच्छेद कब शुरू होता है?

(क) उसके शादी करने से बाद 

(ख) उसके पति की मृत्यु के बाद  

(ग) लेखिका के घर नौकरी करने से बाद 

(घ) लेखिका के द्वारा उसे स्वीकार करने के बाद 

उत्तर – (ग) लेखिका के घर नौकरी करने से बाद 

 

प्रश्न 23 – पहले दिन भक्तिन ने लेखिका के लिए खाने में क्या बनाया? 

(क) गाढी दाल और चार मोटी रोटियां

(ख) गाढी दाल और दो मोटी रोटियां

(ग) गाढी तरकारी और चार मोटी रोटियां

(घ) गाढी तरकारी और तीन मोटी रोटियां

उत्तर – (क) गाढी दाल और चार मोटी रोटियां

 

प्रश्न 24 – भक्तिन को सबसे ज्यादा डर किससे लगता था?

(क) गाँव वापिस जाने से 

(ख) लेखिका को छोड़ने से 

(ग) जेल जाने से 

(घ) जेलाधिकारी से मिलने से 

उत्तर – (ग) जेल जाने से 

 

प्रश्न 25 – लेखिका के साथ जेल जाने के लिए, भक्तिन  किससे लड़ने को भी तैयार थी?

(क) गाँव वालों से

(ख) वायसराय (लाट) से

(ग) परिजनों से

(घ) कवियों व् लेखकों से

उत्तर – (ख) वायसराय (लाट) से

 

प्रश्न 26 – लोगों के यह पूछने पर कि, भक्तिन लेखिका के घर में कितने समय से काम कर रही है? भक्तिन उन्हें क्या जवाब देती थी?

(क) पिछले 25 बरस से

(ख) पिछले 40 बरस से

(ग) पिछले 30 बरस से

(घ) पिछले 50 बरस से 

उत्तर – (घ) पिछले 50 बरस से 

 

प्रश्न 27 – भक्तिन की कहानी को लेखिका अधूरी रखना चाहती थी। क्यों? 

(क) क्योंकि वह भक्तिन को खोना नहीं चाहती थी

(ख) क्योंकि वह भक्तिन को गाँव भेजना चाहती थी

(ग) क्योंकि वह भक्तिन को अपने पास ही रखना चाहती थी

(घ) क्योंकि वह भक्तिन को पसंद नहीं करती  थी

उत्तर – (क) क्योंकि वह भक्तिन को खोना नहीं चाहती थी

 

प्रश्न 28 – भक्तिन ने गाँव में कितने रुपए छुपाकर रखे थे? 

(क) पचास बीसी और पांच रुपया

(ख) पांच बीसी और सात रुपया

(ग) पांच बीसी और दो रुपया

(घ) पांच बीसी और पांच रुपया

उत्तर – (घ) पांच बीसी और पांच रुपया

 

प्रश्न 29 – भक्तिन व् लेखिका दोनों में से कोई किसको ठुकरा नहीं पाएंगे?  

(क) कविता को 

(ख) मौत को 

(ग) पढ़ाई को 

(घ) युद्ध को 

उत्तर – (ख) मौत को

 

प्रश्न 30 – “भक्तिन की कहानी अधूरी है पर उसे खोकर मैं इसे पूरा नहीं करना चाहती”।  लेखिका के द्वारा ऐसा कहने के पीछे क्या कारण है?

(क) भक्तिन का गाँव जाना स्वीकार ना करना

(ख) भक्तिन के व्यवहार को पसंद ना करना

(ग) भक्तिन के अंत को स्वीकार ना करना

(घ) भक्तिन के बनाए खाने को स्वीकार ना करना

उत्तर – (ग) भक्तिन के अंत को स्वीकार ना करना

 

भक्तिन पाठ पर सार-आधारित प्रश्न Extract Based Questions

सारआधारित प्रश्न बहुविकल्पीय किस्म के होते हैं, और छात्रों को पैसेज को ध्यान से पढ़कर प्रत्येक प्रश्न के लिए सही विकल्प का चयन करना चाहिए। (Extract-based questions are of the multiple-choice variety, and students must select the correct option for each question by carefully reading the passage.)

 

1 – 

सेवक-धर्म में हनुमान जी से स्पद्र्धा करने वाली भक्तिन किसी अंजना की पुत्री न होकर एक अनामधन्या गोपालिका की कन्या है-नाम है लछमिन अर्थात लक्ष्मी। पर जैसे मेरे नाम की विशालता मेरे लिए दुर्वह है, वैसे ही लक्ष्मी की समृद्ध भक्तिन के कपाल की कुंचित रेखाओं में नहीं बँध सकी। वैसे तो जीवन में प्राय: सभी को अपने-अपने नाम का विरोधाभास लेकर जीना पड़ता है; पर भक्तिन बहुत समझदार है, क्योंकि वह अपना समृद्धसूचक नाम किसी को बताती नहीं। केवल  जब नौकरी की खोज में आई थी, तब ईमानदारी का परिचय देने के लिए उसने शेष इतिवृत्त के साथ यह भी बता दिया; पर इस प्रार्थना के साथ कि मैं कभी नाम का उपयोग न करूँ। उपनाम रखने की प्रतिभा होती, तो मैं सबसे पहले उसकाप्रयोग अपने ऊपर करती, इस तथ्य को वह देहातिन क्या जाने, इसी से जब मैंने कंठी माला देखकर उसका नया नामकरण किया तब वह भक्तिन-जैसे कवित्वहीन नाम को पाकर भी गदगद हो उठी।

 

प्रश्न 1 – सेवक-धर्म में भक्तिन किस्से स्पद्र्धा करने वाली मानी गई है?

(क) भरत जी से 

(ख) हनुमान जी से 

(ग) लक्ष्मण जी से 

(घ) लेखिका से 

उत्तर – (ख) हनुमान जी से 

 

प्रश्न 2 – भक्तिन का वास्तविक नाम क्या था?

