PSEB Class 9 Hindi Chapter 19 Prakriti Ka Abhishap (प्रकृति का अभिशाप) Question Answers (Important) 

 

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PSEB Class 9 Chapter 19 Prakriti Ka Abhishap Textbook Questions

अभ्यास

(क) विषय-बोध

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए-

(i) सूर्यदेव को किस ग्रह की चिंता थी?
उत्तर– सूर्यदेव को अपनी प्रिय पुत्री पृथ्वी ग्रह की चिंता थी।

(ii) जलदेवी के अनुसार पृथ्वी के वातावरण को कौन विषाक्त बना रहा है?
उत्तर– जलदेवी के अनुसार प्रदूषण पृथ्वी के वातावरण को विषाक्त बना रहा है।

(iii) पवनदेव ने ऑक्सीजन कम होने का क्या कारण बताया?
उत्तर– पवनदेव ने बताया कि कारखानों और इंजनों में ईंधन जलने से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड बनती है, जिससे ऑक्सीजन की मात्रा घट रही है।

(iv) वनदेवी ने अपने घटने का क्या कारण बताया?
उत्तर– वनदेवी ने अपने घटने का कारण मानव द्वारा जंगलों की अंधाधुंध कटाई को बताया।

(v) गंधकयुक्त औषधियाँ मनुष्य के स्वास्थ्य पर क्या प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं?
उत्तर– गंधकयुक्त औषधियाँ मनुष्य में आँतों की बीमारियाँ और तपेदिक जैसे रोग उत्पन्न करती हैं।

(vi) ओजोन परत क्या है?
उत्तर– ओजोन परत वायुमंडल की एक सुरक्षा परत है जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी के जीवों की रक्षा करती है।

(vii) ओज़ोन की परत को कौन नष्ट कर रहा है? पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।
उत्तर- पेट्रोल से चलने वाले जेट विमान और औद्योगिक गतिविधियाँ ओज़ोन परत को नष्ट कर रही हैं।

(viii) प्रदूषण से मुक्ति दिलाने की बात किसने सूर्यदेव से की?
उत्तर– बुद्धिदेवी ने सूर्यदेव से प्रदूषण से मुक्ति दिलाने की बात की।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन या चार पंक्तियों में दीजिए-
(i) यदि वायुमंडल न होता तो पृथ्वी का क्या हाल होता? पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।
उत्तर– यदि वायुमंडल न होता तो पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता। अंतरिक्ष से आने वाली उल्काएँ सीधे पृथ्वी से टकरातीं और भारी विनाश करतीं। पृथ्वी का धरातल चंद्रमा की तरह बड़े-बड़े गड्ढों से भर जाता। प्राणी जीवित नहीं रह पाते। वायुमंडल ही पृथ्वी को बाहरी खतरों से सुरक्षा देता है।

(ii) वनदेवी ने हरी पत्तियों को ‘ऑक्सीजन का कारखाना’ क्यों कहा?
उत्तर– वनदेवी ने हरी पत्तियों को ऑक्सीजन का कारखाना इसलिए कहा क्योंकि वे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया करती हैं। सूर्य के प्रकाश की सहायता से पत्तियाँ कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करती हैं। वे उससे भोजन बनाती हैं और ऑक्सीजन वायु में छोड़ती हैं। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।

(iii) वनदेवी ने गुस्से में आकर रश्मिदेवी को क्या कहा?
उत्तर– गुस्से में वनदेवी ने रश्मिदेवी से कहा कि सोच-समझकर बात किया करें। उन्होंने कहा कि मानव की आधुनिक प्रगति के कारण जंगल तेजी से नष्ट हो रहे हैं। विवेकहीन मनुष्य अंधाधुंध पेड़ काट रहा है। इससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है।

(iv) वन किस प्रकार हमारे लिए लाभकारी हैं?
उत्तर– वन वायु को शुद्ध करते हैं और ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। वे वर्षा लाने में सहायक होते हैं। वन अनेक जीव-जंतुओं का निवास स्थान हैं। ये भोजन, लकड़ी और औषधियाँ देते हैं। वनों से प्रकृति का संतुलन बना रहता है।

(v) रेडियोधर्मिता क्या है? मनुष्य पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर- रेडियोधर्मिता परमाणु परीक्षणों से निकलने वाला हानिकारक विकिरण है। यह मानव शरीर को धीरे-धीरे नष्ट करता है। इससे गंभीर बीमारियाँ होती हैं। इससे जन्म लेने वाली पीढ़ियाँ भी विकृत हो सकती हैं। यह जीवन के लिए अत्यंत घातक है।

(vi) बुद्धिदेवी ने मानव रक्षा के लिए सूर्यदेव को क्या भरोसा दिलाया?
उत्तर– बुद्धिदेवी ने सूर्यदेव को भरोसा दिलाया कि वह प्रदूषण दैत्य से पृथ्वी की रक्षा करेंगी। उन्होंने कहा कि मानव अपनी बुद्धि के बल पर हर संकट पर विजय पाता रहा है। वे जल, वायु और वनस्पति की रक्षा करेंगी। प्रदूषण का उन्मूलन उनका लक्ष्य होगा।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर छह या सात पंक्तियों में दीजिए-
(i) लेखक ने प्रदूषण को महादैत्य कहा है। आप लेखक की बात से कहाँ तक सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर– मैं लेखक की इस बात से पूरी तरह से सहमत हूँ कि प्रदूषण एक महादैत्य है। यह ऐसा दैत्य है जो दिखाई नहीं देता, परंतु धीरे-धीरे मनुष्य, प्रकृति और पूरे पर्यावरण को नष्ट कर देता है। प्रदूषण वायु, जल और भूमि को विषैला बना देता है, जिससे मानव जीवन गंभीर संकट में पड़ जाता है। इसके कारण श्वास रोग, जलजनित रोग और अनेक असाध्य बीमारियाँ फैलती हैं। औद्योगिक प्रगति, वाहनों की बढ़ती संख्या और मानव की स्वार्थपूर्ण गतिविधियाँ इसके मुख्य कारण हैं। प्रदूषण केवल वर्तमान ही नहीं, आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित करता है। यह प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देता है। इसलिए लेखक द्वारा प्रदूषण को महादैत्य कहना पूर्णतः उचित और सार्थक है।

