CBSE Class 9 Hindi Chapter 4 Aisi Bhi Baatein Hoti Hai (Lata Mangeshkar Se Sakshatkar) ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार) Question Answers (Important) from Ganga Book 

 

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सीबीएसई कक्षा 9 हिंदी गंगा के पाठ 4 ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार) प्रश्न उत्तर खोज रहे हैं? आगे कोई तलाश ना करें! महत्वपूर्ण प्रश्नों का हमारा व्यापक संकलन आपको अपने विषय ज्ञान को बढ़ाने में मदद करेगा। कक्षा 9 के हिंदी प्रश्न उत्तर का अभ्यास करने से परीक्षा में आपके प्रदर्शन में काफी सुधार हो सकता है। हमारे समाधान इस बारे में एक स्पष्ट विचार प्रदान करते हैं कि उत्तरों को प्रभावी ढंग से कैसे लिखा जाए। हमारे ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार) प्रश्न उत्तरों को अभी एक्सप्लोर करें उच्च अंक प्राप्त करने के अवसरों में सुधार करें।

 

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Aisi Bhi Baatein Hoti Hai Chapter 4 NCERT Solutions

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा?
(क) अनुशासन और नियम के साथ जीना
(ख) भय और संशय के साथ जीना
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
(घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
उत्तर – (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
तर्क – लता जी ने अपने पिताजी से स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना सीखा है। उनके पिता जी हमेशा उन्हें हर परिस्थिति में खुद से लड़ना सिखाया है। उन्होंने लता जिको सिखाया कि यदि उन्हें कोई बात सही लगती है तो वे उस बात पर खड़ी रहें। किसी के आगे हाथ न फैलाएं।

2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का द्योतक है
(क) संघर्ष
(ख) निराशा
(ग) भौतिकता
(घ) कर्तव्यनिष्ठा
उत्तर – (घ) कर्तव्यनिष्ठा
तर्क – पिता की मृत्यु के बाद लता जी ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। उन्होंने लगातार काम करते हुए अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिता दी। यह उनके कर्तव्यनिष्ठ होने का प्रमाण है।

3. “बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है…” ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?
(क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव
(ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी
(ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
उत्तर – (घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
तर्क – पाठ में लता जी ने स्पष्ट किया है कि मंगलागौर जैसे उत्सवों में महिलाएं इकट्ठी होती है और नाच-गाने के साथ उत्सव मनाती हैं। इस तरह के उत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक रूप से लोगों को जोड़ने का माध्यम है।

4. “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” – इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।
(ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।
(ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
उत्तर – (घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
तर्क – इस काहवत का अर्थ है कि “गाँव तो बह जाता है, लेकिन नाम रह जाता है ” कहने का तात्पर्य यह है कि मनुष्य का जीवन तो नश्वर है परन्तु उसके कर्मों को सदियों तक याद रखा जाता है।

5. कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे?
(क) औपचारिक
(ख) कामकाजी
(ग) आत्मीय
(घ) प्रतिस्पर्धात्मक
उत्तर – (ग) आत्मीय
तर्क – लता जी ने पाठ में स्पष्ट बताया है कि कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ उनके संबंध घर की तरह थे। उनका लता जी के घर में आना जाना लगा रहता था। वे उनके साथ जमीन पर बैठकर बातें करती थी और उन्हें अपने घर का सदस्य मानती थी।

6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।
(ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है।
(ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
उत्तर – (घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
तर्क – संगीत में अपार शक्ति होती है। वह कुछ अप्रत्याशित प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। उस्ताद अली अकबर खाँ का उदाहरण देते हुए लता जी ने स्पष्ट किया था उनके सच्चे सुरों को वाध्ययंत्र भी सहन नहीं कर स्का और तार टूट गए। यह संगीत की ही अपार शक्ति का उदाहरण है।

7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यतः कैसी है?
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
(ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध
(ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति
(घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली
उत्तर – (क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
तर्क – पुरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह सादगी से पूर्ण है क्योंकि उनका जीवन बहुत ही सरल व् स्वभाव बहुत ही विनम्र रहा है। परिवार के प्रति पूर्ण निष्ठा से उनमें समर्पण की भावना दिखती है। और किसी के सामने किसी भी परिस्थिति में हाथ न फैलाना उनके आत्मसम्मान की झलक देता है।

मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
1. “पिताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न?’… इसके बाद वे कहते थे कि ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।‘’’ यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे?
(संकेत- यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान ?)
उत्तर – यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। लता जी बताती हैं कि वे लोग बचपन में जब बहुत शरारत करते थे, तब उनके पिताजी सबको बुलाकर अपने सामने खड़ा कर देते थे। वे केवल उन सभी को गंभीरता से देखते थे कि इतने में ही सब भाई-बहनों का रोना शुरू हो जाता था। सभी भाई-बहन समझ जाते थे कि उनको बुलाया किसलिए गया है, उन्होंने क्या गलती की है जो उन्हें सुधारनी है। उनके पिताजी उस समय उनसे केवल पूछते थे कि वे समझ गए है न? और इस पर वे भाई-बहन केवल यही कह पाते थे कि वे समझ गए हैं। इसके बाद पिताजी भाई-बहनों को बाहर जाकर खेलने को कहते थे। यह कठोरता के साथ अनुशासन का सही तालमेल दिखता है।

2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?
उत्तर – लता मंगेशकर जी ने अपने पिता जी से सबसे ज्यादा आत्मसम्मान के साथ जीने की प्रेरणा ली। लता मंगेशकर जी के अनुसार उनके पिता जी उन्हें जो संस्कार दिए उससे लता मंगेशकर जी को जिंदगी में सही बातों पर खड़े रहने की हिम्मत मिली। जो भी चीजें लता मंगेशकर जी कर पाई, उसमें वे अपने बाबा का संस्कार मानती हैं। उन्होंने अपने पिता जी में यह बात देखी थी कि हर हालात में कैसे रहना चाहिए। और लता मंगेशकर जी के पिताजी ने ही उन्हें सिखाया था कि अगर कोई बात उन्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।
व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव स्पष्ट दिखता है। वे अपने काम के प्रति हमेशा समर्पित रही। उन्होंने अपने परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। उनका सरल स्वभाव, सादगीपूर्ण जीवन और अपने काम के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहना उनके पिता के संस्कारों का ही परिणाम है।

3. “मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।” ‘नाम आगे बढ़ाने’ का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है?
उत्तर – लता मंगेशकर जी के लिए ‘नाम आगे बढ़ाने’ का अर्थ केवल प्रसिद्धि पाना नहीं है। उनके लिए ‘नाम आगे बढ़ाने’ का अर्थ है अपने पिता की सीख, आदर्श और मूल्यों को आगे बढ़ाना। उन्होंने अपने जीवन में ईमानदारी से कार्य करके, समर्पण के साथ परिवार की जिम्मेदारी निभाकर और स्वाभिमान के साथ जीवन जीकर अपने पिता के नाम को सम्मान दिया। ‘नाम आगे बढ़ाने’ का लता जी के लिए महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है। उन्होंने अपने संगीत और व्यवहार से यह सिद्ध कर दिया कि ‘नाम आगे बढ़ाने’ का अर्थ केवल प्रसिद्धि पाना नहीं है बल्कि अपने आदर्शों और मूल्यों के साथ जीवन को आगे बढ़ाने से है।

4. किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?
उत्तर – किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध बहुत ही आत्मीयता वाले थे। उनके साथ कोरस में गाना गाने वाली लड़कियों को वो अपने घर की तरह मानती थी। उनके साथ जमीन पर बैठकर बातें करती थी। वे सभी लता जी के घर आते -जाते रहती थी। संगीतकारों और अन्य कलाकारों के साथ उनका व्यवहार आदरपूर्ण था। वे सभी के घर दीपावली की मिठ्ठाइयों को देने जाती थी। वे सभी के साथ मिलकर काम करती थी। उनमें अहंकार बिलकुल भी नहीं था। लता जी के सम्बन्ध उनके सहयोगियों के साथ केवल पेशेवर ही नहीं थे बल्कि वे उनके साथ भावनात्मक और पारिवारिक तरीके से जुडी थी।

साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व/उभरती छवि

साक्षात्कार से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं? चुनकर लिखिए—

दृढ़ता, कृतज्ञता, दार्शनिकता, समर्पण, उत्तरदायित्व, स्पष्टता, एकाग्रता, साधना, स्पष्टवादिता, विनम्रता, कठोरता, सरलता, आत्मविश्वास, उत्सवप्रियता, श्रद्धा, मानवता, अमरता, घमंड, स्वाभिमान

1. “मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।”
उत्तर – समर्पण, उत्तरदायित्व, एकाग्रता, साधना
यह पंक्ति लता जी का उनके काम के प्रति समर्पण, एकाग्रता और साधना को दर्शाती है कि काम के अलावा उनका किसी और जगह पर ध्यान ही नहीं जाता था। अपने काम के प्रति अपना उत्तरदायित्व निभाने से कभी पीछे नहीं हटी।

2. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूर नहीं है।”
उत्तर – स्पष्टता, आत्मविश्वास, स्वाभिमान
प्रस्तुत पंक्ति से स्पष्ट होता है कि लता जी ने अपने पिता से किसी भी बात को सही ढंग से स्पष्ट रूप से व्यक्त करने, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और स्वाभिमान के साथ जीना सीखा है।

