Maharashtra State Board of Secondary and Higher Secondary Education Class 10 Hindi Chapter 3 Naam Charcha (नाम चर्चा) Question Answers (Important) 

 

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Maharashtra State Board Class 10 Chapter 3 Naam Charcha Textbook Questions

 

(१) तालिका पूर्ण कीजिए:
व्यक्ति और उनके बच्चे के लिए सुझाए गए नाम

व्यक्ति                                   नाम

उत्तर – 

व्यक्ति                                   नाम
कश्मीरी व्यक्ति –  गुलाबो 
पंजाबी व्यक्ति –  वेलकम, फेयरवेल 
उत्तर भारतीय व्यक्ति – कोलाहल, शोरमचावन
लेखक के मित्र का मित्र – दुर्ललित, प्यारुमल सताऊमल

 

(२) कृति पूर्ण कीजिए:
१. लेखक द्वारा नामों का वर्गीकरण

Naam Charcha QNA img1

उत्तर – 
1 – नेताओं के उपयुक्त नाम
2 – एक्टरों के उपयुक्त नाम

२. नाम को लेकर किए गए आग्रह

Naam Charcha QNA img1

उत्तर – 
1 – संतान के सौंदर्य, स्वभाव के अनुरूप
2 – व्यवसाय के अनुसार

(३) कारण लिखिए:
१. चौथे मकान में रहने वाले पड़ोसी परेशान थे।
उत्तर – क्योंकि उन्हें अपने पुत्र के स्वभाव के अनुकूल कोई नाम नहीं मिल रहा था।

२. लेखक को बुद्धिमान मास्टर साहब कहा गया
उत्तर – क्योंकि उन्होंने बच्चे के स्वभाव व् आदतों प्रदर्शित करने वाले नाम ‘शोरमचावन’ सुझाया।

३. इससे प्रदेश के लोगों की लेखक से अधिक नहीं निभती :
उत्तर – क्योंकि दूसरे दूसरे प्रदेशों के लोग लेखक के पंजाबी अक्खड़पन को कम ही सहते थे।

४. लेखक की बुद्धि चक्कर खा गई।
उत्तर – क्योंकि लेखक ने अपने जिस पंजाबी पड़ोसी को उनके बेटे के लिए वेलकम नाम का सुझाव दिया था, उन्होंने अपनी बिल्डिंग के लिए भी उसी नाम को रखने का निश्चय कर लिया। और अपने दूसरे पुत्र के लिए फेरवल नाम भी पसंद कर लिया।

(४) दिए गए शब्दों में से उपसर्ग / प्रत्यय, मूल शब्द अलग करके लिखिए। इन्हीं शब्दों से उपसर्ग / प्रत्यययुक्त शब्द बनाइए तथा वाक्य में प्रयोग करके अपनी कॉपी में लिखिए:
अतिरिक्त, दृष्टिहीन, प्रतिवर्ष, शिष्टता, अमूल्य, प्रभाती, असंतुष्ट, व्यावसायिक

शब्द मूलशब्द उपसर्ग प्रत्यय उपसर्ग और प्रत्यययुक्त शब्द
सुरुचि  रुचि  सु ___ सुरुचिपूर्ण
राष्ट्रीय राष्ट्र ___ ईय अंतरराष्ट्रीय

उत्तर –

शब्द मूलशब्द उपसर्ग प्रत्यय उपसर्ग और प्रत्यययुक्त शब्द
सुरुचि  रुचि  सु ___ सुरुचिपूर्ण
राष्ट्रीय राष्ट्र ___ ईय अंतरराष्ट्रीय
अतिरिक्त,  रिक्त अति —– अतिरिक्तता
दृष्टिहीन,  दृष्टि ——- हीन दृष्टिहीन 
प्रतिवर्ष,  वर्ष प्रति ——- प्रतिवार्षिक 
शिष्टता,  शिष्ट —— ता अशिष्टता 
अमूल्य,  मूल्य —– अमूल्य 
प्रभाती,  प्रभात —— ई  सुप्रभाति 
असंतुष्ट,  संतुष्ट —— असंतुष्टि 
व्यावसायिक व्यावसाय —— इक  अव्यावसायिक

वाक्य में प्रयोग –
सुरुचिपूर्ण – साड़ी में उनका सुरुचिपूर्ण अंदाज़ सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय – दिल्ली में स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है।
अतिरिक्तता – आजकल बहुत सी कंपनियों को अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए अतिरिक्तता (विशेष बदलाव) दिखाने की आवश्यकता होती है।
दृष्टिहीन – समाज को दृष्टिहीन लोगों के प्रति संवेदनशील और सहायक होना चाहिए।
प्रतिवार्षिक – हमारे स्कूल का प्रतिवार्षिक खेल दिवस अगले महीने आयोजित किया जाएगा।
अशिष्टता – बड़ों के सामने चिल्लाना अशिष्टता की निशानी है।
अमूल्य – हमें अपने जीवन का अमूल्य समय फालतू के कामों में बर्बाद नहीं करना चाहिए।
सुप्रभाति – सुप्रभाति सुनने से ख़ुशी मिलती है।
असंतुष्टि – वह अस्पताल की खराब सेवा से असंतुष्ट थी।
अव्यावसायिक – मीटिंग के दौरान फोन पर जोर-जोर से बात करना बहुत ही अव्यावसायिक व्यवहार है।

