CBSE Class 9 Hindi Chapter 1 Do Bailon Ki Katha (दो बैलों की कथा) Question Answers (Important) from Ganga Book
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रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
(ख) एकता और सहयोग
(ग) गर्व और दंभ
(घ) विद्रोह और क्रोध
उत्तर – (ख) एकता और सहयोग
मेरा तर्क – क्योंकि कहानी में ऐसे बहुत से मोड़ आते हैं जहाँ हीरा और मोती एकता और सहयोग का परिचय देते हैं। जैसे – जब मोती क्रोध में आकर प्रतिशोध की बात करता है, तो हीरा उसे समझाता है कि बैल का धर्म सहनशीलता है और हिंसा करना उचित नहीं। वह एक सच्चा मित्र है। कठिन परिस्थितियों में भी हीरा अपने साथी मोती को सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता है और उसका साथ कभी नहीं छोड़ता। और मोती भी हमेशा कठिन परिस्थितियों में हीरा का साथ देता है, कांजीहौस में हीरा के बँधे होने के कारण वह अकेले उसे छोड़कर नहीं जाता है।
2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
उत्तर – (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
मेरा तर्क – जब झूरी ने बैलों को अपने ससुराल भेज दिया, तब बैलों को यह समझ नहीं आया कि उन्हें क्यों भेजा जा रहा है। उनके भोले मन में यह धारणा बन गई कि मालिक ने उन्हें बेच दिया है। बैल, जो अपने मालिक के लिए कार्य करते थे, इस बदलाव को समझ नहीं पाए। वे अपने मन में सवाल कर रहे थे कि क्या उनका इस तरह बेचा जाना सही था।
3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
(क) कष्टों से बचने के लिए
(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
(ग) अभिमान की रक्षा के लिए
(घ) अपनापन पाने के लिए
उत्तर – (घ) अपनापन पाने के लिए
मेरा तर्क – दोनों बैलों ने जिस स्थान को अपना घर माना था, उससे अचानक छूट जाना उनके लिए धक्का लगने जैसा था। नया घर, नया गाँव, और नए लोग उनके लिए अजनबी और बेगाने थे। यह उनका अपने पुराने जीवन और परिचित वातावरण से गहरा जुड़ाव और लगाव दिखाता है।
4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
(क) स्वाभिमान
(ख) अहिंसा
(ग) पराधीनता
(घ) अन्याय की रक्षा
उत्तर – (क) स्वाभिमान
मेरा तर्क – मोती का चरित्र अधिक उग्र और स्वाभिमानी है। गया द्वारा लगातार प्रताड़ित किए जाने और हीरा पर हुए प्रहार ने उसके धैर्य की सीमा तोड़ दी । वह चुपचाप केवल मार नहीं खाना चाहता था, बल्कि ईंट का जवाब पत्थर से देने की इच्छा रखता था । उसका यह आक्रोश स्वाभिमानी जीव का उदाहरण प्रस्तुत करता है जो पराधीनता और क्रूरता को चुपचाप स्वीकार नहीं करते, बल्कि अपनी गरिमा की रक्षा के लिए संघर्ष करते हैं ।
5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?
(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए
(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
उत्तर – (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
मेरा तर्क – मूक-भाषा के माध्यम से लेखक पशुओं की भावनाओं को मनुष्य के समक्ष प्रस्तुत करना चाहते हैं ताकि मनुष्य भी पशुओं के विचारों और भावनाओं को समझने का प्रयास करे और उन्हें वेवजह परेशान न करे।
6. ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के
(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
उत्तर – (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
मेरा तर्क – हीरा और मोती का लगातार अन्याय के विरुद्ध लड़ना, अपनी तरह सताए हुए पशुओं की सहायता करना, एक दूसरे के लिए बलिदान देने के लिए सदैव तत्पर रहना, जेल जैसी काँजीहाऊस जगह में रहना और अंत में मुसीबतों व् अत्याचार सहते हुए स्वतंत्रता प्राप्त करना, ये सभी बातें स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के प्रतिक हैं।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
उत्तर – जब बैल नए मालिक के यहाँ गए तो वहाँ काम न करने के कई कारण थे। जैसे – पहला कारण तो यह था कि हीरा और मोती को लगा कि उनके स्वामी झूरी ने उन्हें बेच दिया है। यह उनके लिए अपमानजनक था। दूसरा कारण यह था कि गया ने उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया था। और तीसरा कारण उनकी वफादारी और स्वाभिमान था क्योंकि उनका मन झूरी के पास ही था और बिना अपनेपन के उन्हें काम करना स्वीकार नहीं था।
2. ”गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?
(संकेत – वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)
उत्तर – बैलों का घर वापिस लौटना कोई साधारण घटना नहीं मानी जा सकती क्योंकि उन्होंने मजबूत रस्सियों को तोड़ा और अनजान रास्तों से भी किसी तरह अपने घर लौट आए थे। गया ने उनके साथ अपनेपन से व्यवहार नहीं किया जैसे झूरी करता था। और न ही उन्हें अच्छा भोजन दिया जिस कारण वे घर लौट आए। बैलों में मन में झूरी का अपनापन था जो उन्हें किसी और से नहीं मिला और झूरी के प्रति उनके मन में अगाध श्रद्धा थी। झूरी के मन में भी उनकी देखरेख से सम्बंधित चिंता थी। पशुओं की भावनात्मक बुद्धिमत्ता और वफादारी के उदाहरण अक्सर वास्तविक जीवन में भी दिखाई देते है।
3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा- अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!”
‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
उत्तर – कहानी में ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ स्पष्ट किया गया है कि कभी-कभी जीवन में संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है। जैसे – जब गया हीरा और मोती को बेवजह मार रहा था तब मोती ने विरोध करते हुए हल लेकर भागने की कोशिश की। यह बेवजह अत्यचार न सहने के लिए आवश्यक विरोद्ध था। दूसरी बार जब हीरा और मोती का सामना खतरनाक सांड से हुआ, तब दोनों ने योजना बनाकर मिलकर उसका सामना किया। यह आत्मरक्षा में किया गया आवश्यक हमला था। और तीसरी बार जब हीरा और मोती ने काँजीहाउस की कैद से आजाद होने के लिए दीवार को तोड़ा था। यह स्वतंत्रता के लिए उठाया गया आवश्यक संघर्ष था।
4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
उत्तर – हीरा एवं मोती ‘अपनापन’ की भावना से अधिक प्रेरित थे क्योंकि गया के पास से भागने के बाद वे कहीं भी जा सकते थे। परन्तु उन्होंने अपने घर अर्थात झूरी के पास जाना ही चुना। फिर चाहे उन्हें घर का रास्ता मालुम ही नहीं था। वे किसी भी हाल में केवल झूरी के पास ही जाना चाहते थे।
5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।”
‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’- क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए |
उत्तर – ‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’- इस कथन से मैं पूरी तरह सहमत हूँ। क्योंकि यदि हम अत्याचार सहते जाते हैं तो अत्याचारी का साहस और अधिक बढ़ जाता है। दोनों बैलों ने भी अपने ऊपर होने वाले सभी अत्याचारों का विरोध किया। जब उन्हें बेवजह मारा गया तब उन्होंने काम न करके विरोद्ध दिखाया। जब कैद किया गया तब दीवार को तोड़ दिया और जब सांड़ ने हमला किया तब मिलकर उसका सामना किया। यदि वे अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के विरुद्ध खड़े न होते तो उनकी स्थिति कभी न बदलती।
6. “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
उत्तर – “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की बहुत सी घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है। जैसे –
जब दोनों को हल या गाड़ी में जोता जाता था तब वे स्वयं अधिक भार उठाने की कोशिश करते थे ताकी दूसरे को कम बोझ उठाना पड़े।
जब सांड से लड़ने की बारी आई तो दोनों ने मिलकर योजना बनाई। उन्होंने किसी को अकेले लड़ने नहीं दिया।
कांजीहाऊस में जब हीरा के पास भागने का मौका था वह मोती को अकेले छोड़ कर नहीं भगा। उसने स्वतंत्रता की जगह अपने मित्र के साथ मर जाना चुना।
7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर – कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की यदि तुलना की जाए तो प्रारम्भ में मालकिन बैलों को नाकारा या नमकहराम कहा करती थी। जबकि छोटी लड़की शुरू से ही बैलों के साथ प्रेम व् स्नेह से व्यवहार करती थी। गुस्से में मालकिन बैलों को सूखा भूसा देने का आदेश देती है जबकि छोटी लड़की ने रात में चुपके से दोनों को दो रोटियां खिलाई। अंत में बैलों की हालत देखकर जब मालकिन का मन पसीजा तब उसने बैलों के माथे को चूमा जबकि छोटी लड़की ने शुरू से ही बैलों की स्थिति को भांप कर नुक्सान होने से पहले ही उनके भागने में मदद की। मालकिन का प्रेम स्वार्थ-मिश्रित प्रेम था जबकि छोटी लड़की की भावना सच्ची करुणा से पूर्ण थी।
मेरी कल्पना मेरे अनुमान
1. ”उसने उनके माथे सहलाए और बोली- खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
उत्तर – यदि मैं वह छोटी लड़की होती तो मैं उन बैलों को रोटी के साथ-साथ कुछ और भी खाने को देने का प्रयास करती। साथ-ही-साथ मैं गाँव वालों को बैलों पर होने वाले अत्याचार बता देती और कोशिश करती कि बैल अपने मालिक के पास जा पाएं।
2. “दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
उत्तर – भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। इस कथन से हम बिलकुल सहमत हैं। जब हीरा और मोती ने मिलकर काँजीहॉउस की दीवार तोड़ी तो वहाँ मौजूद सभी जानवर जैसे- घोड़े,बकरियाँ तथा भैंसे भाग गई। परन्तु गधे वहीँ पर खड़े रहे। उनमें साहस की कमी थी। वे फिर से पकड़े जाने और मार खाने से भयभीत थे। असल जिंदगी में भी हमारे समक्ष कई ऐसे अवसर आते हैं जहाँ हमें हिम्मत दिखा कर और जोख़िम उठाकर आगे बढ़ना होता है। परन्तु भय और लोगों की सोच का खौफ हमें जकड़े रखता है। इसलिए आवश्यक है कि सही निर्णय लेने के समय हमें हिम्मत और साहस से काम लेना चाहिए।
मेरे अनुभव मेरे विचार
1. “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
