CBSE Class 9 Hindi Chapter 2 Kya Likhu? (क्या लिखूँ ?) Question Answers (Important) from Ganga Book
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सीबीएसई कक्षा 9 हिंदी गंगा के पाठ 2 क्या लिखूँ ? प्रश्न उत्तर खोज रहे हैं? आगे कोई तलाश ना करें! महत्वपूर्ण प्रश्नों का हमारा व्यापक संकलन आपको अपने विषय ज्ञान को बढ़ाने में मदद करेगा। कक्षा 9 के हिंदी प्रश्न उत्तर का अभ्यास करने से परीक्षा में आपके प्रदर्शन में काफी सुधार हो सकता है। हमारे समाधान इस बारे में एक स्पष्ट विचार प्रदान करते हैं कि उत्तरों को प्रभावी ढंग से कैसे लिखा जाए। हमारे क्या लिखूँ ? प्रश्न उत्तरों को अभी एक्सप्लोर करें उच्च अंक प्राप्त करने के अवसरों में सुधार करें।
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रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
उत्तर- (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
कारण-
इस अंश में लेखक ए. जी. गार्डीनर के विचारों के माध्यम से यह समझाता है कि निबंध में असली महत्त्व विषय का नहीं, बल्कि लेखक के अपने भावों और विचारों का होता है। जैसे हैट (टोपी) असली वस्तु है और खूँटी केवल उसे टाँगने का साधन है, वैसे ही निबंध में मन के भाव मुख्य होते हैं और विषय केवल उन्हें व्यक्त करने का माध्यम होता है।
इसलिए विकल्प (क) सबसे उपयुक्त है, क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि लेखक भावों को विषय से अधिक महत्त्व देता है।
2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
(क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना
(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
उत्तर- (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
कारण-
इस अंश में लेखक माइकल डी मानटेन की पद्धति का उल्लेख करता है। मानटेन के अनुसार निबंध में वही बातें लिखनी चाहिए जो लेखक ने स्वयं देखी, सुनी और अनुभव की हों। ऐसे निबंध मन की सच्ची अनुभूति और भावों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति होते हैं।
इसीलिए लेखक भी सोचता है कि वह इसी पद्धति को अपनाए, यानी अपने अनुभव और भावों के आधार पर स्वच्छंद रूप से निबंध लिखे।
इसलिए विकल्प (घ) सबसे सही है।
3. “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है?
(क) तर्क और भावना
(ख) ज्ञान और शिक्षा
(ग) परिश्रम और उपलब्धि
(घ) अभिलाषा और अनुभव
उत्तर- (घ) अभिलाषा और अनुभव
कारण-
लेखक बताता है कि तरुण (युवा) लोग भविष्य को उज्ज्वल मानते हैं, क्योंकि उनके मन में इच्छाएँ और सपने (अभिलाषाएँ) होती हैं। दूसरी ओर, वृद्ध लोग अपने अतीत को सुखद मानते हैं, क्योंकि उनके पास जीवन के अनुभव होते हैं।
इस प्रकार यह तुलना युवाओं की अभिलाषाओं और वृद्धों के अनुभवों पर आधारित है। इसलिए विकल्प (घ) सबसे उपयुक्त है।
4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
(क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
(ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए
(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
उत्तर- (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
कारण-
लेखक अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख इसलिए करता है क्योंकि खुसरो ने एक ही पद्य में चार अलग-अलग विषयों (खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल) को जोड़कर सभी की इच्छाएँ पूरी कर दी थीं।
लेखक इस उदाहरण से प्रेरणा लेकर सोचता है कि वह भी अपने दोनों विषयों “दूर के ढोल सुहावने” और “समाज-सुधार” को एक ही निबंध में शामिल कर सकता है।
इसलिए विकल्प (ख) सबसे सही है।
5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।
(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।
(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
उत्तर- (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
कारण-
लेखक स्पष्ट रूप से बताता है कि मानव इतिहास में ऐसा कोई समय नहीं रहा जब सुधार की आवश्यकता न रही हो। हर युग में नए-नए दोष उत्पन्न होते हैं और उन्हें दूर करने के लिए सुधार किए जाते हैं।
लेखक महात्मा गांधी जैसे अनेक सुधारकों का उदाहरण देकर भी यह सिद्ध करता है कि हर समय समाज में सुधार की ज़रूरत बनी रहती है।
इसलिए विकल्प (क) सबसे उपयुक्त है।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
1. निबंध लेखन के विषय में ए. जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
उत्तर- निबंध लेखन के विषय में ए. जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में अंतर-
गार्डिनर कहते हैं कि लिखने के लिए एक खास मानसिक अवस्था होती है, जिसमें विचार अपने-आप आ जाते हैं और बिना ज्यादा मेहनत के निबंध लिखा जा सकता है। लेकिन लेखक कहता है कि उसे ऐसी अवस्था नहीं मिलती, उसे लिखने के लिए बहुत सोचना और मेहनत करनी पड़ती है।
2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर- तरुण (युवा) भविष्य के सपने देखते हैं और चाहते हैं कि वे जल्दी पूरे हों, इसलिए वे वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं।
वृद्ध लोग अपने अतीत को याद करते हैं और उसे बेहतर मानते हैं, इसलिए वे भी वर्तमान से खुश नहीं होते।
3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आई?
उत्तर- नमिता “दूर के ढोल सुहावने” विषय पर निबंध लिखवाना चाहती है और अमिता “समाज-सुधार” पर।
लेखक को इन विषयों पर लिखने में कठिनाई होती है क्योंकि दोनों विषय बड़े और कठिन हैं। साथ ही उसके पास समय कम है और सामग्री भी उपलब्ध नहीं है।
4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
उत्तर– आचार्यों के अनुसार निबंध छोटा होना चाहिए, उसकी रूपरेखा पहले बनानी चाहिए और उसमें सामग्री व अच्छी शैली होनी चाहिए।
निबंध लिखने से पहले हमें विषय के बारे में सोच लेना चाहिए, मुख्य बिंदु लिख लेने चाहिए और सरल भाषा में लिखने की तैयारी करनी चाहिए।
5. मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
उत्तर- माइकल डी मानटेन के अनुसार जो हम देखते, सुनते और अनुभव करते हैं, वही निबंध में लिखना चाहिए। इससे निबंध सच्चा और रोचक बनता है। ऐसे निबंध पढ़ने में आसान होते हैं और पाठकों को अच्छे लगते हैं।
विधा से संवाद
निबंध लिखने की कला
‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है- ‘बाँधना’ (नि+बंध), अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं।
शैली का अर्थ अभिव्यक्ति का ढंग होता है। निबंधकार विभिन्न प्रकार से विषय को प्रस्तुत करता है। इस पाठ में निबंध लेखन की प्रक्रियाओं के विषय में चर्चा की गई है। दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए। अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है तो उसे ऐसे ही आरेख से दर्शाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?

