PSEB Class 9 Hindi Chapter 12 Neev ki Eent (नींव की ईंट) Question Answers (Important)
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- Neev ki Eent Textbook Questions
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- Neev ki Eent Multiple Choice Questions
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PSEB Class 9 Chapter 12 Neev ki Eent Textbook Questions
अभ्यास
(क) विषय-बोध
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो पंक्तियों में दीजिए-
(i) ‘नींव की ईंट’ पाठ के आधार पर बतायें कि दुनिया क्या देखती है?
उत्तर– दुनिया चमक-दमक और ऊपर दिखाई देने वाले आवरण को देखती है।
(i) इमारत का होना – न होना किस बात पर निर्भर करता है?
उत्तर- इमारत का होना-न होना उसकी नींव की पहली ईंट की मजबूती पर निर्भर करता है।
(iii) लेखक ने नींव की ईंट किसे बताया है?
उत्तर- लेखक ने निःस्वार्थ भाव से समाज और देश के लिए त्याग करने वाले गुमनाम लोगों को नींव की ईंट बताया है।
(iv) नींव की ईंट ने अपना अस्तित्व क्यों विलीन कर दिया?
उत्तर– नींव की ईंट ने अपना अस्तित्व विलीन कर दिया ताकि संसार एक सुंदर और मजबूत इमारत और सुंदर सृष्टि देख सके।
(v) ईसा की शहादत ने किस धर्म को अमर बना दिया?
उत्तर- ईसा की शहादत ने ईसाई धर्म को अमर बना दिया।
(vi) किसकी हड्डियों के दान से वृत्रासुर का नाश हुआ?
उत्तर– महर्षि दधीचि की हड्डियों के दान से वृत्रासुर का नाश हुआ।
(vii) लेखक के अनुसार सत्य की प्राप्ति कब होती हैं?
उत्तर– लेखक के अनुसार सत्य खोजने से प्राप्त होता है, केवल देखने से नहीं।
(viii) पाठ में लेखक ने ‘दधीचि’ तथा ‘वृत्रासुर’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त किए हैं?
उत्तर- ‘दधीचि’ शब्द त्यागी देशभक्तों के लिए और ‘वृत्रासुर’ शब्द विदेशी शासकों व अत्याचारियों के लिए प्रयुक्त किया गया है।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन या चार पंक्तियों में दीजिए-
(i) नींव की ईंट और कँगूरे की ईंट दोनों क्यों बन्दनीय हैं?
उत्तर- नींव की ईंट इसलिए वंदनीय है क्योंकि वह पूरी इमारत का भार सहन करती है और उसे मजबूती देती है। कँगूरे की ईंट भी वंदनीय है क्योंकि वह इमारत की सुंदरता बढ़ाती है। नींव की ईंट त्याग का प्रतीक है तो कँगूरे की ईंट उपलब्धि का। दोनों का अपना-अपना महत्त्व है, इसलिए दोनों सम्मान के योग्य हैं।
(ii) नींव की ईंट पाठ के आधार पर सत्य का स्वरूप स्पष्ट कीजिए।
उत्तर– लेखक के अनुसार सत्य हमेशा कल्याणकारी होता है, लेकिन वह दिखने में सुंदर नहीं होता। सत्य कठोर और कड़वा हो सकता है, इसलिए लोग उससे दूर भागते हैं। संसार केवल बाहरी चमक देखता है और भीतर छिपे सत्य की उपेक्षा करता है। सच्चे सत्य को समझने के लिए गहराई से खोज करनी पड़ती है।
(iii) देश को आजाद करवाने में किन लोगों का योगदान रहा? पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।
उत्तर– देश की आज़ादी के पीछे अनगिनत गुमनाम देशभक्तों का त्याग शामिल है। देश के हर कोने में ऐसे लोग थे, जो दधीचि की तरह थे। जिन्होंने अपनी हड्डियों के दान से विदेशी वृत्रासुर का नाश किया।जिन्होंने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। उन्हीं के त्याग से देश स्वतंत्र हुआ।
(iv) आजकल के नौजवानों में कँगूरा बनने की होड़ क्यों मची हुई है?
उत्तर– आज के नौजवान नाम, प्रसिद्धि और प्रशंसा पाना चाहते हैं। वे दिखने वाली सफलता को ही महत्त्वपूर्ण मानते हैं। इसलिए वे नींव की ईंट बनने के बजाय कँगूरा बनना चाहते हैं। त्याग और सेवा की भावना उनमें कम होती जा रही है।
(v) नये समाज के निर्माण के लिए हमें किस चीज की आवश्यकता है?
उत्तर- नए समाज के निर्माण के लिए हमें नींव की ईंट जैसे निःस्वार्थ और त्यागी लोगों की आवश्यकता है। ऐसे लोग चाहिए जो बिना किसी स्वार्थ के समाज के लिए काम करें। ऐसे नौजवान जो इस काम में अपने को चुपचाप खपा दें। प्रशंसा और पद की चाह से दूर रहकर वे चुपचाप अपना कर्त्तव्य निभाएँ। यही समाज को मजबूत बनाएगा।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर छह या सात पंक्तियों में दीजिए-
(i) ‘नींव की ईंट’ पाठ के आधार पर बताएँ कि समाज की आधारशिला क्या होती है?