(क) लछीमिन अर्थात लक्ष्मी

(ख) लछमनी अर्थात लक्ष्मी

(ग) लछमिन अर्थात लक्ष्मी

(घ) लछमि अर्थात लक्ष्मी

उत्तर – (ग) लछमिन अर्थात लक्ष्मी

 

प्रश्न 3 – भक्तिन ने लेखिका से क्या प्रार्थना की?

(क) लेखिका उसे अच्छा वेतन दें 

(ख) लेखिका उसे उसके काम में न टोके 

(ग) लेखिका उससे अच्छा व्यवहार करे 

(घ) लेखिका उसे उसके वास्तविक नाम से न पुकारे 

उत्तर – (घ) लेखिका उसे उसके वास्तविक नाम से न पुकारे

 

प्रश्न 4 – भक्तिन अपना वास्तविक नाम किसी को क्यों नहीं बताती थी?

(क) क्योंकि उसे उसका वास्तविक नाम पसंद नहीं था 

(ख) क्योंकि उसका नाम उसके आर्थिक जीवन के विपरीत था 

(ग) क्योंकि यह नाम उसकी सौतेली माँ ने उसे दिया था 

(घ) क्योंकि उसे भक्तिन नाम ज्यादा पसंद था 

उत्तर – (ख) क्योंकि उसका नाम उसके आर्थिक जीवन के विपरीत था 

 

प्रश्न 5 – लछमिन को भक्तिन नाम किसने दिया था?

(क) पिता ने 

(ख) माता ने 

(ग) उसने स्वयं  

(घ) लेखिका ने 

उत्तर – (घ) लेखिका ने 

 

2

पाँच वर्ष की वय में उसे हँडिया ग्राम के एक संपन्न गोपालक की सबसे छोटी पुत्रवधू बनाकर पिता ने शास्त्र से दो पग आगे रहने की ख्याति कमाई और नौ वर्षीया युवती का गौना देकर विमाता ने, बिना माँगे पराया धन लौटाने वाले महाजन का पुण्य लूटा। पिता का उस पर अगाध प्रेम होने के कारण स्वभावत: ईष्यालु और संपत्ति की रक्षा में सतर्क विमाता ने उनके मरणांतक रोग का समाचार तब भेजा, जब वह मृत्यु की सूचना भी बन चुका था। रोने-पीटने के अपशकुन से बचने के लिए सास ने भी उसे कुछ न बताया। बहुत दिन से नैहर नहीं गई, सो जाकर देख आवे, यही कहकर और पहना-उढ़ाकर सास ने उसे विदा कर दिया। इस अप्रत्याशित अनुग्रह ने उसके पैरों में जो पंख लगा दिए थे, वे गाँव की सीमा में पहुँचते ही झड़ गए। ‘हाय लछमिन अब आई’ की अस्पष्ट पुनरावृत्तियाँ और स्पष्ट सहानुभूतिपूर्ण दृष्टियाँ उसे घर तक ठेल ले गई। पर वहाँ न पिता का चिहन शेष था, न विमाता के व्यवहार में शिष्टाचार का लेश था। दुख से शिथिल और अपमान से जलती हुई वह उस घर में पानी भी बिना पिए उलटे पैरों ससुराल लौट पड़ी। सास को खरी-खोटी सुनाकर उसने विमाता पर आया हुआ क्रोध शांत किया और पति के ऊपर गहने फेंक-फेंककर उसने पिता के चिर विछोह की मर्मव्यथा व्यक्त की।

 

प्रश्न 1 – भक्तिन का विवाह किस उम्र में हो गया था?

(क) 9 

(ख) 5 

(ग) 7 

(घ) 3 

उत्तर – (ख) 5

 

प्रश्न 2 – सास ने भक्तिन को उसके पिता की मृत्यु के बारे में क्यों नहीं बताया?

(क) ताकि उसे पिता की मौत का सदमा न लगे 

(ख) ताकि उसे भक्तिन को न संभालना पड़े 

(ग) रोने-पीटने के अपशकुन से बचने के लिए

(घ) ताकि उन्हें भक्तिन के साथ न जाना पड़े 

उत्तर – (ग) रोने-पीटने के अपशकुन से बचने के लिए

 

प्रश्न 3 – क्या कहकर भक्तिन की सास ने उसे विदा किया। 

(क) बहुत दिन से नैहर नहीं गई

(ख) जाकर नैहर देख आवे

(ग) बहुत दिन से पिता को नहीं देखा, जा देख आवे

(घ) बहुत दिन से नैहर नहीं गई, सो जाकर देख आवे

उत्तर – (घ) बहुत दिन से नैहर नहीं गई, सो जाकर देख आवे

 

प्रश्न 4 – नैहर जा कर भक्तिन को क्या पता चला? 

(क) उसके पिता पहले ही दुनिया छोड़ चुके 

(ख) उसकी सम्पति को हड़प लिया गया 

(ग) उसकी विमाता की मृत्यु हो गई 

(घ) उसकी सास ने उसे झूठ बोलै 

उत्तर – (क) उसके पिता पहले ही दुनिया छोड़ चुके 

 

प्रश्न 5 – भक्तिन ने पिता के चिर विछोह की मर्मव्यथा कैसे व्यक्त की?

