CBSE Class 9 Hindi Chapter 6 Reedh ki Haddi (रीढ़ की हड्डी) Question Answers (Important) from Ganga Book 

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Reedh ki Haddi Chapter 6 NCERT Solutions

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?
(क) शरीर के एक आवश्यक अंग का
(ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
(घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
उत्तर – (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
तर्क – जब लड़के वाले लड़की को किसी वस्तु की तरह परखते हैं तो लड़की चुप रहने के बजाए अपने आत्मसम्मान के लिए आवाज उठाती है और लड़के के “बैकबॉन” अर्थात ‘रीढ़ की हड्डी’ होने पर सवाल उठाती है। अतः साफ है कि यहाँ ‘रीढ़ की हड्डी’ का तात्पर्य केवल शरीर के एक अंग से नहीं बल्कि (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है।

2. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?
(क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर
(ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर
(ग) विवाह और अशिक्षा पर
(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
उत्तर – (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
तर्क – ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में समाज की अनुचित मान्यताओं पर व्यंग्य किया गया है। लड़के वाले अपने अनुसार लड़की की शिक्षा, सुंदरता व् व्यवहार को परखना चाहते हैं उनके लिए लड़की का आत्मसम्मान व् अधिकार कोई मायने नहीं रखते। समाज की इसी दकियानूसी सोच, लड़का-लड़की में भेदभाव व् विवाह से जुड़ी अनुचित रीतिरिवाजों व् मान्यताओं पर व्यंग्य किया गया है।

3. “घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं” यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?
(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
(ख) अनुभव और विवेक की कमी
(ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
(घ) उदासीनता और एकाकीपन
उत्तर – (ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
तर्क – उमा का यह कथन शंकर के चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता को दर्शाता है। क्योंकि पुरे प्रसंग में शंकर अपने पिता की गलत बातों पर चुप रहता है और जब वह एक बार गलत काम करते हुए पकड़ा गया था तो वह वहाँ से भाग गया था।

4. “जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी. ए. पास किया है।” उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है ?
(क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना
(ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना
(ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
उत्तर – (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
तर्क – उमा के लिए डिग्री कोई दिखावे की वस्तु नहीं है। उसकी दृष्टि में शिक्षा प्राप्ति का सही अर्थ तभी है जब आप समाज में फैली गलत मान्यताओं के विरुद्ध अपने आत्मसम्मान व् अधिकारों के लिए आवाज उठाने का साहस रख सकें। उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करना केवल डिग्री नहीं है बल्कि व्यक्ति को मजबूत,जागरूक और आत्मविश्वास से भरना है।

5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?
(क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
(ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।
(घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।
उत्तर – (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
तर्क – गोपालप्रसाद और रामस्वरूप दोनों ही समाज की मान्यताओं व् पुरानी सोच के शिकार हैं। गोपालप्रसाद जहाँ लड़की को कम पढ़ाई और सुंदरता के आधार पर परखते हैं वहीँ रामस्वरूप भी सच को छिपाने की कोशिश में लड़की की भावनाओं व् आत्मसम्मान को नजरअंदाज करते हैं।

6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?
(क) औपचारिक और शुष्क
(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
(ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक
(घ) भावुक और संक्षिप्त
उत्तर – (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
तर्क – एकांकी की संवाद शैली बिलकुल सामान्य बोलचाल की भाषा में है जिससे पात्र व् परिस्थितियाँ वास्तविक प्रतीत होती हैं। साथ ही साथ लेखक ने कई जगहों पर नोक-झोक दिखाकर व्यग्य प्रदर्शित किया है।

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।
(संकेत– उमा के साथ उनका व्यवहार, विवाह के लिए दिखावे करना किंतु इन प्रयासों को छिपाने की चेष्टा करना आदि।)
उत्तर – बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। एक ओर तो वे अपनी पत्नी की बात न मानते हुए भी अपनी बेटी को पढ़ाई करवाते हैं परन्तु वहीं दूसरी ओर जब लड़की के विवाह की बारी आती है तो वे उसकी पढ़ाई को बात को छिपाने की कोशिश करते हैं क्योंकि लड़के वालों को ज्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए। बाबू रामस्वरूप का ये व्यक्तित्व उनके अंतर्द्वद्व को दर्शाता है।
वे दिखावे के लिए लड़के वालों के स्वागत में घर को सजाते हैं, नाश्ते की पूर्ण व्यवस्था करते हैं और उमा को लड़के वालों के सामने सज-धज कर आने को कहते हैं ,साथ ही साथ वे उमा को गाना गाने को भी कहते हैं ताकि लड़की का लड़के वालों के सामने अच्छा प्रभाव पड़े। इस प्रकार वे समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं जबकि उनके विचार उसी रूढ़िवादी समाज के हैं जहाँ लड़की को किसी वस्तु की तरह परखा जाता है।

2. ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
उत्तर – ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, एक उमा और दुसरा शंकर।
उमा के लिए ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ आत्मसम्मान, नैतिक दृढ़ता और साहस से है। वह अपने सम्मान के लिए समाज की गलत मान्यताओं को मानने से मना कर देती है और साहस का परिचय देती हुई उनका विरोध करती है।
दूसरी और शंकर ले लिए ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ उसमें साहस व् आत्मबल की कमी को दर्शाता है। वह स्वयं भी कायरता दिखता है और अपने पिता की गलत बातों का भी विरोध नहीं करता।

3. “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
उत्तर – प्रेमा के इस कथन से उस समय की स्त्री-शिक्षा के सिमित व् उपेक्षित स्थिति का पता चलता है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय स्त्रियों की शिक्षा का कोई मोल नहीं था। उन्हें नाम मात्र की शिक्षा दी जाती थी। प्रेमा पढ़ाई-लिखाई को जंजाल मानती है, जिससे पता चलता है कि उस समय में महिलाएँ भी शिक्षा के महत्त्व को नहीं समझती थी। उस समय के समाज में यह मान्यता थी कि लड़कियों को ज्यादा पढ़ाई लिखाई करने की कोई आवश्यता नहीं होती क्योंकि उनका मुख्य कार्य तो घर-गृहस्थी संभालना ही है।

4. लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?
उत्तर – लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में इसलिए चुना होगा क्योंकि ‘रीढ़ की हड्डी’ दृढ़ता का प्रतिक है। उमा और शंकर दोनों के सन्दर्भ में ‘रीढ़ की हड्डी’ का महत्त्व दर्शाया गया है। जहाँ उमा में आत्मसम्मान, साहस व् नैतिक दृढ़ता झलकती है वहीँ शंकर में इनकी कमी दिखती है।
इस एकांकी का अन्य शीर्षक ‘नैतिक दृढ़ता’ हो सकता है। क्योंकि पूरी एकांकी में उमा पुरे साहस व् दृढ़ता के साथ समाज की गलत मान्यताओं के विरुद्ध आवाज उठाती नजर आती है।

विधा से संवाद

एकांकी की पड़ताल
आप जानते ही हैं कि ‘रीढ़ की हड्डी’ एक एकांकी है। एकांकी में भी एक कहानी ही होती है, लेकिन एकांकी की रूपरेखा कहानी से थोड़ी अलग होती है।
आगे ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी से संबंधित कुछ बिंदु दिए गए हैं। एकांकी में से इन बिंदुओं से संबंधि एक-एक उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।

1. एकांकी का नाम
2. लेखक का नाम
3. पात्र
4. परिवेश / देश – काल
5. रंग-निर्देश/मंच-निर्देश
6. संवाद- निर्देश
7. समस्या
8. संवाद
9. मुख्य विचार
10. समाधान / परिणाम
उत्तर –
1. एकांकी का नाम – रीढ़ की हड्डी
2. लेखक का नाम – जगदीशचंद्र माथुर
3. पात्र – एकांकी में कुल छः पात्र हैं – उमा, शंकर , प्रेमा, रामस्वरूप, गोपालप्रसाद और रतन
4. परिवेश / देश – काल – सन 1939 का भारतीय मध्यवर्गीय समाज
5. रंग-निर्देश/मंच-निर्देश – एकांकी की शुरुआत में ‘लड़के वालों के स्वागत के लिए सजा कमरा’ ऐसे निर्देश हैं जो वातावरण का बोध कराते हैं। पात्रों के हाव-भाव जैसे ‘खीस निपोरते हैं’ ‘सकपकाकर’ ‘तनाव में आकर’ आदि रंग-निर्देश हैं।
6. संवाद- निर्देश – पात्रों की मनोस्थिति बताने वाले निर्देश जैसे – ‘तेज आवाज में ‘ हलकी आवाज में’ या ‘धीमी परन्तु मजबूत आवाज में’ आदि।
7. समस्या – स्त्री शिक्षा का विरोध, विवाह का लेन-देन, लड़की के आत्मसम्मान या अधिकारों का हनन
8. संवाद – व्यंग्यपूर्ण
9. मुख्य विचार – शिक्षा और सम्मान हर स्त्री का अधिकार है और किसी भी स्त्री को विवाह में एक वास्तु की तरह नहीं परखा जाना चाहिए।
10. समाधान / परिणाम – गलत मान्यताओं का विरोध करना ही समाधान है। जैसे उमा ने विद्रोह करके अपने आत्मसम्मान व् अधिकार के लिए आवाज उठाई।

मेरी टिप्पणी
“जी हाँ, जाइए, जरूर चले जाइए। लेकिन घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं— यानी बैकबोन, बैकबोन !”

उपर्युक्त वाक्य को ध्यान से पढ़िए। यह वाक्य उमा द्वारा शंकर पर की गई एक टिप्पणी है जो एक व्यंग्य की तरह है।
‘टिप्पणी’ किसी व्यक्ति, विषय या घटना पर व्यक्त की गई एक संक्षिप्त राय, स्पष्टीकरण या विचार होता है। यह किसी के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी देने, किसी मुद्दे पर नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करने या किसी संदर्भ पर विचारों की अभिव्यक्ति होती है, जो पाठक को उस विषय पर एक नया दृष्टिकोण देती है।
टिप्पणी की कुछ विशेषताएँ हैं—

  • संक्षिप्तता- इसमें विषय के मुख्य बिंदुओं को कम शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है।
  • स्पष्टता – भाषा सरल, स्पष्ट और तर्कपूर्ण होनी चाहिए।
  • व्यक्तिपरकता – इसमें व्यक्ति के विचारों और सुझावों को शामिल किया जाता है।

अब आप उमा द्वारा शंकर के लिए कही गई उपर्युक्त बात पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए इस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर –
उमा द्वारा शंकर पर की गई यह टिप्पणी केवल एक व्यंग्य नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व और चरित्र पर किया गया करारा प्रहार है। इस टिप्पणी के माध्यम से उमा ने समाज को एक नया दृष्टिकोण देने का प्रयास किया है कि ऊँची शिक्षा या डिग्रियाँ केवल पर्याप्त करने मात्र तक सिमित नहीं हैं, बल्कि उसका नैतिक साहस और स्वतंत्र अस्तित्व होना भी अनिवार्य है।

उमा द्वारा शंकर पर की गई एक टिप्पणी के मुख्य बिंदु –
चरित्र की दुर्बलता – उमा शंकर की उस घटना को उजागर करती है जब वह लड़कियों के हॉस्टल के पास पकड़ा गया था और मुँह छिपाकर भागा था। यहाँ उसके चरित्र में नैतिकता का अभाव झलकता है।
कायरता का प्रतीक – शंकर का अपना कोई स्वाभिमान नहीं है, वह अपने पिता की गलत और रूढ़िवादी बातों पर भी चुप रहता है। उसमें इतना साहस नहीं है कि वह गलत को गलत कह सके।
व्यंग्यात्मक गहराई – ‘रीढ़ की हड्डी’ (बैकबोन) न होने का अर्थ उसकी शारीरिक बनावट से नहीं बल्कि उसके दृढ़ चरित्र के अभाव को दर्शाता है।
अतः कहा जा सकता है कि उमा की यह स्पष्ट और तर्कपूर्ण बात यह सिद्ध करती है कि शिक्षित होने का अर्थ केवल पढ़ना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ साहस का प्रदर्शन करते हुए गलत का विरोध करना है।