अभिव्यक्ति
‘व्यक्ति की पहचान नाम से नहीं, गुणों से होती है’ इस विचार को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘व्यक्ति की पहचान नाम से नहीं, गुणों से होती है’ यह कथन सत्य है क्योंकि समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा इंसान के नाम, रूप या कुल से नहीं, बल्कि उसके कर्म, चरित्र और व्यवहार (गुणों) से निर्धारित होती है। व्यक्ति समाज में अपने सुंदर नाम से नहीं , वह समाज में अपने कर्मों से जाना जाता है। किसी का नाम ‘धनपति’ होने से वह अमीर या ‘हरिश्चंद्र’ होने से सत्यवादी नहीं हो जाता। असली पहचान उसके आचरण से तय होती है। जैसे फूलों की पहचान उनके रंग-रूप से ज्यादा उनकी सुगंध से होती है, वैसे ही मनुष्य के व्यक्तित्व की असली परीक्षा उसके गुण हैं, नाम नहीं।

भाषा बिंदु
(१) कोष्ठक की सूचना के अनुसार निम्न वाक्यों का काल परिवर्तन कीजिए:
1. आवाज अवरुद्ध होती जा रही थी। (सामान्य भूतकाल)
उत्तर – आवाज अवरुद्ध हो गई।

2. मेम साहब को परदे पसंद आए थे। (पूर्ण वर्तमानकाल)
उत्तर – मेम साहब को परदे पसंद आए हैं।

3. मानव व्यक्तित्व के समान ही उसकी वाणी का निर्माण दोहरा होता है। (सामान्य भविष्यकाल)
उत्तर – मानव व्यक्तित्व के समान ही उसकी वाणी का निर्माण दोहरा होगा।

4. एक साथ काम पर आएँगे और एक साथ वापस घर लौटेंगे। (पूर्ण भविष्यकाल)
उत्तर – एक साथ काम पर आ चुके होंगे और एक साथ वापस घर लौटे चुके होंगे।

5. आप इन दिनों फ्लाबेर के पत्र पढ़ रहे हैं। (पूर्ण भूतकाल )
उत्तर – आप इन दिनों फ्लाबेर के पत्र पढ़ते थे।

6. बस्ती के लिए यह तूफान प्रलय बनकर आया था। (अपूर्ण भूतकाल )
उत्तर – बस्ती के लिए यह तूफान प्रलय बनकर आ रहा था।

7. मैं घर में रहकर तुम्हारे सब कामों में बाधा डालूंगी। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
उत्तर – मैं घर में रहकर तुम्हारे सब कामों में बाधा डाल रही हूँ।

8. मैं एक चीज पर लिखना शुरू करती हूँ। (अपूर्ण भविष्यकाल)
उत्तर – मैं एक चीज पर लिखना शुरू कर रही हूँगी।

(२) आकृति में दिए गए वाक्य का काल पहचानकर निर्देशानुसार काल परिवर्तन कीजिए:

बेटे के दफ्तर का बड़ा साहब घर आ रहा था।-  _________________काल

सामान्य वर्तमानकाल  ………………………….
सामान्य भविष्यकाल  ………………………….
पूर्ण वर्तमानकाल ………………………….
सामान्य भूतकाल ………………………….
अपूर्ण वर्तमानकाल ………………………….
पूर्ण भूतकाल ………………………….
पूर्ण भूतकाल ………………………….

उत्तर
बेटे के दफ्तर का बड़ा साहब घर आ रहा था।  अपूर्व भूतकाल
सामान्य वर्तमानकाल – बेटे के दफ्तर का बड़ा साहब घर आता है।
सामान्य भविष्यकाल – बेटे के दफ्तर का बड़ा साहब घर आएगा।
पूर्ण भविष्यकाल – बेटे के दफ्तर का बड़ा साहब घर आ चूका होगा।
पूर्ण वर्तमानकाल – बेटे के दफ्तर का बड़ा साहब घर आया है।
सामान्य भूतकाल – बेटे के दफ्तर का बड़ा साहब घर आया।
अपूर्ण वर्तमानकाल – बेटे के दफ्तर का बड़ा साहब घर आ रहा है।
पूर्ण भूतकाल – बेटे के दफ्तर का बड़ा साहब घर आया था।
अपूर्ण भविष्यकाल – बेटे के दफ्तर का बड़ा साहब घर आ रहा होगा।

उपयोजित लेखन
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर उसपर आधारित ऐसे पाँच प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों :
महर्षि कर्वे १०५ वर्ष तक जीवित रहे। जब देश भर में उनकी जन्म शताब्दी मनाई गई तो मुंबई की एक सभा में नेहरू जी ने कहा था, “आपके जीवन से प्रेरणा और स्फूर्ति प्राप्त होती है। आपका जीवन इस बात की बेमिसाल कहानी है कि एक मानव क्या कर सकता है। मैं आपको बधाई देने नहीं आया वरन आपसे आशीर्वाद लेने आया हूँ।”
भारतरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था, “डॉ. कर्वे का जीवन इस बात का ज्वलंत प्रमाण है कि दृढ़ धारणावाला साधारण व्यक्ति भी सर्वथा विपरीत परिस्थितियों में भी महान कार्य कर सकता है।”
अण्णा साहब उन इक्के-दुक्के व्यक्तियों में से थे जो एक बार निश्चय कर लेने पर असाध्य कार्य को सिद्ध करने में लग जाते और उसे पूरा करके दिखा देते। भारत सदा से महान पुरुष रत्नों की खान रहा है और डॉ. कर्वे उन समाज सुधारकों में से थे जिन्होंने किसी सिद्धांत को पहले अपने जीवन में उतारकर उसे क्रियात्मक रूप दिया। हम प्रायः भाग्य को कोसा करते हैं और धन की कमी की शिकायत किया करते हैं परंतु यह उस व्यक्ति की कहानी है जो गरीब घर में पैदा हुआ, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर स्वयं पढ़ाई की और इस अकेले व्यक्ति ने ‘भारतीय महिला विद्यापीठ’ की स्थापना की।
१. ________________________________________________
२. ________________________________________________
३. ________________________________________________
४. ________________________________________________
५. ________________________________________________
उत्तर
१. महर्षि कर्वे कितने वर्ष तक जीवित रहे?
२. महर्षि कर्वे के विषय में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने क्या कहा था ?
३. भारत सदा से किसकी खान रहा है ?
४. डॉ. कर्वे को किन समाज सुधारकों में गिना जाता है ?
५. डॉ. कर्वे ने किस विद्यापीठ की स्थापना की ?