उत्तर– आरेख के आधार पर निबंध लिखने की कला-
निबंध गद्य की एक महत्वपूर्ण विधा है, जिसमें लेखक अपने विचारों, अनुभवों और भावनाओं को क्रमबद्ध और सुंदर ढंग से प्रस्तुत करता है। ‘निबंध’ शब्द का अर्थ ही होता है कि अच्छी तरह से बँधा हुआ विचार। इसलिए एक अच्छा निबंध वही होता है, जिसमें विचार स्पष्ट, जुड़े हुए और प्रभावशाली हों।
- दिए गए आरेख के अनुसार निबंध लेखन की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। सबसे पहला चरण है प्रेरणा। जब लेखक के मन में किसी विषय के प्रति रुचि या भावना उत्पन्न होती है, तभी वह लिखने के लिए प्रेरित होता है। बिना प्रेरणा के अच्छा निबंध लिखना कठिन होता है।
- इसके बाद आता है विषय चयन। लेखक को ऐसा विषय चुनना चाहिए, जिसे वह अच्छी तरह समझता हो और जिसमें उसकी रुचि हो। सही विषय का चयन निबंध को सफल बनाता है।
- तीसरा चरण है सामग्री संग्रह। इसमें लेखक विषय से संबंधित जानकारी, उदाहरण और विचार इकट्ठा करता है। यह सामग्री निबंध को मजबूत और प्रभावशाली बनाती है।
- इसके बाद रूपरेखा निर्माण किया जाता है। इसमें निबंध के मुख्य बिंदुओं को क्रम से लिख लिया जाता है, जिससे लिखते समय विचार व्यवस्थित रहते हैं और निबंध में एकता बनी रहती है।
- फिर आता है शैली निर्धारण। इसमें लेखक तय करता है कि वह अपने विचार किस प्रकार प्रस्तुत करेगा—सरल भाषा में, भावपूर्ण ढंग से या तर्कपूर्ण शैली में। अच्छी शैली निबंध को रोचक बनाती है।
- अंत में लेखन और समापन होता है। इस चरण में लेखक निबंध लिखता है और अंत में उसका उचित निष्कर्ष देता है। समापन ऐसा होना चाहिए जो पूरे निबंध का सार प्रस्तुत करे।
मेरे विचार से यह तरीका बहुत अच्छा है, क्योंकि इसमें निबंध लिखने की पूरी प्रक्रिया क्रमबद्ध रूप से बताई गई है। इससे छात्र आसानी से समझ सकते हैं कि निबंध कैसे शुरू करें और कैसे समाप्त करें। यह तरीका निबंध को स्पष्ट, सुंदर और प्रभावशाली बनाने में बहुत सहायक होता है।
भाव-विस्तार
“तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक”
यदि उपर्युक्त वाक्य का भाव विस्तार किया जाए तो कहा जा सकता है कि- युवा पीढ़ी में किसी समस्या को लेकर आक्रोश की भावना प्रबल होती है। वह किसी भी समस्या के समाधान के लिए बैठकर बातचीत करने के बजाय उस पर त्वरित निर्णय लेना चाहते हैं जबकि वृद्ध पीढ़ी किसी समस्या के समाधान के लिए अनुभव और परंपरागत ढंग पर विश्वास करती है।
पाठ में से चुनकर कुछ ऐसे और वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का अपने शब्दों में भाव-विस्तार कीजिए-
• “जो तरुण संसार के जीवन संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
• “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
• “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
• “निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
उत्तर-
- “जो तरुण संसार के जीवन संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
इसका अर्थ है कि जो युवा अभी जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों का सामना नहीं करते, उन्हें दुनिया बहुत सुंदर और आसान लगती है। वे जीवन की वास्तविक समस्याओं को नहीं जानते, इसलिए उन्हें सब कुछ आकर्षक और सुखद दिखाई देता है। - “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
इसका मतलब है कि हर समय समाज में कुछ न कुछ समस्याएँ रही हैं, जिन्हें ठीक करने के लिए सुधार जरूरी रहे हैं। इतिहास के हर युग में लोगों ने समाज को बेहतर बनाने के प्रयास किए हैं और यह प्रक्रिया हमेशा चलती रहती है। - “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
इसका अर्थ है कि जो लोग आज युवा हैं, वे भविष्य में बूढ़े हो जाएँगे और तब वे अपने बीते समय को याद करके उसे अच्छा मानेंगे। जैसे आज के वृद्ध अपने अतीत को याद करते हैं, वैसे ही आज के युवा भी आगे चलकर वही करेंगे। - “निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
इसका भाव यह है कि निबंध में अनावश्यक लंबाई नहीं होनी चाहिए। छोटे निबंध में विचार स्पष्ट और प्रभावशाली रहते हैं, जबकि बड़े निबंध में बात बिखर सकती है और उसकी सुंदरता कम हो जाती है। इसलिए संक्षेप और स्पष्टता अधिक महत्वपूर्ण है।
मेरा अनुभव
इस निबंध में लेखक को दो विषयों (‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और ‘समाज-सुधार’) पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?
