जुम्मन शेख, अलगू चौधरी और समझू साहू का चरित्र चित्रण | Character Sketch of Jumman Sheikh, Algu Chaudhary and Samjhu Sahu from PSEB Class 9 Hindi Book Chapter 7 Panch Parmeshwar
- Character Sketch of Jumman Sheikh
- Questions related to the Character Jumman Sheikh
- Character Sketch of Algu Chaudhary
- Questions related to the Character Algu Chaudhary
- Character Sketch of Samjhu Sahu
- Questions related to the Character Samjhu Sahu
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जुम्मन शेख का चरित्र चित्रण – Character Sketch of Jumman Sheikh
- एक अच्छा मित्र – जुम्मन शेख, अलगू चौधरी का एक अच्छा मित्र था। उन दोनों को एक – दूसरे पर दृढ़ व् पक्का विश्वास था। अलगू जब कभी बाहर जाते तो जुम्मन पर अपने घर की जिम्मेदारी छोड़ देते थे। उन दोनों में न उनका खान-पान का व्यवहार समान था और न ही उनका धर्म एक समान था। उनके केवल आपस में विचार मिलते थे। और मित्रता का मूख्य साधन या कुंजी यही है कि दो लोगों के विचार मिलने चाहिए।
- लालची – जुम्मन शेख एक लालची व्यक्ति भी था क्योंकि उसने अपनी एक बूढ़ी मौसी से लंबे-चौड़े वादे करके उसकी सम्पति अपने नाम लिखवा ली थी। जब तक उस सम्पति को कानूनी रूप से जुम्मन के नाम नहीं लिखवा दिया गया, तब तक मौसी का खूब आदर-सत्कार किया गया। परन्तु जैसे ही सम्पति को कानूनी रूप से जुम्मन के नाम लिखवा दिया गया तब मौसी के सारे आदर-सत्कार भी ख़त्म हो गए।
- निष्ठुर – जुम्मन शेख मौसी की हालत देख कर भी अनदेखा करते हुए कठोर व्यवहार करता था। वह बेचारी खालाजान को कई बातें सुनाता था। जैसे – बुढ़िया न जाने कब तक जिएगी! दो-तीन बीघे बंजर भूमि क्या दे दी, उसके मोल में तो मानो खाला ने सभी को खरीद ही लिया है! जितना रुपया मौसी के पेट में झोंक चुके, उतने से तो अब तक गाँव खरीद लेते! अंत में परेशान हो कर जब मौसी ने जुम्मन से महीने का खर्च माँगा तो उसने बड़े ही ढीठपन के साथ उत्तर दे दिया कि रूपए क्या जुम्मन के पास पेड़ पर उगते हैं? जुम्मन ने तो यहाँ तक कह दिया था कि उसने सोचा था मौसी बूढ़ी है तो वह जल्दी मर जाएगी।
- अतिविश्वासी – जुम्मन शेख अतिविश्वासी था क्योंकि उसे लगता था कि यदि मौसी पंचायत जाती है, तो पंचायत में उसी की जीत होगी क्योंकि आसपास के गाँवों में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं था, जिस पर जुम्मन ने कृपा न की हो। ऐसा कोई भी नहीं था, जो जुम्मन को अपना शत्रु बनाने की हिम्मत कर सकता था। किसी में इतना बल नहीं था, जो जुम्मन का सामना कर सके। और आसमान से देवदूत तो पंचायत में फैसला करने आयेंगे नहीं, जो सच्चाई सामने लाएँ। इसी कारण जुम्मन को पंचायत का कोई डर नहीं था।
- अपना पक्ष सिद्ध करने वाला – जुम्मन शेख किसी भी तरह अपना पक्ष सही सिद्ध करने में माहिर था। इसलिए अपनी बात पंचो के सामने बड़ी सफाई से रखते हुए वह सारा इल्जाम घर की महिलाओं पर दाल देता है। और यह भी सिद्ध करने की पूरी कोशिश करता है कि मौसी की जायदाद से इतना फायदा नहीं होता कि वह मौसी को हर महीने खर्च दे सके।
- दोस्ती को सत्य से ज्यादा समझने वाला – जब अलगू, जुम्मन के खिलाफ फैसला सुनाता है तो उनकी दोस्ती की जड़ हिला जाती है। वे साथ-साथ बातें करते हुए नहीं दिखते। ऐसा लगता था जैसे उनके इतने पुराने मित्रता रूपी वृक्ष को सत्य के एक झोंकें ने मिटा दिया। केवल सत्य का साथ देने के कारण जुम्मन ने अलगू से मित्रता मानों तोड़ दी थी। वे दोनों मिलते-जुलते जरूर थे, परन्तु अब वे मित्रता के भाव से नहीं बल्कि तलवार से ढाल जैसे अर्थात शत्रुता के भाव से मिलते थे।
- गलती का एहसास होने पर झुक जाने वाला – जुम्मन को सरपंच बनते ही जिम्मेदारी का एहसास होने लगा। और उसे समझ आया कि अलगू कहीं भी गलत नहीं था। और वह अलगू के गले लिपटकर उनसे कहने लगा कि जब से अलगू ने जुम्मन की पंचायत की, तब से जुम्मन अलगू के प्राण का शत्रु बन गया था परंतु आज उसे ज्ञान हुआ कि पंच के पद पर बैठकर न कोई किसी का दोस्त होता है, न दुश्मन। न्याय के सिवा उसे और कुछ नहीं सूझता। अर्थात जुम्मन को अपनी गलती का एहसास हो गया और वे फिर से मित्र बन गए।
जुम्मन शेख के चरित्र सम्बंधित प्रश्न (Questions related to the Character of Jumman Sheikh)
Q1. जुम्मन ने मौसी के साथ क्या धोखा किया ?