उत्तर– ‘नींव की ईंट’ पाठ के अनुसार समाज की आधारशिला वे लोग होते हैं जो बिना नाम और प्रसिद्धि की चाह के चुपचाप बलिदान देते हैं। ये लोग अपने सुख और स्वार्थ का त्याग करके समाज के हित में कार्य करते हैं। जिस शहादत को कोई नहीं देखता और जिसकी चर्चा नहीं होती, वही समाज को मजबूती देती है। लेखक ऐसे लोगों को नींव की ईंट कहता है। जैसे इमारत की नींव दिखाई नहीं देती लेकिन पूरी इमारत उसी पर टिकी होती है, वैसे ही समाज भी गुमनाम त्यागियों के सहारे आगे बढ़ता है। इन्हीं के कारण समाज टिकाऊ और सशक्त बनता है।
(ii) आज देश को कैसे नौजवानों की जरूरत है? पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।
उत्तर- लेखक के अनुसार आज देश को ऐसे नौजवानों की आवश्यकता है जो कँगूरा बनने की इच्छा न रखें। ऐसे युवक चाहिए जो प्रशंसा, पद और प्रसिद्धि से दूर रहकर देश-निर्माण में लग जाएँ। वे नई प्रेरणा और नई चेतना से भरे हों, लेकिन गुटबाज़ी और स्वार्थ से मुक्त हों। देश के गाँवों, शहरों और कारखानों के निर्माण में वे चुपचाप अपना योगदान दें। ऐसे त्यागी और कर्त्तव्यनिष्ठ नौजवान ही देश और समाज को मजबूत बना सकते हैं। साथ ही, उनमें आत्मअनुशासन, ईमानदारी और परिश्रम की भावना हो, ताकि वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने दायित्वों से विचलित न हों। राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर निरंतर सेवा करना ही ऐसे युवाओं की सच्ची पहचान होनी चाहिए।
(iii) निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए-
1. सुंदर समाज बने, इसलिए कुछ तपे-तपाए लोगों को मौन-मूक शहादत का लाल सेहरा पहनना है।
2. हम जिसे देख नहीं सके, वह सत्य नहीं है, यह है मूढ़ धारणा। ढूँढ़ने से ही सत्य मिलता है। ऐसी नींव की ईंटों की ओर ध्यान देना ही हमारा काम है, हमारा धर्म है।
3. उदय के लिए आतुर समाज चिल्ला रहा है-
हमारी नींव की ईंट किधर है?
उत्तर-
1. सुंदर समाज …………………………………. सेहरा पहनना है।
उपर्युक्त पँक्ति से लेखक का आशय है कि एक सुंदर, सशक्त और उन्नत समाज का निर्माण केवल नारों, प्रशंसा या दिखावे से नहीं होता, बल्कि इसके लिए कुछ ऐसे समर्पित लोगों की आवश्यकता होती है जो बिना किसी पहचान, सम्मान या प्रसिद्धि की इच्छा किए चुपचाप अपना सर्वस्व अर्पित कर दें। इन्हीं को लेखक ने ‘मौन-मूक शहादत का लाल सेहरा’ पहनने वाले तपे-तपाए लोग कहा है।
2. हम जिसे ……………………………………………… हमारा धर्म है।
लेखक यह स्पष्ट करता है कि जो वस्तु या सत्य हमें दिखाई नहीं देता, वह असत्य नहीं हो जाता। यह मान लेना कि जो आँखों से न दिखे, वह अस्तित्वहीन है यह एक मूढ़ धारणा है। सत्य को पाने के लिए उसे खोजने का प्रयास करना पड़ता है। समाज की मजबूती उन्हीं अदृश्य ‘नींव की ईंटों’ पर टिकी होती है, जो ऊपर से दिखाई नहीं देतीं, पर पूरे ढाँचे को संभाले रहती हैं।
3. उदय के ……………………………………………………………………….. किधर है?