3. “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैस ही है।”
उत्तर – कृतज्ञता, विनम्रता, सरलता
उपरोक्त पंक्ति से पता चलता है कि लता जी अपनी प्रसिद्धि के लिए अपने कठिन परिश्रम को नहीं बल्कि लोगों के प्रेम को आधार मानती हैं। यह उनका अपने प्रशंसकों के प्रति आभार और सरलता दर्शाता है। उनका सरल व् विनम्र स्वभाव ही है जो लोगों का उनके लिए अपार प्रेम उमड़ता है।

4. “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं ।”
उत्तर – दार्शनिकता, स्पष्टवादिता
“मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं ।” इस वाक्य से लता जी ने स्पष्ट किया है कि वे जीवन की सच्चाई को स्पष्ट रूप से स्वीकार करती हैं। वे स्पष्ट कहती हैं कि शरीर नश्वर है किन्तु कर्म अमर है – यह उनके दार्शनिक दृष्टिकोण का प्रमाण है।

मेरे प्रश्न

नीचे दिए गए वाक्य को पढ़िए—
“संगीत में असीम शक्ति और अप्रत्याशित रचने की क्षमता होती है।”
इस वाक्य के आधार पर अनेक प्रश्न बनाए जा सकते हैं, जैसे-
1. लता मंगेशकर ने संगीत के विषय में क्या कहा?
उत्तर – लता मंगेशकर ने संगीत के विषय में कहा कि संगीत में वह असीम शक्ति है कि वह ऐसा कुछ जरूर रच देता है, जिसकी आशा किसी ने न की हो। इसका अनुभव भी कई बार लता मंगेशकर जी को हुआ है। कई बार अपने पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर को सुनते हुए भी उन्हें कुछ ऐसा अनुभव होता था जिसकी आशा वो नहीं कर सकती थी।
लता मंगेशकर जी उदाहरण देती हैं कि वे मुंबई में उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित रविशंकर का एक कंसर्ट सुन रही थी। वे श्रोताओं की पंक्ति में बिल्कुल आगे बैठी हुई अली अकबर भाई का वादन सुन रही थी और उनका वादन अत्यधिक मंत्रमुग्ध करने वाला था। लगभग पचास-साठ मिनट कि ‘ठन’ से उनके सरोद (बीन की तरह का एक प्रकार का बाजा) का एक तार टूटा और उन्हें बजाना बंद करना पड़ा। जब लता मंगेशकर जी ने उनके वादन की प्रशंसा की और कहा कि काश वे पूरी तरह राग को अंत तक सुन पाते। इस पर अली अकबर जी ने कहा था कि जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है। इस प्रसंग से लता मंगेशकर जी को यह लगता है कि संगीत की सीमा इतनी गहरी है कि तार भी शुद्ध स्वर के प्रहार को सह नहीं पाया और टूटकर अलग हो गया। इन बातों से लता मंगेशकर जी का इस बात पर विश्वास करने का मन होता है कि हो सकता है मियाँ तानसेन से कोई ऐसा सच्चा सुर जरूर लगा होगा कि बारिश हो गई या दीपक जल उठे!

2. लता मंगेशकर ने संगीत की क्या विशेषताएँ बताई हैं?
उत्तर – लता मंगेशकर ने संगीत की कई विशेषताएँ बताई हैं –
संगीत में असीम शक्ति होती है। जो किसी के भी मन की गहराइयों को प्रभावित कर सकती है।
संगीत में अप्रत्याशित प्रभाव उत्पन्न करने की क्षमता होती है। जो कभी-कभी ऐसे अनुभव करा जाते हैं जिसको समझना सभी के बीएस की बात नहीं होती।
संगीत एक ऐसी कला है जो किसी को भी मंत्रमुग्ध कर देता है। श्रोता संगीतकार की धुन में खो जाता है।

3. लता मंगेशकर ने संगीत की क्षमता का आकलन करते हुए क्या कहा?
उत्तर – लता मंगेशकर ने संगीत की क्षमता का आकलन करते हुए कहा कि संगीत में असीम शक्ति होती है और अप्रत्याशित प्रभाव उत्पन्न करने की क्षमता होती है। संगीत को केवल मनोरंजन का साधन नहीं समझा जा सकता क्योंकि संगीत किसी की भी आंतरिक गहराइयों को प्रभावित कर सकता है। संगीत सामाजिक मेलजोल बढ़ाने का माध्यम है। उस्ताद अली अकबर खाँ ने अपने सुर को इतने पवित्र भाव से इतना डूबकर लगाया कि सरोद का तार टूट गया। इस प्रसंग से लता मंगेशकर जी को यह लगता है कि संगीत की सीमा इतनी गहरी है कि तार भी शुद्ध स्वर के प्रहार को सह नहीं पाया और टूटकर अलग हो गया। उनका इस बात पर विश्वास करने का मन होता है कि हो सकता है मियाँ तानसेन से कोई ऐसा सच्चा सुर जरूर लगा होगा कि बारिश हो गई या दीपक जल उठे। कहने का तात्पर्य यह है कि लता जी संगीत को एक अद्भुत शक्तिशाली व् प्रभावशाली कला मानती है।

4. उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित रविशंकर के कंसर्ट में हुई घटना से संगीत के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर – उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित रविशंकर के कंसर्ट में हुई घटना से संगीत के बारे में पता चलता है कि संगीत में अद्धभुत असीम शक्ति होती है। कंसर्ट में जब उस्ताद अली अकबर खाँ पूरी तन्मयता से सरोद बजा रहे थे तो उसका एक तार टूटा और उन्हें बजाना बंद करना पड़ा। इस पर अली अकबर जी बोले कि जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है। उन्होंने अपने सुर को इतने पवित्र भाव से इतना डूबकर लगाया कि सरोद का तार टूट गया। इस प्रसंग से ज्ञात होता है कि यदि संगीत पूरी तन्मयता, श्रद्धा, समर्पण व् भावना से बजाय जाए तो संगीत का प्रभाव अत्यधिक प्रभावशाली व् असाधारण हो सकता है।

आपने देखा कि अनेक प्रश्नों का एक ही उत्तर हो सकता है और एक ही उत्तर से अनेक प्रश्न बना जा सकते हैं।
अब नीचे दिए गए उत्तरों से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो)—
1. उत्तर : ‘मंगलागौर’जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।
2. उत्तर : लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।

1. उत्तर : ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।
दिए गए उत्तर के निम्नलिखित प्रश्न हो सकते हैं –
– ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों की क्या भूमिका होती है ?
– ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियाँ क्या-क्या करती हैं ?
– ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में किस तरह का वातावरण होता है ?
– ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों का सामाजिक प्रभाव क्या पड़ता है?

2. उत्तर : लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।
दिए गए उत्तर के निम्नलिखित प्रश्न हो सकते हैं –
– लता जी के अनुसार तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की क्या विशेषता थी ?
– पुराने संगीतकारों की कौन सी विशेषताएँ उन्हें अद्वितीय बनाती थी ?
– लता जी का पुराने संगीतकारों के बारे में क्या मत है ?

मेरे अनुभव मेरे विचार

अपने अनुभवों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
1. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।”
क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्यों?
उत्तर – अक्सर ऐसी कई स्थितियाँ लोगो के जीवन में आती हैं जब उन्हें किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ता है। मेरा भी एक वाकय है – एक बार मैं और मेरे कई दोस्त घूमने पहाड़ों पर गए थे। वहाँ हमें एक सेब का बगीचा दिखा जिसमें लाल-लाल सुंदर सेब लगे थे। मेरे दोस्तों ने इरादा बनाया कि वे सेब चुरा लेंगे पर मेरा मन इस बात को नहीं मान रहा था। सभी ने सेब तोड़ने शुरू किए और मैं एक ओर उनसे दूर खड़ी हो गई। परन्तु उसी समय बगीचे का माली आ गया और सभी दोस्तों को खूब डाँट पड़ी। कुछ देर के लिए मुझे जरूर लगा कि मैं सभी से अकेले हो गई हूँ परन्तु परिणाम देखकर मुझे ख़ुशी हुई कि मैने अपने मन की बात सुन कर अच्छा किया।

2. “बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।”
आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वत: करते होंगे. उनके विषय में बताइए |
उत्तर – मेरे परिवार में कुछ ऐसी सीखें हमें बचपन में ताऊ जी द्वारा दी गई हैं जिनका अनुसरण स्वतः ही हो जाता है। ताऊ जी अक्सर कहा करते थे कि सादा जीवन उच्च विचार। उनकी ऐ सीख जीवन में हमारे बहुत काम आई क्योंकि इस दिखावटी दुनिया से बचाने में इसी मूल मंत्र ने हमें राह दिखाई। इसके अलावा बड़ों का सम्मान, छोटों को प्रेम, जीव-जंतुओं का ध्यान रखना, आस-पास सदा सफाई रखना आदि ऐसी बहुत सी आदतें बचपन में ताऊजी ने डाली कि अब स्वतः ही इन चीजों को जीवन में स्थान मिल गया है।

भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

मुहावरे
“मगर किसी के आगे जाकर हाथ नहीं पसारना है।”
उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित अंश मुहावरा है। हाथ पसारना या फैलाना का अर्थ है— कुछ माँगना या याचना करना। हाथों से जुड़े अनेक मुहावरे आपने पढ़े और सुने होंगे। ऐसे ही कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए—

  • हाथ में आना
  • हाथ का मैल होना
  • हाथ से हाथ मिलाना
  • हाथ साफ करना
  • हाथ से निकल जाना
  • हाथ धो बैठना

