CBSE Class 9 Hindi Chapter 7 Main Aur Mera Desh (मैं और मेरा देश) Question Answers (Important) from Ganga Book
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रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. “एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई, इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है?
(क) पूर्णता के भाव की तुष्टि
(ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति
(ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार
(घ) सुख-सुविधाओं का अभाव
उत्तर – (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार।
क्योंकि लेखक स्वयं को ‘पूर्ण’ समझ रहा था, किंतु एक दिन उसके उस ‘पूर्णता’ के विचार पर प्रहार हो गया।
2. निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?
(क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का
(ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का
(ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का
(घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का
उत्तर – (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का।
क्योंकि लेखक को ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में बहुत आनंद आता है जिसमें विषय को खुल कर खोलने का अवसर मिलता हो और अपनी बात को पूर्णतयः स्पष्ट करने का पूरा मौका हो।
3. “अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए, इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में —
(क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
(ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।
(ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी।
(घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।
उत्तर – (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।
क्योंकि पराधीन व्यक्ति अपनी नज़रों में अपने आप को अक्सर छोटा महसूस करता है।
4. निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि—
(क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।
(ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।
(ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो।
(घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।
उत्तर – (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।
क्योंकि किसी के अधीन होना मनुष्य के गौरव को खोखला कर जाता है। वह देश – विदेश कहीं भी जाए, पराधीनता का कलंक उसके आत्मविश्वास की धज्जियाँ उड़ाता है।
5. “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है”, इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है?
(क) देश और नागरिक
(ख) देश और संविधान
(ग) देश और विदेश
(घ) व्यवसाय और आजीविका
उत्तर – (क) देश और नागरिक।
क्योंकि इस निबंध में ‘मैं’ अर्थात एक नागरिक और उसके ‘देश’ के संबंधों को एक सिक्के के दो पहलुओं की तरह दर्शाया गया है।
6. प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?
(क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
(ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व
(ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध
(घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा
उत्तर – (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध
क्योंकि इस निबंध का मूल उद्देश्य व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध स्पष्ट करना ही है।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
1. स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?
उत्तर – स्वामी रामतीर्थ फलों की टोकरी भेंट करने वाले जापानी युवक का उत्तर सुनकर उस पर मुग्ध हो गए क्योंकि उस युवक के उत्तर में उसका देशप्रेम झलक रहा था। वह अपने देश के सम्मान के प्रति समर्पित लग रहा था। उसके इसी देशप्रेम ने स्वामी रामतीर्थ को मुग्ध कर दिया।
2. जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।
उत्तर – जापान के नवयुवक ने फलों की टोकरी के बदले स्वामी रामतीर्थ से यह मूल्य इस रूप माँगा कि वे अपने देश में जाकर यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। यह उत्तर सुनकर हमारे मन में भी उस युवक के प्रति सम्मान की भावना उत्पन्न होती है। उस युवक के व्यक्तित्व में देशप्रेम ही भावना झलकती है।
3. “बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – इस बात में कोई दोराह नहीं है कि व्यक्ति और देश एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। क्योंकि व्यक्तियों का समूह ही देश कहलाता है। अतः जब व्यक्ति अच्छे कार्य करते हैं तो देश का नाम ऊँचा होता है। वे देश की सुरक्षा करते हैं तो देश शक्तिशाली माना जाता है। वे सुंदर कार्य करते हैं तो देश का सौंदर्य-बोध अच्छा माना जाता है। उदाहरण के लिए जब जापानी युवक ने स्वामी रामतीर्थ को अपनी ओर से फलों की टोकरी लाकर दी। तो इससे उसका ही गौरव नहीं बढ़ा, बल्कि पूरे जापानवासियों को गौरव बढ़ा। इसी तरह किसी विदेशी छात्र ने जापान के पुस्तकालय से पुस्तक ले कर उससे चित्र फाड़ लिया। इसका दंड केवल उसी को नहीं मिला, बल्कि उसके सभी देशवासियों को दंडित किया गया। इससे पता चलता है कि व्यक्ति और देश एक दूसरे से अलग नहीं हैं।
मेरे अनुभव मेरे विचार
1. “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – यह बात एक दम सही है कि देश और नागरिक दोनों को एक-दूसरे का लाभ व् हानि मिलती है। देश की अच्छी पहचान का फायदा उसके नागरिकों को मिलता है और नागरिकों द्वारा किए गए सही और गलत बर्ताव का नतीजा देश को भी भुगतना पड़ता है।