(ii) जल, वायु और ध्वनि-प्रदूषण हमारे लिए बहुत ही घातक है- स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- जल प्रदूषण के कारण नदियों, तालाबों और भूमिगत जल में गंदगी और विषैले पदार्थ मिल जाते हैं, जिससे पीने का पानी जहरीला हो जाता है। ऐसा दूषित पानी पीने से हैजा, टायफाइड, पेचिश और पीलिया जैसी अनेक गंभीर बीमारियाँ फैलती हैं। वायु प्रदूषण के कारण हवा में धुआँ, धूल और जहरीली गैसें मिल जाती हैं, जिससे मनुष्य को साँस लेने में कठिनाई होती है। इससे दमा, तपेदिक, खाँसी और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ती हैं। ध्वनि प्रदूषण से मनुष्य के कानों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और धीरे-धीरे बहरापन भी हो सकता है। ये तीनों प्रकार के प्रदूषण मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। इसलिए जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण को अत्यंत घातक माना गया है और इन्हें रोकना बहुत आवश्यक है।

(iii) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
1. यह दैत्य ऐसा ही है जो दिखाई नहीं देता परंतु धीरे-धीरे पृथ्वी के वातावरण को विषाक्त बना रहा है।
2. मैं हूँ मानव का महाकाल, प्रगाति का अभिशाप, औद्योगिक प्रगति का विष-वृक्ष, मैं हूँ मानव का अदृश्य शत्रु-प्रदूषण दैत्य समझे……. प्रदूषण दैत्य !
3. आप लोग चिंता न करें, मुझ पर भरोसा रखें। आदि मानव विनाशकारी अग्नि से भयभीत हो गया था। फिर उसने इसी अग्नि को अपने अधीन कर लिया और आज अग्नि मानव के लिए बड़ी देन है। मैं इस प्रदूषण दैत्य को ही जड़ से समाप्त कर दूँगी। संसार में इसका उन्मूलन करना परमावश्यक है।
उत्तर-
1. यह दैत्य ऐसा …………………………………………… विषाक्त बना रहा है।
इस पंक्ति का अर्थ है कि प्रदूषण एक ऐसा अदृश्य शत्रु है जो हमें दिखाई नहीं देता, परंतु उसका प्रभाव बहुत गहरा और खतरनाक है। यह धीरे-धीरे वायु, जल और भूमि को दूषित करता जा रहा है, जिससे पर्यावरण असंतुलित हो रहा है और मानव जीवन पर गंभीर संकट उत्पन्न हो रहा है। इसलिए इसे दैत्य कहा गया है, क्योंकि यह चुपचाप प्रकृति और जीवन को नष्ट कर रहा है।

2. मैं हूँ मानव ……………………………………………………… प्रदूषण दैत्य !
इन पँक्तियों में प्रदूषण को मानव का सबसे बड़ा शत्रु बताया गया है। लेखक ने प्रदूषण को ‘महाकाल’ कहकर यह स्पष्ट किया है कि यह धीरे-धीरे मानव जीवन का नाश कर रहा है। इसे प्रगति का अभिशाप और औद्योगिक विकास का विष-वृक्ष इसलिए कहा गया है क्योंकि विकास के नाम पर फैक्टरियाँ, मशीनें और रासायनिक पदार्थ पर्यावरण को जहरीला बना रहे हैं। प्रदूषण दिखाई नहीं देता, पर इसका प्रभाव अत्यंत विनाशकारी है, इसलिए इसे मानव का अदृश्य शत्रु कहा गया है।

3. आप लोग चिंता ……………………………………………… परमावश्यक है।
इस पंक्ति में बुद्धिदेवी मानवता को आश्वासन देती है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है। वह उदाहरण देकर समझाती है कि आदि मानव पहले आग से डरता था, पर बाद में उसने उसे अपने नियंत्रण में कर लिया और आज आग मानव के लिए उपयोगी साधन बन गई है। उसी प्रकार प्रदूषण भी मानव द्वारा उत्पन्न समस्या है, जिसे बुद्धि और सही प्रयासों से जड़ से समाप्त किया जा सकता है। इसलिए संसार से प्रदूषण का उन्मूलन अत्यंत आवश्यक बताया गया है।

(ख) भाषा- बोध
1. निम्नलिखित एकवचन शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए:

एकवचन बहुवचन एकवचन बहुवचन
पत्ता – ____________ नज़र – ____________
पुत्री – ____________ गड्ढा – ____________
आँत – ____________ पृथ्वी – ____________
बहरा – ____________ किरण – ____________
साड़ी – ____________ पीला – ____________
परत – ____________ लकड़ी – ____________
नीला – ____________ गैस – ____________
पत्ती – ____________ देवी – ____________

उत्तर-

एकवचन बहुवचन एकवचन बहुवचन
पत्ता – पत्ते  नज़र – नज़रे 
पुत्री – पुत्रियाँ  गड्ढा – गड्डे 
आँत – आँतें  पृथ्वी – पृथ्वियाँ 
बहरा – बहरे किरण – किरणे
साड़ी – साड़ियाँ पीला – पीले 
परत – परते  लकड़ी – लकड़ियाँ
नीला – नीले गैस – गैसें 
पत्ती – पत्तियाँ  देवी – देवियाँ 

2. निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग तथा मूल शब्द अलग-अलग करके लिखिए-

शब्द उपसर्ग मूल शब्द
उन्नति ________ ________
असत्य ________ ________
प्रगति ________ ________
प्रत्येक ________ ________
आगमन ________ ________
प्रदूषण ________ ________
अत्यधिक ________ ________
दुष्प्रभाव ________ ________