इस पँक्ति में लेखक कहता है कि जागरण और उन्नति की चाह रखने वाला समाज व्याकुल होकर पूछ रहा है कि उसकी नींव कहाँ है। इसका आशय यह है कि समाज को अपने आधार ‘त्याग, श्रम और निस्वार्थ सेवा’ करने वाले लोगों को पहचानना और सम्मान देना चाहिए, क्योंकि वही समाज के वास्तविक निर्माता होते हैं।
(ख) भाषा – बोध
1. निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग तथा मूल शब्द अलग-अलग करके लिखिए-
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द |
| आवरण | आ | वरण |
| प्रताप | _________ | ________ |
| प्रचार | _________ | ________ |
| बेतहाशा | _________ | ________ |
| प्रसिद्धि | ________ | ________ |
| अभिभूत | ________ | ________ |
| अनुप्राणित | ________ | ________ |
| आकृष्ट | ________ | ________ |
उत्तर-
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द |
| आवरण | आ | वरण |
| प्रताप | प्र | ताप |
| प्रचार | प्र | चार |
| बेतहाशा | बे | तहाशा |
| प्रसिद्धि | प्र | सिद्धि |
| अभिभूत | अभि | भूत |
| अनुप्राणित | अनु | प्राणित |
| आकृष्ट | आ | कृष्ट |
2. निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय तथा मूल शब्द अलग-अलग करके लिखिए-
| शब्द | मूल शब्द | प्रत्यय |
| मजबूती | मजबूत | ई |
| भद्दापन | ________ | ________ |
| पायदारी | ________ | ________ |
| विदेशी | ________ | ________ |
| चमकीली | _________ | _________ |
| पुख्तापन | _________ | _________ |
| कारखाना | _________ | _________ |
| सुनहली | _________ | _________ |
उत्तर-
| शब्द | मूल शब्द | प्रत्यय |
| मजबूती | मजबूत | ई |
| भद्दापन | भद्दा | पन |
| पायदारी | पाय | दारी |
| विदेशी | विदेश | ई |
| चमकीली | चमक | ईली |
| पुख्तापन | पुख्ता | पन |
| कारखाना | कार | खाना |
| सुनहली | सुनहल | ई |
3. निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ समझकर उन्हें वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए-
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य |
| नींव की ईंट बनना | – काम का आधार बनना | _____________________ |
| शहादत का लाल | – बलिदान देने वाला व्यक्ति | _____________________ |
| सेहरा पहनना | – सर्वस्व बलिदान देना | _____________________ |
| खाक छानना | – बहुत ढूँढ़ना, मारा-मारा फिरना | _____________________ |
| फलना-फूलना | – सुखी व सम्पन्न होना | _____________________ |
| खपा देना | – किसी काम में लग जाना, उपयोग में आना | _____________________ |
उत्तर-
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य |
| नींव की ईंट बनना | – काम का आधार बनना | शिक्षक बनकर उन्होंने समाज के निर्माण में नींव की ईंट बनने का कार्य किया। |
| शहादत का लाल | – बलिदान देने वाला व्यक्ति | देश की रक्षा करते हुए वह शहादत का लाल बन गया। |
| सेहरा पहनना | – सर्वस्व बलिदान देना | समाज की भलाई के लिए उसने अपने सुख-सुविधाएँ त्याग कर बलिदान का सेहरा पहना। |
| खाक छानना | – बहुत ढूँढ़ना, मारा-मारा फिरना | नौकरी की तलाश में वह कई शहरों की खाक छानता रहा। |
| फलना-फूलना | – सुखी व सम्पन्न होना | मेहनत और ईमानदारी से किया गया कार्य धीरे-धीरे फलने-फूलने लगा। |
| खपा देना | – किसी काम में लग जाना, उपयोग में आना | उसने अपना पूरा जीवन देश-सेवा के कार्यों में खपा दिया। |
4. निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम चिह्न लगाइए-
(i) कँगूरे के गीत गाने वाले हम आइए अब नींव के गीत गाएँ
(ii) हाँ शहादत और मीन मूक समाज की आधारशिला यही होती है
(iii) अफसोस कँगूरा बनने के लिए चारों ओर होड़ा होड़ी मची है नींव की ईंट बनने की कामना लुप्त हो रही है
(iv) हमारी नींव की ईंट किधर हैं
उत्तर-
(i) कँगूरे के गीत गाने वाले हम, आइए, अब नींव के गीत गाएँ।
(ii) हाँ, शहादत और मौन-मूक समाज की आधारशिला यही होती है।
(iii) अफ़सोस, कँगूरा बनने के लिए चारों ओर होड़ा-होड़ी मची है नींव की ईंट बनने की कामना लुप्त हो रही है।
(iv) हमारी नींव की ईट किधर है?
(ग) रचनात्मक अभिव्यक्ति
1. आप नींव की ईंट या कँगूरे की ईंट में से कौन-सी ईंट बनना चाहेंगे और क्यों? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर– मेरी दृष्टि में नींव की ईंट बनना अधिक सार्थक है। नींव की ईंट दिखाई नहीं देती, लेकिन पूरे भवन का भार उसी पर टिका होता है। इसी प्रकार समाज और देश का वास्तविक निर्माण भी उन लोगों से होता है जो बिना नाम, यश और प्रशंसा की इच्छा किए निरंतर अपना कर्त्तव्य निभाते हैं। कँगूरे की ईंट भले ही ऊपर दिखाई दे और प्रशंसा पाए, पर उसका महत्त्व तभी है जब नींव मजबूत हो। इसलिए मैं ऐसा कार्य करना चाहूँगा जिससे समाज की बुनियाद मजबूत हो, भले ही मुझे पहचान न मिले।
2. लेखक इस पाठ में नींव की ईंट के माध्यम से क्या संदेश देना चाहता है?
