Maharashtra State Board of Secondary and Higher Secondary Education Class 10 Hindi Chapter 5 Bhasha Ka Prashn (भाषा का प्रश्न) Question Answers (Important) 

 

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Maharashtra State Board Class 10 Chapter 5 Bhasha Ka Prashn Textbook Questions

लेखनीय
बुरी संगति किसी को भी दिशाहीन बना सकती है’ इसपर तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
उत्तर-
बुरी संगति किसी को भी दिशाहीन बना सकती है-
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसके व्यक्तित्व के निर्माण में संगति का बहुत बड़ा योगदान होता है। जैसा वातावरण और साथ उसे मिलता है, वैसा ही उसका आचरण और सोच बन जाती है। इसलिए कहा जाता है कि बुरी संगति व्यक्ति को गलत मार्ग पर ले जाकर उसे दिशाहीन बना सकती है।
बुरी संगति का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव यह है कि व्यक्ति सही और गलत में अंतर करना भूल जाता है। जब कोई अच्छे संस्कारों को छोड़कर गलत आदतों वाले लोगों के साथ रहने लगता है, तो धीरे-धीरे वह भी झूठ बोलना, अनुशासनहीनता, आलस्य या अन्य अनुचित कार्य करने लगता है। कई बार युवा वर्ग गलत मित्रों के प्रभाव में आकर पढ़ाई से दूर हो जाता है और अपने भविष्य को नुकसान पहुँचा देता है।
इतिहास और समाज में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं जहाँ बुरी संगति ने लोगों का जीवन बिगाड़ दिया, जबकि अच्छी संगति ने उन्हें सफलता की ओर अग्रसर किया। अच्छी संगति हमें प्रेरणा देती है, सही निर्णय लेने में मदद करती है और हमारे चरित्र को मजबूत बनाती है।
अतः हमें सदैव सोच-समझकर मित्रों और साथियों का चयन करना चाहिए। जीवन में आगे बढ़ने और सही दिशा बनाए रखने के लिए अच्छी संगति अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि सही साथ हमें सफलता की ओर ले जाता है और बुरी संगति हमें लक्ष्य से भटका देती है।

स्वाध्याय
* सूचना के अनुसार कृतियां कीजिए :-
(१) कारण लिखिए:

BHASHA KA PRASHN QNA img1

उत्तर-
ध्वनियों के संघात को भाषा की संज्ञा नहीं दे सकते-
1. क्योंकि इसमें वह अर्थवत्ता नहीं रहती जो हृदय और बुद्धि को समान रूप से तृप्ति तथा बोध दे सके।
2. मानव कंठ को परिवेश विशेष में जीवनाभिव्यक्ति के लिए जो ध्वनियाँ दावभाग में प्राप्त हुई थीं, उन्हें उसके अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा से सर्वथा नवीन रूपों में अवतरित किया।
भाषा ग्रहण करने योग्य है-
1. ज्ञान की समृद्धि के कारण
2. भाव की समृद्धि के कारण

(२) संजाल पूर्ण कीजिए:

BHASHA KA PRASHN QNA img2

उत्तर-
देश की एकता बनाए रखने वाले घटक-
1. सांस्कृतिक एकता
2. रागात्मक दृष्टि
3. विशेष जीवन पद्धति चिंतन
4. सौंदर्यबोध

(३) कृति कीजिए :

BHASHA KA PRASHN QNA img3
उत्तर-
अभिव्यक्ति को एक व्यक्ति से समाज तक पहुँचाने वाले घटक-
1. कंठ
2. स्वर

(४) लिखिए:

BHASHA KA PRASHN QNA img4
उत्तर-
भाषा के कार्य-
1. मानव की बुद्धि और हृदय की समृद्धि को अन्य मानवों के लिए संप्रेषणशील बनाना।
2. किसी भेदातीत स्थिति की संयोजिका के रूप में कार्य करना।

राष्ट्र को गरिमा प्रदान करने वाले घटक-
1. सांस्कृतिक विरासत
2. प्रबुद्ध मानव समाज

(५) पाठ में प्रयुक्त विलोम शब्दों की जोड़ियां ढूंढकर लिखिए:

विलोम शब्द जोड़ियाँ

_________ x _________ _________ x _________ _________ x _________ _________ x _________
_________ x _________ _________ x _________ _________ x _________ _________ x _________
_________ x _________ _________ x _________ _________ x _________ _________ x _________
_________ x _________ _________ x _________ _________ x _________ _________ x _________

उत्तर-

विलोम शब्द जोड़ियाँ

सुखद- दुखद आंतरिक- बाह्य आदान- प्रदान  अनुकूलता- प्रतिकूलता
चेतन- जड़ घात-प्रतिघात ऊँची-नीची आधिक्य- अभाव
कठिन- कोमल व्यष्टि- समष्टि स्वतंत्रता- परतंत्रता अंधकार- आलोक 
आरोह-अवरोह जटिल-सरल सम-विषम पूरक- विरोधिनी

