PSEB Class 9 Hindi Chapter 6 Paanch Marjive (पाँच मरजीवे) Question Answers (Important) 

 

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PSEB Class 9 Chapter 6 Paanch Marjive Textbook Questions

 

अभ्यास

(क) विषय-बोध

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
(i) कवि ने गुरु गोबिन्द सिंह के लिए किन-किन विशेषणों का प्रयोग इस कविता में किया है ?
उत्तर- कवि ने गुरु गोबिंद सिंह के लिए तेजस्वी, युगदृष्टा, युगस्रष्टा, महामानव और साहस का ज्वलंत सूर्य जैसे विशेषणों का प्रयोग किया है।

(ii) कविता में ‘दशम नानक’ किसे कहा गया है ?
उत्तर– कविता में ‘दशम नानक’ गुरु गोबिंद सिंह जी को कहा गया है।

(iii) 1699 ई. में विशाल मेला कहाँ लगा था ?
उत्तर– 1699 ई. में विशाल मेला आनंदपुर साहिब में लगा था।

(iv) ‘मरजीवा’ शब्द का क्या अर्थ है ?
उत्तर- जो बलिदान देने को तत्पर हो और मृत्यु को भी जीवन मानकर स्वीकार करे अर्थात् मरकर भी जीवित रहने वाले को मरजीवा कहते हैं।

(v) अकाल पुरुष का फरमान क्या था ?
उत्तर– अकाल पुरुष का फरमान था कि धर्म की रक्षा और अन्याय से मुक्ति के लिए तुरंत एक बलिदान चाहिए।

(vi) पाँचों मरजीवों के नाम लिखिए।
उत्तर– पाँच मरजीवे दयासिंह, धर्मसिंह, मोहकमसिंह, साहबसिंह और हिम्मतसिंह थे।

(vii) जो व्यक्ति न्याय के लिए बलिदान देता है, धर्म की रक्षा के लिए शीश कटा लेता है, उसे हम क्या कहकर पुकारते हैं ?
उत्तर- जो व्यक्ति न्याय के लिए बलिदान देता है, धर्म की रक्षा के लिए शीश कटा लेता है, उसे हम मरजीवा पुकारते हैं।

(viii) गुरु जी ने वीरों की क्या पहचान बताई ?
उत्तर– धर्म की रक्षा के लिए निडर होकर बलिदान देना ऐसे वीरों की पहचान है।

(ix) ‘धर्म-अधर्म के संघर्ष की रात’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर- पिछली रात धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष की रात थी, जो अत्याचार और अन्याय से जीतने का प्रतीक थी।

2. निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
(i) तेज पुंज गुरु गोबिन्द के हाथों में
है नंगी तलवार
लहराती हवा में बारंबार
“अकाल पुरुष का है फरमान
अभी तुरन्त चाहिये एक बलिदान
अन्याय से मुक्ति दिलाने को
धर्म बचाने, शीश कटाने को
मरजीवा क्या कोई है तैयार ?
मुझे चाहिये शीश एक उपहार!
जिसका अद्भुत त्याग देश की
मरणासन्न चेतना में कर दे नवरक्त संचार।”
उत्तर-
प्रसंग– प्रस्तुत पंक्तियों में कवि उस समय को बताते हैं जब गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की घोषणा करने से पहले सभा के बीच एक साहसिक और चौंकाने वाली मांग रखी। हजारों भक्तों के सामने उन्होंने बलिदान की पुकार की और वीरता तथा धर्म-रक्षा की भावना को जागृत किया।
व्याख्या– प्रस्तुत पंक्तियों में कवि बताते हैं कि गुरु गोबिन्द सिंह जी अत्यंत तेजस्वी स्वरूप में सभा के बीच खड़े थे। उनके हाथ में चमकती हुई तलवार थी, जिसे वे बार-बार हवा में लहराकर उपस्थित लोगों के हृदय में साहस की अग्नि प्रज्वलित कर रहे थे। उनका व्यक्तित्व दृढ़ निश्चय, पराक्रम और आत्मबल से चमक रहा था।
गुरुजी ने सभा को संबोधित करते हुए घोषणा की कि यह केवल उनकी इच्छा नहीं, बल्कि अकाल पुरुष यानी परमात्मा का आदेश है कि धर्म की रक्षा और अन्याय के अंत के लिए आज ही एक बलिदान आवश्यक है। उन्होंने पूछा कि क्या कोई ऐसा मरजीवा है जो मरकर भी अमर रहने वाला हो, जो धर्म और सत्य की रक्षा के लिए अपना सिर अर्पित करने को तैयार हो।
गुरुजी ने स्पष्ट कहा कि उन्हें एक सिर उपहार स्वरूप चाहिए, ऐसा सिर जो केवल शरीर का अंग न होकर साहस, त्याग और निष्ठा का प्रतीक बने। उनका विश्वास था कि इस अद्भुत बलिदान से देश की मरणासन्न चेतना में फिर से ऊर्जा, साहस और नई क्रांति की भावना जाग उठेगी।