एक बार मैं और मेरे परिवार के लोग नेपाल की यात्रा पर गए थे। वहाँ हमारा खूब सम्मान हुआ। हम पशुपती नाथ मंदिर गए। वहाँ के पुजारियों ने हमें भारतीय जानकर बहुत अधिक सम्मान दिया। वहाँ मुझे एहसास हुआ कि हमारे देश के गौरव के कारण हमारा भी सम्मान बढ़ गया।
वहीँ पर हम एक होटल में गए। हमारे आने से पहले वहां हमारे देश के कुछ नागरिकों ने बदसलूकी की थी। जब उन्हें पता चला कि हम भी भारतीय हैं तो उन्होंने हमें कमरा देने से साफ मना कर दिया। बड़ी मुश्किल से उन्हें समझाने के बाद हमें कमरा मिला। इस प्रकार कुछ एक व्यक्तियों के गलत आचरण ने पूरे देश को अपमानित किया।
2. “मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।”
(क) प्रातः काल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए।
उत्तर – सुबह से लेकर रात तक मैं अनेक लोगों का सहयोग लेती हूँ। सुबह-सुबह दूध वाला हमारे घर दूध पहुंचता है। मेरी माँ मेरे लिए भोजन बनाती है। पिताजी मुझे विद्यालय छोड़ते हैं। दिन भर विद्यालय का चौकीदार, अध्यापक, मेरे मित्र न जाने किस-किसका योगदान मुझे मिलता रहता है। मैं भी दूसरों के कामों में उनका पूरा सहयोग करती हूँ। मेरा कोई मित्र बीमार हो जाए तो मैं उसको सही घर पहुंचती हूँ। मैं उसे विद्यालय का गृह कार्य भेजती हूँ। माँ जो कहती हैं, वह कार्य करती हूँ। भाई-बहनों को किसी तरह की जरुरत हो तो मैं सदा उनकी सहायता करती हूँ। इस तरह मैं दूसरों का भी सहयोग करती हूँ।
(ख) उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘बहुतों में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए।
उत्तर – बहुतों में निम्नलिखित लोग शामिल होंगें –
माता-पिता, भाई-बहन, घर का नौकर, दूध वाला, प्रैस वाला, चौकीदार, ड्राइवर, अध्यापक, मित्र-साथी, दुकानदार, डॉक्टर आदि सब लोग।
(ग) रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए।
उत्तर – रचनाकार लोगों के लिए लिखता है। वह अपने पाठकों को मध्यनजर रखते हुए लिखता है। रचनाकार को अपने पाठकों, श्रोताओं, प्रशंसकों और आलोचकों के सहयोग की आवश्यकता पड़ती है। कागज-पैन, लेखन सामग्री, छापने वाले प्रकाशक आदि सबकी जरूरत पड़ती है। सबसे अधिक सहयोग उसे अपने पाठक या श्रोता का चाहिए होता है क्योंकि यदि वे न पढ़ें और उसकी तारीफ या आलोचना न करें या उस रचना पर अपनी राय न दे तो लेखक का लिखना बेकार हो जाता है।
3. “सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।”
(क) उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित अंश “युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता” के आधार पर लिखिए कि देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं? अपने उत्तर को विस्तार देने के लिए अपने घर या पास-पड़ोस के बड़ों और अध्यापक से चर्चा करके लिखिए।
उत्तर – युद्ध में लड़ना ही एकमात्र काम नहीं होता। देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी ऐसे अनेक काम कर सकते हैं, जिन्हें हर कोई आसानी से कर सकता है। जैसे – देश की सरकार द्वारा बनाए गए सभी नियमों का पालन करके व्यवस्था में सहयोग दे सकता है। हम सावजनिक जगहों, सड़कें, गलियों आदि को साफ रख सकते है। हम युद्ध लड़ने वाले सैनिकों को सम्मान देकर व् देश की जय बोलकर देश का मनोबल बढ़ा सकते है। युद्ध के समय सैनिकों को भोजन-सामान पहुँचाकर सहयोग दे सकते है। अपने देश को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से दूर रहने व् देश के प्रति समर्पित रहकर देश का सम्मान बड़ा सकते हैं।
(ख) अपने पास-पड़ोस में विचरने वाले पशु-पक्षियों की जीवनचर्या का अवलोकन कीजिए और अपने अवलोकन के आधार पर लिखिए कि आप उनके संघर्षो को किस रूप में देखते हैं?
(संकेत- आप अपनी पाठ्यपुस्तक में दी गई कहानी ‘दो बैलों की कथा’ के मुख्य पात्रों के अनुभवों को भी आधार बना सकते हैं।)
उत्तर – हमारी तुलना में पशु-पक्षियों का संघर्ष बहुत अधिक होता है। उनके पास कोई सुख सुविधा उपलब्ध नहीं होती। उन्हें अपने खाने के लिए रोज संघर्ष करना पड़ता है। पालतू जीवों का संघर्ष फिर भी थोड़ा कम होता हैं। क्योंकि इनके मालिक इनके लिए चारे और पानी का प्रबंध करते हैं, किंतु विचरण करने वाले पशु पक्षी तो बिल्कुल अकेले होते हैं। जीविका के सारे प्रबंध उन्हें खुद करने पड़ते हैं। हम मनुष्य हर पग पर उनके लिए संकट खड़े करते हैं। हम पक्षियों के घोंसले तोड़ डालते हैं। मधु मक्खियों के शहद के छत्ते तोड़कर शहद ले लेते हैं। जंगलों को काट कर पशुओं के आवास छीन लेते हैं। भगवान ने गाय-भैंस को अपने बछड़ों के लिए दूध दिया होता है, हम उसे भी खुद के लिए उपयोग करते हैं। सचमुच पशु-पक्षियों का जीवन बहुत अधिक संघर्ष का होता है।
(ग) इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है? आप अपने घर के बड़ों से इस विषय पर चर्चा करके उनके और अपने विचार लिखिए।
उत्तर – इस निबंध में जीवन को युद्ध इसलिए कहा गया है क्योंकि युद्ध का एक अर्थ अपनी जरूरतों के लिए कड़ा संघर्ष करते हुए सुख सुविधाओं का प्रबंध करना भी है। इस संसार में कोई भी व्यक्ति बिना संघर्षों के जीवन नहीं जीता है। रंक से लेकर राजा-महाराजा भी संघर्ष का जीवन जीते हैं। उन पर अपना ही नहीं, अपनी पूरी प्रजा की जरूरतों का दायित्व होता है। जो व्यक्ति फुटपाथ या झुग्गी-झोंपड़ियों में पैदा होते हैं। उनका तो जन्म लेना भी एक संघर्ष है। कभी जून की तपती दोपहर, कभी वर्षा, कभी बाढ़, कभी ठंड, कभी पुलिस के डंडे- उनके संघर्ष को उनके अलावा कोई नहीं जान सकता। जीवन सभी के लिए संघर्षों से भरा रहता है। फिर चाहे वे पशु-पक्षियों ही क्यों न हो। जीवन जीने के लिए हर रोज हर किसी को युद्ध करना पड़ता है।
(घ) देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं। इसी तरह हमारे आस-पास हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग कार्यरत हैं। ये कौन-कौन लोग हैं और उनके लिए आप क्या क्या कर सकते हैं?