उत्तर-
मुझे कुछ विषयों पर लिखना आसान लगता है और कुछ विषय कठिन। जिन विषयों से मैं रोज़ जुड़ा रहता हूँ, जैसे “मेरा विद्यालय”, “मेरा प्रिय मित्र”, “मेरी पसंदीदा पुस्तक” आदि, उन पर लिखना सरल लगता है, क्योंकि इनके बारे में मुझे पहले से जानकारी और अनुभव होता है। ऐसे विषयों पर मैं अपने विचार आसानी से लिख पाता हूँ।
लेकिन कुछ विषय कठिन लगते हैं, जैसे “समाज-सुधार”, “पर्यावरण संरक्षण”, “विज्ञान का प्रभाव” आदि। इन विषयों पर लिखने के लिए अधिक जानकारी, सोच-विचार और उदाहरणों की आवश्यकता होती है। कभी-कभी सही शब्द और विचार तुरंत नहीं आते, इसलिए लिखना मुश्किल लगता है।
मुझे यह भी लगता है कि जिस विषय में रुचि होती है, उस पर लिखना आसान हो जाता है। इसलिए यदि पहले से विषय के बारे में थोड़ा पढ़ लिया जाए और मुख्य बिंदु सोच लिए जाएँ, तो कठिन विषय भी आसान बन सकते हैं।
विषयों से संवाद
1. निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
उत्तर-
- गौतम बुद्ध- इन्होंने अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग का उपदेश दिया। जाति-भेद और अंधविश्वास का विरोध किया और सभी को समानता का संदेश दिया।
- महावीर स्वामी– इन्होंने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे सिद्धांत दिए। जीवों के प्रति दया और सादगीपूर्ण जीवन पर बल दिया।
- आचार्य नागार्जुन- इन्होंने बौद्ध दर्शन को आगे बढ़ाया और तर्क के माध्यम से सत्य को समझाने का प्रयास किया। उनकी शिक्षाओं ने बौद्ध विचारधारा को मजबूत किया।
- आदि शंकराचार्य- इन्होंने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया और समाज को एकता का संदेश दिया। उन्होंने देशभर में मठ स्थापित करके धार्मिक जागरूकता बढ़ाई।
- कबीर– इन्होंने जाति-भेद, पाखंड और अंधविश्वास का विरोध किया। सरल भाषा में भक्ति और सच्चे धर्म का संदेश दिया।
- गुरु नानक– इन्होंने समानता, ईमानदारी और सेवा का उपदेश दिया। जाति-भेद और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और सिख धर्म की स्थापना की।
ये सभी महान व्यक्ति अपने समय में समाज-सुधारक थे और इन्होंने लोगों को सही मार्ग दिखाया।
3. आपको ‘समाज-सुधार करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
उत्तर-
- यदि मुझे समाज-सुधार करने का अवसर मिले, तो मैं सबसे पहले शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करना चाहूँगी। मैं कोशिश करूँगी कि हर बच्चे को अच्छी और सस्ती शिक्षा मिले, खासकर गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों में। इसके लिए मैं लोगों को जागरूक करूँगी, स्कूलों की सुविधा बढ़ाने का प्रयास करूँगी और पढ़ाई के महत्त्व को समझाऊँगी।
- दूसरा, मैं स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दूँगी। लोगों को साफ-सफाई रखने, कचरा इधर-उधर न फैलाने और पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करूँगी। इसके लिए अभियान चलाए जा सकते हैं और स्कूलों व समाज में जागरूकता कार्यक्रम किए जा सकते हैं।
- तीसरा, मैं अंधविश्वास और भेदभाव को खत्म करने का प्रयास करूँगी। लोगों को सही जानकारी देकर समझाऊँगी कि सभी इंसान बराबर हैं और जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव करना गलत है।
- अंत में, मैं महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा पर भी काम करना चाहूँगी। महिलाओं को शिक्षा, सम्मान और बराबरी का अवसर मिलना बहुत जरूरी है। इसके लिए कानूनों की जानकारी और जागरूकता फैलाना आवश्यक है।
इस प्रकार मैं शिक्षा, स्वच्छता, समानता और जागरूकता के माध्यम से समाज को बेहतर बनाने का प्रयास करूँगी।
4. भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
उत्तर-
भारतीय ज्ञान साहित्य में हमेशा यह सिखाया गया है कि जीवन में नैतिक (सही आचरण), आध्यात्मिक (आत्मिक शांति) और व्यावहारिक (दैनिक जीवन) इन तीनों का संतुलन जरूरी है।
- नैतिक जीवन का अर्थ है सच बोलना, ईमानदार रहना, दूसरों का सम्मान करना और सही काम करना। इससे समाज में विश्वास और शांति बनी रहती है।
- आध्यात्मिक जीवन का मतलब है अपने मन को शांत रखना, ध्यान करना, और ईश्वर या आत्मा के बारे में सोचना। इससे व्यक्ति को अंदर से संतोष और शक्ति मिलती है।
- व्यावहारिक जीवन का अर्थ है रोज़मर्रा के काम ठीक से करना, पढ़ाई, नौकरी और जिम्मेदारियों को निभाना। यह जीवन को व्यवस्थित और सफल बनाता है।
भारतीय ग्रंथों में बताया गया है कि अगर इन तीनों में संतुलन नहीं होगा, तो जीवन अधूरा रह जाएगा। केवल आध्यात्मिकता से जीवन नहीं चलता और केवल भौतिक (दैनिक) जीवन से मन को शांति नहीं मिलती। इसलिए जरूरी है कि हम तीनों को साथ लेकर चलें।
सृजन
1. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है।
आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी- ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ । अब आप इस लोकोक्ति और ‘जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास’ विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
उत्तर-
आम के आम, गुठलियों के दाम और जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास
“आम के आम, गुठलियों के दाम” लोकोक्ति का अर्थ है “एक काम से दोहरा लाभ प्राप्त होना”। यह लोकोक्ति हमारे दैनिक जीवन में कई जगह सही साबित होती है, और जैविक खाद बनाने के कार्य में इसका महत्व और भी अधिक दिखाई देता है।
आज के समय में कचरे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। घरों से निकलने वाला गीला कचरा, जैसे सब्ज़ियों के छिलके, फलों के अवशेष, बचा हुआ भोजन और सूखी पत्तियाँ, अक्सर बेकार समझकर फेंक दिए जाते हैं। इससे गंदगी फैलती है और पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है। लेकिन यदि हम इसी कचरे का सही उपयोग करें, तो यह हमारे लिए बहुत लाभदायक बन सकता है।
जैविक खाद बनाना एक सरल और उपयोगी प्रक्रिया है। इसके लिए हम घर के गीले कचरे को अलग करके किसी गड्ढे, मिट्टी के बर्तन या कम्पोस्ट डिब्बे में जमा कर सकते हैं। समय-समय पर इसे उलट-पलट करना और थोड़ी नमी बनाए रखना आवश्यक होता है। कुछ ही दिनों में यह कचरा सड़कर अच्छी गुणवत्ता की खाद में बदल जाता है। यह खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और पौधों को प्राकृतिक पोषण देती है।