विषयों से संवाद

तुलना और विचार

1. “गोपालप्रसाद : भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।”
एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ एकांकी के पात्रों के व्यवहार में लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?
उत्तर – एकांकी में गोपालप्रसाद के संवादों में लड़के-लड़की का भेदभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वे कई जगह कहते हैं,कि “मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना,” और इस बात का तर्क देते हैं कि “मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं”। इसके अलावा, वे यह भी कहते हैं कि “ऊँची तालीम भी ऐसी ही चीज़ों में से एक है” जो केवल मर्दों के लिए बनी है, इस वाक्य से उनकी लड़कियों के लिए संकीर्ण मानसिकता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
मेरे अनुसार लड़के-लड़की में भिन्नता समाज की दोहरी मानसिकता का प्रतीक है। गोपालप्रसाद जैसे लोग आत्सम्मान, अधिकारों व् शिक्षा को केवल पुरुषों का विशेषाधिकार मानते हैं और स्त्रियों को केवल घरेलू काम तक सीमित रखना चाहते हैं। वे विवाह को एक ‘बिज़नेस’ की तरह देखते हैं जहाँ वे लड़की की शिक्षा को एक दोष और लड़की को एक वस्तु की तरह देखते है। यह भेदभाव एक ओर तो स्त्रियों के आत्म-सम्मान को चोट पहुँचाता है, और उनके अधिकारों का हनन करता है, वही दूसरी ओर यह सोच समाज की प्रगति में भी बाधक है। उमा का विरोध इसी रूढ़िवादी मान्यताओं और गलत सोच के खिलाफ एक सशक्त आवाज़ है। जिसे प्रत्येक नारी को अपनाना चाहिए।

2. “मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी?
(संकेत- शिक्षा, परिवार का व्यवहार आदि)
उत्तर – उमा के इस कथन से उसके साहसी, स्वाभिमानी और स्पष्टवादी व्यक्तित्व का पता चलता है। उसने शिक्षा केवल नाम के लिए नहीं प्राप्त की, बल्कि उसने शिक्षा का सही महत्त्व जान कर अपने आत्म-सम्मान व् अधिकार के लिए लड़ने का साहस जुटाया और स्वयं को किसी वस्तु की तरह समझने वालों को करारा जवाब दिया। वह समाज में दोहरा चरित्र रखने वालों को बेनकाब करने वाली एक साहसी युवती है।
मेरे विचार से उमा के व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ निम्नलिखित कारणों से आई होंगी –
उच्च शिक्षा – उमा ने बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त की थी। उच्च शिक्षा के कारण उसमें तर्क करने की शक्ति मिली और उसे अपने अधिकारों का ज्ञान मिला। उसे सही गलत का भेद और गलत मान्यताओं का विरोध करने का साहस मिला।
परिवार का व्यवहार – रामस्वरूप ने उमा को पढ़ने-लिखने की आज़ादी दी थी, जिससे उसमें आत्मविश्वास और निडरता का समावेश हुआ। भले ही विवाह के समय समाज के दबाव के कारण रामस्वरूप ने उमा की शिक्षा छिपाने का प्रयास किया, लेकिन परिवार के पहले के परवरिश ने उमा को स्वतंत्र विचार रखना सिखाया।
नैतिक दृढ़ता – उमा का चरित्र नैतिक रूप से दृढ़ है, इसलिए वह शंकर जैसे चरित्रहीन व्यक्ति के सामने झुकने के बजाय उसका सच सामने रखने का साहस करती है। और उसे कायर व् चरित्रहीन कहने डरती।

सृजन

एकांकी का विस्तार

“रतन : बाबूजी, मक्खन!
(सब रतन की तरफ देखते हैं और परदा गिरता है।)”

1. एकांकी के अंत में रतन कहता है— “बाबूजी, मक्खन …” और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा?
(संकेत- हास्य, व्यंग्य, टिप्पणी आदि)
उत्तर – लेखक ने रतन के इस संवाद से अंत कर गहरा व्यंग्य किया है। एक ओर जहाँ घर की बेटी के आत्मसम्मान और शिक्षा जैसे गंभीर विषय पर बहस चल रही थी, और लड़के वाले चले गए थे, वहीँ सबके उदास होने पर रतन का ‘मक्खन’ के कर पहुँचना समाज की उस संवेदनहीनता को दर्शाता है जो बड़ी समस्याओं को छोड़कर तुच्छ बातों में उलझा रहता है। लेखक ने इस संवाद के साथ अंत इसलिए किया होगा ताकि पाठक या दर्शक इस गंभीर समस्या पर सोच विचार के सकें। क्योंकि समाज अपनी मान्यताओं पर पर्दा डालने का भरसक प्रयास करता है।

2. एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।
उत्तर – यदि परदा दोबारा उठे, तो गोपालप्रसाद और शंकर के गुस्से में पैर पटकते हुए बाहर जाते हुए दिखाई देंगे जो समाज की गलत मान्यताओं की हार का प्रतिक होगा। रामस्वरूप शर्मिंदगी और हताशा में कुर्सी पर बैठे दिखेंगे, और वे अपने मन में इस बात से दुःखी हो रहे होंगे कि अब उनकी बेटी के शिक्षित होने की बात सभी को पता चल जाएगी और उसकी शादी में और ज्यादा रुकावटें आएंगी। जबकि प्रेमा रोती हुई उमा को चुप कराने का प्रयास कर रही होंगी क्योंकि एक माँ अपनी बेटी की आँखों में आँसू नहीं देख सकती। और उमा की सिसकियाँ उसकी जीत और समाज की हार का प्रतीक होंगी। क्योंकि उसने समाज को एक स्त्री के आत्मसम्मान और शिक्षा के सही अर्थ का बोध कराया। अंत में रामस्वरूप और प्रेमा भी उमा की सोच को समझ कर उसका साथ देने को तैयार हो जाएंगे।

भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

भाषा में मुहावरे
एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचान कर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए—