लेखनीय –
आपके घर में होने वाले नामकरण कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र बनाइए।
उत्तर –

//श्री गणेशाय नमः//
स्नेह निमंत्रण।
परम पिता परमेश्वर की असीम कृपा से हमारे घर में नन्हे मेहमान (पुत्री) का आगमन हुआ है। इस शुभ अवसर पर हम अपनी लाड़ली पुत्री के नामकरण संस्कार और आशीर्वाद समारोह का आयोजन कर रहे हैं।
आपकी उपस्थिति हमारे परिवार के लिए अत्यंत हर्ष का विषय होगी। कृपया समारोह में पधारें और नवजात शिशु को अपना आशीर्वाद प्रदान करें।
कार्यक्रम विवरण –
दिनांक – शनिवार, 21 फरवरी 2026
समय – दोपहर 12:00 बजे से (पूजा के बाद दोपहर का भोजन/जलपान)
स्थान – चौहान निवास, बैंक कॉलोनी, मोहाली (चंडीगढ़)
दर्शनाभिलाषी –
समस्त चौहान परिवार
[8965876054]

 

Maharashtra State Board Class 10 Hindi Lesson 3 नाम चर्चा सार-आधारित प्रश्न (Extract Based Questions)

निम्नलिखित गद्याँशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1 –
कहते हैं, हिंदी के कथा साहित्य में गतिरोध आ गया है। ऐसे संकट हिंदी साहित्य में पहले भी आए हैं और अकसर आते रहते हैं। हिंदी में आते हैं तो अन्य भाषाओं के साहित्य में भी आते होंगे पर फिर भी सारी दुनिया का काम चलता रहता है। यह कोई ऐसी कठिनाई नहीं है जिसका कोई समाधान न हो।
इस गतिरोध से एक भयंकर समस्या दूसरे क्षेत्र में पैदा हो गई है। सारे हिंदी भाषी प्रदेशों में नाम को लेकर गतिरोध आ गया है। कहीं किसी के घर में कोई संतान हुई और मुसीबत उठ खड़ी हुई। कितनी भयंकर समस्या है कि बच्चे का नाम क्या रखें ?
इस कर्तव्य को पूरा करने में मुझे कोई परेशानी नहीं थी पर हिंदी कथा साहित्य के इस गतिरोध ने मेरी गति भी अवरुद्ध कर दी है। पहले यह होता था कि किसी ने नाम पूछा और हमने कोई भी पत्रिका उठा ली, जिस किसी कहानी की नायिका या नायक का नाम दिखा, वही टिका दिया। लोग होते भी इतने सरल थे कि झट वह नाम पसंद कर लेते थे। अब हिंदी का कथा लेखक अपनी कहानियों में नाम रखने से कतराने लगा है। पचासों कहानियाँ पढ़ जाओ तो कहीं एकाध नाम मिलता है; नहीं तो लोग ‘यह’, ‘वह’ से काम चला लेते हैं।

प्रश्न 1 – हिंदी के किस साहित्य में गतिरोध आ गया है?
(क) कथा
(ख) कहानी
(ग) गद्य
(घ) पद्य
उत्तर – (क) कथा

प्रश्न 2 – सारे हिंदी भाषी प्रदेशों में —————- को लेकर गतिरोध आ गया है।
(क) भाषा
(ख) अंग्रेजी
(ग) काम
(घ) नाम
उत्तर – (घ) नाम

प्रश्न 3 – किसी के घर में कोई संतान होने पर क्या मुसीबत उठ खड़ी होती थी ?
(क) कि बच्चे के भविष्य में क्या है
(ख) कि बच्चे के भाग्य में क्या
(ग) कि बच्चे का नाम क्या रखें
(घ) कि बच्चे को क्या सीख दे
उत्तर – (ग) कि बच्चे का नाम क्या रखें

प्रश्न 4 – पहले लेखक कैसे नाम ढूँढ लेता था ?
(क) पत्रिका में से किसी कहानी की नायिका या नायक का नाम
(ख) पत्रिका में से किसी कहानी का नाम
(ग) पत्रिका में से किसी नायिका का नाम
(घ) पत्रिका में से किसी कहानी के नायक का नाम
उत्तर – (क) पत्रिका में से किसी कहानी की नायिका या नायक का नाम