उत्तर – “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” इस बात से हम पूरी तरह सहमत हैं। क्योंकि जहाँ दोस्ती पक्की और सच्ची होती है वहाँ सोच समझ कर बोलने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सच्चे मित्र आपस में हँसी-मजाक भी करते हैं और एक दूसरे को छेड़ते भी हैं। असल में यही सच्ची मित्रता की निशानी भी है। मेरे भी ऐसे घनिष्ट मित्र रहे हैं जो मेरा भरपूर मजाक बनाते थे परन्तु मुसीबत के समय वे मित्र ही सबसे आगे खड़े मिलते थे।
2. “हीरा ने तिरस्कार किया- गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।”
“यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।”
आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं- हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
उत्तर – एक नजर में मोती की बात सही लगती है कि “बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।” परन्तु असल में हिरा का कहना सही है। क्योंकि किसी हारे हुए को मारना कायरता का प्रतिक है। हमें पूर्वजों से भी यही सीख मिलती है कि जो शत्रु पराजित हो गया को उस पर और अधिक बल दिखाना वीरता नहीं बल्कि कायरता है। किसी कमजोर हो चुके शत्रु को मारना हमारे व्यक्तित्व पर भी बुरा प्रभाव डाल सकता है।
3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
उत्तर – हाँ, मुझे याद है कि एक बार मेरे एक मित्र के पिता का देहांत हमारी परीक्षाओं के आस-पास हो गया था। वह इतना दुखी था कि पढाई में उसका मन नहीं लग पा रहा था। वह विद्यालय भी नहीं आ पा रहा था। तब मैने उसे उसके घर जा कर अध्यापकों द्वारा समझाए गए पाठ समझाए थे। इससे उसे बहुत सहायता मिली और वह अच्छे अंकों से भी पास हो गया। इस घटना से मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ था।
विधा से संवाद
कहानी की पड़ताल
कहानी ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा-विन्यास सभी उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं।
कोई कहानी वास्तविक या काल्पनिक घटनाओं पर आधारित हो सकती है और इसमें वास्तविक या काल्पनिक पात्र भी शामिल हो सकते हैं।
आप कहानी लेखन की इस प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए एक कहानी का शीर्षक चुनिए और दिए गए मुख्य बिंदुओं को पूरा कीजिए-
| शीर्षक और लेखक विषय |
|
| क्रिया /कार्य | |
| परिवेश /देश-काल और मुख्य विचार | |
| चरित्र/पात्र | |
| परिणाम |
उत्तर –
| शीर्षक और लेखक विषय |
दो बैलों की कथा – प्रेमचंद बैलों की मित्रता, स्वाभिमान, वफादारी व् अन्याय के विरोध संघर्ष |
| क्रिया /कार्य | हल जोतना, सामान ढोना, गाड़ी खींचना व् अन्याय के खिलाफ लड़ना |
| परिवेश /देश-काल और मुख्य विचार |
ग्रामीण क्षेत्र, भारत, अंग्रेजी शासन का समय स्वतंत्रता के लिए संघर्ष |
| चरित्र/पात्र | हीरा-मोती, झूरी, मालकिन, गया, छोटी लड़की, दढ़ियल व्यक्ति |
| परिणाम | कठिनायों को पार करते हुए बैल अपने घर वापिस आ पहुंचे, झूरी और मालकिन ने दोनों बैलों को सहर्ष स्वीकार किया। |
कहानी का सौंदर्य
“दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे। दोनों की पूँछें खड़ी हो गईं।”
इस वाक्य को पढ़कर आँखों के सामने एक दृश्य-सा बन जाता है। आप जानते हैं कि भाषा की इस विशेषता को चित्रात्मकता कहते हैं। ‘दो बैलों की कथा कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ हैं जो इसे अद्भुत और प्रभावपूर्ण बनाती हैं।
नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए-
| विशेषता | विशेषता का अर्थ | उदाहरण 1 | उदाहरण 2 |
| चित्रात्मक भाषा | शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना। | घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं। | सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली। |
| संवादत्मकता | कथ्य का आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग। | मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | |
| विरोधाभास | एक ही प्रसंग या रचना में दो विपरीत या परस्पर विरोधी बातें एक साथ मौजूद होना। | झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गद्गद हो गया। झूरी की स्त्री ने बैलों का द्वार पर देखा, तो जल उठी। | |
| व्यंग्य | वह शैली जिसमें मजाक, हास्य या कटाक्ष (चुभते हुए संकेतों) के माध्यम से किसी दोष, कुरीती, अन्याय, पाखंड या कमजोरी को प्रकट किया जाता है। | भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सभ्य कहलाने लगते। | |
| संघर्ष | दो विरोधी शक्तियों, विचारों, इच्छाओं या परिस्थितियों का आपास में टकराना। | उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नजर आती। (बैल बनाम साँड़) | |
| अतिशयोक्ति | किसी पात्र, घटना, भाव या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे। | झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे। | |
| संदेह /उलझन | जब पात्र किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता। | सारा दिन बीत गया और खाने को एक तिनका भी न मिला। समझ ही में न आता था, वह कैसा स्वामी है? |
उत्तर –
| विशेषता | विशेषता का अर्थ | उदाहरण 1 | उदाहरण 2 |
| चित्रात्मक भाषा | शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना। | घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं। | सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली। |
| संवादत्मकता | कथ्य का आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग। | मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | “भागना कायरता है – नहीं यह स्वाधीनता है। “ |
| विरोधाभास | एक ही प्रसंग या रचना में दो विपरीत या परस्पर विरोधी बातें एक साथ मौजूद होना। | झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गद्गद हो गया। झूरी की स्त्री ने बैलों का द्वार पर देखा, तो जल उठी। | “स्वतंत्रता की चाह थी परन्तु अब बंधन में रहना पड़ रहा है.” |
| व्यंग्य | वह शैली जिसमें मजाक, हास्य या कटाक्ष (चुभते हुए संकेतों) के माध्यम से किसी दोष, कुरीती, अन्याय, पाखंड या कमजोरी को प्रकट किया जाता है। | भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सभ्य कहलाने लगते। | “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देते, तो शायद सभ्य कहलाते। “ |
| संघर्ष | दो विरोधी शक्तियों, विचारों, इच्छाओं या परिस्थितियों का आपास में टकराना। | उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नजर आती। (बैल बनाम साँड़) | “हीरा और मोती का गया के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष “ |
| अतिशयोक्ति | किसी पात्र, घटना, भाव या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे। | झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे। | “दोनों उड़ने लगते थे मानो पंख लग गए हों “ |
| संदेह /उलझन | जब पात्र किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता। | सारा दिन बीत गया और खाने को एक तिनका भी न मिला। समझ ही में न आता था, वह कैसा स्वामी है? | “अब क्या करें – भागें या सहें?” |
कहानी की रचना
प्राय: कहानी के प्रारंभ में ही कहानी के मुख्य चरित्र, कहानी का समय, कहानी की भाषा, घटनाओं आदि के कुछ संकेत मिलने लगते हैं। प्रेमचंद की इस कहानी में भी ऐसे संकेत हैं। आप कहानी के ऐसे संकेत/ बिंदुओं को ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर – कहानी के प्रारम्भिक मुख्य चरित्र – गधे से तुलना , बैलों का भाईचारा, झूरी का बैलों से प्रेम
कहानी का समय – अंग्रेजी शासन काल
कहानी की भाषा – मूक
घटना का प्रारम्भिक संकेत – वफादारी और संघर्ष
विषयों से संवाद
कहानी का समय और समाज
‘दो बैलों की कथा’ कहानी जिस समय लिखी गई थी, उस समय भारत पर अंग्रेजों का दमनकारी शासन चल रहा था। उस समय भारतवासी भी अपने-अपने ढंग से इस अंग्रेजी शासन का विरोध कर रहे थे। इस कार्य में लेखक भी किसी से पीछे नहीं थे। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने हेतु प्रेरित कर रहे थे।
इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए—
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
| 1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | 1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी। |
| 2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | 2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। |
| 3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | 3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
| 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | 4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी । |
| 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | 5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। |
| 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | 6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
उत्तर –
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
| 1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | 6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
| 2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | 5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। |
| 3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | 4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी । |
| 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | 2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। |
| 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | 1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी। |
| 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | 3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
पशुओं के लिए कानून
नीचे दिए गए संवाद पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
“मैं तो समझता हूँ, चुराए लिए आते हो। चुपके से चले जाओ। मेरे बैल हैं। मैं बेचूँगा, तो बिकेंगे। किसी को मेरे बैल नीलाम करने का क्या अख़्तियार है !”