उत्तर-

शब्द उपसर्ग मूल शब्द
उन्नति उत्  नति
असत्य सत्य
प्रगति प्र गति
प्रत्येक प्रति  एक
आगमन गमन
प्रदूषण प्र दूषण
अत्यधिक अति  अधिक
दुष्प्रभाव दुः  प्रभाव

3. निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय तथा मूल शब्द अलग-अलग करके लिखिए-

शब्द मूल शब्द प्रत्यय
प्रसन्नता __________ __________
उपयोग __________ __________
उपहार __________ __________
तीव्रता __________ __________
विषैला __________ __________
ज़हरीला __________ __________

उत्तर-

शब्द मूल शब्द प्रत्यय
प्रसन्नता प्रसन्न ता
उपयोग * *
उपहार * *
तीव्रता तीव्र ता
विषैला विष  ऐला
ज़हरीला ज़हर  ईला

*उप + योग
उप + हार
ये दोनों शब्द ‘उप’ उपसर्ग के योग से बने हैं। उपयोग शब्द में ई प्रत्यय जोड़कर उपयोगी शब्द बनाया जा सकता है। 

4. निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ समझकर उन्हें वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए-

मुहावरा अर्थ वाक्य
चारा न रहना उपाय न होना _____________
गज़ब ढाना जुल्म करना _____________
नाक में दम करना तंग करना _____________
घुला घुला कर मारना धीरे-धीरे कष्ट पहुँचाकर मारना _____________
लोहा लेना युद्ध करना _____________
तिनके के समान बहुत कमजोर _____________

उत्तर-

मुहावरा अर्थ वाक्य
चारा न रहना उपाय न होना विषाक्त भोजन खाकर आत्मघात करने के सिवाय कोई चारा नहीं रहेगा।
गज़ब ढाना जुल्म करना इस शताब्दी के अंत तक तो यह प्रदूषण दैत्य न मालूम क्या गज़ब ढाएगा। 
नाक में दम करना तंग करना प्रदूषण दैत्य ने वायु, जल और वनस्पति की नाक में दम कर दिया। 
घुला घुला कर मारना धीरे-धीरे कष्ट पहुँचाकर मारना प्रदूषण दैत्य सभी जीवों को घुला घुलाकर मारेगा। 
लोहा लेना युद्ध करना अपने कठिन परिश्रम और सफलता से उसने बड़े-बड़े खिलाड़ियों से भी लोहा लिया।
तिनके के समान बहुत कमजोर तेज़ आँधी के सामने उसका विरोध तिनके के समान था।

5. निम्नलिखित तद्भव शब्दों के तत्सम रूप लिखिए-

तद्भव तत्सम तद्भव तत्सम
सफेद – ________ सूरज – ________
पीला – ________ करोड़ – ________
चाँद – ________ समुन्दर – ________

उत्तर-

तद्भव तत्सम तद्भव तत्सम
सफेद – श्वेत सूरज – सूर्य 
पीला – पीत  करोड़ – कोटि
चाँद – चंद्र समुन्दर – समुद्र 

 

6. निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम चिह्न लगाइए-
(i) वह है मेरी प्रिय पुत्री पृथ्वी
(ii) कौन रश्मि तुम मेरी बातें सुन रही थीं
(iii) हाँ तुमने ठीक पहचाना
(iv) सिंहासन से उठकर आखिर बात क्या है
(v) मुझे आशीर्वाद दीजिए शक्ति दीजिए कि मैं लोग कल्याण के इस कार्य को करने में सफल होऊँ
उत्तर-
(i) वह है मेरी प्रिय पुत्री-पृथ्वी।
(ii) कौन? रश्मि तुम मेरी बातें सुन रही थीं!
(iii) हाँ, तुमने ठीक पहचाना।
(iv) (सिंहासन से उठकर) आखिर बात क्या है?
(v) मुझे आशीर्वाद दीजिए, शक्ति दीजिए कि मैं लोग-कल्याण के इस कार्य को करने में सफल होऊँ।

(ग) रचनात्मक अभिव्यक्ति
1. प्रदूषण की रोकथाम के लिए आप क्या सुझाव देंगे?
उत्तर– प्रदूषण की रोकथाम के लिए सबसे पहले हमें अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करने चाहिए। अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और वनों की कटाई रोकनी चाहिए। निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करना चाहिए। कारखानों से निकलने वाले धुएँ और गंदे पानी को नियंत्रित करना आवश्यक है। प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करना चाहिए। कचरे का उचित निपटान और पुनर्चक्रण अपनाना चाहिए। साथ ही, लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना भी बहुत ज़रूरी है।

2. क्या सचमुच बुद्धिदेवी प्रदूषण जैसे महादैत्य से छुटकारा दिला सकती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- हाँ, सचमुच बुद्धिदेवी प्रदूषण जैसे महादैत्य से छुटकारा दिला सकती है। बुद्धिदेवी का अर्थ है मानव की समझ, विवेक और सही सोच। यदि मनुष्य अपनी बुद्धि का सही उपयोग करे, तो वह विज्ञान और तकनीक को पर्यावरण के अनुकूल बना सकता है। जैसे मानव ने अग्नि को नियंत्रित किया, वैसे ही वह प्रदूषण पर भी नियंत्रण पा सकता है। जागरूकता, वैज्ञानिक समाधान और सामूहिक प्रयास से प्रदूषण को समाप्त किया जा सकता है। इसलिए बुद्धिदेवी मानव की सबसे बड़ी शक्ति है।

3. आपकी दृष्टि में प्रदूषण को कम करने में सरकारों की क्या भूमिका होनी चाहिए।
उत्तर- प्रदूषण को कम करने में सरकारों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। सरकार को सख्त पर्यावरण कानून बनाने और उनका पालन कराना चाहिए। प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर नियंत्रण और दंड का प्रावधान होना चाहिए। स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना चाहिए। वृक्षारोपण और जल संरक्षण के लिए योजनाएँ बनानी चाहिए। साथ ही, जनता को जागरूक करने के लिए अभियान चलाने चाहिए। सरकार और जनता के सहयोग से ही प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