अभिव्यक्‍ति
‘भाषा सेतु का काम करती है’, इसपर अपने विचार लिखिए।
उत्तर-
भाषा मनुष्यों के बीच सेतु का कार्य करती है, क्योंकि इसके माध्यम से हम अपने विचार, भावनाएँ और अनुभव एक-दूसरे तक पहुँचा पाते हैं। भाषा न केवल संवाद का साधन है, बल्कि यह विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं और समाजों को जोड़ने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। अलग-अलग प्रदेशों और भाषाओं के लोग जब एक-दूसरे की भाषा समझते हैं, तो आपसी दूरी कम होती है और सहयोग तथा एकता की भावना मजबूत होती है। शिक्षा, साहित्य, विज्ञान और तकनीक के विकास में भी भाषा का विशेष योगदान है, क्योंकि यही ज्ञान के आदान-प्रदान को संभव बनाती है। इस प्रकार भाषा हृदय से हृदय और व्यक्ति से समाज को जोड़कर एक मजबूत सेतु का निर्माण करती है।

भाषा बिंदु
(१) निम्नलिखित वाक्यों में आए अव्ययों को रेखांकित कीजिए और कोष्ठक में उनके भेद लिखिए:
१. लड़का मेरे पास बैठा और धीरे-धीरे बातें करने लगा। (…….…….), (……….….…….)
२. ‘अरे पुत्र !’ बुद्धा इतना ही बोल पाया कि उर्मि का मोबाइल बज उठा। (…………….), (……….….…….)
३. थोड़ी-सी छानबीन से पता चला कि कोलकाता और बनारस में बहुत दूरी नहीं है। (…………….), (……….…..)
४. “ओह नहीं मल्लिका ! कभी बैठे-बैठे मन उदास हो जाता है।” (…………….), (……….….…….)
उत्तर-
1. लड़का मेरे पास बैठा और धीरे-धीरे बातें करने लगा।
(पास- स्थानवाचक क्रियाविशेषण अव्यय)
(और- समुच्चयबोधक अव्यय)
(धीरे-धीरे- रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय)

2. ‘अरे पुत्तर !’ बूढा इतना ही बोल पाया कि उर्मि का मोबाइल बज उठा।
(अरे- विस्मयादिबोधक अव्यय)
(इतना- परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय)
(कि- विकल्पसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय)

3. थोड़ी-सी छानबीन से पता चला कि कोलकाता और बनारस में बहुत दूरी नहीं है।
(थोड़ी-सी- परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय)
(और- समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय)
(बहुत- परिमाणवाचक क्रियाविशेषण अव्यय)

4. “ओह नहीं मल्लिका ! कभी बैठे-बैठे मन उदास हो जाता है।”
(ओह- विस्मयादिबोधक अव्यय)
(कभी- कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय)
(बैठे-बैठे- रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय)

(२) पाठ में प्रयुक्त अव्यय छाँटिए और उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए:

अव्यय प्रकार  अव्यय शब्द वाक्य
क्रियाविशेषण अव्यय 1. _____________ __________________________
2. _____________ __________________________
संबंधसूचक अव्यय 1. _____________ __________________________
2. _____________ __________________________
समुच्चयबोधक अव्यय 1. _____________ __________________________
2. _____________ __________________________
विस्मयादिबोधक अव्यय 1. _____________ __________________________
2. _____________ __________________________

उत्तर-

अव्यय प्रकार  अव्यय शब्द वाक्य
क्रियाविशेषण अव्यय अधिक (परिमाणवाचक  क्रियाविशेषण अव्यय) आजकल शहरों में प्रदूषण अधिक बढ़ गया है।
सर्वथा (परिमाणवाचक  क्रियाविशेषण अव्यय) आपका विचार सर्वथा सही है।
संबंधसूचक अव्यय के कारण  वर्षा होने के कारण मैं स्कूल नहीं जा सका। 
के साथ शिक्षक ने उदाहरण के साथ पाठ को समझाया। 
समुच्चयबोधक अव्यय तथा (संयोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय ) हमें अपने माता-पिता तथा शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए।
क्योंकि (कारणसूचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय) हमें पानी बचाना चाहिए क्योंकि यह जीवन के लिए आवश्यक है।
विस्मयादिबोधक अव्यय शाबाश ! (हर्ष बोधक अव्यय) शाबाश ! तुमने बहुत अच्छा कार्य किया। 
अरे!  अरे! तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?