प्रश्न 5 – अब हिंदी का कथा लेखक अपनी कहानियों में ———— रखने से कतराने लगा है।
(क) काम
(ख) नाम
(ग) नायक
(घ) नायिका
उत्तर – (ख) नाम

2 –
थोड़ी-सी छानबीन से पता चला कि कोलकाता और बनारस में बहुत दूरी नहीं है। बस, कोलकाता से बाँग्ला कहानियाँ बनारस में आ जाती हैं। मैंने हजारों-लाखों बाँग्ला नामों को पीट-पीटकर खड़ा किया और खड़ी बोली के नाम बना लिए।
इस बार प्रादेशिकता आड़े आई। मेरे भाई-बंधु, मित्र तथा अधिकांशतः पड़ोसी पंजाबी हैं। दूसरे प्रदेशों के लोग मेरा पंजाबी अक्खड़पन कम ही सहते हैं, इसलिए अधिक निभती नहीं। एक कश्मीरी मेरे पास आए। कश्मीर बहुत सुंदर प्रदेश है। फिर उनकी बिटिया कश्मीर के सौंदर्य से भी अधिक प्यारी थी। उस बच्ची का नाम कुछ ऐसा ही होना चाहिए था, जिसमें कश्मीर का सारा प्राकृतिक सौंदर्य साकार हो सके। मैंने क्षमता भर परिश्रम किया किंतु किसी भी नाम से उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाया।
अंततः उन्होंने ही कहा कि यदि मैं कोई नया नाम नहीं दे सकता तो उनके सोचे हुए नाम का हिंदी में कोई अच्छा-सा पर्याय दे दूँ, जो कि उस बच्ची का नाम रखा जा सके।
मैंने उनकी बात मान ली, इसमें मुझे कोई परेशानी नहीं थी। मैंने उनका सोचा हुआ नाम पूछा।
“रोजलीना।” वे बोले, “इसमें कश्मीर का सौंदर्य, कश्मीर के गुलाब का सौंदर्य, सब कुछ आ जाता है। वैसे पंडित नेहरू भी कश्मीरी थे।” वे अत्यंत भावुक हो उठे- “रोजलीना शब्द से ही हमारी बेबी का चेहरा आँखों के सामने घिर जाता है।”
“नाम तो सुंदर है !” मैंने स्वीकार किया।

प्रश्न 1 – थोड़ी-सी छानबीन से लेखक को क्या पता चला ?
(क) कोलकाता और बनारस में बहुत है
(ख) कोलकाता और बनारस में बहुत दूरी नहीं है
(ग) कोलकाता और बनारस में बहुत कम दूरी है
(घ) कोलकाता और बनारस में बहुत ज्यादा दूरी है
उत्तर – (ख) कोलकाता और बनारस में बहुत दूरी नहीं है

प्रश्न 2 – लेखक ने हजारों-लाखों बाँग्ला नामों को पीट-पीटकर खड़ा किया और —————— के नाम बना लिए।
(क) खड़ी बोली
(ख) पहाड़ी बोली
(ग) भोजपुरी
(घ) बँगला
उत्तर – (क) खड़ी बोली

प्रश्न 3 – लेखक के भाई-बंधु, मित्र तथा अधिकांशतः पड़ोसी ————————- थे।
(क) हिमाचली
(ख) पंजाबी
(ग) हरयाणवी
(घ) गुजराती
उत्तर – (ख) पंजाबी

प्रश्न 4 – कश्मीरी जन अपनी बेटी का क्या नाम रखना चाहता था ?
(क) गुलाबो
(ख) रोजलीना
(ग) रोजीना
(घ) लीना
उत्तर – (ख) रोजलीना

प्रश्न 5 – कश्मीरी जन ने “रोजलीना” का क्या अर्थ बताया ?
(क) कश्मीर का सौंदर्य
(ख) कश्मीर के गुलाब का सौंदर्य
(ग) केवल (ख)
(घ) (क) और (ख) दोनों
उत्तर – (घ) (क) और (ख) दोनों

3 –
“बस, कठिनाई इतनी है कि नाम अंग्रेजी में है और हमारे रिश्तेदार इसे हजम नहीं कर पा रहे। आप इसका हिंदी या भारतीय पर्याय दे दें, उन्होंने कहा।
मैंने बहुत सोचा, शब्दकोश उलट-पलट डाले और तब खोजकर उनको ‘रोजलीना’ का पर्याय दिया, ‘गुलाबो’।
उन्होंने मेरा चेहरा देखा और नाक सिकोड़कर बोले, ‘आखिर पंजाबी हो न !”
मुझे तब भी लगा था कि प्रादेशिकता मेरे कर्तव्य में बाधा खड़ी कर रही है।
अभी कल ही मेरे एक पंजाबी पड़ोसी आए थे। उनके घर पर परम परमेश्वर की किरपा से एक पुत्तर का जनम हो गया था। अतः वे चाहते थे कि मैं उनके सुपुत्तर के लिए कोई सोणा-सा नाम चुन दूँ।
मैं मान गया। वैसे इतनी जल्दी मैं सामान्यतः माना नहीं करता पर कल रात से एक बड़ा मधुर-सा नाम मेरे मन में चक्कर-भंबीरी काट रहा था। सोचा, ‘इनको वही नाम बता दूँ। इनके सुपुत्तर को नाम मिल जाएगा और मुझे उसकी चक्कर – भंबीरी से मुक्ति।’
मैंने कहा, “लाला जी ! इसका नाम तो आप रखे ‘निकुंज’। बढ़िया नाम है और सारे मुहल्ले में किसी का ऐसा नाम नहीं है।”
“आप मजाक बढ़िया करते हैं, मास्टर साहब !” वह दोनों हाथों से ताली पीटकर खिलखिलाए, “क्या नाम चुना है। कुंभकरन जैसा लगता है।” मैंने कुछ नहीं कहा, चुपचाप उन्हें देखता रहा।
“ऐसा करो”, वह बोले, “कोई बढ़िया-सा अंग्रेजी का नाम सोचो।
मैंने सोचा है, वेल्कम कैसा रहेगा ? वे खुशी से उछल पड़े। अपने मकान का नाम भी हम इसी पुत्तर के नाम पर वेल्कम बिल्डिंग रखेंगे।”