(ii) लीला से पर्दा हटा गुरु प्रकट हुए
चकित देखते सब पांचों बलिदानी संग खड़े
गुरुवर बोले “मेरे पांच प्यारे सिंघ
साहस, रूप, वेश, नाम में न्यारे सिंघ
दया सिंघ, धर्म सिंघ और मोहकम सिंघ
खालिस जाति खालसा के साहब सिंघ व हिम्मत सिंघ
शुभाचरण पथ पर निर्भय देंगे बलिदान
अब से पंथ “खालसा ” मेरा ऐसे वीरों की पहचान।”
उत्तर-
प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ बताती हैं कि जब पाँचों बलिदानियों के क्रम के बाद सभा में एक गहरा मौन और आशंका का वातावरण था। लोग यह मान चुके थे कि पाँचों ने अपने प्राण त्याग दिए हैं। तभी गुरु गोबिन्द सिंह जी ने सभा को सत्य बताने और अपने उद्देश्य का रहस्य खोलने का समय उपयुक्त समझा। इसी क्षण खालसा पंथ की आधारशिला रखी गई और इतिहास का एक नया अध्याय प्रारंभ हुआ।
व्याख्या– इन पंक्तियों में कवि बताते हैं कि गुरु गोबिन्द सिंह जी ने जब अपनी लीला का रहस्य खोल दिया तो पूरे वातावरण में आश्चर्य और श्रद्धा की लहर दौड़ गई। अचानक पर्दा हटा और गुरु जी पाँचों वीर बलिदानियों के साथ सभा के सामने प्रकट हुए। जिन्हें सब मृत समझ बैठे थे, वे जीवित और दृढ़ आत्मविश्वास के साथ खड़े थे। इस दृश्य को देखकर उपस्थित लोग चौंक गए। यह एक अलौकिक, प्रेरणादायी और चमत्कारिक क्षण था।
गुरु जी ने घोषणा करते हैं कि ये पाँच अब साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि मेरे ‘पाँच प्यारे सिंह’ हैं। उनका स्वर दृढ़ और गर्व से भरा था। वह आगे कहते हैं कि ये वीर साहस, रूप, वेश और पहचान में अब विशिष्ट हैं। इनके नाम हैं दयासिंह, धरमसिंह, मोहकमसिंह, साहबसिंह और हिम्मतसिंह।
गुरु जी ने यह भी स्पष्ट किया कि ये पाँच अब खालसा, अर्थात् शुद्ध, निर्मल, निर्भय और धर्म-समर्पित योद्धा हैं। इनके जीवन का उद्देश्य मानवता, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए निडर होकर बलिदान देना है। अंत में गुरु जी घोषणा करते हैं कि आज से ‘खालसा पंथ’ की स्थापना हुई और ऐसे ही निडर, सत्यनिष्ठ और त्यागी व्यक्तित्व इसकी पहचान होंगे।

(ख) भाषा-बोध

1. शब्दांश + मूल शब्द (अर्थ) नवीन शब्द (अर्थ)
+ न्याय (इंसाफ) अन्याय (इंसाफ के विरुद्ध कार्य)
वि + श्वास (साँस) विश्वास (भरोसा)