Note- पाठ में विस्मयादिबोधक अव्यय का प्रयोग नहीं हुआ है इसलिए हम यहाँ अन्य उदाहरण दे रहे हैं।
 —————————————-

(३) नीचे आकृति में दिए हुए अव्ययों के भेद पहचानकर उनका अर्थपूर्ण स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग कीजिए:

BHASHA KA PRASHN QNA img5

उत्तर-

काश ! प्रकार- विस्मयादिबोधक अव्यय
वाक्य- काश! मैं भी उस प्रतियोगिता में भाग ले पाता।
बाद  प्रकार- कालवाचक अव्यय
वाक्य- भोजन के बाद हम टहलने गए।
बल्कि  प्रकार- समुच्चयबोधक अव्यय
वाक्य- वह केवल पढ़ाई ही नहीं करता, बल्कि खेलों में भी आगे है।
यदि…… तो  प्रकार- समुच्चयबोधक अव्यय
वाक्य- यदि तुम मेहनत करोगे, तो अवश्य सफल होगे।
वाह ! प्रकार- विस्मयादिबोधक अव्यय
वाक्य- वाह! तुमने बहुत सुंदर चित्र बनाया है।
अलावा  प्रकार- संबंधबोधक अव्यय
वाक्य- पढ़ाई के अलावा उसे संगीत भी पसंद है।
के लिए  प्रकार- संबंधबोधक अव्यय
वाक्य- यह उपहार प्रीति के लिए है।
क्योंकि  प्रकार- समुच्चयबोधक अव्यय
वाक्य- मैं घर पर रहा क्योंकि मौसम खराब था।
हाय  प्रकार- विस्मयादिबोधक अव्यय
वाक्य- हाय! मेरा पसंदीदा खिलौना टूट गया।
प्रायः  प्रकार- क्रियाविशेषण अव्यय
वाक्य- वह प्रायः सुबह जल्दी उठता है।
और  प्रकार- समुच्चयबोधक अव्यय
वाक्य- राम और श्याम अच्छे मित्र हैं।
पास  प्रकार- संबंधबोधक अव्यय
वाक्य- विद्यालय के पास एक बड़ा मैदान है।
इसलिए  प्रकार- समुच्चयबोधक अव्यय
वाक्य- मैंने तैयारी की थी, इसलिए परीक्षा अच्छी हुई।
तरफ  प्रकार- संबंधबोधक अव्यय
वाक्य- वह मेरी तरफ देख रहा था।
कारण  प्रकार- संबंधबोधक अव्यय
वाक्य- बीमारी के कारण वह विद्यालय नहीं आया।
अच्छा  प्रकार- विस्मयादिबोधक अव्यय
वाक्य- अच्छा! तो तुम कल आ रहे हो।
नहीं……. तो  प्रकार- समुच्चयबोधक अव्यय
वाक्य- जल्दी चलो, नहीं तो बस छूट जाएगी।

उपयोजित लेखन
‘जैसी करनी वैसी भरनी’ इस कहावत के आधार पर कहानी लिखिए।
उत्तर-
एक शहर में राकेश नाम का एक व्यापारी रहता था। वह बहुत लालची था और अधिक पैसे कमाने के लिए ग्राहकों को कम तौलकर सामान देता था। लोग उसकी दुकान पर भरोसा करके आते, लेकिन राकेश चुपके से तराजू में गड़बड़ी कर देता। उसे लगता था कि कोई उसकी चालाकी पकड़ नहीं पाएगा।
एक दिन एक बूढ़ी महिला उसकी दुकान पर अनाज लेने आई। राकेश ने उसे भी कम तौलकर सामान दे दिया। महिला ने घर जाकर जब अनाज तौला, तो उसे धोखे का पता चला। उसने राकेश को समझाया कि बेईमानी से कमाया गया धन कभी सुख नहीं देता, लेकिन राकेश ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।
कुछ महीनों बाद राकेश ने अपने बेटे की शादी के लिए बहुत सारा सामान खरीदा। जिस व्यापारी से उसने सामान लिया, उसने भी उसके साथ धोखा कर दिया और घटिया सामान दे दिया। शादी के समय जब सामान खराब निकला, तो राकेश को बहुत नुकसान हुआ और उसकी बदनामी भी हुई।
तब राकेश को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसे समझ में आ गया कि जैसे उसने दूसरों को ठगा, वैसे ही उसे भी ठगा गया। उसने उसी दिन से ईमानदारी से व्यापार करने का निश्चय किया और ग्राहकों का विश्वास वापस जीतने लगा।
सीख: मनुष्य को हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए, क्योंकि “जैसी करनी वैसी भरनी”
 

 

Maharashtra State Board Class 10 Hindi Lesson 5 भाषा का प्रश्न सार-आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)

