Geet Ageet, Class 9 Hindi Chapter 11 Explanation, Question Answer

Geet Ageet, Class 9 Hindi Chapter 11 Explanation

 

गीत-अगीत NCERT Class 9 Hindi Sparsh book Chapter 11, Explanation, Question Answer

गीत-अगीत CBSE Class 9 Hindi Sparsh Lesson 11 summary with detailed explanation of the poem ‘Geet Ageet’ along with meanings of difficult words.

Given here is the complete explanation of the poem, along with a summary and all the exercises, Questions, and Answers given at the back of the lesson.

कक्षा 9 स्पर्श भाग 1 पाठ 11 “गीत-अगीत”

यहाँ हम हिंदी कक्षा 9 ”स्पर्श – भाग 1” के काव्य खण्ड पाठ 11 “गीत-अगीत” के पाठ प्रवेश, पाठ सार, पाठ व्याख्या, कठिन शब्दों के अर्थ, अतिरिक्त प्रश्न और NCERT पुस्तक के अनुसार प्रश्नों के उत्तर इन सभी बारे में जानेंगे

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गीत अगीत पाठ प्रवेश गीत अगीत पाठ सार
गीत अगीत पाठ व्याख्या गीत अगीत प्रश्न अभ्यास

By Shiksha Sambra

कवि परिचय

कवि – रामधारी सिंह दिनकर
जन्म – 1908

गीत अगीत पाठ प्रवेश

प्रस्तुत कविता ‘गीत-अगीत’में कवि ने प्रकृति की सुंदरता के साथ-साथ जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम, मानवीय राग और प्रेमभाव का भी सजीव चित्रण किया है। कवि को कहीं नदी के बहाव में गीत का जन्म होता हुआ जान पड़ता है, तो कहीं शुक-शुकी नामक पक्षी के कार्यकलापों में भी गीत सुनाई देता है और जब एक लोक गीत को गाता प्रेमी गीत-गान में निमग्न दिखाई देता ही है।

कवि का मानना है कि गुलाब का फूल, शुकी पक्षी और प्रेमिका प्रत्यक्ष रूप से गीत का निर्माण न किया हो या गीत-गान भले ही न कर रहे हों, पर दरअसल वहाँ गीत का निर्माण और गान भी हो रहा है। प्रस्तुत कविता में कवि यह प्रश्न कर रहा है कि मेरे द्वारा गया गया गीत सुन्दर है या प्रकृति के द्वारा न गा सकने वाला अगीत सुन्दर है?

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गीत अगीत पाठ सार

प्रस्तुत कविता ‘गीत-अगीत’ में कवि ने प्रकृति की सुंदरता के साथ-साथ जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम, मानवीय राग और प्रेमभाव का भी सजीव चित्रण किया है। कविता के प्रथम भाग में नदी के बहने से जो सुन्दर दृश्य दिखाई देता है कवि ने उसका बहुत सुन्दर वर्णन किया है। कवि कहता है कि नदी किसी के बिछड़ने के दुःख में दुखी होते हुए गीत गाते हुए बड़ी तेजी से बह रही है।

ऐसे में लगता है कि वह अपना दुःख कम करने के लिए किनारों से कुछ कहती हुई बहती जा रही है। किनारे के पास में ही एक गुलाब चुपचाप यह सब देख रहा है और अपने मन में सोच रहा है कि यदि भगवान ने उसे भी बोलने की शक्ति दी होती तो वह भी पूरी दुनिया को अपने सपनों के गीत सुनाता।
कविता के दूसरे भाग में कवि तोता और मादा-तोता के प्रेम का सुन्दर वर्णन करता हुआ कहता है कि एक तोता पेड़ की उस घनी डाली पर बैठा हुआ है जो डाल उसके घोंसलें को छाया देती है। उसी घोंसलें में उस तोते की मादा अपने पंखों को फैला कर अपने अंडे से रही है। कवि कहता है कि जब सूर्य की किरणें पत्तों से छनकर आती हैं और तोते के पंखों का स्पर्श करती हैं तो तोता गाना गाने लगता है।
उसका गाना सुनकर उसकी मादा भी गाना चाहती है लेकिन उसका गीत केवल तोते के प्यार में लिपट कर रह जाता है और उसके मुँह से कुछ नहीं निकलता। मादा उसका गीत सुनकर फूले नहीं समा रही है। कविता के तीसरे भाग में कवि दो प्रेमियों का वर्णन करता हुआ कहता है कि दोनों प्रेमियों में से जब एक प्रेमी शाम के समय कोई लोक गीत गाता है

तो उसकी प्रेमिका उस गाने को सुनने के लिए अपने घर से वन की ओर खिंची चली आती है। वह चोरी से छुप-छुप कर अपने प्रेमी का गाना सुनती है और मन में सोचती है कि वह उस गीत का हिस्सा क्यों नहीं बनती। कवि यह सब देखकर सोच रहा है कि मेरे द्वारा गया गया गीत सुन्दर है या प्रकृति के द्वारा न गा सकने वाला अगीत सुन्दर है?