उत्तर– लेखक ‘नींव की ईंट’ के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि समाज और राष्ट्र की प्रगति दिखावे, पद या प्रसिद्धि से नहीं होती, बल्कि निस्वार्थ सेवा, त्याग और मौन परिश्रम से होती है। जो लोग चुपचाप ईमानदारी से अपना योगदान देते हैं, वही देश की असली शक्ति होते हैं। लेखक युवाओं को प्रेरित करता है कि वे कँगूरे बनने की इच्छा छोड़कर नींव की ईंट बनें और समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएँ।
3. आपकी नजर में ऐसा कौन-सा व्यक्तित्व हैं जिसने देश और समाज के उत्थान में नींव की ईंट के समान कार्य किया है। उसके योगदान को बताते हुए अपनी बात स्पष्ट करें।
उत्तर– मेरी नज़र में महात्मा गाँधी देश और समाज के उत्थान में नींव की ईंट के समान थे। उन्होंने सादगी, सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर जन-जन को जागरूक किया। बिना किसी स्वार्थ के उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की स्वतंत्रता और समाज-सुधार में समर्पित कर दिया। उन्होंने लोगों को आत्मनिर्भरता, स्वच्छता और नैतिक मूल्यों का महत्त्व समझाया। उनका योगदान दिखावे से दूर, लेकिन अत्यंत प्रभावशाली था, जिसने भारत की नींव को मजबूत किया।
PSEB Class 9 Hindi Lesson 12 नींव की ईंट सार-आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)
निम्नलिखित गद्याँशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए व उत्तर दीजिए-
1.
वह जो चमकीली, सुंदर, सुघड़-सी इमारत है, वह किस पर टिकी है? इसके कँगूरों को आप देखा करते हैं, क्या कभी आपने इसकी नींव की ओर ध्यान दिया है?
दुनिया चमक-दमक देखती है, ऊपर का आवरण देखती है, आवरण के नीचे जो ठोस सत्य है, उस पर कितने लोगों का ध्यान जाता है?
ठोस ‘सत्य’ सदा ‘शिवम्’ होता ही है किंतु वह हमेशा ‘सुंदरम्’ भी हो, यह आवश्यक नहीं। सत्य कठोर होता है, कठोरता और भद्दापन साथ-साथ जन्मा करते हैं, जिया करते हैं। हम कठोरता से भागते हैं, भद्देपन से मुख मोड़ते हैं इसलिए सत्य से भी भागते हैं। नहीं तो हम इमारत के गीत नींव के गीत से प्रारंभ करते।
वह ईंट धन्य है जो कट-छँटकर कँगूरे पर चढ़ती है और बरबस लोक लोचनों को अपनी ओर आकृष्ट करती है। किंतु धन्य है वह ईंट, जो ज़मीन के सात हाथ नीचे जाकर गड़ गई और इमारत की पहली ईंट बनी।
क्यों इसी पहली ईंट पर, उसकी मजबूती और पुख़्तेपन पर सारी इमारत की अस्ति-नास्ति निर्भर करती है?
उस ईंट को हिला दीजिए, कँगूरा बेतहाशा ज़मीन पर आ गिरेगा।
1.लेखक के अनुसार लोग सामान्यतः किस पर अधिक ध्यान देते हैं?
(क) इमारत की नींव पर
(ख) इमारत की मजबूती पर
(ग) इमारत की चमक-दमक और कँगूरों पर
(घ) इमारत की पहली ईंट पर
उत्तर– (ग) इमारत की चमक-दमक और कँगूरों पर
2. लेखक के अनुसार सत्य से लोग क्यों भागते हैं?
(क) क्योंकि सत्य कठोर और भद्दा हो सकता है
(ख) क्योंकि सत्य सुंदर होता है
(ग) क्योंकि सत्य सरल होता है
(घ) क्योंकि सत्य सभी को प्रिय होता है
उत्तर– (क) क्योंकि सत्य कठोर और भद्दा हो सकता है
3. इमारत की अस्ति-नास्ति किस पर निर्भर करती है?
(क) कँगूरों की ऊँचाई पर
(ख) दीवारों की सजावट पर
(ग) इमारत की सुंदरता पर
(घ) नींव की ईंट की मजबूती पर
उत्तर- (घ) नींव की ईंट की मजबूती पर
4. लेखक के अनुसार सत्य को कठोर और भद्दा क्यों कहा गया है?
उत्तर- लेखक के अनुसार सत्य हमेशा आकर्षक या सुंदर नहीं होता। वह कई बार कठोर और असुविधाजनक होता है, इसलिए लोग उससे बचना चाहते हैं। मनुष्य स्वभाव से सुंदरता और सुविधा की ओर आकर्षित होता है, जबकि कठोर सत्य त्याग की माँग करता है। इसी कारण लोग सत्य से मुँह मोड़ लेते हैं।
5. पहली ईंट को सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों माना गया है?