1. “उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है— खाली हाथ | ”
2. “लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।”
3. “और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो ?”
4. “तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।”
5. “मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो।”
6. “यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।”
7. “बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?”
8. “लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
उत्तर –
1. भीगी बिल्ली की तरह – डरा हुआ, सहमा हुआ – पिता जी के आते ही सभी बच्चे भीगी बिल्ली की तरह अपने-अपने कामों में लग गए।
2. मुँह फुलाना – नाराज होना या रूठ जाना – जन्मदिन पर अपना पसंदीदा उपहार न पाने की वजह से राजू मुँह फुलाकर बैठ गया।
3. किस मर्ज की दवा होना – किसी काम का न होना – आलसी रामू दिन भर घर में पड़ा रहता है , समझ नहीं आता वह किस मर्ज की दवा है।
4. सिर चढ़ाना – बहुत लाड़-प्यार देकर स्वछंद बनाना – बच्चों को जरुरत से ज्यादा सिर चढ़ाने से वे बिगड़ जाते हैं।
5. सब-कुछ उगल देना – सारी बातें बता देना, राज खोल देना – गुस्से में राम ने राहुल के बारे में उसके पिता के सामने सब-कुछ उगल दिया।
6. काँटों में घसीटना – किसी को मुश्किल में डालना – खुद तो सीता विद्यालय के लिए लेट हो गई थी साथ ही साथ उसने रीमा को भी काँटों में घसीट लिया।
7. इज्जत उतारना – अपमान करना – अमीर होने की वजह से कई लड़के वाले लड़की वालों की इज्जत उतारने से भी नहीं झिझकते।
8. मुँह छिपाकर भागना – शर्म से भाग जाना – अपनी गलती सामने आने पर रोहित मुँह छिपाकर भाग खड़ा हुआ।

संदर्भ में शब्द
“बाप सेर है तो लड़का सवा सेर ।”
एकांकी में इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए किया गया है। लेकिन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में भी किया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर – “बाप सेर है तो लड़का सवा सेर” –
अर्थ – जब बाप किसी विशेषता में बड़ा हो तो बेटा उससे भी बड़ा बन जाता है
पाठ में नकारात्मक प्रयोग – रामस्वरूप ने यह काहवत गोपालप्रसाद और उसके बेटे शंकर की नकारात्मक प्रवृति के सन्दर्भ में कही थी। क्योंकि गोपालप्रसाद जितना बड़ा दकियानूसी है, उसका बेटा शंकर उससे भी बड़ा कायर और चरित्रहीन है।
सकारात्मक प्रयोग – इस काहवत का सकारात्मक रूप से भी प्रयोग किया जा सकता है। जैसे – रामेश्वर एक उच्च स्तरीय खिलाड़ी है। तभी उसका बेटा संकरश उससे प्रेरणा लेकर अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बन गया।

गतिविधियाँ
भाषा संगम
“मक्खन वाले की दुकान दूर है”
नीचे ‘मक्खन’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
मक्खन (हिंदी); नवनीतम् (संस्कृत); मक्खण (पंजाबी); मक्खन (उर्दू); टॅन्य (कश्मीरी); मखणु (सिंधी); लोणी (मराठी); माखण, नवनीत (गुजराती); लोणी (कोंकणी); नौनी, माखन (नेपाली); माखन, ननी (बांग्ला); माखन (असमिया); माखोन (मणिपुरी); लहुणी, मक्खन (ओड़िआ); वेन्नै (तेलुगु); वॆर्ष्णय् (तमिल); वेण्ण (मलयालम); वेण्णे (कन्नड़)।
इनके अतिरिक्त यदि आप ‘मक्खन’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं। तो उस भाषा में भी लिखिए।
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
उत्तर –
हिमाचली (पहाड़ी भाषा में ) – चोपड़
मातृभाषा (हिंदी में ) वाक्य – “मक्खन वाले की दुकान दूर है”
हिमाचली (पहाड़ी भाषा में ) वाक्य – “चोपड़ा आले रे दकान खासे दूर सा”
 
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Class 9 Hindi Reedh ki Haddi – Extract Based Questions (गद्यांश पर आधारित प्रश्न)

 

निम्नलिखित गद्याँशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उत्तर दीजिये-

1.
मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नज़र आ रही है वे अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं, एक तख्त को पकड़े हुए पीछे की ओर चलते-चलते कमरे में आते हैं। तख्त का दूसरा सिरा उनके नौकर ने पकड़ रखा है।
बाबू : अबे धीरे-धीरे चल… अब तख्त को उधर मोड़ दे…उधर…बस, बस!
नौकर : बिछा दूँ साहब?
बाबू : (ज़रा तेज़ आवाज़ में) और क्या करेगा? परमात्मा के यहाँ अक्ल बँट रही थी तो तू देर से पहुँचा था क्या?…बिछा दूँ साब!…और यह पसीना किसलिए बहाया है?
नौकर : (तख्त बिछाता है) ही-ही-ही।
प्रेमा : मैं कहती हूँ तुम्हें इस वक्त धोती की क्या ज़रूरत पड़ गई! एक तो वैसे ही जल्दी-जल्दी में…
रामस्वरूप : धोती?
प्रेमा : हाँ, अभी तो बदलकर आए हो, और फिर न जाने किसलिए…
रामस्वरूप : लेकिन तुमसे धोती माँगी किसने?
प्रेमा : यही तो कह रहा था रतन।
रामस्वरूप : क्यों बे रतन, तेरे कानों में डाट लगी है क्या? मैंने कहा था-धोबी के यहाँ से जो चद्दर आई है, उसे माँग ला…अब तेरे लिए दूसरा दिमाग कहाँ से लाऊँ। उल्लू कहीं का।
प्रेमा : अच्छा, जा पूजावाली कोठरी में लकड़ी के बक्स के ऊपर धुले हुए कपड़े रखे हैं न! उन्हीं में से एक चद्दर उठा ला।
रतन : और दरी?
प्रेमा : दरी यहीं तो रक्खी है, कोने में। वह पड़ी तो है।
रामस्वरूप : (दरी उठाते हुए) और बीबी जी के कमरे में से हरिमोनियम उठा ला, और सितार भी।…जल्दी जा। (रतन जाता है। पति-पत्नी तख्त पर दरी बिछाते हैं।)
प्रेमा : लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।

1. रामस्वरूप ने रतन से वास्तव में क्या लाने को कहा था?
(क) धोती
(ख) चद्दर
(ग) दरी
(घ) हारमोनियम
उत्तर: (ख) चद्दर

2. रामस्वरूप और प्रेमा किस वस्तु को तख्त पर बिछाते हैं?
(क) धोती
(ख) रजाई
(ग) दरी
(घ) पर्दा
उत्तर: (ग) दरी