उत्तर –
हाथ में आना – क़ब्ज़े में आना, क़ाबू में आना, नियन्त्रण में आना
माँ के आते ही राहुल का गुस्सा गायब हो गया और वह माँ के हाथ में आ गया।

हाथ का मैल होना – अति तुच्छ होना
पैसे कमाना बहुत मुश्किल काम है परन्तु संस्कारों के आगे पैसा केवल हाथ का मैल है।

हाथ से हाथ मिलाना – साथ देना, भरोसा दिलाना
राम राहुल का सहपाठी है इसलिए वह उसके साथ हाथ से हाथ मिलाकर चलता है।

हाथ साफ करना – चोरी करना या किसी वस्तु को धोखे से अपने कब्जे में ले लेना
राजू ने अँधेरे का फायदा उठा कर कई घरों में हाथ साफ किए।

हाथ से निकल जाना – क़ाबू से बाहर होना
युद्ध के कारण बहुत सी समस्याएँ हाथ से निकल जाती है।

हाथ धो बैठना – नाउम्मीद हो जाना, मायूस हो जाना
समय रहते जब परिश्रम न किया जाए तो अक्सर बहुत सी चीजों से हाथ धो बैठना पड़ता है।

6. समय-रेखा

लता जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ कालानुक्रम में दर्शाइए।

भाषा संगम
“उस दिन घर में संगीत की सभा होती थी।”

नीचे ‘संगीत’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
संगीत (हिंदी); सङ्गीतम् (संस्कृत); संगीत (पंजाबी); मूसीकी, मौसिकी (उर्दू); मूसीकी, संगीत (कश्मीरी); संगीत ( सिंधी); संगीत कला (मराठी); संगीतकळा (ला) (गुजराती); संगीत (कोंकणी); संगीत (नेपाली); संगीत (बांग्ला); संगीत (असमिया); ईशै (मणिपुरी); संगीत (ओड़िआ); संगीतमु (तेलुगु); संगीतम्, इशै (तमिल); संगीतम् (मलयालम); संगीत (कन्नड़)।

  • इनके अतिरिक्त यदि आप ‘संगीत’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
  • उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp

इनके अतिरिक्त यदि आप ‘संगीत’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर – हिमाचली पहाड़ी भाषा – संगीत
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
उत्तर – 
मातृभाषा (हिंदी ) – “उस दिन घर में संगीत की सभा होती थी।”
हिमाचली (पहाड़ी) – “तैस दूसा घोरा का संगीता री मंडली होंआ थी। “
 
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Class 9 Hindi Aisi Bhi Baatein Hoti Hai – Extract Based Questions (गद्यांश पर आधारित प्रश्न)

1 –
कई बातें हैं। जैसे हम लोग बचपन में जब बहुत शरारत करते थे, तब पिताजी सबको बुलाकर अपने सामने खड़ा करते थे। वे बस हमको गंभीरता से देखते थे और इतने में ही हमारा रोना शुरू हो जाता था। मतलब वे कुछ कहते नहीं थे, न ही किसी बात पर डाँट पड़ती थी; मगर हम सभी समझ जाते थे कि हमको बुलाया किसलिए गया है। पिताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न?’ इस पर हम लोग कहते थे, ‘हाँ, हम लोग समझ गए।’ इसके बाद वे कहते थे कि ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।’ इस तरह हमारे पिताजी था, जो बिना कुछ कहे ही हम भाई-बहनों को डरा देता था।
मेरे पिताजी कमाल के आदमी थे, जिन्हें मैंने हमेशा अपने काम और संगीत में डूबा हुआ ही देखा। उनकी ड्रामा कंपनी के नाटक रात नौ बजे शुरू होते थे और देर रात दो से तीन बजे तक जाकर समाप्त होते थे। इतनी देर एक नाटक में समय इसलिए लगता था कि एक नाटक के पाँच अंक होते थे। फिर उसमें लंबी-लंबी रागदारी वाले गायन की भी परंपरा थी। एक बार पिताजी जब गाना शुरू करते थे, तो खूब सीटियाँ, तालियाँ और ‘वन्स मोर’ मिलता था। बाबा माइक पर थोड़ी तेज आवाज़ में गाते थे, जो सुनने पर बहुत अच्छा लगता था। मेरे पिताजी की एक बड़ी विशेषता यह भी थी कि एक राग को गाते हुए उसमें सुर बदलकर भी अपना गायन करते थे। मतलब एक राग गाते समय किसी भी सुर को ‘सा’ (षडज) बनाकर इस तरह राग को बदल देते थे कि वह कुछ नया हो जाता था और फिर उसी समय नए राग में गाते हुए दोबारा से पहले राग और उसके सुर में वापस लौट आते थे।

प्रश्न 1 – लता जी जब बचपन में शरारत करती थी तो किससे डाँट पड़ती थी ?
(क) पिता
(ख) माँ
(ग) दादा
(घ) नाना
उत्तर – (क) पिता

प्रश्न 2 – पिता जी सबको बुलवाए कर क्या करते थे ?
(क) मारते थे
(ख) डाँटते थे
(ग) गंभीरता से देखते थे
(घ) पीटते थे
उत्तर – (ग) गंभीरता से देखते थे

प्रश्न 3 – लता ने अपने पिता को हमेशा कैसे देखा ?
(क) गुस्से में
(ख) काम और संगीत में डूबा हुआ
(ग) बच्चों को डांटते हुए
(घ) नाटकों के मंचन में
उत्तर – (ख) काम और संगीत में डूबा हुआ

प्रश्न 4 – ड्रामा कंपनी के नाटक रात नौ बजे शुरू होते थे और देर रात दो से तीन बजे तक जाकर समाप्त होते थे। इतनी देर एक नाटक में क्यों लगती थी ?
(क) एक नाटक के चार अंक होते थे
(ख) एक नाटक के दो अंक होते थे
(ग) एक नाटक के तीन अंक होते थे
(घ) एक नाटक के पाँच अंक होते थे
उत्तर – (घ) एक नाटक के पाँच अंक होते थे

प्रश्न 5 – लता जी के पिताजी की एक बड़ी विशेषता क्या थी ?
(क) कि एक राग को गाते हुए उसमें सुर बदलकर भी अपना गायन करते थे
(ख) कि वे राग को हु-ब-हु गाते थे
(ग) कि एक राग को गाते हुए वे उसमें दूसरा राग भी मिला लेते थे
(घ) कि एक राग को गाते हुए वे उसमें पूरी तरह खो जाते थे
उत्तर – (क) कि एक राग को गाते हुए उसमें सुर बदलकर भी अपना गायन करते थे

2 –
लता मंगेशकर : सबसे ज्यादा तो स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा। उन्होंने जो संस्कार दिए उससे जिंदगी में सही बातों पर खड़े रहने की हिम्मत मिली। आज मुझे इस बात की खुशी है। कि मैंने किसी से यह नहीं कहा कि आप मुझे पाँच सौ रुपये दीजिए, फलाँ चीज ला दीजिए, मुझे उसकी जरूरत है। इस तरह जो चीज मैं कर पाई, उसमें मैं अपने बाबा का संस्कार मानती हूँ। मैंने पिताजी में यह बात देखी थी कि हर हालात में कैसे रहना चाहिए। यह मेरे पिताजी ने ही मुझे सिखाया था कि अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है। इस तरह जब मैं याद करती हूँ, तो लगता है कि बाबा ऐसा कहते थे, बाबा ने यह कहा था, बाबा ने उस समय में इस तरह कोई निर्णय लिया था। यह सब मेरे बड़े काम आया है। हमने हर तरह के दिन देखे थे। पिताजी की कंपनी जब अच्छी चलती थी, तो हम सब लोग बड़े शान से रहते थे। फिर पिताजी के निधन के बाद हमें यह भी देखना पड़ा कि बुरे हालात में कैसे जीना है। मेरी माँ का भी वही संस्कार था कि कैसे भी स्वाभिमान के साथ जी लेना है, मगर किसी के आगे जाकर हाथ नहीं पसारना है।… और देखिए, ये सब बातें मेरे कितने काम आई हैं। आज मेरे पास पैसे हैं और नाम है। हम आज जहाँ रहते हैं, वह भले ही इतना छोटा-सा घर है, पर उसमें हम लोग बहुत खुश हैं। इस बात के लिए भी ईश्वर को धन्यवाद करते हैं कि बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।
यतींद्र मिश्र : बचपन में आप सभी भाई-बहन फिल्में देखकर उसकी नकल उतारते थे। किसी खास फिल्म को देखकर उसकी नकल का स्मरण करेंगी?
लता मंगेशकर : (हँसते हुए) अरे! यह तो हम सब भाई-बहन बहुत करते थे। फिल्में ही थीं, जो मनोरंजन का एक ऐसा माध्यम थीं जिनको देखकर बच्चे अपने ढंग से कुछ-कुछ करते रहते थे। मुझे याद है कि प्रभात फिल्म कंपनी की एक पिक्चर थी ‘संत तुकाराम’। फिल्म में दिखाया गया है कि तुकाराम सदेह बैकुंठ जाते हैं और उन्हें लेने ईश्वर का विमान आता है। वे यह गीत गाते हुए स्वर्ग जाते हैं— ‘अमी जातो अमचा गावा, अमचा राम-राम ध्यावा’ (मैं अपने गाँव जा रहा हूँ। सभी लोग मेरा राम-राम ले लीजिए)। हम कमरे में घर भर के गद्दे, तकिये एक ऊपर एक रखकर ऊँचा स्वर्ग बनाते थे, जिस पर चढ़कर मैं बैठती थी और वहीं से यह गीत गाती थी। नीचे कमरे में मीना, मेरे फूफा का बेटा पंढरीनाथ और आशा, ये तीनों तुकाराम के अनुयायी बनकर रोते थे और कहते थे— ‘हमें भी साथ ले लीजिए। हमें भी साथ ले चलिए ।’ (खिलखिलाकर हँसती हैं) उस समय उषा बहुत छोटी थी, इसलिए वह इन नाटकों में नहीं रहती थी। तो यह सब होता था। हम बहुत सारी फिल्मों की नकल उतारते थे, जिनमें धार्मिक फिल्में ज्यादा होती थीं क्योंकि पिताजी धार्मिक और देशभक्ति की फिल्मों के अलावा दूसरी फिल्में नहीं देखने देते थे। उनका सख्त अनुशासन था और यह सब काम चोरी चोरी तब होता था, जब पिताजी घर के बाहर हों और यह जान न पाएँ कि घर में फिल्मों का खेल खेला जा रहा है।