“जाकर थाने में रपट कर दूँगा।”
“मेरे बैल हैं। इसका सबूत यह है कि मेरे द्वार पर खड़े हैं।”
1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
उत्तर –
अन्याय – बिना चारे-पानी के मरने के लिए छोड़ देना।
न्याय – सजा पूरी होने के बाद छोड़ देना
2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
उत्तर –
भरपूर चारा-पानी का प्रबंध
किसी भी कारण यातना की मनाही
बेवजह बेचना व् खरीद पर रोक
पशु रक्षा कानून का प्रावधान
3. मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी और से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए।
(संकेत- “थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम… है। हमारे साथ अन्याय हुआ है…। “)
उत्तर –
सेवा में,
थानाध्यक्ष महोदय,
विषय – अन्याय के विरुद्ध शिकायत पत्र।
महोदय ,
हमारा नाम हीरा व् मोती है। हमारे साथ अन्याय हुआ है। हम बहुत मेहनती व् अपने मालिक के प्रति वफादार हैं। हमें बिना किसी कारण भूखा-प्यासा रखा गया। जब किसी तरह हम भागने में कामयाब हुए तो हमें दुबारा काँजीहाउस में बंद कर दिया गया। न वहाँ भी हमारे साथ मार-पीट की गई। हम अपने मालिक के वफादार हैं और अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। आपसे विनम्र निवेदन है कि आप हमें मुक्त करवाएं और हमारे मालिक के पास हमें भिजवा दें। आपकी कृपा होगी।
भवदीय
हीरा और मोती
हमारी धरोहर और संस्कृति
1. “वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें! “
कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
उत्तर – हीरा और मोती ने कभी निम्नलिखित कार्य नहीं किए –
औरतों पर सींग चलाना
कायरता से भाग खड़ा होना
पराजित हो चुके शत्रु को मारना
2. गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।”
“लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।”
हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
उत्तर – हीरा के ये कथन निम्नलिखित भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं –
अहिंसा – गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।
स्त्री सम्मान – “लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।”
दया व् क्षमा – पराजित हो चुके शत्रु को न मारना व् छोड़ देना
साहस व् स्वाभिमान – बिना डरे अन्याय का विरोध करना परन्तु अपनी नैतिकता का सदा पालन करना।
3. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता”
(क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर – कृषि के पारंपरिक उपकरण –
हल – खेत की जुताई के लिए उपयोगी
जुआ – जुताई करने के लिए बैलों की गर्जन में बाँधा जाने वाला उपकरण
बैलगाड़ी – फसल को व् उपकरणों को खेत तक पहुंचाने व् ले जाने में सहायक
कुदाल-फावड़ा-हसिया – खेत को खोदने व् फसल की कटाई में उपयुक्त उपकरण
कृषि के आधुनिक उपकरण –
कल्टीवेटर – इनका उपयोग जुताई के बाद मिट्टी को बारीक कणों में तोड़ने के लिए किया जाता है। ये खरपतवारों को उखाड़ने और मिट्टी को और अधिक ढीला करने में मदद करते हैं।
रोटावेटर – ये ऐसी मशीनें हैं जो मिट्टी को भुरभुरा करके जुताई और मिट्टी तैयार करने का काम एक साथ करती हैं, जिससे यह बीज बोने के लिए आदर्श बन जाती है।
बीज ड्रिल – इन मशीनों का उपयोग एक समान गहराई और दूरी पर बीज बोने के लिए किया जाता है, जिससे संसाधनों का कुशल उपयोग और बेहतर फसल उपज सुनिश्चित होती है।
हार्वेस्टर – अनाज, फल या सब्ज़ियों की कटाई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मशीनें। ये कटाई के लिए ज़रूरी जनशक्ति को कम करती हैं, खास तौर पर बड़े पैमाने के खेतों के लिए।
थ्रेशर – इनका उपयोग कटी हुई फसल से अनाज को अलग करने के लिए किया जाता है। ये कार्यकुशलता बढ़ाते हैं और समय बचाते हैं।
(ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
उत्तर – भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल बहुत से काम में सहायक होते हैं।
भारतीय गाँवों में बैलों के काम –
हल जोतना
बैलगाड़ी खींचना
पूजा-अर्चना में उपयुक्त
कथा-कहानियों के मुख्य पात्र
शहरों में बैलों के काम –
छोटे कस्बों में बैलगाड़ी खींचने में उपयुक्त
कृषि सम्बंधित कार्यों में अप्रत्यक्ष रूप से सहायक (गोबर आदि )
कहीं-कहीं पर्यटन स्थलों में सामान ढोने का किफायती साधन
धार्मिक स्थलों में पूजनीय
अलग-अलग और साथ-साथ
“दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़क की खाई में गिराना चाहा; पर हीरा ने संभाल लिया। वह ज्यादा सहनशील था।”
1. कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।
(संकेत – धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
उत्तर –
हीरा की विशेषताएँ –
सहनशील – जब मोती गुस्से में गाड़ी को खाई में गिराना चाहता था जब हीरा ने संभाल लिया था।
समझदार – हीरा मोती को हमेशा समझाता था और गुस्सा न करने को कहता था।
शांत – सांड के हमले के समय भी हीरा ने शांति से योजना बनाई और उसी के कारण वे सांड को हराने में कामयाब हो गए।
धर्मनिष्ठ – हीरा कभी भी अपने धर्म से पीछे नहीं हटता था। चाहे उसे मार ही क्यों न कहानी पड़े। वह कभी स्त्री व् हारे हुए शत्रु पर हमला नहीं करता था।
मेहनती – हीरा बहुत अधिक मेहनती बैल था।
वफादार – झूरी के प्रति हीरा की निष्ठां अत्यधिक सराहनीय है।
मोती की विशेषताएँ –
गुस्सैल- मोती हीरा के मुकाबले अत्यधिक गुस्से वाला था। वह कभी गुस्से में गाड़ी को खाई में गिराने की कोशिश करता कभी हल लेकर भागने का प्रयास करता।
साहसी – कसी भी मुसीबत में मोती सबसे आगे खड़ा हो जाता था। काँजीहाउस में भी सबसे पहले उसी ने दीवार तोड़ने का साहस दिखाया था।
विद्रोही – अन्याय के विरुद्ध मोती खड़ा हो जाता था। उसे मरना मंजूर था परन्तु अन्याय सहन करना नहीं।
भावुक – मोती बहुत भावुक भी था। हीरा को मोटी रस्सी में बंधा देख उसकी आँखों में आंसू आ गए थे।
मेहनती – दोनों ही बैल मेहनती थे परन्तु मोती में विद्रोह करने की भावना ज्यादा थी।
2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?