(क) सास को खरी-खोटी सुनाई 

(ख) विमाता पर आया हुआ क्रोध सास पर शांत किया

(ग) पति के ऊपर गहने फेंक-फेंककर मारे 

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

3 – 

जीवन के दूसरे परिच्छेद में भी सुख की अपेक्षा दुख ही अधिक है। जब उसने गेहुँए रंग और बटिया जैसे मुख वाली पहली कन्या के दो संस्करण और कर डाले तब सास और जिठानियों ने ओठ बिचकाकर उपेक्षा प्रकट की। उचित भी था, क्योंकि सास तीन-तीन कमाऊ वीरों की विधात्री बनकर मचिया के ऊपर विराजमान पुरखिन के पद पर अभिषिक्त हो चुकी थी और दोनों जिठानियाँ काक-भुशंडी जैसे काले लालों की क्रमबद्ध सृष्टि करके इस पद के लिए उम्मीदवार थीं। छोटी बहू के लीक छोड़कर चलने के कारण उसे दंड मिलना आवश्यक हो गया।

जिठानियाँ बैठकर लोक-चर्चा करतीं और उनके कलूटे लड़के धूल उड़ाते; वह मट्ठा फेरती, कूटती, पीसती, राँधती और उसकी नन्ही लड़कियाँ गोबर उठातीं, कंडे पाथतीं। जिठानियाँ अपने भात पर सफेद राब रखकर गाढ़ा दूध डालतीं और अपने लड़कों को औटते हुए दूध पर से मलाई उतारकर खिलातीं। वह काले गुड़ की डली के साथ कठौती में मट्ठा पाती और उसकी लड़कियाँ चने-बाजरे की घुघरी चबातीं। 

 

प्रश्न 1 – सास और जिठानियाँ भक्तिन की उपेक्षा क्यों करती थी?

(क) क्योंकि उसका पति उससे अच्छा व्यवहार करता था 

(ख) क्योंकि उसके नाम अच्छी खासी सम्पति थी 

(ग) क्योंकि भक्तिन ने तीन लड़कियों को जन्म दिया था 

(घ) क्योंकि भक्तिन घर के सभी कामों में कुशल थी 

उत्तर – (ग) क्योंकि भक्तिन ने तीन लड़कियों को जन्म दिया था

 

प्रश्न 2 – जेठानियों को सम्मान क्यों मिलता था?  

(क) क्योंकि वे भक्तिन से ज्यादा समृद्ध परिवार से थी 

(ख) काक-भुशंडी जैसे काले लालों को जन्म देने से 

(ग) क्योंकि वे घर का सारा काम संभालती थी 

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (ख) काक-भुशंडी जैसे काले लालों को जन्म देने से 

 

प्रश्न 3 – छोटी बहू ने कौन -सा अपराथ किया था?

(क) छोटी बहू लछमिन ने तीन लड़को को जन्म देकर घर की पुत्री जन्म देने की लीक को तोड़ा था

(ख) छोटी बहू लछमिन ने तीन लड़कियों को जन्म देकर सास का घमंड तोड़ा था

(ग) छोटी बहू लछमिन घर का कोई काम नहीं करती थी जिस कारण उसे अपराधी समझा गया 

(घ) छोटी बहू लछमिन ने तीन लड़कियों को जन्म देकर घर की पुत्र जन्म देने की लीक को तोड़ा था

उत्तर – (घ) छोटी बहू लछमिन ने तीन लड़कियों को जन्म देकर घर की पुत्र जन्म देने की लीक को तोड़ा था

 

प्रश्न 4 – भक्तिन और उसकी लड़कियाँ क्या-क्या काम करती थी?

(क) वह मट्ठा फेरती, कूटती, पीसती, राँधती और लड़कियाँ गोबर उठातीं, कंडे पाथतीं

(ख) वह बैठी रहती और उसकी नन्ही लड़कियाँ गोबर उठातीं, कंडे पाथतीं

(ग) वह मट्ठा फेरती, कूटती, पीसती, राँधती और उसकी नन्ही लड़कियाँ बैठी रहती 

(घ) वे सभी कोई काम नहीं करती थी। घर पर केवल बैठी रहती थी 

उत्तर – (क) वह मट्ठा फेरती, कूटती, पीसती, राँधती और लड़कियाँ गोबर उठातीं, कंडे पाथतीं

 

प्रश्न 5 – भक्तिन और लड़कियों को कैसा भोजन दिया जाता था? 

(क) भक्तिन भात पर सफेद राब रखकर गाढ़ा दूध डालतीं और उसकी लड़कियाँ चने-बाजरे की घुघरी चबातीं 

(ख) भक्तिन भात पर सफेद राब रखकर गाढ़ा दूध डालतीं और लड़कियों को दूध पर से मलाई उतारकर खिलातीं

(ग) भक्तिन काले गुड़ की डली के साथ कठौती में मट्ठा पाती और उसकी लड़कियाँ चने-बाजरे की घुघरी चबातीं 

(घ) भक्तिन काले गुड़ की डली के साथ कठौती में मट्ठा पाती और लड़कियों को दूध पर से मलाई उतारकर खिलातीं

उत्तर – (ग) भक्तिन काले गुड़ की डली के साथ कठौती में मट्ठा पाती और उसकी लड़कियाँ चने-बाजरे की घुघरी चबातीं 

 

4 – 

इस दंड-विधान के भीतर कोई ऐसी धारा नहीं थी, जिसके अनुसार खोटे सिक्कों की टकसाल-जैसी पत्नी से पति को विरक्त किया जा सकता। सारी चुगली-चबाई की परिणति उसके पत्नी-प्रेम को बढ़ाकर ही होती थी। जिठानियाँ बात-बात पर धमाधम पीटी-कूटी जातीं, पर उसके पति ने उसे कभी उँगली भी नहीं छुआई। वह बड़े बाप की बड़ी बात वाली बेटी को पहचानता था। इसके अतिरिक्त परिश्रमी, तेजस्विनी और पति के प्रति रोम-रोम से सच्ची पत्नी को वह चाहता भी बहुत रहा होगा, क्योंकि उसके प्रेम के बल पर ही पत्नी ने अलगोझा करके सबको अँगूठा दिखा दिया। काम वही करती थी, इसलिए गाय-भैंस, खेत-खलिहान, अमराई के पेड़ आदि के संबंध में उसी का ज्ञान बहुत बढ़ा-चढ़ा था। उसने छाँट-छाँट कर, ऊपर से असंतोष की मुद्रा के साथ और भीतर से पुलकित होते हुए जो कुछ लिया, वह सबसे अच्छा भी रहा, साथ ही परिश्रमी दंपति के निरंतर प्रयास से उसका सोना बन जाना भी स्वाभाविक हो गया।