प्रश्न 1 – स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा लता मंगेशकर जी को किससे मिली ?
(क) गुरु से
(ख) पिता से
(ग) भाई-बहनों से
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (ख) पिता से

प्रश्न 2 – लता मंगेशकर जी ने अपने पिता से क्या सीखा ?
(क) स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा
(ख) अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है
(ग) हर हालात में कैसे रहना चाहिए
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 3 – पिताजी के निधन के बाद लता जी को क्या देखना पड़ा ?
(क) कि बुरे हालात में कैसे जीना है
(ख) कि आर्थिक स्थिति कैसे ठीक करनी है
(ग) कि परिवार की जिम्मेदारी कैसी होती है
(घ) कि भाई-बहनों को कैसे पढ़ाना है
उत्तर – (क) कि बुरे हालात में कैसे जीना है

प्रश्न 4 – पद्यांश में लता जी किस फ़िल्म के दृश्य के नाटक को याद कर रही है ?
(क) साधू तुकाराम
(ख) राजा हरिश्चंद्र
(ग) संत तुकाराम
(घ) छत्रपति शिवाजी
उत्तर – (ग) संत तुकाराम

प्रश्न 5 – लता जी और उनके भाई-बहन जिन फिल्मों की नकल उतारते थे, जिनमें ज्यादा धार्मिक फिल्में होती थीं। क्यों ?
(क) क्योंकि पिताजी धार्मिक और देशभक्ति की फिल्मों के अलावा दूसरी फिल्में नहीं देखने देते थे
(ख) क्योंकि पिताजी को केवल धार्मिक और देशभक्ति की फिल्मों की पसंद थी
(ग) क्योंकि उस समय धार्मिक और देशभक्ति की फिल्मों का ही दौर था
(घ) क्योंकि पिताजी धार्मिक और देशभक्ति फिल्मों को बनाते थे
उत्तर – (क) क्योंकि पिताजी धार्मिक और देशभक्ति की फिल्मों के अलावा दूसरी फिल्में नहीं देखने देते थे

3 –
लता मंगेशकर : नहीं, मैंने शुरू में तो फिल्मों में काम ही किया था और कुल छह या सात फिल्मों में किया था। मैं बहुत छोटी थी उस समय, जब फिल्मों की दुनिया में अभिनय के मार्फ़त ही आई। मुझे कभी अच्छा नहीं लगा मेकअप करना, लाइट के सामने जाना और काफी लोग खड़े हैं, तो उनके सामने कभी रो रहे हैं और कभी हँस रहे हैं। गा भी रहे हैं। मुझे वह कभी अच्छा नहीं लगा। अच्छी फिल्मों को देखकर सराहने का जी जरूर करता है, मगर अभिनय करने के बारे में तो सोच भी नहीं सकती। एक फिल्म हमारे यहाँ हिंदी और मराठी दोनों में बनी थी ‘छत्रपति शिवाजी । उसमें भालजी पेंढारकर थे जिन्हें मैं बाबा कहती थी। मैं उनके पास गई, हालाँकि उस वक्त तक मैंने अभिनय का काम छोड़ दिया था। मैने उनसे खुद कहा— ‘बाबा मैं चाहती हूँ कि इस फिल्म का आखिर का जो गाना है, उसमें दो लाइनें मैं भी आकर गाऊँ। तो फिर मैंने उसके हिंदी और मराठी, दोनों ही संस्करणों में बाद की दो पंक्तियाँ गाई हैं, जिन दृश्यों में मैं मौजूद भी हूँ। मैं छत्रपति शिवाजी को बहुत पसंद करती हूँ, इसलिए बस इसी फिल्म के लिए मेरा मन हुआ कि भले ही एक दृश्य में , मगर यहाँ रहा जा सकता है।
यतींद्र मिश्र : उस दौर में आपके काम की परिस्थितियाँ कैसी थीं? क्या वे आपके हिसाब से धीरे-धीरे अनुकूल होती गई अथवा वैसे ही हमेशा की तरह एक चुनौती का सबब बनी रहीं, जैसे कि वे संघर्ष के दिनों में थीं?
लता मंगेशकर : यह कह पाना मुश्किल होगा कि मेरी परिस्थितियाँ कभी बहुत अच्छी या बुरी रही हों। मैं इन सब बातों पर ध्यान नहीं देती थी। अलबत्ता मैं उस जमाने से लेकर बाद तक बहुत मेहनत से अपने काम करती थी। मुझे याद है कि मेरी रेकॉर्डिंग सुबह से रात तक चलती रहती थी। एक स्टूडियो से दूसरे और तीसरे स्टूडियो के चक्कर में ही पूरा दिन बीत जाता था| मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।
हमेशा यही बात दिमाग में घूमती थी कि किसी तरह बस मुझे अपने परिवार को देखना है। फिर वह रेकॉर्डिंग का वक्त हो या घर का खाली समय । किस तरह मैं अपने परिवार के लिए ज्यादा से ज्यादा कमाकर उनकी जरूरतें पूरी कर सकती हूँ, इसी में सारा वक्त निकल जात था।

प्रश्न 1 – लता मंगेशकर ने कितनी फिल्मों में काम किया था ?
(क) कुल चार या पाँच
(ख) कुल छः या सात
(ग) कुल आठ या नौ
(घ) एक भी नहीं
उत्तर – (ख) कुल छः या सात

प्रश्न 2 – लता मंगेशकर को क्या पसंद नहीं था ?
(क) मेकअप करना
(ख) लोगों के सामने कभी रोना, कभी हँसना
(ग) लाइट के सामने जाना
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 3 – किस फिल्म में लता जी का काम करने का मन था ?
(क) छत्रपति शिवाजी
(ख) संत तुकाराम
(ग) सावन
(घ) बरसात
उत्तर – (क) छत्रपति शिवाजी

प्रश्न 4 – लता के लिए क्यों कह पाना मुश्किल था कि उनकी परिस्थितियाँ कैसी थी ?
(क) गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी
(ख) इन सब बातों पर ध्यान नहीं देती थी
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) केवल (क)
उत्तर – (ग) (क) और (ख) दोनों

प्रश्न 5 – लता जी के दिमाग में हमेशा कौन सी बात घूमती थी ? कि किसी तरह बस मुझे अपने परिवार को देखना है। फिर वह रेकॉर्डिंग का वक्त हो या घर का खाली समय । किस तरह मैं अपने परिवार के लिए ज्यादा से ज्यादा कमाकर उनकी जरूरतें पूरी कर सकती हूँ, इसी में सारा वक्त निकल जात था।
(क) कि किसी तरह ज्यादा से ज्यादा काम करके अमीर बना जा सके
(ख) कि किसी तरह परिवार के लिए ज्यादा से ज्यादा कमाकर उनकी जरूरतें पूरी कर सके
(ग) कि किसी तरह ज्यादा से ज्यादा काम करके नाम कमाया जा सके
(घ) कि किसी तरह ज्यादा से ज्यादा अपने पिता से भी ज्यादा काम किया जाए
उत्तर – (ख) कि किसी तरह परिवार के लिए ज्यादा से ज्यादा कमाकर उनकी जरूरतें पूरी कर सके