Q2. जुम्मन एक अच्छा दोस्त कैसे बना ?
अलगू चौधरी का चरित्र चित्रण – Character Sketch of Algu Chaudhary
- एक अच्छा मित्र – अलगू चौधरी और जुम्मन शेख में बहुत गहरी मित्रता थी। उनकी खेती और कुछ लेन-देन भी इकट्ठे ही होते थे। उन दोनों को एक – दूसरे पर दृढ़ व् पक्का विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गए थे, तब वे अपने घर की जिम्मेदारी अलगू को सौंप कर गए थे। उन दोनों में न उनका खान-पान का व्यवहार समान था और न ही उनका धर्म एक समान था। उनके केवल आपस में विचार मिलते थे। और मित्रता का मूख्य साधन या कुंजी यही है कि दो लोगों के विचार मिलने चाहिए।
- पक्का मित्र – जब बेचारी मौसी अलगू चौधरी के पास दुःख सुनाने आई और उसे भी थोड़ी देर के लिए पंचायत में चले आने का आग्रह करने लगी तब अलगू ने भी कह दिया था कि आने को तो वह आ जाएगा, मगर पंचायत में वह कुछ नहीं बोलेगा। जब मौसी ने इसका कारण पूछा तो अलगू ने इसे अपनी खुशी बता दिया क्योंकि जुम्मन उसका पुराना मित्र है। वह उससे अपनी मित्रता बिगाड़ नहीं सकता।
- न्याय को सर्वोपरि समझने वाला – अलगू चौधरी को हमेशा न्यायलय से काम पड़ता ही रहता था। इसलिए वह पूरा कानूनी आदमी बन गया था। उसने जुम्मन से बहस शुरू कर दी। उसके द्वारा पूछे गए एक-एक प्रश्न जुम्मन के हृदय पर हथौड़े की चोट की तरह पड़ता था। क्योंकि उसने अलगू से यह उम्मीद नहीं की थी। अलगू जुम्मन की चालाकी को सभी के सामने लाने का प्रयत्न कर रहा था। और वह सफल भी हो गया।
- सहनशील – अलगू बहुत सहनशील व्यक्ति था। अलगू जब अपने बैल के दाम माँगने साहू के घर जाते, तब साहू और सहुआइन दोनों ही उस पर चिल्लाने लगते। अलगू चौधरी का बुरा सोचने वालों की कोई कमी न थी। ऐसे मौकों पर वे भी इकठ्ठे हो जाते और साहू जी के गुस्से को ही सही ठहराते। डेढ़ सौ रुपए का इस तरह से नुक्सान होना अलगू चौधरी के लिए आसान नहीं था। परन्तु उन्होंने इस समस्या को सुलझाने के लिए पंचायत का रास्ता चुना। और जुम्मन के सरपंच चुने जाने पर भी नहीं घबराए।
अलगू चौधरी के चरित्र सम्बंधित प्रश्न (Questions related to the Character of Algu Chaudhary)
Q1. कैसे पता चलता है कि अलगू न्यायप्रिय है ?
Q2. अलगू जुम्मन की चालाकी सामने कैसे लाया ?
समझू साहू का चरित्र चित्रण – Character Sketch of Samjhu Sahu
- चालाक – समझू साहू बहुत ही चालाक व्यक्ति था। जब अकेला बैल अलगू के किसी काम का नहीं था। तब समझू साहू ने अगलू के अच्छी नस्ल के बैल को देखा, उसे परखने के लिए गाड़ी में दौड़ाया, मोल-भाव किया और फिर उसे लाकर अपने द्वार पर बाँध ही दिया। अर्थात समझू साहू ने अगलू का बैल खरीद दिया। और समझू साहू औने एक महीने में बैल का दाम चुकाने का वादा पक्का किया।
- निर्दयी – समझू साहू को नया बैल मिल गया था, तो वह उसे खूब दौड़ाने लगा। वह दिन में तीन-तीन, चार-चार चक्कर लगाने लगा। वह न तो बैल के चारे का ध्यान रखता और न ही उसे समय से पानी देता, उसे तो बस चक्करों से मतलब था। वह उसे मंडी ले जाता, वहां कुछ रूखा भूसा उसके सामने खाने को डाल देता। बेचारे जानवर को अभी थोड़ा सा भी आराम नहीं मिल पाता था कि उसे फिर से गाड़ी में जौत दिया जाता था। अच्छी देखभाल न मिलने व् कठिन परिश्रम के कारण उसकी हड्डियाँ निकल आई थीं परंतु फिर भी उस पर बिना रहम किए काम करवाया जाता था। एक दिन चौथे चक्कर में साहू जी ने दो गुना बोझा लाद दिया। दिनभर का थका हुआ जानवर, अब पैर भी नहीं उठा पा रहा था। फिर भी कोड़े की मार खाकर कुछ दूर तक दौड़ा और फिर धरती पर गिर पड़ा, और इस बार वह ऐसा गिरा कि फिर नहीं उठा। अर्थात वहीं पर गिरते ही बैल की जान चली गई।
समझू साहू के चरित्र सम्बंधित प्रश्न (Questions related to the Character of Samjhu Sahu)
Q1. समझू चालाक कैसे साबित हुआ ?
Q2. बैल के प्रति समझू की निर्दयता के बारे में बताइये।