हिम्मत और जिंदगी पाठ सार
PSEB Class 9 Hindi Book Chapter 13 “Himmat Aur Zindagi” Line by Line Explanation along with Difficult Word Meanings
हिम्मत और जिंदगी सार – Here is the PSEB Class 9 Hindi Book Chapter 13 Himmat Aur Zindagi Summary with detailed explanation of the lesson “Himmat Aur Zindagi” along with meanings of difficult words. Given here is the complete explanation of the lesson, along with summary
इस पोस्ट में हम आपके लिए पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड कक्षा 9 हिंदी पुस्तक के पाठ 13 हिम्मत और जिंदगी पाठ सार, पाठ व्याख्या और कठिन शब्दों के अर्थ लेकर आए हैं जो परीक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। हमने यहां प्रारंभ से अंत तक पाठ की संपूर्ण व्याख्याएं प्रदान की हैं क्योंकि इससे आप इस कहानी के बारे में अच्छी तरह से समझ सकें। चलिए विस्तार से कक्षा 9 हिम्मत और जिंदगी पाठ के बारे में जानते हैं।
Himmat Aur Zindagi (हिम्मत और जिंदगी)
(रामधारी सिंह दिनकर)
प्रस्तुत निबन्ध ‘हिम्मत और जिंदगी’ जीवन के उस सत्य को साथ लेकर चलता है, जिसके अनुसार हिम्मत, परिश्रम, साहस, कर्मठता आदि तत्त्व ही हमारी सफलता के आधार-बिंदु हैं। परिश्रम सफलता की कुंजी है तथा हमें जीवन में चुनौतियों को हिम्मत से पार करना चाहिए। जोखिम उठा कर आगे बढ़ना ही मनुष्य की पहचान है। जो दुःख-सुख, असफलता- सफलता, ग़मी-खुशी को समान दृष्टि से देखता है वही जीने की कला सीख सकता हैं।
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हिम्मत और जिंदगी पाठ सार Himmat Aur Zindagi Summary
हिम्मत और जिंदगी रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखित एक अद्धभुत निबंध है। इसमें लेखक ने उस सत्य का वर्णन किया है जिसके अनुसार हिम्मत, परिश्रम, साहस, कर्मठता आदि तत्व हमारी सफलता के आधार बिंदु हैं। लेखक ने निबंध द्वारा समझने का प्रयास किया है कि परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। लेखक बताते हैं कि जिंदगी को अच्छे से वे लोग नहीं जान सकते, जो केवल सुखों या सुख सुविधाओं ने पलते हैं। जो कठिनाइयों का सामना करके आ रहे हो , जिनका गला सूखा हुआ हो, होंठ फटे हुए और सारा शरीर पसीने से भीगा हुआ हो। पानी में जो अमृत वाला तत्त्व है, उसे वह जानता है, जो धूप में खूब सूख चुका है, जिसने रेगिस्तान में कभी सफ़र न किया को उसे पानी के महत्त्व का अंदाजा भी नहीं हो सकता। सुख देने वाली चीजें पहले के समय में भी थीं और वर्तमान में भी हैं। फर्क यह है कि जो उन सुखों को प्राप्त करने के लिए पहले मेहनत करते हैं और बाद में उनके मजे लेते हैं, उन्हें उन सुखों का स्वाद या आनंद अधिक मिलता है। जो कठिनाइयों के डर से पीछे रहते हैं वे कभी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते और जो लोग कठिनाइयों का सामना करते हैं उन्हें सफलता अवश्य मिलती है। लेखक के अनुसार चांदनी की ताज़गी और ठंडक का आनंद वह मनुष्य लेता है जो दिन भर धूप में थक कर लौटा है। व्रत और नियंत्रण, ये खुद को ख़त्म करने का जरिया नहीं हैं। बल्कि भोजन का असली स्वाद उसी को मिलता