निम्नलिखित गद्याँशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
1
भाषा मानव की सबसे रहस्यमय तथा मौलिक उपलब्धि है। वैसे बाह्य जगत भी ध्वनिसंकुल है तथा मानस जगत को भी अपने सुखद-दुखद जीवन स्थितियों को व्यक्त करने के लिए कंठ और स्वर प्राप्त हैं।
चेतन ही नहीं, जड़ प्रकृति के गत्यात्मक परिवर्तन भी ध्वनि द्वारा अपना परिचय देते हैं। वज्रपात से लेकर फूल के खिलने तक ध्वनि के जितने कठिन-कोमल आरोह-अवरोह हैं. निदाघ के हरहराते बवंडर से लेकर वासंती पुलक तक लय की विविधतामयी मूर्च्छना है, उसे कौन नहीं जानता। पशु-पक्षी जगत के सम-विषम स्वरों की संख्यातीत गीतिमालाओं से भी हम परिचित हैं परंतु ध्वनियों के इस संघात को हम भाषा की संज्ञा नहीं देते. क्योंकि इसमें वह अर्थवत्ता नहीं रहती जो हृदय और बुद्धि को समान रूप से तृप्ति तथा बोध दे सके।
मानव कंठ को परिवेश विशेष में जीवनाभिव्यक्ति के लिए जो ध्वनियाँ दावभाग में प्राप्त हुई थीं, उन्हें उसके अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा से सर्वथा नवीन रूपों में अवतरित किया। उसने अपनी जीवनाभिव्यक्ति ही नहीं. उसके विस्तृत विविध परिवेश को भी ऐसे शब्द संकेतों में परिवर्तित कर लिया, जो विशेष ध्वनि मात्र से किसी वस्तु को ही नहीं, अशरीरी भाव और बोध को भी रूपायित कर सके और तब उस वाणी के द्वारा उसने अपने रागात्मक संस्कार तथा बौदधिक उपलब्धियों को इस प्रकार संग्रथित किया कि वे प्रकृति तथा जीवन के क्षण-क्षण परिवर्तित रूपों को मानव चेतना में अक्षर निरंतरता देने को रहस्यमयी क्षमता पा सके।

1. पशु-पक्षियों की ध्वनियों को भाषा क्यों नहीं कहा जाता?
(क) क्योंकि वे बहुत धीमी होती हैं
(ख) क्योंकि उनमें लय नहीं होती
(ग) क्योंकि उनमें स्पष्ट अर्थ नहीं होता जो हृदय और बुद्धि को संतुष्टि दे सके
(घ) क्योंकि वे सुनाई नहीं देतीं
उत्तर– (ग) क्योंकि उनमें स्पष्ट अर्थ नहीं होता जो हृदय और बुद्धि को संतुष्टि दे सके

2. सम का विलोम शब्द क्या है?
(क) असम
(ख) विषम
(ग) निसम
(घ) कसम
उत्तर- (ख) विषम

3. बाह्य और मानस जगत में ध्वनियों का क्या महत्व है?
उत्तर– बाह्य जगत ध्वनियों से भरा हुआ है और मानस जगत भी अपने सुख-दुख को व्यक्त करने के लिए स्वर और कंठ का उपयोग करता है। ध्वनियाँ जीवन की स्थितियों को प्रकट करती हैं, चाहे वह प्रकृति के परिवर्तन हों या मनुष्य की भावनाएँ। इस प्रकार ध्वनि अभिव्यक्ति का मूल साधन है।

4 .भाषा और सामान्य ध्वनियों में क्या अंतर है?
उत्तर- सामान्य ध्वनियाँ केवल आवाज होती हैं, जैसे पशु-पक्षियों या प्रकृति की ध्वनियाँ, लेकिन भाषा में स्पष्ट अर्थ होता है। भाषा मन और बुद्धि दोनों को संतुष्टि देती है और विचारों तथा भावनाओं को समझने योग्य बनाती है। इसलिए अर्थपूर्ण होने के कारण भाषा साधारण ध्वनियों से श्रेष्ठ मानी जाती है।

5. मनुष्य ने भाषा को कैसे विकसित किया?
उत्तर- मनुष्य को जो ध्वनियाँ प्रकृति से मिली थीं, उन्हें उसने अपनी रचनात्मक प्रतिभा से नया रूप दिया और शब्दों में बदल दिया। इन शब्दों के माध्यम से उसने अपने विचार, भावनाएँ और अनुभव व्यक्त किए। इस प्रकार भाषा ने मानव चेतना को स्थिरता दी और जीवन के बदलते रूपों को सुरक्षित रखने की क्षमता प्रदान की।

