बड़े भाई साहब और लेखक का चरित्र-चित्रण | Character Sketch of Bade Bhai Sahab and Writer from CBSE Class 10 Hindi Sparsh Book Chapter 8 बड़े भाई साहब

 

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कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ के मुख्य पात्र बड़े भाई साहब के चरित्र-चित्रण सम्बंधित प्रश्न (Questions related to Character of Bade Bhai Sahab)

 

प्रश्न – कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ के मुख्य पात्र बड़े भाई साहब का स्वभाव कैसा था ?

उत्तर – बड़े भाई साहब नामक कृति में बड़े भाई बहुत गंभीर स्वभाव के थे। उनके मन में चंचलता बिल्कुल भी नहीं थी। वह हर समय किताबों में खोए रहते थे। 

प्रश्न – कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ के मुख्य पात्र बड़े भाई साहब को बार -बार फेल होने के बावजूद भी बुद्धिमान क्यों कहा जा सकता है?

उत्तर – बड़े भाई साहब भले ही अपने दर्जे में 3 बार फेल हुए लेकिन तब भी वह बहुत ज्यादा बुद्धिमान थे। जब छोटे भाई को घमंड आ गया था तब रावण और शैतान का उदाहरण देकर उन्होंने अपने छोटे भाई की आखें खोल दी थी। 

प्रश्न – कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ में कैसे पता चलता है कि बड़े भाई साहब कभी भी हार मानने वाले नहीं थे ?
अथवा
कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ में कैसे पता चलता है कि बड़े भाई साहब धैर्यवान थे ?

उत्तर – बड़े भाई साहब तीन सालों से लगातार एक ही दर्जे में फेल हो रहे थे लेकिन तब भी वो हर साल उतनी ही लगन से जी तोड़ मेहनत करते थे। फेल होने के बावजूद उनके मनोबल में कोई आंच न आई। बड़े भाई साहब बहुत धैर्यवान थे। बार बार फेल होने के बावजूद वह धैर्य पूर्वक पढ़ाई करते थे। 

प्रश्न – कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ में बड़ा भाई छोटे भाई का मार्गदर्शक था ? कैसे ?

उत्तर – बड़े भाई साहब अपने छोटे भाई के मार्गदर्शक थे। जब छोटे भाई दिन भर खेलता रहता था तो वह अपने छोटे भाई को कटु वचन बोलकर और भिन्न भिन्न उदाहरण देकर उसको पढ़ाई करने को बोलते थे। 

प्रश्न – कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ में स्पष्ट कीजिए कि बड़े भाई साहब तर्कशास्त्र में पारंगत थे ?

उत्तर – बड़े भाई साहब तर्क शास्त्र में बहुत पारंगत थे। वह अपने तर्क के द्वारा बार बार छोटे भाई को सही रास्ता दिखाते हैं। वास्तव में उनके तर्क की बदौलत ही रोज छोटा भाई न मन होने के बावजूद किताब खोलकर पढ़ने बैठता है। 

प्रश्न – कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ में बड़े भाई साहब का अपने समय की शिक्षा व्यवस्था के प्रति क्या नजरिया था?

उत्तर – बड़े भाई साहब अपने जमाने की शिक्षा व्यवस्था से काफी नाराज थे क्योंकि उनकी नजर में शिक्षा का मतलब किताबों को रटना था। असल जिंदगी में उस शिक्षा का कोई मतलब नहीं था। जब छोटा भाई पास हो जाता है तो बड़े भाई साहेब उसको यही समझाते हैं कि पास हो जाने का ये मतलब नहीं की तुमको सारा ज्ञान प्राप्त हो गया। हमसे ज्यादा ज्ञान तो हमारे दादा, जो सिर्फ पांचवे दर्जे तक ही पढ़ें हैं उनको है। हमारी शिक्षा हमको बस दर्जे में पास करवाती है, असली ज्ञान नहीं देती।

 

कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ में लेखक के चरित्र-चित्रण सम्बंधित प्रश्न (Questions related to Character of the Writer)

 

प्रश्न – कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ में लेखक का स्वभाव कैसा था ?

उत्तर – लेखक अपने बड़े भाई के बिल्कुल विपरीत थे। भारतीय समाज के एक आदर्श छोटे भाई की तरह वह भी चंचल था। उसके दिन की शुरुआत तथा अंत खेलने कूदने से होती थी। 

प्रश्न – कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ में लेखक का पढ़ाई के प्रति कैसा रवैया था ?

उत्तर – बड़े भाई साहब के विपरीत लेखक को पढ़ना बिलकुल भी पसंद नहीं था। वह बस इतना पढ़ते थे कि क्लास में उसको डांट न मिले। उसको एक घंटे भी पढ़ने में मरने जैसा लगता था।

प्रश्न – कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ में लेखक का भाई के प्रति कैसा स्वभाव था ?

उत्तर – लेखक बहुत ज्यादा भ्रातृ प्रेमी था। जब भी बड़े भाई साहब लेखक को खेलने से मना करते या डाँटते तो वह चुप-चाप उनकी बात सुनता था। यहाँ तक की जब बड़े भाई साहब ने सभी बच्चों के सामने लेखक को कटु वचन कहे फिर भी लेखक उनसे जबान नहीं लड़ाई। 

प्रश्न – कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 10 ‘बड़े भाई साहब’ में लेखक का स्वभाव लापरवाह था स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – लेखक बहुत लापरवाह था। अपने बड़े भाई साहब से डांट सुनने के बाद जोश जोश में टाइम टेबल तो बना लेता लेकिन टाइम टेबल के अनुसार  एक भी दिन नहीं चल पाता। दिन भर बस खेलता रहता और पढ़ाई न के बराबर करता था।

 

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