4 –
लता मंगेशकर : यह जिस जमाने की कथाएँ हैं, जिसमें हरिदास बाबा और तानसेन जैसे महान संगीतकारों के लिए ऐसा कहा गया, तो हो सकता है कि उनकी कला में कोई सच्चा सुर या आत्मा की आवाज़ लगी होगी, तो ऐसा कुछ घट गया होगा, ऐसा हम आदर में मान लेते हैं। परंतु यह निश्चित ही हुआ होगा, यह कम से कम मैं नहीं कह सकती क्योंकि ऐसा मेरा कोई अनुभव नहीं है। हालाँकि मैं यह मानती हूँ कि संगीत में वह असीम शक्ति है कि कुछ अप्रत्याशित वह जरूर रच देता है, जिसका अनुभव भी कई बार हमें हुआ है। कई बार अपने बाबा पंडित दीनानाथ मंगेशकर को सुनते हुए भी मैं कुछ अप्रत्याशित अनुभव करती थी।
आपको एक वाकया बताती हूँ। मैं मुंबई में उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित रविशंकर का एक कंसर्ट सुन रही थी। मैं श्रोताओं की पंक्ति में बिल्कुल आगे बैठी अली अकबर भाई का वादन सुन रही थी और वे अत्यंत मंत्रमुग्ध किस्म का वादन कर रहे थे। तभी कुछ समय बीता होगा, मसलन पचास-साठ मिनट कि ‘ठन’ से उनके सरोद का एक तार टूटा और उन्हें बजाना बंद करना पड़ा। जब वे उठकर पीछे ग्रीन रूम में गए, तो उनसे मिलने मैं भी वहाँ गई। मैंने बोला, “आप बहुत सुंदर बजा रहे थे, काश कि यह तार न टूटता और हम पूरी तरह राग को अंत तक सुन पाते। इस पर अली अकबर भाई ने एक बड़ी मार्मिक बात कही, जो आज तक मुझे भूलती नहीं। वे बोले – “बहन, जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।” उन्होंने अपने सुर को इतने पवित्र भाव से इतना डूबकर लगाया कि सरोद का तार टूट गया। इस प्रसंग से मुझे यह लगता है कि संगीत की सीमा इतनी अनंत है कि तार भी शुद्ध स्वर के आघात को सह नहीं पाता, टूटकर अलग हो जाता है। आज जब उस्ताद अली अकबर खाँ या पंडित रविशंकर के संदर्भ में इन बातों को सोचती हूँ, तो इस बात पर विश्वास करने का मन होता है कि हो सकता है मियाँ तानसेन से कोई ऐसा सच्चा सुर जरूर लगा होगा कि बारिश हो गई या दीपक जल उठे!

प्रश्न 1 – लता जी मानती हैं कि संगीत में ———————– है
(क) जादू
(ख) असीम शक्ति
(ग) गहराई
(घ) सकून
उत्तर – (ख) असीम शक्ति

प्रश्न 2 – संगीत में वह असीम शक्ति है कि कुछ —————– वह जरूर रच देता है
(क) अनोखा
(ख) प्रत्याशित
(ग) अप्रत्याशित
(घ) बेहतर
उत्तर – (ग) अप्रत्याशित

प्रश्न 3 – “बहन, जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है।” किसका कथन है।
(क) संत तुकाराम
(ख) अली अकबर
(ग) छत्रपति शिवाजी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (ख) अली अकबर

प्रश्न 4 – अली अकबर के सरोद का तार क्यों टूट गया होगा ?
(क) उन्होंने सरोद के तार को बहुत जोर से बजाय
(ख) उन्होंने सरोद के तार को बहुत जोर से खींचा
(ग) उन्होंने अपने सुर को क्रोधित भाव से डूबकर लगाया
(घ) उन्होंने अपने सुर को पवित्र भाव से डूबकर लगाया
उत्तर – (घ) उन्होंने अपने सुर को पवित्र भाव से डूबकर लगाया

प्रश्न 5 – उस्ताद अली अकबर खाँ या पंडित रविशंकर के संदर्भ में लता जी को किन बातों पर विश्वास करने का मन होता है?
(क) कि हो सकता है मियाँ तानसेन ने कोई ऐसा राग गया होगा कि बारिश हो गई
(ख) कि हो सकता है मियाँ तानसेन से कोई ऐसा टोटका किया होगा कि दीपक जल उठे
(ग) कि हो सकता है संत तुकाराम से कोई ऐसा सच्चा सुर जरूर लगा होगा कि बारिश हो गई या दीपक जल उठे
(घ) कि हो सकता है मियाँ तानसेन से कोई ऐसा सच्चा सुर जरूर लगा होगा कि बारिश हो गई या दीपक जल उठे
उत्तर – (घ) कि हो सकता है मियाँ तानसेन से कोई ऐसा सच्चा सुर जरूर लगा होगा कि बारिश हो गई या दीपक जल उठे
 
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Class 9 Hindi Ganga Lesson 4 Aisi Bhi Baatein Hoti Hai Multiple Choice Questions (बहुविकल्पीय प्रश्न)

प्रश्न 1 – लता मंगेशकर जी का जन्म कहाँ हुआ ?
(क) इंदौर, उत्तरप्रदेश में
(ख) इंदौर, मध्यप्रदेश में
(ग) ईटानगर, मध्यप्रदेश में
(घ) इंदौर, नई दिल्ली में
उत्तर – (ख) इंदौर, मध्यप्रदेश में

प्रश्न 2 – कितनी वर्ष की आयु में लता मंगेशकर जी ने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली ?
(क) मात्र दो वर्ष की
(ख) मात्र सात वर्ष की
(ग) मात्र चार वर्ष की
(घ) मात्र पाँच वर्ष की
उत्तर – (घ) मात्र पाँच वर्ष की

प्रश्न 3 – लता मंगेशकर जी किसके माध्यम से ही अपने करोड़ों प्रशंसा करने वालों का एहसान मानती हैं ?
(क) यतेद्र मिश्र के
(ख) यतींद्र मिश्र के
(ग) यतद्र मिश्र के
(घ) वितींद्र मिश्र के
उत्तर – (ख) यतींद्र मिश्र के

प्रश्न 4 – लता मंगेशकर जी के पिताजी का क्या नाम था ?
(क) पं. दीनानाथ मंगेशकर
(ख) पं. दीननाथ मंगेशकर
(ग) पं. दीनाचंद मंगेशकर
(घ) पं. दीनचंद मंगेशकर
उत्तर – (क) पं. दीनानाथ मंगेशकर

प्रश्न 5 – लता मंगेशकर जी और उनके भाई-बहन जब बहुत शरारत करते थे तब उनके किसके बुलाए जाने मात्र से ही सभी बच्चों का रोना छूट जाता था?
(क) माता जी के
(ख) दादा जी के
(ग) पिता जी के
(घ) भाई साहब के
उत्तर – (ग) पिता जी के

प्रश्न 6 – लता मंगेशकर जी ने अपने पिता जी को हमेशा किसमें पूरी तरह व्यस्थ देखा?
(क) अपने नाटकों में
(ख) अपने काम और संगीत में
(ग) अपने कार्यक्रमों में
(घ) अपने रिश्तेदारों में
उत्तर – (ख) अपने काम और संगीत में

प्रश्न 7 – लता मंगेशकर जी के पिताजी की कौन सी बड़ी विशेषता थी?
(क) एक राग को गाते हुए वे उसमें सुर बदलकर भी अपना गायन करते थे
(ख) अपने काम और संगीत में ही पूरी तरह व्यस्थ रहते थे
(ग) जब वे गाना शुरू करते थे, तो उनके गाने पर खूब सीटियाँ, तालियाँ और ‘वन्स मोर’ मिलता था
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 8 – कौन सा रेकॉर्ड लता मंगेशकर जी के पिताजी ने बनाया था, जिसे मेगाफोन कंपनी ने बाजार में उतारा था?
(क) राग जयजयवंती का
(ख) राग मधुवंती का
(ग) राग जयवंती का
(घ) राग द्वंद्ववंती का
उत्तर – (क) राग जयजयवंती का

प्रश्न 9 – लता मंगेशकर जी के बचपन में मनोरंजन माध्यम क्या था ?
(क) नाटक
(ख) संगीत
(ग) फिल्में
(घ) खेल-कूद
उत्तर – (ग) फिल्में

प्रश्न 10 – लता मंगेशकर जी ने प्रभात फिल्म कंपनी की कौन सी फ़िल्म को याद किया ?
(क) ‘संत तुकाराम’
(ख) ‘संत रविदास’
(ग) ‘संत तुलसीदास’
(घ) ‘संत रामदास’
उत्तर – (क) ‘संत तुकाराम’

प्रश्न 11 – लता मंगेशकर जी ज्यादा धार्मिक फिल्मों की नकल क्यों करती थीं?
(क) क्योंकि उनके दादाजी उन्हें धार्मिक और देशभक्ति की फिल्मों के अलावा कोई दूसरी फिल्में नहीं देखने देते थे
(ख) क्योंकि उनकी माताजी उन्हें धार्मिक और देशभक्ति की फिल्मों के अलावा कोई दूसरी फिल्में नहीं देखने देते थे
(ग) क्योंकि उनके पिताजी उन्हें धार्मिक और देशभक्ति की फिल्मों के अलावा कोई दूसरी फिल्में नहीं देखने देते थे
(घ) क्योंकि उनके बही-बहनों की धार्मिक और देशभक्ति की फिल्मों के अलावा कोई दूसरी फिल्में पसंद नहीं थी
उत्तर – (ग) क्योंकि उनके पिताजी उन्हें धार्मिक और देशभक्ति की फिल्मों के अलावा कोई दूसरी फिल्में नहीं देखने देते थे

प्रश्न 12 – लता मंगेशकर जी ने को क्या पसंद नहीं था ?
(क) मेकअप करना
(ख) लाइट के सामने जाना
(ग) काफी लोगों के सामने अभिनय करना
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 13 – लता मंगेशकर जी के यहाँ कौन सी फ़िल्म हिंदी और मराठी दोनों में बनी थी ?
(क) ‘छत्रपति शिवाजी
(ख) संत तुकासाम
(ग) संभाजी महाराज
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) ‘छत्रपति शिवाजी

प्रश्न 14 – लता मंगेशकर जी के अनुसार उनकी परिस्थितियाँ कैसी थी यह बताना उनके लिए क्यों मुश्लिक था?
(क) क्योंकि उन्हें सब बातों का मतलब नहीं पता था
(ख) क्योंकिउनके पिता जी ने इन सब बातों पर ध्यान नहीं देने को कहा था
(ग) क्योंकि वे इन सब बातों पर ध्यान नहीं देती थी
(घ) क्योंकि वे अपने काम में बहुत व्यस्त रहती थी
उत्तर – (ग) क्योंकि वे इन सब बातों पर ध्यान नहीं देती थी