उत्तर – हीरा और मूर्ति की कुछ विशेषताएं सामान थी जैसे – वे दोनों मेहनती थे, दोनों में भाईचारा और वफादारी थी। कुछ विशेषताएं भिन्न भी थी जैसे – हीरा शांत, समझदार, धर्मनिष्ठ व् सहनशील था। जबकि मोती गुस्सैल, साहसी , विद्रोही व् भावुक था। परन्तु दोनों की भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती थी। जैसे –
जब मोती गुस्से में सींग मारने या भागने को तैयार होता तब हीरा उसे संभाल लेता था। और उसे सही रास्ता दिखाता था।
जब हीरा ज्यादा ही सहनशील हो कर शांत हो जाता था तब मोती उसका साहस बढ़ता था।
सांड से लड़ने में भी जब हीरा ने योजना बनाई तो मोती ने उसका पूरा साथ दिया।
काँजीहाउस में भी जब हीरा को दीवार तोड़ने के लिए सजा के तौर पर रस्सी से बांध दिया तब मोती ने उसका काम पूरा करते हुए दीवार तोड़ दी।
4. “दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक भाषा में विचार-विनिमय करते थे।”
कहानी में अनेक स्थानों पर ‘मूक- भाषा’ का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
उत्तर – हीरा और मोती की मूक-भाषा स्पष्ट थी। जैसे –
आँखों से इशारा – एक दूसरे को भागने या शांत रहने का इशारा करना
सींग मिलाना – खेल-खेल में प्यार जाताना
पूँछ खड़ी करना – दूसरे के हार मान लेने पर उसे हिम्मत देना
सिर झुकाना या चाटना – एक दूसरे को सांत्वना देते हुए प्रेम जताना
एक साथ मुँह हटाना – खाना न खाने के लिए एक दूसरे का साथ देना
गर्दन हिलाना – हाँ, ना का जवाब देना
5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब ? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तर – हम भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों के संवाद करते हैं। जैसे –
आँखों से इशारा करके – जब कक्षा में अध्यापक हों और हमें अपने मित्र को कुछ कहना हो।
मुस्कुराकर – मुसीबत में पड़े अपने मित्र को मुस्कुराकर कहना कि हम उसके साथ हैं।
हाथ के इशारे से – जब दूर खड़े व्यक्ति को रुकने या जाने को कहना हो।
कंधे पर हाथ रखकर – अपने दुखी परिजनों को सांत्वना देने के लिए।
सिर हिलाकर – हाँ या न का जवाब देने के लिए।
मार्ग खोजेंगे कैसे?
“सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा। जिस परिचित मार्ग से आए थे, उसका यहाँ पता न था। नए-नए गाँव मिलने लगे।”
1. हीरा – मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?
उत्तर – हीरा और मोती की ही तरह एक बार बचपन में मुझे पहले दिन माँ ने खेत का रास्ता दिखा दिया था। ताकि मैं अगले दिन दोपहर का खाना खेत में पहुंचा सकूँ। मैने रास्ते को अच्छे से देख लिया था। परन्तु उस समय मेरी उम्र छोटी थी जिस कारण मैं अगले दिन खेत का रास्ता भूल गई । मैं और मेरी छोटी बहन घर से दोपहर का खाना ले कर खेत को चल पड़े परन्तु मुझे रास्ता याद नहीं आ रहा था जिस कारण हम बहुत ज्यादा डर गए थे। फिर मैने थोड़ा शांत मन से रास्ता याद करने की कोशिश की और फिर मुझे अपने खेत के पास एक लम्बे सूखे हुए देवदार के पेड़ की याद आई और उसी पेड़ को सहारा मान कर हम खेत तक पहुँच गए।
2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव् तक पहुँच जाए। कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
(संकेत- ऑनलाइन मानचित्र, पुलिस, स्कूल, सरकारी भवन, विद्यार्थी, सड़क पर लगे सूचना-पट, दुकानों के बोर्डों पर लिखे पते, डाकघर आदि।)
उत्तर – सुरक्षित रूप से अपने गंतव् तक पहुँचने के उपाय –
शांत रहें – सबसे पहले मन को शांत करना चाहिए ताकि कोई गलती न हो।
ऑनलाइन मानचित्र – अपने घर का पता ऑनलाइन मानचित्र पर डाल कर खोजने का प्रयास करना चाहिए।
पुलिस – यदि किसी कारण ऑनलाइन मानचित्र पर पता न खोज पाओ तो पुलिस की मदद लेनी चाहिए।
आसपास की जगह को खोजने की कोशिश करनी चाहिए जैसे कोई सरकारी भवन, स्कूल, सड़क पर लगे सूचना-पट, दुकानों के बोर्डों पर लिखे पते, डाकघर आदि।
आस पास खड़े व्यक्तिओं से अपनी जान पहचान की जगह के बारे में पूछ लेना चाहिए।
किसी सुरक्षित जगह पर रहना चाहिए ताकि कोई आपके खो जाने का गलत फायदा न उठा सके।
अपने किन्हीं परिजनों को फोन कर लेना चाहिए या उन्हें अपनी लाइव लोकेशन भेज देनी चाहिए।
अपने किन्हीं परिजनों को फोन कर लेना चाहिए या उन्हें अपनी लाइव लोकेशन भेज देनी चाहिए।
सृजन
1. हीरा और मोती की दैनंदिनी
कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।
कैसे लिखें-
- “आज का दिन…” से आरंभ करें।
- भावनाएँ लिखें (भूख, गुस्सा, दर्द)।
- अंत में आशा या संकल्प लिखें।
(संकेत- “आज हमें कॉंजीहाउस में बंद किया गया। भूख से पेट जल रहा है। पर विश्वास है कि झरी हमें वापस ले जाएगा।)
उत्तर – आज का दिन –
आज हमें कॉंजीहाउस में बंद किया गया। भूख से पेट जल रहा है। क्योंकि आज पहली बार ऐसा हुआ कि पूरे दिन मुझे और मोती को खाने के लिए कुछ भी नहीं मिला। यहाँ अन्य जानवर जैसे भैंसें, बकरियाँ, घोड़े, और गधे भी थे, लेकिन किसी के सामने चारा नहीं था। सब जानवर भूख से बेहाल होकर ज़मीन पर गिरे पड़े थे। कुछ तो इतने कमज़ोर हो गए थे कि खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। भूख से परेशान होकर हमने दीवार की नमकीन मिट्टी चाटना शुरू कर दिया, लेकिन इससे उनकी भूख शांत नहीं हो सकी। मोती ने निराशा भरे स्वर में जवाब दिया कि उसे तो ऐसा लग रहा है कि उसके प्राण निकल रहे हैं। मैने उसे हिम्मत न हारने को कहा और भागने का कोई उपाय निकालने की बात की। मोती ने दीवार तोड़ने का सुझाव दिया, लेकिन कमजोरी और भूख के कारण उसमें ताकत नहीं बची थी। इसके बाद, मैंने खुद दीवार तोड़ने का प्रयास शुरू कर दिया। अपने नुकीले सींगों से दीवार पर चोट की और धीरे-धीरे मिट्टी गिरने लगी। लेकिन इसी बीच कांजीहौस का चौकीदार लालटेन लेकर जानवरों की गिनती करने आ गया। उसने मेरी यह हरकत देखकर डंडों से पीटा और मोटी रस्सी से बाँध दिया। मोती ने मुझसे कहा कि कोशिश का क्या फायदा, जब मुझे और भी बंधन में जकड़ दिया गया। लेकिन मैने दृढ़ता से कहा कि मुझे चाहे जितने भी बंधन में जकड़ दिया जाए, मैं अपनी ताकत से लड़ता रहूँगा। मेरी बातों से प्रेरित होकर मोती ने भी दीवार तोड़ने में साथ देने का फैसला किया। उसने अपनी ताकत जुटाई और दीवार में सींग मारना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे मिट्टी गिरने लगी, उनका उत्साह बढ़ता गया। मोती दीवार पर पूरे जोश से प्रहार करने लगा, मानो वह किसी दुश्मन से लड़ रहा हो। लगभग दो घंटे की मेहनत के बाद, दोनों ने मिलकर दीवार का एक बड़ा हिस्सा गिरा दिया। हमारी दृढ़ता और सहयोग के कारण दीवार लगभग आधी गिर गई। यह बात बताती है कि जब सहयोग और संघर्ष का भाव हो, तो असंभव-सी लगने वाली परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है। हीरा का साहस और मोती की अंत में जागी हुई हिम्मत यह सिखाती है कि कठिनाईयों के बावजूद, जब तक हम प्रयास करते हैं, तब तक उम्मीद बनी रहती है।