PSEB Class 9 Hindi Lesson 19 प्रकृति का अभिशाप सार-आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)

निम्नलिखित गद्याँशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1
पहला दृश्य
(पार्श्वभूमि को पूरी तरह से घेरता हुआ सौरमंडल का रंगीन चित्र। मंच के बीचोंबीच एक विशाल सुनहरा सिंहासन, जिस पर सूर्यदेव विराजमान हैं। रश्मिदेवी सिंहासन के पीछे खड़ी हैं।)
सूर्यदेव : (चिंतित मुद्रा में) इस सौर जगत में मेरे विशाल कुटुंब में, जितने भी ग्रह हैं, उनमें से एक के विषय में मुझे कुछ चिंता हो चली है। वह है मेरी प्रिय पुत्री-पृथ्वी। अपने इस कुटुंब में मैंने पृथ्वी को ही अधिक योग्य बनाया है। पृथ्वी की गोद में अनेक प्रकार के जीव-जंतु और पेड़-पौधे पनप सकते हैं, यहाँ तक कि सबसे अधिक आश्चर्यजनक अनोखा जीव भी…।
रश्मिदेवी : अर्थात मानव, यही न स्वामी !
सूर्यदेव : (चौंककर) कौन? रश्मि तुम मेरी बातें सुन रही थीं! हाँ, तुमने ठीक पहचाना। सबसे अनोखा जीव मानव है और उसके अनोखे होने का कारण है, उसका मस्तिष्क।
रश्मिदेवी : स्वामी! जब आपने अपनी लाड़ली पृथ्वी को सौर जगत में इतना अच्छा स्थान दिया है और मानव जैसा अनोखा उपहार दिया है, तब आपको चिंता कैसी? और मैं तो अभी पृथ्वी का भ्रमण करके ही आ रही हूँ। मुझे तो पूरे सौर जगत में पृथ्वी एक नंदनवन जैसी लगती है।
सूर्यदेव : (आतुरता से) क्या तुम पृथ्वी का भ्रमण करके आ रही हो? तो फिर बताओ, मेरी प्रिय पुत्री का क्या हाल है?
रश्मिदेवी : उसका हाल बहुत अच्छा है। मानव ने अपने मस्तिष्क के सहारे प्रगति की है। जंगल और गुफाओं में रहने वाला मानव आज नगरों में बड़ी-बड़ी अट्टालिकाओं में रहता है। उसने प्रकृति पर काफ़ी सीमा तक विजय प्राप्त कर ली है। वह उन्नति के शिखर…।

1.सूर्यदेव किस ग्रह के विषय में चिंतित हैं?
(क) मंगल
(ख) शुक्र
(ग) पृथ्वी
(घ) बुध
उत्तर– (ग) पृथ्वी

2. सूर्यदेव के अनुसार मानव को सबसे अनोखा जीव क्यों कहा गया है?
(क) उसकी शारीरिक शक्ति के कारण
(ख) उसके मस्तिष्क के कारण
(ग) उसके निवास स्थान के कारण
(घ) उसकी संख्या के कारण
उत्तर– (ख) उसके मस्तिष्क के कारण

3. रश्मिदेवी को पृथ्वी कैसी प्रतीत होती है?
(क) मरुस्थल जैसी
(ख) रणभूमि जैसी
(ग) उजड़ी हुई
(घ) नंदनवन जैसी
उत्तर– (घ) नंदनवन जैसी

4. सूर्यदेव पृथ्वी को अन्य ग्रहों से अधिक योग्य क्यों मानते हैं?
उत्तर- क्योंकि पृथ्वी पर जीव-जंतु, पेड़-पौधे और मानव जैसे अनोखे प्राणी पनप सकते हैं।

5. मानव के जीवन में क्या परिवर्तन आया है?
उत्तर- मानव जंगलों और गुफाओं से निकलकर नगरों की ऊँची अट्टालिकाओं में रहने लगा है।

2
(पवनदेव का प्रवेश)
पवनदेव : (बात काटकर) नहीं भगवन् ! उन्नति नहीं, पतन के गर्त में गिरने वाला है।
(जलदेवी का प्रवेश)
जलदेवी : (क्रोधित स्वर में) लेकिन ऐसी उन्नति भी भला किस काम की, जिससे उसे अशुद्ध जल पीकर अनेक बीमारियों का शिकार होना पड़ता है। (सूर्यदेव तथा रश्मिदेवी और अधिक आश्चर्यचकित होते हैं।)
(वनदेवी का प्रवेश)
वनदेवी : यही नहीं, असाधारण प्रगति के कारण मानव के समक्ष विषाक्त भोजन खाकर आत्मघात करने के सिवाय कोई चारा नहीं रहेगा, भगवन् !
सूर्यदेव : (एक-एक चेहरे को देखते हुए) आखिर आप लोग हैं कौन और क्या कह रहे हैं?
पवनदेव : (हाथ जोड़कर) सौर जगत के अधिपति भगवान सूर्य हमें क्षमा करें। देवी रश्मि के असत्य कथन से कि मानव उन्नति के शिखर पर पहुँच रहा है, लोग क्षुब्ध हो उठे और बीच में ही बोल उठे। क्षमा करें भगवन्!
(सूर्यदेव अभी भी चकित मुद्रा में)
पवनदेव : हम (सिर झुकाकर) देव! आपकी लाड़ली पुत्री पृथ्वी का तुच्छ सेवक पवनदेव आपको नमन करता है।
जलदेवी : (सिर झुकाकर) उसी पृथ्वी की सेविका इस जलदेवी का प्रणाम स्वीकार करें।
वनदेवी : (सिर झुकाकर) भगवन्! आपकी पुत्री पृथ्वी की एक और सेविका वनदेवी का कोटि-कोटि प्रणाम!
सूर्यदेव : (हाथ उठाकर) अपनी पुत्री की सेविकाओं से मिलकर मुझे प्रसन्नता हो रही है परंतु आप लोगों के इस अनायास आगमन का कारण क्या है?
पवनदेव : (खिन्न स्वर में) भगवन्! क्षमा करें परंतु हमारी स्वामिनी पृथ्वी इस समय बड़े संकट में है और अपने दुःख की गाथा सुनाने ही उन्होंने हमें यहाँ भेजा है।
सूर्यदेव : (तेज़ स्वर में) क्या कहा? हमारे रहते हमारी पुत्री संकट में है? असंभव ! (रश्मि की ओर मुड़कर) रश्मि ! तुम तो अभी पृथ्वी का भ्रमण करके आई हो। तुमने अभी बताया कि पृथ्वी नंदनवन – सी लगती है!
रश्मिदेवी : (मुस्कराकर) मैंने तो अपने भ्रमण में ऐसा ही पाया। हर जगह मानव की प्रगति हो रही है।
जलदेवी : (दो कदम आगे बढ़कर) भगवन्! क्षमा करें। रश्मिदेवी ने प्रकाश की तीव्र गति से पृथ्वी का भ्रमण किया इसलिए उन्हें केवल ऊपरी-ऊपरी बातें ही नज़र आई होंगी।
सूर्यदेव : (सिंहासन से उठकर) आखिर बात क्या है? कौन-सा ऐसा बड़ा संकट पृथ्वी पर मंडरा रहा है?