जैविक खाद के उपयोग से रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है, जिससे मिट्टी और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहते हैं। साथ ही, कचरे का सही प्रबंधन होने से हमारे आसपास स्वच्छता बनी रहती है। इस प्रकार एक ही प्रयास से हमें दो लाभ मिलते हैं। एक ओर कचरे की समस्या का समाधान होता है और दूसरी ओर हमें पौधों के लिए उपयोगी खाद प्राप्त होती है।
इसलिए कहा जा सकता है कि जैविक खाद बनाने का प्रयास वास्तव में “आम के आम, गुठलियों के दाम” जैसा है। यह न केवल हमारे पर्यावरण की रक्षा करता है, बल्कि हमें आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी प्रदान करता है।
2. “जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।”
आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
उत्तर-
मेरी डायरी- एक अनुभव
आज मैं अपने एक ऐसे अनुभव के बारे में लिख रहा हूँ, जिसने मुझे “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” कहावत का सही अर्थ समझाया।
कुछ समय पहले मुझे एक बड़े और प्रसिद्ध विद्यालय के बारे में बहुत अच्छा लगता था। मैं सोचता था कि वहाँ पढ़ाई बहुत आसान होगी, सभी शिक्षक बहुत अच्छे होंगे और वहाँ पढ़ने वाले छात्र बहुत खुश रहते होंगे। दूर से देखने पर वह विद्यालय बहुत सुंदर और आकर्षक लगता था, इसलिए मैं वहाँ पढ़ने की इच्छा रखता था।
लेकिन जब मुझे उस विद्यालय में जाने का अवसर मिला, तब मेरा अनुभव बिल्कुल अलग था। वहाँ पढ़ाई बहुत कठिन थी, होमवर्क भी बहुत अधिक मिलता था और अनुशासन बहुत सख्त था। शुरू-शुरू में मुझे वहाँ काफी परेशानी हुई। तब मुझे समझ में आया कि जो चीज़ दूर से बहुत अच्छी लगती है, वह पास जाकर उतनी आसान या सुखद नहीं होती।
इस अनुभव से मैंने यह सीखा कि हमें किसी भी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के बारे में केवल दूर से देखकर ही निर्णय नहीं लेना चाहिए। वास्तविकता को समझने के लिए उसे करीब से जानना जरूरी होता है। सच में, दूर की चीज़ें अक्सर अधिक आकर्षक लगती हैं, लेकिन पास जाकर उनकी सच्चाई अलग ही होती है।
भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
समास
“मुझे उन दोनों को निबंध-रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा”
उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यह दो पदों ‘निबंध’ और ‘रचना’ के मेल से बना है जिसका अर्थ है— निबंध की रचना।
समास
समास का अर्थ है संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है, जैसे- गंगा+जल = गंगाजल, देश+भक्ति = देशभक्ति। इस प्रकार समास वह शब्द रचना है, जिसमें दो (या दो से अधिक), अर्थ की दृष्टि से परस्पर स्वतंत्र संबंध रखने वाले, स्वतंत्र शब्द रचना के अंग होते हैं।
समास रचना में प्राय: दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं। जैसे-गंगाजल में ‘गंगा’ पूर्वपद और ‘जल’ उत्तरपद है। इसी तरह देशभक्ति शब्द में ‘देश’ को पूर्वपद और ‘भक्ति’ को उत्तरपद कहेंगे। समास रचना से बने शब्द को ‘समस्त पद’ कहते हैं; जैसे- गंगाजल, देशभक्ति ।
यदि समास रचना से बने शब्द (समस्त पद) के अंग अलग-अलग करने हों, तो उस प्रक्रिया को समास विग्रह कहते हैं। जैसे यदि ‘गंगाजल’ समस्त पद के अंग अलग-अलग (समास विग्रह) करें, तो दो पद निकलेंगे– गंगा और जल। समास विग्रह इस प्रकार लिखते हैं- गंगाजल = गंगा+जल (गंगा का जल) ।
समास के छह प्रमुख भेद हैं-
| 1. | तत्पुरुष समास | इस समास में उत्तरपद प्रधान होता है और पूर्वपद गौण होता है। तत्पुरुष समास की रचना में समस्त पदों के बीच में आने वाले परसर्गों (का, से, पर आदि) का लोप हो जाता है।
जैसे- रसोईघर → रसोई + घर = रसोई के लिए घर |
| 2. | कर्मधारय समास | कर्मधारय समास में पूर्वपद विशेषण तथा उत्तरपद विशेष्य होता है। अथवा पूर्वपद और उत्तरपद में उपमेय-उपमान का संबंध होता है।
जैसे- नीलकमल नील + कमल = नीले रंग का कमल |
| 3. | द्विगु समास | जिन समासों का पूर्वपद संख्यावाची शब्द हो, वहाँ द्विगु समास होता है। अर्थ की दृष्टि से यह समास प्रायः समूहवाची होता है।
जैसे- तिरंगा = तीन रंगों का समाहार |
| 4. | बहुव्रीहि समास | बहुव्रीहि समास में दोनों पद गौण होते हैं तथा ये दोनों पद मिलकर किसी अन्य पद के विषय में कुछ संकेत करते हैं। अन्य पद ही ‘प्रधान’ होता है।
जैसे- पीतांबर → पीत + अंबर = पीला है अंबर (वस्त्र) जिसका अर्थात कृष्ण/विष्णु |
| 5. | द्वंद्व समास | इस समास में दोनों ही पद प्रधान होते हैं तथा दोनों पदों को जोड़ने वाले समुच्चयबोधक अव्यय का लोप हो जाता है। अव्यय वे शब्द होते हैं जिनमें वचन, लिंग, पुरुष आदि की दृष्टि से कोई रूप परिवर्तन नहीं होता है।
जैसे- भाई-बहन = भाई और बहन |
| 6. | अव्ययीभाव समास | इस समास में पूर्वपद अव्यय होता है और समस्त पद भी अव्यय (क्रिया-विशेषण) का काम करता है।
जैसे – यथाशक्ति → यथा + शक्ति = शक्ति के अनुसार पुनरुक्त शब्दों में समास होने पर भी अव्ययीभाव समास होता है। जैसे- धीरे-धीरे, जल्दी-जल्दी, दिनोदिन । |
निबंध में ऐसे अनेक सामासिक शब्द आए हैं। उन शब्दों को ढूँढ़कर उनका समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए। आपकी समझ के लिए एक उदाहरण तालिका में दिया गया है। पाठ से अन्य उदाहरण चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
| सामासिक पद | समास विग्रह | समास का नाम |
| निबंधशास्त्र | निबंध का शास्त्र | तत्पुरुष समास |
उत्तर-
| सामासिक पद | समास विग्रह | समास का नाम |
| समाज-सुधार | समाज का सुधार | तत्पुरुष समास |
| निबंध-रचना | निबंध का रचना | तत्पुरुष समास |
| दस-पाँच | दस या पाँच | द्वंद्व समास |
| नव-वधू | नव (नयी) है जो वधू | कर्मधारय समास |
| अतीत-गौरव | अतीत का गौरव | तत्पुरुष समास |
| विवाहोत्सव | विवाह का उत्सव | तत्पुरुष समास |
| जीवन संग्राम | जीवन का संग्राम | तत्पुरुष समास |
| विचार-समूह | विचार का समूह | तत्पुरुष समास |
| विश्वकोश | विश्व का कोश | तत्पुरुष समास |
उपसर्ग एवं प्रत्यय