धूमधाम से बड़ी लड़की का विवाह करने के उपरांत, पति ने घरौंदे से खेलती हुई दो कन्याओं और कच्ची गृहस्थी का भार उनतीस वर्ष की पत्नी पर छोड़कर संसार से विदा ली। जब वह मरा, तब उसकी अवस्था छत्तीस वर्ष से कुछ ही अधिक रही होगी; पर पत्नी आज उसे बुढ़ऊ कह कर स्मरण करती है। भक्तिन सोचती है कि जब वह बूढ़ी हो गई, तब क्या परमात्मा के यहाँ वे भी न बुढ़ा गए होंगे, अतः उन्हें बुढ़ऊ न कहना उनका घोर अपमान है।

 

प्रश्न 1 – पद्यांश में खोटा-सिक्का किसके लिए कहा गया है? 

(क) भक्तिन के लिए 

(ख) जेठानियों के लिए 

(ग) लड़कियों के लिए 

(घ) सास के व्यवहार के लिए 

उत्तर – (ग) लड़कियों के लिए

 

प्रश्न 2 – किसके बल पर भक्तिन ने सबको अँगूठा दिखा दिया?

(क) अपने परिश्रम के बल पर 

(ख) पति के प्रेम के बल पर  

(ग) लड़कियों के बल पर 

(घ) सम्पति के बल पर 

उत्तर – (ख) पति के प्रेम के बल पर  

 

प्रश्न 3 – ‘बड़े बाप की बड़ी बात वाली बेटी’ किसे कहा गया है?

(क) भक्तिन की जेठानियों को 

(ख) भक्तिन की लड़कियों को 

(ग) भक्तिन को 

(घ) भक्तिन की सास को 

उत्तर – (ग) भक्तिन को 

 

प्रश्न 4 – घर का सारा काम करने से भक्तिन को क्या फायदा हुआ?

(क) लेखिका के घर में काम करने में आसानी हो गई 

(ख) गाय-भैंस, खेत-खलिहान, अमराई के पेड़ आदि छाँट-छाँट कर ले लिया 

(ग) घर के सभी कामों में कुशलता हासिल कर ली 

(घ) बेटियों को भी घर का सारा काम सीखा दिया 

उत्तर – (ख) गाय-भैंस, खेत-खलिहान, अमराई के पेड़ आदि छाँट-छाँट कर ले लिया 

 

प्रश्न 5 – भक्तिन किसे बुढ़ऊ कह कर स्मरण करती है?

(क) पिता 

(ख) ससुर 

(ग) जेठ 

(घ) पति 

उत्तर – (घ) पति 

 

5 – 

उसने ससुर, अजिया ससुर और जाने कै पीढ़ियों के ससुरगणों की उपार्जित जगह-ज़मीन में से सुई की नोक बराबर भी देने की उदारता नहीं दिखाई। इसके अतिरिक्त गुरु से कान फुँकवा, कंठी बाँध और पति के नाम पर घी से चिकने केशों को समर्पित कर अपने कभी न टलने की घोषणा कर दी। भविष्य में भी संपत्ति सुरक्षित रखने के लिए उसने छोटी लड़कियों के हाथ पीले कर उन्हें ससुराल पहुँचाया और पति के चुने हुए बड़े दामाद को घरजमाई बनाकर रखा। इस प्रकार उसके जीवन का तीसरा परिच्छेद आरंभ हुआ।

भक्तिन का दुर्भाग्य भी उससे कम हठी नहीं था, इसी से किशोरी से युवती होते ही बड़ी लड़की भी विधवा हो गई। भइयहू से पार न पा सकने वाले जेठों और काकी को परास्त करने के लिए कटिबद्ध जिठौतों ने आशा की एक किरण देख पाई। विधवा बहिन के गठबंधन के लिए बड़ा जिठौत अपने तीतर लड़ाने वाले साले को बुला लाया, क्योंकि उसका गठबंधन हो जाने पर सब कुछ उन्हीं के अधिकार में रहता। भक्तिन की लड़की भी माँ से कम समझदार नहीं थी, इसी से उसने वर को नापसंद कर दिया। बाहर के बहनोई का आना चचेरे भाइयों के लिए सुविधाजनक नहीं था, अत: यह प्रस्ताव जहाँ-का-तहाँ रह गया। तब वे दोनों माँ-बेटी खूब मन लगाकर अपनी संपत्ति की देख-भाल करने लगीं और ‘मान न मान मैं तेरा मेहमान’ की कहावत चरितार्थ करने वाले वर के समर्थक उसे किसी-न-किसी प्रकार पति की पदवी पर अभिषिक्त करने का उपाय सोचने लगे।

 

प्रश्न 1 – भक्तिन ने अपने कभी न टलने की घोषणा कैसे की?

(क) गुरु से कान फुँकवा कर 

(ख) कंठी बाँध कर

(ग) केशों को समर्पित कर

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

प्रश्न 2 – भविष्य में भी संपत्ति सुरक्षित रखने के लिए भक्तिन ने क्या कदम उठाया? 

(क) उसने छोटी लड़कियों को ससुराल पहुँचाया 

(ख) बड़े दामाद को घरजमाई बनाकर रखा

(ग) (क) और (ख) दोनों 

(घ) केवल (ख)

उत्तर – (ग) (क) और (ख) दोनों 

 

प्रश्न 3 – सम्पति पर अधिकार करने के लिए भक्तिन के ससुराल वालों ने क्या उपाय किया?