1.पवनदेव मानव की स्थिति को किस रूप में बताते हैं?
(क) उन्नति के शिखर पर
(ख) सुख-समृद्धि की अवस्था में
(ग) पतन के गर्त में गिरता हुआ
(घ) पूर्ण संतुलन की स्थिति में
उत्तर– (ग) पतन के गर्त में गिरता हुआ

2. जलदेवी मानव की तथाकथित उन्नति पर आपत्ति क्यों जताती हैं?
(क) क्योंकि मानव भोजन की कमी से जूझ रहा है
(ख) क्योंकि मानव अशुद्ध जल पीकर बीमार हो रहा है
(ग) क्योंकि मानव शिक्षा से वंचित है
(घ) क्योंकि मानव प्रकृति से दूर नहीं हुआ है
उत्तर– (ख) क्योंकि मानव अशुद्ध जल पीकर बीमार हो रहा है

3. पवनदेव, जलदेवी और वनदेवी सूर्यदेव के पास क्यों आते हैं?
(क) पृथ्वी के संकट की बात बताने
(ख) पृथ्वी की सुंदरता बताने
(ग) पृथ्वी की प्रगति का गुणगान करने
(घ) सूर्यदेव को प्रणाम करने
उत्तर- (क) पृथ्वी के संकट की बात बताने

4. वनदेवी के अनुसार मानव के सामने कौन-सी गंभीर समस्या खड़ी होने वाली है?
उत्तर– वनदेवी के अनुसार विषाक्त भोजन के कारण मानव के सामने आत्मघात जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

5. सूर्यदेव को किस बात पर अधिक आश्चर्य होता है?
उत्तर- सूर्यदेव को इस बात पर आश्चर्य होता है कि पृथ्वी संकट में है जबकि रश्मिदेवी उसे नंदनवन जैसी बता रही थीं।

3
पवनदेव : (घबराए स्वर में) देव! एक महादैत्य हम लोगों के पीछे लगा हुआ है।
रश्मिदेवी : (डरी हुई मुद्रा में) क… क… क… क्या कहा? महादैत्य! (सूर्य से चिपककर) मुझे बचाइए!
सूर्यदेव : डरती क्यों हो? क्या तुमने अपने भ्रमण के दौरान उस महादैत्य को देखा?
रश्मिदेवी : (वीरता के भाव से) मैंने कोई दैत्य नहीं देखा। मैं किसी से डरने वाली नहीं।
सूर्यदेव : (क्रोधित होकर) तुमने नहीं देखा, तो फिर ये लोग क्या कह रहे हैं? बोलो!
पवनदेव : (मंच पर एक चक्कर काटते हुए) रश्मिदेवी ठीक कह रही हैं। यह दैत्य ऐसा ही है जो दिखाई नहीं देता परंतु धीरे-धीरे पृथ्वी के वातावरण को विषाक्त बना रहा है।
सूर्यदेव : क्या नाम है उस दैत्य का?
जलदेवी : उसका नाम है – प्रदूषण!
रश्मिदेवी : खर-दूषण का नाम तो मैंने सुना है किंतु उसे तो प्रभु रामचंद्र जी ने त्रेतायुग में समाप्त कर दिया था।
पवनदेव : (हँसी रोकने की मुद्रा में) देवी जी, खर-दूषण नहीं! प्रदूषण! प्रदूषण!
रश्मिदेवी : (सिर हिलाकर) हाँ, तो यह राक्षस अवश्य ही खर-दूषण के कुल में जन्मा होगा।
वनदेवी : (अपने स्थान से एक कदम आगे बढ़कर) जी नहीं। इस राक्षस का प्रादुर्भाव गत शताब्दी में हुआ, जब से संसार में औद्योगिक क्रांति प्रारंभ हुई। इस शताब्दी के अंत तक तो यह न मालूम क्या गज़ब ढाएगा!
सूर्यदेव : (सिंहासन पर बैठ जाते हैं) देखो, तुम लोग जरा स्पष्ट रूप से सब समझाओ। पवन! पहले तुम बताओ।
पवनदेव : (सूर्य के आगे नत होकर) भगवन्, आप जानते ही हैं कि यह तुच्छ सेवक पवन, आपकी पुत्री पृथ्वी के वातावरण का एक मुख्य घटक है। वायुमंडल के रूप में मैंने पृथ्वी को आच्छादित कर रखा है।
सूर्यदेव : हाँ, मैंने अपने अन्य किसी पुत्र को इतना अच्छा वातावरण नहीं दिया। वायुमंडल के कारण एक तो पृथ्वी के प्राणी जीवित रह पाते हैं, दूसरा यह कई प्रकार के संकटों से पृथ्वी की रक्षा भी करता है।
रश्मिदेवी : (डरकर) वह कैसे?
सूर्यदेव : अंतरिक्ष में अनेक उल्काएँ हर पल पृथ्वी की ओर आकृष्ट होती हैं। वायुमंडल घर्षण के कारण वे मार्ग में ही भस्म हो जाती हैं। यदि वायुमंडल न होता, तो उल्काएँ पृथ्वी पर विनाश करतीं। पृथ्वी का धरातल भी चंद्रमा के समान बड़े-बड़े गड्ढों से युक्त होता।
पवनदेव : जी हाँ! मेरे अस्तित्व के कारण ही पृथ्वी पर जीवन संभव है।