2
मनुष्य की सर्जनात्मक अभिव्यक्ति में सबसे अधिक समर्थ और अक्षर भाषा ही होती है। वही मानव के आंतरिक तथा बाह्य जीवन के परिष्कार का आधार है, क्योंकि बौधिक क्रिया तथा मनोरागों की अभिव्यक्ति तथा उनके परस्पर संबंधों को संग्रथित करने में भाषा एक स्निग्ध किंतु अटूट सूत्र का कार्य करती है। भाषा में स्वर, अर्थ, रूप, भाव तथा बोध का ऐसा समन्वय रहता है, जो मानवीय अभिव्यक्ति को व्यष्टि से समष्टि तक विस्तार देने में समर्थ है।
मानव व्यक्तित्व के समान ही उसकी वाणी का निर्माण दोहरा होता है। जैसे मनुष्य का व्यक्तित्व बाह्य परिवेश के साथ उसके अंतर्जगत के घात-प्रतिघात अनुकूलता प्रतिकूलता समन्वय आदि विविध परिस्थितियों द्वारा निर्मित होता चलता है, उसी प्रकार उसकी भाषा असंख्य जटिल-सरल, अंतर-बाह्य प्रभावों में गल-ढलकर परिणति पाती है। कालांतर में हमारा समग्र अंतर्जगत, हमारी संपूर्ण बौद्धिक तथा रागात्मक सत्ता शब्द संकेतों से इस प्रकार संग्रोधित हो जाती है कि एक शब्द संकेत अनेक अप्रस्तुत मनोराग जगा देने की शक्ति पा जाता है।
भाषा सीखना तथा भाषा जीना एक-दूसरे से भिन्न हैं तो आश्चर्य की बात नहीं। प्रत्येक भाषा अपने ज्ञान और भाव की समृद्धि के कारण ग्रहण करने योग्य है. परंतु समग्र बौद्धिक तथा रागात्मक सत्ता के साथ जीना अपनी सांस्कृतिक भाषा के संदर्भ में ही सत्य है। कारण स्पष्ट हैं। ध्वनि का ज्ञान आत्मानुभव से तथा अर्थ का बुद्धि से प्राप्त होता है। शैशव में शब्द हमारे लिए ध्वनि संकेत मात्र होते हैं। यदि हम ध्वनि पहचानने से पहले उसके अर्थ से परिचित हो जायें तो हम संभवतः बोलना न सीख सकें।

1. भाषा मानवीय अभिव्यक्ति को कहाँ तक विस्तार देने में समर्थ है?
(क) परिवार तक
(ख) समाज तक
(ग) व्यष्टि से समष्टि तक
(घ) विद्यालय तक
उत्तर– (ग) व्यष्टि से समष्टि तक

2. भाषा सीखना और भाषा जीना क्यों अलग माने गए हैं?
(क) क्योंकि हर भाषा कठिन होती है
(ख) क्योंकि सांस्कृतिक भाषा से ही मन और भावनाओं का सच्चा संबंध बनता है
(ग) क्योंकि भाषा का कोई महत्व नहीं
(घ) क्योंकि केवल लिखना जरूरी है
उत्तर- (ख) क्योंकि सांस्कृतिक भाषा से ही मन और भावनाओं का सच्चा संबंध बनता है

3. ‘घात’ का विपरीत है?
(क) प्रतिघात
(ख) घातक
(ग) निघात
(घ) सघात
उत्तर– प्रतिघात

4. भाषा मानव जीवन के परिष्कार का आधार क्यों है?
उत्तर- भाषा विचारों और भावनाओं को व्यक्त कर मनुष्य के आंतरिक और बाह्य जीवन को विकसित करती है।

5. शैशव में शब्द हमारे लिए क्या होते हैं?
उत्तर– बचपन में शब्द केवल ध्वनि संकेत होते हैं, जिनका अर्थ हम धीरे-धीरे समझते हैं।

3
अतः यह कहना सत्य है कि वाणी आत्मानुभूति की मौलिक अभिव्यक्ति है. जो समष्टिभाव से अपने विस्तार के लिए भाषा का रूप धारण करती है। इसीलिए पाणिनि ने कहा है:- “आत्मा बुद्ध्या समेत्वार्थान् मनोयुक्त विवक्षया।” अर्थात बुद्धि के द्वारा सब अर्थों का आकलन करके मन में बोलने की इच्छा उत्पन्न करती है।
मानव व्यक्तित्व जैसे प्राकृतिक परिवेश से प्रभावित होता है, उसी प्रकार उसकी भाषा भी अपनी धरती से प्रभाव ग्रहण करती है और यह प्रभाव भिन्नता का कारण हो जाता है। भाषा संबंधी बाह्य भिन्नताएं पर्वत की ऊँची-नीची अनमिल श्रेणियों न होकर एक ही सागरतल पर बनने वाली लहरों से समानता रखती हैं। उनकी भिन्नता समष्टि की गति की निरंतरता बनाए रखने का लक्ष्य रखती है, उसे खंडित करने का नहीं।
प्रत्येक भाषा ऐसी त्रिवेणी है, जिसकी एक धारा व्यावहारिक जीवन के आदान-प्रदान सहज करती है. दूसरी मानव की बुद्धि और हृदय की समृद्धि को अन्य मानवों के बुद्धि तथा हृदय के लिए संप्रेषणशील बनाती है और तीसरी अंत:सलिला के समान किसी भेदातीत स्थिति की संयोजिका है।
हमारे विशाल देश की रूपात्मक विविधता उसकी सांस्कृतिक एकता की पूरक रही है, उसकी विरोधिनी नहीं। इसी से विशेष जीवन पद्धति चिंतन, रागात्मक दृष्टि, सौंदर्य बोध आदि के संबंध में तत्त्वगत एकता ने देश के व्यक्तित्व को इतने विघटनधर्मा विवर्तनों में भी संश्लिष्ट रखा है।