प्रश्न 15 – 1949-50 में लता मंगेशकर जी के फिल्मों से संबंधित सांगीतिक जीवन की शुरुआत में कौन म्यूजिक डायरेक्टर थे?
(क) खेमचंद प्रकाश
(ख) हुस्नलाल-भगतराम
(ग) शंकर-जयकिशन
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 16 – लता मंगेशकर जी के घर में नवरात्रि कैसे मनती थी?
(क) नवरात्रि के पहले दिन वे ‘गुड़ि पड़वा’ मनाते थे।
(ख) घर में बाहर ‘गुड़ि’ बाँधते थे और कलश स्थापना करते थे
(ग) सूर्योदय के समय ही ‘गुड़ि’ पर बताशों की माला या हार बनाकर चढ़ाई जाती थी , जिसे सूर्यास्त होने तक उतार लिया जाता था और प्रसाद के रूप में घर के सभी सदस्यों में बाँट लिया जाता था
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 17 – अधिकांश प्रदेशों में पर्वों व अनुष्ठानों से सम्बंधित कौन से गीत घर-घर में गाए जाने का प्रचलन रहा है ?
(क) होली के मौके पर फागुन में गाया जाने वाला गीत और धमार
(ख) बिहार में छठ पूजा पर छठ के गीत
(ग) जन्माष्टमी और रामनवमी में ईश्वर के जन्म के कारण सोहर और बधावा
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 18 – लता मंगेशकर जी ने हरिदास बाबा और तानसेन जैसे महान संगीतकारों के लिए कही जाने वाली जनश्रुतियों के लिए क्या कहा ?
(क) हो सकता है कि उनकी कला में कोई सच्चा सुर या आत्मा की आवाज़ हो
(ख) हो सकता है कि उनकी कला में कोई जादू हो
(ग) हो सकता है कि उनकी कला में कोई अनोखा गुण हो
(घ) हो सकता है कि उनकी कला में कोई विशिष्ठ बात हो
उत्तर – (क) हो सकता है कि उनकी कला में कोई सच्चा सुर या आत्मा की आवाज़ हो

प्रश्न 19 – लता मंगेशकर जी संगीत के लिए क्या मानती थी ?
(क) कि संगीत वह अद्भुत कला है जिसे हर कोई महसूस नहीं कर सकता
(ख) कि संगीत में वह असीम शांति है कि मन को शांत कर देता है
(ग) कि संगीत में वह असीम शक्ति है कि वह ऐसा कुछ जरूर रच देता है
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (ग) कि संगीत में वह असीम शक्ति है कि वह ऐसा कुछ जरूर रच देता है

प्रश्न 20 – लता मंगेशकर जी मुंबई में किसका कंसर्ट सुन रही थी?
(क) उस्ताद अली अकबर खाँ का
(ख) पंडित रविशंकर का
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) केवल (क)
उत्तर – (ग) (क) और (ख) दोनों
 
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Aisi Bhi Baatein Hoti Hai Extra Question Answers (अतिरिक्त प्रश्न उत्तर)

प्रश्न 1 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में किस विषय का वर्णन किया गया है?
उत्तर – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ पाठ में लेखक ने लता मंगेशकर जी के साथ हुए एक साक्षात्कार का अद्धभुत वर्णन किया है। पाठ में बताया गया है कि अपनी आवाज़ से भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कोने-कोने में अपनी पहचान बनाने वाली ‘भारत रत्न’ लता मंगेशकर संगीत के संसार का वह नाम हैं जिनके विषय में यदि बात न हो तो भारतीय संगीत की बात अधूरी रह जाएगी। इंदौर, मध्यप्रदेश में जन्मी लता मंगेशकर ने मात्र पाँच वर्ष की आयु में अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली और जीवनपर्यंत संगीत के प्रति समर्पपित रहीं। जीवन के अनेक उतार-चढ़ाव व संघर्षों के होते हुए भी लता मंगेशकर ने संगीत और परिवार के प्रति अपने उतरदायित्व व को निभाया। 

प्रश्न 2 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी के विनम्र स्वभाव का पता कैसे चलता है?
उत्तर – लता मंगेशकर जी से जब उनके असंख्य अच्छा चाहने वालों, जो उनके संगीत को सुनने के लिए दीवानगी की हद तक अपने आप को सौंपने के लिए तैयार हो जाते थे और फिल्म संगीत के प्रति आदर का भाव रखने वाले सभी देशवासियों की ओर से प्रश्न पूछने की आज्ञा माँगी जाती हैं तो वे कहती हैं कि वे पूरी कोशिश करेंगीं कि जो कुछ भी उन्होंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे वे बता सकें। यतींद्र मिश्र के माध्यम से ही वे अपने करोड़ों प्रशंसा करने वालों का एहसान मानती हैं कि जो उन सभी ने उन्हें इतना प्रेम और सम्मान दे रखा है। लता मंगेशकर जी को तो यह भी लगता है कि जितना प्रेम उन्हें मिला है, शायद गाकर उतना एहसान वे अपने प्रशंसा करने वालों के प्रति जता नहीं पाई हैं। अपनी सफलता का पूरा श्रय जनता को देना विनम्रता की मिसाल है। 

प्रश्न 3 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर की किन स्मृतियों को उजागर करती हैं?
उत्तर – लता मंगेशकर जी और उनके भाई-बहन जब बहुत शरारत करते थे तब उनके पिता जी के बुलाए जाने मात्र से ही सभी बच्चों का रोना छूट जाता था। उनके पिताजी उस समय उनसे केवल पूछते थे कि वे समझ गए है न? और इस पर वे भाई-बहन केवल यही कह पाते थे कि वे समझ गए हैं।  इसके बाद पिताजी भाई-बहनों को बाहर जाकर खेलने को कहते थे। इस तरह उनके पिताजी बिना कुछ कहे ही सभी भाई-बहनों को डरा देते थे।
लता मंगेशकर जी के पिताजी कमाल के आदमी थे, उन्होंने अपने पिता जी को हमेशा अपने काम और संगीत में ही पूरी तरह व्यस्थ देखा। उनके पिता जी की ड्रामा कंपनी के नाटक रात नौ बजे शुरू होते थे और समाप्त होते-होते देर रात दो से तीन बज जाते थे। एक बार जब लता मंगेशकर जी के पिताजी गाना शुरू करते थे, तो उनके गाने पर खूब सीटियाँ, तालियाँ और ‘वन्स मोर’ मिलता था। लता मंगेशकर जी के पिताजी किसी भी राग को अपने तरीके से बदल कर उसे नए ढंग से प्रस्तुत करते थे। 

प्रश्न 4 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी ने अपने पिता से क्या-क्या सीख ली?
उत्तर – लता मंगेशकर जी ने अपने पिता जी से सबसे ज्यादा आत्मसम्मान के साथ जीने की प्रेरणा ली। लता मंगेशकर जी के अनुसार उनके पिता जी उन्हें जो संस्कार दिए उससे लता मंगेशकर जी को जिंदगी में सही बातों पर खड़े रहने की हिम्मत मिली। उन्होंने अपने पिता जी में यह बात देखी थी कि हर हालात में कैसे रहना चाहिए। और लता मंगेशकर जी के पिताजी ने ही उन्हें सिखाया था कि अगर कोई बात उन्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है। किसी भी कठिनाई में लता मंगेशकर जी अपने पिता जी की बातों को याद करते हुए हल खोजने का प्रयास करती थी। पिता जी की बातें और सलाह लता मंगेशकर जी के बहुत काम आया। लता मंगेशकर जी कहती हैं कि उन्होंने हर तरह के दिन देखे थे। जब उनके पिताजी की कंपनी अच्छी चलती थी, तो वे सब लोग बड़े शान से रहते थे। फिर जब उनके पिताजी का निधन हो गया उसके बाद उन्हें बुरे हालात में कैसे जीना है, यह भी देखना पड़ा। 

प्रश्न 5 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी ने अपनी माँ से क्या सीख ली?
उत्तर – लता मंगेशकर जी की माँ का भी वही संस्कार था कि चाहे कैसी भी परिस्थिति हो आत्मसम्मान के साथ ही जीना है, मगर किसी के आगे जाकर हाथ नहीं फैलाना है। अर्थात लता मंगेशकर जी की माँ ने भी उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीना सीखाया, चाहे  परिस्थिति हो। और लता मंगेशकर जी बड़े गर्व के साथ कहती हैं कि उनके माता पिता की ये सब बातें उनके बहुत काम आई हैं। जिनके कारण आज लता मंगेशकर जी के पास पैसे हैं और नाम है। वे आज जहाँ रहते हैं, वह भले ही इतना छोटा-सा घर है, पर उसमें वे लोग बहुत खुश हैं। इस बात के लिए भी लता मंगेशकर जी ईश्वर को धन्यवाद करती हैं कि उनके पिता ने जैसा सिखाया था, उस पर सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।