उत्तर– पहली ईंट को इसलिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि पूरी इमारत की मजबूती उसी पर निर्भर करती है। यदि नींव की ईंट कमजोर हो, तो ऊपर की पूरी संरचना अस्थिर हो जाती है। लेखक इसके माध्यम से यह बताना चाहता है कि समाज और राष्ट्र का आधार बनने वाले लोग ही असली निर्माता होते हैं, भले ही वे दिखाई न दें।
2
कँगूरे के गीत गाने वाले हम, आइए, अब नींव के गीत गाएँ।
वह ईंट, जो जमीन में इसलिए गड़ गई कि दुनिया को इमारत मिले, कँगूरा मिले। वह इंट, जो सब ईंटों से ज्यादा पक्की थी जो ऊपर लगी होती तो कँगूरे की शोभा सौगुनी कर देती।
किंतु जिस ईंट ने देखा, इमारत की पायदारी उसकी नींव पर मुनहसिर होती है इसलिए उसने अपने को नींव में अर्पित किया।
वह ईंट, जिसने अपने को सात हाथ जमीन के अंदर इसलिए गाड़ दिया कि इमारत जमीन से सौ हाथ ऊपर तक जा सके।
वह ईंट, जिसने अपने लिए अंधकूप इसलिए क़बूल किया कि ऊपर के उसके साथियों को स्वच्छ हवा मिलती रहे, सुनहली रोशनी मिलती रहे।
वह ईंट, जिसने अपना अस्तित्व इसलिए विलीन कर दिया कि संसार एक सुंदर सृष्टि देखे । सुंदर सृष्टि! सुंदर सृष्टि! हमेशा ही बलिदान खोजती है, बलिदान ईंट का हो या व्यक्ति का। सुंदर इमारत बने इसलिए कुछ पक्की-पक्की लाल ईंटों को चुपचाप नींव में जाना है। सुंदर समाज बने इसलिए कुछ तपे-तपाए लोगों को मौन-मूक शहादत का लाल सेहरा पहनना है।
1.लेखक किस प्रकार के गीत गाने का आह्वान करता है?
(क) कँगूरे की प्रशंसा के गीत
(ख) सुंदरता के गीत
(ग) नींव के गीत
(घ) प्रसिद्धि के गीत
उत्तर– (ग) नींव के गीत
2. ईंट ने स्वयं को नींव में क्यों अर्पित किया?
(क) क्योंकि वह कमजोर थी
(ख) क्योंकि इमारत की पायदारी नींव पर निर्भर होती है
(ग) क्योंकि उसे प्रकाश पसंद नहीं था
(घ) क्योंकि वह कँगूरे पर नहीं चढ़ सकती थी
उत्तर- (ख) क्योंकि इमारत की पायदारी नींव पर निर्भर होती है
3. ‘सुंदर सृष्टि’ किसकी माँग करती है?
(क) प्रशंसा और प्रसिद्धि की
(ख) धन और वैभव की
(ग) सुविधा और आराम की
(घ) बलिदान की
उत्तर– (घ) बलिदान की
4. किसे मौन-मूक शहादत का लाल सेहरा पहनना है?
(क) तपे-तपाए लोगों को
(ख) अधर्मी को
(ग) व्यापारियों को
(घ) मिस्त्री को
उत्तर- (क) तपे-तपाए लोगों को
5. लेखक ‘नींव के गीत’ गाने की बात क्यों करता है?
उत्तर- लेखक ‘नींव के गीत’ गाने की बात इसलिए करता है क्योंकि समाज में प्रायः केवल दिखने वाली उपलब्धियों और ऊँचे पदों की प्रशंसा की जाती है। वह चाहता है कि उन लोगों को भी सम्मान मिले जो चुपचाप, निस्वार्थ भाव से समाज की बुनियाद मजबूत करते हैं।
3
शहादत और मौन-मूक! जिस शहादत को शुहरत मिली, जिस बलिदान को प्रसिद्धि प्राप्त हुई, वह इमारत का कँगूरा है – मंदिर का कलश है।
हाँ, शहादत और मौन-मूक समाज की आधारशिला यही होती है।
ईसा की शहादत ने ईसाई धर्म को अमर बना दिया, आप कह लीजिए। किंतु मेरी समझ में ईसाई धर्म को अमर बनाया उन लोगों ने, जिन्होंने उस धर्म के प्रचार में अपने को अनाम उत्सर्ग कर दिया।
उसमें से कितने जिंदा जलाए गए, कितने शूली पर चढ़ाए गए, कितने वन-वन की खाक छानते जंगली जानवरों के शिकार हुए, कितने उससे भी भयानक भूख-प्यास के शिकार हुए। उनके नाम शायद ही कहीं लिखे गए हों। उनकी चर्चा शायद ही कहीं होती हो किंतु ईसाई धर्म उन्हीं के पुण्य-प्रताप से फल-फूल रहा है। वे नींव की ईट थे, गिरजाघर के कलश उन्हीं की शहादत से चमकते हैं।
1.लेखक के अनुसार किस प्रकार की शहादत को कँगूरे या कलश के समान बताया गया है?
(क) प्रसिद्धि प्राप्त शहादत
(ख) अनाम बलिदान
(ग) मौन-मूक शहादत
(घ) गुप्त सेवा
उत्तर- (क) प्रसिद्धि प्राप्त शहादत
2. लेखक की दृष्टि में ईसाई धर्म को वास्तव में अमर किसने बनाया?