1. वाणी किसकी मौलिक अभिव्यक्ति मानी गई है?
(क) बुद्धि की
(ख) आत्मानुभूति की
(ग) समाज की
(घ) प्रकृति की
उत्तर– (ख) आत्मानुभूति की

2. पाणिनि के अनुसार बोलने की इच्छा कैसे उत्पन्न होती है?
(क) केवल सुनने से
(ख) अभ्यास से
(ग) बुद्धि द्वारा अर्थों का आकलन करने से
(घ) दूसरों की नकल से
उत्तर– (ग) बुद्धि द्वारा अर्थों का आकलन करने से

3. प्रत्येक भाषा को किसके समान बताया गया है?
(क) नदी
(ख) वृक्ष
(ग) पर्वत
(घ) त्रिवेणी
उत्तर- (घ) त्रिवेणी

4. भाषा में भिन्नता का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर- भाषा अपने प्राकृतिक परिवेश और धरती से प्रभाव ग्रहण करती है, इसलिए उसमें भिन्नता दिखाई देती है।

5. भारत की विविधता को किस रूप में देखा गया है?
उत्तर– भारत की विविधता उसकी सांस्कृतिक एकता की पूरक मानी गई है, विरोधी नहीं।

4
धरती का कोई खंड, नदी, पर्वत, समतल आदि का संघात कहा जा सकता है। मनुष्यों की आकस्मिक रूप से एकत्र भीड़ मानव समूह की संज्ञा पा सकती है। राष्ट्र की गरिमा पाने के लिए भूमिखंड विशेष की ही नहीं, एक सांस्कृतिक दायभाग के अधिकारी और प्रबुद्ध मानव समाज की भी आवश्यकता होती है. जो अपने अनुराग की दीप्ति से उस भूमिखंड के हर कण
को इस प्रकार उद्भासित कर दे कि वह एक चिर नवीन सौंदर्य में जीवित और लयवान हो सके।
कहने की आवश्यकता नहीं कि हिमकिरीटिनी भारत भूमि ऐसी ही राष्ट्र प्रतिमा है। ऐसे महादेश में अनेक भाषाओं की स्थिति स्वाभाविक है, किंतु उनमें से प्रत्येक भाषा एक वीणा के ऐसे सधे तार के समान रहकर ही सार्थकता पाती है. जो रागिनी की संपूर्णता के लिए ही अपनी झंकार में अन्य तारों से भिन्न है।
सभी भारतीय भाषाओं ने अपनी चिंतना तथा भावना की उपलब्धियों से राष्ट्र जीवन को समृद्ध किया है। उनकी देशगत भिन्नता, उनकी तत्त्वगत एकता से प्राणवती होने के कारण महार्थ है।

1. किसी स्थान को राष्ट्र बनने के लिए किसकी आवश्यकता होती है?
(क) केवल बड़ी जनसंख्या की
(ख) केवल प्राकृतिक संसाधनों की
(ग) सांस्कृतिक अधिकार वाले जागरूक समाज की
(घ) केवल नदियों और पर्वतों की
उत्तर- (ग) सांस्कृतिक अधिकार वाले जागरूक समाज की

2. लेखिका ने भाषाओं की तुलना किससे की है?
(क) नदी की धाराओं से
(ख) वीणा के सधे तारों से
(ग) पर्वतों से
(घ) दीपक से
उत्तर- (ख) वीणा के सधे तारों से

3. भारतीय भाषाओं की भिन्नता को क्यों महत्वपूर्ण माना गया है?
(क) क्योंकि उनकी मूल एकता राष्ट्र जीवन को समृद्ध बनाती है
(ख) क्योंकि वे राष्ट्र को विभाजित करती हैं
(ग) क्योंकि वे एक-दूसरे से अलग हैं
(घ) क्योंकि वे कठिन हैं
उत्तर- (क) क्योंकि उनकी मूल एकता राष्ट्र जीवन को समृद्ध बनाती है

4. राष्ट्र की गरिमा किनसे बनती है?
उत्तर– राष्ट्र की गरिमा केवल भूमि से नहीं, बल्कि संस्कारी और जागरूक समाज से बनती है।