उपर्युक्त मूल शब्द (न्याय) में ‘अ’ शब्दांश लगाने से ‘अन्याय’ तथा ‘ श्वास में ‘वि’ शब्दांश लगाने से ‘विश्वास’ नवीन शब्द बने हैं तथा उनके अर्थ में भी परिवर्तन आ गया है। ये ‘अ’ तथा ‘वि’ उपसर्ग हैं।
अतएव जो शब्दांश किसी शब्द के शुरू में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं, वे उपसर्ग कहलाते हैं।
निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग तथा मूल शब्द अलग-अलग करके लिखिए-

शब्द उपसर्ग मूल शब्द
अधर्म धर्म
अतिरिक्त _____ _____
उपहार _____ _____
प्रकट _____ _____

उत्तर- 

शब्द उपसर्ग मूल शब्द
अधर्म धर्म
अतिरिक्त अति रिक्त
उपहार उप हार
प्रकट प्र कट

2. मूल शब्द (अर्थ) + शब्दांश = नवीन शब्द (अर्थ)
सन्न (स्तब्ध, चुप) + आटा = सन्नाटा (स्तब्धता, चुप्पी)
कायर (डरपोक) + ता = कायरता (डरपोकपन)
उपर्युक्त मूल शब्द ‘सन्न’ में ‘आटा’ लगाने से ‘सन्नाटा’ तथा ‘कायर’ शब्द में ‘ता’ लगाने से ‘कायरता’ नवीन शब्द बने हैं तथा उनके अर्थ में भी परिवर्तन आ गया है। ये ‘आटा’ तथा ‘ता’ प्रत्यय हैं।
अतएव जो शब्दांश किसी शब्द के अंत में जुड़कर उनके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं, वे प्रत्यय कहलाते हैं।
निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय तथा मूल शब्द अलग-अलग करके लिखिए-
शब्द            मूल शब्द           प्रत्यय
वैशाखी          ______            ______
निवासी          ______             ______
बलिदानी        ______            ______
बलिहारी        ______           ______
उत्तर-

शब्द मूल शब्द प्रत्यय
वैशाखी वैशाख ई 
निवासी निवास ई 
बलिदानी बलिदान ई 
बलिहारी बलिहार ई 

 

 

PSEB Class 9 Hindi Lesson 6 पाँच मरजीवे सार-आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)

निम्नलिखित पद्यांशों को ध्यान पूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिये-
1
एक सुबह आनंदपुर साहिब में जागी,
कायरता जब सप्तसिन्धु की धरती से भागी।
धर्म-अधर्म के संघर्ष की रात।
एक खालस महामानव ।
युग दृष्टा-युग स्रष्टा
साहस का ज्वलन्त सूर्य ले हाथ
आह्वान कर रहा-
जागो वीरो जागो
जूझना ही जीवन है – जीवन से मत भागो!

1.कविता की इन पंक्तियों में ‘खालस महामानव’ किसे कहा गया है?
(क) औरंगज़ेब को
(ख) गुरु गोबिन्द सिंह को
(ग) दयाराम को
(घ) सप्तसिन्धु को
उत्तर– (ख) गुरु गोबिन्द सिंह को

2. ‘सप्तसिन्धु’ शब्द का अर्थ है-
(क) सात राजा
(ख) सात पर्वत
(ग) सात नदियाँ
(घ) सात संस्कृतियाँ
उत्तर– (ग) सात नदियाँ

3. गुरु गोबिन्द सिंह जी अपने अनुयायियों को क्या संदेश देते हैं?
(क) जागो और संघर्ष करो
(ख) मौन रहो
(ग) जीवन से भागो
(घ) अन्याय को स्वीकार करो
उत्तर- (क) जागो और संघर्ष करो

4. कवि ने आनंदपुर साहिब की सुबह को विशेष क्यों बताया है?
उत्तर– कवि ने इस सुबह को विशेष बताया है क्योंकि यह वह ऐतिहासिक क्षण था जब लोगों के मन से डर समाप्त हुआ और गुरु गोबिन्द सिंह जी की प्रेरणा से अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की भावना जागृत हुई।

