नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़ कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए 

3


इंसान अपनी स्मृति की आधारशिला पर टिका होता है| उसकी स्मृतियाँ उसकी अस्मिता है और ये स्मृतियाँ ही उसके वर्तमान को अतीत से जोड़ती हैं| हम शायद कलम कहाँ रखी है यह सतियाँ जाएँ, पर यह नहीं भूलते कि उर्दू क्लास के मौलवी साहब पान कैसे चबाते थे| लेकिन स्मृतियाँ कई बार हमारे दिमाग़ पर बोझ भी बन जाती हैं, फिर उन्हें दिमाग़ के कवाड़ से दूँढना कठिन होता है| लेकिन कोई छोटी बात, कोई गंध, कोई स्पर्श झट से आपको पुरानी स्मृति से जोड़ देते हैं|

संस्मरण वर्तमान में अतीत के बारे में लिखे जाते हैं| अतीत और वर्तमान के बीच वाचक के साथ काफ़ी कुछ घटित हो चुका होता है| संवेदना, भाषा, परिप्रेक्ष्य, अभिव्यक्ति, जीवन की प्राथमिकता, संबंध, दृष्टि आदि ऐसे बदल चुके होते हैं कि अतीत बिल्कुल उल्टा भी दिख सकता है| इमली तोड़ने के लिए आप बचपन में पेड़ पर चढ़े, गिरे, हाथ तुड़वा बैठे| तकलीफ़ हुई ऊपर से पिता ने पीटा, माँ ने कोसा| आज उसी घटना को याद कर हँसी आ सकती है| इमली की डाल कमज़ोर होती है, यह बच्चे को कहाँ पता? बेवकृफ़ी और उत्साह के मारे हाथ तुड़वा बैठे| पर तब वह हरक़त बेवकृफ़ी कहाँ लगी थी|

आजकल हिंदी साहित्य में संस्मरणों की बहार है| संस्मरण की बहार यहीं नहीं है| अमरीका में लेखन-विधा के गुरु हैं विलियम जिंसर| वे लेखन का मैनुअल लिखते हैं- जीवनी कैसे लिखें, आत्मकथा कैसे लिखें आदि आदि| उन्होंने संस्मरणों के धुँआधार प्रकाशन पर टिप्पणी की, “यह संस्मरण का युग है| बीसवीं सदी के अंत के पहले कभी भी अमरीकी धरती पर व्यक्तिगत आख्यान की ऐसी जबर्दस्त फसल कभी नहीं हुई थी| हर किसी के पास कहने के लिए एक कथा है और हर कोई कथा कह रहा है| संस्मरणों की बाढ़ से अमरीकी इतने दुखी हुए कि संस्मरणों की पैरोडी तक लिखी जाने लगी| शुक्र मनाइये कि हिंदी में मामला यहाँ तक नहीं पहुँचा है|”

संस्मरण क्‍यों लिखे जाते हैं? क्या संस्मरण नहीं लिखे तो लेखक के पेट में मरोड़ होगा? या उबकाई आ जाएगी? वह कौन-सी दुर्निवार इच्छा है जो संस्मरण लिखवाती है? हिंदी में संस्मरण यदाकदा लिखे जाते थे| आलोचना भी उसे एक अमहत्त्वपूर्ण विधा मानकर चलती थी, लिहाज़ा संस्मरणों की अनदेखी होती थी| जहाँ तक मेरा अनुमान है कि विश्वनाथ त्रिपाठी द्वारा नामवर सिंह पर लिखे संस्मरण ‘हक जो अदा न हुआ’ ने ऐसा धूम मचाया कि एकदम से इस विधा की क्षमता का पुनर्प्रकटीकरण हुआ और संस्मरण की ओर कई रचनाकार मुड़े| काशीनाथ सिंह का इस तरफ़ सबसे पहले मुड़ना संगत ही माना जाना चाहिए|

निम्नलिखित में से निर्देशानुसार सबसे उचित विकल्पों का चयन कीजिए:-

1. संस्मरण लेखन का उद्देश्य हुआ करता है....?
a.
b.
c.
d.

2. जो कल सीधा तदखाई देा था वही आज उल्टा क्यों देख सकता है?
a.
b.
c.
d.

3. हिंदी साहित्य में संस्मरणों की स्थिति कैसी है?
a.
b.
c.
d.

4. मनुष्य की यादें उसके लिए क्यों आवश्यक हैं?
a.
b.
c.
d.

5. बचपन में हाथ तुड़वाना बेवकृफ़ी क्‍यों नहीं लगती है?
a.
b.
c.
d.

6. प्रस्तुत गद्यांश का शीर्षक हो सकता है?
a.
b.
c.
d.

7. 'धूम मचाने'- का क्या तात्पर्य हो सकता है?
a.
b.
c.
d.

8. संस्मरण क्‍यों लिखने चाहिए?
a.
b.
c.
d.

9. “हम शायद कलम कहाँ रखी है यह भूल जाएँ, पर यह नहीं भूलते कि उर्दू क्लास के मौलवी साहब पान कैसे चबाते थे|" प्रस्तुत पंक्ति का क्या भाव है?
a.
b.
c.
d.

10. किसी चीज़ की पैरोडी कब लिखी जाती है ....?
a.
b.
c.
d.


 

Also Check out Related CUET Hindi Reading Comprehension Test Links
CUET Hindi Reading Comprehension Test 1

CUET Hindi Reading Comprehension Test 2

CUET Hindi Reading Comprehension Test 4

CUET Hindi Reading Comprehension Test 5

CUET Hindi Reading Comprehension Test 6

CUET Hindi Reading Comprehension Test 7

CUET Hindi Reading Comprehension Test 8

CUET Hindi Reading Comprehension Test 9

CUET Hindi Reading Comprehension Test 10

CUET Hindi Reading Comprehension Test 11

CUET Hindi Reading Comprehension Test 12

CUET Hindi Reading Comprehension Test 13

CUET Hindi Reading Comprehension Test 14

CUET Hindi Reading Comprehension Test 15