- “सेनापति ने भी अपनी कविता दुर्बोध कर दी है।”
- “समाज-सुधार की चर्चा अनादि काल से लेकर आज तक होती आ रही है।”
दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। दोनों रेखांकित शब्दों में मूल शब्द ‘बोध’ के पहले ‘दुर्’ उपसर्ग और ‘आदि’ के पहले ‘अन्’ उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। उपसर्ग भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड हैं जिनका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता है। ये शब्दों के आरंभ में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।
अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों को देखिए-
- “आज तक कितने ही सुधारक हो गए हैं।”
- “लेखों का शीर्षक बनाने में ही सबसे अधिक कठिनाई होती है।”
रेखांकित शब्दों में मूल शब्द ‘सुधार’ के बाद में ‘क’ प्रत्यय और ‘कठिन’ शब्द के बाद में ‘आई’ प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। प्रत्यय भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड हैं जिनका प्रयोग स्वतंत्र रूप में नहीं होता और जो शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।
1. निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर-
| उपसर्ग | प्रत्यय |
| अभिव्यक्ति | यथार्थता |
| अनुसरण | जन्मदाता |
| विवेचना | |
| प्रतिभावान | |
| कर्कशता |
2. नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए—
. निबंध लिखना बड़ी __________(कठिन…) की बात है।
. वर्तमान से दोनों को _________ (…संतोष) होता है।
. वाक्यों में कुछ ___________ (…स्पष्ट…) भी चाहिए, क्योंकि यह __________(…स्पष्ट…) या _________ (…बोध…) गांभीर्य ला देती है।
उत्तर-
- निबंध लिखना बड़ी कठिनाई की बात है।
- वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है।
- वाक्यों में कुछ अस्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गांभीर्य ला देती है।
3. नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।
| मधुर | सुधार | सुंदर | गति | समाज |
उदाहरण- मधुर → मधुरता, मधुरमय, सुमधुर
उत्तर-
सुधार → सुधारक, असुधार, सुधारना
सुंदर → सुंदरता, असुंदर, सुंदरतम
गति → गतिमान, दुर्गति, प्रगति
समाज → सामाजिक, असामाजिक
भाव एक शब्द अनेक
इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते हैं। उदाहरण के लिए, विचार-मनन-चिंतन या सुहावने-मधुर-मनमोहक । पाठ में से ऐसे शब्द ढूँढिए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।
भाषा संगम
“निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।”
नीचे ‘निबंध’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
निबंध (हिंदी); निबंध: (संस्कृत); निबंध (पंजाबी); मजमून (उर्दू); मजमून (कश्मीरी): मज्मून, निबंधु (सिन्धी); निबंध (मराठी); निबंध (गुजराती); निबंध (कोंकणी); निबंध (नेपाली); निबंध, प्रबंध (बांग्ला); निबंध-रचना (असमिया); निबंध, वाङ्ङ् (मणिपुरी); प्रबंध, रचना (ओड़िआ); व्यासमु (तेलुगु); कटटुरै (तमिल); उपन्यासम् (मलयालम); लेख, प्रबंध (कन्नड़)।
. इनके अतिरिक्त यदि आप ‘निबंध’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
.उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
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Class 9 Hindi Kya Likhu?– Extract Based Questions (गद्यांश पर आधारित प्रश्न)
निम्नलिखित गद्याँशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिये-
1.
मुझे आज लिखना ही पड़ेगा। अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंध लेखक ए. जी. गार्डिनर का कथन है लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है। उस समय मन में कुछ ऐसी उमंग-सी उठती है, हृदय में कुछ ऐसी स्फूर्ति-सी आती है, मस्तिष्क में कुछ ऐसा आवेग-सा उत्पन्न होता है लेख लिखना ही पड़ता है। उस समय विषय की चिंता नहीं रहती। कोई भी विषय हो, उसमें हम अपने हृदय के आवेग को भर ही देते हैं। हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है। उसी तरह अपने मनोभावों को व्यक्त करने के लिए कोई भी विषय उपयुक्त है। असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं। इसी तरह मन के भाव ही तो यथार्थ वस्तु हैं, विषय नहीं।
गार्डिनर साहब के इस कथन की यथार्थता में मुझे संदेह नहीं, पर मेरे लिए कठिनता यह है कि मैंने उस मानसिक स्थिति का अनुभव ही नहीं किया है, जिसमें भाव अपने आप उत्थित हो जाते हैं। मुझे तो सोचना पड़ता है, चिंता करनी पड़ती है, परिश्रम करना पड़ता है, तब कहीं मैं एक निबंध लिख सकता हूँ। आज तो मुझे विशेष परिश्रम करना पड़ेगा, क्योंकि मुझे कोई साधारण निबंध नहीं लिखना है। आज मुझे नमिता और अमिता के लिए आदर्श निबंध लिखना होगा। नमिता का आदेश है कि मैं ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ इस विषय पर लिखूँ । अमिता का आग्रह है कि मैं समाज-सुधार पर लिखूँ, ये दोनों ही विषय परीक्षा में आ चुके हैं और उन दोनों पर आदर्श निबंध लिखकर मुझे उन दोनों को निबंध-रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा।
1. ए. जी. गार्डिनर के अनुसार लेखन के लिए क्या आवश्यक है?
(क) अधिक पढ़ाई
(ख) विशेष मानसिक स्थिति
(ग) लंबा विषय
(घ) कठिन भाषा
उत्तर- (ख) विशेष मानसिक स्थिति
2. “हैट और खूँटी” के उदाहरण से लेखक क्या बताना चाहता है?
(क) विषय अधिक महत्वपूर्ण है
(ख) भाषा सबसे महत्वपूर्ण है
(ग) भाव विषय से अधिक महत्वपूर्ण हैं
(घ) शैली ही सब कुछ है
उत्तर– (ग) भाव विषय से अधिक महत्वपूर्ण हैं
3. लेखक को निबंध लिखने में कठिनाई क्यों होती है?
(क) उसे विषय समझ नहीं आता
(ख) उसके पास समय नहीं है
(ग) उसे लिखना पसंद नहीं है
(घ) उसे विशेष मानसिक अवस्था का अनुभव नहीं होता
उत्तर- (घ) उसे विशेष मानसिक अवस्था का अनुभव नहीं होता
4. गार्डिनर के अनुसार लेखन की विशेषता क्या है?
उत्तर- गार्डिनर के अनुसार लेखन के लिए एक विशेष मानसिक अवस्था होती है, जिसमें मन में उत्साह और विचार अपने-आप उत्पन्न हो जाते हैं और लेखक बिना कठिनाई के लिख सकता है।
5. नमिता और अमिता ने लेखक को किन विषयों पर निबंध लिखने के लिए कहा?