5. ‘जूझना ही जीवन है’ इस पंक्ति का संदेश क्या है?
उत्तर– इस पंक्ति का संदेश यह है कि जीवन संघर्ष का नाम है और कठिनाइयों से भागना कायरता है। सच्चा जीवन वह है जिसमें व्यक्ति साहस के साथ अन्याय और अधर्म के विरुद्ध खड़ा हो तथा धर्म और सत्य की रक्षा करे।

2
तेजपुंज गुरु गोबिन्द के हाथों में
है नंगी तलवार लहराती हवा में बारम्बार
“अकाल पुरुष का है फरमान
अभी तुरन्त चाहिये एक बलिदान
अन्याय से मुक्ति दिलाने को
धर्म बचाने, शीश कटाने को
मरजीवा क्या कोई है तैयार?
मुझे चाहिए शीश एक उपहार!
जिसका अद्भुत त्याग देश की
मरणासन्न चेतना में कर दे नवरक्त संचार।”

1.गुरु गोबिन्द सिंह जी के हाथ में क्या था?
(क) ध्वज
(ख) धनुष
(ग) तलवार
(घ) पुस्तक
उत्तर– (ग) तलवार

2. ‘अकाल पुरुष का फरमान’ का अर्थ है-
(क) जनता का आदेश
(ख) परमात्मा का आदेश
(ग) सैनिकों का आदेश
(घ) राजा का आदेश
उत्तर– (ख) परमात्मा का आदेश

3. गुरुजी ने सभा से किस चीज़ की मांग की?
(क) एक बलिदान
(ख) भोजन
(ग) धन
(घ) सेना
उत्तर- (क) एक बलिदान

4. गुरु गोबिन्द सिंह जी ने मरजीवा क्यों माँगा?
उत्तर– गुरु गोबिन्द सिंह जी ने मरजीवा इसलिए माँगा क्योंकि वह एक ऐसे भक्त की तलाश में थे जो धर्म और न्याय की रक्षा हेतु अपने प्राण बलिदान करने को तैयार हो। वह इस बलिदान के माध्यम से समाज में साहस, निडरता और त्याग की भावना जगाना चाहते थे।

5. ‘मरणासन्न चेतना में नवरक्त संचार’ का क्या आशय है?
उत्तर– इसका अर्थ है कि समाज में जो साहस और आत्मसम्मान लगभग समाप्त हो चुका था, वह इस महान बलिदान के प्रभाव से फिर जीवित हो जाएगा। यह त्याग लोगों में नई ऊर्जा, जागृति और क्रांतिकारी चेतना जगाएगा।

3
प्राण के लाले पड़े हैं।
सभी के मन स्तब्ध से मानो जड़े हैं।
किन्तु फिर धर्मराय बलिदान-व्रत-धारी
जाट हस्तिनापुर का खड़ा करबद्ध
गुरुचरण बलिहारी !
हर्षित गुरु ले गये भीतर उसे भी-
लीला विस्मयकारी।

1.’धर्मराय’ कौन था?
(क) लाहौर का खत्री
(ख) हस्तिनापुर का जाट
(ग) पुरी का कहार
(घ) द्वारिका का धोबी
उत्तर- (ख) हस्तिनापुर का जाट

2. सभा में लोग स्तब्ध क्यों थे?
(क) क्योंकि गुरु जी कथा सुना रहे थे
(ख) क्योंकि भोजन का इंतजार था
(ग) क्योंकि बलिदान की मांग से सभी भयभीत थे
(घ) क्योंकि कोई गीत गा रहा था
उत्तर– (ग) क्योंकि बलिदान की मांग से सभी भयभीत थे

3. धर्मराय गुरुजी के सामने कैसे खड़ा हुआ था?
(क) करबद्ध होकर
(ख) बिना सम्मान के
(ग) हथियार लेकर
(घ) पीछे छिपकर
उत्तर– (क) करबद्ध होकर

4. धर्मराय की विशेषता क्या थी?
उत्तर– धर्मराय निडर, दृढ़ संकल्पित और धर्म के प्रति समर्पित व्यक्ति था। वह बिना भय के गुरु के सामने करबद्ध होकर खड़ा हुआ और स्वयं बलिदान के लिए प्रस्तुत हुआ, जो उसकी श्रद्धा और साहस का प्रतीक था।