(क) ईसा मसीह ने अकेले
(ख) धर्मगुरुओं ने
(ग) अनाम होकर बलिदान देने वाले लोगों ने
(घ) राजाओं और शासकों ने
उत्तर– (ग) अनाम होकर बलिदान देने वाले लोगों ने
3. ‘नींव की ईंट’ किसके लिए प्रयुक्त हुई है?
(क) प्रसिद्ध शहीदों के लिए
(ख) अनाम, मौन-मूक बलिदान देने वालों के लिए
(ग) धर्म के संस्थापकों के लिए
(घ) धार्मिक इमारतों के लिए
उत्तर- (ख) अनाम, मौन-मूक बलिदान देने वालों के लिए
4. लेखक प्रसिद्ध शहादत और मौन-मूक शहादत में क्या अंतर स्पष्ट करता है?
उत्तर– लेखक के अनुसार प्रसिद्ध शहादत को समाज में सम्मान और पहचान मिलती है, इसलिए वह इमारत के कँगूरे या मंदिर के कलश के समान होती है। इसके विपरीत मौन-मूक शहादत को कोई नहीं जानता, न नाम लिखा जाता है, न चर्चा होती है। फिर भी यही अनाम बलिदान समाज और धर्म की वास्तविक आधारशिला बनते हैं।
5. गद्यांश में ईसाई धर्म के प्रसार में योगदान देने वालों का चित्रण कैसे किया गया है?
उत्तर– गद्यांश में बताया गया है कि ईसाई धर्म का प्रसार उन अनाम लोगों के त्याग से हुआ, जिन्होंने अत्याचार, भूख-प्यास, वन-वन की भटकन और मृत्यु तक सहन की। वे जलाए गए, सूली पर चढ़ाए गए और पशुओं के शिकार बने, फिर भी उनके नाम इतिहास में दर्ज नहीं हुए। उनका त्याग ही धर्म की सच्ची शक्ति है।
4
आज हमारा देश आजाद हुआ। सिर्फ उनके बलिदानों के कारण नहीं, जिन्होंने इतिहास में स्थान पा लिया है।
देश का शायद कोई ऐसा कोना हो, जहाँ कुछ ऐसे दधीचि नहीं हुए हों, जिनकी हड्डियों के दान ने ही विदेशी वृत्रासुर का नाश किया।
हम जिसे देख नहीं सके, वह सत्य नहीं है, यह है मूढ धारणा ढूँढने से ही सत्य मिलता है। हमारा काम है, धर्म है, ऐसी नींव की ईंटों की ओर ध्यान देना।
सदियों के बाद नए समाज की सृष्टि की ओर हमने पहला कदम बढ़ाया है। इस नए समाज के निर्माण के लिए हमें नींव की ईंट चाहिए।
अफ़सोस, कँगूरा बनने के लिए चारों ओर होड़ा-होड़ी मची है नींव की ईंट बनने की कामना लुप्त हो रही है।
सात लाख गाँवों का नव-निर्माण! हजारों शहरों और कारखानों का नव-निर्माण। कोई शासक इसे संभव नहीं कर सकता। जरूरत है ऐसे नौजवानों की जो इस काम में अपने को चुपचाप खपा दें।
जो एक नई प्रेरणा से अनुप्राणित हों, एक नई चेतना से अभिभूत, जो शाबाशियों से दूर हों, दलबंदियों से अलग हों, जिनमें कंगूरा बनने की कामना न हो; कलश कहलाने की जिनमें वासना न हो, सभी कामनाओं एवं सभी वासनाओं से दूर हों।
उदय के लिए आतुर हमारा समाज चिल्ला रहा है – हमारी नींव की ईट किधर है? देश के नौजवानों को यह चुनौती है।
1.लेखक के अनुसार सत्य किस प्रकार प्राप्त होता है?
(क) देखने से
(ख) सुनने से
(ग) ढूँढने से
(घ) मान लेने से
उत्तर- (ग) ढूँढने से
2. देश के नव-निर्माण के लिए लेखक किस प्रकार के युवाओं की आवश्यकता बताता है?
(क) जो पद और प्रसिद्धि चाहते हों
(ख) जो शाबाशियों और कलश बनने की इच्छा रखते हों
(ग) जो केवल शासन करना जानते हों
(घ) जो चुपचाप निस्वार्थ भाव से स्वयं को खपा दें
उत्तर- (घ) जो चुपचाप निस्वार्थ भाव से स्वयं को खपा दें
3. लेखक ने ‘दधीचि’ का उदाहरण क्यों दिया है?
उत्तर- लेखक ने ‘दधीचि’ का उदाहरण उन अनाम बलिदानियों के प्रतीक के रूप में दिया है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। जैसे दधीचि ने लोक-कल्याण के लिए अपनी हड्डियाँ दान कर दी थीं, वैसे ही देश के हर कोने में ऐसे अनेक लोग हुए, जिनके त्याग ने विदेशी सत्ता का नाश किया, भले ही उनका नाम इतिहास में न लिखा गया हो।
4. लेखक के अनुसार ‘नींव की ईंट’ की ओर ध्यान देना हमारा धर्म क्यों है?