1.वनदेवी के अनुसार प्रदूषण दैत्य का प्रादुर्भाव कब हुआ?
(क) त्रेतायुग में
(ख) द्वापर युग में
(ग) प्राचीन काल में
(घ) गत शताब्दी में औद्योगिक क्रांति के साथ
उत्तर- (घ) गत शताब्दी में औद्योगिक क्रांति के साथ

2. पवनदेव के अनुसार पृथ्वी को विषाक्त बनाने वाला महादैत्य कौन है?
(क) खर-दूषण
(ख) औद्योगिक दैत्य
(ग) प्रदूषण
(घ) विनाश
उत्तर- (ग) प्रदूषण

3. वायुमंडल पृथ्वी की रक्षा किस प्रकार करता है?
(क) वर्षा कराकर
(ख) उल्काओं को मार्ग में ही भस्म करके
(ग) केवल ऑक्सीजन देकर
(घ) पृथ्वी को ठंडा रखकर
उत्तर- (ख) उल्काओं को मार्ग में ही भस्म करके

4. पवनदेव ने प्रदूषण दैत्य के बारे में क्या बताया?
उत्तर– पवनदेव ने बताया कि यह दैत्य दिखाई नहीं देता, पर धीरे-धीरे पृथ्वी के वातावरण को विषाक्त बना रहा है।

5. सूर्यदेव के अनुसार वायुमंडल न होने पर पृथ्वी की क्या स्थिति होती?
उत्तर- वायुमंडल न होने पर उल्काएँ पृथ्वी पर गिरकर विनाश करतीं और धरातल बड़े-बड़े गड्ढों से भर जाता।

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सूर्यदेव : मनुष्य के लिए शुद्ध हवा की कमी न रहे इसीलिए मैंने पृथ्वी को हवा के अथाह समुद्र में डुबो दिया है।
पवनदेव : (उदास होकर) इस हवा के अथाह समुद्र का केवल 1/5 भाग, जिसे ऑक्सीजन कहते हैं, मानव के लिए प्रत्यक्षतः उपयोग का है और मुझमें इसका तीव्रता से ह्रास होता जा रहा है।
सूर्यदेव : क्या इस ह्रास को रोका नहीं जा सकता?
पवनदेव : प्रत्येक जीव ऑक्सीजन का उपयोग करता है और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है। यही नहीं, असंख्य कारखानों, इंजनों में आग का उपयोग हो रहा है जिससे कार्बन डाइऑक्साइड अत्यधिक उत्पन्न हो रही है। मुझमें ऑक्सीजन कम होने का यह प्रमुख कारण है।
सूर्यदेव : इस दूषित कार्बन डाइऑक्साइड से पुनः ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए ही तो मैंने वनस्पति जैसी सेविका पृथ्वी को प्रदान की है।
वनदेवी : प्रभु, आपका कहना ठीक है ! आपके तीव्र प्रकाश की सहायता से मेरी हरी पत्तियाँ कार्बन डाइऑक्साइड को प्रकाश संश्लेषण की क्रिया से कार्बन और ऑक्सीजन में विश्लेषित करती हैं। मैं स्वयं के पोषण के लिए कार्बन रख लेती हूँ और प्राणदायिनी ऑक्सीजन को पुनः वायु में भेज देती हूँ। मेरी प्रत्येक हरी पत्ती एक अनोखा कारखाना है जो भोजन और ऑक्सीजन बनाती है। इस कारखाने में कभी कोई हड़ताल नहीं होती है।
रश्मिदेवी : (मुँह बनाकर) इतना अच्छा काम तुम्हारा, फिर भी यह रोनी सूरत !
वनदेवी : प्रभु, आपने अपनी प्रकृति को संतुलित बनाया था परंतु अब कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ती जा रही है और मैं घटती जा रही हूँ।
रश्मिदेवी : नहीं…नहीं… वनस्पतियाँ पैदा भी होती हैं।
वनदेवी : (गुस्से से) ज़रा सोच-समझकर बात किया करो ! मानव की आधुनिक प्रगति और औद्योगिक वृद्धि के कारण हरे-भरे जंगल नष्ट हो रहे हैं। विवेकहीन मनुष्य जंगल की लकड़ी अंधाधुंध काट रहा है। नई बस्तियाँ, नए शहर बसाने के लिए और कागज बनाने के लिए उपयोगी जंगल काट लिए जाते हैं। फलस्वरूप न केवल वायु को शुद्ध करने की मेरी क्षमता नष्ट हो रही है, अपितु…।
रश्मिदेवी : अब बंद भी करो अपना रोना !
वनदेवी : इसे मज़ाक न समझो। जंगलों के नष्ट होने से दो नुकसान और भी होते हैं। इनका प्रभाव मानव के जीवन पर भी पड़ता है।
सूर्यदेव : ये कौन-से नुकसान हैं?
वनदेवी : वन वर्षा लाते हैं। वनों की कमी से वर्षा नहीं होती। वर्षा न होने से वनस्पतियाँ नहीं उगतीं और वनस्पतियों के अभाव में वायु अशुद्ध रह जाती है, फिर वन अन्य वन्यप्राणियों के निवास-स्थान भी हैं। प्रकृति में इन प्राणियों का अपना अलग-अलग उपयोग और महत्व है।