2. आज के समाचार
मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों काँजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए।कैसे लिखें–
- शीर्षक दें।
- घटना का विवरण (कहाँ, कब, क्या हुआ)।
- परिणाम और लोगों की प्रतिक्रिया ।
(संकेत- शीर्षक ‘दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ)
उत्तर –
शीर्षक – ‘दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ’ काँजीहाउस से अपने साथ-साथ कई और जानवरों को भी भागने में की मदद ‘
समाचार – हमीरपुर जिला के काँजीहाउस में कल रात एक अध्भुत घटना सामने आई है। झूरी नामक किसान के दो बैल हीरा और मोती कई दिनों से इस काँजीहाउस में बिना चारे और पानी के बंद थे। साथ ही वहाँ और भी कई जानवर बंद थे। जो लगभग मरने की हालत में थे। हीरा और मोती ने आपस में मूक भाषा में सलाह की कि यदि मरना ही है तो कैद में क्यों मरा जाए। आजादी की एक कोशिश की जाए। फिर दोनों ने पूरी हिम्मत और साहस का परिचय देते हुए काँजीहाउस की दीवार को तोड़ गिराया और खुद के साथ – साथ कई बकरियों, भैंसों, घोड़ों और गधों को आजाद किया। हीरा और मोती वहां से भागकर अब अपने थान में लौट आए हैं और पुरे गाँव में उनकी बहादुरी के किस्से गूंज रहे हैं।
परिणाम – बैलों ने पुरे गाँव में वफ़ादारी और प्रेम निष्ठां की मिसाल पेश की है और लोग उनकी प्रशंसा किए नहीं थक रहे हैं।
3. कहानी का नया अंत
यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए।
कैसे लिखें-
- बैलों की नई जगह।
- झूरी की स्थिति
(संकेत- “हीरा और मोती अब एक बूढ़े किसान के घर शांति से रह रहे हैं। “)
उत्तर – यदि बैल वापिस न लौट पाते और एक बूढ़े किसान के घर शांति से रह रहे होते तो कहानी का नया अंत कुछ इस तरह से होता –
दढ़ियल की कैद से किसी तरह आजाद हो कर हीरा – मोती एक बूढ़े किसान के घर पहुँचे। उन्हें झूरी के घर का रास्ता याद नहीं था। परन्तु वह बूढ़ा किसान गया और दढ़ियल की तरह कठोर नहीं था। वह उन दोनों को झूरी की ही तरह प्यार से सहलाता था। उन्हें पूरा खाना, भूसा, खली, चोकर व् मीठा पानी देता था। वहाँ हीरा और मोती को अपनापन लगने लगा था। वे बहुत खुश थे परन्तु कभी-कभी उन्हें झूरी के थान की याद उदास कर जाती थी।
उधर झूरी ने अपने बैलों को खोजने की पूरी कोशिश की। परन्तु उसे वे कहीं भी नहीं मिले। उसे गया से पता चला कि वे भाग गए थे। उसे उन पर होने वाले अत्याचारों का अंदेशा हो गया था। जिस कारण उसे हीरा और मोती के लिए बुरा लग रहा था और उन्हें गया के साथ भेजने पर पश्चयताप हो रहा था। परन्तु उसे एक बात की ख़ुशी भी थी कि हीरा और मोती ने अत्याचार के खिलाफ विरोध किया और भाग गए।
हिरा और मोती की जिंदगी अब बूढ़े किसान के घर में अच्छे से गुजर रही थी।
4. चित्रकथा लेखन
नीचे ‘दो बैलों की कथा’ की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य लिखिए।
कैसे लिखें-
- हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए।
- दृश्य का क्रम – बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आजादी।
(संकेत- चित्र 4: “अब हम आजाद हैं।”)

उत्तर –
चित्र 1 –
घटना – काँजीहाउस में कैद
संवाद – ( हीरा मोती की आपसी मूक बातचीत )
हीरा – “यहाँ को हमारी तरह बहुत से जानवर कैद हैं। ”
मोती – “हाँ ,और यहाँ खाने और पीने के लिए भी कुछ नहीं है। ”
हीरा – “इन सभी हालत बहुत खराब है। कुछ तो खड़े भी नहीं हो पा रहे हैं। ”
चित्र 2 –
घटना – भागने की योजना
संवाद – ( हीरा मोती की आपसी मूक बातचीत )
हीरा – ” इन सभी को यहाँ ऐसे ही मरने नहीं दे सकते। ”
मोती -” तो हमें क्या करना चाहिए?”
हीरा – “मैं दीवार तोड़ने की कोशिश करूँगा। ”
मोती – ” दीवार में दरार पड़ने लगी है। और जोर लगाओ। ”
चित्र 3 –
घटना – दीवार तोड़ना
संवाद – ( हीरा मोती की आपसी मूक बातचीत )
मोती – “जोर लगाकर तोड़ो। मिटटी गिर रही है। ”
हीरा – “मैं थक गया हूँ। ”
मोती – “मैं भी मदद करता हूँ। ”
हिरा – “हमारी मेहनत रंग लाई। दीवार टूट गई है। ”
चित्र 4 –
घटना – आजादी
संवाद – ( हीरा मोती की आपसी मूक बातचीत )
हीरा – “अब सभी आजाद हैं। ”
मोती – “चलो अब सभी घर चलते हैं। ”
भाषा से संवाद
भाषा गढ़ते मुहावरे
“लोग आ-आकर उनकी सूरत देखते और मन फीका करके चले जाते।”
‘मन फीका करना’ एक मुहावरा है जिसका अर्थ आपको वाक्य पढ़कर समझ में आ ही गया होगा। इसी से मिलते-जुलते मुहावरे हैं— जी फीका होना, जी खट्टा होना आदि। ‘दो बैलों की कथा कहानी में कई मुहावरे हैं जिनसे यह कहानी जीवंत हो गई है। ऐसी भाषा को ही मुहावरेदार भाषा कहा जाता है।
कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-
1. झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।”
2. “उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।”
3. “झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।”
4. “मोती दिल में ऐंठकर रह गया।”
5. “आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा । देखें कैसे ले जाता है।”
6. “जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।”
7. “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।”
8. “तो फिर वहीं मरो। बंदा तो नौ दो ग्यारह होता है।”
उत्तर –
1 – दाँतों पसीना आ गया – बहुत मेहनत करना – गर्मी में खेतों में काम करके दाँतों पसीना आ गया।
2 – दिल काँप उठे – डर जाना – रात में डरावनी कहानियाँ सुन कर हमारे दिल काँप उठे।
3 – जल उठी – क्रोध करना – अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों से अब वह जल उठी।
4 – दिल में ऐंठकर रह गया – गुस्सा रोकना – छोटा भाई की गलती पर मैं दिल में ऐंठकर रह गया।
5 – दूर ही से खबर लूँगा – सावधानी से देखना – डाकुओं के डर से हम उनपर दूर ही से खबर रखेंगे।
6 – गम खा जाते – चुप रहकर सहना – इज्जत के कारण सभ्य लोग गाली खा के भी गम खा जाते हैं।
7 – ईंट का जवाब पत्थर से देना – बदला लेना – भारत हर ईंट का जवाब पत्थर से देना जानता है।
8 – नौ दो ग्यारह – भाग जाना – रात का फायदा उठा कर चोर नौ दो ग्यारह हो गया।
3. शीर्षक
इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर –
भाग 1 – घर से बिछोह
भाग 2 – विद्रोह को शुरुआत
भाग 3 – मिलकर संघर्ष
भाग 4 – काँजीहाउस की कैद
भाग 5 – संघर्ष की विजय या घर वापसी
मेरी पहेली
अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-
| हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, मटर, रस्सी, रोटी |
हर काम में सहनशील हूँ
संयम दूसरों को सिखाता
अपने मित्र को सही राह दिखता
बोलो में कौन हूँ –
उत्तर – हीरा
अपने बैलों को मैं प्यार करता
दुःख उनका मुझसे न देखा जाता
उनके लिए में दढ़ियल से लड़ जाऊं