5. भारतीय भाषाओं का राष्ट्र जीवन में क्या योगदान है?
उत्तर– भारतीय भाषाओं ने अपने विचारों और भावनाओं से राष्ट्र जीवन को समृद्ध बनाया है।
 

 

Maharashtra State Board Class 10 Hindi Lesson 5 भाषा का प्रश्न बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1.भाषा को मानव की कैसी उपलब्धि कहा गया है?
(क) साधारण
(ख) रहस्यमय और मौलिक
(ग) अनावश्यक
(घ) क्षणिक
उत्तर- (ख) रहस्यमय और मौलिक

2. बाह्य जगत किससे भरा हुआ बताया गया है?
(क) प्रकाश से
(ख) रंगों से
(ग) ध्वनियों से
(घ) विचारों से
उत्तर– (ग) ध्वनियों से

3. पशु-पक्षियों की ध्वनियों को भाषा क्यों नहीं कहा जाता?
(क) उनमें अर्थ नहीं होता
(ख) वे सुनाई नहीं देतीं
(ग) वे बहुत तेज होती हैं
(घ) वे कृत्रिम होती हैं
उत्तर– (क) उनमें अर्थ नहीं होता

4. मनुष्य ने ध्वनियों को किसमें परिवर्तित किया?
(क) चित्रों में
(ख) संकेतों में
(ग) रंगों में
(घ) शब्दों में
उत्तर– (घ) शब्दों में

5. भाषा मानव जीवन के किसका आधार है?
(क) केवल बाहरी जीवन का
(ख) आंतरिक और बाह्य जीवन के परिष्कार का
(ग) केवल शिक्षा का
(घ) केवल मनोरंजन का
उत्तर- (ख) आंतरिक और बाह्य जीवन के परिष्कार का

6. भाषा किस प्रकार का सूत्र है?
(क) स्निग्ध किंतु अटूट
(ख) अस्थायी
(ग) कमजोर
(घ) टूटने वाला
उत्तर– (क) स्निग्ध किंतु अटूट

7. भाषा की पहली धारा क्या करती है?
(क) मनोरंजन करती है
(ख) व्यावहारिक आदान-प्रदान को सहज बनाती है
(ग) केवल शिक्षा देती है
(घ) विवाद बढ़ाती है
उत्तर– (ख) व्यावहारिक आदान-प्रदान को सहज बनाती है

8. ‘मूल्यवान’ शब्द में कौन-सा प्रत्यय है?
(क) वान
(ख) आन
(ग) मूल्य
(घ) यवान
उत्तर- (क) वान

9. प्रत्येक भाषा को किसके समान बताया गया है?
(क) झरना
(ख) पर्वत
(ग) दीपक
(घ) त्रिवेणी
उत्तर– (घ) त्रिवेणी

10. भाषा की भिन्नताओं की तुलना किससे की गई है?
(क) पर्वतों से
(ख) लहरों से
(ग) वृक्षों से
(घ) बादलों से
उत्तर- (ख) लहरों से

11. भाषा में भिन्नता का कारण क्या है?
(क) शिक्षा
(ख) मौसम
(ग) खेल
(घ) प्राकृतिक परिवेश
उत्तर- (घ) प्राकृतिक परिवेश

12. पाणिनि के अनुसार बोलने की इच्छा कैसे उत्पन्न होती है?
(क) बुद्धि द्वारा अर्थ समझने से
(ख) अभ्यास से
(ग) सुनने से
(घ) देखने से
उत्तर– (क) बुद्धि द्वारा अर्थ समझने से

13. वाणी किसकी मौलिक अभिव्यक्ति है?
(क) समाज की
(ख) आत्मानुभूति की
(ग) प्रकृति की
(घ) संस्कृति की
उत्तर– (ख) आत्मानुभूति की

14. ध्वनि का ज्ञान किससे प्राप्त होता है?
(क) पुस्तकों से
(ख) कल्पना से
(ग) दूसरों से
(घ) आत्मानुभव से
उत्तर- (घ) आत्मानुभव से

15. किस भाषा के साथ जीना सत्य माना गया है?
(क) विदेशी भाषा
(ख) सांस्कृतिक भाषा
(ग) कठिन भाषा
(घ) प्राचीन भाषा
उत्तर- (ख) सांस्कृतिक भाषा

16. कोयले को हीरा बनाने का कार्य कहाँ होता है?
(क) आकाश में
(ख) नदी में
(ग) धरती की गहराई में
(घ) पर्वत पर
उत्तर- (ग) धरती की गहराई में

17. भाषा मानवीय अभिव्यक्ति को कहाँ तक विस्तार देती है?
(क) व्यक्ति तक
(ख) परिवार तक
(ग) व्यष्टि से समष्टि तक
(घ) विद्यालय तक
उत्तर- (ग) व्यष्टि से समष्टि तक

