CBSE Class 9 Hindi Chapter 3 Samvadheen संवादहीन Question Answers (Important) from Ganga Book 

 

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सीबीएसई कक्षा 9 हिंदी गंगा के पाठ 3 संवादहीन प्रश्न उत्तर खोज रहे हैं? आगे कोई तलाश ना करें! महत्वपूर्ण प्रश्नों का हमारा व्यापक संकलन आपको अपने विषय ज्ञान को बढ़ाने में मदद करेगा। कक्षा 9 के हिंदी प्रश्न उत्तर का अभ्यास करने से परीक्षा में आपके प्रदर्शन में काफी सुधार हो सकता है। हमारे समाधान इस बारे में एक स्पष्ट विचार प्रदान करते हैं कि उत्तरों को प्रभावी ढंग से कैसे लिखा जाए। हमारे संवादहीन प्रश्न उत्तरों को अभी एक्सप्लोर करें उच्च अंक प्राप्त करने के अवसरों में सुधार करें।

 

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Samvadheen Chapter 3 NCERT Solutions

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

1. कहानी में ताई और मिट्टू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?
(क) परोपकार और त्याग
(ख) ममता और स्नेह
(ग) करुणा और क्रोध
(घ) जिज्ञासा और सहायता
उत्तर – (ख) ममता और स्नेह
मेरा तर्क – कहानी में ताई और मिट्टू का संबंध ममता और स्नेह के भाव को दर्शाता है। क्योंकि ताई कभी-कभी अपने लिए भोजन बनाने में आलस कर जाती थी। परन्तु जब से मिट्ठू उनकी दुनिया में आया था तब से वे ख़ास तौर पर मिट्ठू के लिए दाल-भात बनती थी। और मिट्ठू की पसंदीदा मिर्च और अमरुद का भी पूरा ध्यान रखती थी।

2. जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?
(क) अनुशासन और परंपरा
(ख) उदासीनता और असावधानी
(ग) आत्मगौरव और विद्रोह
(घ) करुणा और नैतिकता
उत्तर – (घ) करुणा और नैतिकता
मेरा तर्क – जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना करुणा और नैतिकता की भावना का संकेत देता है। जगन मास्टर एक आदर्शवादी अध्यापक थे। वे किसी को भी कष्ट में नहीं देख सकते थे। जिस कारण उन्हें मिट्ठू का पिंजरे में कैद रहना पसंद नहीं आया। और मिट्ठू को आजाद करना उनकी करुणा और नैतिकता को दर्शाता है।

3. मिट्टू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?
(क) भोजन की खोज
(ख) प्रेम की आकांक्षा
(ग) स्वतंत्रता की चाह
(घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति
उत्तर – (ग) स्वतंत्रता की चाह
मेरा तर्क – मिट्ठू ताई से बहुत प्रेम करता था परन्तु जब उसने खुला आसमान देखा तो उसे स्वतंत्रता का एहसास हुआ। किसी भी जीव के लिए स्वतंत्रता बहुत मायने रखती है और यह किसी भी जीव की बुनियादी चाह होती है।

4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?
(क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना
(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
(ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता
(घ) मिट्टू के प्रति प्रेम और संवाद
उत्तर – (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
मेरा तर्क – ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण परिवार से दूरी और संवाद का अभाव था क्योंकि ताई के पति की मृत्यु के बाद सभी परिवार के लोग शहरों में बसने के लिए चले गए थे और घर का कारोबार दूसरों के हाथों में चला गया था।

5. कहानी में मानव समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?
(क) मजबूरी
(ख) कर्मपरायणता
(ग) अकेलापन
(घ) संवादधर्मिता
उत्तर – (ग) अकेलापन
मेरा तर्क – कहानी में लेखक ने मानव समाज में व्याप्त बच्चों द्वारा बजुर्गों की अपेक्षा और उनके अकेलापन की विसंगति को मार्मिक ढंग से उजागर किया है।

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
1. “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?
उत्तर – उपरोक्त वाक्य में ताई का ‘नैया’ से आशय अपनी जीवन रूपी नैया से है। वृद्धावस्था में ताई बिलकुल अकेले रहती थी। उनके अकेलेपन का साथी एक मिट्ठू नामक तोता था। वे अक्सर उसी से अपने अकेलेपन को साँझा करती थी। परन्तु उन्हें नहीं पता था कि वे इस तरह अकेलेपन में कब तक जी सकेंगी। इसकारण वे भगवान् से शिकायत करती हैं कि “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?”

2. “धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर – उपरोक्त वाक्य से ताई के भरे-पूरे परिवार व् कारोबार के बिखरने की और संकेत किया गया है। जब ताई के बहू-बेटे सब गाँव का मोह त्यागकर शहर में बसने के लिए चले गए। बेटियों की शादी हो गई। तब घर का कारोबार संभालने वाला कोई नहीं बचा और सारा कारोबार व् खेती-बाड़ी परायों के नियंत्रण में चली गई।

3. “ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।” क्यों?
उत्तर – बेटे-बहू के शहर चले जाने के बाद व् बेटियों की शादी हो जाने के बाद ताई के पास कोई नहीं बचा था जिसके साथ वे अपना सुख-दुःख बाँट सकें। तब गनपत ने कही से एक पहाड़ी तोता (मिट्ठू) ताई को ला कर दिया। जीवन के अंत में जो ममता ताई ने अपने बच्चों या पोते-पोतियों के लिए बचा रखी थी वही ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी। क्योंकि अब वही ताई के सुख-दुःख का एकमात्र सहारा था।

4. “अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?
उत्तर – उपरोक्त वाक्य से ताई के व्यक्तित्व में आए नए उत्साह का पता चलता है। जो ताई पहले अपने आप के लिए खाना बनाने में भी आलस करती थी वे अब मिट्ठू के आने के बाद ख़ास तौर पर उसके लिए दाल-भात बनाती थी। वे मिट्ठू की पसंद के लिए ज्यादा सतर्क और उत्साही रहने लगी थी।

5. “जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – जगन मास्टर थोड़े दूसरे स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने जीवन में अपने कुछ नियम-सिद्धांत बना रखे थे और वे पूरा प्रयास करते थे कि उनके कारण किसी को कोई कष्ट न पहुँचे। वे बहुत ही स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति थे। वे कभी भी दूसरों की स्वतंत्रता पर बाधा नहीं डालना चाहते थे।

6. कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है— ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ नए तोते के लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है। क्योंकि पहले वाला मिट्ठू ताई से बहुत सारी बात करता था। ताई के अकेलेपन का साथी था। परन्तु दूसरा तोता ताई को देखकर कोई प्रतिक्रिया नहीं करता और न ही ताई से बात करता है। उसने ताई के अकेलेपन को और अधिक बड़ा दिया था।

7. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?
उत्तर – ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर इसलिए कहा गया होगा क्योंकि उनके इस बड़े घर में भी पुत्र – परिवार, बहू- -बेटियाँ, नौकर-चाकर, गाय – डंगर, सभी थे। परन्तु समय के साथ देखते ही देखते सब कुछ बदल गया। बहू-बेटे गाँव का प्रेम छोड़कर शहरों में जा कर बस गए। बेटियाँ शादी करके अपनी-अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो गईं, गाँव में बसा कारबार किसके भरोसे संभलता। अर्थात गाँव के कारोबार को देखने वाला या संभालने वाला कोई नहीं रहा। धीरे-धीरे सब कारोबार पराए हाथों में चला गया।

मेरे प्रश्न

नीचे कुछ उत्तर और उनके दो-दो प्रश्न दिए गए हैं। पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?
1. उत्तर : ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया।
प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
प्रश्न ख : ताई को मिट्ठू किसने भेंट में दिया था?
उत्तर – प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?

2. उत्तर : ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था।
प्रश्न क : ताई के लौटने के बाद मिट्ठू कहाँ चला गया था?
प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
उत्तर – प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?

3. उत्तर: गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।
प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
प्रश्न ख : गाँववाले मिट्ठू के उड़ने से खुश क्यों थे?
उत्तर – प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?

4. उत्तर : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है।
प्रश्न क : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है?
प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?
उत्तर – प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?

