लता मंगेशकर जी का चरित्र-चित्रण | Character Sketch of Lata Mangeshkar Ji from CBSE Class 9 Hindi Ganga Book Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)
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लता मंगेशकर जी के चरित्र-चित्रण सम्बंधित प्रश्न (Questions related to Character of Lata Mangeshkar Ji)
प्रश्न – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ पाठ के आधार पर लता मंगेशकर जी का चरित्र-चित्रण लिखिए।
उत्तर –अपनी आवाज़ से भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कोने-कोने में अपनी पहचान बनाने वाली ‘भारत रत्न’ लता मंगेशकर संगीत के संसार का वह नाम हैं जिनके विषय में यदि बात न हो तो भारतीय संगीत की बात अधूरी रह जाएगी। इंदौर, मध्यप्रदेश में जन्मी लता मंगेशकर ने मात्र पाँच वर्ष की आयु में अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली और जीवनपर्यंत संगीत के प्रति समर्पपित रहीं। जीवन के अनेक उतार-चढ़ाव व संघर्षों के होते हुए भी लता मंगेशकर ने संगीत और परिवार के प्रति अपने उतरदायित्व व को निभाया।
- विनम्रता – लता मंगेशकर जी यतींद्र मिश्र के माध्यम से ही अपने करोड़ों प्रशंसा करने वालों का एहसान मानती हैं कि जो उन सभी ने उन्हें इतना प्रेम और सम्मान दे रखा है। लता मंगेशकर जी को तो यह भी लगता है कि जितना प्रेम उन्हें मिला है, शायद गाकर उतना एहसान वे अपने प्रशंसा करने वालों के प्रति जता नहीं पाई हैं। अपनी सफलता का पूरा श्रय जनता को देना विनम्रता की मिसाल है।
- आत्मसम्मान – लता मंगेशकर जी ने अपने पिता जी से सबसे ज्यादा आत्मसम्मान के साथ जीने की प्रेरणा ली। लता मंगेशकर जी के अनुसार उनके पिता जी उन्हें जो संस्कार दिए उससे लता मंगेशकर जी को जिंदगी में सही बातों पर खड़े रहने की हिम्मत मिली। आज लता मंगेशकर जी को इस बात की खुशी है कि लता मंगेशकर जी ने किसी से यह नहीं कहा कि वे उन्हें पाँच सौ रुपये दे दें, या उनको किसी चीज की जरुरत है वे उन्हें ला कर दें। अर्थात लता मंगेशकर जी ने कभी किसी से कुछ नहीं माँगा और इस बात की उन्हें बहुत ख़ुशी है। इस तरह जो भी चीजें लता मंगेशकर जी कर पाई, उसमें वे अपने बाबा का संस्कार मानती हैं। उन्होंने अपने पिता जी में यह बात देखी थी कि हर हालात में कैसे रहना चाहिए। और लता मंगेशकर जी के पिताजी ने ही उन्हें सिखाया था कि अगर कोई बात उन्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।
- उत्तरदायित्व – लता मंगेशकर जी कभी परिस्थितियों पर ध्यान नहीं देती थी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे उस जमाने से लेकर बाद तक बहुत मेहनत से अपने काम करती थी। वे याद करते हुए कहती हैं कि उनकी रेकॉर्डिंग सुबह से रात तक चलती रहती थी। एक स्टूडियो से दूसरे और फिर तीसरे स्टूडियो के चक्कर में ही उनका पूरा दिन बीत जाता था। उन्हें अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की खबर ही नहीं रहती थी।
- समर्पण – लता मंगेशकर जी को रेकॉर्डिंग से या उसकी तकलीफों से इतना फर्क नहीं पड़ता था, जितना इस बात से पड़ता था कि आने वाले कल में उनके कितने गीत रेकॉर्ड होने हैं। या किसी फिल्म के खत्म होने के साथ उन्हें नए कॉन्ट्रेक्ट की दूसरी नई फिल्मों के गाने कब रेकॉर्ड करने हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि लता मंगेशकर जी को काम और अपने परिवार की जरूरतों के अलावा किसी और की चिंता नहीं रहती थी।
