बचेंद्री पाल का चरित्र चित्रण | Character Sketch of Bachendri Pal from PSEB Class 9 Hindi Book Chapter 16 Bachendri Pal
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बचेंद्री पाल का चरित्र चित्रण (Character Sketch of Bachendri Pal)
बचेंद्री पाल का जन्म उत्तरांचल के चमौली जिले में बंपा गाँव में 24 मई, सन् 1954 ई० को हुआ। इनकी माता का नाम हंसादेई नेगी तथा पिता का नाम किशन सिंह पाल है। बचेंद्री पाल एक बहुत ही गरीब परिवार से सम्बन्ध रखती थी।
- निडर तथा साहसी – बचेंद्री पाल बचपन से ही निडर तथा साहसी थी। जब वे सिर्फ दस साल की थी तभी से वे जंगलों और पहाड़ी ढलानों पर अक्सर अकेली घूमा करती थी। प्रकृति के साथ उनके ऐसे खुलेपन ने उन्हें निडर और स्वतंत्र बना दिया था। बसंत के दिनों में वे उन दूसरे स्थानों से आए पक्षियों के झुंडों को देखने के लिए चुपचाप घर से बाहर निकल जाती थी।
- स्वप्नदुष्टा – बचेंद्री पाल बहुत बड़ी स्वप्न दुष्टा थी। उन्होंने कभी किसी चीज़ को अपनी पहुँच से बाहर नहीं समझा। जब बचेंद्री पाल ने एम.ए., बी.एड. कर लिया तब उन्होंने अपने आपको पर्वतों पर चढ़ने के लिए पूरी तरह से सौंप दिया।
- दृढ़ निश्चयी – बचेंद्री पाल को पता था कि गढ़वाल में यदि किसी के घर लड़की पैदा हो तो उसे बोझ माना जाता था। इसलिए बचेंद्री पाल ने बचपन से ही यह निश्चय कर लिया था कि वे परिवार में किसी से भी पीछे नहीं रहेगी और जो लड़के करते थे वह केवल वही नहीं करेगी, बल्कि उनसे भी अच्छा करके दिखाएगी। अर्थात बचेंद्री पाल अपने परिवार के लड़कों से भी बड़ा कुछ करना चाहती थी। परिवार के छोटे सदस्य बचेंद्री पाल की कल्पनाओं में बहुत आनंद लेते थे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते थे। बचेंद्री पाल उनसे अक्सर कहती थी कि वे इंतज़ार करे, वे उन्हें सब कुछ करके दिखा देगी।
- पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी अव्वल – बचेंद्री पाल पढ़ाई में भी काफी अच्छी थी, लेकिन खेल-कूद में वे और भी ज्यादा अच्छी थी। जिन-जिन खेलों में बचेंद्री पाल ने भाग लिया, अधिकतर खेलों में वे प्रथम रहती थी और मैदान में खेले जाने वाले खेलों जैसे कि गोला फेंक, डिस्क फेंक व लम्बी दौड़ में भी उन्होंने अनेक कप जीते थे।
- स्वाभिमानी – बचेंद्री पाल जब लगभग तेरह वर्ष की थी और आठवीं की परीक्षा अच्छे अंकों से पास की थी, तभी उनके पिता ने कह दिया था कि वे अब बचेंद्री पाल को स्कूल में भेजने का खर्च सहन नहीं कर सकते और अब बचेंद्री पाल को घर के काम में मदद करनी चाहिए। बचेंद्री पाल ने अपने मन में ऊँची शिक्षा प्राप्त करने का निश्चय कर लिया था, इसलिए वे दिन के समय में न केवल अपने हिस्से का, बल्कि उससे कहीं अधिक घर का काम करती थी और अपने मित्रों से स्कूल की किताबें उधार लेकर देर रात तक बैठकर पढ़ाई भी करती थी। बचेंद्री पाल ने सिलाई का काम भी सीख लिया और सलवार-कमीज के सूट सिलकर हर दिन पाँच से छह रुपये भी कमाने लगी।
- परिश्रमी – बचेंद्री पाल को जब पता चला कि उन्हें एवरेस्ट अभियान के लिए आयोजित जाँच शिविर के लिए चुना है तो अपने आप को और मजबूत बनाने के लिए वे घास चारे और सूखी लकड़ी के भारी से भारी गट्ठर घर लाने लगी। वे रोज़ अपने आने-जाने का रास्ता भी बदल देती थी। वे अधिक कठिन और खराब रास्तों और घाटियों से होकर निकलती थी और जानबूझ कर पत्थरों के ऊपर से चलती थी। इसके अलावा वे सीधी खड़ी ढलाऊ चट्टानों से उतरती थी जिससे कि वे और अधिक संतुलन प्राप्त कर सकें, और अपने ऊँचाई के डर को निकाल सकें। बचेंद्री पाल के इन सभी क्रियाकलापों का एकमात्र उद्देश्य एक सच्चा कुशल पर्वतारोही बनना था।
बचेंद्री पाल के चरित्र सम्बंधित प्रश्न (Questions related to the Character of Bachendri Pal)
Q1. बचेंद्री पाल के बचपन के बारे में लिखिए।
Q2. बचेंद्री पाल के चरित्र के बारे में लिखिए।