 

मेरे अनुभव मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभवों के आधार पर दीजिए-
1. “कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते – बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?
उत्तर – ताई की तरह जब हम अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो घर पर रखी वस्तुयों या बुजुर्ग व्यक्तियों की चिंता हमें भीतर से परेशान करती है। बार-बार हमें यही डर लगा रहता है कि कहीं कोई दुर्घटना न हो जाए। कहीं बुजुर्ग व्यक्ति अपना ध्यान रखने में असमर्थ न हो जाए। बार-बार फोन करके उनका हलचाल पूछते रहते हैं और जल्दी से जल्दी घर वापिस आने की कोशिश में लगे रहते हैं।

2. “आखिर वह भी तो बोलता – बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।
उत्तर – हाँ, मैं पूरी तरह से सहमत हूँ कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं।
अनुभव – हमारे गाँव के घर पर दो कुत्ते हैं। एक कुत्ता पांच साल का है और दूसरा एक साल का अभी छोटा बच्चा ही था। जब हम शहर से बहुत समय बाद गाँव लौटे तो छोटा कुत्ता हमें देखकर ज्यादा ही उत्साहित हो कर उछल-कूद करने लगा। मेरी बेटी उस समय 4 साल की ही थी। उसके लिए कुत्ते का उछल-कूद सहन करना मुश्किल हो रहा था। वह गिरने वाली थी और कुत्ते से डर भी रही थी। तभी बड़ा कुत्ता चुपचाप शांति से आकर बेटी को अपनी पीठ से सहारा देने लगा। और छोटे कुत्ते को गुर्राकर दूर हटाने लगा। उस समय मुझे महसूस हुआ कि पशुओं में भी समझ और संवेदनाएँ होती है। वह बड़ा कुत्ता मेरी बेटी के साथ वफादारी निभा रहा था जैसे उसे याद आ रहा हो कि छोटी बेटी उसकी पीठ का तकिया बनाकर उसके साथ दिनभर कैसे खेला करती थी।

3. “गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
उत्तर – ताई को भ्र्म में रखना उचित था। क्योंकि गाँव वाले जानते थे कि मिट्ठू ही ताई के सुख-दुःख का साथी बन गया था। वह ताई से बाते करता था और उनके अकेलेपन को दूर करता था। अपनी छोटी-छोटी शरारतों से वह ताई को खुश कर देता था। यदि ताई को पता चल जाता कि उनके परिवार की तरह मिट्ठू ने भी उनको अकेला छोड़ दिया तो उन्हें बहुत बड़ा सदमा लग सकता था।

4. “ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।
उत्तर – हाँ , जीवन में हमें कई बार विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
अनुभव – अपने अट्ठाईसवें जन्मदिन पर मैं बहुत खुश थी। मेरे ससुराल वालों ने सुबह-सुबह ही मुझे उपहार दे कर बधाइयाँ दे दी थी। मैं बहुत खुश थी। मुझे आशा थी कि मेरे मायके से भी मेरे परिवार के लोग मुझे बधाइयाँ देने के लिए अवश्य फोन करेंगे। फोन आया भी। परन्तु बधाइयाँ देने के लिए नहीं बल्कि एक दुखद समाचार देने के लिए। मेरे दादा जी का निधन हो गया था। मेरी जन्मदिन की खुशियां मानों मातम में छा गई थी। तब मेरी सासु माँ ने मुझे सांत्वना देते हुए समझाया था कि जीवन इसी तरह चलता है। कभी भी कोई भी परिस्थिति सामने आ सकती है। हमें हमेशा जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार रहना पड़ता है।

5. “मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर – हाँ मैं इस वाक्य का समर्थन करती हूँ कि प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं।
उदाहरण – आपने सर्कस या ज़ू में अक्सर देखा होगा कि बड़े-बड़े हाथियों को एक पतली सी रस्सी से बाँधा होता है। आपने कभी सोचा है कि वे हाथी उन रस्सियों को तोड़कर क्यों नहीं स्वतन्त्र हो जाते। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बचपन से ही उन हाथियों को रस्सी से बाँधा जाता था और अब जब वे बड़े हो गए हैं तब भी उन्हें लगता है कि वे बंधे हुए हैं और रस्सी को नहीं तोड़ सकते। यह एक प्रकार से मानसिक गुलामी कही जा सकती है।

 

विधा से संवाद

कहानी का सौंदर्य
संवादहीन कहानी में अनेक विशेष बिंदु हैं जो इसे प्रभावपूर्ण बनाते हैं। नीचे कहानी के कुछ विशेष बिंदु और उनके उदाहरण दिए गए हैं। आप भी कहानी से इसी प्रकार के एक-एक उदाहरण खोजकर लिखिए–

विशेष बिंदु अर्थ उदाहरण
चित्रात्मकता (दृश्य बिंब) शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना। मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।
संवादात्मकता कथ्य को आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग। “राम-राम कहो, सीताराम कहो।”
पुनरुक्ति शब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता । “कटेगी! कटेगी !! कटेगी!!!”
अतिशयोक्ति किसी पात्र, घटना, भाव या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे। रेलगाड़ी में उसका भी टिकट लगेगा, आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है ।।
लोकधर्मी भाषा ग्रामीण, सहज, बोल-चाल की भाषा। भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?
प्रश्नोत्तर शैली पात्रों या लेखक द्वारा प्रश्न पूछना। मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?

उत्तर – 

विशेष बिंदु अर्थ उदाहरण
चित्रात्मकता (दृश्य बिंब) शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना। “ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, ‘मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’ पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे”
संवादात्मकता कथ्य को आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग। “ताई जब कभी पिंजरे को बगल में रखकर सुस्ताने लगतीं तो अनायास ही मिट्ठू से सवाल कर बैठतीं, “मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?”
पुनरुक्ति शब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता । “सीताराम सीताराम ” “खुश रहो , खुश रहो” , “मर जा! मर जा!!”
अतिशयोक्ति किसी पात्र, घटना, भाव या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे। “अकेले मिट्टू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।”
लोकधर्मी भाषा ग्रामीण, सहज, बोल-चाल की भाषा। ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं
प्रश्नोत्तर शैली पात्रों या लेखक द्वारा प्रश्न पूछना। ताई मिट्ठू से सवाल कर बैठतीं, “मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?” और नौजवान मिट्ठू ताई के बुढ़ापे का सहारा बनकर दम-खम के साथ उन्हें दिलासा देते-

कटेगी! कटेगी !! कटेगी !!!

कहानी का अंत
किसी कहानी का अंत अनेक प्रकार से हो सकता है जैसे-
1. सुखांत – जब कहानी का अंत प्रसन्नता, सफलता से होता है।
2. दुखांत – जब कथा का अंत दुख, वियोग, मृत्यु या हानि से होता है।
3. मुक्त अंत – जब कहानी स्पष्ट रूप से खत्म नहीं होती, बल्कि सोचने के लिए छोड़ दी जाती है।
4. अप्रत्याशित अंत – जब अंत अचानक और अप्रत्याशित रूप से सामने आता है।
5. यथार्थवादी अंत – जब कहानी का अंत जीवन की सच्चाई जैसा लगे ।
6. प्रेरणात्मक अंत – जब कहानी के अंत में कोई प्रेरणा या सकारात्मक सोच दी जाए।
7. व्यंग्यात्मक अंत – जब कहानी का अंत व्यंग्य या कटाक्ष से किसी सत्य को प्रकट करता है।

आपके अनुसार ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?
उत्तर – मेरे अनुसार ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को दुखांत श्रेणी में रखा जा सकता है।
कारण – कहानी का अंत दुख से होता है। मिट्ठू का उड़ जाना और उसके स्थान पर नए तोते को लाना जो बिलकुल मिट्ठू की तरह तो दिखता है परन्तु मिट्ठू की तरह ताई के अकेलेपन का साथी नहीं बन सकता।
नया अंत – यदि मुझे कहानी का नया अंत लिखने का अवसर मिले तो मैं कहानी को एक प्रेरणादायक मोड़ दूंगी। जैसे – मिट्ठू के उड़ जाने के बाद जब ताई को पता चला कि उनके पास जो तोता अब है वह केवल मिट्ठू की तरह दिखता है वह मिट्ठू नहीं है। तो ताई को बहुत दुःख हुआ। परन्तु जब उन्होंने उस नए तोते के साथ दिन गुजारने शुरू किए तह उन्हें एहसास हुआ कि केवल मिट्ठू हीकोई भी प्राणी नहीं जिसे स्नेह दिया जाए वह आपके अकेलेपन का साथी हो जाता है। फिर ताई ने सभी गाँव वालों के साथ और पशु-पक्षियों के साथ समय बिताना शुरू किया और अपने अकेलेपन का सहारा ढूँढ लिया।

भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
‘मिट्ठू’ शब्द का अर्थ होता है— मधुरभाषी, मीठा बोलनेवाला या तोता ।
यह शब्द इतना अधिक प्रचलित है कि इसका प्रयोग एक मुहावरे में भी किया जाता है— ‘अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना ‘ जिसका अर्थ है ‘अपनी प्रशंसा आप करना’ या ‘अपने मुँह से अपनी बड़ाई करना’।
आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो, जैसे नीचे लिखे इस वाक्य में है-
“अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।”
ध्वन्यात्मकता शब्दों से
“जगन मास्टर का ध्यान अचानक ‘गीता-रहस्य’ से हटकर मिट्टू के पंखों की ‘फड़फड़ाफट’ पर गया।”
पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि ‘फड़फड़ाफट’ कहलाती है। ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए ।
उत्तर –

1. खटखटाना – दरवाज़े या लकड़ी पर प्रहार की आवाज़।
वाक्य – रात को तूफान के कारण सभी दरवाजे और खिड़कियाँ खटखटाने लगे।

2. कलकल – बहती हुई नदी या झरने की आवाज़।
वाक्य – पहाड़ों पर अक्सर नदी झरनों की कलकल सुनाई पड़ती रहती है।

3. गरज – बादलों के टकराने की आवाज़।
वाक्य – बादलों की गरज से तेज बारिश की आशंका हो जाती है।

4. चहचहाहट – पक्षियों के बोलने की मधुर आवाज़।
वाक्य – सुबह-सुबह घर के आँगन में पक्षियों की चहचहाहट अनंत मनमोहक लगती है।

5. सनसनाहट – तेज़ हवा के चलने की आवाज़।
वाक्य – तेज़ आँधी के कारण बगीचों में अजीब सी सनसनाहट हो रही थी।

6. टपटप – पानी के गिरने की आवाज़।
वाक्य – तेज़ बारिश के बाद छत से पानी की टपटप सुनाई देती है।

 

शब्द-युग्म

“अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं।”
उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द-युग्म हैं। वे शब्द जो जोड़े में लिखे जाते हैं, उन्हें शब्द-युग्म कहा जाता है। शब्द-युग्म मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं–

  • पुनरुक्त शब्द-युग्म, जैसे- बार-बार
  • सजातीय शब्द-युग्म, जैसे- उठना-बैठना
  • समानार्थक शब्द-युग्म, , जैसे- दिन-प्रतिदिन
  • विपरीतार्थक शब्द-युग्म, जैसे- दिन-रात

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द-युग्म नीचे दिए गए हैं। उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए-
वक्त-बेवक्त, नियम-सिद्धांत, शादी-ब्याह, तीज-त्योहार

उत्तर –
वक्त-बेवक्त – समय-असमय
वाक्य – ताई मिट्ठू की वक्त-बेवक्त भूख के लिए रोटियां बचा कर रखती थी।

नियम-सिद्धांत – जीवन के आदर्श, उसूल
वाक्य – जगन मास्टर ने अपने जीवन में कुछ नियम-सिद्धांत बना रखे थे। वे किसी को कष्ट में नहीं देख सकते थे।

शादी-ब्याह – विवाह का उत्सव
वाक्य – ताई अक्सर मिट्ठू को अपने पुराने दिनों के शादी-ब्याह की कहानियां सुनाती थी।

तीज-त्योहार – पर्व , धार्मिक-त्यौहार
वाक्य – ताई किसी भी तीज-त्योहार में नहीं जाती थी क्योंकि वह मिट्ठू को अकेले नहीं छोड़ सकती थी।

 

खोजबीन शब्दों की

“ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, ‘मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’ पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।”

उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए-
1. ऐसा शब्द जो ‘तंग’ का विपरीतार्थक है।
2. ऐसा वाक्यांश जो एक मुहावरा है।
3. ऐसा शब्द जो एक क्रिया है।
4. ऐसा शब्द जो एक संज्ञा है।
5. ऐसा शब्द जो एक सर्वनाम है।
6. ऐसा शब्द जो एक विशेषण है।
7. ऐसा शब्द जो एक कारक है।
8. ऐसा शब्द जो एक कर्ता है।
उत्तर –
1. ढीली
2. पसीना-पसीना होना
3. सँभालते , पुकारते , रहे।
4. धोती, बाग, पेड़, पंख
5.  वह , अपने
6. ढीली, दोनों, दूसरे
7. को, से, में , पर
8.  वह (जगन मास्टर) , मिट्ठू

अर्थ के आधार पर वाक्य

आप जानते ही हैं कि अर्थ के आधार पर वाक्यों के कई भेद होते हैं जैसे- विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, आज्ञावाचक (विधिवाचक), इच्छावाचक, संदेहवाचक और संकेतवाचक।

वाक्य का भेद अर्थ / उपयोग उदाहरण
1. विधानवाचक वाक्य किसी घटना या स्थिति के बारे में कथन करने वाला वाक्य। जगन मास्टर ने पिंजरे का दरवाजा खोल दिया।
2. निषेधवाचक वाक्य किसी कार्य के न होने या मना करने का भाव व्यक्त करने वाला वाक्य । मिट्टू ने कोई हरकत नहीं की।
3. प्रश्नवाचक वाक्य किसी बात को पूछने या जानने के लिए प्रयुक्त वाक्य । मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?
4. विस्मयादिबोधक वाक्य आश्चर्य, प्रसन्नता या दुख प्रकट करने वाला वाक्य। मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए ! वो गए!!
5. आज्ञावाचक वाक्य किसी को कुछ करने का आदेश या आग्रह व्यक्त करने वाला वाक्य। राम-राम कहो, सीताराम कहो।
6. इच्छावाचक वाक्य किसी आकांक्षा, आशा या इच्छा को प्रकट करने वाला वाक्य । जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ! ।
7. संदेहवाचक वाक्य किसी बात को लेकर शंका या अनिश्चितता प्रकट करने वाला वाक्य। ताई के सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा।
8. संकेतवाचक वाक्य इसमें एक बात या कार्य का होना या न होना किसी दूसरी बात या कार्य के होने या न होने पर निर्भर होता है। जब खेती-बाड़ी नहीं, कारबार नहीं, तो नौकर-चाकर किस दम पर टिकते!

अब आप भी अपनी पुस्तक में से प्रत्येक प्रकार का एक-एक वाक्य चुनकर लिखिए।

उत्तर – 

वाक्य का भेद अर्थ / उपयोग उदाहरण
1. विधानवाचक वाक्य किसी घटना या स्थिति के बारे में कथन करने वाला वाक्य। ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी। 
2. निषेधवाचक वाक्य किसी कार्य के न होने या मना करने का भाव व्यक्त करने वाला वाक्य । ताई को घड़ी-भर के लिए भी मिट्ठू का वियोग सहन नहीं हो सकता था।
3. प्रश्नवाचक वाक्य किसी बात को पूछने या जानने के लिए प्रयुक्त वाक्य । भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?
4. विस्मयादिबोधक वाक्य आश्चर्य, प्रसन्नता या दुख प्रकट करने वाला वाक्य। “जीते रहो बेटा, जुग जुग जिओ” 
5. आज्ञावाचक वाक्य किसी को कुछ करने का आदेश या आग्रह व्यक्त करने वाला वाक्य। ‘मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’
6. इच्छावाचक वाक्य किसी आकांक्षा, आशा या इच्छा को प्रकट करने वाला वाक्य । “ताई, मिट्ठू को भी साथ ले चलो, उसे भी गंगा स्नान करा देना।” 
7. संदेहवाचक वाक्य किसी बात को लेकर शंका या अनिश्चितता प्रकट करने वाला वाक्य। पर वह पिंजरे के अंदर से टुकुर-टुकुर उन्हें देखता रहता या शायद उनकी बेवकूफी पर हँसता रहता हो ।
8. संकेतवाचक वाक्य इसमें एक बात या कार्य का होना या न होना किसी दूसरी बात या कार्य के होने या न होने पर निर्भर होता है। मिट्ठू की ही सूरत शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए, ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके

मेरी पहेली

अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ या प्रश्न बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-
तोता, ताई, कुंभ, पिंजरा, कमरा, गंगा

उत्तर –
हरा हूँ मैं हरा हूँ
लाल मेरी चोंच है
हरी मिर्ची खाता हूँ
मिट्ठू-मिट्ठू कहता हूँ।
उत्तर – तोता

परिवार छोड़ कर चला गया
अकेलेपन ने घेरा
जब कोई साथ नहीं था तब
मिट्ठू बना साथी मेरा।
उत्तर – ताई

हर बारह वर्ष में होता है
महा तीर्थ कहलाता है।
उत्तर – कुंभ

पंछियों का मैं घर कहलाऊँ
पर पक्षियों को पसंद न आऊं।
उत्तर – पिंजरा

चार दीवारों से घिरा
एक दरवाजा, एक खिड़की
सर्दी-गर्मी से तुम्हें बचाऊं
बोलो मैं कौन कहलाऊँ।
उत्तर – कमरा

पापों का नाश करूँ
सबसे पवित्र नदी कहलाऊँ।
उत्तर – गंगा

 

भाषा संगम
“वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था । ”
नीचे ‘तोता’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
तोता (हिंदी); शुकः (संस्कृत); तोता (पंजाबी); तोता (उर्दू); तोतुं (कश्मीरी); तोतो (सिंधी); पोपट (मराठी); पोपट, सूडो (गुजराती); पोपट (कोंकणी); सुगा (नेपाली); तोता (बांग्ला); भाटौ (असमिया); तेनवा (मणिपुरी); शुआ (शुक); (ओड़िआ); चिलुक (तेलुगु); किळि (तमिल); शुकम्, तत्त (मलयालम); गिळि (कन्नड़)।
इनके अतिरिक्त यदि आप ‘तोता’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp

उत्तर –
मातृभाषा (हिंदी) – “वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था । ”
तोता शब्द पहाड़ी (हिमाचली भाषा में ) – तोतो
हिमाचली पहाड़ी भाषा में वाक्य – “तीणि एक बंठनों पहाड़ी तोतो खंई किदरे आड़ों। ”

 
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Class 9 Hindi Samvadheen– Extract Based Questions (गद्यांश पर आधारित प्रश्न)

1 –
गहरी साँस लेकर ताई कहतीं, “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” और बंद पिंजड़े में अपने पंखों को फड़फड़ाता, उछल-कूद मचाता मिट्ठू उत्तर देता, “राम-राम कहो, सीताराम कहो ।”
ताई दुहरातीं— सीताराम ! सीताराम !
ताई और मिट्ठू
मिट्ठू और ताई ।
अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे। ताई ने अपने जीवन में अच्छे दिन भी देखे थे। पूत- परिवार, बहू- -बेटियाँ, नौकर-चाकर, गाय – ढोर, क्या नहीं था बड़े घर में! देखते ही देखते क्या से क्या हो गया! बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए। बेटियाँ अपने-अपने हाथ पीले कराकर अपनी गृहस्थी में रम गईं, किसके भरोसे कारबार संभलता। धीरे-धीरे सब पराए हाथों में चला गया। जब खेती-बाड़ी नहीं, कारबार नहीं, तो नौकर-चाकर किस दम पर टिकते! अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं, पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही, पर सूने घर की भाँय- भाँय जैसे उन्हें काटने को दौड़ती थी।

प्रश्न 1 – प्रस्तुत गद्यांश में किसके बीच वार्ता हो रही है ?
(क) ताई और सीताराम
(ख) मिट्ठू और भगवान्
(ग) ताई और मिट्ठू
(घ) ताई और भगवान्
उत्तर – (ग) ताई और मिट्ठू

प्रश्न 2 – कौन दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे?
(क) ताई और उनका कुत्ता
(ख) गनपत और ताई
(ग) ताई और उनका अकेलापन
(घ) ताई और मिट्टू
उत्तर – (घ) ताई और मिट्टू

प्रश्न 3 – ताई के जीवन में उनके अच्छे दिनों में कौन उनके साथ था ?
(क) पूत- परिवार, बहू- -बेटियाँ
(ख) नौकर-चाकर
(ग) परिवार, गाय – ढोर
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 4 – ताई अकेले क्यों रह गई थी ?
(क) बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए थे
(ख) बेटियाँ अपने-अपने हाथ पीले कराकर अपनी गृहस्थी में रम गईं थी
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) केवल (क)
उत्तर – (ग) (क) और (ख) दोनों

प्रश्न 5 – ताई को सबसे अधिक परेशान क्या करता था ?
(क) पेट की समस्या
(ख) अकेलेपन की समस्या
(ग) खाना बनाने की समस्या
(घ) आलस की समस्या
उत्तर – (ख) अकेलेपन की समस्या

2 –
ताई निहाल हो जातीं। वृद्धावस्था का शरीर और उस पर नई गृहस्थी का भार, काम-काज से थककर ताई जब कभी पिंजरे को बगल में रखकर सुस्ताने लगतीं तो अनायास ही मिट्ठू से सवाल कर बैठतीं, “मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?” और नौजवान मिट्ठू ताई के बुढ़ापे का सहारा बनकर दम-खम के साथ उन्हें दिलासा देते-
कटेगी! कटेगी !! कटेगी !!!
ताई के थके शरीर में प्राण लौट आते, और तब उस अलस दोपहरी में ताई मिट्ठू को अपनी राम-कहानी सुनाने लगतीं। वैभव और सत्ता के बीते दिनों की गाथा । काल की अतल गहराइयों से झाँकता एक-एक चेहरा ताई को नए-नए प्रसंगों की याद दिला देता- जमींदार साहब का रोबीला चेहरा, उनके उपकारों से दबी प्रजा के अनगिनत चेहरे, वे हाथी, वे घोड़े, वे खेल-तमाशे, वे ब्याह-शादियाँ, तीज-त्योहार, जन्म और मृत्यु- पर्व, वे भोज, वे दावतें, जमींदार साहब के दरबार की रौनक, उनकी गुणग्राहकता, उनकी तुनकमिजाजी, उनका गुस्सा, उनके इशारे पर मर मिटने वाले लोग … ताई घंटों तक मिट्ठू को अपनी जीवन-गाथा सुनाती रहतीं और वह अपनी गर्दन टेढ़ी कर कभी धैर्यवान श्रोता बना रहता और कभी अपनी समझ के अनुसार बीच-बीच में कुछ टीका-टिप्पणी कर देता ।
ऐसा नहीं कि ताई और मिट्ठू का संवाद हमेशा प्रेमपूर्ण ही रहता हो, कभी-कभी ताई थकी-माँदी लेटी होतीं और अपनी किसी जिद को मनवाने के लिए मिट्टू पिंजड़े में तूफान खड़ा कर देते। पानी और दाने की कटोरियों को जान-बूझकर उलटा देते, तो खीझकर ताई कोसतीं, “मेरी जान खाने को आ गया है, मर जा!” और मिट्ठू भी उतनी ही खीझ के साथ हमला बोल देते, “मर जा ! मर जा ! मर जा!” फिर मान-मनौवल का दौर चलता और ताई और मिट्ठू की दुनिया पहले की तरह प्रेम से चलने लगती।

प्रश्न 1 – ताई क्यों निहाल हो जातीं?
(क) मिट्ठू की बातों से
(ख) दिन भर के काम से
(ग) वृद्धावस्था के शरीर से
(घ) नई गृहस्थी के भार से
उत्तर – (क) मिट्ठू की बातों से