है, जो कुछ दिन बिना खाये भी रह सकता है। कहा भी गया है “त्यक्तेन भुंजीथा:” अर्थात “जीवन का भोग त्याग के साथ करो”, यह केवल दूसरों का भला करने के लिए दिया गया निर्देश नहीं है, क्योंकि नियंत्रण रख कर भोग करने पर जीवन से जो आनद प्राप्त होता है, वह केवल सुख भोगने वाला बन कर भोगने से नहीं मिल पाता। महाभारत में भी देश के प्रायः ज्यादातर वीर कौरवों के पक्ष में थे। मगर फिर भी जीत पांडवों की हुई, क्योंकि उन्होंने लाख (राल) से बने घर या महल की मुसीबत का सामना पहले ही कर दिया था, और वनवास की कठिनाइयों को भी पार किया था।
जिंदगी की दो स्थितियाँ होती हैं। एक तो यह कि आदमी बड़े-बड़े उद्देश्यों के लिए कोशिश करे, जगमगाती हुई जीत को हासिल करने के लिए हाथ बढ़ाये और अगर असफलतायें कदम-कदम पर उसके हौंसले की रोशनी के साथ अँधेरे या असफलता का जाल बुन रही हों, तब भी वह अपने पाँव पीछे न हटाये।
दूसरी स्थिति यह है कि व्यक्ति उन ग़रीब आत्माओं का साथी बन जाए, जो अपने जीवन में न तो बहुत अधिक सुख प्राप्त करती हैं और न उन्हें बहुत अधिक दुःख से कोई सम्बन्ध होता है, क्योंकि ये आत्माएं ऐसी शाम में बसती हैं जहाँ न तो जीत हँसती है और न कभी हार के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ती है।
लेखक के अनुसार साहस की जिंदगी ही सबसे बड़ी जिंदगी होती है। साहस की जिंदगी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि ऐसी जिंदगी बिना किसी डर के, बिल्कुल बेखौफ होती है। साहसी व् हिम्मती व्यक्ति की पहली पहचान है कि वह इस बात की चिन्ता नहीं करता कि तमाशा देखने वाले लोग या समाज के लोग उसके बारे में क्या सोच रहे हैं। अपने आस-पास के लोगों या पड़ोस को देख कर चलना साधारण व्यक्ति की पहचान है। साहसी मनुष्य उन सपनों में भी आनंद खोज लेता है, जिन सपनों का कोई व्यवहारिक उद्देश्य भी नहीं होते। साहसी मनुष्य कभी अपने सपने उधार नहीं लेता, वह अपने विचारों में खोया हुआ अपनी ही किताब पढ़ता है। जो व्यक्ति यह महसूस करता है कि किसी महान् निर्णय लेने के समय वह साहस से काम नहीं ले पाया था, जिंदगी की चुनौती को स्वीकार नहीं कर सका था, वह व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता। क्योंकि बड़े मौके पर साहस न दिखाने वाला व्यक्ति हमेशा अपनी आत्मा के भीतर एक आवाज को सुनता रहता है। यह आवाज़ उसे हमेशा कहती रहती है कि वह साहस नहीं दिखा सका, वह कायर की तरह भाग खड़ा हुए। जिंदगी को यदि ठीक से जीना है तो हमेशा खतरों को झेलना आना चाहिए। लेखक समझाते हैं कि जिंदगी से, अन्त में हम केवल उतना ही हासिल करते हैं जितनी कि हम उसमें अपना समय व् साहस रूपी सम्पति लगाते हैं। यह सम्पति लगाना जिंदगी के संकटों व् कठिनाइयों का सामना करना है, जिंदगी के उस पन्ने को उलट कर पढ़ना है जिसके सभी अक्षर केवल सुख या खुशी के नहीं, बल्कि कुछ दुःख और कठिनाइयों से भी लिखे गए हैं।