उत्तर – हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक प्रकार के लोग हमारी सेवा में जुटे रहते हैं। कुछ व्यक्ति और उनके काम निम्नलिखित हैं –
- शिक्षक – बच्चों को पढ़ाते हैं व् अच्छा नागरिक बनाते हैं।
- डॉक्टर – हमारे स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं।
- दुकानदार – हमें हर सामान उपलब्ध करवाते हैं।
- ठेली वाले – घूम-घूमकर हमारी जरूरत का सामान हम तक आसानी से पहुंचते हैं।
- किसान – जीवन की सबसे महत्वपूर्ण वस्तु अन्न, भोजन और कपास उगाते हैं।
- वाहन चालक – हमें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं।
- कलाकार – हमारी मानसिक स्थिति को सही रखते हुए हमारा मनोरंजन करते हैं।
- संत मुनि – हमें धर्म की राह दिखाते हुए हमारा मार्गदर्शन करते हैं।
- नेता – हमारे देश को आगे ले जाने के लिए जी-जान लगाते हैं।
इनके लिए हम जरूरत के समय व् आवश्यकतानुसार उनका सहयोग कर सकते हैं।
4. “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”
(क) उपर्युक्त पंक्ति के आधार पर लिखिए कि पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे?
उत्तर – लेखक के अपने आस-पड़ोस के लोगों से मधुर संबंध ही होंगे। क्योंकि अपने आस-पड़ोस के लोगों से उनका प्यार पाना तभी संभव है जब हमारे अपने पड़ोसियों से मधुर संबंध हो। यदि कोई पड़ोसी हमें अपने घर न आने दे, अपनी छत पर खेलने से मना करे, हमेशा डाँटकर या चिढ़कर बात करे तो पड़ोस से मधुर सम्बन्ध नहीं कहा जा सकता। अतः यह स्पष्ट है कि लेखक के अपने आस-पड़ोस के लोगों से मधुर संबंध ही होंगे। वरना उनकी ममता या दुलार न मिलता।
(ख) वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इनके क्या कारण हो सकते हैं? लिखिए।
उत्तर – वर्तमान समय में किसी पर भी विश्वास करना बहुत कठिन है। आज का व्यक्ति अकेला रहना पसंद करता है। कोई किसी का सहयोग नहीं करता। पड़ोस में रहने वाले बच्चों को दूसरे बच्चों से दूर रखा जाता है। सबसे बड़ा कारण तो यह है कि आज हर व्यक्ति अपने तथा अपने बच्चों के बारे में ही सोचता है। वह आस-पड़ोस को पराया मानता है। निजी स्वार्थ के कारण आजकल सभी अकेले और भयभीत हो गए हैं।
5. “क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” अपने घर / विद्यालय के आस-पास, सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी, संबंधी क्या-क्या करते हैं?
उत्तर – सुरुचि और सौंदर्य के लिए नियम, स्वच्छता, सुंदरता और अनुशासन का होना आवश्यक है। यदि लोग इधर-उधर कूड़ा फैलाते हैं। सार्वजनिक फर्नीचर को तोड़ देते हैं। सार्वजनिक संसाधन उलट-पलट देते हैं। विद्यालयों के कमरे के पंखे टेढ़े कर देते हैं। तो वह सार्वजनिक स्थान गंदा और कुरुचिपूर्ण हो जाता है। वहाँ जाने का किसी का मन नहीं करता। परन्तु हम हमेशा सुरुचि का ध्यान रखते हैं। हमारे सहपाठी, संबंधी हमेशा कूड़ेदान में कूड़ा डालते हैं। यहाँ तक कि जब हम कहीं घूमने जाते हैं तो दिन-दिन भर कागज़ व् अन्य कूड़ा अपने पास ही किसी लिफाफे में रखते हैं ताकि उन्हें बाद में कूड़ेदान में ही डाला जाए।
6. “मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।” देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या नहीं करें? अपने-अपने समूह में इसकी चर्चा कीजिए और चर्चा से उभरे बिंदुओं को प्रातःकालीन सभा में पढ़कर सुनाइए।
उत्तर – देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें –
- हमेशा हर जगह समय पर पहुँचें, ताकि कोई आपके कारण आपने देश को आलसी न कहें।
- अपने देश और समाज की बुराई किसी अन्य के सामने न करें। क्योंकि यदि आप ही अपने देश व् समाज का सम्मान नहीं करेंगे तो कोई दूसरा भला क्यों करेगा।
- सार्वजानिक स्थानों की सुंदरता को बनाए रखें व् फूल न तोड़ें।
- पुस्तकालय में शांति से पढ़ें। पुस्तकालय की किसी पुस्तक का पन्ना न फाड़ें।
- अपने से बड़ों व् सम्माननीय व्यक्तियों जैसे – गुरुजनों, नेताओं और अधिकारियों का सम्मान करें।
- अपने कर्तव्यों का पालन करें।
देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या नहीं करें –
- किसी के लिए भी अपशब्दों का प्रयोग न करें। व् अपने देश या किसी अन्य देश की निंदा न करें।
- सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फैलाएँ । कूड़े के लिए कूड़ेदान का उपयोग करें।
- कोई देश विरोधी काम न करें व् न ही किसी ऐसी घटना को बढ़ावा दें जो देश का अहित करे।
- धर्म, जाति या किसी भी प्रकार के भेदभाव को बढ़ावा न दें।
- अपने अधिकारों का दुरूपयोग न करें।
मेरे प्रश्न
“ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है”
निबंध के उपर्युक्त संदर्भ से आपके लिए दो प्रश्न बनाए गए हैं—
(क) रचनाकार को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है?