उत्तर- लेखक के अनुसार जो लोग दिखाई नहीं देते, उनका योगदान असत्य नहीं हो जाता। यह मान लेना कि जो दिखे वही सत्य है, एक मूढ़ धारणा है। समाज और देश की वास्तविक मजबूती अनाम त्यागियों पर टिकी होती है। इसलिए ऐसी नींव की ईंटों को पहचानना, उनका सम्मान करना और उनके आदर्शों को अपनाना हमारा कर्त्तव्य और धर्म है।
5. लेखक आज के नौजवानों के सामने कौन-सी चुनौती रखता है?
उत्तर- लेखक आज के नौजवानों के सामने यह चुनौती रखता है कि वे कँगूरा या कलश बनने की लालसा छोड़कर नींव की ईंट बनें। देश के गाँवों, शहरों और कारखानों के नव-निर्माण के लिए ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो नई प्रेरणा और चेतना से भरे हों, लेकिन स्वार्थ, गुटबाज़ी और प्रसिद्धि की इच्छा से दूर रहकर चुपचाप राष्ट्र-निर्माण में लग जाएँ।
PSEB Class 9 Hindi Lesson 12 नींव की ईंट बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)
1.‘नींव की ईंट’ पाठ किस विधा का उदाहरण है?
(क) कहानी
(ख) निबंध
(ग) कविता
(घ) नाटक
उत्तर– (ख) निबंध
2. लेखक के अनुसार लोग किस तरह बनना चाहते हैं?
(क) नींव की ईंट
(ख) साधारण ईंट
(ग) कँगूरा
(घ) दीवार
उत्तर– (ग) कँगूरा
3. कँगूरा किसका प्रतीक है?
(क) त्याग का
(ख) प्रसिद्धि का
(ग) परिश्रम का
(घ) सत्य का
उत्तर- (ख) प्रसिद्धि का
4. नींव की ईंट किसका प्रतीक है?
(क) निःस्वार्थ त्याग का
(ख) स्वार्थ का
(ग) दिखावे का
(घ) आराम का
उत्तर– (क) निःस्वार्थ त्याग का
5. लेखक के अनुसार सत्य कैसा होता है?
(क) सदैव सुंदर
(ख) कोमल
(ग) आकर्षक
(घ) कठोर
उत्तर- (घ) कठोर
6. लोग सत्य से क्यों भागते हैं?
(क) वह कठिन होता है
(ख) वह कठोर और भद्दा होता है
(ग) वह छिपा होता है
(घ) वह सरल होता है
उत्तर– (ख) वह कठोर और भद्दा होता है
7. इमारत की अस्ति-नास्ति किस पर निर्भर करती है?
(क) कँगूरे पर
(ख) दीवारों पर
(ग) सजावट पर
(घ) नींव की पहली ईंट पर
उत्तर– (घ) नींव की पहली ईंट पर
8. लेखक किन गीतों को गाने की बात करता है?
(क) कँगूरे के
(ख) प्रसिद्धि के
(ग) नींव के
(घ) विजय के
उत्तर- (ग) नींव के
9. सुंदर सृष्टि किसकी माँग करती है?
(क) धन
(ख) बलिदान
(ग) सत्ता
(घ) आराम
उत्तर– (ख) बलिदान
10. ‘मौन-मूक शहादत’ से लेखक का क्या आशय है?
(क) प्रसिद्ध बलिदान
(ख) दिखावटी त्याग
(ग) अनाम बलिदान
(घ) असफल प्रयास
उत्तर- (ग) अनाम बलिदान
11. समाज किसे खोज रहा है?
(क) नींव की ईंट
(ख) कलश
(ग) कँगूरा
(घ) शासक
उत्तर– (क) नींव की ईंट
12. ‘नींव की ईंट’ पाठ किसे प्रेरित करता है?
(क) केवल नेताओं को
(ख) केवल बच्चों को
(ग) युवाओं को
(घ) व्यापारियों को
उत्तर- (ग) युवाओं को
13. लेखक का मुख्य संदेश क्या है?
(क) निःस्वार्थ सेवा करो
(ख) सत्ता पाओ
(ग) प्रसिद्ध बनो
(घ) संघर्ष से बचो
उत्तर- (क) निःस्वार्थ सेवा करो
14. दधीचि का उदाहरण किसके लिए है?
(क) स्वार्थ
(ख) बलिदान
(ग) प्रसिद्धि
(घ) सत्ता
उत्तर- (ख) बलिदान
15. देश की स्वतंत्रता किनके कारण संभव हुई?
(क) केवल प्रसिद्ध सेनानियों के कारण
(ख) केवल नेताओं के कारण
(ग) अनाम बलिदानियों के कारण
(घ) शासकों के कारण
उत्तर- (ग) अनाम बलिदानियों के कारण
16. नींव की ईंट का जीवन कैसा होता है?
(क) सुखमय
(ख) प्रकाशपूर्ण
(ग) अंधकारमय
(घ) प्रसिद्ध
उत्तर- (ग) अंधकारमय
17. नींव की ईंट कहाँ गड़ी होती है?