18. आत्मानुभूति का संधि विच्छेद है-
(क) आत्म + अनुभूति
(ख) आत्मा + नुभूति
(ग) आत्मा + अनुभूति
(घ) आत्मा + भूति
उत्तर- (ग) आत्मा + अनुभूति

19. स्वाति की बूंद से मोती कौन बनाता है?
(क) मछली
(ख) सीप
(ग) कछुआ
(घ) शंख
उत्तर- (ख) सीप

20. प्रस्तुत पाठ ‘भाषा का प्रश्न’ किसके द्वारा लिखित है?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) महाश्वेता देवी
(ग) मन्नू भंडारी
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर– (घ) महादेवी वर्मा
 

 

Maharashtra State Board Class 10 Hindi भाषा का प्रश्न प्रश्न और उत्तर (Extra Question Answers)

1.भाषा को मानव की मौलिक उपलब्धि क्यों कहा गया है?
उत्तर– भाषा मानव की सर्जनात्मक प्रतिभा का परिणाम है। यह केवल ध्वनि नहीं बल्कि अर्थ, भाव और बोध का माध्यम है। इसके द्वारा मनुष्य अपने सुख-दुख, विचार और अनुभव व्यक्त करता है तथा समाज से जुड़कर ज्ञान का आदान-प्रदान करता है।

2. मनुष्य ने ध्वनियों को किस प्रकार भाषा का रूप दिया?
उत्तर- मनुष्य ने अपनी सर्जनात्मक क्षमता से साधारण ध्वनियों को शब्द संकेतों में बदल दिया। इन शब्दों के माध्यम से वह वस्तुओं के साथ-साथ अमूर्त भावों और विचारों को भी व्यक्त करने लगा, जिससे भाषा का विकास संभव हुआ।

3. भाषा मानव जीवन के परिष्कार का आधार कैसे है?
उत्तर– भाषा बौद्धिक क्रियाओं और भावनाओं की अभिव्यक्ति का साधन है। यह मनुष्य को सोचने, समझने और दूसरों से जुड़ने में सहायता देती है। इसी कारण भाषा आंतरिक और बाह्य जीवन दोनों को परिष्कृत करती है।

4. भाषा में स्वर, अर्थ, रूप और भाव का समन्वय क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर- इन तत्वों के समन्वय से भाषा प्रभावी बनती है। इससे व्यक्ति की अभिव्यक्ति सीमित न रहकर समाज तक पहुँचती है। यह समन्वय ही भाषा को व्यष्टि से समष्टि तक विस्तार देने की क्षमता प्रदान करता है।

5. भाषा सीखना और भाषा जीना अलग क्यों है?
उत्तर– भाषा सीखना केवल उसके शब्द और व्याकरण जानना है, जबकि भाषा जीना उसे अपने जीवन, संस्कृति और भावनाओं से जोड़ना है। वास्तविक अभिव्यक्ति तभी संभव है जब व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक भाषा से आत्मीय संबंध बनाए।

6. पाणिनि के कथन का आशय क्या है?
उत्तर- पाणिनि के अनुसार बुद्धि पहले अर्थ का विचार करती है और फिर मन में बोलने की इच्छा उत्पन्न होती है। अर्थात भाषा विचार और चेतना की प्रक्रिया का परिणाम है, जो आत्मानुभूति को अभिव्यक्ति देती है।

7. भाषा को ‘संचारिणी दीपशिखा’ क्यों कहा गया है?
उत्तर- भाषा ज्ञान और चेतना का प्रकाश फैलाती है। यह विचारों को पीढ़ी दर पीढ़ी पहुँचाकर समाज को जागरूक बनाती है, इसलिए इसे मार्गदर्शक दीपशिखा की उपमा दी गई है।

8. भाषा को त्रिवेणी क्यों कहा गया है?
उत्तर- क्योंकि भाषा की तीन धाराएँ हैं- पहली दैनिक जीवन के व्यवहार को सरल बनाती है, दूसरी विचार और भाव दूसरों तक पहुँचाती है, और तीसरी मनुष्यों को गहरे आध्यात्मिक स्तर पर जोड़ती है।

9. भाषा पर प्राकृतिक परिवेश का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर– भाषा अपने क्षेत्र की संस्कृति, प्रकृति और जीवन शैली से प्रभावित होती है। इसी कारण विभिन्न क्षेत्रों की भाषाओं में भिन्नता दिखाई देती है, जो उनके स्थानीय अनुभवों और परंपराओं का प्रतिबिंब होती है।

10. भारत की विविधता और एकता में भाषा की क्या भूमिका है?
उत्तर- भारत में अनेक भाषाएँ होने के बावजूद उनकी मूल भावना एक है। यह विविधता सांस्कृतिक एकता को मजबूत करती है और राष्ट्र को संगठित बनाए रखती है।