प्रश्न 1 – लेखक ने ‘रोजलीना’ का क्या पर्याय दिया?
(क) गुलाबी
(ख) गुलाब
(ग) गुलमोहर
(घ) गुलाबो
उत्तर – (घ) गुलाबो

प्रश्न 2 – कश्मीरी जन ने लेखक को क्या नाम बताया ?
(क) रोजलीना
(ख) गुलाबो
(ग) निकुंज
(घ) वेलकम
उत्तर – (क) रोजलीना

प्रश्न 3 – पंजाबी परिवार को कौन सा नाम पसंद नहीं आया ?
(क) वेलकम
(ख) फेरवेल
(ग) निकुंज
(घ) गुलाबो
उत्तर – (ग) निकुंज

प्रश्न 4 – पंजाबी परिवार अपने बच्चे का क्या नाम रखना चाहते थे ?
(क) वेल्कम
(ख) निकुंज
(ग) फेरवेल
(घ) गुलाबो
उत्तर – (क) वेल्कम

प्रश्न 5 – पंजाबी परिवार अपने मकान का नाम भी पुत्र के नाम पर —————– रखना चाहते थे ?
(क) चाइल्ड बिल्डिंग
(ख) चिल्ड्रन बिल्डिंग
(ग) फेरवेल बिल्डिंग
(घ) वेल्कम बिल्डिंग
उत्तर – (घ) वेल्कम बिल्डिंग

4 –
मेरे एक मित्र का पल्ला पकड़कर एक और साहब आए। पता नहीं लोगों को कहाँ-कहाँ से मालूम हो जाता है कि मैं बच्चों के नाम रखने में बहुत दक्ष हूँ ! मैंने उन्हें चलते से दो-तीन नाम सुझाकर पीछा छुड़ाना चाहा तो वह खुले। बोले, “ऐसे नहीं चलेगा, साहब ! हम तो आपको नाम का विशेषज्ञ समझकर आए हैं।”
“आपको कैसा नाम चाहिए ?” मैं ऐसे अवसरों पर स्वयं को उस दुकानदार की स्थिति में पाता हूँ, जो ग्राहक को तैयार माल से संतुष्ट न कर पाने के कारण, ऑर्डर पर माल बनवा देने का प्रस्ताव रखता है।
“बात यह है, साहब !” वह बोले, “आप जानते हैं, किसको अपना बच्चा प्यारा नहीं लगता। हमें भी अपना बच्चा प्यारा है। वैसे आप उसे देखें तो आप भी मानेंगे कि वह बहुत प्यारा है। क्यों भाई साहब।” उन्होंने मेरे मित्र को टोका दिया, “ठीक कह रहा हूँ न ?”
“जी हाँ ! जी हाँ ! बहुत प्यारा बच्चा है,” मेरे मित्र ने कहा।
“पर साहब !” वह फिर बोले, “बहुत सताता भी है। हम चाहते हैं। कि उसका कुछ ऐसा नाम रखा जाए कि उसका प्यारापन और सताना दोनों ही बातें कवर हो जाएँ। काम तो कठिन है, पर आप विद्वान हैं। कोई-न-कोई नाम तो सुझा ही देगें।”
मैंने सोचा, काम वस्तुतः बीहड़ था। लोग भी कैसे-कैसे मूर्ख होते हैं। क्या शर्तें लाए हैं ! पर ठीक है, मैं भी विद्वान हूँ।
मेरी बुद्धि ने एक चमत्कार किया। ऐसे चमत्कार वैसे कभी-कभी ही होते हैं पर हो जाते हैं।

प्रश्न 1 – लोगों को क्या मालूम हो जाता था?
(क) कि लेखक बड़ों के नाम रखने में बहुत दक्ष है
(ख) कि लेखक पशुओं के नाम रखने में बहुत दक्ष है
(ग) कि लेखक बच्चों के नाम रखने में बहुत दक्ष है
(घ) कि लेखक बच्चों की बिमारी ठीक करने में बहुत दक्ष है
उत्तर – (ग) कि लेखक बच्चों के नाम रखने में बहुत दक्ष है

प्रश्न 2 – लेखक के मित्र का मित्र लेखक को ——————– समझकर आए थे
(क) नाम का विशेषज्ञ
(ख) विषय का विशेषज्ञ
(ग) काम का विशेषज्ञ
(घ) व्यवसाय का विशेषज्ञ
उत्तर – (क) नाम का विशेषज्ञ

प्रश्न 3 – “जी हाँ ! जी हाँ ! बहुत प्यारा बच्चा है,” वाक्य किसके हैं ?
(क) लेखक के
(ख) लेखक के मित्र के
(ग) लेखक के मित्र के मित्र के
(घ) मित्र के पड़ोसी के
उत्तर – (ख) लेखक के मित्र के