प्रश्न 6 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी बचपन में किन फिल्मों की नकल उतारती थी? कोई उदाहरण दे कर समझाओ।
उत्तर – बचपन में वे सभी भाई-बहन बहुत सारी फिल्मों की नकल उतारते थे, जिनमें धार्मिक फिल्में ज्यादा होती थीं क्योंकि उनके पिताजी उन्हें धार्मिक और देशभक्ति की फिल्मों के अलावा कोई दूसरी फिल्में नहीं देखने देते थे। इस विषय पर उनका सख्त अनुशासन था। इसलिए फिल्मों की नकल उतारने जैसा काम चोरी चोरी तब होता था, जब उनके पिताजी घर के बाहर होते थे ताकि वे यह जान न पाएँ कि घर में बच्चों के द्वारा फिल्मों का खेल खेला जा रहा है। उस समय फिल्में ही एक मनोरंजन का ऐसा माध्यम थीं जिनको देखकर बच्चे अपने ढंग से कुछ-कुछ करते रहते थे।
उदाहरण – लता मंगेशकर जी, प्रभात फिल्म कंपनी की एक पिक्चर ‘संत तुकाराम’ को याद करते हुए कहती हैं कि फिल्म में दिखाया गया है कि तुकाराम शरीर के साथ ही स्वर्ग जाते हैं और उन्हें लेने ईश्वर का वाहन आता है। उस फ़िल्म में वे यह गीत गाते हुए स्वर्ग जाते हैं— ‘अमी जातो अमचा गावा, अमचा राम-राम ध्यावा’ अर्थात मैं अपने गाँव जा रहा हूँ। सभी लोग मेरा राम-राम ले लीजिए। उस दृश्य को दोहराते हुए लता मंगेशकर जी और उनके भाई-बहन कमरे में पुरे घर के गद्दे, और तकिये एक के ऊपर एक रखकर ऊँचा स्वर्ग बनाते थे, जिस पर चढ़कर लता मंगेशकर जी बैठती थी और वहीं से यह गीत गाती थी। नीचे कमरे में मीना, उनके फूफा का बेटा पंढरीनाथ और आशा, ये तीनों तुकाराम के पीछे चलने वाले शिष्य बनकर रोते थे और कहते थे कि उन्हें भी साथ ले लीजिए। उन्हें भी साथ ले चलिए। 

प्रश्न 7 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी को अगर किसी फिल्म में अभिनय करने को कहा जाता, तो वह कौन-सी फिल्म होती जिसमें वे काम करना पसंद करतीं?
उत्तर – लता मंगेशकर जी ने शुरू में तो फिल्मों में ही काम किया था और उन्होंने कुल छह या सात फिल्मों में काम किया था। वे उस समय बहुत छोटी थी, जब फिल्मों की दुनिया में उन्हें अभिनय का ज्ञान हुआ। उन्हें कभी मेकअप करना, लाइट के सामने जाना अच्छा नहीं लगा और वहाँ काफी लोग खड़े रहते थे, तो उनके सामने कभी रो रहे हैं, कभी हँस रहे हैं, गा भी रहे हैं। यह सब उन्हें कभी अच्छा नहीं लगा। उनके यहाँ एक फ़िल्म हिंदी और मराठी दोनों में बनी थी ‘छत्रपति शिवाजी’। उसमें भालजी पेंढारकर थे जिन्हें लता मंगेशकर जी बाबा कहती थी। लता मंगेशकर जी उनके पास गई, जबकि उस वक्त तक उन्होंने अभिनय का काम छोड़ दिया था। फिर भी लता मंगेशकर जी ने उनसे खुद कहा कि वे इस फिल्म के आखिर के गाने की दो लाइनें दृश्य में आ कर गाना चाहती हैं। तो फिर लता मंगेशकर जी ने उसके हिंदी और मराठी, दोनों ही संस्करणों में बाद की दो पंक्तियाँ गाई हैं, जिन दृश्यों में वे मौजूद भी हैं। 

प्रश्न 8 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी के काम की परिस्थितियाँ कैसी थी?
उत्तर – लता मंगेशकर जी कभी परिस्थितियों पर ध्यान नहीं देती थी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे उस जमाने से लेकर बाद तक बहुत मेहनत से अपने काम करती थी। वे याद करते हुए कहती हैं कि उनकी रेकॉर्डिंग सुबह से रात तक चलती रहती थी। एक स्टूडियो से दूसरे और फिर तीसरे स्टूडियो के चक्कर में ही उनका पूरा दिन बीत जाता था। उन्हें अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की खबर ही नहीं रहती थी। उन्हें किसी तरह बस अपने परिवार का ध्यान रखना है, उनके दिमाग में बस यही बात घूमती थी, फिर वह रेकॉर्डिंग का वक्त हो या घर का खाली समय, वे इसी बात की चिंता में लगी रहती थी कि किस तरह वे अपने परिवार के लिए ज्यादा से ज्यादा कमाकर उनकी जरूरतें पूरी कर सकती हैं, इसी में उनका सारा वक्त निकल जाता था। 

प्रश्न 9 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी परिवार के प्रति पूर्णतयः समर्पित थी। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – लता मंगेशकर जी को रेकॉर्डिंग से या उसकी तकलीफों से इतना फर्क नहीं पड़ता था, जितना इस बात से पड़ता था कि आने वाले कल में उनके कितने गीत रेकॉर्ड होने हैं। या किसी फिल्म के खत्म होने के साथ उन्हें नए कॉन्ट्रेक्ट की दूसरी नई फिल्मों के गाने कब रेकॉर्ड करने हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि लता मंगेशकर जी को काम और अपने परिवार की जरूरतों के अलावा किसी और की चिंता नहीं रहती थी। 

प्रश्न 10 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी का ऐसा कौन सा सपना था जिसे वे पूरा करना चाहती थी?
उत्तर – जब लता मंगेशकर जी के पिताजी जीवित थे और जब वे अपने कार्यक्रमों के लिए तैयार होते थे, तो उनको जितने मेडल मिले थे, वे अपने कपड़ों पर सीने के बाईं तरफ उन्हें लगाते थे। उस समय ऐसा जमाना था, जिसमें यह प्रचलन रहा कि कलाकार लोग अपने प्रदर्शनों में मिले हुए मेडल पहनकर ही बैठते थे। लता मंगेशकर जी को जगह तो याद नहीं है, परन्तु उन्हें यह ठीक से याद है कि उनके पिताजी के अलावा बाहर के किसी कलाकार को जिसे सबसे पहले उन्होंने गाते हुए सुना था, वह पंडित कुमार गंधर्व थे। कुमार गंधर्व जी जब काली शेरवानी पहनकर और अपने ढेर सारे मेडल लगाकर गाने के लिए बैठे, तो वह बात लता मंगेशकर जी को बहुत पसंद आई थी। लता मंगेशकर जी को तब हमेशा लगता था कि जब वे बड़ी हो जाएंगी, तब उन्हें भी ऐसे ही मेडल मिलेंगे, जिसे लगाकर वे भी किसी कार्यक्रम में जाएंगी।

प्रश्न 11 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी के अनुसार समय के चक्र के साथ हेर-फेर से क्या बदलाव आ सकते हैं ?
उत्तर – बहुत सारे ऐसे गाने लता मंगेशकर जी को याद हैं जिसमें कुछ विशेष प्रभावों को देने के लिए अनिल विश्वास, श्याम सुंदर, सज्जाद हुसैन, सलिल चौधरी और सी. रामचंद्र ने कुछ नए तरीके और अजीबोगरीब टोटके आजमाए थे, जिनसे गीतों में वह प्रभाव पैदा हो सका। अर्थात उस समय बहुत से ऐसे यंत्र नहीं थे जिनसे स्वरों में हेर-फेर आसानी से की जा सके या जिससे गाने को बनावटी रुपरेखा दे जा सके। आज, जो स्थिति है और जिस तरह हमारी तकनीक विकसित हो चुकी है, उसमें अगर इन पुराने लोगों को काम करने का मौका मिलता, तब तो कमाल ही हो गया होता। वे लोग न जाने कितना और अधिक एडवांस किस्म का संगीत रच पाते। ठीक उसी तरह, रहमान, जतिन-ललित और तमाम अन्य लोग जैसा सुंदर और स्तरीय संगीत आज के संगीतकार बना रहे हैं, अगर समय में पीछे जाकर काम करते, तो कितनी मुश्किलें आतीं और कितना संघर्ष करते हुए वे सब अपना गाना बनाते, इसका अंदाजा भी लगाया जा सकता है। 

प्रश्न 12 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी ने होली पर क्या विचार प्रस्तुत किए हैं ?
उत्तर – लता मंगेशकर जी ने बताया कि वे भी होली खेलते थे। यह बहुत पहले की बात है, जब उनके पिताजी जीवित थे। अब तो उन्होंने होली खेलना ही बंद कर दिया है। पहले वे सारा दिन रंग खेलना और भीगना और बाद में जाकर देर शाम तक नहाना, आदि किया करते थे परन्तु अब यह सब सालों से उन्हें अच्छा नहीं लगता। जिस प्रकार की होली पूरे देश में प्रसिद्ध है, वे उस तरह की होली नहीं मनाते थे। उनके कहने का अर्थ यह है कि उनके यहाँ होली के एक दिन पहले जब होली जलाते हैं और उस समय होलिका की पूजा होती है, उसमें जो प्रसाद चढ़ाया जाता है, उन सभी तरह की मिठाइयों को होलिका में डालते हैं। नारियल भी होलिका में आखिरी में जलाया जाता है, जिसे जल जाने के बाद आग से निकालकर उसे तोड़कर प्रसाद लेते हैं। वह जो राख बनती है, उसे उठाकर दूसरे दिन एक-दूसरे पर डालते हैं। इसे वे लोग ‘गुड़वड’ कहते हैं। होली के बाद पाँचवें दिन रंग-पंचमी आती है, उस दिन लता मंगेशकर जी की माँ और पिताजी उन सब भाई बहनों पर केसर घोलकर थोड़ा छिड़कते थे। माँ घर में कुछ मीठा बनाती थीं, जो भगवान को चढ़ाकर सभी बच्चों को प्रसाद में खाने को मिलता था। माँ उन सभी की अलग-अलग आरतियाँ भी उतारती थीं और इस तरह लता मंगेशकर जी के घर में बचपन में होली का त्योहार मनता था। वह होली जो आजकल प्रसिद्ध है, इसका कोई प्रभाव उनके घर में नहीं था। कहने का तात्पर्य यह है कि लता मंगेशकर जी के घर में होली आधुनिक तरीके से नहीं बल्कि पुराने रीतिरिवाजों के अनुसार मनाई जाती थी। 