3. रामस्वरूप रतन पर क्यों गुस्सा होता है?
उत्तर: रामस्वरूप रतन पर इसलिए गुस्सा होता है क्योंकि रतन ने चद्दर की जगह धोती लाने की बात सुनी। दरअसल, रामस्वरूप ने उसे चद्दर लाने को कहा था, लेकिन रतन ने धोती समझ लिया। इस गलतफहमी पर रामस्वरूप उसे उल्लू कहकर डाँटता है।

4. बाबू ने नौकर पर व्यंग्य करते हुए क्या कहा और क्यों?
उत्तर: बाबू ने नौकर से कहा, “परमात्मा के यहाँ अक्ल बँट रही थी तो तू देर से पहुँचा था क्या?” यह बात उन्होंने व्यंग्य में कही क्योंकि नौकर ने पूछ लिया था कि तख्त बिछा दूँ? बाबू को यह सवाल बेवकूफी भरा लगा, इसलिए उन्होंने उसे ताना मारा।

5. प्रेमा किस बात को लेकर चिंतित है?
उत्तर: प्रेमा इस बात को लेकर चिंतित है कि घर की तैयारियाँ अधूरी हैं और सब कुछ जल्दबाज़ी में हो रहा है। साथ ही, वह अपनी बेटी के मुँह फुलाकर पड़े रहने से भी परेशान है, जिससे लगता है कि घर का माहौल थोड़ा तनावपूर्ण हो गया है।

2
रामस्वरूप : मुँह फुलाए!…और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो? जैसे-तैसे करके तो वे लोग पकड़ में आए हैं। अब तुम्हारी बेवकूफ़ी से सारी मेहनत बेकार जाए तो मुझे दोष मत देना।
प्रेमा : तो मैं ही क्या करूँ? सारे जतन करके तो हार गई। तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है। मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं। अपना ज़माना अच्छा था। ‘आ ई’ पढ़ ली, गिनती सीख ली और बहुत हुआ तो ‘स्त्री-सुबोधिनी’ पढ़ ली। सच पूछो तो ‘स्त्री-सुबोधिनी’ में ऐसी-ऐसी बातें लिखी हैं-ऐसी बातें कि क्या तुम्हारी बी.ए., एम.ए. की पढ़ाई होगी। और आजकल के तो लच्छन ही अनोखे हैं…
रामस्वरूप : ग्रामोफ़ोन बाजा होता है न?.
प्रेमा : क्यों?
रामस्वरूप : दो तरह का होता है। एक तो आदमी का बताया हुआ। उसे एक बार चलाकर जब चाहे तब रोक लो। और दूसरा परमात्मा का बनाया हुआ। रिकार्ड एक बार चढ़ा तो रुकने का नाम नहीं।

1. रामस्वरूप ने प्रेमा को किस बात के लिए जिम्मेदार ठहराया?
(क) खाना न बनने के लिए
(ख) उमा के व्यवहार के लिए
(ग) मेहमानों के आने के लिए
(घ) कपड़े न धुलने के लिए
उत्तर: (ख) उमा के व्यवहार के लिए

2. प्रेमा किस किताब को आज की पढ़ाई से बेहतर मानती है?
(क) स्त्री-सुधा
(ख) गृहलक्ष्मी
(ग) स्त्री-सुबोधिनी
(घ) विद्या वर्धिनी
उत्तर: (ग) स्त्री-सुबोधिनी

3. रामस्वरूप ने प्रेमा की तुलना किससे की?
(क) ग्रामोफ़ोन से
(ख) टीवी से
(ग) रेडियो से
(घ) अखबार से
उत्तर: (क) ग्रामोफ़ोन से

4. रामस्वरूप उमा के मुँह फुलाने पर प्रेमा को क्यों डाँटते हैं?
उत्तर: रामस्वरूप को इस बात की चिंता है कि रिश्ते की बात बिगड़ न जाए। जब उमा मुँह फुलाकर बैठी है, तो वह प्रेमा को दोष देते हैं और कहते हैं कि जैसे-तैसे लोग आए हैं, अब अगर कुछ गड़बड़ हुआ तो सारी मेहनत बेकार जाएगी।

5. प्रेमा आजकल की पढ़ाई के बारे में क्या सोचती है?
उत्तर: प्रेमा को आजकल की पढ़ाई व्यर्थ लगती है। वह कहती है कि उनके ज़माने में ‘आ ई’ और ‘गिनती’ सीखना ही काफ़ी था, और ‘स्त्री-सुबोधिनी’ जैसी किताबें अधिक ज्ञानवर्धक थीं। वह आधुनिक शिक्षा को फिजूल समझती हैं और उसे उमा के व्यवहार की वजह मानती हैं।

3.
प्रेमा : हटो भी। तुम्हें ठठोली ही सूझती रहती है। यह तो होता नहीं कि उस अपनी उमा को राह पर लाते। अब देर ही कितनी रही है उन लोगों के आने में।
रामस्वरूप : तो हुआ क्या?
प्रेमा : तुम्हीं ने तो कहा था कि ज़रा ठीक-ठाक करके नीचे लाना। आजकल तो लड़की कितनी ही सुंदर हो, बिना टीमटाम के भला कौन पूछता है? इसी मारे मैंने तो पौडर-वौडर उसके सामने रखा था। पर उसे तो इन चीजों से न जाने किस जन्म की नफ़रत है। मेरा कहना था कि आँचल में मुँह लपेटकर लेट गई। भई, मैं बाज़ आई तुम्हारी इस लड़की से!
रामस्वरूप : न जाने कैसा इसका दिमाग है! वरना आजकल की लड़कियों के सहारे तो पौडर का कारबार चलता है।
प्रेमा : अरे मैंने तो पहले ही कहा था। एंट्रेंस ही पास करा देते-लड़की अपने हाथ रहती, और इतनी परेशानी न उठानी पड़ती। पर तुम तो…
रामस्वरूप : (बात काटकर) चुप चुप… (दरवाज़े में झाँकते हुए) तुम्हें कतई अपनी ज़बान पर काबू नहीं है। कल ही यह बता दिया था कि उन सब लोगों के सामने जिक्र और ढंग से होगा। मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो। उनके आने तक तो न जाने क्या हाल करोगी!
प्रेमा : अच्छा बाबा, मैं न बोलूँगी। जैसी तुम्हारी मर्जी हो, करना। बस मुझे तो मेरा काम बता दो।
रामस्वरूप : तो उमा को जैसे हो तैयार कर लो। न सही पौडर। वैसे कौन बुरी है। पान लेकर भेज देना उसे। और, नाश्ता तो तैयार है न? (रतन का आना) आ गया रतन?… इधर ला, इधर! बाजा नीचे रख दे। चद्दर खोल…पकड़ तो ज़रा उधर से।
(चद्दर बिछाते हैं)
प्रेमा : नाश्ता तो तैयार हैं। मिठाई तो वे लोग ज़्यादा खाएँगे नहीं। कुछ नमकीन चीज़ें बना दी हैं। फल रखे हैं ही। चाय तैयार है, और टोस्ट भी। मगर हाँ, मक्खन? मक्खन तो आया ही नहीं।
रामस्वरूप : क्या कहा? मक्खन नहीं आया? तुम्हें भी किस वक्त याद आई है। जानती हो कि मक्खन वाले की दुकान दूर है, पर तुम्हें तो ठीक वक्त पर कोई बात सूझती ही नहीं। अब बताओ, रतन मक्खन लाए कि यहाँ का काम करे। दफ़्तर के चपरासी से कहा था आने के लिए, सो नखरों के मारे…