प्रश्न 4 – लेखक के मित्र का मित्र कैसा नाम चाहता था ?
(क) जिसमें बच्चे का प्यारापन और सताना दोनों ही बातें कवर हो जाएँ
(ख) जिसमें बच्चे का प्यारापन कवर हो जाएँ
(ग) जिसमें बच्चे का सताना जैसे दोष कवर हो जाएँ
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (क) जिसमें बच्चे का प्यारापन और सताना दोनों ही बातें कवर हो जाएँ

प्रश्न 5 – कौन सा काम वस्तुतः बीहड़ था ?
(क) बच्चे के नाम में प्यारापन कवर करना
(ख) बच्चे के नाम में सताना कवर करना
(ग) बच्चे के नाम में प्यारापन और सताना दोनों ही बातें कवर करना
(घ) केवल (क)
उत्तर – (ग) बच्चे के नाम में प्यारापन और सताना दोनों ही बातें कवर करना

 

Maharashtra State Board Class 10 Hindi Lesson 3 नाम चर्चा बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न 1 – ‘नाम चर्चा’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) नरेंद्र कोहली
(ग) रामचंद्र शुक्ल
(घ) हरिशंकर परसाई
उत्तर – (ख) नरेंद्र कोहली

प्रश्न 2 – लेखक के अनुसार, नामकरण के समय लोग किसका ध्यान नहीं रखते?
(क) अर्थ का
(ख) उच्चारण का
(ग) विषय का
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) अर्थ का

प्रश्न 3 – ‘नाम चर्चा’ पाठ में किस प्रकार के नाम पर व्यंग्य किया गया है?
(क) पुराने नामों पर
(ख) नए नामों पर
(ग) अर्थहीन और अटपटे नामों पर
(घ) विदेशी नामों पर
उत्तर – (ग) अर्थहीन और अटपटे नामों पर

प्रश्न 4 – लेखक के पास पड़ोसी क्यों परेशान होकर आए थे?
(क) नाम बदलने के लिए
(ख) बच्चे का नाम रखवाने के लिए
(ग) नाम का अर्थ जानने के लिए
(घ) नामकरण का मुहूर्त पूछने के लिए
उत्तर – (ख) बच्चे का नाम रखवाने के लिए

प्रश्न 5 – पाठ के अनुसार पंजाब के लोग अपने बच्चों का नाम कैसा रखना पसंद करते हैं?
(क़) कोमल
(ख) भारी-भरकम
(ग) छोटा
(घ) अंग्रेजी
उत्तर – (ख) भारी-भरकम

प्रश्न 6 – ‘नाम चर्चा’ पाठ के अनुसार, लोग अपनी संतान के लिए नाम किसके अनुरूप चाहते हैं?
(क) व्यवसाय के अनुरूप
(ख) सौंदर्य और स्वभाव के अनुरूप
(ग़) राशि के अनुरूप
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (घ) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 7 – निम्नलिखित में से लेखक ने किस नाम के द्वारा लोगों की अज्ञानता पर व्यंग्य किया है?
(क) रामदास
(ख) शोर मचावन
(ग) विद्यासागर
(घ) ज्ञानप्रकाश
उत्तर – (ख) शोर मचावन

प्रश्न 8 – पाठ में पंजाबी, कश्मीरी और विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लोगों द्वारा किसको दर्शाया गया है ?
(क) नामों के चयन में की जाने वाली देरी
(ख) नामों के चयन में की जाने वाली लापरवाही
(ग) नामों के चयन में की जाने वाली जल्दबाजी और अज्ञानता
(घ) नामों के चयन में की जाने वाली समझदारी
उत्तर – (ग) नामों के चयन में की जाने वाली जल्दबाजी और अज्ञानता

प्रश्न 9 – प्रस्तुत हास्य-व्यंग्य निबंध में नरेंद्र कोहली जी ने ————————— पर मनोरंजक प्रकाश डाला है।
(क) ‘मृत्यु की समस्या’
(ख) ‘जन्म की समस्या’
(ग) ‘नामकरण की समस्या’
(घ) ‘विवाह की समस्या’
उत्तर – (ग) ‘नामकरण की समस्या’

प्रश्न 10 – पंजाबी व्यक्ति ने अपने बच्चों के लिए क्या नाम सुझाया था?
(क) वेलकम और फेयरवेल
(ख) गुलाबो
(ग) कोलाहल
(घ) दुर्ललित
उत्तर – (क) वेलकम और फेयरवेल

प्रश्न 11 – उत्तर भारतीय व्यक्ति ने अपने बच्चों के लिए क्या नाम सुझाया?
(क) गुलाबो
(ख) दुर्ललित
(ग) कोलाहल/शोरमचावन
(घ) प्यारुमल और सताऊमल
उत्तर – (ग) कोलाहल/शोरमचावन

प्रश्न 12 – लेखक के मित्र के बच्चों के लिए क्या नाम सुझाया गया था?
(क) वेलकम
(ख) दुर्ललित, प्यारुमल और सताऊमल
(ग) कोलाहल
(घ) फेयरवेल
उत्तर – (ख) दुर्ललित, प्यारुमल और सताऊमल

प्रश्न 13 – लेखक ने हजारों-लाखों बाँग्ला नामों को बदल-बदल कर —————- के नाम बना लिए।
(क) खड़ी बोली
(ख) पहाड़ी बोली
(ग) पंजाबी बोली
(घ) उर्दू बोली
उत्तर – (क) खड़ी बोली