उत्तर- नमिता ने “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” और अमिता ने “समाज-सुधार” विषय पर निबंध लिखने के लिए कहा।
2.
दूर के ढोल सुहावने अवश्य होते हैं। पर क्या वे इतने सुहावने होते हैं कि उन पर पाँच पेज लिखे जा सकें? इसी प्रकार जिस समाज-सुधार की चर्चा अनादि काल से लेकर आज तक होती आ रही है और जिसके संबंध में बड़े-बड़े विज्ञों में भी विरोध है, उसको मैं पाँच पेज में कैसे लिख दूँ? मैंने सोचा कि सबसे पहले निबंधशास्त्र के आचार्यों की सम्मति जान लूँ। पहले यह तो समझ लूँ कि आदर्श निबंध है क्या और वह कैसे लिखा जाता है, तब फिर मैं विषय की चिंता करूँगा । इसलिए मैंने निबंधशास्त्र के कई आचार्यों की रचनाएँ देखीं।
एक विद्वान का कथन है कि निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है, क्योंकि बड़े निबंध में रचना की सुंदरता नहीं बनी रह सकती। इस कथन को मान लेने में ही मेरा लाभ है। मुझे छोटा ही निबंध लिखना है, बड़ा नहीं। पर लिखूँ कैसे? निबंधशास्त्र के उन्हीं आचार्य महोदय का कथन है कि निबंध के दो प्रधान अंग हैं-
सामग्री और शैली। पहले तो मुझे सामग्री एकत्र करनी होगी, विचार-समूह संचित करना होगा। इसके लिए मुझे मनन करना चाहिए। यह तो सच है कि जिसने जिस विषय का अच्छा अध्ययन किया है, उसके मस्तिष्क में उस विषय के विचार आते हैं। पर यह कौन जानता था कि ‘दूर के ढोल सुहावने’ पर भी निबंध लिखने की आवश्यकता होगी। यदि यह बात पहले ज्ञात होती तो पुस्तकालय में जाकर इस विषय का अनुसंधान कर लेता; पर अब समय नहीं है। मुझे तो यहीं बैठकर दो ही घंटों में दो निबंध तैयार कर देने होंगे। यहाँ न तो विश्वकोश है और न कोई ऐसा ग्रंथ जिसमें इन विषयों की सामग्री उपलब्ध हो सके। अब तो मुझे अपने ही ज्ञान पर विश्वास कर लिखना होगा।
1. लेखक को किस बात की चिंता है?
(क) निबंध बहुत छोटा है
(ख) विषय बहुत आसान है
(ग) पाँच पेज लिखना कठिन है
(घ) समय बहुत अधिक है
उत्तर– (ग) पाँच पेज लिखना कठिन है
2. निबंध के दो मुख्य अंग कौन-से बताए गए हैं?
(क) भाषा और अलंकार
(ख) सामग्री और शैली
(ग) विचार और उदाहरण
(घ) रूप और आकार
उत्तर– (ख) सामग्री और शैली
3. लेखक सामग्री कैसे एकत्र करना चाहता था?
(क) पुस्तकालय जाकर अध्ययन करके
(ख) मित्रों से पूछकर
(ग) समाचार पत्र पढ़कर
(घ) शिक्षक से पूछकर
उत्तर- (क) पुस्तकालय जाकर अध्ययन करके
4. लेखक ‘दूर के ढोल सुहावने’ और ‘समाज-सुधार’ विषय पर क्यों चिंतित है?
उत्तर– लेखक को लगता है कि ये विषय बहुत बड़े और कठिन हैं, इसलिए वह सोचता है कि इन पर पाँच पेज लिखना आसान नहीं है।
5. लेखक को सामग्री एकत्र करने में क्या कठिनाई है?
उत्तर– लेखक के पास समय कम है और उसके पास न पुस्तकालय है, न विश्वकोश, इसलिए उसे अपने ज्ञान के आधार पर ही निबंध लिखना पड़ता है।
3.
विज्ञों का कथन है कि निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए। अतएव सबसे पहले मुझे ‘दूर के ढोल सुहावने’ की रूपरेखा बनानी है। मैं सोच ही नहीं सकता कि इस विषय की कैसी रूपरेखा है। निबंध लिख लेने के बाद मैं उसका सारांश कुछ ही वाक्यों में भले ही लिख दूँ, पर निबंध लिखने के पहले उसका सार दस-पाँच शब्दों में कैसे लिखा जाए? क्या सचमुच हिंदी के सब विज्ञ लेखक पहले से अपने-अपने निबंधों के लिए रूपरेखा तैयार कर लेते हैं? ए.जी. गार्डिनर को तो अपने लेखों का शीर्षक बनाने में ही सबसे अधिक कठिनाई होती है। उन्होंने लिखा कि मैं लेख लिखता हूँ और शीर्षक देने का भार मैं अपने मित्र पर छोड़ देता हूँ। उन्होंने यह भी लिखा है कि शेक्सपीयर को भी नाटक लिखने में उतनी कठिनाई न हुई होगी, जितनी कठिनाई नाटकों के नामकरण में हुई होगी। तभी तो घबराकर नाम न रख सकने के कारण उन्होंने अपने एक नाटक का नाम रखा ‘जैसा तुम चाहो’। इसलिए मुझसे तो रूपरेखा तैयार न होगी।
अब मुझे शैली निश्चित करनी है। आचार्य महोदय का कथन है कि भाषा में प्रवाह होना चाहिए। इसके लिए वाक्य छोटे-छोटे हों, पर एक-दूसरे से संबद्ध। यह तो बिल्कुल ठीक है । मैं छोटे-छोटे वाक्य अच्छी तरह लिख सकता हूँ। पर मैं हूँ मास्टर | अपनी विद्वता का प्रदर्शन करने के लिए, अपना गौरव स्थापित करने के लिए यह आवश्यक है कि वाक्य कम- से-कम आधे पृष्ठ में तो समाप्त हों। बाणभट्ट ने कादंबरी में ऐसे ही वाक्य लिखे हैं। वाक्यों में अस्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गांभीर्य ला देती है। इसीलिए संस्कृत के प्रसिद्ध कवि श्रीहर्ष ने जान-बूझकर अपने काव्य में ऐसी गुत्थियाँ डाल दी हैं, जो अज्ञों से न सुलझ सकें और सेनापति ने भी अपनी कविता दुर्बोध कर दी है। तभी तो अलंकारों, मुहावरों और लोकोक्तियों का समावेश भी निबंधों के लिए आवश्यक बताया जाता है। तब क्या किया जाए?
1. निबंध लिखने से पहले क्या बनाने की सलाह दी गई है?
