Class 9 Hindi Sparsh Book “Aadmi Nama” Chapter 9 Explanation, Summary, and Question Answer



Class 9 Aadmi Nama” Chapter 9 Explanation

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 9 आदमी नामा

“आदमी नामा” CBSE Class 9 Hindi Sparsh Lesson 9 summary with a detailed explanation of the Poem ‘Aadmi Nama’ along with meanings of difficult words.


Given here is the complete explanation of the poem, along with a summary and all the exercises, Questions, and Answers given at the back of the lesson.

कक्षा 9 स्पर्श भाग 1 पाठ 9 “आदमी नामा”

यहाँ हम हिंदी कक्षा 9 ”स्पर्श भाग 1” के काव्य खण्ड पाठ 9 “आदमी नामा” के पाठ प्रवेश, पाठ सार, पाठ व्याख्या, कठिन शब्दों के अर्थ, अतिरिक्त प्रश्न और NCERT पुस्तक के अनुसार प्रश्नों के उत्तर इन सभी बारे में जानेंगे –

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आदमी नामा पाठ प्रवेशआदमी नामा पाठ सार
आदमी नामा पाठ व्याख्या आदमी नामा प्रश्न अभ्यास

 

By Shiksha Sambra

कवि परिचय

कवि – नज़ीर अकबराबादी
जन्म – 1735

आदमी नामा पाठ प्रवेश

मियाँ नज़ीर राह चलते नज़्में कहने के लिए मशहूर थे। वे आते-जाते हमेशा नज़्मे कहते रहते थे। प्रस्तुत नज़्म ‘आदमी नामा’ में नज़ीर ने कुदरत के सबसे नायाब बिरादर, आदमी को आईना दिखाते हुए उसकी अच्छाइयों, सीमाओं और संभावनाओं से परिचित कराया है। इन नज़्मों में नज़ीर आदमी को उसकी हकीकत से वाकिफ़ कराना चाहते हैं। इन नज़्मों में नज़ीर ने इस संसार को और भी सुन्दर बनाने के संकेत भी दिए हैं।

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आदमी नामा पाठ सार

यहाँ पर मियाँ नज़ीर की चार नज़्में दी गई हैं। मियाँ नज़ीर राह चलते नज़्में कहने के लिए मशहूर थे। वे आते-जाते हमेशा नज़्मे कहते रहते थे। प्रस्तुत नज़्म ‘आदमी नामा’ में नज़ीर ने कुदरत के सबसे नायाब बिरादर, आदमी को आईना दिखाते हुए उसकी अच्छाइयों, सीमाओं और संभावनाओं से परिचित कराया है।कवि कहता है कि दुनिया में तरह तरह के आदमी होते हैं। दुनिया में चाहे कोई राजा हो या कोई आम इंसान हो सभी आदमी ही हैं। चाहे कोई धनी हो या निर्धन हो दोनों आदमी ही हैं। हर आदमी की अपनी अलग जीवन शैली होती है। यदि कोई मालदार या दौलतमंद भी है, वह भी आदमी ही है। जो कोई स्वादिष्ट भोजन खा रहा है, वो भी आदमी है और जो सूखे टुकड़ों पर पल रहा है वो भी आदमी है।

नमाज़ और कुरान को बनाने वाले भी आदमी ही हैं और उस मस्जिद में नमाज पढ़ने और पढ़वाने वाले भी आदमी ही हैं। मस्जिद के बाहर से जूते चुराने वाला भी आदमी है और उसपर नज़र रखने वाला भी आदमी है। पाप करने वाला भी आदमी है और पुण्य करने वाला भी आदमी ही है। किसी की जान बचाने वाला भी आदमी ही है और किसी की जान लेने वाला भी आदमी ही है। किसी की इज़्ज़त को मिट्टी में मिलाने वाला भी आदमी है और मुसीबत में किसी को मदद के लिए पुकारने वाला भी आदमी ही है और उसकी पुकार सुनकर दौड़कर आनेवाला भी आदमी है। राजा से लेकर मंत्री तक भी सभी आदमी ही हैं। कवि कहता है कि वह आदमी ही है जो किसी दूसरे आदमी के दिल को खुश करने वाला काम करता है। वह आदमी ही है जो संसार में संत की भूमिका निभाता है और वह भी आदमी ही होता है जो उस संत का भक्त होता है। कवि यह भी कहता है कि आदमी अच्छा भी होता है और कभी-कभी बुरा भी आदमी ही बन जाता है।

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आदमी नामा पाठ व्याख्या

(1)
दुनिया में बादशाह है सो है वह भी आदमी
और मुफलिस-ओ-गदा है सो है वो भी आदमी
जरदार बेनवा है सो है वो भी आदमी
निअमत जो खा रहा है सो है वो भी आदमी
टुकड़े जो चबा रहा है सो है वो भी आदमी