प्रश्न 14 – कश्मीरी जन ने अपनी बेटी का क्या नाम सोचा था ?
(क) गुलाबो
(ख) रोजलीना
(ग) रोजीना
(घ) लीना
उत्तर – (ख) रोजलीना

प्रश्न 15 – कश्मीरी जन ने लेखक रोजलीना नाम न रख पाने का क्या कारण बताया ?
(क) यह नाम अंग्रेजी में है और उनके रिश्तेदार इसे पसंद नहीं कर पा रहे
(ख) यह नाम अरबी में है और उनके रिश्तेदार इसे पसंद नहीं कर पा रहे
(ग) यह नाम हिंदी में है और उनके रिश्तेदार इसे पसंद नहीं कर पा रहे
(घ) यह नाम उर्दू में है और उनके रिश्तेदार इसे पसंद नहीं कर पा रहे
उत्तर – (क) यह नाम अंग्रेजी में है और उनके रिश्तेदार इसे पसंद नहीं कर पा रहे

प्रश्न 16 – कश्मीरी जन ने लेखक से रोजलीना नाम का ————————- नाम चाहते थे।
(क) उर्दू या अरबी समानार्थक
(ख) हिंदी या अंग्रेजी समानार्थक
(ग) अंग्रेजी या विदेशी समानार्थक
(घ) हिंदी या भारतीय समानार्थक
उत्तर – (घ) हिंदी या भारतीय समानार्थक

प्रश्न 17 – पंजाबी पड़ोसी के बच्चे के नाम के लिए लेखक जल्दी क्यों मान गया ?
(क) उस रात से एक बड़ा अच्छा-सा नाम उनके मन में चक्कर काट रहा था
(ख) उस रात से लेखक को कहीं जल्दी पहुंचना था
(ग) उस रात से एक बड़ा अच्छा-सा नाम लेखक किसी को बताना चाहता था
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) उस रात से एक बड़ा अच्छा-सा नाम उनके मन में चक्कर काट रहा था

प्रश्न 18 – पंजाबी पड़ोसियों को निकुंज नाम कैसा लग रहा था ?
(क) मेघनाथ जैसा
(ख) कुंभकरन जैसा
(ग) देसी जैसा
(घ) विदेशी जैसा
उत्तर – (ख) कुंभकरन जैसा

प्रश्न 19 – बच्चे की माँ की क्या जिद्द थी ?
(क) वह बच्चे का नाम उसके गुणों पर रखना चाहती थी
(ख) वह बच्चे का नाम उसके दोषों पर रखना चाहती थी
(ग) वह बच्चे का नाम उसके शोर मचाने पर रखना चाहती थी
(घ) वह बच्चे का नाम उसके भोलेपन पर रखना चाहती थी
उत्तर – (ग) वह बच्चे का नाम उसके शोर मचाने पर रखना चाहती थी

प्रश्न 20 – लेखक के मकान से चौथे मकान में रहने वाले उनके पड़ोसी को “कोलाहल” नाम क्यों पसंद नहीं आया ?
(क) क्योंकि नाम देश या जगह के अनुरूप नहीं था
(ख) क्योंकि बच्चे की माँ को विदेशी नाम पसंद था
(ग) क्योंकि बच्चे के पिता को विदेशी नाम पसंद था
(घ) क्योंकि बच्चे की माँ को छोटा नाम पसंद था
उत्तर – (क) क्योंकि नाम देश या जगह के अनुरूप नहीं था

 

Maharashtra State Board Class 10 Hindi नाम चर्चा प्रश्न और उत्तर (Extra Question Answers)

प्रश्न 1 – हिंदी के कथा साहित्य में भाषा में आई बाधा से लेखक को क्या परेशानी आ गई है ?
उत्तर – हिंदी के कथा साहित्य में बाधा आ गई है। इस बाधा से एक बहुत बड़ी समस्या दूसरे क्षेत्र में पैदा हो गई है। जितने भी हिंदी भाषी प्रदेश हैं उनमें नाम को लेकर समस्या आ गई है। जब किसी के घर में कोई संतान होती है तो मुसीबत उठ खड़ी हो जाती है। यह समस्या कितनी भयंकर है कि बच्चे का नाम रखना कठिन हो जाता है। पहले जब कोई नाम पूछता था तब लेखक कोई भी पत्रिका उठा लेते थे, और उसमें जिस किसी कहानी की नायिका या नायक का नाम दिख जाता था, वही नाम उस बालक या बालिका को दे दिया जाता था। उस समय लोग भी बहुत सरल होते थे वे तुरंत उस नाम को पसंद भी कर लेते थे। परन्तु अब हिंदी का कथा लेखक अपनी कहानियों में नायिका या नायक का नाम रखने से अपने आप को दूर रखने लगा है। यदि आप कई पचासों कहानियाँ पढ़ लें, तब कहीं एक आध नाम मिलता है। नहीं तो लेखक ‘यह’, ‘वह’ से ही काम चला लेते हैं। हर कहानी के नायक का नाम ‘वह’ रखा जाता है और किसी को अपनी संतान का नाम ‘वह’ रखने को कहा जाए तो कोई भी तैयार नहीं होता। लेखक के अनुसार हिंदी के कहानी लेखक के द्वारा नाम न रखना लेखक के लिए परेशानी खड़ी कर देता है।