(क) निष्कर्ष
(ख) रूपरेखा
(ग) उदाहरण
(घ) शीर्षक
उत्तर– (ख) रूपरेखा
2. ए.जी. गार्डिनर को किस काम में सबसे अधिक कठिनाई होती थी?
(क) लेख लिखने में
(ख) विषय चुनने में
(ग) शीर्षक देने में
(घ) भाषा लिखने में
उत्तर– (ग) शीर्षक देने में
3. आचार्य के अनुसार अच्छी भाषा की क्या विशेषता होनी चाहिए?
(क) लंबे वाक्य
(ख) कठिन शब्द
(ग) अधिक अलंकार
(घ) छोटे और जुड़े हुए वाक्य
उत्तर- (घ) छोटे और जुड़े हुए वाक्य
4. लेखक को रूपरेखा बनाने में क्या कठिनाई होती है?
उत्तर– लेखक को समझ नहीं आता कि “दूर के ढोल सुहावने” जैसे विषय की रूपरेखा कैसे बनाई जाए, इसलिए वह रूपरेखा बनाने में असमर्थ महसूस करता है।
5. लेखक शैली के बारे में क्या सोचता है?
उत्तर– लेखक जानता है कि भाषा सरल और प्रवाहपूर्ण होनी चाहिए, लेकिन वह मज़ाक में कहता है कि वह लंबे और कठिन वाक्य लिखकर अपनी विद्वता दिखाना चाहता है।
4
मुझे अमीर खुसरो की एक कहानी याद आई। एक बार प्यास लगने पर वे एक कुएँ के पास पहुँचे। वहाँ चार औरतें पानी भर रही थीं। पानी माँगने पर पहले उनमें से एक ने खीर पर कविता सुनने की इच्छा प्रकट की, दूसरी ने चरखे पर, तीसरी ने कुत्ते पर और चौथी ने ढोल पर। अमीर खुसरो प्रतिभावान थे, उन्होंने एक ही पद्य में चारों की इच्छाओं की पूर्ति कर दी। उन्होंने कहा—
खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला।
आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।
मुझमें खुसरो की प्रतिभा नहीं है, पर उनकी इस पद्धति को स्वीकार करने से मेरी कठिनाई आधी रह जाती है। मैं भी एक निबंध में इन दोनों विषयों का समावेश कर दूँगा।
दूर के ढोल सुहावने होते हैं, क्योंकि उनकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती । जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं। ढोल के उन्हीं शब्दों को सुनकर वह अपने हृदय में किसी के विवाहोत्सव का चित्र अंकित कर लेता है। कोलाहल से पूर्ण घर के एक कोने में बैठी हुई किसी लज्जाशील नव-वधू की कल्पना वह अपने मन में कर लेता है। उस नव-वधू के प्रेम, उल्लास, संकोच, आशंका और विषाद से युक्त हृदय कंपन ढोल की कर्कश ध्वनि को मधुर बना देते हैं। सच तो यह है कि ढोल की ध्वनि के साथ आनंद का कलरव, उत्सव का प्रमोद और प्रेम का संगीत, ये तीनों मिले रहते हैं। तभी उसकी कर्कशता समीपस्थ लोगों को भी कटु नहीं प्रतीत होती और दूरस्थ लोगों के लिए तो वह अत्यंत मधुर बन जाती है।
1.अमीर खुसरो ने चारों औरतों की इच्छा कैसे पूरी की?
(क) चार अलग-अलग कविताएँ लिखकर
(ख) एक ही पद्य में
(ग) कहानी सुनाकर
(घ) गीत गाकर
उत्तर- (ख) एक ही पद्य में
2. लेखक ने खुसरो की कहानी का उपयोग क्यों किया है?
(क) कविता सिखाने के लिए
(ख) ढोल का महत्व बताने के लिए
(ग) एक साथ कई विषय जोड़ने का तरीका बताने के लिए
(घ) मनोरंजन के लिए
उत्तर- (ग) एक साथ कई विषय जोड़ने का तरीका बताने के लिए
3. “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” का क्या कारण बताया गया है?
(क) उनकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती
(ख) उनकी आवाज़ बहुत तेज होती है
(ग) वे बहुत सुंदर होते हैं
(घ) लोग उन्हें पसंद करते हैं
उत्तर- (क) उनकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती
4. अमीर खुसरो की कहानी से लेखक को क्या सीख मिली?
उत्तर- लेखक को यह सीख मिली कि एक ही रचना में कई विषयों को जोड़ा जा सकता है, जिससे उसकी समस्या आसान हो जाती है।
5. ढोल की आवाज़ पास और दूर के लोगों को अलग क्यों लगती है?
उत्तर– पास के लोगों को ढोल की आवाज़ कर्कश और तेज लगती है, जबकि दूर के लोगों को वही आवाज़ मधुर और सुखद लगती है।
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Class 9 Hindi Ganga Lesson 2 Kya Likhu? Multiple Choice Questions (बहुविकल्पीय प्रश्न)
1.पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
(क) 1890 में उज्जैन
(ख) 1894 में खैरागढ़
(ग) 1900 में आगरा
(घ) 1885 में बनारस
उत्तर- (ख) 1894 में खैरागढ़
2. ‘क्या लिखूँ?’ निबंध का मुख्य विषय क्या है?
(क) निबंध लेखन की प्रक्रिया
(ख) कहानी लेखन
(ग) कविता लेखन
(घ) नाटक लेखन
उत्तर– (क) निबंध लेखन की प्रक्रिया
3. ए. जी. गार्डिनर के अनुसार लेखन किस पर निर्भर करता है?
(क) भाषा पर
(ख) विषय पर
(ग) विशेष मानसिक स्थिति पर
(घ) पुस्तक पर
उत्तर- (ग) विशेष मानसिक स्थिति पर
4. अमिता ने किस विषय पर निबंध लिखने को कहा?
(क) पर्यावरण
(ख) समाज-सुधार
(ग) खेल
(घ) इतिहास
उत्तर– (ख) समाज-सुधार
5. नमिता ने किस विषय पर निबंध लिखने को कहा?
(क) समाज-सुधार
(ख) शिक्षा
(ग) दूर के ढोल सुहावने
(घ) विज्ञान
उत्तर- (ग) दूर के ढोल सुहावने
6. लेखक को कितने निबंध लिखने हैं?
(क) दो
(ख) एक
(ग) तीन
(घ) चार
उत्तर– (क) दो
7. निबंध के दो मुख्य अंग कौन-से हैं?
(क) भाषा और भाव
(ख) शब्द और अर्थ
(ग) रूप और आकार
(घ) सामग्री और शैली
उत्तर- (घ) सामग्री और शैली
8. विद्वान के अनुसार निबंध कैसा होना चाहिए?