5. गुरुजी धर्मराय को देखकर प्रसन्न क्यों हुए?
उत्तर– गुरुजी धर्मराय के साहस, त्याग की भावना और धर्म रक्षा के लिए प्राण देने की तत्परता से अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने उसमें सच्चे मरजीवे की गुणवत्ता देखी और उसे आनंदपूर्वक अंदर ले गए।

 

4
लीला से पर्दा हटा गुरु प्रकट हुए
चकित देखते सब पाँचों बलिदानी संग खड़े
गुरुवर बोले “मेरे पाँच प्यारे सिंघ
साहस, रूप, वेश, नाम में न्यारे सिंघ
दया सिंघ, धर्म सिंघ और मोहकम सिंघ
खालिस जाति खालसा के साहब सिंघ व हिम्मत सिंघ
शुभाचरण पथ पर निर्भय देंगे बलिदान
अब से पंथ “खालसा ” मेरा ऐसे वीरों की पहचान।”

1.गुरु गोबिन्द सिंह जी ने पाँचों मरजीवों को क्या नाम दिया?
(क) पाँच रत्न
(ख) पाँच शूरवीर
(ग) पाँच प्यारे सिंह
(घ) पाँच सैनिक
उत्तर- (ग) पाँच प्यारे सिंह

2. पाँच प्यारे सिंहों में निम्न में से कौन शामिल नहीं था?
(क) दया सिंह
(ख) हिम्मत सिंह
(ग) मोहकम सिंह
(घ) बुद्ध सिंह
उत्तर- (घ) बुद्ध सिंह

3. इन पंक्तियों में किस महत्वपूर्ण स्थापना का उल्लेख है?
(क) आर्य समाज की स्थापना
(ख) खालसा पंथ की स्थापना
(ग) गुरुद्वारा निर्माण
(घ) स्वर्ण मंदिर निर्माण
उत्तर- (ख) खालसा पंथ की स्थापना

4. सभा आश्चर्यचकित क्यों हो गई थी?
उत्तर– सभा इसलिए आश्चर्यचकित हो गई क्योंकि जिन पाँच व्यक्तियों को लोग मृत समझ रहे थे, वे अचानक गुरु गोबिन्द सिंह जी के साथ जीवित, दृढ़ और आत्मविश्वास से भरे हुए सामने आए।

5. गुरु जी ने पाँच वीरों में कौन-सी विशेषताएँ बताई?
उत्तर- गुरु गोबिन्द सिंह जी ने कहा कि ये पाँच वीर साहस, रूप, वेश और नाम में विशिष्ट हैं। वे अब साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि धर्म के रक्षक, निर्भय योद्धा और सच्चे खालसा हैं, जो न्याय और धर्म के लिए निडर होकर बलिदान देंगे।

 

PSEB Class 9 Hindi Lesson 6 पाँच मरजीवे बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1.कविता ‘पाँच मरजीवे’ के कवि कौन हैं?
(क) रामधारी सिंह दिनकर
(ख) हरिवंश राय बच्चन
(ग) योगेन्द्र बख़्शी
(घ) रवीन्द्रनाथ टैगोर
उत्तर- (ग) योगेन्द्र बख़्शी

2. कविता का ऐतिहासिक संदर्भ किस गुरु से जुड़ा है?
(क) गुरु गोबिन्द सिंह
(ख) गुरु तेग बहादुर
(ग) गुरु नानक देव
(घ) गुरु अंगद
उत्तर– (क) गुरु गोबिन्द सिंह

3. कविता की शुरुआत किस स्थान से होती है?
(क) दिल्ली
(ख) आनंदपुर साहिब
(ग) अमृतसर
(घ) पटियाला
उत्तर– (ख) आनंदपुर साहिब

4. कविता में उल्लिखित ऐतिहासिक घटना किस अवसर पर घटित होती है?
(क) दिवाली
(ख) होली
(ग) गुरुपर्ब
(घ) वैसाखी
उत्तर- (घ) वैसाखी