प्रश्न 2 – अलस दोपहरी में ताई मिट्ठू को अपनी राम-कहानी में क्या-क्या सुनाने लगतीं थी?
(क) जमींदार साहब का रोबीला चेहरा, उनके उपकारों से दबी प्रजा के अनगिनत चेहरे
(ख) हाथी, घोड़े, खेल-तमाशे, ब्याह-शादियाँ, तीज-त्योहार, जन्म और मृत्यु- पर्व, भोज, दावतें
(ग) जमींदार साहब के दरबार की रौनक, उनकी गुणग्राहकता, उनकी तुनकमिजाजी, उनका गुस्सा, उनके इशारे पर मर मिटने वाले लोग
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 3 – जब ताई घंटों तक मिट्ठू को अपनी जीवन-गाथा सुनाती रहतीं तब मिट्ठू की क्या प्रतिक्रिया होती ?
(क) वह अपनी गर्दन टेढ़ी कर धैर्यवान श्रोता बना रहता
(ख) वह अपनी समझ के अनुसार बीच-बीच में कुछ टीका-टिप्पणी कर देता
(ग) केवल (क)
(घ) (क) और (ख) दोनों
उत्तर – (घ) (क) और (ख) दोनों

प्रश्न 4 – ताई और मिट्ठू का संवाद कैसा रहता था ?
(क) सदा प्रेम वाला
(ख) लड़ाई-झगड़े वाला
(ग) मान-मनौवल वाला
(घ) जिम्मेदारी वाला
उत्तर – (ग) मान-मनौवल वाला

प्रश्न 5 – अपनी जिद्द मनवाने के लिए मिट्ठू क्या करता था ?
(क) पिंजड़े में तूफान खड़ा कर देता, पानी और दाने की कटोरियों को जान-बूझकर उलटा देता
(ख) मिट्ठू खीझ के साथ हमला बोल देता , “मर जा ! मर जा ! मर जा!”
(ग) मान-मनौल का माहौल बनाता
(घ) ताई को जोर-जोर से आवाजे लगता
उत्तर – (क) पिंजड़े में तूफान खड़ा कर देता, पानी और दाने की कटोरियों को जान-बूझकर उलटा देता

3 –
ताई तो कुंभ-स्नान के लिए चल दीं। लेकिन जगन मास्टर के घर में महाकुंभ हो गया ।
अपने पति से सलाह लिए बिना मास्टराइन ने ताई का भार अपना लिया था। जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे। उन्होंने अपने कुछ नियम-सिद्धांत बना रखे थे और भरसक कोशिश करते थे कि उनके कारण किसी को कोई कष्ट न पहुँचे। स्वतंत्र विचारों के आदमी थे। दूसरों की स्वतंत्रता पर बाधा नहीं डालना चाहते थे। पिंजड़े में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होने लगती। जब-जब मिट्टू को देखते, अपनी पत्नी की बुद्धि पर तरस खाते और अपने आप को भी दोषी अनुभव करते।
जगन मास्टर के लिए जब मिट्ठू की यातना असह्य हो गई, तो उन्होंने एक दिन कमरा बंदकर मिट्टू के पिंजरे को जमीन पर रखा और उसका दरवाजा खोल दिया, ताकि उसे कुछ देर के लिए ही सही, खुली हवा में आने का मौका देकर अपने पाप का थोड़ा प्रायश्चित कर लें। मिट्टू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की । जगन मास्टर भी अपनी धुन के पक्के थे। निकट ही अनाज का थैला पड़ा हुआ था। उन्होंने मुट्ठी में थोड़ा अनाज लेकर पिंजरे के दरवाजे से लेकर बाहर तक बिखेर दिया और स्वयं अलग हटकर उसे देखते रहे। मिट्ठू धीरे-धीरे दाना चुगते हुए बाहर आ गए तो जगन मास्टर ने संतोष की साँस ली। मिट्टू फिर पिंजरे की छत पर बैठ गए। एक दो घंटे बाद जगन मास्टर ने उन्हें पकड़कर फिर पिंजरे में बंद कर दिया और चैन की साँस लेकर पिंजरे को बरामदे में टाँग दिया।

प्रश्न 1 – जगन मास्टर के घर में महाकुंभ क्यों हो गया ?
(क) ताई के कुंभ-स्नान के लिए जाने से
(ख) अपने पति से सलाह लिए बिना मास्टराइन ने ताई का भार अपना लिया था
(ग) उन्हें मिट्ठू का ध्यान रखना पड़ रहा था
(घ) जगन मास्टर के लिए मिट्ठू की यातना असह्य हो गई थी
उत्तर – (ख) अपने पति से सलाह लिए बिना मास्टराइन ने ताई का भार अपना लिया था

प्रश्न 2 – जगन मास्टर कैसे आदमी थे?
(क) उन्होंने अपने कुछ नियम-सिद्धांत बना रखे थे और भरसक कोशिश करते थे कि उनके कारण किसी को कोई कष्ट न पहुँचे
(ख) वे स्वतंत्र विचारों के आदमी थे। दूसरों की स्वतंत्रता पर बाधा नहीं डालना चाहते थे।
(ग) पिंजड़े में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होने लगती। जब-जब मिट्टू को देखते, अपनी पत्नी की बुद्धि पर तरस खाते और अपने आप को भी दोषी अनुभव करते।
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 3 – जगन मास्टर के लिए जब मिट्ठू की यातना असह्य हो गई, तो उन्होंने क्या किया ?
(क) उसका पिंजरा खोल कर आसमान में आजाद कर दिया
(ख) कमरा बंदकर मिट्टू के पिंजरे को जमीन पर रखा और उसका दरवाजा खोल दिया
(ग) ताई को वापिस बुलवा दिया
(घ) मिट्ठू को अपने आप से दूर रखने को कहा
उत्तर – (ख) कमरा बंदकर मिट्टू के पिंजरे को जमीन पर रखा और उसका दरवाजा खोल दिया

प्रश्न 4 – मिट्टू पिंजरे से बाहर क्यों नहीं आ रहा था ?
(क) वह पिंजरे में रहने का आदी हो चूका था
(ख) उसे मास्टर से डर लग रहा था
(ग) वह बाहर की दुनिया से अपरिचित था
(घ) उसे आलस लग रहा था
उत्तर – (क) वह पिंजरे में रहने का आदी हो चूका था

प्रश्न 5 – जब मिट्टू ने पिंजरे से बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की तब जगन मास्टर ने क्या किया ?
(क) उन्होंने पिंजरे को बरामदे में टाँग दिया
(ख) वे स्वयं अलग हटकर उसे देखते रहे
(ग) उन्होंने मुट्ठी में थोड़ा अनाज लेकर पिंजरे के दरवाजे से लेकर बाहर तक बिखेर दिया
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (ग) उन्होंने मुट्ठी में थोड़ा अनाज लेकर पिंजरे के दरवाजे से लेकर बाहर तक बिखेर दिया

4 –
अब जगन मास्टर हर रोज कमरा बंद करते। मिट्ठू को बाहर आने का आमंत्रण देते और उनकी आजादी का सुख स्वयं भोगते। यह क्रम तीन-चार दिन तक चला ही था कि एक दिन मिट्टू की नजर ऊपर खुले रोशनदान पर पड़ गई और सहज कौतूहलवश वह पिंजरे की छत से तिरछी आँख अपने लक्ष्य की ओर देखकर रोशनदान पर पहुँच लिए। जगन मास्टर का ध्यान अचानक ‘गीता-रहस्य’ से हटकर मिट्टू के पंखों की फड़फड़ाहट पर गया, फिर रोशनदान पर बैठे मिट्ठू पर। जगन मास्टर हाथ में अनाज लेकर ‘आ-आ’ की गुहार लगा ही रहे थे कि मिट्टू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए ! वो गए!! अकेले मिट्टू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए। ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, ‘मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’ पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।
ताई के लौटने का दिन निकट आ रहा था। गाँव में सभी के मन में इस अनहोनी घटना ने एक गहरी आशंका को जन्म दे दिया था। ताई के तेज स्वभाव के अतिरिक्त मिट्ठू के प्रति उनके लगाव को सभी जानते थे और लौटकर मिट्ठू को न पाने पर उनकी क्या दशा हो सकती है, इसका अनुमान वे भली-भाँति लगा सकते थे। बहुत सोच-विचार के बाद आखिर गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए, ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके और दूसरे दिन सच ही वह तोता लेकर हाजिर हो गया।