(क) लंबा
(ख) छोटा
(ग) कठिन
(घ) जटिल
उत्तर– (ख) छोटा
9. लेखक सामग्री कहाँ से लाना चाहता था?
(क) पुस्तकालय से
(ख) मित्रों से
(ग) इंटरनेट से
(घ) शिक्षक से
उत्तर– (क) पुस्तकालय से
10. निबंध लिखने से पहले क्या बनाना चाहिए?
(क) निष्कर्ष
(ख) रूपरेखा
(ग) उदाहरण
(घ) शीर्षक
उत्तर- (ख) रूपरेखा
11. गार्डिनर को किस बात में कठिनाई होती थी?
(क) लेखन
(ख) विषय चयन
(ग) शीर्षक देने में
(घ) भाषा में
उत्तर- (ग) शीर्षक देने में
12. शेक्सपीयर ने अपने एक नाटक का नाम क्या रखा?
(क) हैमलेट
(ख) मैकबेथ
(ग) ओथेलो
(घ) जैसा तुम चाहो
उत्तर- (घ) जैसा तुम चाहो
13. भाषा की कैसी विशेषता होनी चाहिए?
(क) लंबी
(ख) कठिन
(ग) प्रवाहपूर्ण
(घ) अस्पष्ट
उत्तर- (ग) प्रवाहपूर्ण
14. बाणभट्ट ने किस प्रकार के वाक्य लिखे?
(क) छोटे
(ख) लंबे
(ग) सरल
(घ) स्पष्ट
उत्तर- (ख) लंबे
15. अंग्रेजी निबंधकारों की पद्धति किसने शुरू की?
(क) शेक्सपीयर
(ख) गार्डिनर
(ग) मानटेन
(घ) कबीर
उत्तर- (ग) मानटेन
16. दूर की चीज़ें कैसी लगती हैं?
(क) खराब
(ख) सुहावनी
(ग) साधारण
(घ) कठिन
उत्तर– (ख) सुहावनी
17. मानटेन के निबंध कैसे होते हैं?
(क) जटिल
(ख) तर्कपूर्ण
(ग) स्वच्छंद
(घ) कठिन
उत्तर– (ग) स्वच्छंद
18. पास के लोगों को ढोल कैसा लगता है?
(क) मधुर
(ख) कर्कश
(ग) धीमा
(घ) अच्छा
उत्तर– (ख) कर्कश
19. खुसरो ने कितने पद्य में इच्छाएँ पूरी कीं?
(क) चार
(ख) तीन
(ग) दो
(घ) एक
उत्तर- (घ) एक
20. मानटेन किस पर आधारित निबंध लिखते थे?
(क) कल्पना
(ख) अनुभव
(ग) इतिहास
(घ) विज्ञान
उत्तर– (ख) अनुभव
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Kya Likhu? Extra Question Answers (अतिरिक्त प्रश्न उत्तर)
1.लेखक ने निबंध लिखने की शुरुआत किस विचार से की?
उत्तर– लेखक बताता है कि उसे आज हर हाल में निबंध लिखना है। वह ए. जी. गार्डिनर के विचार को याद करता है, जिसमें लेखन के लिए विशेष मानसिक स्थिति की बात कही गई है। लेखक मानता है कि उसे ऐसी स्थिति नहीं मिलती, इसलिए उसे मेहनत करके निबंध लिखना पड़ता है।
2. लेखक को निबंध लिखने में कठिनाई क्यों होती है?
उत्तर– लेखक को इसलिए कठिनाई होती है क्योंकि उसे वह विशेष मानसिक अवस्था अनुभव नहीं होती, जिसमें विचार अपने-आप आ जाएँ। उसे निबंध लिखने के लिए बहुत सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है, तब जाकर वह लिख पाता है।
3. नमिता और अमिता ने लेखक से क्या अपेक्षा की?
उत्तर– नमिता ने लेखक से “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” विषय पर निबंध लिखने को कहा। अमिता ने “समाज-सुधार” पर निबंध लिखने का आग्रह किया। दोनों ही विषय कठिन थे, इसलिए लेखक को इन पर आदर्श निबंध लिखने में कठिनाई महसूस हुई।
4. लेखक ने निबंधशास्त्र के आचार्यों की राय क्यों ली?
उत्तर– लेखक ने यह समझने के लिए आचार्यों की राय ली कि आदर्श निबंध क्या होता है और उसे कैसे लिखा जाता है। वह पहले निबंध की विधि समझना चाहता था, ताकि बाद में वह अपने विषय को ठीक से लिख सके।
5. निबंध के दो मुख्य अंग कौन-से हैं?
उत्तर- निबंध के दो मुख्य अंग हैं- सामग्री और शैली। सामग्री में विचार और जानकारी होती है, जबकि शैली में भाषा का ढंग शामिल होता है। दोनों का संतुलन अच्छा निबंध बनाने के लिए जरूरी है।
6. लेखक को सामग्री एकत्र करने में क्या कठिनाई हुई?
उत्तर- लेखक के पास समय कम था और वह पुस्तकालय भी नहीं जा सकता था। उसके पास कोई पुस्तक या विश्वकोश भी नहीं था। इसलिए उसे अपने ही ज्ञान और अनुभव के आधार पर निबंध लिखना पड़ा।
7. जीवन को प्रगतिशील क्यों कहा गया है?
उत्तर– जीवन को प्रगतिशील इसलिए कहा गया है क्योंकि इसमें हमेशा बदलाव होता रहता है। नए दोष उत्पन्न होते हैं और नए सुधार किए जाते हैं। इसी निरंतर परिवर्तन के कारण जीवन आगे बढ़ता रहता है।
8. तरुण और वृद्ध के विचारों में क्या अंतर है?
उत्तर– तरुण भविष्य के सपने देखते हैं और बदलाव चाहते हैं, जबकि वृद्ध अतीत को याद करते हैं और परंपराओं को महत्व देते हैं। दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, लेकिन उनके कारण अलग होते हैं।
9. अमीर खुसरो की कहानी से लेखक को क्या प्रेरणा मिली?
उत्तर- अमीर खुसरो की कहानी से लेखक को यह प्रेरणा मिली कि एक ही रचना में कई विषयों को जोड़ा जा सकता है। इससे उसकी समस्या आसान हो जाती है और वह दोनों विषय एक साथ लिख सकता है।
10. लेखक मानटेन की पद्धति क्यों अपनाना चाहता है?
उत्तर- लेखक को यह पद्धति आसान लगती है क्योंकि इसमें अधिक नियमों की आवश्यकता नहीं होती। वह अपने अनुभव और विचार सीधे लिख सकता है, जिससे उसकी कठिनाई कम हो जाती है।
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