प्रश्न 13 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी ने अपने यहाँ की दिवाली क्या विशेषता बताई है ?
उत्तर – लता मंगेशकर जी के घर में दशहरा और दीवाली का ज्यादा महत्व था। उनके घर में नवरात्रि भी बहुत धूमधाम के साथ मनती है। नवरात्रि के पहले दिन वे ‘गुड़ि पड़वा’ मनाते हैं, जिसका विशेष महत्व है। इसमें वे अपने घर में बाहर ‘गुड़ि’ बाँधते हैं और कलश स्थापना करते हैं। सूर्योदय के समय ही ‘गुड़ि’ पर बताशों की माला या हार बनाकर चढ़ाई जाती है, जिसे सूर्यास्त होने तक उतार लिया जाता है और प्रसाद के रूप में घर के सभी सदस्यों में बाँट लिया जाता हैं। यह एक बहुत महत्वपूर्ण आयोजन माना जाता है। लता मंगेशकर जी बताती हैं कि उनकी तरफ और ऐसी मान्यता है कि भगवान राम चौदह वर्ष बाद जब अयोध्या लौटे थे, तो हर घर में ऐसे ही बताशों की लड़ी सजाकर ‘गुड़ि’ बाँधी गई थी। महाराष्ट्र में ऐसा ही कहा जाता है। पहले दिन ‘गुड़ि’ बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है, जिसके अंत में नवमी पर राम जी के जन्म की तिथि रामनवमी आती है। तो लता मंगेशकर जी के यहाँ यह त्योहार राम आगमन मानकर मनाते हैं, जबकि बाकी जगहों पर दुर्गा की आराधना में नवरात्र होता है। महाराष्ट्र में उस तरह नवरात्र नहीं मनता, जिस तरह गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में दुर्गा की आराधना में यह त्योहार मनाया जाता है। कहने का अभिप्राय यह है कि लता मंगेशकर जी के यहाँ दशहरा और दीवाली को अन्य जगहों से अलग तरह से मनाया जाता है। 

प्रश्न 14 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में लता मंगेशकर जी शुरुआती जीवन में कौन सी परंपरा निभती रही, जिसे उन्होंने बाद में भी पूरे अपनेपन के साथ निभाना जारी रखा?
उत्तर – लता मंगेशकर जी जब फिल्म इंडस्ट्री में नई-नई आई थी और उनका काम चलना शुरू हुआ था। उस दौरान उन्होंने कुछ सालों तक दीवाली के दिन अपने सीनियर म्यूजिक डायरेक्टर्स के यहाँ मिठाई लेकर जाने का चलन शुरू किया था। वे ठीक दीवाली के दिन तड़के पाँच बजे ही नहा-धोकर बहुत सारे संगीतकारों के घर मिठाई लेकर पहुँच जाती थी।

प्रश्न 15 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ में मंगलागौर के बारे में क्या बताया गया है ?
उत्तर – लता मंगेशकर जी के यहाँ होली और दीवाली पर तो घरों में गीत-संगीत नहीं होता। परन्तु यह जरूर है कि विवाह के बाद जब नई बहू घर में आती है, तब एक पूजा होती है। इस दौरान घरों में, पास-पड़ोस की बहुत सारी औरतें आती हैं। इसे मंगलागौर कहा जाता है। सारी औरतें बिल्कुल मुग्ध भाव से गीत गाती हैं और नाचती भी हैं। बिल्कुल ठेठ गँवई ( पुराने रीतिरिवाजों के अनुसार) अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है, मगर धीरे-धीरे वह भी अब खत्म हो रहा है। लता मंगेशकर जी याद करते हुए कहती हैं कि , जब वे बहुत छोटी थी, तब घर-परिवार या पड़ोस में हर किसी की शादी के बाद यह मंगलागौर मनाया जाता था और वे सभी लोग उसमें खूब नाचते-गाते थे। उन मंगलागौर उत्सवों में स्त्रियाँ नौटंकी और तमाशा की तरह भी कुछ-कुछ करती थीं। अर्थात उस उत्सव में कोई कुछ भी रूप बनाकर नाचता था। 

प्रश्न 16 –  कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ लता मंगेशकर जी का उनके सहयोगियों के साथ कैसा सम्बन्ध दिखाया गया है ?
उत्तर – लता मंगेशकर जी का कोरस की लड़कियों के साथ बहुत अच्छा संबंध था। अर्थात जितनी भी लड़कियाँ थीं, वो बिल्कुल उनके अपने घर जैसी थीं। उन सबका लता मंगेशकर जी के घर में आना-जाना होता रहता था। लता मंगेशकर जी की बहन मीना की शादी जब कोल्हापुर में हुई, तो कोरस की सारी लड़कियाँ और लड़के वहाँ आए थे और उन लोगों ने वहाँ खूब गाने गाए और डांस किया था। लता मंगेशकर जी को याद है, कि सन् 1960 में जो ग्रुप कोरस गाने वालों का उन्हें मिला था, वह लगभग अस्सी तक वैसे ही चला है। उन दौरान स्टूडियो में ज्यादा कुर्सियाँ नहीं होती थीं तो वे भली लडकियाँ जब रेकॉर्डिंग के लिए आती थीं, तो वे सब बड़े मजे से जमीन पर बैठती थीं और अक्सर लता मंगेशकर जी भी रेकॉर्डिंग में आकर वहीं जमीन पर बैठकर उन सभी के साथ बातें करती थी। यह सब लता मंगेशकर जी उन कोरस गाने वाली लड़कियों की बात कर रही हैं, जो बहुत शुरुआती दौर में लगभग पचास और साठ के दशक में संगीतकारों के यहाँ कोरस गाने के लिए जाती थी। लता मंगेशकर जी से मिलने वाले जितने लड़के और लड़कियाँ थीं, उन सबने बहुत बाद तक उनके साथ अपना सम्बन्ध व् साथ बनाया हुआ था। यही कारण था कि लता मंगेशकर जी का अपने कोरस में गाना गाने वाले लड़के-लड़कियों के साथ सम्बन्ध अच्छे थे। 

प्रश्न 17 –  कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ लता मंगेशकर जी ने संगीत के बारे में क्या बताया ?
उत्तर – लता मंगेशकर जी यह मानती हैं कि संगीत में वह असीम शक्ति है कि वह ऐसा कुछ जरूर रच देता है, जिसकी आशा किसी ने न की हो। इसका अनुभव भी कई बार लता मंगेशकर जी को हुआ है। कई बार अपने पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर को सुनते हुए भी उन्हें कुछ ऐसा अनुभव होता था जिसकी आशा वो नहीं कर सकती थी। लता मंगेशकर जी उदाहरण देती हैं कि वे मुंबई में उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित रविशंकर का एक कंसर्ट सुन रही थी। वे श्रोताओं की पंक्ति में बिल्कुल आगे बैठी हुई अली अकबर भाई का वादन सुन रही थी और उनका वादन अत्यधिक मंत्रमुग्ध करने वाला था। लगभग पचास-साठ मिनट कि ‘ठन’ से उनके सरोद (बीन की तरह का एक प्रकार का बाजा) का एक तार टूटा और उन्हें बजाना बंद करना पड़ा। जब लता मंगेशकर जी ने उनके वादन की प्रशंसा की और कहा कि काश वे पूरी तरह राग को अंत तक सुन पाते। इस पर अली अकबर जी ने कहा था कि जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है। इस प्रसंग से लता मंगेशकर जी को यह लगता है कि संगीत की सीमा इतनी गहरी है कि तार भी शुद्ध स्वर के प्रहार को सह नहीं पाया और टूटकर अलग हो गया।

प्रश्न 18 –  कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 4 – ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ लता मंगेशकर जी ने अपनी कृतज्ञता कैसे जाहिर की ?
उत्तर – लता मंगेशकर जी बताती हैं कि भगवान ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। उन्हें किसी बात की शिकायत नहीं है। वे बहुत खुश हैं। यतींद्र मिश्र जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि लता मंगेशकर जी अमर हैं, तो यह उन्हें मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है, जो दुनिया ने उन्हें दिया है। उनका गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं हो सकता। लता मंगेशकर जी को लगता है कि भगवान् ने उन्हें जो भी दिया, वह बहुत दिया, दूसरों से कहीं ज्यादा दिया। वे चाहती हैं कि भगवान् ने कृपा की छाया से जैसे उन्हें छाँह दी है, वैसे ही हर एक कलाकार और नेक इंसानों के ऊपर भी रखें। लता मंगेशकर जी सभी के लिए यही प्रार्थना करती हैं।
 
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