1. प्रेमा उमा को कौन-सी चीज़ लगाने के लिए कहती है?
(क) इत्र
(ख) बिंदी
(ग) पौडर
(घ) चूड़ी
उत्तर: (ग) पौडर

2. रामस्वरूप के अनुसार आजकल किसके सहारे पौडर का कारोबार चलता है?
(क) फिल्म अभिनेत्रियों के
(ख) बाजार की औरतों के
(ग) लड़कों के
(घ) लड़कियों के
उत्तर: (घ) लड़कियों के

3. नाश्ते में किस वस्तु की कमी की बात प्रेमा करती है?
(क) मिठाई
(ख) फल
(ग) टोस्ट
(घ) मक्खन
उत्तर: (घ) मक्खन

4. प्रेमा उमा के व्यवहार से क्यों परेशान है?
उत्तर: प्रेमा उमा के सीधे-सादे स्वभाव से परेशान है क्योंकि उमा न तो सजना-सँवरना पसंद करती है और न ही सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग। वह चाहती थी कि उमा मेहमानों के सामने सजधज कर जाए, पर उमा ने मुँह ढंककर लेट जाना पसंद किया।

5. मक्खन न आने की बात पर रामस्वरूप की क्या प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर: मक्खन न आने की बात सुनकर रामस्वरूप नाराज़ हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि प्रेमा ने ज़रूरी चीज़ याद रखने में लापरवाही की है। वह कहते हैं कि मक्खन वाला दूर है और अब रतन नाश्ता लाए या घर के बाकी काम देखे—यह उलझन खड़ी हो गई है।

4.
प्रेमा : यहाँ का काम कौन ज़्यादा है? कमरा तो सब ठीक-ठाक है ही। बाजा-सितार आ ही गया। नाश्ता यहाँ बराबर वाले कमरे में ट्रे में रखा हुआ है, सो तुम्हें पकड़ा दूँगी। एकाध चीज़ खुद ले आना। इतनी देर में रतन मक्खन ले ही आएगा…दो आदमी ही तो हैं।
रामस्वरूप : हाँ एक तो बाबू गोपाल प्रसाद और दूसरा खुद लड़का है। देखो, उमा से कह देना कि ज़रा करीने से आए। ये लोग ज़रा ऐसे ही है…गुस्सा तो मुझे बहुत आता है इनके दकियानूसी खयालों पर। खुद पढ़े-लिखे हैं, वकील हैं, सभा-सोसाइटियों में जाते हैं, मगर लड़की चाहते हैं ऐसी कि ज़्यादा पढ़ी-लिखी न हो।
प्रेमा : और लड़का?
रामस्वरूप : बताया तो था तुम्हें। बाप सेर है तो लड़का सवा सेर। बी.एस.सी. के बाद लखनऊ में ही तो पढ़ता है, मेडिकल कालेज में। कहता है कि शादी का सवाल दूसरा है, तालीम का दूसरा। क्या करूँ मजबूरी है। मतलब अपना है वरना इन लड़कों और इनके बापों को ऐसी कोरी-कोरी सुनाता कि ये भी…
रतन : (जो अब तक दरवाज़े के पास चुपचाप खड़ा हुआ था, जल्दी-जल्दी) बाबू जी, बाबू जी!
रामस्वरूप : क्या है?
रतन : कोई आते हैं।
रामस्वरूप : (दरवाज़े से बाहर झाँककर जल्दी मुँह अंदर करते हुए) अरे, ए प्रेमा, वे आ भी गए। (नौकर पर नज़र पड़ते ही) अरे, तू यहीं खड़ा है, बेवकूफ़। गया नहीं मक्खन लाने?…सब चौपट कर दिया। अबे उधर से नहीं, अंदर के दरवाज़े से जा (नौकर अंदर आता हैं)… और तुम जल्दी करो प्रेमा। उमा को समझा देना थोड़ा-सा गा देगी। (प्रेमा जल्दी से अंदर की तरफ़ आती हैं। उसकी धोती ज़मीन पर रखे हुए बाजे से अटक जाती है।)
प्रेमा : उँह। यह बाजा वह नीचे ही रख गया है, कमबख्त।
रामस्वरूप : तुम जाओ, मैं रखे देता हूँ…जल्दी।
(प्रेमा जाती है, बाबू रामस्वरूप बाजा उठाकर रखते हैं। किवाड़ों पर दस्तक)
रामस्वरूप : हँ-हँ-हँ। आइए, आइए…हँ-हँ-हँ।
(बाबू गोपाल प्रसाद और उनके लड़के शंकर का आना। आँखों से लोक चतुराई टपकती है। आवाज़ से मालूम होता है कि काफ़ी अनुभवी और फितरती महाशय हैं। उनका लड़का कुछ खीस निपोरने वाले नौजवानों में से है। आवाज़ पतली हैं और खिसियाहट भरी। झुकी कमर इनकी खासियत है।)

1. रामस्वरूप के अनुसार लड़के के पिता की कैसी सोच है?
(क) आधुनिक
(ख) उदार
(ग) दकियानूसी
(घ) निष्पक्ष
उत्तर: (ग) दकियानूसी