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गीत अगीत पाठ व्याख्या

(1)
गाकर गीत विरह के तटिनी
वेगवती बहती जाती है,
दिल हलका कर लेने को
उपलों से कुछ कहती जाती है।
तट पर एक गुलाब सोचता
“देते स्वर यदि मुझे विधाता,
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जग को गीत सुनाता।“
गा गाकर बह रही निर्झरी,
पाटल मूक खड़ा तट पर है।
गीत, अगीत, कौन सुंदर है?

शब्दार्थ –
तटिनी – नदी, तटों के बीच बहती हुई
वेगवती – तेज़ गति से
उपलों – किनारों से
विधाता – ईश्वर
निर्झरी – झरना, नदी
पाटल – गुलाब

व्याख्या – कविता के इस भाग में नदी के बहने से जो सुन्दर दृश्य दिखाई देता है कवि ने उसका बहुत सुन्दर वर्णन किया है। कवि कहता है कि नदी को बहता हुआ देखते हुए ऐसा लगता है जैसे नदी किसी के बिछड़ने के दुःख में दुखी होते हुए गीत गाते हुए बड़ी तेजी से बह रही है। ऐसे में लगता है कि वह अपना दुःख कम करने के लिए किनारों से कुछ कहती हुई बहती जा रही है। कवि कहता है कि किनारे के पास में ही एक गुलाब चुपचाप यह सब देख रहा है और अपने मन में सोच रहा है कि यदि भगवान ने उसे भी बोलने की शक्ति दी होती तो वह भी पूरी दुनिया को अपने सपनों के गीत सुनाता। झरना भी बह-बह कर गीत गा रहा है और गुलाब किनारे पर चुपचाप खड़ा है। कवि यह सब देखकर सोच रहा है कि मेरे द्वारा गया गया गीत सुन्दर है या प्रकृति के द्वारा न गा सकने वाला अगीत सुन्दर है?

(2)
बैठा शुक उस घनी डाल पर
जो खोंते को छाया देती।
पंख फुला नीचे खोंते में
शुकी बैठ अंडे है सेती।
गाता शुक जब किरण वसंती
छूती अंग पर्ण से छनकर।
किंतु, शुकी के गीत उमड़कर
रह जाते सनेह में सनकर।
गूँज रहा शुक का स्वर वन में,
फूला मग्न शुकी का पर है।
गीत, अगीत, कौन सुंदर है?

शब्दार्थ –
शुक – तोता
खोंते – घोंसला
पर्ण – पत्ता, पंख
शुकी – मादा तोता

व्याख्या – कविता के इस भाग में कवि तोता और मादा-तोता के प्रेम का सुन्दर वर्णन करता हुआ कहता है कि एक तोता पेड़ की उस घनी डाली पर बैठा हुआ है जो डाल उसके घोंसलें को छाया देती है। उसी घोंसलें में उस तोते की मादा अपने पंखों को फैला कर अपने अंडे से रही है। कवि कहता है कि जब सूर्य की किरणें पत्तों से छनकर आती हैं
और तोते के पंखों का स्पर्श करती हैं तो तोता गाना गाने लगता है। उसका गाना सुनकर उसकी मादा भी गाना चाहती है लेकिन उसका गीत केवल तोते के प्यार में लिपट कर रह जाता है और उसके मुँह से कुछ नहीं निकलता।
उधर तोते का गीत पूरे वन में गूँज रहा है और इधर उसकी मादा उसका गीत सुनकर फूले नहीं समा रही है। अर्थात वह बहुत खुश है। कवि यह सब देखकर सोच रहा है कि मेरे द्वारा गया गया गीत सुन्दर है या प्रकृति के द्वारा न गा सकने वाला अगीत सुन्दर है?