लेखक जीवन की साधना करने वालों से कहते हैं कि वे जीवन रूपी वृक्ष की निचली डाल का फल तोड़कर लौट रहे है, तो फिर जो लाल-लाल आम का फल या सफलता पेड़ की शाखा के अग्र भाग पर है वह जीवन रूपु वृक्ष ने किसके लिए रखा है। अगर वे जीवन रूपी किनारे की छोटी-छोटी सफलता रूपी मरी हुई सपियों में ही ख़ुश हो जाएंगें तो जीवन रूपी समुद्र के बीच में छिपे हुए मोती के खाजने रूपी सफलता को कौन बाहर लाएगा। हमें अपनी इच्छाओं के आँचल को छोटा नहीं समझना चाहिए। जिंदगी के फल को हमें अपने दोनों हाथों से दबा कर निचोड़ना चाहिए अर्थात हमें हिम्मत और साहस से कठिनाइयों को पार करना चाहिए, आनंद के झरने या नदियाँ हमारी हिम्मत और साहस के बल पर भी बह सकते है। अर्थात यदि हम हिम्मत और साहस से कठिनाइयों को पार करें तो हम भी जीवन के आनंद को प्राप्त कर सकते हैं।
हिम्मत और जिंदगी पाठ व्याख्या Himmat Aur Zindagi Explanation
पाठ – जिंदगी के असली मज़े उनके लिए नहीं है, जो फूलों के नीचे खेलते और सोते हैं बल्कि फूलों की छाँह के नीचे अगर जीवन का कोई स्वाद छिपा है, तो वह भी उन्हीं के लिए है जो दूर रेगिस्तान से आ रहे हैं, जिनका कंठ सूखा हुआ, होंठ फटे हुए और सारा बदन पसीने से तर है। पानी में जो अमृत वाला तत्त्व है, उसे वह जानता है, जो धूप में खूब सूख चुका है, वह नहीं जो रेगिस्तान के वश में कभी पड़ा ही नहीं है।
सुख देने वाली चीजें पहले भी थीं और अब भी हैं। फर्क यह है कि जो सुखों का मूल्य पहले चुकाते हैं उनके मजे बाद में लेते हैं, उन्हें स्वाद अधिक मिलता है। जिन्हें आराम आसानी से मिल जाता है उनके लिए आराम ही मौत है।
जो लोग पाँव भीगने के ख़ौफ़ से पानी से बचते रहते हैं समुद्र में डूब जाने का खतरा उन्हीं के लिए है। लहरों में तैरने का जिन्हें अभ्यास है, वे मोती लेकर बाहर आएंगे।
शब्दार्थ –
कंठ – गला
बदन – शरीर
तर – भीगा हुआ
वश – अधीन
अभ्यास – आदत
व्याख्या – लेखक बताते हैं कि जिंदगी को अच्छे से वे लोग नहीं जान सकते, जो फूलों के नीचे खेलते और सोते हैं अर्थात जो केवल सुखों या सुख सुविधाओं ने पलते हैं। बल्कि सुख-सुविधाओं में भी अगर जीवन का कोई सुख छिपा है, तो वह भी उन्हीं के लिए है या उन्हीं को उस सुख का अनुभव हो पाता है जो दूर रेगिस्तान से आ रहे हैं, अर्थात जो कठिनाइयों का सामना करके आ रहे हो , जिनका गला सूखा हुआ हो, होंठ फटे हुए और सारा शरीर पसीने से भीगा हुआ हो। पानी में जो अमृत वाला तत्त्व है, उसे वह जानता है, जो धूप में खूब सूख चुका है, वह कभी पानी का महत्व नहीं जान सकता जो रेगिस्तान के अधीन कभी पड़ा ही ना हो। अर्थात जिसने रेगिस्तान में कभी सफ़र न किया को उसे पानी के महत्त्व का अंदाजा भी नहीं हो सकता।
सुख देने वाली चीजें पहले के समय में भी थीं और वर्तमान में भी हैं। फर्क यह है कि जो उन सुखों को प्राप्त करने के लिए पहले मेहनत करते हैं और बाद में उनके मजे लेते हैं, उन्हें उन सुखों का स्वाद या आनंद अधिक मिलता है। जिन्हें सुख या आराम आसानी से मिल जाता है उनके लिए आराम ही मौत है। जो लोग पाँव भीगने के डर से पानी से बचते रहते हैं उन्हें समुद्र में डूब जाने का खतरा होता है। क्योंकि लहरों में तैरने की जिन्हें आदत है, वे मोती लेकर ही बाहर आएंगे। अर्थात जो कठिनाइयों के डर से पीछे रहते हैं वे कभी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते और जो लोग कठिनाइयों का सामना करते हैं उन्हें सफलता अवश्य मिलती है।