प्रश्न 2 – कश्मीरी जन अपनी बेटी का क्या नाम रखना चाहते थे और लेखक के द्वारा दिया गया नाम उन्हें क्यों पसंद नहीं आया ?
उत्तर – लेखक के भाई-बंधु, मित्र तथा ज्यादातर पड़ोसी पंजाबी थे। दूसरे प्रदेशों के लोग लेखक के पंजाबी अभिमान को कम ही सहते थे, इसलिए उनसे लेखक की अधिक बनती भी नहीं थी। एक कश्मीरी जन लेखक के पास अपनी बेटी का नाम रखने के लिए आए। उस बच्ची का नाम कुछ ऐसा ही होना चाहिए था, जिसमें कश्मीर का सारा प्राकृतिक सौंदर्य साकार हो सके। लेखक ने अपनी क्षमता के अनुसार पूरा परिश्रम किया परन्तु वे कोई भी ऐसा नाम नहीं दे पाए जिससे वे उन कश्मीरी जन को संतुष्ट कर पाएँ। अंत में उन्होंने ही लेखक से कहा कि यदि वे कोई नया नाम नहीं दे सकते तो उनके सोचे हुए नाम का ही हिंदी में कोई अच्छा-सा समानार्थक शब्द दे, जो कि उस बच्ची का नाम रखा जा सके। लेखक ने उनका सोचा हुआ नाम पूछा। तो उन्होंने “रोजलीना” बताया। कश्मीरी जन ने लेखक को बताया कि रोजलीना नाम अच्छा तो है परन्तु कठिनाई बस इतनी है कि यह नाम अंग्रेजी में है और उनके रिश्तेदार इसे पसंद नहीं कर पा रहे। इसलिए वे लेखक से इसका हिंदी या भारतीय समानार्थक नाम चाहते थे। लेखक ने खोजकर उनको ‘रोजलीना’ का समानार्थक नाम दिया, ‘गुलाबो’। उन्हें लेखक के द्वारा दिया गया गुलाबो नाम पंजाबी लग रहा था जो उन्हें कुछ ख़ास पसंद नहीं आया।

प्रश्न 3 – अपने पंजाबी पड़ोसी के द्वारा अपने बच्चे के किस नाम को सुनकर लेखक को चक्कर आ गए ?
उत्तर – लेखक के एक पंजाबी पड़ोसी उनके पास अपने बच्चे के नाम के लिए आए थे। लेखक ने उनसे कहा कि वे अपने पुत्र का नाम ‘निकुंज’ रख दें। परन्तु वे दोनों हाथों से ताली पीटकर खिलखिलाए और लेखक से कहने लगे कि वे बहुत बढ़िया मजाक करते हैं क्योंकि उनके द्वारा चुना गया नाम उन्हें कुंभकरन जैसा लग रहा था। और फिर वे खुशी से उछल कर स्वयं ही बोले कि उन्होंने वेल्कम नाम सोचा है। वे अपने मकान का नाम भी इसी पुत्र के नाम पर वेल्कम बिल्डिंग रखेंगे। यह सुनकर लेखक की बुद्धि चक्कर खा गई। क्योंकि ऐसे नाम की तो लेखक ने कल्पना ही नहीं की थी।

प्रश्न 4 – लेखक को कब महसूस हुआ कि लोग गुण पर तो नाम रखते ही हैं पर दोष को लेकर भी नाम रखने की जिद्द करते हैं ?
उत्तर – लेखक के मकान से चौथे मकान में रहने वाले उनके पड़ोसी अपने तीन वर्ष के लड़के के लिए जब नाम नहीं खोज पा रहे थे तब वे लेखक के पास आए। लेखक ने उनसे उनकी समस्या पूछी। तो उन्होंने बच्चे की माँ की जिद्द ही समस्या बताया। उन्होंने बताया कि उनका बच्चा बहुत ज्यादा शोर मचाता है। उसकी माँ कहती है कि उसका नाम उसके शोर मचाने पर ही रखेंगे। यह जिद्द सुन कर लेखक हैरान हो गया। यह कैसी जिद्द थी, लेखक को समझ नहीं आ रहा था। क्योंकि लोग गुण पर तो नाम रखते ही हैं पर दोष को लेकर नाम रखना अजीब था।

प्रश्न 5 – लेखक के अनुसार नाम किस-किस तरह से वर्गीकृत हो सकते हैं और लेखक क्या करने की सोच रहे हैं ?
उत्तर – लेखक भी मानते हैं कि नाम को लेकर जहाँ क्षेत्रीय आग्रह हैं, वहीं व्यावसायिक आग्रह भी होते हैं। लोगों ने नामों का वर्गीकरण शुरू कर रखा है जैसे फर्मों के उपयुक्त नाम, नेताओं के उपयुक्त नाम, एक्टरों के उपयुक्त नाम इत्यादि। लेखक यह देखना चाहते है कि नामों के कितने वर्ग बनते हैं और फिर लेखक उनके अनुसार नामों की सूचियाँ बनाएंगे और फिर नाम बताने का ही काम शुरू कर देंगे। और उन नामों के अधिकार पत्र बनवा लेंगें। और फिर उन अधिकार पत्र वाले नामों का अधिकार शुल्क देकर ही लोग उनमें से कोई नाम रख सकेंगे। लेखक सभी से आग्रह करते हैं कि वे भी अपनी आवश्यकता लिखित रूप से लेखक को भेज सकते हैं।