बूझों में कौन कहलाऊँ –
उत्तर – झूरी
अन्याय न में सह पता हूँ
विद्रोही कहलाता हूँ
अपने साथी का दुःख देख मैं
भावुक हो जाता हूँ –
उत्तर – मोती
मुझे सिर्फ काम से मतलब
बैलों की भावना न जानू
बिना सोचे समझे उन्हें मारुं
खाना-पीना भी छुडवाऊँ –
उत्तर – गया
एक दूसरे के पक्के साथी
कभी न छोड़ें साथ
विपत्ति आए चाहे जितनी
अपना घर ढूंढे हर बार –
उत्तर – बैल
हरी – हरी खेतों में उगती
बैलों की भूख मिटाती –
उत्तर – मटर
जब कभी बैल हाथ न आए
जब उनको सजा हो देनी
तब मैं मालिक का साथ हूँ देती –
उत्तर – रस्सी
बैलों को जब भूख सताए
छोटी लड़की मुझे ले आए
में बेशक भूख न मिटा पाऊं
पे मन को थोड़ा जरूर भर जाऊं –
उत्तर – रोटी
| भाषा संगम “कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है। ” नीचे ‘बैल’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है। बैल (हिंदी); वृषभ: (संस्कृत); बओलद, बल्द (पंजाबी); बैल (उर्दू); दोंद (कश्मीरी ); ढ़गो (सिंधी); बैल (मराठी); बळद (गुजराती); बैल (कोंकणी); गोरु (नेपाली); बलद (बांग्ला); षाँड़, बलध (असमिया); शन लाबा (मणिपुरी); बलद (ओड़िआ); एंददु (तेलुगु); एरिदु / काळमाहु (तमिल); काळ (मलयालम); एत्तु (कन्नड़)।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp |
उत्तर – ‘बैल’ शब्द को पहाड़ी हिमाचली भाषा में उच्चारण – बौलद
मातृभाषा हिंदी में – “कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है। ”
पहाड़ी हिमाचली में – “केई-केई ढीठ बौलद भी देखनेख मिला। “
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Class 9 Hindi दो बैलों की कथा– Extract Based Questions (गद्यांश पर आधारित प्रश्न)
निम्नलिखित गद्यांशों को ध्यान से पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिये-
1. जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिहीन समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को परले दरजे का बेवकूफ़ कहना चाहते हैं, तो उसे गधा कहते है। गधा सचमुच बेवकूफ़ है, या उसके सीधेपन, उसकी निरापद सहिष्णुता ने उसे यह पदवी दे दी है, इसका निश्चय नहीं किया जा सकता। गायें सींग मारती हैं, ब्याई हुई गाय तो अनायास ही सिंहनी का रूप धारण कर लेती है। कुत्ता भी बहुत गरीब जानवर है, लेकिन कभी-कभी उसे भी क्रोध आ ही जाता है; किंतु गधे को कभी क्रोध करते नहीं सुना, न देखा। जितना चाहो गरीब को मारो, चाहे जैसी खराब, सड़ी हुई घास सामने डाल दो, उसके चेहरे पर कभी असंतोष की छाया भी न दिखाई देगी। वैशाख में चाहे एकाध बार कुलेल कर लेता हो; पर हमने तो उसे कभी खुश होते नहीं देखा। उसके चेहरे पर एक विषाद स्थायी रूप से छाया रहता है। सुख-दुख, हानि-लाभ, किसी भी दशा में उसे बदलते नहीं देखा। ऋषियों-मुनियों के जितने गुण हैं वे सभी उसमें पराकाष्ठा को पहुँच गए हैं; पर आदमी उसे बेवकूफ़ कहता है। सद्गुणों का इतना अनादर कहीं नहीं देखा। कदाचित सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है। देखिए न, भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? क्यों अमरीका में उन्हें घुसने नहीं दिया जाता? बेचारे शराब नहीं पीते, चार पैसे कुसमय के लिए बचाकर रखते हैं, जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं फिर भी बदनाम हैं। कहा जाता है, वे जीवन के आदर्श को नीचा करते हैं। अगर वे भी ईट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सभ्य कहलाने लगते। जापान की मिसाल सामने है। एक ही विजय ने उसे संसार की सभ्य जातियों में गण्य बना दिया।
1. गधे को बुद्धिहीन क्यों समझा जाता है?
(क.) क्योंकि वह कभी क्रोधित नहीं होता
(ख.) क्योंकि वह हमेशा दुखी दिखता है
(ग.) क्योंकि वह सीधेपन और सहिष्णुता का प्रतीक है
(घ.) उपरोक्त सभी
उत्तर: (घ.) उपरोक्त सभी
2. गधे के चेहरे पर स्थायी रूप से क्या दिखाई देता है?
(क.) प्रसन्नता
(ख.) क्रोध
(ग.) विषाद
(घ.) आशंका
उत्तर: (ग.) विषाद
3. लेखक ने गधे की विशेषताओं की तुलना किनसे की है?
(क.) ऋषि-मुनियों के गुणों से
(ख.) बुद्धिमान जानवरों से
(ग.) सभ्य समाज के आदर्शों से
(घ.) क्रोधी व्यक्तियों से
उत्तर: (क.) ऋषि-मुनियों के गुणों से
4. लेखक के अनुसार, भारतवासियों की दुर्दशा का क्या कारण बताया गया है?
(क.) उनकी शराब न पीने की आदत
(ख.) उनका सीधापन और सहिष्णुता
(ग.) उनका मेहनती स्वभाव
(घ.) उनकी बचत करने की आदत
उत्तर: (ख.) उनका सीधापन और सहिष्णुता
5. जापान को सभ्य जातियों में क्यों गिना जाने लगा?
(क.) उसकी एक विजय के कारण
(ख.) उसके मेहनती स्वभाव के कारण
(ग.) उसके सीधेपन के कारण
(घ.) उसके सादगी भरे जीवन के कारण
उत्तर: (क.) उसकी एक विजय के कारण
2. झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी। बोली-कैसे नमकहराम बैल हैं कि एक दिन वहाँ काम न किया; भाग खड़े हुए।
झूरी अपने बैलों पर यह आक्षेप न सुन सका-नमकहराम क्यों हैं? चारा-दाना न दिया होगा, तो क्या करते?
स्त्री ने रोब के साथ कहा-बस, तुम्हीं तो बैलों को खिलाना जानते हो, और तो सभी पानी पिला-पिलाकर रखते हैं।
झूरी ने चिढ़ाया-चारा मिलता तो क्यों भागते ?
स्त्री चिढ़ी-भागे इसलिए कि वे लोग तुम-जैसे बुद्धुओं की तरह बैलों को सहलाते नहीं। खिलाते हैं, तो रगड़कर जोतते भी हैं। ये दोनों ठहरे कामचोर, भाग निकले। अब देखूँ, कहाँ से खली और चोकर मिलता है! सूखे भूसे के सिवा कुछ न दूँगी, खाएँ चाहें मरें।
वही हुआ। मजूर की कड़ी ताकीद कर दी गई कि बैलों को खाली सूखा भूसा दिया जाए।
बैलों ने नाँद में मुँह डाला, तो फीका-फीका। न कोई चिकनाहट, न कोई रस! क्या खाएँ? आशा-भरी आँखों से द्वार की ओर ताकने लगे।
झूरी ने मजूर से कहा-थोड़ी-सी खली क्यों नहीं डाल देता बे?
‘मालकिन मुझे मार ही डालेंगी। ‘
‘चुराकर डाल आ।’
‘न दादा, पीछे से तुम भी उन्हीं की-सी कहोगे।’
1. झूरी की स्त्री बैलों को देखकर क्यों जल उठी?
(क.) बैल कामचोर थे
(ख.) बैल काम छोड़कर भाग गए थे
(ग.) बैल खली-चोकर नहीं खा रहे थे
(घ.) बैल झूरी की बात मानते थे
उत्तर: (ख.) बैल काम छोड़कर भाग गए थे
2. झूरी ने बैलों के भागने का क्या कारण बताया?
(क.) बैल कामचोर थे
(ख.) बैलों को चारा-दाना नहीं दिया गया
(ग.) बैलों को रगड़कर जोता गया
(घ.) बैल झूरी के प्रति वफादार थे
उत्तर: (ख.) बैलों को चारा-दाना नहीं दिया गया
3. मजूर ने बैलों को खली क्यों नहीं दी?
(क.) खली खत्म हो गई थी
(ख.) झूरी की स्त्री ने कड़ी ताकीद कर रखी थी
(ग.) झूरी ने उसे मना किया था
(घ.) बैलों ने खली खाने से इनकार कर दिया
उत्तर: (ख.) झूरी की स्त्री ने कड़ी ताकीद कर रखी थी
4. झूरी की स्त्री ने बैलों को क्या खिलाने का आदेश दिया?
(क.) खली और चोकर
(ख.) केवल सूखा भूसा
(ग.) ताजा हरा चारा
(घ.) दाल और चावल
उत्तर: (ख.) केवल सूखा भूसा
5. बैलों ने सूखा भूसा देखकर क्या प्रतिक्रिया दी?