पाठ – चांदनी की ताज़गी और शीतलता का आनंद वह मनुष्य लेता है जो दिन भर धूप में थक कर लौटा है, जिसके शरीर को अब तरलाई की ज़रूरत महसूस होती है और जिसका मन यह जानकर सन्तुष्ट है कि दिन भर का समय उसने किसी अच्छे काम में लगाया है।
इसके विपरीत वह आदमी भी है जो दिन भर खिड़कियां बंद करके पंखों के नीचे छुपा हुआ था और अब रात में जिसकी सेज बाहर चाँदनी में लगाई गई है। भ्रम तो शायद उसे भी होता होगा कि वह चाँदनी के मज़े ले रहा है, लेकिन सच पूछिए तो वह खुशबूदार फूलों के रस में दिन-रात सड़ रहा है।
उपवास और संयम, ये आत्महत्या के साधन नहीं हैं। भोजन का असली स्वाद उसी को मिलता है, जो कुछ दिन बिना खाये भी रह सकता है। “त्यक्तेन भुंजीथा: जीवन का भोग त्याग के साथ करो”, यह केवल परमार्थ का ही उपदेश नहीं है, क्योंकि संयम से भोग करने पर जीवन से जो आनद प्राप्त होता है, वह निरा भोगी बन कर भोगने से नहीं मिल पाता।
बड़ी चीजें बड़े संकटों में विकास पाती हैं। बड़ी हस्तियाँ बड़ी मुसीबतों में पल कर कर दिया था, जिसका एकमात्र कारण यह था कि अकबर का जन्म रेगिस्तान में हुआ था और वह भी उस समय जब उसके बाप के पास कस्तूरी के एक नाफे को छोड़ कर और दौलत नहीं थी।
शब्दार्थ –
शीतलता – ठंडक
तरलाई – चंचलता, चपलता
सन्तुष्ट – तृप्त, प्रसन्न, खुश
सेज – बिस्तर
भ्रम – शंका
उपवास – भोजन का त्याग, व्रत
संयम – रोक, निग्रह, नियंत्रण
आत्महत्या – ख़ुदकुशी, खुद को खत्म करना
साधन – ज़रिया, सामग्री
परमार्थ- सर्वोच्च उद्देश्य, परम लक्ष्य, या दूसरों का भला करना, परोपकार
उपदेश – शिक्षा की बात बतलाना, निर्देश
निरा भोगी – पूरी तरह से इंद्रिय सुख में लिप्त व्यक्ति, व्यसनी, केवल सुख भोगने वाला, या केवल भोग-विलास करने वाला
हस्तियाँ – व्यक्तित्व, महान व्यक्ति, मशहूर लोग
कस्तूरी के एक नाफे – कस्तूरी हिरण की नाभि में पाई जाने वाली सुगंधित थैली
व्याख्या – लेखक के अनुसार चांदनी की ताज़गी और ठंडक का आनंद वह मनुष्य लेता है जो दिन भर धूप में थक कर लौटा है, जिसके शरीर को अब ठंडक की ज़रूरत महसूस होती है और जिसका मन यह जानकर तृप्त या खुश है कि दिन भर का समय उसने किसी अच्छे काम में लगाया है। इसके विपरीत वह आदमी भी है जिसने दिन भर खिड़कियां बंद करके पंखों के नीचे अपना दिन गुजारा था और रात में जिसका बिस्तर बाहर चाँद की चाँदनी में लगाया गया है। इस बात की शंका या संदेह तो शायद उसे भी होता होगा कि वह चाँदनी के मज़े ले रहा है, लेकिन सच तो यह है कि वह खुशबूदार फूलों के रस रूपी सुख-सुविधाओं में दिन-रात सड़ रहा है। अर्थात वह सुख-सुविधाओं के कारण जीवन का आनंद नहीं ले पा रहा।
व्रत और नियंत्रण, ये खुद को ख़त्म करने का जरिया नहीं हैं। बल्कि भोजन का असली स्वाद उसी को मिलता है, जो कुछ दिन बिना खाये भी रह सकता है। कहा भी गया है “त्यक्तेन भुंजीथा:” अर्थात “जीवन का भोग त्याग के साथ करो”, यह केवल दूसरों का भला करने के लिए दिया गया निर्देश नहीं है, क्योंकि नियंत्रण रख कर भोग करने पर जीवन से जो आनद प्राप्त होता है, वह केवल सुख भोगने वाला बन कर भोगने से नहीं मिल पाता। अर्थात यदि जीवन का आनंद लेना है तो नियंत्रण करना सीखना होगा।