उत्तर – रचनाकार को उन प्रश्नों के उत्तर देने में आनंद आता है जिनमें कोई रहस्य या विस्तार छिपा हो। उस छिपे हुए भाव या विस्तार को खोलकर समझाने में ही रचनाकार को आनंद मिलता है।
(ख) आपको किस तरह के प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है?
अब इस निबंध के आलोक में नीचे दी गई सामग्री को पढ़कर तीन प्रश्न बनाइए और लिखिए।
यह सोचना एकदम निराधार है कि केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं। देश की सुरक्षा का विषय हो अथवा ऐश्वर्य व संपन्नता का, सभी नागरिकों का अपनी ही तरह से योगदान होता है। हम सब नागरिक अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम यदि कुछ भी गलत करते हैं तो उससे अपनी छवि ही धूमिल नहीं होती अपितु अपने देश की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उत्तर –
1. कौन सी बात एकदम निराधार है ?
2. देश की सेवा में नागरिकों का कैसा योगदान होता है ?
3. देश की छवि कैसे धूमिल होती है ?
भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
संदर्भ में शब्द

नीचे लिखे वाक्यों पर ध्यान दीजिए-
- एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई।
- क्या कोई भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई।
दीवार में पैदा हुई चटक/तरेड़ / फाँक / टूटन के लिए ‘दरार’ शब्द का प्रयोग करते हैं। भूकंप आने पर अथवा किसी भी प्रकार के तोड़-फोड़ का कार्य होने पर भवनों की छतों और दीवारों में दरार पड़ जाती है। इस शब्द का प्रयोग ऐसे भी किया जाता है—
- वे बहुत अच्छे मित्र थे। न जाने ऐसा क्या हुआ कि उनके संबंधों में दरार पड़ गई।
- भेदभाव की भावना सामाजिक एकता में दरार डालती है।
अब इसी प्रकार ‘गाँठ” शब्द के प्रयोग पर ध्यान दीजिए—
- “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है, जो नागरिक और देश को एक साथ बाँधती है”
- माला गूंथते समय धागे के एक सिरे पर गाँठ बाँध दीजिए।
इसी प्रकार ‘पानी’ शब्द का प्रयोग देखिए-
- बहुत प्यास लगी है, पानी दीजिए।
- जब उस लड़के की पुस्तक से पन्ने फाड़ने की बात सामने आई तो वह पानी-पानी हो गया।
- इतनी अधिक वर्षा हुई कि चारों ओर पानी-पानी हो गया।
- अब इनके कामों के बारे में और क्या कहा जाए, इनका तो पानी ही उतर चुका है।
अब अपनी पाठ्यपुस्तक में से ऐसे अन्य शब्द छाँटकर लिखिए जो संदर्भ के अनुसार भिन्न-भिन्न अर्थ देते हों।
उत्तर – प्रस्तुत पाठ में ‘खेल’, ‘घूम’, ‘सेवा’, ‘खड़ा’, ‘फैला’, ‘अर्थ’ जैसे अनेक शब्द हैं जो भिन्न-भिन्न अर्थ देते हैं।
उदाहरण के लिए – ‘खेल’ शब्द –
तुम कौन-सा खेल खेलते हो?
यह सब भाग्य का खेल है।
क्या तुम मेरे साथ कोई खेल खेल रहे हो?