प्रश्न 1 – जगन मास्टर हर रोज कमरा बंद करके क्या करते थे ?
(क) मिट्ठू को गीता का पाठ पढ़ाते
(ख) मिट्ठू को बाहर आने का आमंत्रण देते और उनकी आजादी का सुख स्वयं भोगते
(ग) मिट्ठू को उड़ने का अभ्यास करवाते
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (ख) मिट्ठू को बाहर आने का आमंत्रण देते और उनकी आजादी का सुख स्वयं भोगते

प्रश्न 2 – मिट्ठू कहाँ से बाहर उड़ गया ?
(क) खिड़की से
(ख) दरवाजे से
(ग) रोशनदान से
(घ) बरामदे से
उत्तर – (ग) रोशनदान से

प्रश्न 3 – हाथों के तोते उड़ना – मुहावरे का क्या अर्थ है ?
(क) बहुत अधिक घबरा जाना
(ख) किस्मत खराब होना
(ग) हाथों से काम बिगड़ना
(घ) हाथ खराब होना
उत्तर – (क) बहुत अधिक घबरा जाना

प्रश्न 4 – गद्यांश में किस अनहोनी घटना का जिक्र है ?
(क) ताई का वापिस लौटना
(ख) मिट्ठू का उड़ जाना
(ग) जगन मास्टर का घबरा जाना
(घ) नए मिट्ठू का आना
उत्तर – (ख) मिट्ठू का उड़ जाना

प्रश्न 5 – आखिर में गनपत ने क्या सुझाव दिया ? कि मिट्ठू की ही सूरत शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए
(क) मिट्ठू को वापिस लाया जाए
(ख) मिट्ठू की मौत का समाचार फैलाया जाए
(ग) ताई को सब सच-सच बता दिया जाए
(घ) मिट्ठू की ही सूरत शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए
उत्तर – (घ) मिट्ठू की ही सूरत शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए
 
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Class 9 Hindi Ganga Lesson 3 Samvadheen Multiple Choice Questions (बहुविकल्पीय प्रश्न)

प्रश्न 1 – “संवादहीन” पाठ के लेखक कौन हैं ?
(क) सूर्यकांत
(ख) प्रेमचंद
(ग) शेखर जोशी
(घ) महादेवी
उत्तर – (ग) शेखर जोशी

प्रश्न 2 – ‘संवादहीन’ किसकी कहानी है?
(क) ग्रामीण वृद्ध स्त्री के अकेलेपन की संवेदनशील कहानी
(ख) ग्रामीण वृद्ध स्त्री के अकेलेपन की भयानक कहानी
(ग) ग्रामीण वृद्ध स्त्री के अकेलेपन की दुखभरी कहानी
(घ) ग्रामीण वृद्ध स्त्री के अकेलेपन की आनंदमय कहानी
उत्तर – (क) ग्रामीण वृद्ध स्त्री के अकेलेपन की संवेदनशील कहानी

प्रश्न 3 – कहानी के दो मुख्य पात्र कौन हैं?
(क) ताई और गनपत
(ख) ताई और मिट्ठू
(ग) ताई और जगन
(घ) जगन और मिट्ठू
उत्तर – (ख) ताई और मिट्ठू

प्रश्न 4 – ताई कहाँ रहती थी ?
(क) गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के सूने खंडहर में
(ख) शहर के आलिशान मकान में
(ग) जंगल की एक झोंपड़ी में
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (क) गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के सूने खंडहर में

प्रश्न 5 – ताई और मिट्ठू का संबंध कैसा था?
(क) औपचारिक
(ख) सामाजिक
(ग) भावनात्मक
(घ) व्यावसायिक
उत्तर – (ग) भावनात्मक

प्रश्न 6 – ताई का परिवार कहा था ?
(क) गाँव
(ख) विदेश
(ग) शहर
(घ) कस्बे
उत्तर – (ग) शहर

प्रश्न 7 – मिट्ठू को कौन लाया था ?
(क) जगन
(ख) गनपत
(ग) मास्टर
(घ) मास्टराइन
उत्तर – (ख) गनपत

प्रश्न 8 – ताई मिट्ठू को छोड़कर कहाँ नहीं जाना चाहती थी ?
(क) घर
(ख) शादी-व्याह
(ग) कुम्भ-स्नान
(घ) शहर
उत्तर – (ग) कुम्भ-स्नान

प्रश्न 9 – ताई के जाने पर मिट्ठू की जिम्मेदारी किसने ली थी ?
(क) जगन
(ख) मास्टराइन
(ग) गनपत
(घ) मास्टर
उत्तर – (ख) मास्टराइन

प्रश्न 10 – जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था ?
(क) उन्होंने जीवन में अपने कुछ नियम-सिद्धांत बना रखे थे
(ख) वे पूरा प्रयास करते थे कि उनके कारण किसी को कोई कष्ट न पहुँचे
(ग) वे बहुत ही स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति थे। वे कभी भी दूसरों की स्वतंत्रता पर बाधा नहीं डालना चाहते थे।
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 11 – ताई के सूनेपन को किसने सहारा दे दिया था?
(क) जगन
(ख) मास्टराइन
(ग) मिट्ठू
(घ) गनपत
उत्तर – (ग) मिट्ठू

प्रश्न 12 – ताई के समक्ष क्या धर्म-संकट आ गया था
(क) मिट्ठू को छोड़ कर कुम्भ-स्नान जाना
(ख) मिट्ठू को आजाद करना
(ग) मिट्ठू को अपने परिवार के पास भेजना
(घ) मिट्ठू से दूर रहना
उत्तर – (क) मिट्ठू को छोड़ कर कुम्भ-स्नान जाना

प्रश्न 13 – जगन मास्टर के लिए मिट्ठू की कौन सी यातना असह्य हो गई थी?
(क) मिट्ठू का शोर मचाना
(ख) मिट्ठू का बहुत अधिक बात करना
(ग) मिट्ठू का ताई को याद करना
(घ) मिट्ठू का पिंजरे में बंद होना
उत्तर – (घ) मिट्ठू का पिंजरे में बंद होना

प्रश्न 14 – मिट्टू बाहर क्यों नहीं आ रहा था ?
(क) पिंजरे में रहने का आदी हो चूका था
(ख) वह डर रहा था
(ग) उसे आलस लग रहा था
(घ) उसे ताई की याद आ रही थी
उत्तर – (क) पिंजरे में रहने का आदी हो चूका था

प्रश्न 15 – कौन सी अनहोनी घटना घट गई थी जिससे सभी परेशान हो गए थे ?
(क) मिट्ठू बीमार हो गया
(ख) मिट्ठू मर गया
(ग) मिट्ठू उड़ गया
(घ) मिट्ठू ने बोलना बंद कर दिया
उत्तर – (ग) मिट्ठू उड़ गया

प्रश्न 16 – जगन मास्टर की जिंदगी का नया दौर क्या था ?
(क) नए तोते को पिंजरे में रखकर पाठ पढ़ाना , ताकि ताई के आने तक वह भी दो अक्षर सीख ले
(ख) मिट्ठू को ढूंढना , ताकि ताई को पता न चले
(ग) ताई के प्रश्नो के लिए तैयार होना
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) नए तोते को पिंजरे में रखकर पाठ पढ़ाना , ताकि ताई के आने तक वह भी दो अक्षर सीख ले

प्रश्न 17 – एवजी – का क्या अर्थ है ?
(क) जैसे को कैसा
(ख) बिना काम का
(ग) बीना भावना का
(घ) बदले में काम करने वाला
उत्तर – (घ) बदले में काम करने वाला

प्रश्न 18 – मिट्ठू किसका प्रतीक है ?
(क) प्रेम
(ख) स्वतंत्रता
(ग) स्नेह
(घ) भावना
उत्तर – (ख) स्वतंत्रता

प्रश्न 19 – मिट्ठू ताई के लिए क्या था ?
(क) संवाद का माध्यम
(ख) ममता का केंद्र
(ग) केवल (क)
(घ) (क) और (ख)
उत्तर – (घ) (क) और (ख)