क्योंकि बड़ी चीजें बड़ी मुसीबतों में ही विकास करती हैं। मशहूर लोग बड़ी मुसीबतों में पल कर बड़े बनते हैं, जिसका एकमात्र कारण है कि अकबर का जन्म रेगिस्तान में हुआ था और वह भी उस समय जब उसके बाप के पास कस्तूरी हिरण की नाभि में पाई जाने वाली सुगंधित थैली को छोड़ कर और कोई दौलत नहीं थी। अर्थात अकबर जैसे राजा ने भी कठिन मुसीबतों का सामना किया तभी उसे सुख-सुविधाएं प्राप्त हुई।

पाठ – महाभारत में देश के प्रायः अधिकांश वीर कौरवों के पक्ष में थे। मगर फिर भी जीत पांडवों की हुई, क्योंकि उन्होंने लाक्षागृह की मुसीबत झेली थी, वनवास के जोखिम को पार किया था।
श्री विन्स्टन चर्चिल ने कहा है कि जिंदगी का सबसे बड़ा गुण हिम्मत है। आदमी के अन्य सारे गुण उसके हिम्मती होने से ही पैदा होते हैं।
जिंदगी की दो सूरतें हैं। एक तो यह कि आदमी बड़े-बड़े मकसद के लिए कोशिश करे, जगमगाती हुई जीत पर पंजा डालने के लिए हाथ बढ़ाये और अगर असफलतायें कदम-कदम पर जोश की रोशनी के साथ अंधियाली का जाल बुन रही हों, तब भी वह पीछे को पाँव न हटाये।
दूसरी सूरत यह कि वह उन ग़रीब आत्माओं का हमजोली बन जाए, जो न तो बहुत अधिक सुख पाती हैं और न जिन्हें बहुत अधिक दुःख पाने का संयोग है, क्योंकि ये आत्माएं ऐसी गोधूलि में बसती हैं जहाँ न तो जीत हँसती है और न कभी हार के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ती है। इस गोधूलि वाली दुनिया के लोग बंधे हुए घाट का पानी पीते हैं, वे जिंदगी के साथ जुआ नहीं खेल सकते और कौन कहता है कि पूरी जिंदगी को दाँव पर लगा देने में कोई आनंद नहीं है?
अगर रास्ता आगे ही आगे निकल रहा हो तो फिर असली मजा तो पाँव बढ़ाते जाने में ही है।
शब्दार्थ –
अधिकांश – ज्यादातर
लाक्षागृह – लाख (राल) से बना घर या महल
जोखिम – कठिनाई
सूरतें – स्थिति
मकसद – उद्देश्य
अंधियाली – अंधेरा, अँधकार
हमजोली – साथी, संगी
संयोग – मेल, संबंध
गोधूलि – साँझ, शाम
व्याख्या – महाभारत में भी देश के प्रायः ज्यादातर वीर कौरवों के पक्ष में थे। मगर फिर भी जीत पांडवों की हुई, क्योंकि उन्होंने लाख (राल) से बने घर या महल की मुसीबत का सामना पहले ही कर दिया था, और वनवास की कठिनाइयों को भी पार किया था।
श्री विन्स्टन चर्चिल के अनुसार जिंदगी का सबसे बड़ा गुण हिम्मत या साहस है। क्योंकि आदमी के अन्य सारे गुण उसके हिम्मती होने से ही पैदा होते हैं। अर्थात जो व्यक्ति साहसी होगा उसमें सभी गुण स्वयं ही आ जाते हैं।
जिंदगी की दो स्थितियाँ होती हैं। एक तो यह कि आदमी बड़े-बड़े उद्देश्यों के लिए कोशिश करे, जगमगाती हुई जीत को हासिल करने के लिए हाथ बढ़ाये और अगर असफलतायें कदम-कदम पर उसके हौंसले की रोशनी के साथ अँधेरे या असफलता का जाल बुन रही हों, तब भी वह अपने पाँव पीछे न हटाये।