मैं खेल-खेल में लोगों की नीयत जान जाता हूँ।
सैनिक ने उसका खेल खत्म कर दिया।
मिलते-जुलते भाव वाले ‘शब्द-युग्म’
- “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”
- “इस तरह एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर मैं खड़ा हुआ था।”
पहले वाक्य में ‘ममता-दुलार’ और दूसरे वाक्य में ‘भरा-पूरा’ शब्द मिलता-जुलता भाव दे रहे हैं। ये शब्द-युग्म हैं। शब्द-युग्म प्राय: दो शब्दों के समूह होते हैं। ये कई प्रकार से बनते और बनाए जाते हैं। कभी अर्थ की दृष्टि से समान होते हैं, कभी उच्चारण की दृष्टि से समान होते हैं परंतु अर्थ में अंतर होता है, कभी विपरीत भाव भी देते हैं। इस प्रकार के शब्दों के प्रयोग से भाषा में सजीवता आती है।
आप इस निबंध में से मिलते-जुलते अर्थ वाले और पुनरुक्त (एक ही शब्द को फिर से कहना) शब्द-युग्म छाँटकर लिखिए।
उत्तर –
शब्द युग्म = ममता- दुलार, घूम-फिर, भरा-पूरा, दया-प्रार्थना, मेला-ठेला, पास-पड़ोस, दाल-रोटी, हीरे-मोती, मोटर-बस, होटलों-धर्मशालाओं।
पुनरुक्त शब्द = पूरा-पूरा, बड़ी-बड़ी, खील-खील, छोटी-छोटी, बड़े-बड़े।
शब्दों की कड़ियाँ / शृंखला
“मैं सोचा करता था कि मेरी मनुष्यता में अब कोई अपूर्णता नहीं रही।”
उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित शब्द ‘अपूर्णता‘ में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों का ही प्रयोग चिह्नित किया गया है। इस प्रयोग को समझकर नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय शब्द पहचानकर लिखिए-
अलौकिक, निरक्षरता, सम्मानित, अनावश्यक, अपमानित, अभिमानी
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द | प्रत्यय |
| अपूर्णता | अ | पूर्ण | ता |
(आपकी पाठ्यपुस्तक के ‘क्या लिखँ?’ पाठ में भी उपसर्ग और प्रत्यय के प्रयोग के विषय में जानकारी दी गई है।)
उत्तर –
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द | प्रत्यय |
| अलौकिक | अ | लोक | इक |
| निरक्षरता | निर् | अक्षर | ता |
| सम्मानित | सम् | मान | इत |
| अनावश्यक | अन | अवश्य | क |
| अपमानित | अप | मान | इत |
| अभिमानी | अभि | मान | ई |
Class 9 Hindi Main Aur Mera Desh Extract Based Questions (गद्यांश आधारित प्रश्न)
निम्नलिखित गद्याँशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए व प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर दीजिए-
1
हमारे देश के महान संत स्वामी रामतीर्थ एक बार जापान गये। वे रेल में यात्रा कर रहे थे कि एक दिन ऐसा हुआ कि उन्हें खाने को फल न मिले और उन दिनों फल ही उनका भोजन था। गाड़ी एक स्टेशन पर ठहरी, तो वहाँ भी उन्होंने फलों की खोज की पर वे पा न सके। उनके मुँह से निकला, “जापान में शायद अच्छे फल नहीं मिलते।”
एक जापानी युवक प्लेटफार्म पर खड़ा था। वह अपनी पत्नी को रेल में बैठाने आया था, उसने ये शब्द सुन लिए। सुनते ही वह अपनी बात बीच में ही छोड़कर भागा और कहीं दूर से एक टोकरी ताजे फल लाया। वे फल उसने स्वामी रामतीर्थ को भेंट करते हुए कहा, “लीजिए, आपको ताज़े फलों की जरूरत थी।”
स्वामी जी ने समझा यह कोई फल बेचने वाला है और उनके दाम पूछे पर उसने दाम लेने से इन्कार कर दिया। बहुत आग्रह करने पर उसने कहा, “आप इनका मूल्य देना ही चाहते हैं तो वह यह है कि आप अपने देश में जाकर किसी से यह न कहिएगा कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।”
1. स्वामी रामतीर्थ का उन दिनों मुख्य भोजन क्या था?
(क) रोटी-सब्जी
(ख) फल
(ग) चावल-दाल
(घ) दूध-रोटी
उत्तर- (ख) फल
2. जापानी युवक ने स्वामी जी को फल देने के बदले क्या माँगा?
(क) पैसे
(ख) धन्यवाद पत्र
(ग) यह वचन कि वे अपने देश में जापान के फलों की बुराई न करें
(घ) फोटो पर हस्ताक्षर
उत्तर– (ग) यह वचन कि वे अपने देश में जापान के फलों की बुराई न करें
3. जापानी युवक प्लेटफार्म पर क्यों आया था?
(क) अपनी पत्नी को रेल में बैठाने
(ख) फल बेचने
(ग) स्वामी जी से मिलने
(घ) स्टेशन मास्टर से मिलने
उत्तर– (क) अपनी पत्नी को रेल में बैठाने
4. जापानी युवक ने स्वामी जी को नि:शुल्क फल क्यों दिए?
उत्तर– युवक ने देश-गौरव और अच्छी छवि बनाए रखने के हेतु फल नि:शुल्क दिए और बदले में केवल यह वचन माँगा कि वे अपने देश में जाकर यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।
5. इस गद्याँश से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर– इस गद्याँश से शिक्षा मिलती है कि सच्ची देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहार में दिखती है; अपने देश की छवि की रक्षा के लिए छोटे-से छोटे अवसर पर उदारता दिखानी चाहिए।
2
इस गौरव की ऊँचाई का अनुमान आप दूसरी घटना सुनकर ही पूरी तरह लगा सकेंगे। एक दूसरे देश का निवासी एक युवक जापान में शिक्षा लेने आया। एक दिन वह सरकारी पुस्तकालय से कोई पुस्तक पढ़ने को लाया। इस पुस्तक में कुछ दुर्लभ चित्र थे। ये चित्र इस युवक ने पुस्तक में से निकाल लिए और पुस्तक वापस कर आया। किसी जापानी विद्यार्थी ने यह देख लिया और पुस्तकालय को उसकी सूचना दे दी। पुलिस ने तलाशी लेकर वे चित्र उस विद्यार्थी के कमरे से बरामद किए और उस विद्यार्थी को जापान से निकाल दिया गया।
मामला यहीं तक रहता, तो कोई बात न थी। अपराधी को दंड मिलना ही चाहिए पर मामला यहीं तक नहीं रुका और उस पुस्तकालय के बाहर बोर्ड पर लिख दिया गया कि उस देश का (जिसका वह विद्यार्थी था) कोई निवासी इस पुस्तकालय में प्रवेश नहीं कर सकता।
मतलब साफ है, एक दम साफ कि जहाँ एक युवक ने अपने काम से अपने देश का सिर ऊँचा किया था, वहीं एक युवक ने अपने काम से अपने देश के मस्तक पर कलंक का ऐसा टीका लगाया, जो जाने कितने वर्षों तक संसार की आँखों में उसे लांछित करता रहा।
1.जापान में पढ़ने आये युवक ने पुस्तक से क्या निकाल लिया?