(क.) भूसे को तुरंत खा लिया
(ख.) द्वार की ओर आशा-भरी आँखों से देखा
(ग.) नाँद को पलट दिया
(घ.) भूसे को मुँह से बाहर फेंक दिया
उत्तर: (ख.) द्वार की ओर आशा-भरी आँखों से देखा
3. दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी। वह मारते-मारते थक गया; पर दोनों ने पाँव न उठाया। एक बार जब उस निर्दयी ने हीरा की नाक पर खूब डंडे जमाए, तो मोती का गुस्सा काबू के बाहर हो गया। हल लेकरें भागा। हल रस्सी, जुआ, जोत, सब टूट-टाट कर बराबर हो गया। गले में बड़ी-बड़ी रस्सियाँ न होतीं, तो दोनों पकड़ाई में न आते।
हीरा ने मूक-भाषा में कहा-भागना व्यर्थ है।
मोती ने उत्तर दिया–तुम्हारी तो इसने जान ही ले ली थी।
‘अबकी बड़ी मार पड़ेगी।’
‘पड़ने दो, बैल का जन्म लिया है, तो मार से कहाँ तक बचेंगे?’
‘गया दो, आदमियों के साथ दौड़ा आ रहा है। दोनों के हाथों में लाठियाँ हैं।’
मोती बोला-कहो तो दिखा दूँ कुछ मज़ा मैं भी। लाठी लेकर आ रहा है।
हीरा ने समझाया-नहीं भाई! खड़े हो जाओ।
‘मुझे मारेगा, तो मैं भी एक-दो को गिरा दूँगा!’
‘नहीं। हमारी जाति का यह धर्म नहीं है।’
प्रश्न 1: दूसरे दिन गया ने बैलों को जोतने की कोशिश में क्या कठिनाई झेली?
उत्तर: दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, लेकिन उन्होंने पाँव उठाने से इनकार कर दिया। गया ने उन्हें मारते-मारते थक गया, फिर भी बैलों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अंततः जब हीरा को चोट लगी, तो मोती ने हल लेकर भागते हुए सब कुछ तोड़-फोड़ कर दिया।
प्रश्न 2: मोती का गुस्सा किस बात पर काबू से बाहर हो गया?
उत्तर: मोती का गुस्सा तब काबू से बाहर हो गया जब गया ने निर्दयता से हीरा की नाक पर डंडे मारे। इससे क्रोधित होकर मोती हल लेकर भाग गया और हल, रस्सी, जुआ, और जोत सब कुछ टूट गया।
प्रश्न 3: हीरा ने मोती को मूक-भाषा में क्या कहा?
उत्तर: हीरा ने मूक-भाषा में मोती से कहा कि भागना व्यर्थ है क्योंकि भागने से उनकी स्थिति नहीं बदलेगी। उन्होंने मोती को समझाया कि बैलों का जन्म लेने के बाद मार से बचना संभव नहीं है।
प्रश्न 4: मोती ने गुस्से में क्या करने की बात कही?
उत्तर: मोती ने गुस्से में कहा कि अगर उसे मारा गया, तो वह भी एक-दो आदमियों को गिरा देगा। लेकिन हीरा ने उसे समझाया कि उनकी जाति का धर्म यह नहीं है और उन्हें शांत रहना चाहिए।
प्रश्न 5: गया और दूसरे आदमी बैलों को पकड़ने के लिए क्या लेकर आए?
उत्तर: गया और दूसरे आदमी बैलों को पकड़ने के लिए लाठियाँ लेकर आए। वे दौड़ते हुए बैलों के पास पहुँचे,
लेकिन बैलों के गले में बड़ी रस्सियाँ होने के कारण उन्हें पकड़ लिया गया।
4. आज दोनों के सामने फिर वही सूखा भूसा लाया गया। दोनों चुपचाप खड़े रहे। घर के लोग भोजन करने लगे। उस वक्त छोटी-सी लड़की दो रोटियाँ लिए निकली, और दोनों के मुँह में देकर चली गई। उस एक रोटी से इनकी भूख तो क्या शांत होती; पर दोनों के हृदय को मानो भोजन, मिल गया। यहाँ भी किसी सज्जन का वास है। लड़की भैरो की थी। उसकी माँ मर चुकी थी। सौतेली माँ उसे मारती रहती थी, इसलिए इन बैलों से उसे एक प्रकार की आत्मीयता हो गई थी।
दोनों दिन-भर जोते जाते, डंडे खाते, अड़ते। शाम को थान पर बाँध दिए जाते और रात को वही बालिका उन्हें दो रोटियाँ खिला जाती।
प्रेम के इस प्रसाद की यह बरकत थी कि दो-दो गाल सूखा भूसा खाकर भी दोनों दुर्बल न होते थे, मगर दोनों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था।
प्रश्न 1: बैलों के सामने क्या लाया गया, और उन्होंने कैसी प्रतिक्रिया दी?
उत्तर: बैलों के सामने फिर से सूखा भूसा लाया गया। वे चुपचाप खड़े रहे और उसे खाने से इनकार कर दिया। उनके हृदय में भूसे की बजाय किसी और चीज की आवश्यकता थी, जो बाद में एक छोटी-सी लड़की ने पूरी की।
प्रश्न 2: छोटी लड़की ने बैलों के लिए क्या किया, और इससे उन्हें क्या अनुभव हुआ?
उत्तर: छोटी लड़की ने बैलों को दो रोटियाँ लाकर दीं। इन रोटियों से उनकी भूख तो शांत नहीं हुई, लेकिन उनके हृदय को मानो प्रेम और आत्मीयता का भोजन मिल गया। यह अनुभव उनके लिए बहुत मूल्यवान था।
प्रश्न 3: छोटी लड़की की बैलों से आत्मीयता क्यों हो गई थी?
उत्तर: छोटी लड़की, भैरो की बेटी थी, जिसकी माँ मर चुकी थी। उसकी सौतेली माँ उसे मारती रहती थी। इस कारण से उसे बैलों से आत्मीयता हो गई, क्योंकि वे भी उसके समान कठोर व्यवहार झेल रहे थे।
प्रश्न 4: बैल दिन में और रात में क्या अनुभव करते थे?
उत्तर: बैल दिन में जोते जाते, डंडे खाते और अड़ते रहते थे। शाम को उन्हें थान पर बाँध दिया जाता। रात में वही छोटी लड़की उन्हें दो रोटियाँ खिला जाती, जिससे उनका मन प्रेम और आत्मीयता से भर जाता था।
प्रश्न 5: बैलों की शारीरिक स्थिति कैसी थी, और उनके मन में क्या भाव था?
उत्तर: बैल दो-दो गाल सूखा भूसा खाकर भी दुर्बल नहीं होते थे, जो प्रेम के प्रसाद की शक्ति थी। लेकिन उनके मन और शरीर के हर हिस्से में विद्रोह का भाव भरा हुआ था, जो उनके संघर्षपूर्ण जीवन का संकेत था।
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Class 9 Hindi Ganga Lesson 1 दो बैलों की कथा Multiple Choice Questions (बहुविकल्पीय प्रश्न)
1. गधे को बेवकूफ क्यों माना जाता है?
क. उसके आलस्य के कारण
ख. उसके क्रोध के कारण
ग. उसकी सहिष्णुता और सीधेपन के कारण
घ. उसके धीमे काम के कारण
उत्तर: ग. उसकी सहिष्णुता और सीधेपन के कारण
2. झूरी के बैलों का नाम क्या था?
क. राम और श्याम
ख. हीरा और मोती
ग. राजा और रानी
घ. लाला और गोपी
उत्तर: ख. हीरा और मोती
3. झूरी की पत्नी ने बैलों के लिए क्या कहा?
क. वे मेहनती हैं
ख. वे वफादार हैं
ग. वे बुद्धिमान हैं
घ. वे कामचोर हैं
उत्तर: घ. वे कामचोर हैं
4. गाँव के बच्चों ने बैलों के लिए क्या प्रस्ताव रखा?
क. उन्हें मार दिया जाए
ख. उन्हें अभिनंदन-पत्र दिया जाए
ग. उन्हें नई जगह भेजा जाए
घ. उन्हें अधिक काम करवाया जाए
उत्तर: ख. उन्हें अभिनंदन-पत्र दिया जाए
5. झूरी ने बैलों की वापसी पर क्या किया?
क. उन्हें गले लगाया
ख. उन्हें दंड दिया
ग. उन्हें बेच दिया
घ. उन्हें मार दिया
उत्तर: क. उन्हें गले लगाया
6. बैलों ने भागने के बाद क्या महसूस किया?