5. ‘सप्तसिन्धु’ में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व
(ख) बहुव्रीहि
(ग) कर्मधारय
(घ) द्विगु
उत्तर- (घ) द्विगु

6. पहला मरजीवा कौन था?
(क) धर्मराय
(ख) मोहकम चंद
(ग) दयाराम
(घ) साहब चंद
उत्तर– (ग) दयाराम

7. ‘तेजपुंज’ शब्द किसके लिए प्रयोग हुआ है?
(क) गुरु गोबिन्द सिंह
(ख) महाराणा प्रताप
(ग) दयाराम
(घ) शिवाजी
उत्तर– (क) गुरु गोबिन्द सिंह

8. गुरु ने सभा में क्या माँगा?
(क) धन
(ख) भोजन
(ग) एक सिर
(घ) मंत्र
उत्तर- (ग) एक सिर

9. बलिदान देने वालों की कुल संख्या कितनी थी?
(क) चार
(ख) पाँच
(ग) छह
(घ) दस
उत्तर- (ख) पाँच

10. ‘हर्षित’ में प्रत्यय है-
(क) हर्षि
(ख) र्षित
(ग) इत
(घ) त
उत्तर– (ग) इत

11. कविता का मुख्य भाव क्या है?
(क) मनोरंजन
(ख) प्रेम
(ग) हास्य
(घ) बलिदान और साहस
उत्तर– (घ) बलिदान और साहस

12. सभा में मौन का कारण था-
(क) उत्साह
(ख) भय
(ग) प्रशंसा
(घ) क्रोध
उत्तर– (ख) भय

13. ‘रक्तरंजित’ में समास है-
(क) द्वंद्व
(ख) अव्ययीभाव
(ग) तत्पुरुष
(घ) कर्मधारय
उत्तर- (ग) तत्पुरुष

14. पाँचों मरजीवों के बलिदान का उद्देश्य था-
(क) धन कमाना
(ख) शक्ति प्रदर्शन
(ग) धर्म की रक्षा
(घ) सेना बढ़ाना
उत्तर– (ग) धर्म की रक्षा

15. कविता की पृष्ठभूमि किस साम्राज्य के अत्याचार से जुड़ी है?
(क) ब्रिटिश
(ख) मुग़ल
(ग) मराठा
(घ) राजपूत
उत्तर- (ख) मुग़ल

16. कविता किस भावना को प्रबल करती है?
(क) स्वार्थ
(ख) देशभक्ति
(ग) ईर्ष्या
(घ) भय
उत्तर- (ख) देशभक्ति

17. ‘निर्भय’ शब्द में उपसर्ग है-
(क) निभ
(ख) भय
(ग) य
(घ) निर्
उत्तर- (घ) निर्

18. कविता किन मूल्यों की शिक्षा देती है?
(क) त्याग, निष्ठा और वीरता
(ख) संग्रह और बचत
(ग) व्यापार
(घ) राजनीति
उत्तर- (क) त्याग, निष्ठा और वीरता

19. ‘धर्मरक्षा’ में कौन-सा समास है?
(क) तत्पुरुष
(ख) अव्ययीभाव
(ग) द्वंद्व
(घ) कर्मधारय
उत्तर- (क) तत्पुरुष

20. ‘शुभाचरण’ का संधि विच्छेद है-
(क) शुभा + चरण
(ख) शुभ + आचरण
(ग) शुभ + चरण
(घ) शु +आचरण
उत्तर- (ख) शुभ + आचरण

PSEB Class 9 Hindi पाँच मरजीवे प्रश्न और उत्तर (Extra Question Answers)

1. कविता समाज को क्या प्रेरणा देती है?
उत्तर- यह कविता हमें बताती है कि अन्याय, अत्याचार और भय से भागना नहीं चाहिए। सत्य, धर्म और मानवता की रक्षा के लिए साहस और बलिदान की आवश्यकता होती है। यह प्रेरित करती है कि जीवन संघर्ष है और निडरता ही वास्तविक जीवन है।