1.पवनदेव के अनुसार वायु में मानव के लिए प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी भाग कौन-सा है?
(क) नाइट्रोजन
(ख) कार्बन डाइऑक्साइड
(ग) ऑक्सीजन
(घ) हाइड्रोजन
उत्तर- (ग) ऑक्सीजन

2. वनदेवी के अनुसार हरी पत्तियाँ किस क्रिया द्वारा ऑक्सीजन बनाती हैं?
(क) प्रकाश संश्लेषण
(ख) वाष्पीकरण
(ग) श्वसन
(घ) दहन
उत्तर- (क) प्रकाश संश्लेषण

3. वायु में ऑक्सीजन की कमी का मुख्य कारण क्या बताया गया है?
उत्तर- कारखानों और इंजनों में आग के अधिक उपयोग से कार्बन डाइऑक्साइड की वृद्धि, ऑक्सीजन की कमी का मुख्य कारण है।

4. वनदेवी अपनी प्रत्येक हरी पत्ती को ‘अनोखा कारखाना’ क्यों कहती हैं?
उत्तर– क्योंकि प्रत्येक हरी पत्ती भोजन बनाती है और प्राणदायिनी ऑक्सीजन वायु में छोड़ती है।

5. वनों की कमी से मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर– वनों की कमी से वर्षा घटती है, वायु अशुद्ध होती है और वन्यप्राणियों का आश्रय नष्ट हो जाता है।

PSEB Class 9 Hindi Lesson 19 प्रकृति का अभिशाप बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

 

1.प्रदूषण दैत्य स्वयं को क्या कहता है?
(क) प्रकृति का रक्षक
(ख) मानव का मित्र
(ग) मानव का महाकाल
(घ) देवताओं का सेवक
उत्तर- (ग) मानव का महाकाल

2. जीवन के लिए आवश्यक पाँच तत्व कौन-से हैं?
(क) पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश
(ख) जल, वायु, अग्नि, सूर्य, चंद्र
(ग) पृथ्वी, सूर्य, जल, वायु, पर्वत
(घ) जल, वायु, आकाश, वन, नदी
उत्तर– (क) पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश

3. नाटक के अंत में किसकी विजय का विश्वास दिलाया गया है?
(क) प्रदूषण दैत्य की
(ख) मानव की
(ग) बुद्धिदेवी की
(घ) रश्मिदेवी की
उत्तर– (ग) बुद्धिदेवी की

4. प्रदूषण दैत्य का नया सहायक कौन है?
(क) धुआँ
(ख) रेडियोधर्मिता
(ग) धूल
(घ) गैस
उत्तर- (ख) रेडियोधर्मिता

5. समुद्र में तेल फैलने से किसे अधिक नुकसान होता है?
(क) पक्षियों को
(ख) मछलियों को
(ग) पर्वतों को
(घ) वनों को
उत्तर- (ख) मछलियों को

6. कीटनाशक रसायनों का अत्यधिक प्रयोग किसे हानि पहुँचाता है?
(क) उपयोगी वनस्पतियों को
(ख) केवल कीटों को
(ग) केवल मानव को
(घ) सूर्य को
उत्तर– (क) उपयोगी वनस्पतियों को

7. प्रस्तुत पाठ किस विधा में लिखा गया है?
(क) निबंध
(ख) कहानी
(ग) एकांकी
(घ) कविता
उत्तर- (ग) एकांकी

8. सूर्यदेव किसकी चिंता करते हैं?
(क) मानव की
(ख) चंद्रमा की
(ग) वायु की
(घ) पृथ्वी की
उत्तर– (घ) पृथ्वी की

9. ओज़ोन परत किससे रक्षा करती है?
(क) अवरक्त किरणों से
(ख) पराबैंगनी किरणों से
(ग) वर्षा से
(घ) ताप से
उत्तर– (ख) पराबैंगनी किरणों से

10. पेट्रोल में कौन-सा पदार्थ मिलाया जाता है?
(क) सीसा
(ख) पारा
(ग) गंधक
(घ) लोहा
उत्तर– (क) सीसा

11. वनस्पतियों के नष्ट होने से कौन-सा नुकसान होता है?
(क) अधिक वर्षा
(ख) वायु शुद्ध होती है
(ग) वर्षा कम होती है
(घ) तापमान घटता है
उत्तर– (ग) वर्षा कम होती है

12. मानव के लिए प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी गैस कौन-सी है?
(क) नाइट्रोजन
(ख) हाइड्रोजन
(ग) कार्बन मोनोऑक्साइड
(घ) ऑक्सीजन
उत्तर- (घ) ऑक्सीजन

13. वायुमंडल पृथ्वी की किससे रक्षा करता है?
(क) वर्षा से
(ख) उल्काओं से
(ग) भूकंप से
(घ) ज्वालामुखी से
उत्तर- (ख) उल्काओं से

14. प्रदूषण दैत्य की विशेषता क्या है?
(क) वह अदृश्य है
(ख) वह दिखाई देता है
(ग) वह छोटा है
(घ) वह निर्बल है
उत्तर- (क) वह अदृश्य है

15. पृथ्वी की सेवक/सेविकाएँ कौन-कौन हैं?
(क) रश्मिदेवी और बुद्धिदेवी
(ख) अग्निदेव और वायुदेव
(ग) सूर्यदेव और चंद्रदेव
(घ) जलदेवी, पवनदेव, वनदेवी
उत्तर- (घ) जलदेवी, पवनदेव, वनदेवी

16. पवनदेव मानव की प्रगति को क्या बताते हैं?
(क) वास्तविक उन्नति
(ख) आध्यात्मिक उन्नति
(ग) पतन की ओर
(घ) संतुलित उन्नति
उत्तर– (ग) पतन की ओर

17. अशुद्ध जल पीने से मानव को क्या होता है?
(क) शक्ति मिलती है
(ख) बीमारियाँ होती हैं
(ग) दीर्घायु मिलती है
(घ) बुद्धि बढ़ती है
उत्तर- (ख) बीमारियाँ होती हैं