दूसरी स्थिति यह है कि व्यक्ति उन ग़रीब आत्माओं का साथी बन जाए, जो अपने जीवन में न तो बहुत अधिक सुख प्राप्त करती हैं और न उन्हें बहुत अधिक दुःख से कोई सम्बन्ध होता है, क्योंकि ये आत्माएं ऐसी शाम में बसती हैं जहाँ न तो जीत हँसती है और न कभी हार के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ती है। अर्थात वे लोग जो मुसीबतों का सामना करने से डरते हैं और ऐसे ही जीवन जी रहे हैं, उन्हें जीवन का असली आनंद देने की कोशिश करना भी व्यक्ति की जिंदगी का उद्देश्य हो सकता है। क्योंकि ऐसी शाम वाली दुनिया के लोग बंधे हुए घाट का पानी पीते हैं अर्थात बस बिना जोखिम उठाए जीवन जीते हैं, वे जिंदगी के साथ जुआ नहीं खेल सकते अर्थात कोई कठिन फैसला नहीं ले सकते और कौन कहता है कि पूरी जिंदगी को दाँव पर लगा देने में कोई आनंद नहीं है? क्योंकि अगर रास्ता आगे ही आगे निकल रहा हो तो फिर असली मजा तो पाँव बढ़ाते जाने में ही है। एक जगह ठहर कर जीवन का आनंद नहीं लिया जा सकता।
पाठ – साहस की जिंदगी सबसे बड़ी जिंदगी होती है। ऐसी जिंदगी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह बिल्कुल निडर, बिल्कुल बेखौफ होती है। साहसी मनुष्य की पहली पहचान है कि वह इस बात की चिन्ता नहीं करता कि तमाशा देखने वाले लोग उसके बारे में क्या सोच रहे हैं। जनमत की उपेक्षा करके जीने वाला आदमी दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश भी उसी आदमी से मिलता है। अड़ोस-पड़ोस को देख कर चलना, यह साधारण जीव का काम है। क्राँति करने वाले लोग अपने उद्देश्य की तुलना न तो पड़ोसी के उद्देश्य से करते हैं, और न अपनी चाल को ही पड़ोस की चाल देखकर ममि बनाते हैं।
साहसी मनुष्य उन सपनों में भी रस लेता है, जिन सपनों के कोई व्यावहारिक अर्थ नहीं हैं।
साहसी मनुष्य सपने उधार नहीं लेता, वह अपने विचारों में रमा हुआ अपनी ही किताब पढ़ता है।
झुंड में चरना, यह भैंस और भेड़ का काम है। सिंह तो बिल्कुल अकेला होने पर भी मग्न रहता है।
अर्नाल्ड बेनेट ने एक जगह लिखा है, कि जो आदमी यह महसूस करता है कि किसी महान् निश्चय के समय वह साहस से काम नहीं ले सका, जिंदगी की चुनौती को क़बूल नहीं कर सका, वह सुखी नहीं हो सकता। बड़े मौके पर साहस नहीं दिखाने वाला आदमी बराबर अपनी आत्मा के भीतर एक आवाज़ सुनता रहता है, एक ऐसी आवाज़ जिसे वही सुन सकता है और जिसे वह रोक भी नहीं सकता। यह आवाज़ उसे बराबर कहती रहती है, “तुम साहस नहीं दिखा सके, तुम कायर की तरह भाग खड़े हुए।” सांसारिक अर्थ में जिसे हम सुख कहते हैं उसका न मिलना, फिर भी, इससे कहीं श्रेष्ठ है कि मरने के समय हम अपनी आत्मा से यह धिक्कार सुनें कि तुम में हिम्मत की कमी थी, कि तुम में साहस का अभाव था, कि तुम ठीक वक्त पर जिंदगी से भाग खड़े हुए।
जिंदगी को ठीक से जीना हमेशा ही जोखिम झेलना है और जो आदमी सकुशल जीने के लिए जोखिम को हर जगह पर एक घेरा डालता है, वह अन्ततः अपने ही घेरों के बीच कैद हो जाता है और उसे जिंदगी का कोई मजा नहीं मिल पाता, क्योंकि जोखिम से बचने की कोशिश में, असल में, उसने जिंदगी को ही आने से रोक रखा है।
शब्दार्थ –
साहस – हिम्मत
निडर – साहसी, हिम्मती
बेखौफ – निडर
जनमत – समाज, सार्वजनिक राय
उपेक्षा – तिरस्कार, निरादर, अवहेलना
ममि – मृत शरीर
रस – आनंद
व्यावहारिक – व्यवहार में आने योग्य
कायर – डरपोक
धिक्कार – निन्दा, फटकार, गाली