(क) पैसे
(ख) दुर्लभ चित्र
(ग) कागज
(घ) पुस्तकालय कार्ड
उत्तर– (ख) दुर्लभ चित्र
2. उस विद्यार्थी के चित्र चुराने के बाद पुस्तकालय ने क्या निर्णय लिया?
(क) पुस्तकालय बंद कर दिया
(ख) पुस्तकें जलाईं
(ग) बोर्ड लगाया कि उसके देश के कोई निवासी प्रवेश नहीं कर सकते
(घ) जापानी छात्रों को निकाल दिया
उत्तर- (ग) बोर्ड लगाया कि उसके देश के कोई निवासी प्रवेश नहीं कर सकते
3. जापान में शिक्षा लेने गये युवक ने कौन सा अनुचित कार्य किया?
उत्तर– युवक ने सरकारी पुस्तकालय से पढ़ने के लिए लाई पुस्तक में से दुर्लभ चित्र निकाल लिए और पुस्तक बिना चित्रों के लौटा दी।
4. जापानी पुस्तकालय ने किस कारण उस देश के सभी निवासियों का प्रवेश प्रतिबंधित किया?
उत्तर– क्योंकि एक युवक द्वारा पुस्तक से चित्र चुराने के कारण संस्था ने उस देश के सभी नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी, ताकि दोबारा ऐसी घटना न हो।
5. इस घटना से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर- इस घटना से यह शिक्षा मिलती है कि एक नागरिक के बुरे कार्यों का प्रभाव पूरे देश की छवि पर पड़ता है और राष्ट्र की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचती है, इसलिए हर व्यक्ति को अपने आचरण के प्रति सजग रहना चाहिए।
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महान कमालपाशा उन दिनों अपने देश तुर्की के राष्ट्रपति थे। राजधानी में उनकी वर्षगाँठ बहुत धूमधाम से मनाई गई। देश के लोगों ने उस दिन लाखों रुपए के उपहार उन्हें भेंट किए। वर्षगाँठ का उत्सव समाप्त कर जब वे अपने भवन के ऊपर चले गए तो एक देहाती बूढ़ा उन्हें वर्षगाँठ का उपहार भेंट करने आया। सेक्रेटरी ने कहा, “अब तो समय बीत गया है।” बूढ़े ने कहा, “मैं तीस मील से पैदल चलकर आ रहा हूँ, इसलिए मुझे देर हो गई।”
राष्ट्रपति तक उसकी सूचना भेजी गई। कमालपाशा विश्राम के वस्त्र बदल चुके थे। वे उन्हीं कपड़ों के नीचे चले आए और उन्होंने आदर के साथ बूढ़े किसान का उपहार स्वीकार किया। यह उपहार मिट्टी की छोटी-सी हँडिया में पाव-भर शहद था, जिसे बूढ़ा स्वयं तोड़कर लाया था। कमालपाशा ने हँडिया को स्वयं खोला और उसमें दो उँगलियाँ भरकर चाटने के बाद तीसरी ऊँगली शहद से भरकर बूढ़े के मुँह में दे दी। बूढ़ा निहाल हो गया।
राष्ट्रपति ने कहा, “दादा, आज सर्वोत्तम उपहार तुमने ही मुझे भेंट किया, क्योंकि इसमें तुम्हारे हृदय का शुद्ध प्यार है।” उन्होंने आदेश दिया कि राष्ट्रपति की शाही कार में शाही-सम्मान के साथ उनके दादा को गाँव तक पहुँचाया जाए। क्या वह शहद बहुत कीमती था? क्या उसमें मोती हीरे मिले हुए थे? न, उस शहद के पीछे उसके लाने वाले की भावना थी, जिसने उसे सौ लालों का एक लाल बना दिया।
1.कमालपाशा की वर्षगाँठ कहाँ मनाई गई?
(क) गाँव में
(ख) मंदिर में
(ग) राजधानी में
(घ) स्कूल में
उत्तर- (ग) राजधानी में
2. बूढ़े व्यक्ति को उपहार देने के लिए क्यों देर हो गयी?
(क) गाड़ी सही समय पर नहीं आई थी
(ख) वह तीस मील पैदल चलकर आया था
(ग) उसे रास्ता नहीं पता था
(घ) वह बीमार था
उत्तर- (ख) वह तीस मील पैदल चलकर आया था
3. बूढ़े व्यक्ति ने क्या उपहार दिया?
(क) मिट्टी का बर्तन
(ख) फूलों का गुलदस्ता
(ग) मिठाई का डिब्बा
(घ) मिट्टी की हँडिया में शहद
उत्तर- (घ) मिट्टी की हँडिया में शहद
4. कमालपाशा ने बूढ़े व्यक्ति के उपहार को कैसे स्वीकार किया?
उत्तर- उन्होंने बूढ़े व्यक्ति के उपहार को आदर के साथ स्वीकार किया, खुद हँडिया खोली, शहद चाटा और बूढ़े के मुँह में शहद की तीसरी ऊँगली डाल दी।
5. राष्ट्रपति ने बूढ़े व्यक्ति के सम्मान में क्या किया?