- उत्सवप्रियता व् श्रद्धा – उनके यहाँ होली के एक दिन पहले जब होली जलाते हैं और उस समय होलिका की पूजा होती है, उसमें जो प्रसाद चढ़ाया जाता है, उन सभी तरह की मिठाइयों को होलिका में डालते हैं। नारियल भी होलिका में आखिरी में जलाया जाता है, जिसे जल जाने के बाद आग से निकालकर उसे तोड़कर प्रसाद लेते हैं। वह जो राख बनती है, उसे उठाकर दूसरे दिन एक-दूसरे पर डालते हैं। इसे वे लोग ‘गुड़वड’ कहते हैं। लता मंगेशकर जी के घर में दशहरा और दीवाली का ज्यादा महत्व था। उनके घर में नवरात्रि भी बहुत धूमधाम के साथ मनती है। नवरात्रि के पहले दिन वे ‘गुड़ि पड़वा’ मनाते हैं, जिसका विशेष महत्व है। पहले दिन ‘गुड़ि’ बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है, जिसके अंत में नवमी पर राम जी के जन्म की तिथि रामनवमी आती है। तो लता मंगेशकर जी के यहाँ यह त्योहार राम आगमन मानकर मनाते हैं, जबकि बाकी जगहों पर दुर्गा की आराधना में नवरात्र होता है।
- सरलता – लता मंगेशकर जी का कोरस की लड़कियों के साथ बहुत अच्छा संबंध था। अर्थात जितनी भी लड़कियाँ थीं, वो बिल्कुल उनके अपने घर जैसी थीं। उन सबका लता मंगेशकर जी के घर में आना-जाना होता रहता था। लता मंगेशकर जी की बहन मीना की शादी जब कोल्हापुर में हुई, तो कोरस की सारी लड़कियाँ और लड़के वहाँ आए थे और उन लोगों ने वहाँ खूब गाने गाए और डांस किया था। उन दौरान स्टूडियो में ज्यादा कुर्सियाँ नहीं होती थीं तो वे भली लडकियाँ जब रेकॉर्डिंग के लिए आती थीं, तो वे सब बड़े मजे से जमीन पर बैठती थीं और अक्सर लता मंगेशकर जी भी रेकॉर्डिंग में आकर वहीं जमीन पर बैठकर उन सभी के साथ बातें करती थी। लता मंगेशकर जी से मिलने वाले जितने लड़के और लड़कियाँ थीं, उन सबने बहुत बाद तक उनके साथ अपना सम्बन्ध व् साथ बनाया हुआ था। यही कारण था कि लता मंगेशकर जी का अपने कोरस में गाना गाने वाले लड़के-लड़कियों के साथ सम्बन्ध अच्छे थे।
- स्पष्टवादिता – लता मंगेशकर जी स्पष्ट बताती हैं कि भगवान ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। उन्हें किसी बात की शिकायत नहीं है। वे बहुत खुश हैं। यतींद्र मिश्र जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि लता मंगेशकर जी अमर हैं, तो यह उन्हें मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है, जो दुनिया ने उन्हें दिया है। उनका गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं हो सकता। उसे तो जाना ही है, आज नहीं तो कल कल नहीं तो परसों या किसी न किसी दिन। इस बात पर लता मंगेशकर जी को कोई अफसोस नहीं होता। क्योंकि शरीर तो एक दिन जाना ही है।
- कृतज्ञ – लता मंगेशकर जी मानती हैं कि भगवान ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। उन्हें किसी बात की शिकायत नहीं है। वे बहुत खुश हैं। यतींद्र मिश्र जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि लता मंगेशकर जी अमर हैं, तो यह उन्हें मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है, जो दुनिया ने उन्हें दिया है। उनका गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं हो सकता। लता मंगेशकर जी को लगता है कि भगवान् ने उन्हें जो भी दिया, वह बहुत दिया, दूसरों से कहीं ज्यादा दिया। वे चाहती हैं कि भगवान् ने कृपा की छाया से जैसे उन्हें छाँह दी है, वैसे ही हर एक कलाकार और नेक इंसानों के ऊपर भी रखें। लता मंगेशकर जी सभी के लिए यही प्रार्थना करती हैं।