व्याख्या – लेखक के अनुसार साहस की जिंदगी ही सबसे बड़ी जिंदगी होती है। साहस की जिंदगी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि ऐसी जिंदगी बिना किसी डर के, बिल्कुल बेखौफ होती है। साहसी व् हिम्मती व्यक्ति की पहली पहचान है कि वह इस बात की चिन्ता नहीं करता कि तमाशा देखने वाले लोग या समाज के लोग उसके बारे में क्या सोच रहे हैं। समाज के लोगों की अवहेलना करके जीने वाला आदमी अर्थात जो व्यक्ति समाज की चिंता नहीं करता वह दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश या रास्ता भी उसी आदमी से मिलता है। अपने आस-पास के लोगों या पड़ोस को देख कर चलना साधारण व्यक्ति की पहचान है। सभी से कुछ अलग करने वाले लोग अपने उद्देश्य की तुलना न तो पड़ोसी के उद्देश्य से करते हैं, और न ही पड़ोस की चाल देखकर अपने चाल चलते हैं अर्थात सभी से कुछ अलग करने वाले लोग समाज में किसी मृत व्यक्ति की तरह नहीं रहते, वे समाज से कुछ हट कर करते है। लेखक के अनुसार साहसी मनुष्य उन सपनों में भी आनंद खोज लेता है, जिन सपनों का कोई व्यवहारिक उद्देश्य भी नहीं होते। साहसी मनुष्य कभी अपने सपने उधार नहीं लेता, वह अपने विचारों में खोया हुआ अपनी ही किताब पढ़ता है। अर्थात साहसी व्यक्ति कभी किसी के बल पर अपने सपने नहीं बुनता, वह अपने सपने अपने दम पर पूरा करने का प्रयास करता है। जिस प्रकार झुंड में चरना भैंस और भेड़ का काम है। सिंह तो बिल्कुल अकेला होने पर भी मग्न रहता है। अर्थात साधारण लोग सभी के साथ चलते हैं वे अकेले चलने का जोखिम नहीं उठाते परन्तु साहसी लोग अकेले चलना ही पसंद करते हैं।
अर्नाल्ड बेनेट के अनुसार जो व्यक्ति यह महसूस करता है कि किसी महान् निर्णय लेने के समय वह साहस से काम नहीं ले पाया था, जिंदगी की चुनौती को स्वीकार नहीं कर सका था, वह व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता। क्योंकि बड़े मौके पर साहस न दिखाने वाला व्यक्ति हमेशा अपनी आत्मा के भीतर एक आवाज को सुनता रहता है। एक ऐसी आवाज़ जिसे वही सुन सकता है और जिसे वह रोक भी नहीं सकता। यह आवाज़ उसे हमेशा कहती रहती है कि वह साहस नहीं दिखा सका, वह कायर की तरह भाग खड़ा हुए। लेखक के अनुसार सांसारिक अर्थ में जिसे हम सुख कहते हैं उसका न मिलना, फिर भी, इससे कहीं अच्छा है कि मरने के समय हम अपनी आत्मा से यह तिरस्कार के शब्द सुनें कि हममें हिम्मत की कमी थी, हममें साहस की कमी था, और हम सही समय पर जिंदगी की कठिनाइयों से भाग खड़े हुए।
लेखक कहते हैं कि जिंदगी को यदि ठीक से जीना है तो हमेशा खतरों को झेलना आना चाहिए और जो व्यक्ति अच्छी तरह से जीने के लिए खतरों और कठिनाइयों का सामना नहीं कर पाता है, वह आखिर में अपनी ही बनाई बंदिशों के बीच कैद हो जाता है और उसे जिंदगी का कोई मजा नहीं मिल पाता, क्योंकि कठिनाइयों से बचने की कोशिश में, असल में, वह जिंदगी को ही अपने पास आने से रोक देता है।
पाठ – जिंदगी से, अन्त में हम उतना ही पाते हैं जितनी कि उसमें पूंजी लगाते हैं। यह पूंजी लगाना जिंदगी के संकटों का सामना करना है, उसके उस पन्ने को उलट कर पढ़ना है जिसके सभी अक्षर फूलों से ही नहीं, कुछ अंगारों से भी लिखे गए हैं। जिंदगी का भेद कुछ उसे ही मालूम है जो यह जानकर चलता है कि जिंदगी कहीं भी खत्म न होने वाली चीज़ है।
अरे ओ जीवन के साधको! तुम निचली डाल का फल तोड़कर लौटे जा रहे हो, तो फिर फुनगी पर का वह लाल-लाल आम किसके वास्ते है?