प्रश्न 20 – पाठ में मिट्ठू की बुद्धिमत्ता की तुलना किससे की गई है?
(क) कुशाग्र बुद्धि अध्यापक से
(ख) कुशाग्र बुद्धि छात्र से
(ग) कुशाग्र बुद्धि व्यापारी से
(घ) चतुर छात्र से
उत्तर – (ख) कुशाग्र बुद्धि छात्र से
 
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Samvadheen Extra Question Answers (अतिरिक्त प्रश्न उत्तर)

प्रश्न 1 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में ताई को अकेलापन क्यों सताता था ?
अथवा
कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में ताई अकेली क्यों रह गई थी ?
उत्तर – ताई ने अपने जीवन में अच्छे दिन भी देखे थे। उनके इस बड़े घर में भी पुत्र – परिवार, बहू- -बेटियाँ, नौकर-चाकर, गाय – डंगर, सभी थे। परन्तु समय के साथ देखते ही देखते सब कुछ बदल गया। बहू-बेटे गाँव का प्रेम छोड़कर शहरों में जा कर बस गए। बेटियाँ शादी करके अपनी-अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो गईं, गाँव में बसा कारबार किसके भरोसे संभलता। अर्थात गाँव के कारोबार को देखने वाला या संभालने वाला कोई नहीं रहा। धीरे-धीरे सब कारोबार पराए हाथों में चला गया। जब खेती-बाड़ी नहीं रही, कारबार नहीं रहा, तो नौकर-चाकर किस वजह से उनके पास रहते। अब अपनी अकेली जान के लिए ताई दो वक्त का भोजन एक वक्त चूल्हा जलाकर बना लेती थी। व्रत-उपवास के बहाने कई बार चौका-चूल्हा टाल देती थी। ताई के लिए पेट की समस्या अर्थात भोजन बनाने की समस्या, कभी समस्या नहीं रही, परन्तु खाली घर की भाँय- भाँय अब उनसे सहन नहीं हो पाती थी।

प्रश्न 2 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में ताई के अकेलेपन का सहारा कौन बना?
अथवा
कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में ताई किस तरह मिट्ठू का ध्यान रखती थी ?
उत्तर – गनपत नाम के व्यक्ति ने ताई के अकेलेपन को सहारा देने के लिए न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था। ताई की सारी ममता अब उस मिट्ठू तोते पर बरस पड़ी थी। वह रात-दिन मिट्ठू को लेकर ही परेशान रहने लगीं थी। जो ताई अपनी लिए चूल्हा जलाने में आलस कर जाती थीं, वही अब बिना आलस किए पूरे नियमपूर्वक मिट्ठू के लिए दाल-भात बनातीं थी। साथ ही साथ मिट्टू की वक्त-बेवक्त की आवश्यकता या इच्छा के लिए रोटी भी बचाकर रख लेती थी। अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हुए हैं। अर्थात मिट्ठू के आने के बाद ताई को मिट्ठू की सभी पसंद की चीजों का ख्याल रहने लगा था।

प्रश्न 3 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में ताई और मिट्ठू का सम्बन्ध कैसा दर्शाया गया है ?
उत्तर – तेज़ दिमाग वाले बच्चे की तरह मिट्ठू ताई के पढ़ाए गए पाठ को न केवल ताई की ही तरह जैसे का तैसा दुहरा देता था बल्कि एक-दो बार सुनकर याद भी रख लेता था और जब भी मौका मिलता ताई के सवालों का बिलकुल सही उत्तर दे देता था। ताई के बड़े घर का अकेलापन अब धीरे-धीरे मिट्ठू की बातचीत से रौनक में बदल गया था। मिट्ठू की बातों से ताई प्रसन्न हो जातीं थी। ताई का शरीर अब वृद्धावस्था में आ चूका था और उस पर मिट्ठू के साथ नई गृहस्थी का भार और काम-काज से थककर ताई जब कभी मिट्ठू के पिंजरे को बगल में रखकर थोड़ा सुस्ताने लगतीं या आराम करने लगती, तब अचानक ही मिट्ठू से सवाल कर बैठतीं, कि अब जिंदगी कैसे कटेगी? और उनके इस प्रश्न का उत्तर नौजवान मिट्ठू ताई के बुढ़ापे का सहारा बनकर दम-खम के साथ उन्हें दिलासा देते हुए कहता कि कटेगी! कटेगी !! कटेगी !!! मिट्ठू की बातों से ताई के थके शरीर में मानो प्राण लौट आते, और तब उस अलस भरी दोपहरी में ताई मिट्ठू को अपनी राम-कहानी सुनाने लगतीं।

प्रश्न 4 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में ताई और मिट्ठू की सुबह कैसे शुरू होती थी ?
उत्तर – सुबह के समय जैसे ही प्रकाश फैलने लगता था, पेड़ों में चिड़ियाँ चहचहातीं थी तो मिट्ठू भी जैसे ताई को सुबह की झपकी से जगाने के लिए ही अपना पाठ हर हर गंगे ! हर हर गंगे !! सीताराम बोल ! सीताराम बोल !! मिट्ठू राम राम! मिट्ठू राम राम !! शुरू कर देते थे। मिट्ठू की आवाज सुनकर ताई चौंककर उठ बैठतीं थी। प्यार से मिट्ठू को देखकर आशीर्वाद देते हुए कहती थी कि जीते रहो बेटा, जुग जुग जिओ और मिट्ठू भी बदले में अपने आप को ताई की तरह बुजुर्ग दिखाते हुए ताई को आशीर्वाद देता था खुश रहो! खुश रहो!!

प्रश्न 5 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में ताई जमींदार साहब के बारे में मिट्टू को क्या बताती हैं ? और मिट्ठू क्या प्रतिक्रिया देता था ?
उत्तर – जमींदार साहब का रोबीला चेहरा, उनके द्वारा किए गए उपकारों से दबी प्रजा के अनगिनत चेहरे, हाथी, घोड़े, खेल-तमाशे, ब्याह-शादियाँ, तीज-त्योहार, जन्म और मृत्यु – पर्व, भोज, दावतें, जमींदार साहब के दरबार की रौनक, उनकी क़दर जानने या करने की प्रवृति, उनका छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो जाना, उनका गुस्सा, उनके इशारे पर मर मिटने वाले लोग इत्यादि किस्सों को याद करते हुए ताई घंटों तक मिट्ठू को अपनी जीवन-गाथा सुनाती रहतीं थी। और मिट्ठू भी अपनी गर्दन टेढ़ी कर के कभी धैर्यवान श्रोता बना रहता और कभी अपनी समझ के अनुसार बीच-बीच में कुछ टीका-टिप्पणी कर देता । अर्थात ताई मिट्ठू से अपनी यादों को सांझा करती और मिट्ठू भी उनकी बातों को ध्यान से सुनता और बीच-बीच में कुछ कहता भी जाता।

प्रश्न 6 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में बताया गया है कि ताई और मिट्ठू में कभी-कभी आपस में रूठने और मनाने की प्रक्रिया चली रहती। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ऐसा बिलकुल नहीं था कि ताई और मिट्ठू के बीच होने वाली बातचीत हमेशा प्रेमपूर्ण रहती हो, कभी-कभी ताई जब काम से थक कर लेटी होतीं और अपनी किसी जिद को मनवाने के लिए मिट्टू पिंजड़े में तूफान खड़ा कर देता। पानी और दाने की कटोरियों को जान-बूझकर उलटा देता, तो गुस्से से ताई उसे कोसतीं कि वह उनकी जान खाने के लिए आ गया है, मर जा! और मिट्ठू भी उतने ही गुस्से के साथ ताई पर हमला बोलते हुए ताई की बात को दोहराता कि मर जा ! मर जा ! मर जा! कुछ समय बाद फिर रूठने-मनाने का दौर चलता और ताई और मिट्ठू की दुनिया पहले की तरह प्रेम से चलने लगती।अर्थात ताई और मिट्ठू में कभी-कभी आपस में रूठने और मनाने की प्रक्रिया चली रहती।