(क) भक्तिन और उसकी लड़की को भगाने का उपाय करने लगे 

(ख) तीतर लड़ाने वाले साले से भक्तिन की लड़की की शादी कराने का उपाय  करने लगे 

(ग) भक्तिन और उसकी लड़की को मार डालने का उपाय करने लगे 

(घ) भक्तिन की लड़की को बदनाम कर उन्हें अपमानित कर गाँव छोड़ने के लिए मजबूर करने लगे 

उत्तर – (ख) तीतर लड़ाने वाले साले से भक्तिन की लड़की की शादी कराने का उपाय  करने लगे 

 

प्रश्न 4 – भक्तिन का दुर्भाग्य भी उससे कम हठी नहीं था, क्यों?

(क) क्योंकि भक्तिन भी हठी थी 

(ख) क्योंकि उसकी लड़की बदनाम हो गई थी 

(ग) क्योंकि उसकी सम्पति नष्ट हो गई थी 

(घ) क्योंकि उसकी लड़की भी विधवा हो गई थी 

उत्तर – (घ) क्योंकि उसकी लड़की भी विधवा हो गई थी 

 

प्रश्न 5 – भक्तिन के ससुराल वाले उसकी लड़की की दूसरी शादी क्यों करवाना चाहते थे?

(क) ताकि वो घर छोड़ कर चली जाए 

(ख) ताकि उनकी सम्पति उन्हें मिल जाए 

(ग) ताकि भक्तिन अकेली पड़ जाए 

(घ) ताकि वे पुण्य कमा सकें 

उत्तर – (ख) ताकि उनकी सम्पति उन्हें मिल जाए 

 

6 – 

तीतरबाज युवक कहता था, वह निमंत्रण पाकर भीतर गया और युवती उसके मुख पर अपनी पाँचों उँगलियों के उभार में इस निमंत्रण के अक्षर पढ़ने का अनुरोध करती थी। अंत में दूध-का-दूध पानी-का-पानी करने के लिए पंचायत बैठी और सबने सिर हिला-हिलाकर इस समस्या का मूल कारण कलियुग को स्वीकार किया। अपीलहीन फैसला हुआ कि चाहे उन दोनों में एक सच्चा हो चाहे दोनों झूठे; जब वे एक कोठरी से निकले, तब उनका पति-पत्नी के रूप में रहना ही कलियुग के दोष का परिमार्जन कर सकता है। अपमानित बालिका ने होंठ काटकर लहू निकाल लिया और माँ ने आग्नेय नेत्रों से गले पड़े दामाद को देखा। संबंध कुछ सुखकर नहीं हुआ, क्योंकि दामाद अब निश्चित होकर तीतर लड़ाता था और बेटी विवश क्रोध से जलती रहती थी। इतने यत्न से सँभाले हुए गाय-ढोर, खेती-बारी जब पारिवारिक द्वेष में ऐसे झुलस गए कि लगान अदा करना भी भारी हो गया, सुख से रहने की कौन कहे। अंत में एक बार लगान न पहुँचने पर जमींदार ने भक्तिन को बुलाकर दिन भर कड़ी धूप में खड़ा रखा। यह अपमान तो उसकी कर्मठता में सबसे बड़ा कलंक बन गया, अत: दूसरे ही दिन भक्तिन कमाई के विचार से शहर आ पहुँची।

 

प्रश्न 1 – तीतरबाज युवक ने अपने पक्ष में क्या कहा?

(क) वह युवती से विवाह करना चाहता है 

(ख) वह जबरदस्ती अंदर घुसा 

(ग) वह निमंत्रण पाकर भीतर गया 

(घ) वह निर्दोष है युवती दोषी है 

उत्तर – (ग) वह निमंत्रण पाकर भीतर गया 

 

प्रश्न 2 – भक्तिन की बेटी के निर्दोष होने का क्या प्रमाण था?

(क) वह युवक तीतरबाज था 

(ख) वह युवक जबरदस्ती अंदर घुसा था 

(ग) यह सब परिजनों का किया धरा था 

(घ) युवक के गाल पर पाँच उँगलियों के निशान थे 

उत्तर – (घ) युवक के गाल पर पाँच उँगलियों के निशान थे 

 

प्रश्न 3 – पंचायत ने समस्या का मूल कारण किसे माना?

(क) भक्तिन को 

(ख) कलियुग को 

(ग) युवक को 

(घ) युवती को 

उत्तर – (ख) कलियुग को 

 

प्रश्न 4 – बेमेल विवाह का क्या परिणाम हुआ?

(क) विवाह से क्लेश उत्पन्न हो गया 

(ख) विवाह के क्लेश के कारण खेत, पशु आदि सब का सर्वनाश हो गया

(ग) लगान अदा करने के पैसे भी न रहे

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

प्रश्न 5 – भक्तिन शहर क्यों गई? 

(क) अपमान व कमाई के विचार से 

(ख) जबरदस्ती के दामाद से दूर जाने के लिए 

(ग) घूमने के लिए 

(घ) गाँव की जिंदगी से परेशान हो कर 

उत्तर – (क) अपमान व कमाई के विचार से

 

7 – 

भक्तिन की वेश-भूषा में गृहस्थ और वैरागी का सम्मिश्रण देखकर मैंने शंका से प्रश्न किया-क्या तुम खाना बनाना जानती हो! उत्तर में उसने, ऊपर के ओठ को सिकोड़ और नीचे के अधर को कुछ बढ़ा कर आश्वासन की मुद्रा के साथ कहा-ई कउन बड़ी बात आय। रोटी बनाय जानित है, दाल राँध लेइत है, साग-भाजी छँउक सकित है, अउर बाकी का रहा!