अरे ओ जीवन के साधको! अगर किनारे की मरी हुई सपियों में ही तुम्हें संतोष हो जाए तो समुद्र के अन्तराल में छिपे हुए मौक्तिक-कोष को कौन बाहर लाएगा?
दुनिया में जितने भी मज़े बिखेरे गए हैं, उनमें तुम्हारा भी हिस्सा है। वह चीज़ भी तुम्हारी हो सकती है, जिसे तुम अपनी पहुँच के परे मान कर लौटे जा रहे हो।
कामना का आंचल छोटा मत करो। जिंदगी के फल को दोनों हाथों से दबा कर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है।
शब्दार्थ –
पूंजी – जमा किया हुआ धन
फुनगी – पेड़ की शाखा का अग्र भाग
वास्ते – के लिए
अन्तराल में – बीच में
मौक्तिक-कोष – मोतियों का खजाना
कामना – इच्छा
निर्झरी – झरने से निकलने वाली नदी, या पहाड़ी नदी
व्याख्या – लेखक समझाते हैं कि जिंदगी से, अन्त में हम केवल उतना ही हासिल करते हैं जितनी कि हम उसमें अपना समय व् साहस रूपी सम्पति लगाते हैं। यह सम्पति लगाना जिंदगी के संकटों व् कठिनाइयों का सामना करना है, जिंदगी के उस पन्ने को उलट कर पढ़ना है जिसके सभी अक्षर केवल सुख या खुशी के नहीं, बल्कि कुछ दुःख और कठिनाइयों से भी लिखे गए हैं। जिंदगी का भेद उस व्यक्ति को ही मालूम होता है जो जिंदगी में यह जानकर चलता है कि जिंदगी कहीं भी खत्म न होने वाली चीज़ है।
लेखक जीवन की साधना करने वालों से कहते हैं कि वे जीवन रूपी वृक्ष की निचली डाल का फल तोड़कर लौट रहे है, तो फिर जो लाल-लाल आम का फल या सफलता पेड़ की शाखा के अग्र भाग पर है वह जीवन रूपु वृक्ष ने किसके लिए रखा है।
लेखक जीवन की साधना करने वालों से यह भी कहते हैं अगर वे जीवन रूपी किनारे की छोटी-छोटी सफलता रूपी मरी हुई सपियों में ही ख़ुश हो जाएंगें तो जीवन रूपी समुद्र के बीच में छिपे हुए मोती के खाजने रूपी सफलता को कौन बाहर लाएगा।
लेखक हमें समझते हुए कहते हैं कि दुनिया में जितने भी मज़े बिखेरे गए हैं, उनमें हम सभी का भी हिस्सा है। वे सभी चीजें भी हमारी हो सकती है, जिसे हम अपनी पहुँच के बाहर मान कर लौट जाते हैं। अर्थात कुछ सपनों को देखने की भी हम हिम्मत नहीं कर पाते। हमें अपनी इच्छाओं के आँचल को छोटा नहीं समझना चाहिए। जिंदगी के फल को हमें अपने दोनों हाथों से दबा कर निचोड़ना चाहिए अर्थात हमें हिम्मत और साहस से कठिनाइयों को पार करना चाहिए, आनंद के झरने या नदियाँ हमारी हिम्मत और साहस के बल पर भी बह सकते है। अर्थात यदि हम हिम्मत और साहस से कठिनाइयों को पार करें तो हम भी जीवन के आनंद को प्राप्त कर सकते हैं।
Conclusion
“हिम्मत और जिंदगी” में लेखक ने उस सत्य का वर्णन किया है जिसके अनुसार हिम्मत, परिश्रम, साहस, कर्मठता आदि तत्व हमारी सफलता के आधार बिंदु हैं। लेखक ने निबंध द्वारा समझने का प्रयास किया है कि परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। PSEB Class 9 Hindi – पाठ – 13 ‘हिम्मत और जिंदगी’ की इस पोस्ट में सार, व्याख्या और शब्दार्थ दिए गए हैं। छात्र इसकी मदद से पाठ को तैयार करके परीक्षा में पूर्ण अंक प्राप्त कर सकते हैं।