शब्दार्थ –
बादशाह – राजा
मुफलिस – निर्धन
गदा – भिखारी
जरदार – दौलतमंद

व्याख्या – कवि कहता है कि दुनिया में तरह तरह के आदमी होते हैं। दुनिया में चाहे कोई राजा हो या कोई आम इंसान हो सभी आदमी ही हैं। अलग-अलग आदमी की अलग-अलग जिम्मेदारियाँ होती हैं। कवि कहता है कि चाहे कोई धनी हो या निर्धन हो दोनों आदमी ही हैं। हर आदमी की अपनी अलग जीवन शैली होती है। यदि कोई मालदार या दौलतमंद भी है, वह भी आदमी ही है। कवि के कहने का तात्पर्य है कि अलग-अलग आदमी अलग-अलग काम करते हैं, अलग-अलग व्यवहार करते हैं और अलग-अलग गुणों वाले होते हैं। कवि यह भी स्पष्ट करता है कि जो कोई स्वादिष्ट भोजन खा रहा है, वो भी आदमी है और जो सूखे टुकड़ों पर पल रहा है वो भी आदमी है।

(2)
मसजिद भी आदमी ने बनाई है यां मियाँ
बनते हैं आदमी ही इमाम और खुतबाख्वाँ
पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज यां
और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ
जो उनको ताड़ता है सो है वो भी आदमी

शब्दार्थ –
इमाम – नमाज़ पढ़ने वाले
खुतबाख्वाँ – कुरान शरीफ़ का अर्थ बताने वाला
ताड़ता – भाँप लेना

व्याख्या – कवि आदमी को आईना दिखाते हुए कहता है कि जिसने मस्जिद बनाई है। नमाज़ और कुरान को बनाने वाले भी आदमी ही हैं और उस मस्जिद में नमाज पढ़ने और पढ़वाने वाले भी आदमी ही हैं। मस्जिद के बाहर से जूते चुराने वाला भी आदमी है और उसपर नज़र रखने वाला भी आदमी है। कवि के कहने का अभिप्राय यह है कि पाप करने वाला भी आदमी है और पुण्य करने वाला भी आदमी ही है।

(3)
यां आदमी पै जान को वारे है आदमी
और आदमी पै तेग को मारे है आदमी
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुनके दौड़ता है सो है वो भी आदमी

शब्दार्थ –
जान वारना – प्राण न्योछावर करना
पगड़ी उतारना – बेइज़्ज़ती करना, अपमान करना
व्याख्या – कवि आदमी को आदमी की सच्चाई दिखाते हुए कहता है कि किसी की जान बचाने वाला भी आदमी ही है और किसी की जान लेने वाला भी आदमी ही है। किसी की इज्जत को मिट्टी में मिलाने वाला भी आदमी है और मुसीबत में किसी को मदद के लिए पुकारने वाला भी आदमी ही है और उसकी पुकार सुनकर दौड़कर आने वाला भी आदमी है। कवि के कहने का तात्पर्य यह है कि यदि आदमी किसी को मुसीबत में डालने वाला है तो उस मुसीबत में पड़े हुए आदमी को बचाने वाला भी कोई आदमी ही होता है।

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(4)
अशराफ और कमीने से ले शाह ता वजीर
ये आदमी ही करते हैं सब कारे दिलपजीर
यां आदमी मुरीद है और आदमी ही पीर
अच्छा भी आदमी ही कहाता है ए नजीर
और सबमें जो बुरा है सो है वो भी आदमी

शब्दार्थ –
अशराफ़ – शरीफ़ शब्द का बहुवचन
शाह – राजा, सम्राट
वजीर – मंत्री
दिलपजीर – जो दिल को अच्छा लगे
मुरीद – भक्त, शिष्य, चाहनेवाला
पीर – धर्मगुरु, संत, भगवान का भक्त
नजीर – कवि का नाम, मिसाल
कारे – काम

व्याख्या – कवि आदमी को आदमी की सच्चाई का आईना दिखाते हुए कहता है कि शरीफ से लेकर कमीने तक सभी आदमी है और राजा से लेकर मंत्री तक भी सभी आदमी ही हैं। कवि कहता है कि वह आदमी ही है जो किसी दूसरे आदमी के दिल को खुश करने वाला काम करता है। वह आदमी ही है जो संसार में संत की भूमिका निभाता है और वह भी आदमी ही होता है जो उस संत का भक्त होता है। कवि यह भी कहता है कि आदमी अच्छा भी होता है और कभी – कभी बुरा भी आदमी ही बन जाता है।

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आदमी नामा प्रश्न अभ्यास

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

प्रश्न 1 – पहले छंद में कवि की दृष्टि आदमी के किन किन रूपों का बखान करती है? क्रम से लिखिए।

उत्तर – पहले छंद में कवि की दृष्टि आदमी के कई रूप हैं, आदमी बादशाह भी है और प्रजा भी आदमी ही है, यदि आदमी अमीर है तो गरीब भी आदमी ही है, रईस अगर आदमी है तो भिखारी भी आदमी ही है।

प्रश्न 2 – चारों छंदों में कवि ने आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक रूपों को परस्पर किन-किन रूपों में रखा है? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – चारों छंदों में कवि के अनुसार अच्छे लोग , बुरे लोग , अमीर , गरीब , दूसरों की भलाई करने वाले , बुराई करने वाले, धर्मात्मा और पापी आदमी होते हैं।

प्रश्न 3 – ‘आदमी नामा’ शीर्षक कविता के इन अंशों को पढ़कर आपके मन में मनुष्य के प्रति क्या धारणा बनती है?