दूसरे दिन तड़के ही सिर पर कई लोटे औधाकर उसने मेरी धुली धोती जल के छींटों से पवित्र कर पहनी और पूर्व के अंधकार और मेरी दीवार से फूटते हुए सूर्य और पीपल का दो लोटे जल से अभिनंदन किया। दो मिनट नाक दबाकर जप करने के उपरांत जब वह कोयले की मोटी रेखा से अपने साम्राज्य की सीमा निश्चित कर चौके में प्रतिष्ठित हुई, तब मैंने समझ लिया कि इस सेवक का साथ टेढ़ी खीर है। अपने भोजन के संबंध में नितांत वीतराग होने पर भी मैं पाक-विद्या के लिए परिवार में प्रख्यात हूँ और कोई भी पाक-कुशल दूसरे के काम में नुक्तानीनी बिना किए रह नहीं सकता। पर जब छूत-पाक पर प्राण देने वाले व्यक्तियों का बात-बात पर भूखा मरना स्मरण हो आया और भक्तिन की शंकाकुल दृष्टि में छिपे हुए निषेध का अनुभव किया, तब कोयले की रेखा मेरे लिए लक्ष्मण के धनुष से खींची हुई रेखा के सामने दुलध्य हो उठी। निरुपाय अपने कमरे में बिछौने में पड़कर नाक के ऊपर खुली हुई पुस्तक स्थापित कर मैं चौके में पीढ़े पर आसीन अनाधिकारी को भूलने का प्रयास करने लगी। ।

 

प्रश्न 1 – भक्तिन की वेश-भूषा में गृहस्थ और वैरागी का सम्मिश्रण देखकर लेखिका को क्या शंका हुई?

(क) क्या भक्तिन शहर में रह पाएगी  

(ख) क्या भक्तिन खाना बनाना जानती होगी 

(ग) क्या भक्तिन को गाँव की याद नहीं आएगी 

(घ) क्या भक्तिन उसके साथ अच्छा व्यवहार करेगी 

उत्तर – (ख) क्या भक्तिन खाना बनाना जानती होगी

 

प्रश्न 2 – नौकरी मिलने के दूसरे दिन भक्तिन ने सबसे पहले क्या काम किया?

(क) नहाई, फिर उसने लेखिका द्वारा दी गई धुली धोती जल के छींटों से पवित्र करके पहनी 

(ख) उगते सूर्य व पीपल को जल अर्पित किया। फिर उसने दो मिनट तक नाक दबाकर जप किया 

(ग) कोयले की मोटी रेखा से रसोईघर की सीमा निश्चित की

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

प्रश्न 3 – भक्तिन के व्यवहार को देखकर लेखिका को क्या लगा?

(क) इस सेवक को काम आता भी होगा या नहीं 

(ख) इस सेवक को रखना सही निर्णय नहीं है

(ग) इस सेवक का साथ टेढ़ी खीर है

(घ) इस सेवक का साथ अच्छा नहीं होगा 

उत्तर – (ग) इस सेवक का साथ टेढ़ी खीर है

 

प्रश्न 4 – कोयले की रेखा लेखिका के लिए कैसी थी?

(क) लक्ष्मण रेखा के समान 

(ख) अदृश्य रेखा के समान 

(ग) दीवार के समान 

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (क) लक्ष्मण रेखा के समान 

 

प्रश्न 5 – लेखिका भक्तिन को अनाधिकारी क्यों समझ रही थी?

(क) लेखिका को अभी तक भक्तिन की पाक कला का ज्ञान नहीं था

(ख) लेखिका को संशय था कि वह उसकी पसंद का खाना बना पाएगी या नहीं

(ग) लेखिका को भक्तिन स्वच्छता के नाम पर रसोई में घुसने नहीं दे रही थी

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

8 – 

भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं। वह सत्यवादी हरिश्चंद्र नहीं बन सकती; पर ‘नरो वा कुंजरो वा’ कहने में भी विश्वास नहीं करती। मेरे इधर-उधर पड़े पैसे-रुपये, भंडार-घर की किसी मटकी में कैसे अंतरहित हो जाते हैं, यह रहस्य भी भक्तिन जानती है। पर, उस संबंध में किसी के संकेत करते ही वह उसे शास्त्रार्थ के लिए चुनौती दे डालती है, जिसको स्वीकार कर लेना किसी तर्क-शिरोमणि के लिए संभव नहीं यह उसका अपना घर ठहरा, पैसा-रुपया जो इधर-उधर पड़ा देखा, सँभालकर रख लिया। यह क्या चोरी है! उसके जीवन का परम कर्तव्य मुझे प्रसन्न रखना है-जिस बात से मुझे क्रोध आ सकता है, उसे बदलकर इधर-उधर करके बताना, क्या झूठ है! इतनी चोरी और इतना झूठ तो धर्मराज महाराज में भी होगा।नहीं तो वे भगवान जी को कैसे प्रसन्न रख सकते और संसार को कैसे चला सकते!

शास्त्र का प्रश्न भी भक्तिन अपनी सुविधा के अनुसार सुलझा लेती है। मुझे स्त्रियों का सिर घुटाना अच्छा नहीं लगता, अतः मैंने भक्तिन को रोका। उसने अकुंठित भाव से उत्तर दिया कि शास्त्र में लिखा है। कुतूहलवश मैं पूछ ही बैठी-‘क्या लिखा है?’ तुरंत उत्तर मिला-‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध।’ कौन-से शास्त्र का यह रहस्यमय सूत्र है, यह जान लेना मेरे लिए संभव ही नहीं था। अतः मैं हारकर मौन हो रही और भक्तिन का चूड़ाकर्म हर बृहस्पतिवार को, एक दरिद्र नापित के गंगाजल से धुले उस्तरे द्वारा यथाविधि निष्पन्न होता रहा।

 

प्रश्न 1 – उपरोक्त अनुच्छेद किसके बारे में हैं?

