काल किसे कहते हैं? काल की परिभाषा, भेद और उदाहरण



Tenses in Hindi  – Kaal definition, Types of Tenses, Tenses examples in Hindi  

काल की परिभाषा, भेद और उदाहरण

Tenses in Hindi – इस लेख में हम काल, काल के प्रकार और उनके भेदों को उदहारण सहित जानेंगे। काल किसी भी भाषा के सभी व्याकरण में सबसे महत्वपूर्ण है। काल समय के साथ क्रिया पर पूरी तरह से निर्भर है। हिंदी व्याकरण में वाक्य को जोङने के लिए सहायक क्रिया के साथ संशोधित किया जाता है। सही जानकारी देने या प्राप्त करने में काल का अत्यधिक महत्त्व रहता है।


अतः

  1. काल किसे कहते हैं?
  2. काल कितने प्रकार के हैं?
  3. उनके कितने भेद हैं?
  4. इन प्रश्नों के उत्तर जानना अति आवश्यक हो जाता है। यहाँ पर काल के बारे में सम्पूर्ण जानकारी बहुत ही सरल भाषा में दी गई है –

 

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काल की परिभाषा – Tenses Definition in Hindi

काल का अर्थ होता है – समय। क्रिया के जिस रूप से कार्य के होने के समय का पता चले उसे काल कहते हैं।
दूसरे शब्दों में जिस रूप से क्रिया के होने के समय का बोध हो, उसे काल कहते हैं।
जैसे –
पिछले साल मेरे जन्मदिन पर मेरी दीदी ने मुझे स्केट्स दिए थे।
आज मेरे जन्मदिन पर दीदी मेरे लिए घड़ी खरीद रही हैं।
अगले साल मेरे जन्मदिन पर मेरे पापा कहीं बाहर ले जाएँगे।
इस प्रकार से हम देखते हैं कि उपर्युक्त वाक्यों में क्रियाएँ अलग-अलग समय में हो रही हैं। इस प्रकार से ‘क्रिया के समय दर्शाने को’ ही ‘काल’कहते हैं।

उदाहरण के तौर पर वाक्य “मैं खाना खा चुका हूं”को लिया जा सकता है। इस वाक्य में “मैं”कर्ता है, “खाना” क्रिया है एवं “चुका हूँ”द्वारा यह दर्शाया गया है कि यह क्रिया भूतकाल में क्रियान्वित की जा चुकी है। काल क्रिया के किए जाने के समय को दर्शाता है।
जैसे –
मैं खाना खा चुका हूँ।
मैं खाना खा रहा हूँ।
मैं खाना खाऊँगा।
इन तीनों ही वाक्यों में कर्ता एवं क्रिया एक ही है, लेकिन किए जाने का समय अलग-अलग है। वह समय चुका, रहा एवं खाऊँगा के कारण पता चल रहा है। जिस प्रकार यहाँ पर क्रिया को तीन कालों में किया गया है, उसी प्रकार काल के तीन भेद होते हैं।

 

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काल के भेद – Types of Tenses in Hindi

 

tenses

 

भूतकाल

भूतकाल दो शब्दों के मेल से बना है – भूत + काल। भूत का अर्थ होता है – बीत गया और काल को कहा जाता है – समय अर्थात् जो समय बीत गया हो।
क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय का बोध हो या वाक्य में प्रयुक्त क्रिया के जिस रूप से बीते समय में (भूत) क्रिया का होना पाया जाता है। उसे हम भूतकाल कहते है।
दूसरे शब्दों में जिस क्रिया से कार्य के समाप्त होने का पता चले उसे भूतकाल कहते हैं। इसकी पहचान वाक्यों के अंत में था, थे, थी आदि से होती है।

उदाहरण के लिए –
(i) रमेश पटना गया था।
(ii) पहले मैं लखनऊ में पढ़ता था।
(iii) राम ने रावण का वध किया था।

 

भूतकाल के प्रकार

(i) सामान्य भूतकाल
(ii) आसन्न भूतकाल
(iii) पूर्ण भूतकाल
(iv) अपूर्ण भूतकाल
(v) संदिग्ध भूतकाल
(vi) हेतुहेतुमद् भूतकाल

 

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(i) सामान्य भूतकाल

जब क्रिया के होने की समाप्ति सामान्य रूप से बीते हुए समय में होती है, किन्तु इससे यह बोध नहीं होता कि क्रिया समाप्त हुए थोड़ी देर हुई है या अधिक वहाँ सामान्य भूत होता है। इस दौरान हम यह निश्चित नहीं कर सकते कि भूतकाल में यह कार्य किस समय किया गया है और जिन वाक्यों के अंत में आ, ई, ए, था, थी, थे आते हैं, वे सामान्य भूतकाल होता है।
जैसे –
नेता जी ने भाषण दिया।
अकबर ने पुस्तक पढ़ी।
कुसुम घर गयी।