उत्तर– उन्होंने आदेश दिया कि बूढ़े व्यक्ति को राष्ट्रपति की शाही कार में शाही सम्मान के साथ उनके गाँव तक पहुँचाया जाए।
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हमारे देश में भी एक ऐसी ही घटना घटी थी। एक किसान ने रंगीन सुतलियों से एक खाट बुनी और उसे रेल में रखकर वह दिल्ली लाया। दिल्ली स्टेशन से उस खाट को अपने कंधे पर रख, वह भारत के प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की कोठी पर पहुँचा। पंडित जी कोठी से बाहर आए तो वह खाट उसने उन्हें दी। पंडित जी को देखकर, वह इतना भाव-मुग्ध हो गया कि कुछ कह ही न सका। पंडित जी ने पूछा, “क्या चाहते हो तुम?”
उसने कहा, “यही कि आप इसे स्वीकार करें।” प्रधानमंत्री ने उसका यह उपहार प्यार से स्वीकार किया और अपना एक फोटो दस्तखत करके उसे स्वयं भी उपहार में दिया। जिस दस्तख़ती फोटो के लिए देश के बड़े-बड़े लोग, विद्वान और धनी तरसते हैं, वह क्या उस मामूली खाट के बदले में दिया गया था? न, वह तो उस खाट वाले की भावना का ही सम्मान था।
“क्यों जी, हम यह कैसे जान सकते हैं कि हमारा काम देश के अनुकूल है या नहीं?”
वाह, क्या सवाल पूछा है, आपने! सवाल क्या बातचीत में आपने तो एक कीमती मोती ही जड़ दिया यह, पर इसके उत्तर में सिर्फ़ “हाँ” या “न” से काम न चलेगा। मुझे थोड़ा विवरण देना पड़ेगा।
हम अपने कार्यों को देश के अनुकूल होने की कसौटी पर कस कर चलने की आदत डालें, यह बहुत उचित है, बहुत सुन्दर है, पर हम इसमें तब तक सफल नहीं हो सकते, जब तक कि हम अपने देश की भीतरी दशा को ठीक-ठीक न समझ लें और उसे हमेशा अपने सामने न रखें।
1.किसान ने खाट कैसे बनाई थी?
(क) लकड़ी से
(ख) सुतलियों से
(ग) लोहे से
(घ) प्लास्टिक से
उत्तर- (ख) सुतलियों से
2. किसान खाट लेकर कहाँ पहुँचा?
(क) प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की कोठी पर
(ख) राष्ट्रपति आवास पर
(ग) स्थानीय पंचायत में
(घ) रेलवे स्टेशन पर
उत्तर– (क) प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की कोठी पर
3. पंडित नेहरू ने किसान को क्या दिया?
(क) एक चेक
(ख) कोई उपहार नहीं
(ग) नया घर
(घ) हस्ताक्षरित फोटो
उत्तर– (घ) हस्ताक्षरित फोटो
4. भाव-मुग्ध में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व समास
(ख) बहुव्रीहि समास
(ग) अव्ययीभाव समास
(घ) तत्पुरुष समास
उत्तर- (घ) तत्पुरुष समास
5. किसान ने पंडित नेहरू को कौन सा उपहार दिया?
उत्तर- किसान ने पंडित नेहरू को रंगीन सुतलियों से बनी एक खाट भेंट की।
Class 9 Hindi Ganga Lesson 7 Main Aur Mera Desh Multiple Choice Questions (बहुविकल्पीय प्रश्न)
1.”अकेला चना क्या भाड़ फोड़े” कहावत का क्या अर्थ है?
(क) अकेला व्यक्ति बड़ा होता है
(ख) अकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता
(ग) अकेला व्यक्ति सफल हो जाता है
(घ) अकेला व्यक्ति कमजोर है
उत्तर- (ख) अकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता
2. ‘मैं और मेरा देश’ के लेखक कौन हैं?
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
(ख) हरिवंश राय बच्चन
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) कन्हैया लाल मिश्र ‘प्रभाकर’
उत्तर- (घ) कन्हैया लाल मिश्र ‘प्रभाकर’
3. नागरिक का सबसे बड़ा कर्तव्य क्या है?
(क) परिवार चलाना
(ख) देश का सम्मान बनाए रखना
(ग) व्यवसाय करना
(घ) संपत्ति अर्जित करना
उत्तर- (ख) देश का सम्मान बनाए रखना
4. लेखक ने किस चीज़ को देश की हीनता की कसौटी बताया है?
(क) चुनाव
(ख) शिक्षा
(ग) राजनीति
(घ) व्यापार
उत्तर- (क) चुनाव
5. शल्य ने कर्ण के आत्मविश्वास को कैसे प्रभावित किया?
(क) उसे प्रेरित किया
(ख) उसे धोखा दिया
(ग) अर्जुन की प्रशंसा कर उसके मन में संदेह डाला
(घ) उसकी सहायता की
उत्तर– (ग) अर्जुन की प्रशंसा कर उसके मन में संदेह डाला
6. शल्य कौन था?
(क) अर्जुन का मित्र
(ख) कर्ण का सारथी
(ग) दुर्योधन का भाई
(घ) कृष्ण का दूत
उत्तर– (ख) कर्ण का सारथी
7. लेखक के अनुसार जीवन क्या है?
(क) युद्ध
(ख) खेल
(ग) व्यापार
(घ) कविता
उत्तर– (क) युद्ध
8. जीवन की लेखक किससे तुलना करता है?
(क) गुड़िया से
(ख) समुद्र के तट से
(ग) पर्वत से
(घ) पुस्तक से
उत्तर– (ख) समुद्र के तट से
9. लेखक के अनुसार हीन कार्य कौन सा है?