क. भूख और थकावट
ख. डर और चिंता
ग. आजादी और मस्ती
घ. दुख और निराशा
उत्तर: ग. आजादी और मस्ती
7. बालिका ने बैलों को क्यों खोला?
क. वह उन्हें प्यार करती थी।
ख. उसने घरवालों की सलाह सुनी थी।
ग. वह बैलों को नाथ डलवाने से बचाना चाहती थी।
घ. उपरोक्त सभी
उत्तर: घ. उपरोक्त सभी
8. गधों ने क्यों भागने से मना कर दिया?
क. उन्हें डर था कि फिर से पकड़ लिया जाएगा।
ख. वे बहुत कमजोर थे।
ग. उन्हें हीरा पर भरोसा नहीं था।
घ. उन्हें बाहर जाने का रास्ता नहीं मिला।
उत्तर: क. उन्हें डर था कि फिर से पकड़ लिया जाएगा।
9. मोती ने हीरा को क्या कहा जब वह रस्सी नहीं तोड़ सका?
क. अब मुझे छोड़कर भाग जाओ।
ख. मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ सकता।
ग. दीवार तोड़ने की कोशिश बंद करो।
घ. हमें यहाँ से भागने की कोशिश करनी चाहिए।
उत्तर: ख. मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ सकता।
10. बाड़े में कौन-कौन से जानवर मौजूद थे?
क. केवल भैंसें और गधे
ख. केवल घोड़े और बकरियाँ
ग. भैंसें, बकरियाँ, घोड़े, और गधे
घ. केवल बैल और घोड़े
उत्तर: ग. भैंसें, बकरियाँ, घोड़े, और गधे
11. बैलों के अनुसार, मृत्यु के बाद उनके कौन-कौन से अंग उपयोगी होंगे?
क. केवल मांस
ख. केवल खाल
ग. माँस, खाल, सींग, हड्डी
घ. कोई उपयोग नहीं
उत्तर: ग. माँस, खाल, सींग, हड्डी
12. दढ़ियल आदमी बैलों को धीमे चलने पर क्या करता था?
क. डांटता था
ख. डंडा जमा देता था
ग. उनकी पीठ थपथपाता था
घ. उन्हें पानी पिलाता था
उत्तर: ख. डंडा जमा देता था
13. दोनों मित्र कितने दिनों तक बाड़े में बँधे पड़े रहे?
क. तीन दिन
ख. एक सप्ताह
ग. दस दिन
घ. पाँच दिन
उत्तर: ख. एक सप्ताह
14. जब बैल नीलाम हो रहे थे, तो कितने लोग वहाँ जमा हुए?
क. बीस-तीस
ख. चालीस-पचास
ग. पचास-साठ
घ. सत्तर-अस्सी
उत्तर: ग. पचास-साठ
15. रास्ते में दोनों मित्रों ने किसकी ओर देखा?
क. रेवड़ में चरते गाय-बैलों की ओर
ख. हरे-भरे खेतों की ओर
ग. बाड़े की ओर
घ. दढ़ियल आदमी की ओर
उत्तर: क. रेवड़ में चरते गाय-बैलों की ओर
16. चौकीदार ने हीरा के साथ क्या किया?
क. उसे बाड़े से निकाल दिया।
ख. उसे खाना दिया।
ग. उसे रस्सी से बाँध दिया।
घ. उसे और मोती को दंडित किया।
उत्तर: ग. उसे रस्सी से बाँध दिया।
17. साँड की सूरत को देखकर मित्रों ने कैसा महसूस किया?
क. डर और चिंता
ख. खुशी और उत्साह
ग. उत्सुकता और जिज्ञासा
घ. सहानुभूति और करुणा
उत्तर: क. डर और चिंता
18. बैलों ने समझा कि मालिक ने उन्हें क्या कर दिया?
क. उन्हें घर पर छोड़ दिया
ख. उन्हें बेच दिया
ग. उन्हें ससुराल भेज दिया
घ. उन्हें कहीं घुमा दिया
उत्तर: ख. उन्हें बेच दिया
19. बैलों का मालिक के प्रति क्या भाव था?
क. सेवा और समर्पण
ख. क्रोध और असंतोष
ग. भय और चिंता
घ. लालच और स्वार्थ
उत्तर: क. सेवा और समर्पण
20. मजूर ने खली डालने से क्यों मना किया?
क. उसे काम का डर था
ख. मालकिन उसे मार देंगी
ग. उसे बैलों से डर लगता था
घ. झूरी उसे डाँट देंगे
उत्तर: ख. मालकिन उसे मार देंगी
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दो बैलों की कथा Extra Question Answers (अतिरिक्त प्रश्न उत्तर)
1. भारतवासियों की अफ्रीका में दुर्दशा का कारण क्या बताया गया है?
उत्तर: भारतवासियों की अफ्रीका में दुर्दशा का कारण यह है कि वे शराब नहीं पीते, मेहनत से काम करते हैं और दूसरों से लड़ाई नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं फिर भी बदनाम हैं। फिर भी उन्हें समाज में सम्मान नहीं मिलता। उनके सीधापन को सही नहीं माना जाता।
2. हीरा और मोती बैलों के बीच कौन सा गहरा संबंध था?
उत्तर: हीरा और मोती बैल भाई जैसे थे। दोनों में गहरी मित्रता थी और वे एक-दूसरे के मन की बात समझ जाते थे। वे कभी एक-दूसरे से अलग नहीं होते थे और हमेशा एक साथ काम करते थे। वे हमेशा मूक-भाषा में संवाद करते थे। वे अपनी गर्दन पर ज्यादा से ज्यादा भार उठाने की कोशिश करते थे जिससे उनके मित्र पर ज्यादा बोझ न पड़े।
3. बालकों ने बैलों का स्वागत कैसे किया?
उत्तर: बालकों ने निश्चय किया, दोनों पशु-वीरों को अभिनंदन-पत्र देने का निर्णय लिया। कोई अपने घर से रोटियाँ लाया, कोई गुड़, कोई चोकर, कोई भूसी। उन्होंने बैलों के साहस और उनकी यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे बैल किसी के पास न होंगे।
4. झूरी की स्त्री ने बैलों के बारे में क्या कहा?
उत्तर: झूरी की स्त्री ने बैलों को नमकहराम कहा क्योंकि वे भागकर वापस आ गए थे और गया के यहाँ उन दोनों ने काम नहीं किया था। उसने कहा कि वे कामचोर हैं और अब उनके लिए केवल सूखा भूसा मिलेगा।
5. मोती और हीरा के बीच मूक-भाषा का क्या अर्थ था?
उत्तर: मोती और हीरा एक-दूसरे के साथ मूक-भाषा में संवाद करते थे। यह संवाद उनकी गहरी मित्रता और समझ को दर्शाता था, जिसमें वे बिना बोले एक-दूसरे की भावनाओं को समझते थे।
6. क्यों बैल भागते समय खुशी महसूस कर रहे थे?
उत्तर: बैल भागते समय खुशी महसूस कर रहे थे क्योंकि उन्होंने अपनी स्वतंत्रता का अनुभव किया था। मटर के खेत में खाना खाने के बाद, वे मस्त होकर उछलने-कूदने लगे और अपने नए अनुभव का आनंद लेने लगे।
7. बैलों की कहानी समाज की कौन-सी समस्या को उजागर करती है?
उत्तर: बैलों की कहानी अन्याय, शोषण और क्रूरता को उजागर करती है। यह उन संवेदनहीन व्यवहारों की ओर इशारा करती है, जो न केवल जानवरों बल्कि कमजोर इंसानों के साथ भी किए जाते हैं।
8. ‘प्रेम के इस प्रसाद’ का क्या अर्थ है, और इसका बैलों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: ‘प्रेम के इस प्रसाद’ का अर्थ है बालिका का स्नेहपूर्वक बैलों को रोटियाँ देना। इससे बैलों को शारीरिक तृप्ति भले न मिली हो, लेकिन उनके हृदय को प्रेम और सहानुभूति का अनुभव हुआ।
9. बैलों की आँखों में विद्रोह क्यों भरा हुआ था?
उत्तर: बैलों को दिनभर जोता जाता था, डंडे मारे जाते थे और सूखा भूसा दिया जाता था। इस अन्यायपूर्ण व्यवहार के कारण उनकी आँखों में विद्रोह की भावना थी।
10. बैलों ने भूख से मजबूर होकर क्या किया?
उत्तर: भूख से मजबूर होकर, बैलों ने दीवार की नमकीन मिट्टी चाटनी शुरू की, लेकिन इससे उनकी भूख शांत नहीं हो सकी। वे कांजीहौस में कैद थे, चारा खाने के लिए बाहर जा नहीं सकते थे।