(ii) आसन्न भूतकाल
आसन्न का अर्थ होता है -निकट। जिस क्रिया के अभी-अभी या निकट के भूतकाल में पूरा होने का पता चले उसे आसन्न भूतकाल कहते हैं। अथार्त क्रिया के जिस रूप से हमें यह पता चले की क्रिया अभी कुछ समय पहले ही पूर्ण हुई है उसे आसन्न भूतकाल कहते हैं।
जैसे-
मैने आम खाया है।
मैं अभी सोकर उठी हूँ।
कमल गया है।

(iii) पूर्ण भूतकाल
क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता है की कार्य निश्चित किये गये समय से पहले ही पूरा हो चूका था, उसे पूर्ण भूतकाल कहते हैं।
दूसरे शब्दों में कार्य के पूर्ण होने के स्पष्ट बोध को पूर्ण भूतकाल कहते हैं। जिन वाक्यों के अंत में था, थी, थे, चूका था, चुकी थी, चुके थे आदि आते हैं, वो पूर्ण भूतकाल होता है।
जैसे –
वरुण ने कहानी लिखी थी।
राम ने खाना बनाया था।
हम घूमने गए थे।

(iv) अपूर्ण भूतकाल
क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता है कि कार्य भूतकाल में पूरा नहीं हुआ था अपितु नियमित रूप से जारी रहा, उसे अपूर्ण भूतकाल कहते हैं।
अथार्त क्रिया के जिस रूप से कार्य के भूतकाल में शुरू होने का पता चले लेकिन खत्म होने का पता न चले, उसे अपूर्ण भूतकाल कहते हैं। जिन वाक्यों के अंत में रहा था, रही थी, रहे थे आदि आते हैं, वे अपूर्ण भूतकाल होते हैं।
जैसे –
मोहन मैदान में घूम रहा था।
वह हॉकी खेल रहा था।
सुनील पढ़ रहा था।

(v) संदिग्ध भूतकाल
भूतकाल की जिस क्रिया से कार्य होने में अनिश्चितता अथवा संदेह प्रकट हो, उसे संदिग्ध भूतकाल कहते है। इसमें यह सन्देह बना रहता है कि भूतकाल में कार्य पूरा हुआ या नही। क्रिया के जिस रूप से अतीत में हुए या करे हुए कार्य पर संदेह प्रकट किया जाये, उसे संदिग्ध भूतकाल कहते हैं। जिन वाक्यों के अंत में गा, गे, गी आदि आते हैं, वे संदिग्ध भूतकाल होते हैं।
जैसे –
तू गाया होगा।
बस छूट गई होगी।
दुकानें बंद हो चुकी होगी।

(vi) हेतुहेतुमद् भूतकाल
‘हेतु’ का अर्थ है – कारण। जहाँ भूतकाल में किसी कार्य के न हो सकने का वर्णन कारण के साथ दो वाक्यों में दिया गया हो, वहाँ हेतुहेतुमद् भूतकाल होता है। इससे यह पता चलता है कि क्रिया भूतकाल में होनेवाली थी, पर किसी कारण न हो सका।क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि कार्य हो सकता था लेकिन दूसरे कार्य की वजह से हुआ नहीं, उसे हेतुहेतुमद् भूतकाल कहते हैं।
जैसे –
यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।
यदि मैं आता तो वह चला जाता।
यदि श्याम ने पत्र लिखा होता तो वह अवश्य आता।

 

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वर्तमान काल

क्रिया के जिस रूप से यह पता चले की काम अभी हो रहा है, उसे वर्तमान काल कहते हैं। अथार्त क्रिया के जिस रूप से समय का पता चले और क्रिया के होने का वर्तमान समय में पता चले, उसे वर्तमान काल कहते हैं। इसका अर्थ होता है कि दर्शाई गई क्रिया उसी वक़्त में ही रही है। जिन वाक्यों के अंत में ता, ती, ते, है, हैं आते हैं, वो वर्तमान काल कहलाता है। क्रियाओं के होने की निरन्तरता को वर्तमान काल कहते हैं।

जैसे –
राम अभी-अभी आया है।
वर्षा हो रही है।
मोहन पढ़ रहा है।
पुजारी पूजा कर रहा है।

 

वर्तमान काल के भेद

(i) सामान्य वर्तमान काल
(ii) अपूर्ण वर्तमान काल
(iii) पूर्ण वर्तमान काल
(iv) संदिग्ध वर्तमान काल
(v) तात्कालिक वर्तमान काल
(vi) संभाव्य वर्तमान काल

(i) सामान्य वर्तमान काल
क्रिया के जिस रूप से कार्य की पूर्णता और अपूर्णता का पता न चले उसे सामान्य वर्तमान काल कहते हैं।
दूसरे शब्दों में जिस क्रिया से क्रिया के सामान्य रूप का वर्तमान में होने का पता चलता है, उसे सामान्य वर्तमान काल कहते हैं। जिन वाक्यों के अंत में ता है, ती है, ते है, ता हूँ, ती हूँ आदि आते हैं उसे सामान्य वर्तमान काल कहते है।
जैसे –
गरिमा कविता लिखती है।
चिडि़या आसमान में उड़ती है।