(क) ऊपर
(ख) बीच में
(ग) दीवार पर
(घ) सात हाथ नीचे
उत्तर- (घ) सात हाथ नीचे
18. लेखक किस प्रकार के युवाओं की अपेक्षा करता है?
(क) प्रसिद्धि चाहने वाले
(ख) निःस्वार्थ कर्म करने वाले
(ग) सत्ता चाहने वाले
(घ) आलोचना करने वाले
उत्तर- (ख) निःस्वार्थ कर्म करने वाले
19. लेखक के अनुसार ईसाई धर्म को अमर किसने बनाया?
(क) ईसा मसीह ने
(ख) शासकों ने
(ग) अनाम बलिदानियों ने
(घ) धर्मगुरुओं ने
उत्तर– (ग) अनाम बलिदानियों ने
20. निबंध ‘नींव की ईंट’ किसके द्वारा लिखा गया है?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) गजानंद
(ग) अयोध्या सिंह उपाध्याय
(घ) श्री रामवृक्ष बेनीपुरी
उत्तर- (घ) श्री रामवृक्ष बेनीपुरी
PSEB Class 9 Hindi नींव की ईंट प्रश्न और उत्तर (Extra Question Answers)
1.लेखक ‘मौन-मूक शहादत’ पर क्यों बल देता है?
उत्तर– लेखक मानता है कि समाज की असली नींव मौन-मूक शहादत पर टिकी होती है। ऐसे बलिदान इतिहास में दर्ज नहीं होते, लेकिन वही समाज को टिकाऊ और सशक्त बनाते हैं।
2. लेखक ने इमारत और उसकी नींव का उदाहरण क्यों दिया है?
उत्तर– लेखक ने इमारत और उसकी नींव का उदाहरण यह समझाने के लिए दिया है कि समाज में जो चमक-दमक और सफलता दिखाई देती है, वह गहरे और ठोस आधार पर टिकी होती है। जैसे इमारत की सुंदरता नींव पर निर्भर करती है, वैसे ही समाज की मजबूती भी उन लोगों के परिश्रम और त्याग पर निर्भर करती है जो दिखाई नहीं देते।
3. ‘नींव की ईंट’ पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर- इस पाठ का मुख्य उद्देश्य समाज और देश के लिए निःस्वार्थ त्याग और मौन सेवा के महत्त्व को समझाना है। लेखक दिखाना चाहता है कि वास्तविक निर्माण उन लोगों से होता है जो प्रसिद्धि से दूर रहकर कर्त्तव्य निभाते हैं।
4. पाठ में ईंट का बलिदान किस प्रकार प्रस्तुत किया गया है?
उत्तर- पाठ में ईंट का बलिदान अत्यंत मार्मिक रूप में प्रस्तुत किया गया है। ईंट अपने लिए अंधकार, गहराई और अस्तित्व-विलय स्वीकार करती है ताकि ऊपर की इमारत ऊँची, सुंदर और टिकाऊ बन सके। वह स्वयं प्रकाश और हवा से वंचित रहकर दूसरों को सुविधा देती है।
5. लेखक के अनुसार सत्य से लोग क्यों भागते हैं?
उत्तर- लेखक के अनुसार सत्य कठोर और कभी-कभी भद्दा होता है। लोग सुंदरता और सुविधा चाहते हैं, इसलिए कठोर सत्य से मुँह मोड़ लेते हैं और दिखावे की ओर आकर्षित हो जाते हैं।
6. लेखक ईंट और व्यक्ति के बलिदान में क्या समानता दिखाता है?
उत्तर– लेखक ईंट और व्यक्ति के बलिदान में यह समानता दिखाता है कि दोनों का योगदान दिखाई नहीं देता, लेकिन वही सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण होता है। जैसे मजबूत इमारत के लिए कुछ ईंटों का नींव में जाना आवश्यक है, वैसे ही सुंदर समाज के लिए कुछ तपे-तपाए लोगों को मौन-मूक शहादत देनी पड़ती है।
7. ईसा मसीह और ईसाई धर्म का उदाहरण क्यों दिया गया है?
उत्तर- यह उदाहरण यह दिखाने के लिए दिया गया है कि किसी धर्म या समाज को अमर बनाने में केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि असंख्य अनाम बलिदानी योगदान देते हैं।
8. पाठ का शीर्षक ‘नींव की ईंट’ क्यों सार्थक है?
उत्तर– शीर्षक प्रतीकात्मक है और पाठ के केंद्रीय विचार को व्यक्त करता है। यह उन अनाम व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है जिनके त्याग पर समाज और राष्ट्र खड़े होते हैं।
9. ‘नींव की ईंट’ बच्चों को क्या शिक्षा देती है?
उत्तर- यह पाठ बच्चों को त्याग, कर्तव्यनिष्ठा, सेवा और निःस्वार्थ कर्म की प्रेरणा देता है तथा दिखावे से दूर रहने की सीख देता है।
10 लेखक के अनुसार समाज का निर्माण कौन नहीं कर सकता?
उत्तर- लेखक के अनुसार कोई अकेला शासक समाज का निर्माण नहीं कर सकता। इसके लिए समर्पित और कर्मठ नागरिकों की आवश्यकता होती है।