2. शंकर कौन है?
(क) मक्खन लाने वाला नौकर
(ख) उमा का भाई
(ग) शादी का संभावित लड़का
(घ) प्रेमा का रिश्तेदार
उत्तर: (ग) शादी का संभावित लड़का

3. प्रेमा की धोती किससे अटकती है?
(क) दरवाज़े से
(ख) बाजे से
(ग) चद्दर से
(घ) तख्त से
उत्तर: (ख) बाजे से

4. रामस्वरूप उमा को क्या करने के लिए कहता है और क्यों?
उत्तर: रामस्वरूप चाहता है कि उमा करीने से तैयार होकर आए और थोड़ा-सा गा भी दे, जिससे मेहमानों पर अच्छा प्रभाव पड़े। वह जानता है कि लड़के और उसके पिता की सोच पारंपरिक है, इसलिए वह उमा को उनके अनुकूल ढालने की कोशिश कर रहा है।

5. शंकर और उसके पिता के बारे में दृश्य में क्या संकेत मिलते हैं?
उत्तर: शंकर के पिता गोपाल प्रसाद को अत्यंत अनुभवी, चतुर और फितरती दिखाया गया है। शंकर खुद एक खीस निपोरने वाला, पतली आवाज़ वाला, और कुछ दब्बू स्वभाव का नौजवान है। उनकी शारीरिक मुद्रा (झुकी कमर) और व्यवहार से उनकी पारंपरिक सोच झलकती है।

 

Class 9 Hindi Ganga Lesson 6 Reedh ki Haddi Multiple choice Questions (बहुविकल्पीय प्रश्न)

1. रामस्वरूप और नौकर किस चीज़ को कमरे में रखते हुए प्रवेश करते हैं?
(क) कुर्सी
(ख) मेज़
(ग) तख्त
(घ) अलमारी
उत्तर – (ग) तख्त

2. रामस्वरूप की पत्नी का नाम क्या है?
(क) सरला
(ख) उमा
(ग) राधा
(घ) प्रेमा
उत्तर – (घ) प्रेमा

3. ‘स्त्री-सुबोधिनी’ का उल्लेख किसने किया?
(क) प्रेमा
(ख) रामस्वरूप
(ग) उमा
(घ) रतन
उत्तर – (क) प्रेमा

4. रामस्वरूप ‘ग्रामोफ़ोन’ से किसका तुलनात्मक उदाहरण देता है?
(क) उमा के व्यवहार का
(ख) प्रेमा की बातों का
(ग) नौकर की मूर्खता का
(घ) शिक्षा का
उत्तर – (ख) प्रेमा की बातों का

5. प्रेमा के अनुसार लड़की को किस स्तर तक पढ़ाना चाहिए था?
(क) एम.ए.
(ख) हाई स्कूल
(ग) एंट्रेंस
(घ) कोई पढ़ाई नहीं
उत्तर – (ग) एंट्रेंस

6. नाश्ते में कौन-सी चीज़ नहीं थी?
(क) मिठाई
(ख) नमकीन
(ग) फल
(घ) मक्खन
उत्तर – (घ) मक्खन

7. शंकर कौन है?
(क) रामस्वरूप का बेटा
(ख) उमा का भाई
(ग) लड़के वाले का बेटा
(घ) नौकर
उत्तर – (ग) लड़के वाले का बेटा

8. शंकर किस कॉलेज में पढ़ता है?
(क) लखनऊ मेडिकल कॉलेज
(ख) दिल्ली विश्वविद्यालय
(ग) काशी हिंदू विश्वविद्यालय
(घ) इलाहाबाद विश्वविद्यालय
उत्तर – (क) लखनऊ मेडिकल कॉलेज

9. गोपाल प्रसाद के अनुसार उस ज़माने का मैट्रिक कैसा था?
(क) बेहद कमजोर
(ख) एम.ए. से बेहतर
(ग) कुछ नहीं आता था
(घ) केवल हिन्दी जानता था
उत्तर – (ख) एम.ए. से बेहतर

10. शंकर और रामस्वरूप कैसी हँसी हँसते हैं?
(क) खुलकर
(ख) खीसें निपोरते हुए
(ग) जोर से
(घ) मुस्कुराते हुए
उत्तर – (ख) खीसें निपोरते हुए

11. लड़के वालों को कैसी लड़की चाहिए थी?
(क) आधुनिक
(ख) बहुत पढ़ी-लिखी
(ग) घरेलू
(घ) ज़्यादा पढ़ी-लिखी न हो
उत्तर – (घ) ज़्यादा पढ़ी-लिखी न हो

12. शंकर की पढ़ाई में बाधा किस कारण आई थी?
(क) शादी
(ख) अस्वस्थता
(ग) पढ़ाई का मन न लगना
(घ) नौकरी
उत्तर – (ख) अस्वस्थता

13. नाटक के इस दृश्य की सबसे महत्वपूर्ण घटना क्या है?
(क) मक्खन न आना
(ख) तख्त लगाना
(ग) लड़के वालों का आना
(घ) चाय बनाना
उत्तर – (ग) लड़के वालों का आना

14. रामस्वरूप किसे संगीत प्रस्तुत करने के लिए कहता है?
(क) प्रेमा को
(ख) उमा को
(ग) रतन को
(घ) खुद गाता है
उत्तर – (ख) उमा को

15. प्रेमा किस वस्तु के बारे में बात करती है जो पूजावाली कोठरी में है?
(क) दरी
(ख) हरमोनियम
(ग) चद्दर
(घ) धोती
उत्तर – (ग) चद्दर

16. रामस्वरूप की बेटी का नाम क्या है?
(क) कविता
(ख) उमा
(ग) राधा
(घ) शोभा
उत्तर – (ख) उमा

17. रामस्वरूप किस बात को लेकर परेशान हैं?
(क) तख्त की सफाई
(ख) मक्खन न आना
(ग) उमा का व्यवहार
(घ) चाय बनाना
उत्तर – (ग) उमा का व्यवहार

18. शंकर की छुट्टियाँ किस कारण हैं?
(क) त्योहार
(ख) गर्मी की छुट्टी
(ग) बीमारी के कारण
(घ) वीक-एण्ड
उत्तर – (घ) वीक-एण्ड

19. शंकर के अनुसार उसके कोर्स में कितने साल बाकी हैं?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) साल-दो साल
उत्तर – (घ) साल-दो साल