2. ‘नंगी तलवार लहराती हवा में’ से क्या संकेत मिलता है?
उत्तर– यह पंक्ति दर्शाती है कि गुरु गोबिन्द सिंह जी पूरी दृढ़ता, शक्ति और आत्मविश्वास के साथ लोगों को प्रेरित कर रहे थे। तलवार अत्याचार के अंत और धर्म की रक्षा का प्रतीक है, जो लोगों के हृदय में जोश और साहस पैदा कर रही थी।

3. खालसा पंथ की स्थापना का क्या महत्व है?
उत्तर– खालसा पंथ की स्थापना को धर्म, वीरता और न्याय की रक्षा के नए युग की शुरुआत के रूप में दर्शाया गया है। यह वह ऐतिहासिक क्षण था जब पाँच साधारण लोग समर्पण, साहस और त्याग के प्रतीक बनकर पूरी मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत बने।

4. सभा में सभी लोग स्तब्ध क्यों हो गए थे?
उत्तर– गुरु गोबिन्द सिंह जी के द्वारा दूसरा बलिदान मांगने पर सभी उपस्थित लोग भयभीत हो गए थे। बलिदान का अर्थ जीवन त्याग था, इसलिए किसी में तुरंत आगे आने का साहस नहीं था। इसी कारण पूरी सभा में गहरा मौन और स्तब्धता छा गई।

5. पाँच मरजीवों का चयन समाज में एकता का प्रतीक कैसे बना?
उत्तर– पाँच मरजीवों में अलग-अलग जातियों और क्षेत्रों के लोग थे। इससे यह संदेश मिला कि धर्म, साहस और मानवता जाति से ऊपर है। इस घटना ने समाज में एकता, समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत किया।

6. कविता में गुरु गोबिन्द सिंह के व्यक्तित्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर– कविता में गुरु गोबिन्द सिंह का व्यक्तित्व तेजस्वी, साहसी और प्रेरणादायक बताया गया है। उनके हाथ में तलवार है जो धर्म और संघर्ष का प्रतीक है। वे दृढ़ स्वर में बलिदान की पुकार करते हैं। उनका व्यक्तित्व इतना शक्तिशाली है कि उन्हें देखकर भय, सम्मान और समर्पण की भावना जागृत होती है।

7. सभा में मौन और भय का वातावरण क्यों छाया?
उत्तर– जब गुरु गोबिन्द सिंह ने सामने उपस्थित जनसमूह से बलिदान के लिए अपना शीश माँगा, तब लोग भयभीत हो गए। यह सामान्य मांग नहीं थी, जीवन देने की परीक्षा थी। कोई भी तुरंत आगे आने का साहस नहीं जुटा पाया, इसलिए सभा में सन्नाटा और भय का वातावरण छा गया।

8. दयाराम के बलिदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर- जब गुरु जी ने पहला बलिदान माँगा, तभी दयाराम आगे आए। उन्होंने श्रद्धा और विनम्रता से स्वयं को धर्म की रक्षा हेतु समर्पित किया। गुरु जी उन्हें अंदर ले गए और तलवार के चलने की आवाज़ सुनाई दी। यह दृश्य उपस्थित जनसमूह के लिए अत्यंत भावनात्मक और रहस्यमय था।

9. कविता में तलवार का प्रतीकात्मक अर्थ समझाइए।
उत्तर– कविता में तलवार केवल युद्ध का हथियार नहीं बल्कि धर्म, न्याय और आत्मसम्मान की रक्षा का प्रतीक है। खून से सनी तलवार बलिदान और त्याग की याद दिलाती है। यह सिखाती है कि सत्य और धर्म के लिए संघर्ष आवश्यक है, अन्याय के आगे झुकना सही नहीं।

10. पाँच मरजीवों की भूमिका क्यों ऐतिहासिक कही जाती है?
उत्तर- पाँच मरजीवों ने बिना भय जीवन त्यागकर सत्य और धर्म की प्रतिष्ठा के लिए इतिहास रचा। उनके बलिदान ने खालसा पंथ की स्थापना की नींव रखी। यह घटना धार्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना का नया अध्याय बनी इसलिए इसे ऐतिहासिक कहा जाता है।