(क) जिसके पीछे अच्छी भावना न हो
(ख) जो छोटा हो
(ग) जो समाजसेवा हो
(घ) जो देशहित में हो
उत्तर– (क) जिसके पीछे अच्छी भावना न हो
10. भारतीय किसान ने प्रधानमंत्री नेहरू को क्या दिया?
(क) शहद
(ख) फल
(ग) पत्र
(घ) खाट
उत्तर- (घ) खाट
11. कमाल पाशा ने उस किसान के लिए क्या किया?
(क) पुरस्कृत किया
(ख) कार में शाही सम्मान से पहुँचवाया
(ग) भोजन कराया
(घ) धन दिया
उत्तर– (ख) कार में शाही सम्मान से पहुँचवाया
12. कमाल पाशा किस देश के राष्ट्रपति थे?
(क) तुर्की
(ख) मिस्र
(ग) ईरान
(घ) अरब
उत्तर– (क) तुर्की
13. लेखक किस दो बोध की आवश्यकता बताता है?
(क) धर्म और विज्ञान
(ख) शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध
(ग) ज्ञान और धन
(घ) श्रम और साहस
उत्तर– (ख) शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध
14. लेखक के अनुसार, देश का गौरव और हीनता किससे जुड़ा है?
(क) सरकार से
(ख) नागरिक से
(ग) सैनिकों से
(घ) नेताओं से
उत्तर- (ख) नागरिक से
15. जापानी युवक ने स्वामी जी से क्या अनुरोध किया?
(क) फल का दाम दें
(ख) जापान में रहें
(ग) अपने देश में यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते
(घ) प्रवचन दें
उत्तर– (ग) अपने देश में यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते
16. स्वामी रामतीर्थ किस देश गए थे?
(क) चीन
(ख) जापान
(ग) अमेरिका
(घ) इंग्लैंड
उत्तर– (ख) जापान
17. लेखक को अपने देश के प्रति क्या कर्तव्य महसूस हुआ?
(क) धन कमाना
(ख) विदेश यात्रा करना
(ग) देश की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा करना
(घ) शासन में भाग लेना
उत्तर– (ग) देश की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा करना
18. लाला लाजपत राय का अनुभव क्या था?
(क) विदेशों में सुख
(ख) भारत की गुलामी का कलंक
(ग) लोगों का प्यार
(घ) व्यापार की उन्नति
उत्तर- (ख) भारत की गुलामी का कलंक
19. लाला लाजपत राय को किस नाम से जाना जाता था?
(क) पंजाब केसरी
(ख) लोकमान्य
(ग) नेताजी
(घ) कविराज
उत्तर- (क) पंजाब केसरी
20. वह ‘भूकंप’ क्या था?
(क) प्राकृतिक घटना
(ख) देश में विद्रोह
(ग) मानसिक विचारों का परिवर्तन
(घ) नगर में हंगामा
उत्तर- (ग) मानसिक विचारों का परिवर्तन
Main Aur Mera Desh Extra Question Answers (अतिरिक्त प्रश्न उत्तर)
1.लेखक ने किन दो बातों को देश के लिए आवश्यक बताया?
उत्तर- लेखक ने शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध को देश के उत्थान के लिए सबसे आवश्यक बताया है।
2. लेखक ने चुनाव को कसौटी क्यों कहा है?
उत्तर– क्योंकि समझदारी से दिया गया मत देश की ऊँचाई तय करता है, जबकि गलत व्यक्ति को दिया गया मत देश को हीन बना देता है।
3. शल्य की घटना से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर– शल्य के नकारात्मक वचनों ने कर्ण का आत्मविश्वास तोड़ा। इससे सीख मिलती है कि संदेह या निराशा भी पराजय का कारण बन सकती है।
4. लेखक के अनुसार जीवन क्या है?
उत्तर– जीवन एक युद्ध है जिसमें हर व्यक्ति की भूमिका महत्त्वपूर्ण है चाहे वह योद्धा हो या प्रोत्साहन देने वाला दर्शक।
5. लेखक ‘मैं और मेरा देश’ को अलग क्यों नहीं मानता?
उत्तर- क्योंकि व्यक्ति और देश दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। नागरिक का सम्मान देश से और देश का गौरव नागरिकों से जुड़ा है।
6. लेखक के अनुसार हर नागरिक का क्या कर्तव्य है?
उत्तर- हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने देश के सम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा करे तथा अपने आचरण से देश का नाम ऊँचा करे।
7. लाला लाजपत राय का अनुभव क्या था?
उत्तर- उन्होंने विदेश यात्रा के दौरान महसूस किया कि भारत की गुलामी का कलंक उनके माथे पर है और जब तक देश स्वतंत्र नहीं होगा, गौरव अधूरा रहेगा।
8. मानसिक भूकंप का अर्थ क्या है?
उत्तर- मानसिक भूकंप का अर्थ है विचारों और भावनाओं में गहरा परिवर्तन। लाला लाजपत राय के अनुभव ने लेखक के मन में यही झटका पैदा किया।
9. लेखक को अपनी पूर्णता का अनुभव कैसे हुआ?
उत्तर– लेखक को तब पूर्णता का अनुभव हुआ जब उसे अपने घर, पड़ोस और नगर से ममता, ज्ञान और सम्मान मिला। उसे लगा कि उसकी जीवन-स्थितियाँ सुन्दर और संगठित हैं तथा अब उसे किसी चीज़ की कमी नहीं है।
10. सौंदर्य-बोध का क्या महत्व है?
उत्तर– सौंदर्य-बोध देश की संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। गंदगी, असभ्यता और अव्यवस्था से देश की छवि को नुकसान पहुँचता है।