(क) लेखिका 

(ख) भक्तिन 

(ग) तर्क-शिरोमणि

(घ) शास्त्र

उत्तर – (ख) भक्तिन 

 

प्रश्न 2 – भक्तिन किस रहस्य के बारे में पूछे जाने पर वह शास्त्रार्थ की चुनौती दे डालती हैं?

(क) उसे खाना बनाना आता है, इसके बारे में पूछे जाने पर

(ख) वह अपनी मनमानी क्यों करती है, इसके बारे में पूछे जाने पर

(ग) चोरी के पैसे कहाँ और कैसे रखती है, इसके बारे में पूछे जाने पर

(घ) पढ़ाई-लिखाई के बारे में पूछे जाने पर

उत्तर – (ग) चोरी के पैसे कहाँ और कैसे रखती है, इसके बारे में पूछे जाने पर  

 

प्रश्न 3 – इधर-उधर बिखरे रुपये-पैसों का भक्तिन जो कुछ करती हैं, हम उसे चोरी मानेंगे। क्यों?

(क) वह घर में सेविका है। उसका अधिकार घर की किसी वस्तु पर नहीं है 

(ख) पैसे या अन्य सामान मिलने पर उसका दायित्व यह है कि वह उन चीजों को घर के मालिक को दे

(ग) घर की किसी वस्तु पर सेवक / सेविका का स्वामित्व नहीं होता 

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

प्रश्न 4 – भक्तिन का परम कर्तव्य क्या था?

(क) लेखिका को हर प्रकार से खुश रखना

(ख) लेखिका को अच्छा खाना बना कर खिलाना 

(ग) लेखिका के सभी कार्य करना 

(घ) लेखिका को सुबह जल्दी उठाना 

उत्तर – (क) लेखिका को हर प्रकार से खुश रखना

 

प्रश्न 5 – भक्तिन अपना परम कतव्य कैसे पूरा करती थी?

(क) लेखिका को हर प्रकार से खुश रख कर 

(ख) लेखका को क्रोध लाने से बच कर  

(ग) वह हर बात का जवाब वाक्पटुता से दे कर 

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

9 – 

बहुत रात गए सोने पर भी मैं जल्दी ही उठती हूँ और भक्तिन को तो मुझसे भी पहले जागना पड़ता है-सोना उछल-कूद के लिए बाहर जाने को आकुल रहती है, बसंत नित्य कर्म के लिए दरवाजा खुलवाना चाहता है और गोधूलि चिड़ियों की चहचहाहट में शिकार का आमंत्रण सुन लेती है। 

मेरे भ्रमण की भी एकांत साथिन भक्तिन ही रही है। बदरी-केदार आदि के ऊँचे-नीचे और तंग पहाड़ी रास्ते में जैसे वह हठ करके मेरे आगे चलती रही है, वैसे ही गाँव की धूलभरी पगडंडी पर मेरे पीछे रहना नहीं भूलती। किसी भी समय, कहीं भी जाने के लिए प्रस्तुत होते ही मैं भक्तिन को छाया के समान साथ पाती हूँ। देश की सीमा में युद्ध को बढ़ते देखकर जब लोग आतंकित हो उठे, तब भक्तिन के बेटी-दामाद उसके नाती को लेकर बुलाने आ पहुँचे; पर बहुत समझाने-बुझाने पर भी वह उनके साथ नहीं जा सकी। सबको वह देख आती है; रुपया भेज देती है; पर उनके साथ रहने के लिए मेरा साथ छोड़ना आवश्यक है; जो संभवत: भक्तिन को जीवन के अंत तक स्वीकार न होगा।

जब गत वर्ष युद्ध के भूत ने वीरता के स्थान में पलायन-वृत्ति जगा दी थी, तब भक्तिन पहली ही बार सेवक की विनीत मुद्रा के साथ मुझसे गाँव चलने का अनुरोध करने आई। वह लकड़ी रखने के मचान पर अपनी नयी धोती बिछाकर मेरे कपड़े रख देगी, दीवाल में कीलें गाड़कर और उन पर तख्ते रखकर मेरी किताबें सजा देगी, धान के पुआल का गोंदरा बनवाकर और उस पर अपना कंबल बिछाकर वह मेरे सोने का प्रबंध करेगी। मेरे रंग, स्याही आदि को नयी हँडियों में सँजोकर रख देगी और कागज़-पत्रों को छींके में यथाविधि एकत्र कर देगी।

 

प्रश्न 1 – भक्तिन को सुबह जल्दी क्यों जागना पड़ता है?

(क) सोना उछल-कूद के लिए बाहर जाने को आकुल रहती है

(ख) बसंत नित्य कर्म के लिए दरवाजा खुलवाना चाहता है 

(ग) गोधूलि चिड़ियों की चहचहाहट में शिकार का आमंत्रण सुन लेती है

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी 

 

प्रश्न 2 – पहाड़ी तंग रास्तों पर भक्तिन महादेवी के आगे क्यों चलती थी?

(क) ताकि वह तंग रास्तों के खतरों से लिखिका को बचा सके  

(ख) ताकि वह लेखिका को सही रास्ता दिखा सके 

(ग) ताकि लेखिका रास्तों में न भटक जाएं 

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (क) ताकि वह तंग रास्तों के खतरों से लिखिका को बचा सके  

 

प्रश्न 3 – गाँव की पगडंडी पर महादेवी के पीछे भक्तिन के चलने का क्या कारण था।

(क) ताकि वह गाँव की पगडंडी से उड़ने वाली धूल से स्वयं बच सके 

(ख) क्योंकि उसे वहां के रास्तों की जानकारी नहीं थी 

(ग) ताकि आगे चलने से गाँव की पगडंडी से उड़ने वाली धूल लेखिका को न सहन करनी पड़े 

(घ) क्योंकि लेखिका वहां के रास्तों को भक्तिन से अच्छे से जानती थी 

उत्तर – (ग) ताकि आगे चलने से गाँव की पगडंडी से उड़ने वाली धूल लेखिका को न सहन करनी पड़े 

 

प्रश्न 4 – युदध के दिनों में भक्तिन गाँव क्यों नहीं गई?