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(3)
दो प्रेमी हैं यहाँ, एक जब
बड़े साँझ आल्हा गाता है,
पहला स्वर उसकी राधा को
घर से यहीं खींच लाता है।
चोरी-चोरी छिपकर सुनती है,
‘हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की
बिधना’, यों मन में गुनती है।
वह गाता, पर किसी वेग से
फूल रहा इसका अंतर है।
गीत, अगीत कौन सुंदर है?

शब्दार्थ –
आल्हा – एक लोक-गीत का नाम
कड़ी – वे छंद जो गीत को जोड़ते हैं
बिधना – भाग्य, विधाता
गुनती – विचार करती है
वेग – गति

व्याख्या – कविता के इस भाग में कवि दो प्रेमियों का वर्णन करता हुआ कहता है कि वन में दो प्रेमी रहते हैं। दोनों प्रेमियों में से जब एक प्रेमी शाम के समय कोई लोक गीत गाता है तो उसकी प्रेमिका उस गाने को सुनने के लिए अपने घर से वन की ओर खिंची चली आती है। वह चोरी से छुप-छुप कर अपने प्रेमी का गाना सुनती है और मन में सोचती है कि वह उस गीत का हिस्सा क्यों नहीं बनती। जब प्रेमी गाता है तो प्रेमिका का मन प्रसन्नता से फूले नहीं समाता है। कवि यह सब देखकर सोच रहा है कि मेरे द्वारा गया गया गीत सुन्दर है या प्रकृति के द्वारा न गा सकने वाला अगीत सुन्दर है?

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गीत अगीत प्रश्न अभ्यास

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1 – नदी का किनारों से कुछ कहते हुए बह जाने पर गुलाब क्या सोच रहा है? इससे संबंधित पंक्तियों को लिखिए।

उत्तर – जब नदी अपना दुःख कम करने के लिए किनारों से कुछ कहती हुई बह रही है तो किनारे पर एक गुलाब सोचने लगता है कि यदि भगवान उसे बोलने की शक्ति दी होती तो वह भी अपने सपनों के गीत सबको सुनाता। इससे संबंधित पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं –

“देते स्वर यदि मुझे विधाता,
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जग को गीत सुनाता।“

प्रश्न 2 – जब शुक गाता है, तो शुकी के हृदय पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर – जब सूर्य की किरणें पत्तों से छनकर आती हैं और तोते के पंखों का स्पर्श करती हैं तो तोता गाना गाने लगता है। उसका गाना सुनकर उसकी मादा भी गाना चाहती है लेकिन उसका गीत केवल तोते के प्यार में लिपट कर रह जाता है और उसके मुँह से कुछ नहीं निकलता। उधर तोते का गीत पूरे वन में गूँज रहा है और इधर उसकी मादा उसका गीत सुनकर फूले नहीं समा रही है।

प्रश्न 3 – प्रेमी जब गीत गाता है, तो प्रेमी की क्या इच्छा होती है?

उत्तर – जब प्रेमी गीत गाता है तो प्रेमिका चोरी से छुप-छुप कर अपने प्रेमी का गाना सुनती है और मन में सोचती है कि वह उस गीत का हिस्सा क्यों नहीं बनती।

प्रश्न 4 – प्रथम छंद में वर्णित प्रकृति चित्रण को लिखिए।

उत्तर – कविता के प्रथम छंद में नदी के बहने से जो दृश्य उत्पन्न होता है उसका कवि ने मनोहारी वर्णन किया है। नदी विरह के गीत गाते हुए बड़ी तेजी से बह रही है। ऐसा लगता है जैसे नदी किसी के बिछड़ने के दुःख में दुखी होते हुए गीत गाते हुए बड़ी तेजी से बह रही है। ऐसे में लगता है कि वह अपना दुःख कम करने के लिए किनारों से कुछ कहती हुई बहती जा रही है। कवि कहता है कि किनारे के पास में ही एक गुलाब चुपचाप यह सब देख रहा है और अपने मन में सोच रहा है कि यदि भगवान ने उसे भी बोलने की शक्ति दी होती तो वह भी पूरी दुनिया को अपने सपनों के गीत सुनाता। झरना भी बह-बह कर गीत गा रहा है और गुलाब किनारे पर चुपचाप खड़ा है।

प्रश्न 5 – प्रकृति के साथ पशु पक्षियों के संबंध की व्याख्या कीजिए।

उत्तर – प्रकृति के साथ पशु पक्षियों का गहरा संबंध है। पशु पक्षी प्रकृति के बिना जीवित नहीं रह सकते। प्रकृति ही उन्हें आवास प्रदान करती है और भोजन प्रदान करती है।