18. मानव को सबसे अनोखा जीव क्यों कहा गया है?
(क) उसकी शक्ति के कारण
(ख) उसकी संख्या के कारण
(ग) उसके मस्तिष्क के कारण
(घ) उसकी आयु के कारण
उत्तर– (ग) उसके मस्तिष्क के कारण

19. पृथ्वी के संकट का मुख्य कारण क्या बताया गया है?
(क) प्राकृतिक आपदा
(ख) दैत्य प्रदूषण
(ग) ग्रहों की गति
(घ) सूर्य की तपन
उत्तर– (ख) दैत्य प्रदूषण

20. पृथ्वी को सूर्यदेव की क्या बताया गया है?
(क) सेविका
(ख) मित्र
(ग) पुत्री
(घ) पत्नी
उत्तर– (ग) पुत्री

PSEB Class 9 Hindi प्रकृति का अभिशाप प्रश्न और उत्तर (Extra Question Answers)

1.‘पर्यावरण’ शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर– पर्यावरण शब्द ‘परि’ और ‘आवरण’ से मिलकर बना है। ‘परि’ का अर्थ है चारों ओर और ‘आवरण’ का अर्थ है ढकने वाला। इस प्रकार पर्यावरण वह प्राकृतिक घेरा है जो हमें चारों ओर से ढककर रखता है और जीवन की रक्षा करता है। इसमें पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश शामिल हैं।

2. सूर्यदेव पृथ्वी को अपनी प्रिय पुत्री क्यों कहते हैं?
उत्तर– सूर्यदेव पृथ्वी को अपनी प्रिय पुत्री इसलिए कहते हैं क्योंकि उन्होंने सौरमंडल में पृथ्वी को सबसे उपयुक्त स्थान दिया है। पृथ्वी पर जीवन संभव है, यहाँ जल, वायु, वनस्पति और जीव-जंतु पाए जाते हैं। मानव जैसा बुद्धिमान प्राणी भी पृथ्वी पर ही जन्मा है, इसलिए पृथ्वी सूर्यदेव को अत्यंत प्रिय है।

3. रश्मिदेवी पृथ्वी को नंदनवन जैसी क्यों बताती हैं?
उत्तर– रश्मिदेवी प्रकाश की तीव्र गति से पृथ्वी का भ्रमण करती हैं। उन्हें ऊपर से देखने पर पृथ्वी पर नगर, विकास और मानव की प्रगति दिखाई देती है। इसलिए उन्हें पृथ्वी सुंदर, हरी-भरी और नंदनवन जैसी लगती है। वे प्रदूषण और भीतर छिपे संकटों को नहीं देख पातीं।

4. बुद्धिदेवी का परिचय दीजिए।
उत्तर– बुद्धिदेवी बुद्धि की प्रतीक हैं। वे कहती हैं कि मानव ने हमेशा अपनी बुद्धि के बल पर कठिनाइयों पर विजय पाई है। अग्नि जैसी विनाशकारी शक्ति को भी मानव ने अपने उपयोग में लिया। उसी प्रकार बुद्धिदेवी मानव की बुद्धि से प्रदूषण दैत्य को भी समाप्त करने का विश्वास दिलाती हैं।

5. पवनदेव मानव की उन्नति को पतन क्यों कहते हैं?
उत्तर– पवनदेव मानव की उन्नति को पतन इसलिए कहते हैं क्योंकि मानव विकास के नाम पर वायु को दूषित कर रहा है। कारखानों, वाहनों और ईंधन के प्रयोग से हवा में विषैली गैसें बढ़ रही हैं। इससे मानव स्वयं बीमार हो रहा है और प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है, जो विनाश की ओर संकेत करता है।

6. पाठ ‘प्रकृति का अभिशाप’ का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर– इस पाठ का मुख्य संदेश यह है कि मानव को प्रकृति का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। अंधाधुंध विकास और स्वार्थ के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है, जो मानव के लिए अभिशाप बन गया है। यदि मानव समय रहते बुद्धि और विवेक से काम ले, तो पृथ्वी और जीवन को बचाया जा सकता है।

7. बुद्धिदेवी प्रदूषण दैत्य से कैसे लड़ना चाहती हैं?
उत्तर– बुद्धिदेवी प्रदूषण दैत्य से मानव की बुद्धि के माध्यम से लड़ना चाहती हैं। वे मानती हैं कि सही ज्ञान, विवेक और समझदारी से मानव प्रदूषण को नियंत्रित कर सकता है। वैज्ञानिक सोच और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी से ही इस दैत्य का विनाश संभव है।

8. प्रदूषण दैत्य स्वयं को क्या मानता है?
उत्तर– प्रदूषण दैत्य स्वयं को मानव का महाकाल और प्रगति का अभिशाप मानता है। वह गर्व से कहता है कि वह अदृश्य रहकर मानव का विनाश करेगा। उसका उद्देश्य वायु, जल और वनस्पति को दूषित कर मानव जीवन को धीरे-धीरे समाप्त करना है।

9. रेडियोधर्मिता को खतरनाक क्यों बताया गया है?
उत्तर– रेडियोधर्मिता को खतरनाक इसलिए बताया गया है क्योंकि यह मानव शरीर को भीतर से नष्ट करती है। परमाणु परीक्षणों से निकलने वाला विकिरण वायु, जल और वनस्पति को दूषित करता है। इससे मानव की आने वाली पीढ़ियाँ भी विकृत हो सकती हैं, जो अत्यंत भयावह है।

10. ओज़ोन परत का क्या महत्व है?
उत्तर- ओज़ोन परत पृथ्वी के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। यह सूर्य की पराबैंगनी किरणों के अधिकांश भाग को पृथ्वी तक पहुँचने से रोकती है। यदि ओज़ोन परत नष्ट हो जाए तो जीव-जंतुओं में गंभीर बीमारियाँ फैल सकती हैं और पृथ्वी पर जीवन संकट में पड़ सकता है।