उत्तर – ‘आदमी नामा’ शीर्षक कविता के इन अंशों को पढ़कर आपके मन में मनुष्य के प्रति हमारी धारणा कई तरह की बनती है। मनुष्य कई तरह के होते हैं। कोई अच्छा होता है तो कोई बुरा। कोई आलीशान महलों में रहता है तो उस महल को बनाने वाला मज़दूर किसी झोपड़ी में रहता है। कोई धर्मात्मा होता है तो कोई पापी होता है।

प्रश्न 4 – इस कविता का कौन सा भाग आपको सबसे अच्छा लगा और क्यों?

उत्तर – कविता का वह भाग जिस भाग में मस्जिद बनाने वाले, मौलवी, नमाज पढ़ने वाले और मस्जिद के बाहर से जूते चुराने वाले का जिक्र हुआ है वह भाग मुझे सबसे अच्छा लगा। इस भाग में कवि ने जबरदस्त कटाक्ष किया है। कवि के अनुसार भगवान् को मानने वाला भी एक आदमी ही होता है और उस भगवान् के घर के बाहर से भगवान् को मानने वालों के जूते चुराने वाला भी आदमी ही होता है। यहाँ कवि ने समझाया है कि दुनिया में जो पाप करता है या जो पुण्य करता है वे दोनों ही मनुष्य ही हैं। ताज्जुब की बात यह है कि जूते चुराने वाले आज से तीन सौ साल पहले भी थे और अब भी हैं।

प्रश्न 5 – आदमी की प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – आदमी बहादुर हो सकता है और कायर भी। आदमी पुण्यात्मा हो सकता है और पापी भी। कोई आदमी किसी की जान बचाता है तो कोई किसी की जान ले लेता है। आदमी चोर भी हो सकता है और पहरेदार भी। आदमी आस्तिक हो सकता है नास्तिक भी। आदमी राजा हो सकता है और प्रजा भी।

निम्नलिखित अंशों की व्याख्या कीजिए-
प्रश्न 1 – दुनिया में बादशाह है सो है वह भी आदमी,
और मुफलिस-ओ-गदा है सो है वो भी आदमी

उत्तर – चाहे राजा हो या प्रजा दोनों आदमी ही हैं। कहने का अभिप्राय है कि राजा किसी पेड़ से नहीं टपकता है बल्कि आदमी में से ही कोई राजा बनता है। चाहे कोई धनी हो या निर्धन हो दोनों आदमी ही हैं। अर्थात अमीरी गरीबी आदमी की मेहनत का नतीजा होता है पर दोनों आखिर होते तो आदमी ही हैं।

प्रश्न 2 – अशराफ और कमीने से ले शाह ता वजीर,
ये आदमी ही करते हैं सब कारे दिलपजीर

उत्तर – शरीफ से लेकर कमीने तक और राजा से लेकर मंत्री तक सभी आदमी ही हैं। वह आदमी ही है जो किसी दूसरे आदमी के दिल को खुश करने वाला काम करता है। आदमी हर वर्ग के होते हैं और हर फितरत के होते हैं। कुछ अच्छे तो कुछ बुरे भी होते हैं।

निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए –
प्रश्न 1 – पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज यां
और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ
जो उनको ताड़ता है सो है वो भी आदमी

उत्तर – पाप करने वाला भी आदमी है और पुण्य करने वाला भी आदमी है। कुछ लोग भक्तिभाव में इतने लिप्त होते हैं कि मस्जिद में इबादत करने जाते हैं या मंदिर में पूजा करने जाते हैं। कुछ लोगों को उनकी भक्ति से कोई लेना देना नहीं होता बल्कि वे मंदिर या मस्जिद के बाहर से जूते चुराने के काम में लगे रहते हैं। जहाँ एक तरफ धर्म की रोशनी होती है वहीं उसकी ओट में पाप भी पलता रहता है। कहने का तात्पर्य यह है कि नमाज़ और कुरान को बनाने वाले भी आदमी ही हैं और उस मस्जिद में नमाज पढ़ने और पढ़वाने वाले भी आदमी ही हैं। मस्जिद के बाहर से जूते चुराने वाला भी आदमी है और उसपर नजर रखने वाला भी आदमी है।

प्रश्न 2 – पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुनके दौड़ता है सो है वो भी आदमी

उत्तर – किसी की इज्जत लेने वाला भी आदमी है। किसी को मदद के लिए पुकारने वाला भी आदमी है और उसकी पुकार पर दौड़कर आनेवाला भी आदमी है। इसी दुनिया में कुछ ऐसे लोग मिल जाएँगे जो दूसरे की इज्जत उतारने में लगे रहते हैं, तो कुछ ऐसे लोग भी मिल जाएँगे जो किसी की मान मर्यादा रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते। कवि के कहने का तात्पर्य यह है कि यदि आदमी किसी को मुसीबत में डालने वाला है तो उस मुसीबत में पड़े हुए आदमी को बचाने वाला भी कोई आदमी ही होता है।

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