प्रश्न 6 – मनुष्य को प्रकृति किस रूप में आंदोलित करती है? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर – मनुष्य को प्रकृति भिन्न रूपों में आंदोलित करती है। जब मनुष्य किसी कल कल बहती नदी को देखता है तो उसके संगीत में खो जाता है। जब मनुष्य हल्की बारिश देखता है तो उसमें सराबोर होना चाहता है। लेकिन जब तेज तूफान आता है तो मनुष्य उससे बचकर किसी सुरक्षित ठिकाने पर चला जाता है।

प्रश्न 7 – सभी कुछ गीत है, अगीत कुछ नहीं होता। कुछ अगीत भी होता है क्या? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – जब हमारी भावना हमारे होठों पर लयबद्ध तरीके से बाहर आती है तो उसे गीत कहते हैं। जब कोई भावना अंदर ही रहती है तो उसे अगीत कहते हैं। कभी कभी अगीत भी गीत बनकर स्फुटित हो उठता है। और प्रकृति के द्वारा किए गए शब्दों से कवि भी हैरान है और समझ नहीं पा रहा है कि कवि की भावनाऐं जो गीत बन कर बाहर आई है वह सुन्दर है या प्रकृति के बिना शब्दों वाला संगीत सुन्दर है।

प्रश्न 8 – ‘गीत अगीत’ के केंद्रीय भाव को लिखिए।

उत्तर – इस कविता में कवि ने प्रत्यक्ष भावना और छुपी हुई भावना की तुलना की है। यह तुलना प्रकृति में छुपे अनेक सौंदर्य के सहारे से की गई है। नदी के गाने की तुलना गुलाब के मौन रहने से की गई है। शुक के गाने की तुलना शुकी के मौन से की गई है। प्रेमी के गाने की तुलना प्रेमिका के मौन से की गई है। इस तरह से इस कविता में कवि ने गीत और अगीत के माध्यम से प्रकृति का बड़ा ही मनोहारी वर्णन किया गया है।

संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए

प्रश्न 1 – अपने पतझर के सपनों का मैं जग को गीत सुनाता

उत्तर – ये पंक्ति कविता के उस भाग से ली गई है जिसमें नदी की सुंदरता का वर्णन है। जब नदी गीत गाते हुए और किनारों से बातें करते हुए आगे बढ़ती है तो गुलाब चुपचाप यह सोचता है कि अगर भगवान ने उसे भी बोलने की शक्ति दी होती तो वह भी दुनिया को अपने सपनों के बारे में गा गाकर सुनाता।

प्रश्न 2 – गाता शुक जब किरण वसंती छूती अंग पर्ण से छनकर

उत्तर – ये पंक्ति कविता के उस भाग से ली गई है जिसमें शुक और शुकी के प्रेम का वर्णन है। जब पत्तियों से छनकर आने वाली किरणें तोते के पंखों का स्पर्श करती हैं तो तोता गाने लगता है।

प्रश्न 3 – हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की बिधना यों मन में गुनती है
उत्तर – ये पंक्ति कविता के उस भाग से ली गई है जिसमें प्रेमी और प्रेमिका का वर्णन है। जब प्रेमी गीत गाता है तो प्रेमिका सोचती है कि कितना अच्छा होता यदि वह उस गीत का एक हिस्सा बन जाती।

Check out – Class 9 Hindi Sparsh and Sanchayan Book Chapter-wise Explanation

Chapter 1 – Dukh Ka Adhikar Chapter 2 – Everest Meri Shikhar Yatra Chapter 3 – Tum Kab Jaoge Atithi
Chapter 4 – Vaigyanik Chetna ke Vahak Chapter 5 – Dharm ki Aad Chapter 6 – Shukra Tare Ke Saman
Chapter 7 – Pad Chapter 8 – Dohe Chapter 9 – Aadmi Nama
Chapter 10 – Ek Phool ki Chah Chapter 11 – Geet Ageet Chapter 12 – Agnipath
Chapter 13 – Naye ILake Mein Khushboo Rachte Hain Haath Chapter 14 –
Gillu
Chapter 15 – Smriti
Chapter 16 – Kallu Kumhar Ki Unakoti Chapter 17 –
Mera Chota Sa Niji Pustakalaya
Chapter 18 – Hamid Khan
Chapter 20 – Diye Jal Uthe

 

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