(क) क्योंकि वह डर गई थी 

(ख) क्योंकि वह लेखिका को अकेले नहीं छोड़ना चाहती थी 

(ग) क्योंकि उसे गाँव जाना पसंद नहीं था 

(घ) क्योंकि उसके परिजन उसे गाँव नहीं आने देते थे 

उत्तर – (ख) क्योंकि वह लेखिका को अकेले नहीं छोड़ना चाहती थी 

 

प्रश्न 5 – भक्तिन ने लेखिका को गाँव में कैसी सुविधा का आश्वासन दिया?

(क) वह लकड़ी रखने के मचान पर अपनी नयी धोती बिछाकर मेरे कपड़े रख देगी, दीवाल में कीलें गाड़कर और उन पर तख्ते रखकर मेरी किताबें सजा देगी

(ख) धान के पुआल का गोंदरा बनवाकर और उस पर अपना कंबल बिछाकर वह मेरे सोने का प्रबंध करेगी

(ग) लेखिका के रंग, स्याही आदि को नयी हँडियों में सँजोकर रख देगी और कागज़-पत्रों को छींके में यथाविधि एकत्र कर देगी

(घ) उपरोक्त सभी 

उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

10 – 

भक्तिन के संस्कार ऐसे हैं कि वह कारागार से वैसे ही डरती है, जैसे यमलोक से। ऊँची दीवार देखते ही, वह आँख मूँदकर बेहोश हो जाना चाहती है। उसकी यह कमजोरी इतनी प्रसिद्धि पा चुकी है कि लोग मेरे जेल जाने की संभावना बता-बताकर उसे चिढ़ाते रहते हैं। वह डरती नहीं, यह कहना असत्य होगा; पर डर से भी अधिक महत्त्व मेरे साथ का ठहरता है। चुपचाप मुझसे पूछने लगती है कि वह अपनी कै धोती साबुन से साफ कर ले, जिससे मुझे वहाँ उसके लिए लज्जित न होना पड़े। क्या-क्या सामान बाँध ले, जिससे मुझे वहाँ किसी प्रकार की असुविधा न हो सक। ऐसी यात्रा में किसी को किसी के साथ जाने का अधिकार नहीं, यह आश्वासन भक्तिन के लिए कोई मूल्य नहीं रखता। वह मेरे न जान की कल्पना से इतनी प्रसन्न नहीं होती, जितनी अपने साथ न जा सकने की संभावना से अपमानित। भला ऐसा अंधेर हो सकता है। जहाँ मालिक वहाँ नौकर-मालिक को ले जाकर बंद कर देने में इतना अन्याय नहीं; पर नौकर को अकेले मुक्त छोड़ देने में पहाड़ के बराबर अन्याय है। ऐसा अन्याय होने पर भक्तिन को बड़े लाट तक लड़ना पड़ेगा। किसी की माई यदि बड़े लाट तक नहीं लड़ी, तो नहीं लड़ी; पर भक्तिन का तो बिना लड़े काम ही नहीं चल सकता।

ऐसे विषम प्रतिद्वंद्वियों की स्थिति कल्पना में भी दुर्लभ है।

मैं प्रायः सोचती हूँ कि जब ऐसा बुलावा आ पहुँचेगा, जिसमें न धोती साफ करने का अवकाश रहेगा, न सामान बाँधने का, न भक्तिन को रुकने का अधिकार होगा, न मुझे रोकने का, तब चिर विदा के अंतिम क्षणों में यह देहातिन वृद्धा क्या करेगी और मैं क्या करूँगी?

भक्तिन की कहानी अधूरी है; पर उसे खोकर मैं इसे पूरी नहीं करना चाहती।

 

प्रश्न 1 – भक्तिन को सबसे अधिक किससे डर लगता था?

(क) लेखिका से 

(ख) खाना बनाने से 

(ग) कारागार से 

(घ) मृत्यु से 

उत्तर – (ग) कारागार से 

 

प्रश्न 2 – लोग भक्तिन को क्या कहकर चिढ़ाते रहते हैं?

(क) लेखिका के जेल जाने की संभावना बता-बताकर 

(ख) लेखिका के गाँव जाने की संभावना बता-बताकर 

(ग) लेखिका के विदेश जाने की संभावना बता-बताकर 

(घ) लेखिका के कविसम्मेलन में जाने की संभावना बता-बताकर 

उत्तर – (क) लेखिका के जेल जाने की संभावना बता-बताकर 

 

प्रश्न 3 – भक्तिन का काम कैसे नहीं चल सकता?

(क) बिना पढ़े  

(ख) बिना देखे 

(ग) बिना लड़े

(घ) बिना लेखिका के 

उत्तर – (ग) बिना लड़े

 

प्रश्न 4 – भक्तिन जेल जाने के लिए किससे लड़ने को तैयार है?

(क) लेखिका से 

(ख) लाट से 

(ग) लोगों से 

(घ) लेखकों से 

उत्तर – (ख) लाट से 

 

प्रश्न 5 – ‘भक्तिन की कहानी अधूरी है; पर उसे खोकर मैं इसे पूरी नहीं करना चाहती’ से क्या आशय है?

(क) भक्तिन की कहानी पूरी नहीं हो सकती 

(ख) लेखिका भक्तिन की मौत के साथ उसकी कहानी समाप्त नहीं करना चाहती 

(ग) भक्तिन लेखिका के साथ अंतिम समय तक नहीं रही 

(घ) भक्तिन जल्दी ही अपने गाँव चली गई 

उत्तर – (ख) लेखिका भक्तिन की मौत के साथ उसकी कहानी समाप्त नहीं करना चाहती

 

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Lesson Question Answers

Lesson Summary and Explanation