प्रश्न 7 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में ताई किस धर्म-संकट में पद गई थी ?
उत्तर – ताई को थोड़ी देर के लिए भी मिट्ठू से बिछड़ना सहन नहीं हो सकता था। लेकिन एक ऐसी स्थिति आ पड़ी कि ताई धर्म-संकट में पड़ गईं। इस संसार में ताई ने बहुत अच्छे-बुरे दिन देख लिए थे, अब कभी-कभी परलोक की चिंता भी ताई के मन में घर कर जाती थी। गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे, ताई का भी उनके साथ अच्छा साथ बन रहा था। एक ओर तो प्रयाग में कुंभ-स्नान का लालच ताई को अपनी ओर खींच रहा था, वहीं दूसरी ओर मिट्ठू की चिंता उन्हें अपनी ओर खींच रही थी।

प्रश्न 8 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में जगन मास्टर के घर में महाकुंभ क्यों हो गया?
अथवा
कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में जगन मास्टर के बारे में क्या बताया गया है ?
उत्तर – मिट्ठू को जगन मास्टर की घरवाली के भरोसे छोड़कर ताई तो कुंभ-स्नान के लिए चली गई। लेकिन जगन मास्टर के घर में महाकुंभ हो गया । क्योंकि
अपने पति से परामर्श किए बिना ही मास्टराइन ने ताई का भार अपना लिया था। जगन मास्टर थोड़े दूसरे स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने जीवन में अपने कुछ नियम-सिद्धांत बना रखे थे और वे पूरा प्रयास करते थे कि उनके कारण किसी को कोई कष्ट न पहुँचे। वे बहुत ही स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति थे। वे कभी भी दूसरों की स्वतंत्रता पर बाधा नहीं डालना चाहते थे। जिस कारण पिंजड़े में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें परेशानी होने लगती थी। जब-जब वे मिट्टू को देखते, तब-तब अपनी पत्नी की बुद्धि पर उन्हें तरस आता और अपने आप को भी वे दोषी अनुभव करते। कहने का तात्पर्य यह है कि जगन मास्टर किसी को भी कैद में नहीं देख सकते थे जिस कारण उन्हें मिट्ठू को पिंजरे में कैद देखकर परेशानी होती थी।

प्रश्न 9 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में जगन मास्टर ने मिट्ठू के साथ कैसा व्यवहार किया ?
उत्तर – जब जगन मास्टर के लिए मिट्ठू का कैद में रखे हुए देखना सहन नहीं हुआ , तो उन्होंने एक दिन कमरा बंदकर मिट्टू के पिंजरे को जमीन पर रखा और उसका दरवाजा खोल दिया, ताकि मिट्ठू कुछ देर के लिए ही सही, खुली हवा में आ सके और उसे यह मौका देकर जगन मास्टर अपने पाप का थोड़ा प्रायश्चित कर लेना चाहते थे। परन्तु मिट्टू को अब पिंजरे में रहने की इतनी आदत हो चुकी थी इसलिए जगन मास्टर ने मुट्ठी में थोड़ा अनाज लिया और पिंजरे के दरवाजे से लेकर बाहर तक बिखेर दिया और स्वयं अलग हटकर मिट्ठू की हरकते देखते रहे। मिट्ठू धीरे-धीरे दाना चुगते हुए बाहर आ गए तो जगन मास्टर ने थोड़ी चैन की साँस ली। फिर मिट्टू पिंजरे की छत पर बैठ गया। एक दो घंटे बाद जगन मास्टर ने मिट्ठू को पकड़कर फिर पिंजरे में बंद कर दिया और चैन की साँस लेकर पिंजरे को बरामदे में टाँग दिया। कहने का तात्पर्य यह है कि जगन मास्टर किसी को भी कैद में नहीं देख सकते थे। इसलिए उन्होंने मिट्ठू को बंद कमरे में खुला छोड़ने का निर्णय लिया ताकि वे मिट्ठू को अपने घर में कैद होने के दोष का प्रायश्चित कर सकें।

प्रश्न 10 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में कौन सी असंभव घटना घटी थी ?
उत्तर – जगन मास्टर हर रोज कमरा बंद करके मिट्ठू को बाहर आने का आमंत्रण देते और उसकी आजादी का आनंद खुद लेते। यह सब केवल तीन-चार दिन तक चला ही था कि एक दिन मिट्टू की नजर कमरे में ऊपर खुले रोशनदान पर पड़ गई और सहज उत्सुकता के कारण वह पिंजरे की छत से तिरछी आँख अपने रोशनदान की ओर देखकर रोशनदान पर पहुँच गया। जगन मास्टर ‘गीता-रहस्य’ पढ़ रहे थे। मिट्टू के पंखों की फड़फड़ाहट सुनकर अचानक उनका ध्यान ‘गीता-रहस्य’ से हटकर मिट्ठू के पंखों की फड़फड़ाहट की ओर गया, और फिर उन्होंने रोशनदान पर बैठे मिट्ठू को देखा। जगन मास्टर हाथ में अनाज लेकर ‘आ-आ’ की पुकार लगाकर मिट्ठू को बुला ही रहे थे कि मिट्टू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और फिर बाहर की ओर उड़ गया।

प्रश्न 11 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में मिट्ठू के बाहर उड़ जाने पर जगन मास्टर की क्या प्रतिक्रया थी ?
उत्तर – मिट्टू अकेला नहीं उड़ा था, मिट्ठू के साथ-साथ आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते भी उड़ गए। अर्थात मिट्ठू को बाहर उड़ता देख कर जगन मास्टर बुरी तरह घबरा गए। अपनी ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास मिट्ठू को पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख को फैलाने में पूरी तरह व्यस्त था। अर्थात मिट्ठू जगन मास्टर की पहुँच से दूर उड़ गया।

प्रश्न 12 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में मिट्ठू की तरह दिखने वाले तोते के साथ जगन मास्टर कैसा व्यवहार करते थे ?
उत्तर – मिट्ठू की तरह दिखने वाले तोते के साथ जगन मास्टर की जिंदगी का एक नया दौर शुरू हो गया था। वह तोते को पिंजरे में रखकर पाठ पढ़ाने लगे, ताकि जब तक ताई आए तब तक वह भी मिट्ठू की तरह दो अक्षर बोलना सीख ले। जगन मास्टर ने फिक्र के मारे खाना-पीना छोड़ दिया था और घंटों पिंजरे के सामने बैठकर उस तोते को रटाते रहते – मिट्ठू, राम राम , सीताराम सीताराम, हर गंगे, हर गंगे , राम राम, सीताराम। बोलते-बोलते उनका गला सूख जाता, तो पानी पीकर फिर से दुहराने लगते – राम राम, सीताराम, हर गंगे…. फिर कभी गुस्से में आकर कहते – मर जा ! मर जा !! पर वह दूसरा तोता पिंजरे के अंदर से टुकुर-टुकुर उन्हें देखता रहता या शायद उनकी बेवकूफी पर हँसता रहता हो। अर्थात जगन मास्टर अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहे थे कि वह दूसरा तोता भी मिट्ठू की तरह कुछ बोलना सीख ले ताकि ताई को कुछ पता न चले। परन्तु तोता कुछ भी नहीं बोल रहा था।

प्रश्न 13 – कक्षा 9 हिंदी ‘गंगा’ पाठ 3 – संवादहीन पाठ में ताई को कुम्भ से लौटने पर क्या उम्मीद थी ?
उत्तर – कुंभ-स्नान से लौटकर सभी तीर्थयात्री अपने-अपने घरों की ओर चल दिए लेकिन ताई सीधे अपने बड़े घर की ओर न जाकर जगन मास्टर के दरवाजे पर पहुँच गई। ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा, और पिंजड़े में कूद-फाँद मचाकर तूफान खड़ा कर देगा, लेकिन वहाँ पिंजरे में मिट्ठू की जगह बैठे दूसरे मिट्ठू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की, वह केवल इधर-उधर देखता रहा। ताई अपने मिट्ठू को पुकार-कर थक गईं लेकिन उनके सूनेपन का साथी न जाने किन उद्यानों में घूम रहा होगा। अर्थात ताई तो उस दूसरे मिट्ठू को अपना मिट्ठू समझकर पुकार रही थी परन्तु उनका अपना मिट्ठू तो न जाने कहाँ उड़ गया था।

 
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