(ii) अपूर्ण वर्तमान काल
अपूर्ण का अर्थ होता है – अधुरा। क्रिया के जिस रूप से कार्य के लगातार होने का पता चलता है, उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते है। जिन वाक्यों के अंत में रहा है, रहे है, रही है, रहा हूँ आदि आते है, उसे अपूर्ण वर्तमान काल कहते हैं।
जैसे –
श्याम गेंद खेल रहा है।
वह घर जा रहा है।
अनीता गीत गा रही है।

(iii) पूर्ण वर्तमान काल
क्रिया के जिस रूप से कार्य के अभी पूरे होने का पता चलता है। उसे पूर्ण वर्तमान काल कहते है। इसमें हमें कार्य की पूर्ण सिद्धि का पता चलता है।
जैसे –
मैंने फल खाए हैं।
उसने गेंद खेली है।
वह आया है।

(iv) संदिग्ध वर्तमान काल
क्रिया के जिस रूप से वर्तमान काल क्रिया के होने या करने पर शक हो, उसे संदिग्ध वर्तमान काल कहते है। अथार्त जिन वाक्यों के अंत में ता होगा, ती होगी, ते होंगे आदि आते हैं, उसे संदिग्ध वर्तमान काल कहते हैं।
जैसे-
माँ खाना बना रही होगी।
वाक्य में ‘रही होगी’ से खाना बनाने के कार्य को निश्चित रूप से नहीं कहा गया, उसमें संदेह की स्थिति बनी हुई है, अतः यहाँ संदिग्ध वर्तमान है।

(v) तात्कालिक वर्तमान काल
क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता हो कि कार्य वर्तमान में हो रहा है, उसे तात्कालिक वर्तमान काल कहते हैं। इसमें बोलते समय क्रिया का व्यापार चलता रहता है। इसमें इसकी पूर्णता का पता नहीं चलता है।
जैसे –
मैं पढ़ रहा हूँ।
वह जा रहा है।
हम कपड़े पहन रहे हैं।

(vi) संभाव्य वर्तमान काल
संभाव्य का अर्थ होता है संभावित या जिसके होने की संभावना हो। इससे वर्तमान काल में काम के पूरे होने की संभावना होती है उसे संभाव्य वर्तमान काल कहते हैं।
जैसे –
वह आया हो।
वह लौटा हो।
वह चलता हो।

 

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भविष्य काल

भविष्य में होनेवाली क्रिया को भविष्यतकाल की क्रिया कहते है। क्रिया के जिस रूप से क्रिया के आने वाले समय में पूरा होने का पता चले उसे भविष्य काल कहते हैं। इससे आगे आने वाले समय का पता चलता है। जिन वाक्यों के अंत में गा, गे, गी आदि आते हैं वे भविष्य
दूसरे शब्दो में क्रिया के जिस रूप से काम का आने वाले समय में करना या होना प्रकट हो, उसे भविष्यतकाल कहते है।
जैसे –
मैं कल विद्यालय जाउँगा।
खाना कुछ देर में बन जायेगा।
राजू देर तक पढ़ेगा।

 

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भविष्य काल के भेद

(i) सामान्य भविष्य काल
(ii) संभाव्य भविष्य काल
(iii) हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल

(i) सामान्य भविष्य काल
क्रिया के जिस रूप से क्रिया के सामान्य रूप का भविष्य में होने का पता चले उसे सामान्य भविष्य काल कहते हैं। अथार्त जिन शब्दों के अंत में ए गा, ए गी, ए गे आदि आते हैं उन्हें सामान्य भविष्य काल कहते हैं। इससे क्रिया के भविष्य में होने का पता चलता है।
जैसे –
वह खाना खाएगी।
बच्चे खेलने जायेंगे।
वह घर जायेगा।
दीपक अख़बार बेचेगा।

(ii) संभाव्य भविष्य काल
क्रिया के जिस रूप से आगे कार्य होने या करने की संभावना का पता चले, उसे संभाव्य भविष्य काल कहते हैं। इसमें क्रियाओं का निश्चित पता नहीं चलता। इसमें भविष्य में किसी कार्य के होने की संभवना होती है।
जैसे-
शायद चोर पकड़ा जाए।
परीक्षा में शायद मुझे अच्छे अंक प्राप्त हों।
हो सकता है कि मैं कल वहाँ जाऊँ।
उपर्युक्त वाक्यों में क्रियाओं के भविष्य में होने की संभावना है। ये पूर्ण रूप से होंगी, ऐसा निश्चित नहीं होता। अतः ये सम्भाव्य भविष्यत काल की क्रियाएँ हैं।

(iii) हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल
क्रिया के जिस रूप से एक कार्य का पूरा होना दूसरी आने वाले समय की क्रिया पर निर्भर हो, उसे हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्य काल कहते है। इसमें एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर होता है।
जैसे –
यदि छुट्टियाँ होंगी तो मैं आगरा जाउँगा।
अगर तुम मेहनत करोगे तो फल अवश्य मिलेगा।
वह आये तो मैं जाऊँ।
वह कमाए तो मैं खाऊँ।

 

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