20. गोपाल प्रसाद ने कितनी कचौड़ियाँ खाई थीं?
(क) दर्जनों
(ख) दो
(ग) चार
(घ) पाँच
उत्तर – (क) दर्जनों

 

Reedh ki Haddi Extra Question Answers (अतिरिक्त प्रश्न उत्तर)

Q1. गोपाल प्रसाद को किस बात पर गुस्सा आता है और वह क्या निर्णय लेते हैं?
उत्तर- गोपाल प्रसाद को यह जानकर बहुत गुस्सा आता है कि रामस्वरूप ने उन्हें यह झूठ बताया कि उमा केवल मैट्रिक पास है, जबकि वह वास्तव में बी.ए. पास है। उन्हें लगता है कि उनके साथ धोखा हुआ है और वह इसे अपना अपमान मानते हैं। गुस्से में वह रिश्ता तोड़ने का निर्णय लेते हैं और अपनी छड़ी उठाकर बेटे के साथ घर लौटने की तैयारी करते हैं।

Q2. उमा गोपाल प्रसाद से ‘बैकबोन’ का ज़िक्र क्यों करती है?
उत्तर- उमा ने जब देखा कि गोपाल प्रसाद बिना तर्क या समझदारी के रिश्ता तोड़ रहे हैं, तो उसने उनके बेटे की कमजोरी पर व्यंग्य किया। उसने सवाल उठाया कि क्या उनके बेटे में निर्णय लेने की ताकत है या नहीं, जिसे वह ‘रीढ़ की हड्डी’ या ‘बैकबोन’ कहती है। यह व्यंग्य केवल बेटे पर नहीं बल्कि पिता की सोच पर भी है, जो लड़कियों की शिक्षा को समस्या मानते हैं।

Q3. अंत में रामस्वरूप की मन:स्थिति कैसी दिखाई गई है?
उत्तर- जब गोपाल प्रसाद रिश्ता तोड़कर चले जाते हैं, तो रामस्वरूप कुर्सी पर ‘धम’ से बैठ जाते हैं। वे शायद अपने ऊपर पछता रहे हैं कि उन्होंने सत्य क्यों नहीं बताया, या शायद सोच रहे हैं कि इतना पढ़ाना क्या ग़लत था।

Q4. उमा ने गोपाल प्रसाद और उनके बेटे पर कौन-कौन से आरोप लगाए?
उत्तर- उमा ने तीखे स्वर में कहा कि यदि उसकी पढ़ाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो उनके बेटे के चरित्र पर भी सवाल उठने चाहिए। उसने बताया कि गोपाल प्रसाद का बेटा लड़कियों के हॉस्टल के आसपास घूमता था और वहाँ से भगाया गया था। साथ ही, उसने यह भी आरोप लगाया कि वह नौकरानी के पैरों पड़कर माफी माँगते हुए भागा था। इन आरोपों से उमा ने उसकी कायरता और दोहरे मापदंड को उजागर किया।

Q5. अंत में शंकर और गोपाल प्रसाद की क्या प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर- शंकर शर्मिंदा होता है और बात बिगड़ती देख अपने पिता से चलने का आग्रह करता है। गोपाल प्रसाद को जब हॉस्टल वाली बात पता चलती है, तो वह हैरान रह जाते हैं। इससे पता चलता है कि उन्हें अपने बेटे की असलियत का अंदाज़ा नहीं था।

Q6. उमा के ‘मैंने कोई पाप नहीं किया’ कहने का क्या महत्व है?
उत्तर- उमा इस संवाद के माध्यम से यह स्पष्ट करती है कि उसका बी.ए. पास करना कोई अपराध नहीं है। वह शिक्षा को अपराध की तरह देखने वाली सोच का विरोध करती है।

Q7. गोपाल प्रसाद के इनाम से जुड़े सवाल पर उमा ने क्या प्रतिक्रिया दी और उसका क्या अर्थ है?
उत्तर- जब गोपाल प्रसाद ने उमा से पूछा कि क्या उसने कोई इनाम जीते हैं, तो उमा पहले चुप रही। बाद में, उसने बहुत गहरी बात कही—कि जब कुर्सी-मेज़ बिकती है, तो दुकानदार सिर्फ खरीदार को दिखाता है, चीज़ से राय नहीं ली जाती। इस उत्तर से उमा ने यह जताया कि एक लड़की को केवल वस्तु समझकर पेश किया जा रहा है, जिसकी भावनाओं और इच्छाओं का कोई महत्व नहीं।

Q8. गोपाल प्रसाद और रामस्वरूप उमा की प्रतिभाओं पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं?
उत्तर- गोपाल प्रसाद उमा के गाने से प्रभावित होकर उसकी कला की सराहना करते हैं और पूछते हैं कि क्या वह पेंटिंग भी करती है। रामस्वरूप तुरंत उसकी उपलब्धियों की सूची गिनाने लगते हैं—जैसे कि उसने तसवीरें बनाई हैं, सिलाई करती है, यहाँ तक कि उनकी कमीज़ें भी वही सिलती है।

Q9. अपनी बेटी का चश्मा दिख जाने पर रामस्वरूप क्या प्रतिक्रिया देते हैं?
उत्तर- रामस्वरूप सकपका जाते हैं और जल्दी से सफाई देते हैं कि उमा की आँखें दुख रही थीं, इसलिए उसने अस्थायी रूप से चश्मा लगाया है। वह यह बताने से बचते हैं कि उनकी बेटी पढ़ी-लिखी है और चश्मा पढ़ाई की वजह से लगाना पड़ा है।

Q10. गोपाल प्रसाद का ‘चाल में तो कुछ खराबी नहीं…’ कहना स्त्री की सामाजिक स्थिति को कैसे दर्शाता है?
उत्तर– गोपाल प्रसाद का यह कथन महिला के मूल्यांकन की सतही सोच को दर्शाता है। वह उमा की चाल, रूप और कलाओं को देखकर उसकी योग्यता तय करना चाहते हैं। यह दृश्य स्त्री को एक वस्तु की तरह देखने की मानसिकता पर सवाल खड़ा करता है, जहाँ उसका व्यक्तित्व, सोच या आत्मनिर्भरता मायने नहीं रखती, सिर्फ़ उसकी बाह्य सुंदरता और घरेलू गुण देखे जाते हैं।